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Thursday, June 14, 2018

रिश्तों का इन्द्रधनुष



साढ़े दस बजे हैं सुबह के, कुछ देर पहले ही वह बड़े भाई के साथ एक पार्क में टहल कर आई है. दिल्ली की हर कालोनी में पार्कों की सुंदर व्यवस्था है, बढ़ते हुए प्रदूषण से राहत पाने का एकमात्र सरल उपाय. ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के पैंतीस वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में सम्मिलित होने वह कल ही असम से एक सप्ताह के लिए यहाँ आई है. वे घर में प्रवेश कर ही रहे थे कि जून का फोन भी आया, वह ठीक हैं, आए दिन के टूर के कारण अब उन्हें भी अकेले रहने की आदत हो गयी है, स्वयं पर निर्भर हो गये हैं. यहाँ घर में काफी अस्त-व्यस्तता है, लगभग एक वर्ष पूर्व भाभी के चले जाने के बाद यह स्वाभाविक भी है, उनकी छाप घर के हर कोने में है, सामने ही उनकी मुस्कुराती हुई तस्वीर रखी है लगता है अभी बोल पड़ेंगी. सोच रही है सफाई का काम कहाँ से शुरू करे, या महरी के आने के बाद ही उचित रहेगा. भाई नित्य की साधना कर रहे हैं. कल रात छोटी भाभी ने डिनर के लिए बुला लिया था, वहाँ से लौटे तो कुछ देर ठंडी हवा में टहलते रहे. भाई सोने चले गये, पर उसे देर रात तक नींद नहीं आ रही थी, ‘शिवरात्रि’ को जागरण करना चाहिए यह लिखा ही है शास्त्रों में. सो देर तक ध्यान करती रही. अभी उत्सव में तीन दिन शेष हैं, परिवार के अन्य जनों से मिलने आज दोपहर को ‘घर’ के लिए निकलना है.

सुबह पांच बजे ही नींद खुल गयी. चालीस मिनट तक खुली हवा में भ्रमण किया, प्राणायाम भी, तन व मन दोनों हल्के हो गये हैं. सदा की तरह पिताजी ने सुबह ही रेडियो पर ‘विविध भारती’ लगा दिया है. कल शाम सात बजे वे यहाँ पहुँच गये थे. पिताजी, छोटी भाभी व उनके माता-पिता सभी ने स्वागत किया. ‘एओएल’ के कार्यक्रम के बारे में बातचीत हुई. आज कोर्ट में सुनवाई है. पर्यावरण को इस कार्यक्रम से खतरा है, इस बात के आधार पर जन याचिका दायर की गयी है. शाम को छोटा भाई भी आ गया, उसने पिताजी को ‘किन्डल’ दिया, भाई ने उसमें कई किताबें डाउनलोडन कर दी हैं. कल देहरादून जाना है, जहाँ दीदी व बड़ी बुआ जी रहती हैं. आज कुछ उपहार लेने बाजार जाना है.

आज सुबह भी जल्दी उठे वे. पौने आठ बजे वे घर से चल दिए. चौक तक जाने के लिए सीधी सड़क मिलेट्री की भर्ती की कारण बंद थी सो काफी घूम कर जाना पड़ा. गन्तव्य तक पहुंचने में ढाई घंटे लग गये. बुआजी के पैर का कुछ महीने पहले आपरेशन हुआ था, वॉकर के सहारे चल रही थीं. उन्होंने सुंदर वस्त्र पहने थे तथा एक शांत व सुंदर वृद्धा लग रही थीं. उनका पोता व पोती, दोनों बच्चे भी बहुत सुंदर व स्मार्ट लग रहे थे. गली भी साफ-सुथरी थी. देश में चली विकास की लहर का असर हो सकता है. वहाँ से फिर वे दीदी के यहाँ गये. छोटी व बड़ी भांजियाँ उनके दोनों पुत्र व पुत्री, बड़ी की सास तथा पति, दीदी व जीजाजी सभी ने स्वागत किया. उनके बगीचे से तोड़ा गन्ना व खट्टे-मीठे लुकाठ खाए तथा ढेर सारा पुदीना व कच्चे पपीते लेकर वे लौट आये. रास्ते में ममेरे, चचेरे व फुफेरे भाई-बहनों से फोन पर बात की. इस समय रात्रि के पौने दस बजे हैं. भाई पापाजी को ध्यान के सूत्र समझा रहे हैं. आज से कुछ वर्ष पहले वह इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकती थी कि उन दोनों में आत्मीयता इतनी बढ़ सकती है. उसे अच्छा लग रहा है यह देखकर कि भाई बहुत शांत हो गये हैं तथा ध्यान करने लगे हैं. दीदी भी हर घटना के पीछे सकारात्मकता ही देखती हैं. कुल मिलाकर आज की यात्रा अच्छी रही, उसे स्वयं थोड़ा कम बोलना चाहिए, अभी भी वाणी पर संयम नहीं है. कल सुबह वापस दिल्ली जाना है.

