Showing posts with label क्रिकेट. Show all posts
Showing posts with label क्रिकेट. Show all posts

Tuesday, September 19, 2017

क्रिकेट का विश्वकप


आज होली है, हर बार से कुछ अलग रही आज की होली ! रंग को छुआ भी नहीं, पर अंतर रंग गया हो तो बाहर के रंग और क्या करेंगे. दोपहर को स्वयं को सोते हुए देखा, बिलकुल स्पष्ट, भीतर कोई जाग रहा था और देह शांत थी, श्वास भी गहरी हो गयी थी. बाद में कोई स्वप्न चलने लगा. जब स्वप्न नहीं रहेंगे तभी पूर्ण मुक्ति का अनुभव होगा. इस समय टीवी पर क्रिकेट विश्वकप का मैच चल रहा है. भारत बहुत विषम परिस्थिति में है. पांच विकेट गिर गये हैं. शाम को नाश्ते में लिट्टी चोखा बनाया, होली का विशेष भोजन. बड़ी भाभी अब पहले से बेहतर हैं, भाई शांति से उनकी देखभाल कर रहे हैं.

आज सुबह उठी तो एक स्वप्न की स्मृति बनी हुई थी. वे नन्हे के घर गये हुए हैं. उसे अपने मित्रों के साथ एक विवाह में जाना है. मित्र पहले ही आ गये हैं पर वह स्वयं अभी आया नहीं है. आता है तो कहता है वह नहीं जायेगा, बिलकुल तटस्थ लग रहा है. एक दिन स्वप्न में गुरूजी को कितना स्पष्ट देखा था. एक में तो वह दूर से निकल जाते हैं तेज-तेज चलते हुए, दूसरे में वे उनके निकट हैं, उनका स्नेह बरस रहा है. अज दोपहर को भी बहुत जीवंत स्वप्न थे. एक अनोखी दुनिया उसके भीतर खुल गयी है, जागृत से भी अधिक जीवंत दुनिया. विपासना केंद्र में एक दिन ध्यान के वक्त ऐसा अनुभव हुआ जैसे हाथ में काला पेन आ गया है निब वाला और पलक झपकते ही सारा बांया हाथ काला हो गया, आश्चर्य करे इससे पूर्व ही सामान्य हो गया. एक क्षण में कोई पूर्व कृत्य जैसे सम्मुख आया हो. एक बार तो किसी के खांसने की आवाज ऐसे लगी जैसे कोई वृक्ष गिर गया हो. एक दिन तो स्वयं को देह से पृथक महसूस किया. आज सुबह चार बजे एक बाद उठी. प्रतिदिन की भांति रही दिनचर्या. इतवार था और महिला दिवस भी, सो इडली का नाश्ता जून ने बनाया. शाम को एक विवाह उत्सव में जाना है. कल लेडीज क्लब की मीटिंग है और डेंटिस्ट के पास भी जाना है. नीचे के दातों की स्केलिंग कर दी है, कल शेष करेगा.

आज घर में गुरू पूजा है. तैयारी लगभग हो चुकी है. बड़ी भाभी के लिए प्रार्थना करने का मन होता है. ईश्वर उन्हें शक्ति दे. आज प्रातः भ्रमण से लौटते समय भीतर का वासी कितना मुखर हो गया था. कितने स्पष्ट शब्दों में अपने होने का अहसास दिला रहा था. अब लग रहा है कितने दूर की बात है. सुबह वाकई सतयुग होता है, मन कैसा खिला-खिला सा. दोपहर तक उसी भाव में डूबा रहा मन. तितली पर एक कविता भी लिखी. बगीचे में सुंदर फ्लौक्स खिले हैं, देर से खिले पर बहुत सुंदर हैं. फूलों की बहार है इस समय उपवन में. नन्हे से बात की, वह अपने काम से खुश है, काम ज्यादा है पर उसे कोई शिकायत नहीं है. यू ट्यूब पर श्री श्री के विचार सुने. परमात्मा की उपस्थिति को हर पल अपने होने से अभिव्यक्त करने वाले सद्गुरू कितना बड़ा योगदान समाज, देश और दुनिया को दे रहे हैं.     


Tuesday, November 1, 2016

नींबू का पेड़


कल कुछ नहीं लिखा और आज इस वक्त जब लोग भारत-पाकिस्तान क्रिकेट सेमी फाइनल मैच देख रहे हैं, वह अपने साथ कुछ पल बिताने आई है. कल एक उपदेशात्मक कविता लिखी थी. किन्तु सच्चाई यह है कि कोई भी सत्य को सीधे-सीधे स्वीकारना नहीं चाहता या फिर वह जो जानता ही है उसे सुनकर स्वयं को कटघरे में खड़े हुआ नहीं देखना चाहता, कोई नया भाव, नई बात और वह भी मधुर शब्दों में कही जाये जो उसकी नींद को न तोड़े, स्वप्न को चलने दे और बल्कि उसे और भी गहरा कर दे. वे सभी तो सो रहे हैं और जागरण के कुछेक क्षण जो जीवन में आते हैं, उन्हें पसंद नहीं आते. वे उन्हें नकार कर अपनी नींद में मस्त रहना चाहते हैं. वे बेखबर रहते हैं अपने ही भीतर बहते उस आनन्द के निर्झर से, लेकिन उसकी खबर कोई अन्य किसी को नहीं दे सकता, खुद ही भीतर से ललक जगे तभी कोई उस अज्ञात की राह का पथिक बनता है, तो न तो उसे किसी को जगाने की जरूरत है न उन्हें झकझोरने की, उसे तो उस आनन्द के गीत गाने हैं जो भीतर पाया है, हो सकता है कोई उस आनन्द की झलक अपने भीतर पाले और अनजाने ही चल पड़े उस राह पर. आज लेडीज क्लब की मीटिंग है. उसे हिंदी प्रतियोगिता के लिए एक कविता और एक कहानी भी देनी है.

