Tuesday, November 6, 2012

नॉर्थ ईस्ट की हरियाली



जून का खत आया है, वह भी उसे लिखेगी, दो पेपर हो जाने के बाद. आज पूरे आठ दिन हो गए, अभी कितने दिन और लगेंगे उसकी आँखों को सफेद होने में. परसों पहला पेपर है, तैयारी हुई है या नहीं यही समझ नहीं आ रहा है, पढ़ती है तो सब याद आता है पर किताब बंद करते ही दिमाग में जैसे कुछ रहता ही नहीं. बिजली गायब है पिछले इतवार की तरह. कैसे बीत गए अस्वस्थता के ये आठ दिन, कैसे?

तीन पेपर हो गए हैं, डायरी लिखे हफ्तों हो गए हैं जैसे, आज सर में दर्द सा क्यों है, लिखते समय भी हो रहा था परीक्षा भवन में. पेपर फिफ्टी-फिफ्टी हो रहे हैं, साठ प्रतिशत के लायक तो नहीं हो पा रहे हैं. देखें क्या होता है. अब गणित का पेपर है, और फिर विज्ञान का, उसमें समय कम है, खैर अब पढ़ाई शुरू करनी चाहिए.

लगभग तीन सप्ताह बाद वह लिख रही है, उसकी परीक्षाएं खत्म हो गयीं, जून बनारस आए, वे सब यहाँ आ गए असम, यहाँ आये भी एक हफ्ता हो गया है, सब ठीक चल रहा है, जून का बेहिसाब ध्यान रखना, वह उन्हें स्वस्थ देखना चाहते हैं और थोड़े मोटे भी. घर से पत्र आए हैं. उसने सोचा कल जवाब देगी.

प्रथम जून, यानि ज्येष्ठ का महीना, पर यहाँ तो यह सावन का महीना ही लगता है. साढ़े दस हुए हैं, उसका सुबह का सब काम हो गया है, अभी कोई नैनी नहीं मिली है, पर उसे बनारस में रहकर काम करने की आदत से लाभ हुआ है, उसे यहाँ का काम इतना आसान लग रहा है, नन्हा अपने मित्र के साथ खेल रहा है. जून को शायद आज दिगबोई जाना है, उन्हें वहाँ से आए कल दो हफ्ते हो जायेंगे.

छोटे भाई व बहन को उसने जवाब दिया, उसके जन्मदिन पर दोनों के कार्ड आए थे. आज उनका एक परिचित परिवार सदा के लिए यहाँ से जा रहा है, अब पता नहीं कभी मिलेंगे या नहीं, वैसे वे दिल्ली जा रहे हैं, हो सकता है कभी मिलें. नन्हा आज अभी तक सोया है. उसके हाथों में निशान पड़ गए हैं, छोटे-छोटे दाने से, बाएं हाथ में साबुन पानी से, उन्हें महरी रखनी ही पडेगी.

कल जून की सातवीं तारीख थी, यानि उनके विवाह को कल पांच वर्ष पांच महीने हो गए. जून ने परसों पूछा, क्या वह नियमित डायरी लिखती है, उसने कहा, “नहीं”, अगर लिखती होती तो ‘हाँ’ कहती, अच्छा लगता उन दोनों को ही. जून यहाँ उनके आने के बाद खाने-पीने का बहुत ध्यान रख रहे हैं, कमर का घेरा बढ़ता जा रहा है और तो कहीं कुछ खास असर नहीं दीखता. नन्हा भी काफी कमजोर हो गया था, अब ठीक है, उसका दाखिला भी कराना है, देखें कहाँ होता है. मौसम यहाँ बहुत अच्छा है, आज सुबह बारिश हुई, इस समय दस बजे हैं, नन्हा गिनती लिख रहा है. मंझले भाई व माँ-पिता के पत्र आए हैं, कल वह उन्हें जवाब देगी. आज सुबह अचानक एक कार्यक्रम देखा, टीवी पर- “गीत के ढंग, संगीत के संग” कितना अच्छा गीत था और आवाज भी उतनी ही अच्छी- “फूलों से बातें करता था, खुशबुओं में रहता था... और दूसरा गीत व उसका संगीत तो अच्छा था आवाज ठीक नहीं थी. टीवी पर कल की फिल्म भी अच्छी थी, “हाफ टिकट” किशोर कुमार का अभिनय लाजवाब था अब कहाँ मिलते हैं ऐसे हीरो.
जून ने कहा है कि आज वे डिब्रूगढ़ जायेंगे. वे घर से सैंडविचेज़ बना कर ले जायेंगे. आज शनिवार है खत लिखने का दिन, तीन-चार खत लिखने हैं. कल रात जून ने एक अजीब कहना चाहिए खराब इंग्लिश फिल्म दिखाई, वह भी कहाँ जानते थे कि यह फिल्म ऐसी होगी. उन्हें साफ-सुथरी कलात्मक हिंदी फ़िल्में ही भाती हैं, ऊटपटांग इंग्लिश फिल्मों से दूर रहना ही बेहतर है. टीवी का रिसेप्शन फिर खराब हो गया है.