Thursday, September 25, 2014

अमितव घोष की किताब



पिछले दिनों दो कार्य उससे ऐसे हुए हैं जो आज ध्यान के समय आकर कचोट रहे थे. जून को दफ्तर में किसी ने तोहफा दिया जो नूना के काम में आने वाला था, पहले तो नूना ने आनाकानी की पर बाद में स्वीकार कर लिया, जून ने इसे लिया यह भी ठीक नहीं था चाहे देने वाला उसके बदले में अभी कोई लाभ नहीं चाहता, पर भविष्य में जब भी उनके मध्य व्यवहार होगा इस उपहार की बात दोनों को याद रहेगी. दूसरी बात कि कल एक महिला अपने बीमार पुत्र का हवाला देकर कुछ सहायता मांगने आई थी, देखने में अच्छी खासी लग रही थी, उसने पात्रता/ सुपात्रता का बहाना बनाकर उसे कुछ भी नहीं दिया जबकि उस दिन मीटिंग में कुछ खरीद लिया, यह पैसे उसके कितने काम आ सकते थे. ईश्वर ने उन्हें इस योग्य बनाया है कि वे सहायता कर सकते हैं फिर अपने दरवाजे पर आये याचक को जब वे कठोर हृदय बन दुत्कार देंगे तो ईश्वर के दरवाजे पर उनकी फरियाद अस्वीकार होती रहे इसमें कौन सी बड़ी बात है. कल ही प्रायश्चित के महत्व पर सुना था आज वह अवसर भी आ गया है. उस महिला का दुःख तो किसी न किसी ने दूर कर ही दिया होगा पर उसके मन की कचोट जाने कब दूर होगी.

कल इतवार के कारण दिन भर कुछ नहीं लिखा. सुबह सफाई में जुट गये, दोपहर को कुछ देर टीवी और शाम को सुहाने मौसम में भ्रमण. The Golden Palace भी पढ़ी, काफी रोचक किताब है. आज इस समय सुबह के सवा आठ बजे हैं. राम नवमी है आज. उतर भारत में अवकाश का दिन. कुछ देर पूर्व छोटे भाई का फोन आया, उसके बैंक में क्लोजिंग है सो जाना पड़ेगा. उससे बात करके ख़ुशी हुई, सहोदरों से बात करके एक विशेष प्रसन्नता का अनुभव होता है. आज प्रार्थना में देर तक बैठ सकी. सुबह समाचारों में सुना, देश भर में कस्टम अधिकारियों के यहाँ छापे पड़ रहे हैं, करोड़ों की सम्पत्ति जब्त की जा रही है. वर्षों तक सरकार आख मूंद कर बैठी रहती है जबकि उसकी आँखों के सामने ही सब घटित हो रहा होता है. आज नन्हे के लिए एक लडकी का फोन आया जिसने दोस्त कहकर परिचय दिय नाम नहीं बताया. आवाज उसकी पुरानी स्टूडेंट से मिलती-जुलती थी. नन्हे के स्कूल में सभी टीचर्स काफी गम्भीर हैं इस वर्ष, वह भी नियमित पढ़ने बैठता है. उनके वक्तों से आज काफी कुछ बदल गया है. वे किसी तरह रट कर पास हो जाते थे पर आज के बच्चे सीखते व समझते हैं तभी इतने इतने अंक भी पाते हैं, उस समय पढ़ाई का सिस्टम ही अलग था.

