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Friday, April 10, 2026

कार्तिकेय का मंदिर


कार्तिकेय का मंदिर

आज भगवद् गीता कोर्स का दूसरा दिन था। गुरुजी ने कितनी अच्छी तरह से, कितनी कुशलता से श्लोकों का अर्थ समझाया।यदि कोई अंत काल में भगवान का स्मरण करता है, तो वह मोक्ष को प्राप्त होता है।ब्रह्मा के दिन और रात की अवधि और सृष्टि के बार-बार प्रकट होने और विलीन होने की प्रक्रिया का वर्णन भी इस अध्याय में है।मृत्यु के बाद जीवात्मा की दो गतियों का वर्णन किया। प्रकाश का मार्ग, जिससे जाने वाले वापस नहीं लौटते, और अंधकार का मार्ग, जिससे जीवात्मा पुनः जन्म लेती है।प्रवचन देते हुए गुरु जी की प्रसन्नता छलकती रहती है।उनके हाव-भाव व चाल बिलकुल बच्चों जैसे है और उनका ज्ञान ऋषि-मुनियों जैसा। शाम को नूना और जून नापा से पन्द्रह-बीस मिनट की दूरी पर स्थित एक पहाड़ी ‘एपिक रॉक’ देखने गये, जहां एक छोटा सा झरना बह रहा था, जिसका जल सड़क को पार करता हुआ, नीचे चट्टानों से होता हुआ, घाटी व खेतों में जा रहा था। निकट ही हनुमान जी एक प्रसिद्ध मंदिर है। कहा जाता है, रावण के द्वारा ले जाते समय सीता जी ने इसी क्षेत्र में अपने आभूषण गिराये थे। उन्हें वह स्थान बहुत सुंदर प्रतीत हुआ। कुछ आयताकार, चारों ओर से खुली सरंचनाओं के साथ वहाँ एक जलकुण्ड भी है, ज्ञात हुआ कि लोग पिंडदान के लिए भी वहाँ आते हैं। आज सोसाइटी में किसी का टर्टल, कछुआ खो गया है।लोग बिल्ली-कुत्तों, मछलियों व पंछियों के साथ कछुए भी पालते हैं, नूना को आश्चर्य हुआ। 


आज सोमवार के दिन काशी में विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया गया। केवल तीन हज़ार वर्ग फ़ीट वाला परिसर अब पाँच लाख वर्ग फ़ीट में फैल गया है। अब यह कारिडोर मंदिर को सीधे गंगा नदी से जोड़ता है। ललिता घाट में स्नान के बाद भक्त यात्री सीधे मंदिर आ सकते हैं।यात्रियों के लिए यहाँ विश्राम गृह, संग्रहालय, पुस्तकालय और आध्यात्मिक केंद्र जैसी कई सिविधाओं का निर्माण किया गया है।मोदी जी ने इस अवसर पर ओजस्वी भाषण दिया। संतों का आगमन भी हुआ पर उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया, न ही उन्हें संबोधित किया गया। नूना को लगा, संत समाज का सम्मान होना चाहिए था, किंतु यह भी तो सच है, संत मान-अपमान से ऊपर उठ चुके होते हैं। जो भी मान-अपमान से ऊपर उठ सके, वही संत हो जाता है। कल रात नींद गहरी नहीं थी, आज भी उसे ऊर्जा का स्तर रोज़ से कुछ कम लग रहा है। 


आज सुबह सात बजे वे दोनों अपने पड़ोसी दंपत्ति के साथ उन्हीं मित्र के यहाँ गये, जो कुछ दिन पहले उनके घर आये थे। दो घंटे की यात्रा के बाद घर पहुँचे। मेज़बान सखी ने हार्दिक स्वागत किया। स्वादिष्ट नाश्ते के बाद सभी सोसाइटी के हरे-भरे बगीचों में टहलने गये। वहाँ व्यायाम करने के उपकरण था तथा सभी तरह की आधुनिक सुविधाएँ थीं। वापस आकर कार्ड्स का खेल ‘ब्रिज’ खेला और नूना ने पहली बार किसी को ‘पेशेंस’ गेम खेलते हुए देखा।दोपहर के भोजन के बाद कुछ देर विश्राम करके वे शाम तक घर लौट आये।शाम को पापा जी ने उसकी नयी कविता के बारे में बात की। 


जून ने शयन कक्ष के बाहर छज्जे में कृत्रिम घास लगवा दी है, हरियाली से आँखों को सुकून तो मिलता ही है, बगीचे की शोभा बढ़ गई है। नूना ने वहाँ बैठकर योगासन किये, अनुभव अच्छा रहा।आजकल सुबह वह नापा के किसी न किसी एक बगीचे का निरीक्षण करने भी जाती है, माली भी पहचान गये हैं और देखते ही काम शुरू कर देते हैं। चारों तरफ़ सफ़ाई का काम चल रहा है।नन्हे और सोनू ने उसे नेटफ़्लिक्स पर साइंस फ़िक्शन ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ देखने को कहा, एक एपिसोड देखा है, कितनी विचित्र संस्कृति है अमेरिका की, जिससे भारत की युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है। मोदी जी को इसीलिए भारत की संस्कृति के पुनर्जागरण की आवश्यकता महसूस हो रही है। 