परसों वे पहली बार डिब्रूगढ़ विश्व विद्यालय गए, वहाँ का पुस्तकालय देखा, कुछ विभाग भी देखे, अच्छा लगा. चार पत्र लिखे, उसे मैडम को भी एक पत्र लिखना है और एक अपनी सहपाठिनी को. सुबह कितनी तेज धूप थी पर अब बादल छाये हैं. ठंडी हवा बह रही है, कितनी अच्छी जगह है भारत का यह उत्तर-पूर्वी राज्य.




Sunday, November 4, 2012

ठंडा ठंडा संतरा



कल वह अपनी एक सहपाठिनी से एक किताब लायी थी, ‘मापन व मूल्यांकन’ स्पष्ट हो गया है, ‘टी स्कोर व जेड स्कोर’ भी बहुत अच्छी तरह समझाया है इस किताब में. कालेज गयी तो छात्राएँ परीक्षा की तिथियों के बारे में ही बात कर रही थीं, पहली मई से पन्द्रह तक परीक्षाएं हैं, हर पेपर के बीच में दो दिन का अंतराल है सिवाय मनोविज्ञान के पेपर के, टाइम टेबल  उसे तो याद भी हो गया है. ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया उसने, और किसी टीचर ने कोई आपत्ति नहीं की, पर सिन्हा मैडम ने कहा ऐसा नहीं करना चाहिए था, क्यों कि अभी तक ऑफिशियली डेट्स नहीं आयी हैं, सो मिटा दिया. आज मार्च का अंतिम दिन है, यानि प्रति पेपर के हिसाब से पांच दिन मिलेंगे, उसने सोचा, अब उसे पूरी व्यूह रचना करके जुट जाना चाहिए. अब लगभग सभी विषयों का कोर्स पूरा होने को है. नन्हा आजकल देर से सोता है, उसे सुलाते हुए उसे ही नींद आ जाती है सो रात को भी देर तक पढ़ नहीं पाती. और आज जल्दी उठ भी गया है, दोपहर को सोना उसे जरा नहीं भाता.

अप्रैल का पहला दिन बीत भी गया, कल दिन भर चार्ट बनाने में ही निकल गया, आज ले गयी थी जमा करने. अब दो-तीन दिन और जाना है, उसके बाद बीच-बीच में एकाध दिन, शायद उन्नीस अप्रैल को विदाई पार्टी होगी, वह भी कुछ कविता या ऐसा ही कुछ पढ़े, ऐसा मन में विचार आया है, उसने सोचा, लिखेंगे कभी मूड होने पर....अलविदा..आज रामनवमी की छुट्टी है, घर पर उतनी पढ़ाई कर नहीं पा रही है, बल्कि कालेज डे में ज्यादा उत्साह रहता है. याद करने का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है, लगता है चार-पांच बार अच्छी तरह पढ़कर ही जाना होगा, रटना अब उससे हो नहीं पायेगा. ड्राइक्लीनर के यहाँ से साड़ी ले आयी है, कितनी अच्छी लग रही है कोटा चेक की यह साड़ी.

मिसेज सिन्हा भी बस..लडकियाँ उनकी रिस्पेक्ट नहीं करतीं, यही शिकायत करती हैं हमेशा, लेकिन लडकियाँ भी क्या करें..कालेज का कल अंतिम दिन हैं मन में कुछ सुगबुगा रहा है एक कविता...सभी टीचर्स के नाम और बीएड के नाम. सिन्हा मैडम ने पूछा कि कितने प्रतिशत नम्बर आएंगे, उसने साठ प्रतिशत कह दिए..इतने भी नहीं आये तो पढ़ाई किस काम की.