कल रात भर वर्षा होती रही, मौसम ठंडा हो गया है. सुबह-सुबह एक सखी का फोन आया, नन्हे के बारे में पूछ रही थी, कल स्कूल से आया तो ढीला था, टिफिन भी वापस ले आया था, सो गया, रात को दवा दी अब ठीक है. वह फिल्म देखने के लिए बुला रही थी, नहीं जाना था उसे, वह इतने अधिकार से बुला रही थी कि एक बार तो मन हुआ पर जून और नन्हे को देखकर नहीं गयी. इतने दिनों से ‘रूपकुमार राठौर’ के कार्यक्रम में जाने को उत्सुक थी अब वह शौक भी नहीं रहा है. परिवार के सभी सदस्य जहाँ न जा सकें वहाँ जाना कुछ जंचता नहीं. गजल सुनना और वह भी तरन्नुम में... एक नायाब अनुभव होगा. अभी उस कार्यक्रम में बहुत दिन शेष हैं सो उसके बारे में सोचकर ज्यादा समय और ऊर्जा व्यय करना व्यर्थ है. कल शाम उड़िया सखी आई, उसे गुलदाउदी के पौधे चाहिए थे, उसने कुछ पौधे नये गमलों में से भी दिए जिनके फूल उन्होंने भी अभी तक नहीं देखे हैं. नन्हा आज घर पर ही पढ़ाई कर रहा है. आज भी भाई से बात हुई, जून ने उससे घर में चल रहे कार्य के बारे में पूछा, लकड़ी का काम अभी तक चल रहा है. फर्श जो उनके सामने बन गया था उसकी घिसाई का काम भी अभी तक नहीं हुआ है. जितना जल्दी हो सके उन्हें इस मकान को बेच देना है. उसकी किताब की पांडुलिपि मिल जाने की खबर अभी तक नहीं मिली है, वक्त आने पर सभी कार्य अपने आप होते जायेंगे, उसे ईश्वर पर उसके कार्यों पर पूरा भरोसा है, इसका अर्थ यह नहीं कि वह भाग्यवादी है बल्कि यह कि वह धैर्यशील है. उसने ध्यान दिया लिखाई उतनी सुंदर नहीं है यह उसके मन की उद्व्गिनता का संकेत तो नहीं, यह बेचैनी ही तो जीवन का संकेत है !


Friday, March 21, 2014

नये का आगमन


सुबह के सवा आठ बजे हैं, कुछ देर पहले उसने ध्यान करने का प्रयास किया, पर इस सत्य से सामना हुआ कि जब मन में कोई बात हो तो ध्यान बंट जाता है और सफलता नहीं मिलती. उसके मन में दो विचार चल रहे हैं, पड़ोसिन आज शाम को क्लब में होने वाली क्विज प्रतियोगिता में भाग लेने जा रही है उसे फोन करना है और कल हुई बच्चों की क्विज प्रतियोगिता का परिणाम पूछना है. दूसरी बात यह की उसके मुंह का स्वाद कुछ ठीक नहीं लग रहा कुछ चिपचिपा सा..सम्भवतः पाचन क्रिया ठीक न होने के कारण.

आज इतवार है, जून और नन्हा दोनों कम्प्यूटर के साथ व्यस्त हैं, जून के एक केरेलियन मित्र आये हैं, he is computer wizard ! कल वे क्लब गये, पड़ोसिन की टीम चौथे स्थान पर रही, उसने फोन किया, उसकी आवाज में ख़ुशी थी कुछ पाने का उल्लास ! जून प्रिंटर भी ले आये हैं, और दीपक चोपड़ा की किताब से बनाया उसका कैलेंडर दीवार पर लगाने के लिए तैयार है. she knows, laws are too good to apply ! but she will try.

आज उन्हें तिनसुकिया जाना है, नया टीवी खरीदने, कल पुराना ओनिडा सात हजार में बिक गया. कई वर्ष वह उनके साथ रहा, अब किसी और का घर आबाद करेगा. उसे याद है वे पुराने घर में थे, वह उन दिनों घर गयी हुई थी, जून ने पास ही रहने वाले एक दक्षिण भारतीय मित्र से खरीदा था, वे लोग तब कम्पनी छोड़कर जा रहे थे. कल पत्रों के जवाब का दिन है पर पिछले पन्द्रह दिनों से कोई पत्र नहीं आया है, उसने सोचा, अबसे महीने में एक बार ही करेगी पत्र लिखने का काम. आजकल न किसी के पास पत्र का जवाब देने का समय है और न ही पत्र पढने का. माँ-पापा भी उम्र के साथ-साथ सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो रहे हैं. कल शाम वे क्लब नहीं गये, नन्हे को कम्प्यूटर का आकर्षण था और उसे इतवार की शाम का भारीपन लग रहा था. सुबह उठी तो फिर उससे पहले एक स्वप्न चल रहा था, मन एक मिनट के लिए भी शांत नहीं बैठता, नींद में भी नहीं, शायद यही जीवन है. मन का यही काम है कुछ न कुछ बुनते रहना. ध्यान करने बैठी तो वॉयल के कपड़े पर कढ़ाई दिखने लगी. creative mind की यही तो पहचान है. अज नन्हे का तीसरा टेस्ट है, उसे उनसे ज्यादा नये टीवी का इंतजार है.