अब ठंड बढ़ने लगी है, सुबह तापमान १८ डिग्री था। पापाजी ने कहा, वहाँ छह डिग्री पहुँच गया है, उन्हें बहुत ठंड लग रही थी। उनकी बिल्लियों ने घर में गंदा किया तो कल से वे उन्हें गली में ही कैट फ़ूड देने वाले हैं। कल रात वह बाहर बालकनी में नीचे घास पर दरी बिछाकर सोयी। सुबह उठी तो मन ध्यानस्थ था। रात को आकाश में चाँद दिख रहा था, उस पर त्राटक करते-करते नींद आ गयी, फिर पता ही नहीं चला कब सुबह हो गयी। जून आज असोसिएशन के काम के सिलसिले में काफ़ी समय बाहर रहे।बहुत दिनों बाद छोटी बहन से बात हुई, वह दुबई में एक्सपो देखने गई थी। भारत के मंडप में उसे मोदीजी की तस्वीरें देखकर कुछ अच्छा सा नहीं लगा। सरकार को अपना प्रचार इतना भी नहीं करना चाहिए, ऐसा उसका कहना था। भारतीय अपनी आलोचना करने में बहुत कुशल होते हैं। 


आज जून, नन्हे और सोनू को भी एपिक रॉक दिखाने ले गये। रास्ते बहुत अच्छे थे। खेतों और गाँवों को पार करते हुए, पर्वतों को निहारते वे गंतव्य तक पहुँचे। वापसी में सोमनहल्ली झील में सुंदर पक्षी भी देखे।नूना ने अहल्याबाई होलकर पर एक धारावाहिक देखना आरम्भ किया है, बहुत अच्छा लग रहा है।सभी ने अच्छा अभिनय किया है।इसमें राजमहलों की राजनीति को भी दर्शाया गया है। आज पहली बार नूना असोसिएशन की दो महिला सदस्याओं के साथ मेट्रो मॉल गयी, जो होलसेल मॉल है।वहाँ क्रिसमस की अनुपम सजावट की गई थी। 


आज सुबह उगता हुआ लाल सूरज देखते हुए छत पर सूर्य नमस्कार करने का अवसर मिला। परमात्मा के प्रति श्रद्धा को गहराई से महसूस करते हुए एक कविता अनायास ही लिखी गयी। आज क्रिसमस की पूर्व संध्या है, दोपहर बाद से ही कार्यक्रम शुरू हो गये थे। नन्हा और सोनू भी आ गये हैं।सोनू केक बनाकर लायी है। नापा के ही एक व्यक्ति सांता बने और परेड में शामिल हुए। जून ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में भाग लिया। 


आज वे राज राजेश्वरी नगर में एक पहाड़ी पर स्थित शृंगगिरि श्री शंमुख स्वामी मंदिर देखने गये, जो यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है। यह भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक सुंदर मंदिर है। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका 62 फीट ऊंचा गोपुरम है, जिस पर भगवान शंमुख के छह विशाल मुख बने हुए हैं।गोपुरम के ऊपर  स्फटिक का एक विशाल गुंबद है, जिसमें लगभग ढाई हज़ार क्रिस्टल लगे हैं। दिन के समय सूर्य की किरणें इन पर पड़ने से इंद्रधनुषी छटा बिखरती है, जबकि रात में यह एलईडी बत्तियों से जगमगाता है।मंदिर में गणेश की प्रतिमाओं का विशाल संग्रह है। अनेक प्रकार की मुद्राओं में, विभिन्न पदार्थों से बनी मूर्तियाँ वहाँ रखी गई हैं।यहाँ तक कि आधुनिक वेशभूषा में भी गणपति को दिखाया गया है।


इस मंदिर के निकट ही एक अन्य विशाल मंदिर भी देखा।माता पार्वती के त्रिपुर सुंदरी स्वरूप को समर्पित राज राजेश्वरी मंदिर बहुत विशाल है और इसका गोपुरम मीनाक्षी मंदिर की याद दिलाता है। देवी के विभिन्न रूपों को वहाँ दर्शाया गया है। नन्हा और सोनू भी साथ थे, बाद में उनका एक मित्र परिवार भी आ गया और सभी ने १९४७ नामक रेस्तराँ में दोपहर का भोजन किया।


वे सुबह चार बजे उठे, टहलते समय इसका ध्यान रखा कि श्वास नाभि तक जाये और मंत्र का यथा संभव अभ्यास किया, बाद में योग साधना। पापा जी से बात की, दो-तीन दिनों के लिए वह अकेले रहने वाले हैं। अपनी दिनचर्या बताते समय उनका उत्साह देखते ही बनता है।रोज़ की तरह परमात्म चर्चा भी हुई। जून आज काफ़ी व्यस्त थे, सुबह-शाम मिलाकर छह घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। नया वर्ष आने में मात्र दो दिन रह गये हैं। एक मीठी सी गंध का अनुभव आज हो रहा है, कोई जीवाणु है या कोई दिव्य गंध, कौन जानता है ? एक रहस्य ही तो है यह जगत! 


