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Saturday, August 31, 2013

ताय कांडू yani taekwondo


‘दिल का मरहम कोई न जाने जो जाने सो ज्ञानी’

दिल का प्याला कभी छलक उठता है
और कभी खाली हो जाता है
दूर समुन्दर में कभी दिखते कभी छिप जाते
जहाज के प्रकाश की तरह
वह एक जादूगर जो छिपा है
सात पर्दों के पीछे
चुपचाप हँसता रहता है
या शायद उसकी हँसी भी रूठ जाती हो
दिल के टूटने की आवाज पर
जो वह हजार पर्दों के पीछे भी सुन सकता है !

आज मौसम ठंडा है, कल दोपहर जब वे एक और मित्र के यहाँ थे, वर्षा की मधुर झंकार सुनाई दी और तीन बजे तक बिजली भी आ गयी थी. आज शनिवार है, पिछले दो शनिवारों को नन्हे ने कोई विशेष डिश बनाने में सहायता की थी, आज भी वह तरला दलाल की किताब से कोई नई रेसिपी खोज रहा है.

टीवी पर खबरें सुनकर उसने सोचा, राजनीति यानि राज करने की नीति, राज यानि शासन और नीति यानि कुछ नियम अथवा आचार संहिता, जिसके अनुसार राज चलाया जाना चाहिए. पर राजनीति शब्द का गलत अर्थ निकाला जाता है जब उसे आज के हालात में देखा जाये, राजनीति यानि जोड़-तोड़ करके पाई गयी सत्ता का दुरूपयोग !

शाम के छह बजने को हैं, जून क्लब गये हैं, नन्हा पढ़ाई कर रहा है. वह स्कूल से आकर तायकांडू देखने एक अन्य स्कूल में गया था, आजकल वह सुबह साढ़े चार बजे उठकर क्लब तायकांडू सीखने जाता है. उसके साथ वे भी उठ जाते हैं, कुछ देर टहलते हैं, फिर समाचार देखते हुए चाय, उसके बाद जागरण. आज स्वीपर से घर का जाला आदि साफ करवाया, घर साफ-सुथरा, भला सा लग रहा है. दोपहर को हिंदी पढ़ाने गयी, लौट कर नाश्ता बनाने के बाद एक घंटा बगीचे में काम किया. कल उसने धूप की कामना की थी, जिससे आज गुलदाउदी के पौधे लगा सके, अब आज धूप न निकलने की कामना है ताकि नन्हे पौधे धूप में कुम्हला न जाएँ. इन फूलों का जिक्र आते ही उसे बंगाली सखी याद आया ही जाती है, पता नहीं वह उसे याद करती है या नहीं. सुबह से वह व्यस्त रही है फिर भी एक खालीपन का अहसास मन पर छाया हुआ है. पिछले दो तीन दिनों से जून कोई पत्रिका भी नहीं ला रहे हैं जिसे पलटकर दिल का खालीपन को भर लिया जाये, पर यह खालीपन उस एक की प्रतीक्षा में है वह उसका खुदा जाने कहाँ है ? घर से खत आया है, माँ ने लिखा है, उन्हें खुशी है कि उसकी दिनचर्या व्यस्त है. कल लेडीज क्लब की मीटिंग में गयी थी, वहाँ कुछ खास नहीं हुआ पर घर आई तो नन्हे और जून ने जिस तरह स्वागत किया वह मन को छू गया. फिर ‘हम पांच’, सैलाब और समाचार के बाद जब आँख बंद कर लेटी तो मन में क्लब की बातें ही थीं.