अप्रैल भी आधा बीत गया, जून आए थे, तीन दिन रहे और चले गए, उन्हें पहले दिल्ली फिर आस्ट्रेलिया जाना है. अगले महीने अठारह तारीख को आएंगे अब हमें ले जाने. आजकल गर्मी बढ़ गयी है, पिछले दो-तीन दिन से दोपहर में बिजली गायब हो जाती है, पंखा चलता भी है तो गर्म हवा फेंकता है, दिन भर पंखे की हवा में रहने से बदन कैसा आलस्य से भरा रहता है, मगर क्या करें ? परीक्षा में सिर्फ बारह दिन रह गए हैं, अभी तक सभी कुछ पढ़ा ही नहीं है, याद करना तो दूर, साठ प्रतिशत अंक लाना इतना आसान नहीं है.
आज उसने वह कविता पढ़ दी फेयरवैल पार्टी में. शाम को उसकी सहपाठिनी सीमा आयी थी, उसने ननद से कहा चाय के लिए, वह छोटी-छोटी दी कटोरियों में चना-मूड़ी भी लेकर आयी.

आज इतवार है, उसे जून की याद आ रही है, पिछले इतवार वह यहीं थे. आज दोपहर भर बिजली नहीं थी, गर्मी से ऑंखें और सिर भारी हो रहे हैं, दोपहर को खाना भी नहीं खाया गया, इससमय कुछ खाने का मन हो रहा है, उसने सोचा वह दूध पीकर आती है.

उसे ठंडा-ठंडा संतरा खाने का मन हो रहा है, पर कौन लाकर देगा, सुबह दूध पिया पर हजम नहीं हुआ. पता नहीं उसे क्या हुआ है. उसके साथ यह भी समस्या है की तबियत ठीक न हो किसी काम में मन नहीं लगता. उसने सोचा कि जून उसे दूर रहकर भी शुभकामना भेज रहे हैं, उसे अपने भीतर की हिम्मत जगानी होगी.




Friday, November 2, 2012

परीक्षा की तारीख



सोनू का बुखार उतर गया है, कल उसने दोनों वक्त थोडा भोजन भी खाया, अभी दस-पन्द्रह मिनट बाद वह उसे उठाएगी. वह भी बहुत हल्का महसूस कर रही है, उसे जून की याद हो आई अभी तो ट्रेन में ही होंगे, शाम को उन्हें आगे जाना है. उसके एक्जाम की तारीख आगे बढ़ गयी है, पहले यह खबर उसके लिए शुभ नहीं थी पर अब उसे यह जानकर राहत हुई. उसकी परीक्षाएं सम्भवतः अब पहली मई से शुरू होंगीं.


आज होली है, उसे जून की याद आज कुछ अधिक ही आ रही है, डायरी में उसके लिखे शब्द ‘हैप्पी होली’ उसे छू गए, जाने कब उसने आज के पन्ने पर लिखे होंगे. शाम को उसने वही लाल साड़ी पहनी जो उस दिन उसने उसे दिलाई थी. नन्हे ने ऊं आं शुरू कर दिया और वह उसे उठाकर ऊपर कमरे में ले गयी.
आज उसे जून का पत्र मिला, अब वह राजस्थान के बार्डर पर स्थित किसी आयल फील्ड में है, उसकी कमीज प्रेस करवानी थी पर धोबी नहीं आ रहा है आजकल, उसने सोचा वह खुद ही कर देगी. आज सुबह स्वप्न में उसे देखा, हाई स्कूल या इंटर के एग्जाम चल रहे हैं, कितने वर्ष हो गए उसे स्कूल से निकले, लेकिन स्वप्न में लग रहा था जैसे आज की बात हो. आज  कालेज गयी थी, एक या दो लडकियां ही उसकी तरह स्वेटर पहन कर आई थीं, मार्च आधा बीत चुका है, पर सुबह तो ठंड होती है.