कल वर्ष का अंतिम दिन है। नये वर्ष का स्वागत नेचर कैंप में करने का उनका स्वप्न अब पूरा होने को है। कल सुबह नन्हा और सोनू के साथ उसकी भांजी भी आ रही है।उनका वही मित्र परिवार भी आएगा। कल की रात वे वहीं गुजारने वाले हैं; नये वर्ष की सुबह भी, दोपहर बाद घर लौटेंगे।   


Thursday, January 19, 2023

एज लेस बॉडी टाइम लेस माइंड


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। सोने से पूर्व के अंतिम कार्यों का आरंभ हो चुका है। टहलने गए तो हल्की बूंदा-बांदी होने लगी, पर अब उन्हें इसका अभ्यास हो गया है। सुहानी हवा और बेहद हल्की झींसी को चेहरे पर महसूस करते घर के सामने वाली सड़क के अंत तक जाकर लौट आए। उसके आगे ही फ़ौवारे वाला पार्क है। दो दिन से पड़ोसी नहीं दिखे थे जबकि वह सुबह नियमित दो घंटे पैदल चलते हैं, आज दिखे तो बताया, खाने की मेज़ से कुछ लेते समय गिर गये थे, घुटने पर हल्की चोट थी। एक तरह से वृद्धावस्था भी दूसरा बचपन ले आती है, पर बचपन में चोट का पता नहीं चलता, इस समय बात विपरीत है।  आज से ‘देवों का देव महादेव’ पुनः देखना आरम्भ किया है। कुछ वर्षों पूर्व इसका कुछ भाग देखा था। शाम को ‘हिंदी कविता के हज़ार वर्ष’ पुस्तक में कविता के इतिहास के बारे में पढ़ा। काव्य और मानव का नाता बहुत पुराना है। पुरानी पुस्तकों में कविता के अतिरिक्त भी कितने विषयों को गद्य की अपेक्षा पद्य में लिखा गया है, जिसे याद रखना भी सरल है। 


नन्हे ने नेक्सन ईवी की टेस्ट ड्राइव बुक कर दी है। कम्पनी के लोग गाड़ी लेकर आएँगे। सुबह बिग बास्केट से सूखे मेवे आए, जून को खुद जाकर ख़रीदने का शौक़ पूरा करने में अभी समय लगेगा। भावनगर से सौंठ पाउडर आया, अमेजन उन्हें घर बैठ-बैठे पूरे भारत से समान लाकर दे देता है। 


अभी-अभी छोटे भाई से बात की। आजकल काम के सिलसिले में केरल में है। आज धोती पहनकर त्रिवेंद्रम के पद्मनाभ मंदिर गया था। उसे कभी-कभी ध्यान के अनोखे अनुभव होते हैं। बचपन से ही वह पूजा आदि  की तरफ़ आकर्षित था। उसने बताया कक्षा चार में उसके मस्तक में भौहों के मध्य एक कील चुभ गयी थी, जिसे मित्रों ने खींच कर निकाला, खून भी बहा पर बजाय रोने के वह ज़ोर से हँसने लगा था। शायद उसे पहला अतींद्रिय अनुभव तब हुआ था। उसके बाद वह कक्षा में सबसे पीछे बैठता था पर उसे कुछ सुनायी नहीं  देता था, तब निकट बैठा छात्र ज़ोर से हिलाकर कहता तब कुछ समझ में आता। अब वह ओशो के प्रवचन सुनकर और उनकी बतायी साधना से भीतर ऊर्जा का प्रवाह अनुभव करता है। अनंत ऊर्जा के स्रोत से तो सब जुड़े हैं पर उसका अनुभव कोई-कोई ही कर पाता है। 


