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Monday, July 14, 2014

विज्ञान प्रदर्शनी की रौनक


जून को सम्भवतः सोमवार को मुम्बई जाना पड़े, एक सप्ताह नन्हा और उसे अकेले रहना पड़ेगा, अपने स्वार्थ के कारण नूना ने कहा, भगवान करे ट्रिप कैंसिल हो जाये पर अब वह ऐसा नहीं चाहती यदि जून का जाना आवश्यक है, कम्पनी का लाभ है तो उन्हें वहाँ अवश्य जाना चाहिए.

जून कल चले गये, कल रात उनका फोन काफी देर से आया, वह कुछ देर पूर्व ही सोयी थी, पर नींद गहरी नहीं थी, जून के बिना पहली रात को ऐसा ही होता है, बाहर का गेट, गैराज का गेट और बरामदे का गेट बंद करके भीतर आकर दरवाजा बंद करते करते एक ख्याल कहीं न कहीं से आ जाता है सब ताले ठीक से लग गये न. नन्हा आज स्कूल से देर से आने वाला है, उसके पास आठ घंटे हैं जिन्हें उसे व्यवस्थित ढंग से बिताना है. मौसम ठंडा है, गर्मियों में ऐसा मौसम रहे तो गर्मी का अहसास ही नहीं होता. कल शाम वह अकेले टहलने गयी. जून के न रहने से इस बार उसे उदासी का ज्यादा अहसास हो रहा है, ज्यों-ज्यों उनका साथ बढ़ता जा रहा है, निकटता भी बढ़ रही है, उनका एकनिष्ठ स्नेह नूना को अंदर तक भिगो गया है. she loves him and misses him ! लेकिन वह उदास नहीं है, साधक कभी उदास नहीं होता, उसे अपनी भावनाओं को उचित दिशा देनी होगी, ढेर सारे काम भी हैं. पत्र लिखने हैं, सिलाई करनी है और दोपहर को संगीत क्लास में भी जाना है.

कल शाम उसने नन्हे के स्कूल में बितायी, बच्चे बड़े उत्साह से अपने-अपने प्रोजेक्ट के बारे में बता रहे थे. नन्हा भी खुश था. सुबह एक सखी से बात हुई, वह अपने पुत्र के भविष्य की बारे में उसी तरह चिंतित थी जैसे जून के एक मित्र अपने पुत्र के भविष्य के बारे में, लेकिन उसे नन्हे के भविष्य के बारे में चिंता करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती न ही जून को. उसे समझाना, रास्ता दिखाना उनका काम है लेकिन वह कौन सा रास्ता चुनेगा यह समय स्वयं बतायेगा. आज उन्हें दो मित्रों के यहाँ जन्मदिन और विवाह की वर्षगाँठ के लिए जाना है. दोनों के यहाँ से निमन्त्रण आया है, इसके अलावा तीन और सखियों से बात हुई, एक महिला ने फोन पर पूछा उनके यहाँ सफाई कर्मचारी आया या नहीं, फिर स्कूल की एक टीचर से बात हुई, स्कूल बंद हो गया है.. नन्हे के स्कूल की हेड मिस्ट्रेस  से कल कुछ पल बात हुई. उसे लगा, इन सब बातों को अगर ध्यान से देखें, परखें तो पता चलता है मूलतः सभी इन्सान एक हैं, सभी के कुछ आदर्श हैं, कुछ इच्छाएं हैं, कुछ सपने हैं और सभी उस पूर्णता की तलाश में हैं, जिसे पाने के बाद कुछ पाना शेष नहीं रहता, जिसे जानने के बाद कुछ जानना शेष नहीं रहता !