जून परसों रात को आ गए थे, वे लोग अभी सोये नहीं थे, ढेरों बातें हुईं इन चंद घंटों में, वह  वापस भी चले गए हैं, ढेर सारी यादों को छोड़कर. अभी कुछ देर पूर्व ही वे उन्हें स्टेशन तक छोड़कर आए हैं. नन्हा भी गया था जब कि अभी भी वह कमजोर है, शाम को उसकी रिपोर्ट लेने भी जाना है, उसके कालेज का समय बदल गया है, सुबह सवा सात बजे ही उसे जाना है. नन्हा तब तक सोकर भी नहीं उठेगा. उसे चिंता हुई पता नहीं वह दादी से कुछ खायेगा भी या नहीं.
उसकी आशंका ठीक निकली कल नन्हे ने न ब्रश किया और न कुछ खाया था जब वह लौटी, अब वह सुबह जाने से पूर्व ही उठा देगी, इसके लिए रात को भी जल्दी सुला देना होगा. आज नागर मैडम ने ग्राफ बनाना सिखाया, पौलीग्राफ..नन्हे की रिपोर्ट देखने डाक्टर मित्र आए थे, वह घर पर नहीं थी, दवा देने को कह गए हैं, पर अब तो उसे बुखार नहीं है फिर यूँ ही दवा देने का अर्थ..जून का एक कार्ड आया है खूब बड़ा सा, बहुत सुंदर..उसकी स्मृति सहला जाती है, सताना अभी शुरू नहीं किया है, देखें कब तक. बड़ी भाभी का पत्र भी बहुत दिनों के बाद आया है.
कल तो नन्हे ने उसके कालेज जाते समय रोना शुरू कर दिया, अब आठ-दस दिन ही उन्हें और जाना है, अभी भी प्रथम पेपर का कोर्स पूरा नहीं हुआ है बाकी सबका भी थोडा बहुत तो शेष है ही. जून का फोन आया था, उसे अपनी मार्कशीटस् की कॉपी भेजने को कहा, वहाँ एक स्कूल में एप्लाई करने के लिए.
अभी सात बजने में दस मिनट हैं, यानि उसे जाने में पन्द्रह मिनट का समय है. कल दीदी, बड़े भाई, व बड़ी बुआ को पत्र लिखे. जून का पत्र नहीं आया, वह कोलकाता में हैं, कल गोहाटी जायेंगे. माँ ने लिखा है रिजर्वेशन कराने के लिए.


Thursday, November 1, 2012

देखो मम्मा, चढ़ा बुखार



कल शाम से ही नन्हा कुछ अस्वस्थ लग रहा था, सुबह उठा तो और भी ज्यादा परेशान था, वह उसी के पास बैठी रही, साढ़े ग्यारह बजे निकली, कालेज बंद था सोचा लिफाफे ही खरीद लेगी, खत्म हो गए हैं, कल इतवार है सोच रही है सुबह जल्दी उठकर कपड़े धोएगी, कई दिन से सारा काम माँ पर आ गया है, ननद को बाहर जाना था, वह कल ही वापस आयी है.

पिछले चार दिनों से नन्हे को बुखार चढ़ता-उतरता रहता है, दवा ले रहा है पर उसका असर नहीं हो रहा है, उसका खुद का स्वास्थ्य भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, पढ़ाई तो हो नहीं पा रही है पर उसकी चिंता अवश्य है. घर का माहौल भी प्रफ्फुलित नहीं रह गया है, सभी के मन जैसे इस जिंदगी ने स्नेह से वंचित कर दिए हैं, नन्हा ठीक था तब वे उसके साथ हँसते-खेलते थे.
आज वह नन्हे की रिपोर्ट लेने गयी थी, डाक्टर ने रक्त की जाँच करने को कहा, दवा बदल दी है. कल से उसका ज्वर तेज नहीं हुआ है. कल कालेज गयी थी, लाइब्रेरी से किताबें बदलनी थीं. उनसे कुछ नोट्स बनाने हैं, पूर्णिमा मैडम बहुत सहयोगी स्वभाव की हैं, सुधा मैम उतनी ही अक्खड़.

सुबह स्वयं नहाकर फिर सोनू को उठाने आयी, थर्मामीटर लगा रही थी कि सुनील (इसी मकान में रहने वाला दस-बारह साल का बच्चा) ने आकर बताया, भैया आए हैं, वह जानती थी जून जरूर आएंगे, अगले ही पल सीढ़ियों पर चिर-परिचित आवाज जूतों की और वह  अपने हाथ में सूटकेस लिए कमरे में आ रहे थे, वह खुश थी उस क्षण और भय भी था...दुःख था ही,  नन्हे का थर्मामीटर निकालते-निकालते उसकी ऑंखें बरस पडीं, कितने दिनों से आँसू बहना चाहते थे और आज वह आए हैं इतनी दूर से, जिन्हें उन आंसुओं की कद्र थी. नन्हे को देखकर वह भी उदास हो गए, पर अब सब ठीक हो जायेगा, कल उन्हें राजस्थान जाना है दस दिनों के लिए, जब तक लौटेंगे सब सामान्य हो चुका होगा. दोपहर को वे उन्हें लेकर मार्केट गए, उसे दो बेहद सुंदर साड़ियां उपहार में दिलायीं और नन्हे के लिए भी एक ड्रेस खरीदी.