फिलिप्स का नया टीवी बहुत अच्छा है, देखने में भी और चलाने में भी, आवाज काफी जोरदार है और तस्वीर को कई तरह से एडजस्ट कर सकते हैं, सारा काम रिमोट से होता है. कल वे नन्हे के आने से पहले घर पहुंच गये थे पर टीवी कार से घर में नहीं लाये थे, पर उससे रहा नहीं गया और उसके खाना खाने से पहले ही उन्होंने टीवी चलाया, शाम भर घर में ही रहे, वैसे भी गर्मी बहुत थी. नन्हा पढ़ाई करता रहा वह सुनती रही जून विश्राम करते रहे.कड़कती धूप में टूटी फूटी सडक पर गाड़ी चलाना इतना आसान नहीं था, वापसी में कह रहे थे कि गाड़ी बदलने का वक्त भी आ गया है, शायद इसी वर्ष वे नई कार भी ले लें. आज भी धूप तेज है, माली लॉन में घास काट रहा है, कल कहा था उसने कि सुबह पांच बजे आयेगा ताकि ठंडे वातावरण में ही काम खत्म कर  दे पर शायद उसकी नींद नहीं खुली होगी. कल उसने अपने जन्मदिन के लिए स्वयं ही एक उपहार लिया, नील रंग की तांत की साड़ी ! नन्हे के लिए नाईट ड्रेस और टीवी जो जून ने काफी देखभाल के बाद और मोलभाव के बाद ही लिया. एक दिन एक मित्र के यहाँ बैठे-बैठे ही उनके मन में विचार आया कि पुराना अब निकाल देना चाहिए, हर कार्य पहले एक विचार ही तो होता है.