कल रात मैच खत्म हुआ तब सोये, आज सुबह देर से उठे. भारत क्रिकेट मैच जीत गया, पिताजी ने ख़ुशी में हलवा बनाने की फरमाइश की. पूरे देश में जश्न का माहौल है. लोग सारी कड़वाहटें भूल गये हैं. क्रिकेट ने सारे देश को एकता के सूत्र में बाँध दिया है. सभी राज्यों के खिलाडी भारत के लिए खेलते हैं. आज जग्गी वासुदेव जी का सम्बोधन सुना बाबारामदेव जी के कार्यक्रम में. कोयम्बतूर में ईशा योग सेंटर है, वहाँ बाबाजी भी गये थे. सही कहा है किसी ने, सारे संत एक मत ! कल क्लब गयी पर लाइब्रेरी में बैठकर एक तिब्बती पुस्तक पढ़ती रही. योग ग्रन्थों में जिस चिदाकाश का वर्णन है, वही बौद्ध ग्रन्थों में है, दोनों का स्रोत तो उपनिषद ही हैं, अद्भुत है सनातन धर्म ! परमात्मा की कृपा अद्भुत है, वह अद्भुत है और उसके ज्ञान को हजारों वर्षों से अक्षुण रखते आये ऋषि भी अद्भुत हैं. एक आत्मा या परमात्मा ही सभी रूपों में प्रकट हो रहा है. वह आधार है, वे उसके हैं, वह उनका है. जीवन कितनी क्षुद्र बातों से भर जाता है, जब वे साधना के पथ पर नहीं होते. साधना उन्हें अपने स्वरूप का ज्ञान कराती है, उनके जीवन को पूर्णता देती है.

आज सुबह ही जून ने कहा, शाम को उन्हें क्लब जाना है आने में देर होगी, उसने मना किया, कहा, यदि अति आवश्यक न हो तो नहीं जाना चाहिए, दोपहर को भी किसी बात पर मतभेद हुआ शायद बंगलूरू में घर लेने की बात पर. इतना ही नहीं जब जून ने कहा नींबू के पेड़ पर फल नहीं लगते, उसकी शाखाएँ कटवा देते हैं, तो उसे हरे-भरे पेड़ को कटवाने की बात भी पसंद नहीं आयी, उसकी भाषा रक्षात्मक हो गयी और जून कुछ अजीब मूड में घर से बाहर गये. उसे भी तब से अच्छा नहीं लग रहा है. वह प्रसन्न रहे उसकी यही दिली इच्छा है, क्योंकि उसके खुश रहने पर वह भी खुश रह सकती है वरना तो..शाम को वह क्लब जायेंगे ही..नाश्ते के समय तक वह उसकी सब बातों को भुला देंगे..है न ! उसने मन ही मन पूछा. कल डीपीएस का परीक्षा परिणाम आ गया. उसकी छात्राओं का भी आ गया होगा, जिनकी मातृ भाषा हिंदी नहीं है, लेकिन दोनों में से किसी ने फोन नहीं किया, उसने स्वयं ही एक से पूछा. आज ब्लॉग पर कल वाली कविता पोस्ट की, जिसमें नृत्य का वर्णन है, एक कहानी लिखी.


Wednesday, July 9, 2014

मेथी की बड़ियाँ


भारत ने पाकिस्तान को पांच विकेट से हरा दिया, क्रिकेट का खेल उनके दिलोदिमाग पर किस कदर छा गया है कि डायरी खोलते ही पहला वाक्य यही मन में आया. कल शाम को ‘मैडिटेशन’ पुस्तक का एक अध्याय पढ़ते-पढ़ते मन एकाग्र हो गया और कुछ मिनटों के ध्यान के कारण सारी शाम स्वयं को फूल सा हल्का महसूस किया. उसे लगा, पूर्वजों ने जीवन के उद्देश्य, जीने के तरीके और आत्मिक उन्नति के द्वार योग के रूप में खोल दिए हैं, अब यह उन पर निर्भर करता है कि पंक में सने रहें, सांसारिक मोह-माया और उलझनों में ऊर्जा को व्यर्थ नष्ट कर दें अथवा मुक्त होकर अध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ें. सन्त कहते हैं ज्ञानी के अनुभव को अपना अनुभव बना लेने पर ही बंधन कट  सकता है. तब सुख-दुःख, मान-अपमान, यश-अपयश सभी स्वप्नवत् प्रतीत होते हैं क्योंकि ये सभी आने-जाने वाले हैं और एक चैतन्य ही शाश्वत है. उसी में विश्रांति मिल सकती है. अभी जो बुद्धि कंस की सेविका है जब कृष्ण की सेविका हो जाएगी तभी उसका उद्धार सम्भव है. आज जून वह पत्र पोस्ट कर देंगे जो छोटी बहन को कल रात उसने लिखा था कविताओं के साथ.

आज उसने सुना, “इच्छा पूर्ति में पराधीनता है, जड़ता है, इच्छा निवृत्ति में स्वाधीनता व चेतनता है. निष्काम होने का सुख बड़ा है, सकाम होने का दुःख उससे भी बड़ा. जो मन इच्छाओं से तपे वह कैसे दर्पण की भांति अंतर की पवित्रता को दर्शा सकता है. ‘नाम जप’ इसमें सहायक होता है”. सुबह जून ने धूप में बड़ी डालने में उसकी सहायता की, कल रात मेथी साफ़ कर दाल पीस कर तैयारी कर रखी थी. जून उसके घर में रहने से पहले की तरह खुश रहने लगे हैं, उनके स्वप्नों का घर फिर मिल गया है.