जून किसी काम से बाहर गए हैं, कह गए थे दो-ढाई बजे तक आएंगे, वह जानते नहीं कि हर पल कोई उनका इंतजार करता होगा. अभी-अभी उनका एक पत्र मिला तब उन्हें पता नहीं था कि वह यहाँ आ सकेंगे, आज डीलक्स से दिल्ली, फिर वहाँ से जोधपुर तथा आगे फील्ड, दस दिन बाद एक दिन के लिए पुनः यहाँ और फिर वापस असम. उसने कल्पना में देखा कि परीक्षाओं के बाद वह नन्हे को लेकर अपने माँ-पिता के यहाँ गयी है, वहीं उसे लेने जून आए हैं, फिर वे सब अपने घर गए हैं और जीवन पूर्ववत् हो गया है, खूब घूमना...कहानियाँ पढ़ना.. खूब सारे पानी से जी भर कर नहाना...सब तरह की दालें बनाना..और भी कई काम, जिंदगी में सभी कुछ एक साथ तो नहीं मिल जाता है, कभी धूप कभी छाँव, कभी प्यार तो कभी इंतजार...कभी मिलन तो कभी बिछड़ना..पर अब और नहीं बिछड़ना.

अभी-अभी वह चले गए, कल सुबह आए और आज शाम चले गए पर इस एक रात और दो दिनों में कितना-कितना स्नेह भर गए हैं, उसने वादा किया कि कभी उदास नहीं होगी, उन्हें भी मालूम है और उसे भी की उनकी याद कितनी आयेगी और कभी रुला भी जायेगी लेकिन उनका आना उसे बहुत अच्छा लगा, इतने दिनों से एकाकी मन जो एक ख़ामोशी से भर गया था, उसे तोड़ना कितना सुकून दे गया. कितनी खुशी से भर गया, जो इतनी दूर थे, जिन्हें वह रोज बुलाती थी, वह उसकी आवाज सुनकर एक सच्चे मित्र की तरह उनके पास आ गए. नन्हा भी बहुत खुश है वह जल्दी ठीक हो जायेगा अब. कुछ दिन बाद फिर आएंगे अब उसका समय उसी दिन के इंतजार में कटेगा.

सोनू आज सुबह से उठा है तभी से बहुत परेशान सा है, बात-बात पर रो देता है, दूध नहीं पीना...ब्रश नहीं करना..चाय भी नहीं..और बिस्किट भी नहीं...हर बात में नहीं और ज्यादा कहने पर सिसकियाँ लेकर रोना, उसे लगता है पापा की याद आ रही है. जब तक वह आएंगे तब तक तो बिल्कुल ठीक हो जायेगा, कितना कमजोर हो गया है, पर ठीक होकर पुनः दौडेगा पहले की तरह छत पर, फिर अपने घर में.. वह सोच रही थी आज कालेज जायेगी, पर अब मुश्किल लगता है. बहुत दिनों का गैप हो गया है उसका, अब तो लगता है सब खुद ही पढ़ना होगा. अगर अच्छे नम्बर नहीं भी आए तो कोई बात नहीं, नन्हे से बढकर कुछ नहीं उसके लिए. उसे छोड़कर तो नहीं जा सकती.



Tuesday, October 30, 2012

लौंग-इलाइची वाली तहरी



कल के बादल अभी घिरे हैं, कालेज गयी थी, लौटी तो देखा नन्हा फिर सोया नहीं था दोपहर को. जून को पत्र लिखा, गोंद नहीं थी सो सेलो टेप से चिपकाया, पर ठीक से नहीं हो पाया है. सारनाथ के बारे में अभी तक नहीं लिखा है, सिन्हा व सुधा मैम से कहा किताब के लिए पर उन्होंने नहीं दी, लड़कियों का हक है जिन पर उन किताबों पर भी अध्यापिकाएं अपना अधिकार जमा लेती हैं. उसने तय किया भविष्य में कभी उनसे कुछ नहीं मांगेगी. एक किताब खरीदी उसने, पर विशेष लाभ नहीं हुआ, खैर कुछ ही सही. कल से तीन दिनों के लिए कालेज बंद है. ढेर सारे काम करने हैं और पढ़ाई तो करनी ही है.