Wednesday, July 24, 2013

इम्तहान इम्तहान

पिछले चार दिन व्यस्तता में बीते. पहला दिन रविवार था, सोमवार को एक सखी के यहाँ गयी थी, शाम को नन्हे को पढ़ाने में व्यस्त थी, मंगल, बुध को शाम को खेलने भी नहीं जा पाई. आज नन्हे का पहला इम्तहान है, गणित का तैयारी ठीक हुई है, अब उसके अपने ऊपर है. जितनी चिंता उसे है उससे ज्यादा नहीं तो उतनी उन्हें भी है, जून से थोड़ी ज्यादा उसे है, अभी सोशल साइंस का पेपर बनाना है. इस तरह छोटे-छोटे इम्तहान देते वह एक दिन जिन्दगी के बड़े इम्तहान देने के योग्य भी बन जायेगा. सुबह के दस बजे हैं, अभी-अभी ‘सोना चाँदी’ पीटीवी का एक हास्य धारावाहिक देखा. आज बगीचा बहुत साफ-सुथरा लग रहा है, कल ही घास काटी गयी है. गुलाबी फूल इसकी शोभा बढ़ा रहे हैं. कल जून ने क्लब की पत्रिका के लिए लिखी उसकी दूसरी रचना भी टाइप कर दी है कम्प्यूटर पर. उन्होंने यह भी कहा, वह लिख सकती है और उसे कुछ कविताएँ हिंदी पत्रिकाओं को भी भेजनी चाहिएं. उसने सोचा कि उन्हें कहेगी वह सिर्फ लिख सकती है उन्हें टाइप करने, भेजने का काम उसके बस के बाहर है. वह  जानती है उसके कहने पर वे ये काम भी कर देंगे. उन्हें अगले महीने शायद मद्रास जाना पड़े, उनकी विवाह की सालगिरह पर उसे अकेले रहना होगा.
कल नन्हे ने परीक्षा में एक प्रश्न का उत्तर नहीं लिखा, आते हुए भी भूल से छूट गया, बहुत देर तक परेशान था, लेकिन बाद में भूल गया, अपनी गलतियों पर देर तक दुःख मनाते रहना भी कहाँ की बुद्धिमानी है? हाँ, इतना जरुर है कि वही  गलती भविष्य में न करे. आज ठंड ज्यादा नहीं है, धूप निकली है चाहे धुंधली सी ही है. नन्हे और उसके मित्र को बस में बैठकर जब वह और पड़ोसिन लौट रहे थे तो उसने अपनी परेशानी के बारे में बताया, वह अपनी लम्बी बीमारी से घबरा गयी है. नूना को लगता है, किसी भी तरह से उसकी सहायता करे, उसने सोचा जब भी समय मिलेगा वह कुछ देर के लिए उसके पास जाएगी. उसे मेडिकल गाइड में दिल के बारे में पढ़ना भी चाहिए.
पिछले कई दिनों से कुछ नहीं लिखा. इस पल अचानक महसूस होने लगा, कहीं कुछ छूट रहा है, जो पकड़ में नहीं आ रहा. दिल में एक हौल सा उठ रहा हो जैसे, अकेलेपन का एक अहसास कचोटने लगा है. यह साल विदा लेने को है, सिर्फ तीन दिनों के बाद एक नया साल आ जायेगा कुछ नई उम्मीदें और नये सपने लिए. इस बार आने वाले साल के लिए कोई कविता नहीं लिखी, कोशिश ही नहीं की. नये वर्ष के कार्ड आने शुरू हो गये हैं जैसे उन्होंने भी सभी को भेजे हैं, उन सभी को जिन्हें इस विशाल संसार में अपना कहते हैं, जिनसे उनका  परिचय है अगर वे लोग भी न होते तो वे कितने अकेले होते....
वर्ष का अंतिम दिन, समय, शाम के सात बजे हैं. वे लोग डिश एंटीना पर ‘जी टीवी’ पर नये वर्ष के उपलक्ष में कार्यक्रम देख रहे हैं. वे बहुत खुश हैं. कल एक मित्र परिवार के साथ तिनसुकिया गये थे, खाना भी बाहर खाया, जून ने उसे एक पुलोवर उपहार में दिया, विवाह की वर्षगाँठ के लिए. आज साल के अंतिम दिन बीते साल की की बातें याद आ रही हैं, कुल मिलाकर यह वर्ष अच्छा बीता लेकिन कुछ घटनाएँ ऐसी भी हुईं जो दुखद थीं जैसे हरियाणा में हुआ अग्निकांड.





Wednesday, November 21, 2012

संगीत का उपकरण



जून का फोन आया था, डिब्रूगढ़ से फिलिप्स के एजेंट के आने वाले फोन के बारे में पूछ रहे थे. वे म्युजिक सिस्टम खरीदना चाहते हैं. एक घंटे बाद ही किन्हीं सुनील का फोन आया, उनकी पसंद का डेक आ गया है. पर अब वह कल ही उन्हें बता पायेगी, वैसे जून ने नम्बर दिया है, पर उसे खुद फोन करना अच्छा नहीं लगता, वे व्यस्त हो सकते हैं. उसने अनिता देसाई की किताब पूरी पढ़ ली, एक–एक शब्द तो नहीं पर अंतिम पन्ने पूरी तरह..भविष्य के बारे में जानना कितना नुकसान देह हो सकता है. ज्योतिषी की बात किस तरह उसके दिमाग में घर कर गयी कि..उसका अंत यह हुआ. नायक मर गया, यह लिखा नहीं है पर यही हुआ होगा. दोपहर को पड़ोसिन से भी इस विषय पर कुछ बात हुई. वह भी विश्वास करती है. लेकिन उसे विश्वास नहीं होता कि सब कुछ पहले से ही नियत है..खैर यह एक अंतहीन विषय है, कितनी ही बहस हो सकती है इस पर. नन्हे का स्कूल कल-परसों बंद है, उसने गृहकार्य नहीं किया है अभी तक, खेलने में बहुत समय लगाता है, जब तक जगता है, खेलता ही तो रहता है. बच्चा और खेल दोनों इस तरह जुड़े हैं कि... अभी उसने शाम का नाश्ता भी पूरा नहीं खाया है, पता नहीं किस झोंक में उसने कुछ ज्यादा ही परोस दिया था उसे, ठंड बढती जा रही है, अब उसे अंदर बुला लेना चाहिए, उसने सोचा.