Monday, August 12, 2013

सफर का सफर


आज नन्हे का पहला इम्तहान है सोशल स्टडी, जिसे वे इतिहास और भूगोल के नाम से पढ़ा करते थे. कल शाम को वह थोड़ा सा घबरा गया था, और रात को सो नहीं पा रहा था. उसे परीक्षा की महत्ता का अहसास हो रहा था, पर आज सुबह सामान्य था, उसने इतना तो पढ़ा ही है कि सभी प्रश्नों के उत्तर दे सके और कोई कमी रह भी गयी तो उसमें उतना ही दोष उनका भी है, उसे पूर्ण विश्वास है कि ईश्वर उसकी सहायता करेगा. वह इतना मासूम और प्यारा है और उनके जीवन को खुशियों से भर दिया है उसने, ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार उनके लिए. उसके मन की सारी दुआएं उसके साथ हैं और सिर्फ उसी के साथ नहीं हर उस बच्चे के साथ जो परीक्षा में बैठ रहा है, उन्हें उनकी मेहनत का सुपरिणाम मिले, आमीन ! अभी जून ने भी फोन करके पूछा, उनका दिल भी नन्हे के आस-पास ही है आज, मौसम आज ठंडा है, रात से ही वर्षा हो रही है.

दस बजने वाले हैं, अभी-अभी उसने उनके मैगजीन क्लब की Sunday पत्रिका का एक अंक देख-पढकर रखा है, अच्छी पत्रिका है, काफी कुछ पढने को है पर आभी उसके पास समय नहीं है, और लंच के बाद जून वापस ले जायेंगे. अभी भोजन भी पूरा नहीं बना है और उनकी पसंद के अनुसार चटनी भी बनानी है, माली ने जो पुदीना लगाया था काफी फ़ैल गया है और करी पत्ते के पेड़ में भी कोमल, हरे, नये पत्ते आ रहे हैं, हरी मिर्च भी लगनी शुरू हो गयी है. मौसम आज भी कल जैसा ही है, वर्षा कुछ देर पहले ही थमी है. कल नन्हे का पहला पेपर अच्छा हुआ और आज वह बिलकुल सामान्य था, कल रात भी आराम से सोया.

Today’s discourse of Dada Vasvani was very very useful after the India’s defeat in yesterday’s match and incidents during last one hour. He says that 92% of our worries are only due to trivial matters that matters which are of no concerns to us. SO she is not unhappy at all. Victory and defeat are woven in a cycle and come after one another. Today again weather is cloudy; it has too cold after three days of continuous raining. Nanha is preparing for tomorrow’s  exam, she finished that book ”The Dangerous Fortune” today morning.

सुबह-सुबह पानी फिर ठंडा लगने लगा है, दिसम्बर-जनवरी की तरह. बादलों के कारण दिन भर घर में बिजली जलानी पडती है. कल सुबह नन्हा सोकर उठा तो कहने लगा अभी शाम है या सुबह कुछ पता ही नहीं चल रहा. आज उसका अंग्रेजी का पेपर है. कल दोपहर तक ही पढ़ाई हो चुकी थी. शाम को जून के खेलने जाने पर कुछ देर पढने-पढ़ाने के बाद वे एक खेल खेलने लगे, स्पेलिंग का खेल, नन्हे को बहुत मजा आ रहा था. ट्रेन में भी वे ये खेल खेल सकते हैं. घर जाने में एक हफ्ते से भी कम समय रह गया है. पिछले दिनी माँ-पापा और छोटी बहन के पति के पत्र आये, जून फोन से ही बात कर लेंगे अब जवाब देने का समय नहीं रह गया है. अब और क्या लिखे... उसका ध्यान घड़ी की ओर था, एक हफ्ता या उससे भी अधिक समय हो गया शुक्रवार को ९.३० का कोई प्रोग्राम देखे. कल रात एकाएक नींद खुली उससे पहले सपने में हसीना मुइन को देख रही थी.
जून ने दफ्तर से लौट कर बताया, दीदी भी परिवार सहित उसी दिन दिल्ली पहुंच रही हैं.

बात यह है कि आदमी या तो शायर होता है या नहीं होता है.