“मानस की गहराइयों में जाकर सारे विकारों को दूर करने का काम ही विपशना है. इसके लिए मन को नियंत्रित करना होता है, शील-सदाचार का पालन करना होता है और यह निरंतर होना चाहिए. सहज स्वाभाविक रूप से साँस को देखते रहना मन को एकाग्र करने का सर्वोत्तम साधन है”. आज जागरण में श्री गोयनका जी ने विपशना पर प्रवचन माला आरम्भ की है, अच्छा होगा यदि कल भी वे आयें लेकिन यदि न भी आये तो उसे विक्षोभ नहीं होगा क्योंकि समभाव रहकर मन को इच्छाओं से मुक्त रखने का प्रण श्रीकृष्ण के सामने लिया है. कल दोपहर उसने गीता को पुनः पढ़ा, कल से पहले न जाने कितनी बार पढ़ चुकी है पर वह पढना मात्र पढ़ना ही था उसका अर्थ समझने का सामर्थ्य उसमें बिलकुल नहीं था, कल उसका अर्थ अपने आप ही समझ में आने लगा और उसे लगता है यह ईश्वर की कृपा का फल है वह तभी किसी के अंतर में प्रकट होता है जब हृदय शुद्ध हो, भावनाएं उद्दात हों और निस्वार्थ भाव से मात्र ज्ञान के लिए ज्ञान की आकांक्षा हो. नन्हा और जून दोनों घर पर नहीं हैं, वह भी चली जाती थी तो उनका यह घर अकेला बंद रहा करता था, कितना सन्नाटा होता होगा यहाँ, अब इतने दिनों बाद घर पर रहना अच्छा लगता है. जून का शुक्रगुजार होना चाहिए. उस रात उसने जो कठोर वचन कहे थे वे सम्भवतः नियति ने ही कहलवाए थे. उसे लग रहा था कि सब कुछ अस्त-व्यस्त हो रहा है, बिखर रहा है. जून की बातें तब समझ में नहीं आती थीं, अब स्पष्ट हो रही हैं. उसका सही स्थान उनका घर ही है. मन की साधना करने के सारे उपाय यहीं मिल सकते हैं.  




Tuesday, June 10, 2014

क्रिकेट का फाइनल


कल भारत की तरह दक्षिण अफ्रीका की टीम अपनी गलतियों की वजह से सेमी फाइनल में आस्ट्रेलिया से हार गयी. दोनों टीमों ने बराबर के रन बनाये पर क्योंकि पहले वे आस्ट्रेलिया से हार चुकी थी, इसलिए उन्हें इस बार भी हारना पड़ा. नैनी आज फिर बिना बताये चली गयी है जैसे कि बोलकर जाने से उसका अपमान होता हो, या फिर यह नूना का वहम् ही हो, खैर, इन छोटी-छोटी बातों से खुद को ऊपर रखना चाहिए. प्रेम, दया, सहानुभति जैसे शब्दों और विचारों से वे अपरिचित ही हैं और रहेंगे, शायद अगले किसी जन्म में उन्हें भी आभार व कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर मिले, इस जन्म में तो उन्हें ही कृतज्ञ होना है कि अपना समय निकल कर वे उनके लिए काम करते हैं. कल रात अजीब-अजीब स्वप्न देखती रही, सुबह प्रातः भ्रमण के लिए वे उठे तो वर्षा हो रही थी, फिर सो गये, ये स्वप्न शायद तभी देखे होंगे. अभी भी बदली का सा मौसम है.

वे ज्ञान व भक्ति द्वारा परमात्मा का अनुभव कर सकते हैं, जो सदा रहता तो उनके साथ है, पर वे उसे देख नहीं पते. जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा हो जीवन की गाड़ी पटरी पर दौड़ रही हो तो उन्हें उसकी याद भी नहीं आती किन्तु जहाँ पहिया पटरी से उतरी नहीं कि वे उस परमपिता को पुकारने लगते हैं, किन्तु ईश्वर यदि सारे काम संवार भी दे तो वे खुद को शाबाशी देने लगते हैं, गर्व से फूल उठते हैं, कृतज्ञ होने की तो बात दूर है वे यह स्वीकारना भी नहीं चाहते कि उनकी उपलब्धियों का श्रेय उनकी बल-बुद्धि के सिवा किसी को जा भी सकता है. ईश्वर ने उन्हें बहुमूल्य खजाने दिए हैं, प्रकृति के नाना-रूपों में, दिल में उठने वाली कोमल भावनाओं में, मानवीय प्रेम और भाईचारे के सिद्धातों में. वही उनके देश को बचाएगा.

The woods are lovely…these lines inspire her and straighten her thoughts which are wandering most of the time. Today again due to rain they could not go for morning walk. Yesterday due to cricket world final  they could not go in the evening also. Australia beat the rival team ie Pakistan badly, it was painful to see the Pakistani players sad and frustrated but it happens sometime. It is life and it is game.