सोनू और उसने जून के लिए दो उपहार खरीदे हैं, उसे पसंद तो आएंगे. शाम होते-होते ठंड बढ़ जाती है, उसे मफलर काम आयेगा वहाँ वैल साईट पर. कितने दिनों बाद तिनसुकिया गयी, पहली बार उसने वहाँ अकेले खरीदारी की. वे दोनों गए थे पड़ोसियों के साथ. और भी कुछ सामान खरीदा, कल वह जून को बताएगी. सुबह उन्होंने जल्दी-जल्दी खाना खाया, साढ़े ग्यारह, बारह तक चलेंगे, ऐसा कहा था पर सवा घंटा इंतजार करना पड़ा. फिर भी सब ठीकठाक रहा.
आज इतवार है, टीवी पर ‘वर्ल्ड ऑफ स्पोर्ट्स’ आ रहा है. दोपहर को उन्हें एक सुखद उपहार  मिला जब जून के एक परिचित कोलकाता से आए, नए वर्ष का एक कैलेंडर और नन्हे के लिए चॉकलेट का एक डिब्बा, साथ में एक सुपारी का डिब्बा, मीठी खुशबूदार सुपारी. कल वही खास दिन है, उनके विवाह की वर्षगाँठ, उसने अभी तक केक नहीं बनाया है, इतवार को टीवी इतना व्यस्त कर देता है.. दोपहर को फिल्म फेयर अवार्ड देखे, इतने सारे सितारे एक साथ. आज तीन-चार दिनों के अखबार भी एक साथ आए हैं, अभी खोलकर भी नहीं देखे हैं. नाख़ून बनाने थे, नन्हे के भी.

जून आज पौने ग्यारह बजे आ गए थे, उन्हें उपहार पसंद आए और उनकी तिनसुकिया की यात्रा की बात भी. इस समय वह डिब्रूगढ़ गए हैं उनका टू इन वन लाने, शाम को उन्होंने  किसी को बुलाया नहीं है, वैसे भी उन्हें वापस आने में सात बज जायेंगे. नन्हा भी आज दोपहर को बेहद खुश लग रहा था, इतने दिनों बाद पापा को देखकर. आज उसे विवाह का दिन जरा भी याद नहीं आ रहा है, अब वह सब एक सपना सा लगता है, बहुत दूर की बात..हाँ एल्बम देखते ही सब जैसे स्पष्ट हो जाता है. छह साल का वक्त कोई कम नहीं होता. जून और वह इस तरह रच-बस गए हैं एक-दूसरे में... एक-दूसरे की आदत हो गयी है कि...

वह लिख ही रही थी कि उस समय घंटी बजी और उसे उठना पड़ा, उनका एक परिचित परिवार था, नन्ही सी बेटी थी उनकी, वे लोग बहुत दिनों बाद आए थे. उनके सामने ही जून आ गए डेक लेकर. फिलिप्स का का बेहद सुंदर मॉडल है. वह पाँच कैसेट भी लाए हैं.

गणित का सिलेबस खत्म हो गया है, परीक्षाएं भी नजदीक हैं, अब उसकी छात्रा कभी-कभी आयेगी कोई समस्या लेकर. आज उन्होंने उस पंजाबी परिवार के दो बेटों को खाने पर बुलाया है. उनके माता-पिता कहीं बाहर गए हैं. उसने सोचा सामने वाली उड़िया लड़की को भी बहुत दिनों से नहीं बुलाया, कल ही उसे कहेगी. आज उसने सभी के पत्रों के जवाब दिए, माँ-पिता, मंझले भाई, छोटे भाई व उसके सास-ससुर, ननद इन सभी ने नए वर्ष के कार्ड्स भेजे हैं और किसी ने जवाब ही नहीं दिया, लोग इतने संगदिल क्यों होते हैं कि फूलों की मुस्कुराहट का भी जवाब नहीं देते.. खैर.