एक सुहानी सुबह ! वर्षा रुक गयी है और अपना सुखद प्रभाव सब ओर छोड़ गयी है. सब कुछ धुला-धुला और शीतल प्रतीत हो रहा है. पंछी नहा धोकर चहक रहे हैं. नन्हा स्कूल गया तो वह कुछ देर बगीचे में ही टहलती रही. कल वे दोनों जगह गये, दोनों जगह सखियाँ थकी हुई लगीं, जबकि वह भीतर तक तरोताजा महसूस कर रही थी. जून का फोन आया था, इस बार वह ढेर सारे उपहार लाने वाले हैं. पिछले दिनों उसने एक किताब पढ़ी “speed post” जो बहुत रोचक और ज्ञान वर्धक भी है. लेखिका एक संवेदनशील, समझदार और वात्सल्यमयी माँ है, उनके लिखने का तरीका और सोच भी उसे अच्छी लगी. आज जागरण में भूत-प्रेतों के बाद गन्धर्वों के अस्तित्त्व के बारे में बताया जा रहा है, उसे इन सब बातों में विश्वास नहीं है, उसे लगता है मनुष्यों को ज्यादा प्रैक्टिकल होना चाहिए और जमीनी हकीकत से जुड़ा रहना चाहिए. मनुष्येतर जीवों के बारे में जानकर या देवों की पूजा करके वे महान नहीं बन सकते. उसने टीवी ही बंद कर दिया और सोचा कि उसे दिन भर में किये जाने वाले कार्यों की एक सूची ही बना लेनी चाहिए लिखित नहीं तो मानसिक रूप से ही सही. जिस भाव के साथ उसने यह पेज खोला था वह न जाने कहाँ चला गया है, भाव भी असम के मौसम की तरह हैं पल में धूप तो पल में वर्षा, जैसे कल शाम हुआ.

Tuesday, June 17, 2014

बूंदी के लड्डू


Today in the morning when she was doing some work  Nanha said there is a phone call for her from principal mam. She told her in two sentences that she should join the  school on Monday  and that she should bring with herself an application and bio-data. She was happy to get the news, during last few days she was reading about teaching and ideal teacher. She thought God has fulfilled her wish through this opportunity. When she told jun about this he took it nicely and helped her in preparing application and bio data. Yesterday one of her friend’s team stood first in preliminary round of Antakshri competition. Today they will go to see the final.

Today she explained jun, in many ways, why dose  she want to join school and now he is with her wholeheartedly. He was worried of her health problems but she knows active mind and active body produces good health. Yesterday they went to see the 'sur sangm antakshri' by ladies club. It was a superb presentation, a memorable one. Her friend’s team got 3rd prize, from tomorrow a new life awaits her, a life full of work, energy and love.

Yesterday she could not write. Day was hectic and at the end of day she was so tired so was jun. today again she is in school waiting for the bell so that she can go to the class to teach science. Some teachers are sitting here  talking endlessly on various trivial subjects . she is not feeling to participate in their conversations. Today she met other science teacher, she gave her text  book and told how and what to teach the students. tomorrow is total solar eclipse.

Today is jun’s birth day and her holiday. Today in the morning father wished jun , he was very happy, he always becomes very very happy to hear the voice of his parents. She is going to make a b’day card for him. In the evening they will celebrate it with idli sambar and chatni with bundi ke laddu. Tomorrow is 52nd independence day. She thought of telling children about flag hoisting ceremony  in new delhi on lal kila. She will tell them some slogans also.