कल से जुलाई महीने का आरम्भ हो गया, छोटी बहन के जन्मदिन का महीना. उस दिन उसका पत्र पाकर मन भर आया, वह परिवार दूर पंजाब के बार्डर पर एक कैम्प में रह रही है. पिछले कई दिनों से वह लिख नहीं पाई, बस कुछ व्यस्तता सी रही, इधर-उधर की, संगीत उसकी जिन्दगी का हिस्सा बनता जा रहा है, गला अब थोड़ा बहुत सुरों पर टिकने लगा है, चाहे कितने ही साल क्यों न लग जाएँ, यह अभ्यास अब छूटने वाला नहीं है. उस दिन यानि परसों क्लब में कविता पाठ ठीक ही रहा. गला उतना स्पष्ट नहीं था क्यों कि पिछले कुछ दिनों से दांत में दर्द था...खैर, परेशान गला था, वह नहीं सो ऐसी विशेष बात भी नहीं है. परसों क्लब से एक सखी के यहाँ गयी और कल उसके उनके घर से जाने के बाद क्लब गयी. जून को उसके मैराथन में भाग लेने और पुरस्कार मिलने पर ख़ुशी है, जबकि पहले वह इन सबसे दूर रहने को ही कहते थे, उम्र के साथ इन्सान के कई पूर्वाग्रह अपने आप छूटते चले जाते हैं. एक सखी को फोन किया उसका बुखार अभी भी उतरा नहीं है, उसकी किसी बात का गलत अर्थ एक दूसरी सखी ने लगा लिया और परेशान हो गयी. इन्सान इतना संकीर्ण क्यों होता जा रहा है, बड़े दिल वाले लोग बनाने क्या भगवान ने बंद ही कर दिए हैं.

   

Monday, March 17, 2014

नीना गुप्ता का धारावाहिक - सांस


आज बीहू है, टीवी पर भारत-आस्ट्रेलिया क्रिकेट पेप्सी कप का फाइनल आ रहा है, भारत के जीतने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं. छुट्टी के दिन सारी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो जाती है, देर से उठे, न व्यायाम हुआ न ध्यान... नाश्ते में खीर खायी, लंच में खिचड़ी. सुबह एक स्वप्न देख रही थी, उसका असर देर तक रहा यहाँ तक कि अब भी है, इन्सान कभी-कभी स्वयं के असली रूप को कितना स्पष्ट देख पाता है और अक्सर यह रूप कई परतों में छिपा रहता है. हो सकता है उसकी यह राय हारमोंस के कारण हो, या फिर यही वास्तविक वह है. कल जून एक कैसेट लाये थे “युग पुरुष” नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला थे उसमें. फिल्म अच्छी थी मगर उसे लगा, चलेगी नहीं. कल शाम एक मित्र के यहाँ गये, वहाँ गृह स्वामिनी ने पनीर की पूड़ी खिलाई with grated carrot and coriander, स्वादिष्ट थी. वापस आकर ‘सांस’ देखा, नीना गुप्ता अपने ही क्रोध का शिकार बन गयी है, औरतों के साथ यही तो विडम्बना है, अन्याय का विरोध करे तो भी उसकी हार है और न करे तब तो है ही. कुछ देर पहले एक सखी का फोन आया, पर आजकल उसका मन बातें करने का नहीं होता, सम्भवतः आजकल वह स्नेह शून्य हो गयी है, अब हारमोंस को दोष देने का वक्त फिर आ गया है.

आज भी बीहू का अवकाश है, उसकी छात्रा ने तो बल्कि यह कहा कि आज ही बीहू है. बंगाल में आज से नया साल भी शुरू हो रहा है. आज वे जल्दी उठ गये थे, कल जून तिनसुकिया से कम्प्यूटर टेबल के लिए नया टॉप लाये थे, वह भी लगा दिया है. आज लंच में वे तरबूज खाने वाले हैं, इस मौसम का पहला तरबूज ! नन्हा सुबह से अंग्रेजी पढने में लगा है. अगले महीने से उसके यूनिट टेस्ट हैं. उसे home alone देखनी है पर पहले पढ़ाई, फिर फिल्म.. यह तय किया है, थोड़ा मुँह जरुर बनाया उसने पर बाद में समझ गया. नये स्कूल में किताबें भी ज्यादा हैं और पढ़ाई भी. उसकी कुछ किताबें उसे भी रोचक लगीं. कल उसका मन हिंदी लेखन की किताब पढ़ने में नहीं लग रहा था, बार-बार उन्हीं सिद्धांतों को दोहराने से शायद बोरियत महसूस होने लगी थी. कल शाम फिर वर्षा हुई थी पर आज धूप निकली है, मौसम का असर भी इंसानी फितरत पर पड़ता होगा, पड़ता ही है. आज सामान्य महसूस कर रही है. अभी एक घंटा रियाज करना है, किसी को बिना डिस्टर्ब किये घर में रियाज करना भी अपने आप में एक कला है.

जून को कल रात नींद नहीं आई, शायद उसकी वजह से. वह स्वयं तो उनके स्नेह की अधिकारिणी बने रहना चाहती है, प्रेम में हल्के से भी दुराव की पीड़ा क्या होती है उसे उसका मन पहले महसूस कर चुका है, पर कल वह क्यों नहीं समझ पायी. आज उसे संगीत की कक्षा में सुबह ही जाना है. वर्षों बाद अकेले बैठे गाते-गुनगुनाते समय इन अध्यापिका से सीखा संगीत बहुत याद आएगा. कल दूँ भर की कड़ी धूप के बाद शाम को हुई मूसलाधार वर्षा के कारण हवा में ठंडक है. नन्हा आज सुबह जल्दी से उठ गया, जैसे-जैसे बड़ा हो रहा है, जिम्मेदारी समझ रहा है. कल रात स्वप्न में दोनों ननदों को देखा, छोटी ननद दूसरे बच्चे के आने की तयारी कर रही है. एक स्वप्न में देखा एक लडकी उससे एक गीत सीखना चाहती है. जे कृष्णा मूर्ति की पुस्तक पढ़ ली है, उनके अनुसार सचेतन मन से वर्तमान में जीवन जीना चाहिए संवेदन शील मन हो जो पिटी-पिटाई लकीरों पर न चले बल्कि अपना रास्ता स्वयं खोजे.