छुट्टी का पहला दिन कैसे शुरू हुआ और कैसे बीत गया वह स्वयं भी नहीं समझ पायी, सुबह का वक्त तो रोज ही व्यस्तता में गुजरता है, फिर नन्हे को पढ़ाने लगी, दोपहर का भोजन, उसे सुलाना और तीन बजे जब पढ़ने आई तो बिजली गायब, दस मिनट बिना बिजली के पढ़ा तो माँ ने ऊपर बुला लिया, घर का वातावरण सामान्य हो गया है. फिर ननद का फोन आया, उसकी किसी मित्र के यहाँ जाना है. तभी पोस्टमैन आ गया, जून के दो पत्र थे, पढते ही सुधबुध खो गयी पर उन्हें देर तक एन्जॉय करने का समय ही नहीं था, अर्थात वह फौरन उसे जवाब नहीं लिख सकी. वहाँ से लौटे तो आठ बज चुके थे. भोजन बनाया, पत्र लिखा..आम पत्र नहीं , प्यार का दस्तावेज, चालीस नम्बर का नहीं पैंतालीस...पिछले दिनों वह  नम्बर गलत डाल रही थी
शुभ प्रभात ! आज वह सुबह जल्दी उठ गयी है, रात को आशिक चन्द्र ग्रहण देखा था, मकान मालकिन के यहाँ गांव से कुछ महिलाएं आयीं थीं कल गंगा स्नान करने. अभी समाचार देखने के बाद टीवी बंद क्र रही थी कि पेन नीचे गिर गया, रिफिल बेकार हो गयी, कितना प्रयास करना पड़ रहा है उसे चंद पंक्तियाँ लिखने में. दक्षिण अफ्रीका में पुलिस कितनी बर्बर है, अभी महिलाओं पर लाठी चार्ज होते देखा समाचारों में.

जैसे नियमित वह लिख रहे हैं वैसे ही नियमित आजकल उसे खत मिल रहे हैं. माँ-पिता जी का भी पत्र आया है, उन्होंने लिखा है, अप्रैल में वे तीनों वहाँ आएंगे, इसकी प्रतीक्षा वे लोग कर रहे हैं. उसने सोचा तब की तब देखेंगे, अभी से कुछ नहीं कह सकती. उसने एक सप्ताह में एक विषय पढ़ने का निश्चय किया, ग्यारह बजे उसने बत्ती बंद कर दी.

तीन दिन बाद कालेज गयी, आरती मैडम जब लेक्चर दे रही होती हैं, उसे बहुत अच्छा लगता है, उनकी क्लास ही सबसे अच्छी होती है. और एक मेहरा मैम हैं, कल के लिए पढ़ने को कहा  है पर..कल या तो वह खुद अनुपस्थित हो जाएँगी या भूल ही जाएँगी. फिर भी उसे पढ़ना तो है ही. यह प्रथम पेपर है भी द्रौपदी के चीर की तरह कहीं भी इसका ओर-छोर दिखाई नहीं देता.

आज उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं लग रहा है, हल्का ज्वर सा लग रहा है, कालेज में थकान लग रही थी. सुबह अंगूर खाए, अच्छे लगे, बाकी चीजें कड़वी या फीकी लग रही हैं.

आज फिर वह सुबह कालेज चली तो गयी पर बीच में छोड़ कर आना पड़ा, बुखार बढ़ गया था. अब लगता है कुछ दिन घर पर ही आराम करना होगा.

आज स्नान किया उसने पूरे आठ दिनों बाद, अभी भी मुंह कड़वा है, पिछले आठ दिनों में मन में न जाने कितने बवंडर उठे हैं पर उन्हें याद करना क्या बहुत जरूरी है.

आज शिव रात्रि है, काफी ठीक महसूस कर रही है पर सब्जी में कोई स्वाद नहीं आ रहा. सोच रही है रात को खाना खुद ही बनाएगी. यहाँ खाने में विविधता नहीं है, रोज वही मसूर की दाल या मूंग मिली अरहर, इसके अलावा भी दुनिया में कुछ होता है, यहाँ लोग जानते ही नहीं. सब्जी भी वही आलू गोभी टमाटर, खूब भुनी हुई. वड़ी वाले चावल, गोभी वाले चावल, लौंग बड़ी इलाइची वाली तहरी, मूली, गोभी के परांठे..सब सपने की चीजें होकर रह गयी हैं. यहाँ खाने का मतलब पेट भरने से है, सच है आजादी से बढकर कोई वस्तु नहीं , अपने घर में वह आजाद थी, खुश, निर्द्वन्द्व कुछ भी करने को स्वतंत्र !