उसे जाते हुए तकना है और खामोश रहना है
और उसके बाद अपने आप से तकरार करना है

आज ‘आधा चाँद’ में दो शायराओं से मुलाकात की. एक का नाम शाइस्ता था और दूसरी का नाम थोड़ा मुश्किल सा था. बेहद अच्छा और उसकी रूचि का है यह कार्यक्रम. मन को प्रेरणा देता है और आत्मा को सुकून. शायरी जीवन का फूल है और जो इसकी खुशबू को अपने दिल में समो लेता है वह कभी तन्हा नहीं रहता, वह खुशबू उसके साथ रहती है, इर्दगिर्द लिपटी हुई सी. जैसे किसी खुदा के बंदे को उसकी लौ घेरे रहती है.

मैं नर हूँ तुम नारायण हो
मैं हूँ संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में

आज सुबह किन्हीं सन्त के मधुर वचनों को सुनकर नर में नारायण को देखने की शिक्षा प्राप्त हुई है. बचपन में कभी यह भजन सुना था. आज क्रिकेट का फाइनल है, श्रीलंका और आस्ट्रेलिया के मध्य, श्रीलंका के जीतने के आसार अधिक है.

आज नन्हे की अंतिम परीक्षा है, शाम को उन्हें एक सहभोज में जाना है, जून ने कहा है वह उसकी सहायता करेंगे उनके हिस्से का भोजन बनाने में.

 कल का सहभोज अच्छा रहा, आज एक और मित्र के यहाँ जाना है.

आज नन्हे को बुखार हो गया है ओर कल उन्हें सफर पर निकलना है.

सफर का दिन यानि suffer के दिन शुरू हो गये हैं.



Friday, June 14, 2013

स्कॉटलैंड यार्ड-रोचक खेल


It is 12 noon, jun has sent a massage through his boss that he will come at 2 pm with their friend. Today early in the morning when they were in the bed, he called him to come with him to Dibrugadh and they left at 6.15 am. Nanha helped her a lot in washing clothes and other works. He is such an understanding child, loving and caring. And jun is also very compassionate and loving.. He never disappoints her, whatever and whenever she says a thing he tries to fulfill it.  She loves them both very very much. She prayed to God  to help  their friends. She wished them health and happiness.

Yesterday they were studying Assamese, when her friend called them, they wanted ‘business’ the board game, they went to give it and while she was sitting there she felt some sadness. They both were tired, so came back early. Nanha’s Birth day is just four days ahead and weather is excellent. They will celebrate it and make it a great occasion

9.10 am.Her morning chorus is complete and heart is filled with tender and soft fellings. Yesterday they went to TSK to celebrate nanha’s birthday. Really they enjoyed it. Jun was in good mood and Nanha was calm and happy. She was feeling so close to them. She wondered how she could be so rude to them on earlier occasions. They both are so loving and she is nothing without them. Seeing her friend suffering for her husband she finds some change in her attitude towards life. Emotions play a vital role in day to day life and one should spread only love and compassion through feelings not anger and hatred. she is at ease with herself  and jun. कल उनकी मारुति कार में ग्रिल भी लग गयी, बाहर से देखने में ठीक है पर अंदर से उतनी अच्छी नहीं लगती, सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो ठीक ही है. कल नन्हे ने “Scotland Yard” Board game  लिया, अभी उन्होंने इसे खेलना नहीं सीखा है, यकीनन यह एक रोचक खेल होगा. अभी तो उसे ‘असमिया’ का गृहकार्य पूरा करना है.