Monday, August 12, 2013

सफर का सफर


आज नन्हे का पहला इम्तहान है सोशल स्टडी, जिसे वे इतिहास और भूगोल के नाम से पढ़ा करते थे. कल शाम को वह थोड़ा सा घबरा गया था, और रात को सो नहीं पा रहा था. उसे परीक्षा की महत्ता का अहसास हो रहा था, पर आज सुबह सामान्य था, उसने इतना तो पढ़ा ही है कि सभी प्रश्नों के उत्तर दे सके और कोई कमी रह भी गयी तो उसमें उतना ही दोष उनका भी है, उसे पूर्ण विश्वास है कि ईश्वर उसकी सहायता करेगा. वह इतना मासूम और प्यारा है और उनके जीवन को खुशियों से भर दिया है उसने, ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार उनके लिए. उसके मन की सारी दुआएं उसके साथ हैं और सिर्फ उसी के साथ नहीं हर उस बच्चे के साथ जो परीक्षा में बैठ रहा है, उन्हें उनकी मेहनत का सुपरिणाम मिले, आमीन ! अभी जून ने भी फोन करके पूछा, उनका दिल भी नन्हे के आस-पास ही है आज, मौसम आज ठंडा है, रात से ही वर्षा हो रही है.

दस बजने वाले हैं, अभी-अभी उसने उनके मैगजीन क्लब की Sunday पत्रिका का एक अंक देख-पढकर रखा है, अच्छी पत्रिका है, काफी कुछ पढने को है पर आभी उसके पास समय नहीं है, और लंच के बाद जून वापस ले जायेंगे. अभी भोजन भी पूरा नहीं बना है और उनकी पसंद के अनुसार चटनी भी बनानी है, माली ने जो पुदीना लगाया था काफी फ़ैल गया है और करी पत्ते के पेड़ में भी कोमल, हरे, नये पत्ते आ रहे हैं, हरी मिर्च भी लगनी शुरू हो गयी है. मौसम आज भी कल जैसा ही है, वर्षा कुछ देर पहले ही थमी है. कल नन्हे का पहला पेपर अच्छा हुआ और आज वह बिलकुल सामान्य था, कल रात भी आराम से सोया.

Today’s discourse of Dada Vasvani was very very useful after the India’s defeat in yesterday’s match and incidents during last one hour. He says that 92% of our worries are only due to trivial matters that matters which are of no concerns to us. SO she is not unhappy at all. Victory and defeat are woven in a cycle and come after one another. Today again weather is cloudy; it has too cold after three days of continuous raining. Nanha is preparing for tomorrow’s  exam, she finished that book ”The Dangerous Fortune” today morning.

सुबह-सुबह पानी फिर ठंडा लगने लगा है, दिसम्बर-जनवरी की तरह. बादलों के कारण दिन भर घर में बिजली जलानी पडती है. कल सुबह नन्हा सोकर उठा तो कहने लगा अभी शाम है या सुबह कुछ पता ही नहीं चल रहा. आज उसका अंग्रेजी का पेपर है. कल दोपहर तक ही पढ़ाई हो चुकी थी. शाम को जून के खेलने जाने पर कुछ देर पढने-पढ़ाने के बाद वे एक खेल खेलने लगे, स्पेलिंग का खेल, नन्हे को बहुत मजा आ रहा था. ट्रेन में भी वे ये खेल खेल सकते हैं. घर जाने में एक हफ्ते से भी कम समय रह गया है. पिछले दिनी माँ-पापा और छोटी बहन के पति के पत्र आये, जून फोन से ही बात कर लेंगे अब जवाब देने का समय नहीं रह गया है. अब और क्या लिखे... उसका ध्यान घड़ी की ओर था, एक हफ्ता या उससे भी अधिक समय हो गया शुक्रवार को ९.३० का कोई प्रोग्राम देखे. कल रात एकाएक नींद खुली उससे पहले सपने में हसीना मुइन को देख रही थी.
जून ने दफ्तर से लौट कर बताया, दीदी भी परिवार सहित उसी दिन दिल्ली पहुंच रही हैं.

बात यह है कि आदमी या तो शायर होता है या नहीं होता है.

उसे जाते हुए तकना है और खामोश रहना है
और उसके बाद अपने आप से तकरार करना है

आज ‘आधा चाँद’ में दो शायराओं से मुलाकात की. एक का नाम शाइस्ता था और दूसरी का नाम थोड़ा मुश्किल सा था. बेहद अच्छा और उसकी रूचि का है यह कार्यक्रम. मन को प्रेरणा देता है और आत्मा को सुकून. शायरी जीवन का फूल है और जो इसकी खुशबू को अपने दिल में समो लेता है वह कभी तन्हा नहीं रहता, वह खुशबू उसके साथ रहती है, इर्दगिर्द लिपटी हुई सी. जैसे किसी खुदा के बंदे को उसकी लौ घेरे रहती है.

मैं नर हूँ तुम नारायण हो
मैं हूँ संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में

आज सुबह किन्हीं सन्त के मधुर वचनों को सुनकर नर में नारायण को देखने की शिक्षा प्राप्त हुई है. बचपन में कभी यह भजन सुना था. आज क्रिकेट का फाइनल है, श्रीलंका और आस्ट्रेलिया के मध्य, श्रीलंका के जीतने के आसार अधिक है.

आज नन्हे की अंतिम परीक्षा है, शाम को उन्हें एक सहभोज में जाना है, जून ने कहा है वह उसकी सहायता करेंगे उनके हिस्से का भोजन बनाने में.

 कल का सहभोज अच्छा रहा, आज एक और मित्र के यहाँ जाना है.

आज नन्हे को बुखार हो गया है ओर कल उन्हें सफर पर निकलना है.

सफर का दिन यानि suffer के दिन शुरू हो गये हैं.