Thursday, December 5, 2013

यंग आर्किटेक्ट - बिल्डिंग ब्लॉक्स


सुबह के सवा दस हुए हैं. आज आकाश पर सूरज की बादशाहत है कल की तरह बादलों की नहीं. कल नन्हे की गर्दन में हल्का खिंचाव था आज वह ठीक है, वही है कि छोटी-छोटी बातों पर झुंझला रही थी. वह उठ तो जल्दी गया था पर आदत के अनुसार धीरे-धीरे सब काम कर रहा था. जून ने  फोन पर नन्हे के बारे पूछा, जैसा वह लगभग रोज ही करते हैं. आज उसे एक अनपेक्षित फोन आया, एक परिचित अपने बेटे के लिए हिंदी में एक पत्र लिखवाना चाहते थे, उसकी एक सखी का फोन भी आया, उसे मेडिकल गाइड से बच्चों की कान की समस्या के बारे में जानकारी चाहिए थी. कल रात उन्होंने रजाई को विदा दे दी, अब कम्बल से ही काम चल जायेगा. कल जून और वह दोनों ही उत्साह में कुछ कमी महसूस कर रहे थे, आज वह ठीक है, इसका अर्थ हुआ मौसम का असर मिजाज पर पड़ता ही है.

अचानक बिजली चली गयी है, वह करी पत्ता लेने बगीचे में गयी तो देखा बिजली विभाग के कर्मचारी घर के सामने वाली स्ट्रीट लाइट ठीक कर रहे हैं, उसे याद आया कल ही जून ने शिकायत दर्ज करवाई थी. आज फिर बादल हैं, रात को आंधी-तूफान भी आया, जिसका अंदाजा हर तरफ बिखरे पत्तों से लगाया जा सकता है. आज नन्हे का विज्ञान का इम्तहान है और कल अंतिम संस्कृत का, उसके बाद वे यात्रा की तयारी में लग जायेंगे. कल दोपहर अख़बार पढ़ने में व्यतीत हुई, टूथ ब्रश और हेयर डाई के साइड इफ़ेक्ट पर दो लेख पढ़े, दोनों ही सीमा में इस्तेमाल करने चाहिए. आजकल बंधी बंधाई दिनचर्या है, बीच-बीच में कुछ समय seven summers के लिए भी निकाल लेती है. बिजली की गाड़ी चली गयी है पर लाइट आयी नहीं है.

दस बजने वाले हैं, मन कुछ उखड़ा सा है, सुबह नन्हे पर फिर झुंझलाई, ज्यादा तो नहीं पर थोड़ा सा भी क्रोध करना नन्हे पर या किसी पर भी उसे स्वयं अपनी हार लगता है, अपनी तौहीन भी, मन देर तक परेशान रहता है. शैतान हर रूप में उन्हें लुभाता है और इसके चंगुल में वे फंस ही जाते हैं. आज नन्हे का आखिरी इम्तहान है और उसे ख़ुशी है कि आज से उसे डांटने की कोई जरूरत नहीं रहेगी. आज धूप निकली है पर पिछली वर्षा के कारण सारे फूल कुम्हला गये हैं, धूप पाकर वे फिर खिल उठेंगे. काश ऐसी कोई धूप उसके लिए भी हो जिसे पाकर...अच्छी सी एक गजल या seven summers के कुछ पेज ! आज वह टोमेटो सॉस बना रही है, बगीचे के लाल रस भरे टमाटरों से !

बारिश लगतार हो रही है, सर्दियां जाते-जाते फिर लौट आई हैं. पता नहीं बादलों में इतना पानी कहाँ से आया है. कल भी दिन भर बदली बनी रही और आज तो दिन में भी रात का अहसास हो रहा है. नन्हा young architect से नये घर का मॉडल बना रहा है. दो दिन बाद उन्हें जाना है, मौसम तब तक ठीक हो जायेगा ऐसी प्रार्थना भगवान से करनी चाहिए. आज उसे खत भी लिखने हैं और दोपहर को हिंदी कक्षा लेने भी जाना है. शाम को क्लब जाना है एक सखी से किया हुआ वादा निभाने के लिए. कल शाम थोड़ी पैकिंग की, खर्चे का हिसाब भी लगाया लगभग तीस हजार का बजट है. इतनी महंगाई के जमाने में एक महीना घूमने में इतना खर्च तो होगा ही, लेकिन राजस्थान के सुंदर किलों और रेतीले मैदानों की कल्पना करता हुआ मन रूपये-पैसे के बारे में सोचना ही नहीं चाहता.