सारनाथ का टूर



कालेज में नागर मैडम ने कुछ आवश्यक बातें बतायीं, जो हर टीचर पहले भी कई बार दोहरा चुकी है, उसके बाद कोई टीचर नहीं आयी. एक बजे ही वह घर आ गयी थी, रास्ते में अखबार खरीदा और कम्पीटीशन सक्सेस. थोडा बहुत पढ़ते रहना चाहिए, आरती मैडम ने बताया कि यूजीसी परीक्षा की तैयारी करके अगले वर्ष जरूर देनी चाहिए. जून को भी लिखेगी इस बारे में और रही बात नवोदय स्कूल में नौकरी की तो वह  उसके लिए नहीं है. स्वप्ना से उसने सेंट्रल स्कूल के फार्म के लिए कहा है, अभी उसे कल की कक्षा में पढ़ने के लिए पढ़ना है.

फरवरी के पांच दिन बीत गए, आज कालेज में थोड़ी पढ़ाई जरूर हुई. अगले हफ्ते मंगल को उनका सारनाथ जाने का कार्यक्रम है, एक्टिविटी में वही फ़ाइल शेष रह गयी है. जून ने लिखा है कि अप्रैल में जीएम से छुट्टी मांगना उनके लिए बहुत मुश्किल होगा, सिर्फ पांच सीएल लेकर वह यहाँ आएंगे जससे अक्टूबर में ज्यादा छुट्टियाँ ले सकें. पर वह जो दम भरते हैं कि उसके लिए कुछ भी कर सकते हैं, देखें उसकी बात कहाँ तक मानते हैं.

सोमवार होने के बावजूद आज भी कालेज में वही हाल रहा, एक टीचर को छोड़ कर कोई क्लास में ही नहीं आई. कल सारनाथ जाना है.

सारनाथ गयी, नन्हे को नहीं ले जा सकी जैसा उसने सोचा था. ले जाती तो कोई हर्ज नहीं होता पर यह उनकी नागर मैडम उसूलों से बंधी हुई जैसे एक नन्हे के जाने से...खैर प्रोग्राम अच्छा ही रहा, कभी-कभी बोरियत भी हुई लड़कियों के बेहिसाब गाना गाने से. मंदिर भी देखे, स्तूप भी और खंडहर भी, पर उनके बारे में लिखना भी तो है. संग्रहालय भी देखा. जितना स्वयं लिख सकती है वह तो एक-डेढ़ पन्ने का ही होगा..खैर शायद किसी किताब से थोड़ी सहायता मिल जाये. नन्हे के लिए दो-तीन किताबें खरीदीं उसने कहा था, ‘मेरे लिए पुस्तक लाइयेगा’. भोजन जितना ले गयी थी आधा भी खत्म नहीं हुआ था, एक भिखारिन को दे दिया. स्वप्ना, रीता, कविता और एक लड़की, वह खुद, इन पाँचों ने सभी कुछ साथ देखा. लिम्का पिया उसने, जून के साथ कहीं जाने पर वे लिम्का ही पीते थे. घर आते ही उसका पत्र मिला, वह  आस्ट्रेलिया जायेगा. लिखा है, क्या मंगाना है लिस्ट बना लो..वह उसे कितना चाहता है.  

मन परेशान है, आँखें बरसने को आतुर, घबराहट, आक्रोश, दुःख सभी कुछ एक साथ महसूस हो रहा है. जून का एक बहुत प्यारा सा खत मिला है, पर इस मन का क्या करे. खत मिला था तब बहुत खुश थी, पर नन्हे की परवरिश को लेकर एक ऐसी बात हो गयी है कि...समझ नहीं आता क्या होगा अब. कल सारनाथ जाने से पूर्व वह चने की उबली दाल रख गयी थी कि इसको छौंक लगाकर नन्हे को खिला दें, मकानमालिक के यहाँ ब्राह्मणों को खिलाने के लिए खूब मिर्च वाली पूरी-सब्जी बनी थी वह नहीं, पर शाम को आकर देखा तो दाल वैसे ही पड़ी थी, सुबह कालेज जाने से पूर्व वह किसी बर्तन को ढूँढ रही थी तो कटोरी में खराब दाल की महक आयी, तभी उसे फेंक देना चाहिए था, क्योंकि कालेज से वापस आकर पता चला कि वही दाल आज उसे खिला दी, उसे बहुत खराब लगा और उसने कह दिया कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, इसी बात पर सभी नाराज हैं. हुआ करें नाराज, आज के बाद नन्हे को बासी तो नहीं खिलाएंगे न.