Monday, February 18, 2013

पुस्तक मेला



आज से लक्ष्मी काम पर वापस आ गयी है, सब कार्य समय पर हो गए हैं, जैसे घर बहुत दिनों बाद पुनः शांत हो गया हो. आज धूप कल से भी कम है, अंततः चिप्स सुखाने के लिए रसोईघर में रखने ही होंगे. आज वह अपने कुछ अच्छे मूड्स में से एक में है, गार्डन सिल्क की ब्राउन साडी पहनी है, वह भी स्टाइल से, अच्छा लगता है खुला-खुला सा, बन्धनों में रहते रहते भूल ही गयी थी कि आजादी क्या होती है. पता नहीं मरियम का क्या होगा, उस उपन्यास की नायिका का, जो कल देर तक पढ़ती रही. आज क्रिकेट मैच भी है, जून आते ही स्कोर पूछेंगे, पर उसे अभी याद आया है, टीवी बंद है. कल वे एक परिचित तेलेगु परिवार के यहाँ गए, गृहणी बहुत मोटी हो गयी हैं, और नाश्ता सफाई से नहीं बनाती हैं, ऐसा उसे लगा, संस्कार और शिक्षा के कारण लोग बहुत सी बातें सीख जाते हैं और बहुत सी नहीं सीख पाते. कल उसने पहली बार एग डालकर केक बनाया, आज नन्हे को टिफिन में देना भूल गयी. उसे पसंद आया, पर जून को उतना अच्छा नहीं लगा, पर वह उसे बहुत अच्छे लगते हैं जब कान में कुछ कहते हैं, जबकि कमरे में उनकी बात सुनने वाला कोई भी नहीं होता.

इतने वर्षों में कल पहली बार यहाँ पुस्तक मेला देखने गयी, सिर्फ पुस्तक मेला ही नहीं है और भी बहुत कुछ है उसमें. इतना विशाल, इतना अच्छा लगा कि कल से सोच रही है, कब वे वहाँ दुबारा जायेंगे, पर मौसम को भी आज ही बिगड़ना था, गर्जन-तर्जन करते बादल पता नहीं किस पर क्रोधित हो रहे हैं. इतनी दूर-दूर से व्यापारी अपना सामान लेकर आये होंगे, और खुले आसमान के नीचे बैठे थे, सिर्फ दुकानों पर ही तो तम्बू थे, आज कहाँ गए होंगे....और सुना है मात्र तीन दिनों के लिए. वे लोग शायद ही आज जा पायें, अगर यह पानी बरसना बंद हो जाये. बाहर पौधों को जी भर के पानी मिल गया पर बरामदे के गमले सूखे ही रह गए, उसने सोचा लिख कर उन्हें भी पानी देगी. कल नन्हे का स्कूल भी बंद हो गया, “शंकरदेव जयंती” के कारण, इसी उपलक्ष में ही तो मेला लगा है.

भारत की इंग्लैड पर एक और विजय, सोनू बहुत उत्साहित है. आज वह स्कूल नहीं गया, कल दिन भर सर्दी से परेशान था, आज ठीक लग रहा है. आज सुबह वह उठी तो मन उलझन से भरा था, लग रहा था कि कहीं कुछ भी ठीक नहीं है, कि जिंदगी समझौतों का दूसरा नाम है और यह कि कितनी भी विपरीत स्थितियां हों, चेहरे पर मुस्कान का लेबल लगाये रखना पड़ता है और भी न जाने क्या-क्या ..कल रात नींद नहीं आ रही थी. एक कहानी सोचने लगी, शब्द खुदबखुद आते जा रहे थे, भावों की कमी नहीं थी. अगर कोई ऐसा टाइपराइटर होता जो मन के वाक्यों को टाइप कर लेता तो एक सुंदर कहानी उसके सामने होती. उस समय सोच रही थी यही शब्द, यही वाक्य.. सुबह आराम से लिख सकेगी पर अब वे कितने दूर गए लगते हैं. वैसे भी अब समय नहीं है, अभी खाना भी पूरा नहीं बना है. कल दोपहर जून से किसी बात पर मतभेद हो गया, लेकिन वह विवाद से बचते हैं, एकाध बार कुछ कहकर चुप हो जाते हैं. उनका गला भी उतना ठीक नहीं है आजकल, सुबह पूरा नाश्ता नहीं खा सके, आज उसे भी विशेष भूख नहीं लगी, नन्हे की सर्दी..यानि पूरा परिवार ही.. खैर..अब वह शांत है और करने को इतना कुछ है कि और कुछ सोचने का वक्त कहाँ है, खत भी तो लिखने हैं.

कल शाम की शुरुआत एक अच्छी खबर से हुई, माँ-पिता के पत्र से मालूम हुआ कि छोटी बहन ने गुड़िया को जन्म दिया है. अभी-अभी उसने एक खत और एक कविता लिखी है उसके लिए. कल क्लब में एक स्तरीय कार्यक्रम था, वे गए थे नन्हे को ढाई घंटे के लिए उसके मित्र के यहाँ छोड़कर. आज सुबह से ही वह रोजमर्रा के काम छोड़कर इधर-उधर के काम कर रही है, जो अक्सर रह जाते हैं, दोपहर को करेगी रोज के काम.

Thursday, January 17, 2013

बच्चन की मधुशाला



आज सोमवार है, मौसम वही बादलों वाला, ठंड इतनी, जितनी दिसम्बर-जनवरी में होती है, चिड़ियों की चहकार के कोई शब्द नहीं, कुछ देर पूर्व फोन की घंटी बजी थी जिसकी आवाज पुरे घर में गूंज गयी थी. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मत हो रहा है, राव सरकार के लिए आसान सी चुनौती ! 