Friday, March 22, 2013

स्क्रैम्ब्लर-हिज्जों का खेल




अचानक उसका ध्यान पर्दों पर गया तो सोचा बेडरूम के पर्दे धुलवाने चाहिए, कारपेट धुलवाने की बात भी की है धोबी से. फ्रिज में से सब्जियां धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं, पर लगता है बाजार जाने की जरूरत जल्दी नहीं पड़ेगी, बगीचे से गाजर व गोभी मिल सकती हैं. आज उसने शाम को नाश्ते में पनीर का परांठा बनाया, सो रात को देर तक भूख ही नहीं  लगी, पौने दस बजे है, उसने रोज की तरह लिखना शुरू किया है, सोचा, जून भी इसी वक्त सोने की तैयारी कर रहे होंगे. शायद उन्होंने भी ‘विविधा’ की कहानी देखी हो टीवी पर. शाम को एक मित्र परिवार मिलने आना चाहता था, पर जून के न होने कि बात सुनकर नहीं आया. पड़ोस से नन्हे का मित्र आ गया था, सो वह दूर तक टहलने भी नहीं जा सकी. माली भी नहीं आया, प्लायर्स से नल खोल कर पानी दिया पौधों को फिर वैसे ही बंद किया. सुबह रजाई का गिलाफ धोकर चढाया. दिन में स्वेटर बनाया. नन्हे को स्कूल की पत्रिका के लिए कोई कविता या कहानी लिखनी है, इस समय लेटे हुए वही सोच रहा है. “ओशीन” धारावाहिक आज नहीं दिखाया जा रहा, अगले सोमवार को वह जून के साथ देखेगी. नन्हे को स्कूल में हेल्पेज के लिये बीस रूपये जमा करने थे, उसके पास दस रूपये थे, पचास वह ले जाना नहीं चाहता था, ऐसे वक्त में पड़ोसी ही तो काम आते हैं., लिखाई बिगड़ने लगी तो उसे लगा ठंड से उसकी उंगलियाँ अकड़ गयी हैं शायद, या ज्यादा देर स्वेटर बनाने से, वहाँ जून के शहर में तो इससे भी ज्यादा ठंड होगी.

रात्रि के साढे नौ बजे हैं, नन्हे ने इस वक्त उसे गुस्सा दिलाया है, काम के समय दुनिया भर के सवाल पूछता है और बातें करता है उस वक्त, जब कोई काम कहा गया हो, वैसे वह शायद रोज ही ऐसा करता हो पर आज उसे सिर में दर्द है, दोपहर को फिल्म देखी शायद इसी कारण. उसका रिपोर्ट कार्ड मिल गया है, आज वह स्कूल में पहली बार किसी टीचर के घर गया था.

बुधवार, आज बारह तारीख है, उसका मन हो रहा है जल्दी से सोने के लिए लेट जाये, शाम को बगीचे में काम किया, टहलने गयी अकेले, दोपहर को स्वेटर बनाती रही, थकान हो गयी है, जून होते तो.... अब बहुत हो गया अकेले रहना...अब बिलकुल अच्छा नहीं लगता मन करता है उससे ढेर सारी बातें करूं. उसके बिना कितने सारे काम भी तो बढ़ गए हैं न, नन्हा सो गया है, उसकी छुट्टी आज जल्दी हो गयी थी, कल भी ऐसा ही होगा, उसने कहानी लिख ली है पत्रिका के लिए.

“जिंदगी तू भी पड़ोसन की तरह लगती है
आज तोहफे में कुछ दे है तो कल मांगे है”
‘मुन्नवर राना’ का यह शेर उसे अच्छा लगा तो लिख लिया डायरी में.   