Monday, October 8, 2012

आसमानी मैक्सी



रात्रि के आठ बजे हैं, जून चले गए थे साढ़े छह बजे ही. कोलकाता में कल उनका कोई इंटरव्यू है, दो दिन बाद वापस आएंगे. सुबह वे देर से उठे, सोये ही थे रात दो बजे. सारी शिकायतें सारे शिकवे दूर हो गए और वे दोनों फिर निकटता का अनुभव करने लगे. यही सच्चाई है कि वे दोनों एक हैं, व एक-दूजे के लिए है, एक दूसरे के लिए जीते हैं. जब उसे छोडकर ऊपर आई तो रुलाई आ गयी थी. दो दिन से उसका साथ मिल रहा था, तन-मन पुलक से भरा था और अब रह गयी हैं यादें, वह पहले से सबल हो गया है, आत्मविश्वास से भरा हुआ.. इधर वह पहले से दुबली हो गयी है. जून कहते हैं कि असम जाकर वह भी पुष्ट हो जायेगी. वह अपने घर की कल्पना में भर गयी, पहले तो घर की सफाई करनी होगी, तीन-चार दिन तो लग ही जायेंगे सब ठीक-ठाक करने में.

जून अभी ट्रेन में होंगे शायद सुबह की चाय पी रहे होंगे. आज सुबह से पानी नहीं आया सो स्नान भी नहीं हो सकता, जब तक पानी नहीं आता. छह बजे हैं, दिन भर की बातें अभी से लेकर बैठ गयी है, जाने कैसे बीतेगा दिन आज का. नन्हा सोया है, पिछले तीन दिन वह जल्दी जग जाता था, आज शायद अपने पुराने वक्त पर उठेगा. जून उसके लिए एक हवाई जहाज लाए हैं बैटरी से चलने वाला, उसे बहुत पसंद है. उसने उसे ‘एयर क्राफ्ट’ पुस्तक दी है, कितने उत्साह से वह जहाजों की तस्वीरें देख रहा है, फिर उसी उत्साह से उसे दिखाता है. पहले से ही उसकी रूचि इस दिशा में थी अब जहाज मिल जाने से और भी बढ़ गयी है, इस बार की हवाई यात्रा में शायद वह पहले की तरह सोयेगा भी नहीं.

हो सकता है आज ही वह आ जाएँ. आज मन अपेक्षाकृतशांत है, समझ नहीं आता, जून के बिना इतना अकेलापन महसूस किया उसने, जैसे अधूरापन, खालीपन मन के पर्याय बन गए हों. उसका अतिशय प्रेम देखकर ...कभी कभी मन कैसा भीगा –भीगा सा रहता है, ऐसे में वह ही उसे कुछ कह देती है, अपनी प्रकृति से विवश होकर ही, वह उसके लिए क्या है और उसके लिए कितना प्रेम है मन में शायद वह खुद भी नहीं जानती उस क्षण. कल दोपहर बाद वह रोते हुए नन्हे को सुलाने लगी तो उसे रोते और खांसते-खांसते उसके कपड़ों पर ही उबकाई आ गयी, माँ वहीं लेटी थीं, मगर सहायता करना तो दूर उठकर देखा तक नहीं. उस वक्त भी जून याद आए. आज उनका एक पुराना खत डाक से मिला, उदासी भरा खत. वह जो कढ़ाई का काम कर रही थी आज पूरा हो गया. अभी कुछ देर पहले एक धागे की तरह का, गुलाबी रंग का जीव उसकी बाँह पर गिरा, ननद ने कहा, सांप का बच्चा था, दो दिन पूर्व रसोईघर में भी वैसा ही एक जीव निकला था, लगता है घर में कहीं सांप हैं जरूर.

जुलाई माह का प्रथम दिवस, यानि आषाढ़ मासे प्रथम दिवस...पर वर्षा का तो नाम नहीं..कल रात कितनी उमस थी. देर रात तक नींद नहीं आयी, शायद वह आ जाएँ मन में कहीं दूर आशा थी. वैसे वह जानती थी कि जून शाम की ट्रेन से आएंगे रात को नहीं. सुबह वक्त नहीं मिला सो अब डायरी निकाली है, एक बहाना है यह उसे याद करने का, हर क्षण तो वैसे ही उसका ध्यान  रहता है.
कल वह आ गए थे, इस समय उसे बिना बताए कहीं गए हैं, आस-पास ही गए होंगे, क्योंकि कुरता-पजामा पहना है.
दो दिन नहीं लिख सकी, कारण वही, व्यस्तता कम और लापरवाही ज्यादा. आज सभी अभी तक सो रहे हैं, वह यहाँ बैठी है, कल जून के एक मित्र द्वारा दी गयी पार्टी में वे लोग एक होटल में गए, अच्छा आयोजन था, सामिष भोजन के कारण भी कोई समस्या नहीं हुई, वे अलग ही बैठे थे. जून किसी भी तरह माँ-पिता को खुश देखना चाहते हैं, अपनी बातों से उनको बहलाना चाहते हैं, मगर वह यह भूल जाते हैं कि माँ-बाप बच्चे को बहला सकते हैं, पर बच्चे माँ-बाप को नहीं.