टीवी पर भारत और वेस्टइंडीज के बीच मैच चल रहा है, उसे सिर्फ २३ रन और बनाने हैं, लगता है भारत हार जायेगा, और सेमी फाइनल में शायद नहीं पहुंच पायेगा. हारते हुए देखना अच्छा नहीं लग रहा पर टीवी बंद कर दे, ऐसा भी तो नहीं कर सकती. आज नन्हे ने सुबह पिया दूध निकाल दिया, उसने कहा, स्कूल मत जाओ, अगर स्कूल में कुछ समस्या हुई तो, वह बोला टीचर से ‘एक्स्यूज मी’ कहकर सिंक के पास चला जाऊँगा और कुल्ला करना भी आता है, कितना क्यूट है वह.. स्कूल जाना उसे बहुत जरूरी लगता है, अच्छा भी लगता है.

आज भी ठंड काफी है और उसका मन कुछ कहना चाहता है, अभी कुछ देर पूर्व उस सखी का फोन आया जिसे देखने वह अस्पताल गए थे, बार-बार धन्यवाद दे रही थी, कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें कहने से उनकी खूबसूरती खत्म हो जाती है, उन्हें सिर्फ महसूस करना और करवाना चाहिए.

भारत और न्यूजीलैंड के बीच मैच, भारत की हार, सेमीफाइनल से बाहर. जून ने फोन पर कहा कि आज उनके विभाग में जी.एम की विदाई पार्टी है, वह हिंदी या अंग्रेजी में एक छोटा सा भाषण लिख दे, उसने लिख तो दिया है, पता नहीं उसे पसंद आता है या नहीं.

शनिवार यानि व्यस्तता भरा दिन..सुबह अभी पूरी गुजरी नहीं है, नन्हा पड़ोस में खेलने गया है, वह कुछ देर पहले अस्पताल से आयी है, बाएं तरफ वाली पड़ोसिन से कुछ देर बात की, उसकी बेटी भी नन्हे के स्कूल में पढ़ती है.

आज कुछ देर पूर्व ही किचन में होली के लिए गुजिया और नमकपारे बनाते समय शायद देर तक खड़े रहने के कारण या गर्मी के कारण उसे चक्कर सा आ गया, हल्कापन सा लगा जैसे गिर ही जायेगी, नौकरानी भी वहीं थी, वह बेल रही थी, सब उसी पर सौंप कर वह कुछ देर के लिए लेट गयी, फिर स्नान करके एक कप दूध पिया. स्टेमिना नहीं है शरीर में..यह तो अच्छा है परिवार छोटा है नहीं तो एक दो घंटे किचन में खड़े होने पर आये दिन यही होता, गरमी भी यकायक बढ़ गयी है. जून कल दफ्तर से लौटे तो उदास थे, उनका पेपर टाइप नहीं हो पाया था आज जमा करना था, अब अगर आज हो जाये तो कल जमा कर सकते हैं. उनके बगीचे में इस वर्ष पॉपी के सुंदर डबल फूल खिले हैं, नन्हा स्वेटर पहन कर स्कूल गया है, कहता था क्या पता मौसम बिगड़ जाये, खूब बातें बनाता है. उसने सोचा है, होली पर जिन लोगों को वे बुलाएँगे उन्हें हँसाने के लिए पेयर-वाइज टाइटिल लिखेगी, बहुत साल पहले घर पर सभी को दिए थे.

होली का उत्सव अच्छी तरह से बीत गया. आज से उसने मैटी की डबल बेड की चादर काढ़नी शुरू की है, इस उम्मीद पर कि एक दिन तो यह पूरी हो ही जायेगी. साथ ही बच्चन की मधुशाला सुन रही है वह कैसेट से, अच्छा लगता है सुनना, हालाँकि वह इतना समझ नहीं पाती इसका वास्तविक अर्थ.

शनिवार को दोपहर को दो बजे नन्हे का एक मित्र आ गया खेलने, चार बजे उसकी माँ आयी, यानि उसकी सखी, फिर छह बजे उसके पापा आए जून के मित्र, पूरा दिन उन्हीं के नाम...दोस्ती के नाम पर सब सहना पड़ता है. परसों जून का पेपर ठीक पढा गया, इतने दिनों की व्यस्तता खत्म हो गयी है. आज उसे नन्हे के स्कूल जाना है, सिल्वर जुबली कार्यक्रम के सिलसिले में. घर से पत्र आया है, छोटी ननद के विवाह की तिथि तय हो गयी है.

बेचैनी यह आतुर मन की
अकुलाहट सूने नयनों की
अंतहीन भटकन कदमों की
प्रज्ज्वलित ज्वाला अंतरस्थल की !

विश्व कप- क्रिकेट का उत्सव



पाकिस्तान को हराकर भारत के तीन अंक हो गए हैं, अगला मैच दक्षिण अफ्रीका से है, उसमें तो विजय निश्चित है. इसलिए वे खुश थे, एक मित्र के यहाँ गए, उसके माँ-पिता दिल्ली से आए हुए थे, उनसे भी मिलना था, वहाँ पता चला, उसकी एक सखी अस्पताल में दाखिल है. नन्हे की परीक्षा की तारीखें आ गयी हैं, स्कूल में रिवीजन शुरू हो गया है, और घर पर भी. कल रात उसका खाने का मन नहीं था, हाथ बांध कर वह बैठ गयी तो कहने लगा मेरा भी तो हाथ है आप इससे खाइए...बच्चे कितने मासूम होते हैं..भोले..फूलों की तरह पवित्र..