  परसों जून आ जायेंगे, सुबह से यह ख्याल आकर मन को सुकून दे गया है, उन्हें महसूस करने लगे हैं वे अब, उनकी हंसी उनका स्पर्श सब स्पष्ट हो गया है, नन्हा कह रहा है पापा के आने पर हलवा-पूरी बनाइएगा, आज दोपहर को इतने दिनों में वह पहली बार एक घंटा बेड में थी, कारण वही, नन्हा भी लेट कर टीवी देख रहा था, उसके स्कूल में आज जाते ही छुट्टी हो गयी पर वह साढ़े बारह बजे ही आ पाया, अब एक हफ्ते बाद स्कूल में पढ़ाई होगी. क्योंकि छह दिन बाद वार्षिक दिवस है. सुबह सामान्य रही सिवाय इसके कि गाजरें निकलीं गार्डन से, जून के लिए गाजर का हलवा बनाना है न, टमाटर भी मिले. उसके एक सहकर्मी सर्वोत्तम तथा आधा किलो मटर दे गए, उसने मंगाए थे. शाम को पड़ोसियों के साथ क्लब गए बीहू का कार्यक्रम था, सवा सात पर लौटे. घर आकर स्क्रेमब्लर खेलते रहे, समय का ध्यान ही नहीं रहा, खाना देर से खाया. कल टीवी पर ‘हुन हुन्शी हुन्शाराम’ गुजराती फिल्म Sदिखाई जायेगी और परसों “सूरज का सातवाँ घोड़ा”, जो वे साथ-साथ  देखेंगे. उसने मन ही मन जून से स्वप्न में आने कि बात कही, मच्छर दानी भी नहीं लगा रहे वे आज, नन्हा इस समय गुड नाईट में नई मैट लगा रहा है.

Saturday, January 12, 2013

वंशी की धुन



कांग्रेस आई को पंजाब के चुनावों में पूर्ण बहुमत मिला है. श्री बेअंत सिंह जी मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे. अच्छा है पंजाब में पुनः जनता का शासन होगा. आज पंजाबी दीदी ने नन्हे और उसे दोपहर को अपने घर बुलाया है, उन्हें कुछ पौध भी देनी है. आज नन्हे के टेस्ट के कारण कल शाम वे घर पर ही खेले, पहला गेम बैडमिंटन का वह अच्छा खेल पाती है पर उसके बाद इतना थक जाती है कि अक्सर जून दूसरा गेम आसानी से जीत जाते हैं. कल रात को एक टेलीफिल्म देखी, “टूटे पंख” रुला दिया जिसने, यूँ तो उसका दिल बहुत कमजोर है जरा सा दुःख देखते ही पिघल जाता है, सिर्फ दुःख ही क्यों कोई भी दिल को छूने वाली बात हो कि आँखें नम हो जाती हैं. हर रोज एक बार तो ऐसा होता ही है, आंसू बिलकुल तैयार रहते हैं. कोई कहानी पढ़े या कविता कोई भाव भरी बात नन्हे से हो या जून से, ऐसा ही होता है. फिर फिल्म में सुधा का अभिनय करने वाली कलाकार ने तो कईयों को रुलाया होगा. वह  उपेक्षित थी और यही दुःख उसे खा रहा था. प्यार न मिले कोई बात नहीं पर उपेक्षा का जहर बहुत दुखदायी होता है. किसी के अस्तित्त्व को नकारना, किसी के प्रति उदासीन रहना वह भी पति या पत्नी के सम्बन्धों में, सचमुच उसका दुःख बहुत बड़ा था. कितनी देर हो गयी है, खाना अभी तक नहीं बना है पर रोज की तरह, पिछले दो-तीन दिन की तरह कुछ पंक्तियाँ उसे लिखनी ही हैं-
बहुत दिन हुए उसके मन की धरती में
एक बीज बोया था किसी ने
प्रेम का बीज
और वह भूल गया
अब उस बीज में अंकुर फूटा है
नन्हीं-नन्हीं शाखाएँ निकलेगी
फिर पत्तियों और फूलों से भर जायेगा
उसके मन का आंगन...
जहां पक्षी कलरव करेंगे