परसों शाम उन्हें जाना है, उसने सोचा है आज से ही कपड़े समेटने शुरू कर देगी और भी छोटा-मोटा सामान. कल रात बिजली चली गयी और उन्हें छत पर सोना पड़ा, दिन भर भी गर्मी बहुत थी बिजली का खेल जारी था. वे लोग कुछ देर के लिए बाहर निकल गए पर जब लौटे तब भी बिजली नहीं आयी थी. अभी कुछ देर पूर्व ही वह उठकर आयी है. कल जून ने उसे एक उपहार लेकर दिया सुंदर बटनों वाली आसमानी रंग की एक सुंदर मैक्सी.


Tuesday, April 24, 2012

गन्ने के खेत



आज उसका पत्र आया रजिस्टर्ड पत्र था, उसमें कुछ पैसे भी थे. नूना ने सोचा कि वह उसका इतना ध्यान रखता है कि अपने लिये कम खर्च करके उसके लिये उपहार देना चाहता है. वह मोरान में है सो उसे खत भी देर से मिल पाएंगे. सुबह वह अपने पूर्व समय पर उठी, कोई स्वप्न देख रही थी. शाम को शर्मा आंटी के साथ दूध लेने गयी, उसके आगे भी निकल गए वे लोग, रजवाहे तक, वहाँ से गन्ने के खेत भी नजर आते हैं, अच्छा लगा पर माँ के साथ शाम को टहलना और भी भाता है.
सुबह धूप में बैठकर वह ईख की शहद सी मीठी गनेरियां खा रही थी कि शर्मा आंटी के साथ मिलेट्री कैंटीन जाने के लिये माँ ने कहा और उसने वहाँ से जून के लिये मोज़े खरीदे. दोपहर बाद उसके स्वेटर के बटन लेने गयी, स्वेटर बन गया है, पार्सल भी सिल दिया है, कल भेज देगी.

आज कितना इंतजार किया उसने डाकिये का पर...कल आयेगा यह सोचकर मन को मना लिया. ठंड बढ़ गयी है सुबह सवा छह बजे भी बहुत अँधेरा था और हवा काटती हुई सी चुभ रही थी. कोई श्रीमती गुप्ता आयीं थीं, अपनी दक्षिण भारत की यात्रा के संस्मरण बहुत चटखारे ले लेकर सुना रही थीं.

Thursday, April 12, 2012

अदरक की चटनी


आज सुबह कुछ देर के लिये और फिर शाम को उसे घबराहट हो रही थी, पर कुल मिलाकर दिन ठीकठाक ही रहा. सुबह वह इसी कारण देर से उठी, जून पहले ही उठकर चला गया था. दोपहर को फिर सो गयी एक स्वप्न भी देखा, उठकर शाम के नाश्ते के लिये बेसन का हलवा बनाया जो स्वप्न के कारण ही बनाया था. शाम को वे बाजार गए, उसे आजकल बाइक पर बैठना भी रास नहीं आता या हो सकता है यह उसका वहम हो, उसने सोचा. वे कई दुकानों पर गए, उसने ऊन खरीदी और अ पने लिये एक आधी बाँह का स्वेटर बनाना भी शुरू कर दिया है. कल उसी बंगाली मित्र की शादी की पहली सालगिरह थी, उन्होंने उसे एक छोटा सा उपहार भी दिया, वह जरूर खुश होगी. जून ने उसे समझा ही दिया है कि उसका यहाँ अकेला रहना ठीक नहीं है, बल्कि उसे ससुराल या मायके में रहना चाहिए जब वह मोरान में रहेगा, जैसे ही उसका काम खत्म होगा वह उसे लेने आ जायेगा. वह उसका बहुत ख्याल रखता है. नूना ने अदरक, टमाटर और प्याज की चटनी नुमा सब्जी बनायी उसे अच्छी नहीं लगी फिर भी उसने पूरा खाना उसी से खाया.