सुबह के साढ़े दस बजे हैं, आज धूप का नामोनिशान नही है, ठंड जाते-जाते फिर लौट आती है. बहुत दिनों से उसने कोई कविता नहीं लिखी, अगर वे चंद पंक्तियाँ कविता कही जा सकती हैं जो वह लिखती है. सुबह देखे एक स्वप्न में कितनी आसानी से वह कवितायें कह रही थी  पर अब कुछ याद नहीं आता, पर उस समय उसने सोचा था, लिख लेना चाहिए इन्हें. विश्वकप श्रृंखला में आज दो मैच हैं, पता नहीं भारत का कौन सा स्थान होगा, पर हम भारतीय हर हाल में खुश रहना जानते हैं, यही तो हमारी विशेषता है, जो भी स्थान मिलेगा, उसी के अनुकूल एक्सक्यूजेस निकल लेंगे, आखिर परेशान होकर मिलेगा भी क्या? कल रात जून नींद आने के बावजूद उसकी हल्की सी करवट लेने से उठ गए और रोज की तरह बातें कर के वे सोये, बातें जिनमें होंठ नहीं सिर्फ मन बोलते हैं, सिर्फ एक आश्वस्ति भरा स्पर्श..वह किस तरह समझते हैं..कितना अप्रतिम होता है स्नेह का यह रिश्ता...बातें करना क्या जरूरी है जब चुप रहकर ही सब कहा जाता है. कितनी सुरक्षा..कितना अपनापन..उनकी किसी बात का उसे बुरा नहीं मानना चाहिए..क्योंकि वह कभी नहीं चाहते, वह उदास रहे, नन्हे के लिए भी उनका प्रेम असीम है, उसने खुद से पूछा, आज क्यों वह इतना याद आ रहे हैं..

रात से ही बादल बरस रहे हैं, मार्च का महीना है पर लगता है सावन आ गया है, ठंड भी काफी बढ़ गयी है. सोनू की बायीं आँख सुबह लाल थी, उसने उसे स्कूल जाने से मना किया पर स्कूल छोडना उसे गवारा नहींहोता, वैसे भी वर्षा के कारण आज काफी कम बच्चे आये होंगे. जून कल शाम काफी देर तक अपना पेपर लिखते रहे. उसके पूर्व वे अस्पताल गए थे. पता नहीं क्यों वहाँ से आकर मन कुछ अजीब सा हो गया था जो आधा घंटा एक परिचित के यहाँ बैठने से भी दूर नहीं हुआ और बिस्तर तक उसके साथ गया. एक हफ्ता हो गया कोई भी चिट्ठी नहीं आयी, इसी तरह न जाने कितने दिन, कितने हफ्ते गुजरते जा रहे हैं. नन्हे को दिनोंदिन बड़ा होते, समझदार होते देखना अच्छा लगता है. एक पल वह बच्चा बन जाता है फिर कोई ऐसी बात बोलेगा कि लगता है बड़ा हो गया है, रात ही कह रहा था, “माँ जब मैं अकेला होता हूँ तो अकेला नहीं होता कोई मेरे साथ रहता है, जो मेरी बातें सुनता है बस जवाब नहीं दे पाता”, उसने पूछा, कौन ? तो बोला, “मेरा मन, मैं उसके साथ बहुत बातें करता हूँ”. आज जून के एक मित्र भी खाने पर आएंगे, उसने सोचा अब लिखना बंद करना चाहिए. जल्दी से बादलों पर चार लाइनें लिखने का प्रयास करेगी-

उमड-घुमड़ कर अजब रूप धर
काले, भूरे, धूसर बादल,
जब देखो छा जाते नभ पर
और बरसने लगते झर-झर !

विश्वकप के नियमों के तथा वर्षा की बदौलत भारत और जिम्बाववे के मैच में भारत विजयी हुआ है. बहुत दिनों बाद ‘हमलोग’ देखा, कहानी बहुत धीरे धीरे बढ़ रही है.
आज सोमवार है, मौसम वही बादलों वाला, ठंड इतनी, जितनी दिसम्बर-जनवरी में होती है, चिड़ियों की चहकार के कोई शब्द नहीं, कुछ देर पूर्व फोन की घंटी बजी थी जिसकी आवाज गूंज गयी थी. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मत हो रहा है, राव सरकार के लिए  आसान सी चुनौती !  




Thursday, February 23, 2012

कोलम्बो का आकाश


आज सुबह फिर उठने में देर हुई, कल रात देर तक वे अपने-अपने बचपन की बातें करते रहे. दोनों के बचपन में कई बातें मिलती-जुलती लगती थीं. सबके बचपन एक से ही होते हैं पर बड़े होकर सब अपने-अपने दायरों में कैद हो जाते हैं. आज सुबह से ही पानी बहुत कम आ रहा था, बाद में बंद ही हो गया. कल नूना ने जून के साथ शर्त लगाई कि भारत-श्रीलंका क्रिकेट टेस्ट मैच में भारत जीतेगा पर मैच अनिर्णीत रहा. अब कल वन डे है इसमें तो भारत को जीतना ही चाहिए, उसने सोचा. कल वे एक असमिया परिवार से मिलने गए थे, उनका बेटा जिंजू बहुत प्यारा है, शर्मीला व शांत स्वभाव का.
आज इतवार है, सितम्बर माह भीगा भीगा ठंडा सा इतवार ! सुबह से आकाश में बादल छाये रहे, यहाँ भी और कोलम्बो के आकाश में भी, मैच देर से शुरू हुआ और कम रोशनी के कारण जल्द खत्म कर देना पड़ा. जून के साथ वह होमियोपैथिक डॉक्टर के यहाँ गयी थी. आज वे फिर एक परिचित के यहाँ गए नूना ने अपने हाथ से बनायी  टैटिंग की लेस उन्हें दी. उसके बाद वे मोटरसाइकिल से दूर तक घूमने गए, खुली सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन थे. उसने वही पीला कुरता पहना था. शाम जैसे-जैसे बढ़ रही था मच्छर भी बढ़ रहे थे जो आँखों, बालों से टकरा रहे थे.