आज शनिवार है, नन्हे का स्कूल बंद है, सारी सुबह उसके साथ खेलते-खिलाते, बतियाते  बीती. इसी कारण साढ़े दस बज गए हैं और उसका काम खत्म नहीं हुआ है, आज कुछ लिखना मुश्किल लगता है फ़िलहाल अभी तो. कल फिर इधर-उधर के कामों में वक्त गुजर गया. चिट्ठियों के जवाब देने थे, छोटी बहन, मंझले भाई, माँ तथा छोटी ननद को खत लिखे. पिछले हफ्ते भी उसने सात पत्र लिखे थे, तीन के जवाब आ चुके हैं. कल धूप थी आज फिर बादल हैं. आज कई सारे पुराने खत पढ़कर जला दिए, फुफेरे भाई के खत में लिखी एक कविता मिली पढ़कर लगता नहीं था कि उसने खुद लिखी है, शायद लिखी भी हो, बहुत अच्छी कविता है, उसने उसे जलाने से पहले डायरी में नोट कर लिया. इतवार रात को बड़ी भाभी का फोन आया, वह एक पल को तो घबरा ही गयी, पर उन्होंने ऐसे ही फोन किया था हाल-चाल जानने के लिए. कल क्लब में टीटी खेला पर अभ्यास छूट जाने के कारण ठीक से नहीं खेल पायी. टीवी पर दुर्गा खोटे पर एक कार्यक्रम देखा, बहुत अच्छा लगा और उनकी यह बात कि हर काम को पूरे मन से करना चाहिए चाहे वह कितना भी छोटा या बड़ा काम हो...यानि  श्रम का सम्मान..और कल सुबह एक महिला चित्रकार तथा कविताओं का संकलन “स्वांत सुखाय” वाली कुमुदनी जी से साक्षात्कार देखा. आजकल टीवी पर बहुत प्रेरणात्मक कार्यक्रम आ रहे हैं, बेहद अच्छे लगते हैं. मन को जैसे उत्साह से भर देते हैं, कुछ भी नहीं बदलता पर फिर भी मन में कहीं वंशी की धुन बजने लगती है. वह भी कुछ करे ऐसा मन होता है, पर ज्यादा कुछ कर नहीं पाती, दोपहर को कल नन्हे को सुलाते-सुलाते खुद भी सो गयी. सोने का मोह छोड़ना होगा, बस कभी-कभी सुबह का यह वक्त मिलता है, शाम को जून के आ जाने के बाद तो पता ही नहीं चलता समय कैसे बीत जाता है.




Wednesday, November 21, 2012

संगीत का उपकरण



जून का फोन आया था, डिब्रूगढ़ से फिलिप्स के एजेंट के आने वाले फोन के बारे में पूछ रहे थे. वे म्युजिक सिस्टम खरीदना चाहते हैं. एक घंटे बाद ही किन्हीं सुनील का फोन आया, उनकी पसंद का डेक आ गया है. पर अब वह कल ही उन्हें बता पायेगी, वैसे जून ने नम्बर दिया है, पर उसे खुद फोन करना अच्छा नहीं लगता, वे व्यस्त हो सकते हैं. उसने अनिता देसाई की किताब पूरी पढ़ ली, एक–एक शब्द तो नहीं पर अंतिम पन्ने पूरी तरह..भविष्य के बारे में जानना कितना नुकसान देह हो सकता है. ज्योतिषी की बात किस तरह उसके दिमाग में घर कर गयी कि..उसका अंत यह हुआ. नायक मर गया, यह लिखा नहीं है पर यही हुआ होगा. दोपहर को पड़ोसिन से भी इस विषय पर कुछ बात हुई. वह भी विश्वास करती है. लेकिन उसे विश्वास नहीं होता कि सब कुछ पहले से ही नियत है..खैर यह एक अंतहीन विषय है, कितनी ही बहस हो सकती है इस पर. नन्हे का स्कूल कल-परसों बंद है, उसने गृहकार्य नहीं किया है अभी तक, खेलने में बहुत समय लगाता है, जब तक जगता है, खेलता ही तो रहता है. बच्चा और खेल दोनों इस तरह जुड़े हैं कि... अभी उसने शाम का नाश्ता भी पूरा नहीं खाया है, पता नहीं किस झोंक में उसने कुछ ज्यादा ही परोस दिया था उसे, ठंड बढती जा रही है, अब उसे अंदर बुला लेना चाहिए, उसने सोचा.