Monday, October 29, 2012

अदरक वाली चाय



परसों उसकी परीक्षा है, आठवीं कक्षा को विज्ञान में ‘चुम्बकत्व’ पढाना है, उसने सोचा, सिलसिलेवार प्रश्नों को याद करेगी तथा बोध प्रश्न भी. दूसरा पीरियड है सो ज्यादा इंतजार नहीं करना पडेगा, बारह बजे तक मुक्त हो जायेगी. अगले दिन वसंत पंचमी का अवकाश है. जून का पत्र आया है, उसे कई दिन कोई पत्र नहीं मिला यह सोच कर नूना को भी अच्छा नहीं लगा. पूरे पांच महीने हो गए उसे यहाँ आए हुए, अब दो ढाई महीने ही शेष हैं.

कल उसका बीएड का पहला प्रेक्टिकल हो गया, उसके हिसाब से तो ठीकठाक ही हुआ, अब देखें कैसे नम्बर आते हैं. कल गणित का है, जो परीक्षक आए हैं उनमें से एक गणित के हैं, आज वह थोड़ा ज्यादा सजग रहकर पढ़ाएगी, और समय का ध्यान रखते हुए जल्दी-जल्दी भी ताकि एक अन्विति तो पूरी हो जाये. परीक्षा तो जल्दी हो गयी थी, पर मैडम के आदेशानुसार दो बजे तक बैठा रहना पड़ा, कल की परीक्षा का समय जानने के लिए. टिफिन तो ले नहीं गयी थी, पहली बार कालेज कैंटीन में खाया पकौड़ा, स्वप्ना, कविता और उसने. सिर में दर्द कॉलेज में ही शुरू हो गया था, घर आयी तो बढ़ गया था, दवा ली, अब ठीक है. नन्हा आजकल खूब बातें करता है और गाना गाता है, टीवी पर जो भी सुनता है. पढ़ाई-लिखाई तो आजकल उसकी बिलकुल नहीं हो रही है, कल से उसे रोज एक घंटा पढ़ाएगी उसने मन ही मन सोचा. ननद अदरक वाली चाय दे गयी है, सिर में दर्द है यह पता चलने पर माँ-पिता व ननद सभी उसका बहुत ख्याल रख रहे हैं, वे सभी अन्ततः बहुत अच्छे हैं, वे जून के माता-पिता हैं, उसे भी ऐसे ही संस्कार मिले हैं, प्यार और स्नेह की शीतलता भी.
आज दूसरा प्रेक्टिकल भी हो गया, परीक्षक संतुष्ट नहीं थे, अब टीचर ने उन्हें जैसे बताया वैसे ही तो पढायेंगे न.. दो दिन छुट्टी है, परीक्षा के बाद कितना सुकून, लेकिन एक खालीपन सा लग रहा है, उसने सोचा कोई पत्रिका लाएगी. सभी को खतों के जवाब भी देने हैं.

आज धर्मयुग लायी, और नन्हे के लिए एक चित्र कथा खरीदी. नन्दन, पराग सभी उसे खरीदने को कहा पर वह कृष्ण का नाम सुनकर उसी को खरीदने की जिद कर रहा था. वसंत पंचमी का दिन अच्छा बीता, अब परसों से फिर कालेज और किताबें.

जून ने नवोदय स्कूल का फार्म भेजा है, शायद वह जानता नहीं है इन स्कूलों में अध्यापकों को वहीं रहना होता है. उसका एक पत्र तो पूरे एक महीने इधर-उधर घूमने के बाद मिला है, छब्बीस नम्बर का खत. आज कालेज की भूतपूर्व प्राचार्य श्रीमती सुन्दरी बाई के निधन पर शोक सभा थी, लड़कियों ने खूब शोर मचाया. एफिडेविट के लिए क्लर्क ने किस अजीब तरह का जवाब दिया पर नागर मैडम ने बहुत अच्छी तरह समझाया, वह अच्छी अध्यापिका ही नहीं अच्छी इंसान भी हैं. माँ का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, वह बहुत जल्दी घबरा जाती हैं, कराह कर बोलती हैं, जिससे सभी लोग समझें कि बहुत बीमार हैं, या बीमार होकर हर व्यक्ति सबका ध्यान आकर्षित करना चाहता है.