सोनू और उसने जून के लिए दो उपहार खरीदे हैं, उसे पसंद तो आएंगे. शाम होते-होते ठंड बढ़ जाती है, उसे मफलर काम आयेगा वहाँ वैल साईट पर. कितने दिनों बाद तिनसुकिया गयी, पहली बार उसने वहाँ अकेले खरीदारी की. वे दोनों गए थे पड़ोसियों के साथ. और भी कुछ सामान खरीदा, कल वह जून को बताएगी. सुबह उन्होंने जल्दी-जल्दी खाना खाया, साढ़े ग्यारह, बारह तक चलेंगे, ऐसा कहा था पर सवा घंटा इंतजार करना पड़ा. फिर भी सब ठीकठाक रहा.
आज इतवार है, टीवी पर ‘वर्ल्ड ऑफ स्पोर्ट्स’ आ रहा है. दोपहर को उन्हें एक सुखद उपहार  मिला जब जून के एक परिचित कोलकाता से आए, नए वर्ष का एक कैलेंडर और नन्हे के लिए चॉकलेट का एक डिब्बा, साथ में एक सुपारी का डिब्बा, मीठी खुशबूदार सुपारी. कल वही खास दिन है, उनके विवाह की वर्षगाँठ, उसने अभी तक केक नहीं बनाया है, इतवार को टीवी इतना व्यस्त कर देता है.. दोपहर को फिल्म फेयर अवार्ड देखे, इतने सारे सितारे एक साथ. आज तीन-चार दिनों के अखबार भी एक साथ आए हैं, अभी खोलकर भी नहीं देखे हैं. नाख़ून बनाने थे, नन्हे के भी.

जून आज पौने ग्यारह बजे आ गए थे, उन्हें उपहार पसंद आए और उनकी तिनसुकिया की यात्रा की बात भी. इस समय वह डिब्रूगढ़ गए हैं उनका टू इन वन लाने, शाम को उन्होंने  किसी को बुलाया नहीं है, वैसे भी उन्हें वापस आने में सात बज जायेंगे. नन्हा भी आज दोपहर को बेहद खुश लग रहा था, इतने दिनों बाद पापा को देखकर. आज उसे विवाह का दिन जरा भी याद नहीं आ रहा है, अब वह सब एक सपना सा लगता है, बहुत दूर की बात..हाँ एल्बम देखते ही सब जैसे स्पष्ट हो जाता है. छह साल का वक्त कोई कम नहीं होता. जून और वह इस तरह रच-बस गए हैं एक-दूसरे में... एक-दूसरे की आदत हो गयी है कि...

वह लिख ही रही थी कि उस समय घंटी बजी और उसे उठना पड़ा, उनका एक परिचित परिवार था, नन्ही सी बेटी थी उनकी, वे लोग बहुत दिनों बाद आए थे. उनके सामने ही जून आ गए डेक लेकर. फिलिप्स का का बेहद सुंदर मॉडल है. वह पाँच कैसेट भी लाए हैं.

गणित का सिलेबस खत्म हो गया है, परीक्षाएं भी नजदीक हैं, अब उसकी छात्रा कभी-कभी आयेगी कोई समस्या लेकर. आज उन्होंने उस पंजाबी परिवार के दो बेटों को खाने पर बुलाया है. उनके माता-पिता कहीं बाहर गए हैं. उसने सोचा सामने वाली उड़िया लड़की को भी बहुत दिनों से नहीं बुलाया, कल ही उसे कहेगी. आज उसने सभी के पत्रों के जवाब दिए, माँ-पिता, मंझले भाई, छोटे भाई व उसके सास-ससुर, ननद इन सभी ने नए वर्ष के कार्ड्स भेजे हैं और किसी ने जवाब ही नहीं दिया, लोग इतने संगदिल क्यों होते हैं कि फूलों की मुस्कुराहट का भी जवाब नहीं देते.. खैर.