आज भी घर के दाँयी तरफ़ का गोदाम तोड़ने की आवाज़ें आती रहीं। अब जेसीबी लगाया जाएगा। उसके बाद वहाँ निर्माण कार्य आरम्भ होगा अर्थात लम्बे समय तक इस शोर को सुनने का अभ्यास करना होगा। आज असम की एक पुरानी परिचिता से बात हुई , परसों उनकी माँ का देहांत हो गया। वह शाम को परिवार के साथ बैठकर चाय पी रही थीं, अचानक दिल का दौरा पड़ा; जबकि उन्हें कभी दिल का रोग नहीं हुआ था। जीवन क्षण भंगुर है कितनी बार वे यह बात सुनते हैं पर मानते नहीं, ऐसी घटनाएँ इसकी सत्यता सिद्ध करने आ जाती हैं। आज सुबह दीपक चोपड़ा की पुस्तक ‘सफलता के सात  आध्यात्मिक नियम’, मोबाइल पर सुनी। कल शाम उनकी एक अन्य पुस्तक ‘एज लेस बॉडी टाइम लेस माइंड’ पढ़नी आरंभ की है। उनके अनुसार चेतना में स्थित रहकर कोई भी अपने शरीर को स्वस्थ रख सकता है। व्यक्ति के सकारात्मक या नकारात्मक विचार अच्छे या बुरे हार्मोंस का निर्माण करते हैं। इस सृष्टि में पदार्थ ऊर्जा में व ऊर्जा पदार्थ में निरंतर बदल रही है।देह जो ठोस जान पड़ती है, वास्तव में तरंगों से ही बनी है। अणु या परमाणु तक आते आते पदार्थ खोने लगता है और अति सूक्ष्म ऊर्जा ही शेष रहती है।  यह ऊर्जा विचारों से नए-नए रूप धारण कर लेती है, वह जब भी दिखेगी, प्रकृति के रूप में ही दिखेगी।वह स्वयं ज्ञाता है और ज्ञेय नहीं हो सकती। उसका अनुभव ध्यान में ही किया जा सकता है। आज उनके साथ एक अठानवे वर्षीय एक वृद्ध महिला का साक्षात्कार सुना। उनकी बातें प्रेरणदायक थीं, वह अभी तक योग सिखाती हैं, नृत्य भी करती हैं। शाम को पापा जी से फ़ोन पर बात की, तो पहली बार उन्हें रिकार्ड भी कर लिया। उनकी बातों में भी जीवन के लम्बे अनुभवों का सार होता है। भक्ति और ज्ञान की चर्चा भी होती है।  


Sunday, January 13, 2019

जॉप नाउ और बिग बास्केट



आज सुबह नींद जल्दी खुली. प्रातः भ्रमण, प्राणायाम, व्यायाम सभी कुछ समय से हुआ. ठंडी हवा बह रही थी., जब वे टहलने गये. हल्के बादल भी हैं आकाश पर. गुलदाउदी के पीले पुष्प भी मिले फूल वाली मालिन से, हल्की सी फुहार चेहरे पर पड़ रही थी. नाश्ते में रागी का चीला बनवाया, जून ने जॉपनाउ से मंगवाया था रागी. नन्हा कल रात फिर देर से आया, सुबह उठते ही चला गया. इस समय हल्की धूप निकल आई है. रसोइया दोपहर का भोजन बनाकर चला गया है. महरी सफाई कर रही है. आज ब्लॉग पर दो पोस्ट्स सीधे ही लिखकर डालीं. कल पहली बार एक ब्लॉग पर मोबाइल पर लिखा था. कल विश्व विकलांग दिवस है. असम में होती तो व्यस्तता कुछ अलग होती. कल भतीजी का जन्मदिन है, उसके लिए कविता लिखी है. कल दीदी का फोन आया था, उन्हें नन्हे की मित्र के बारे में नहीं बताया है, एक दिन तो बताना ही होगा.

आज नन्हे का अवकाश है. सुबह का नाश्ता उसी ने बनाया और शाम की चाय भी. इस समय बाजार गया है. मौसम आज अच्छा है, धूप निकली है. कल रात को उसका एक मित्र अपनी पत्नी के साथ आया था, उन्हें पानी-पूरी खिलाई. जून को कल सुबह की प्रतीक्षा है, जब उनका प्लास्टर खोला जा सकता है. पिताजी व छोटे भाई से बात हुई, उसके विवाह की वर्षगांठ है, उसके लिए लिखी कविता उसे पसंद आई. तीन पोस्ट्स भी लिखीं, लिखने के लिए यहाँ समय मिल जाता है, क्योंकि घर का कोई विशेष काम नहीं करना होता. नन्हे का लाया एक खेल खेला, ‘कटान’, उसमें दस अंक मिले, पर एक जगह नियम के खिलाफ जाकर. कुछ देर अक्षय कुमार की फिल्म देखी ‘एयर लिफ्ट’. फिल्म काफी अच्छी है.

आज जून के पैर का प्लास्टर खुल गया है, पर अभी दो हफ्ते उन्हें और यहाँ रहना है. नन्हा अस्पताल ले गया था, फिर घुटने पर लगाने के लिए एक बेल्ट देने आया, जिसका नाम ‘रॉम नी बेल्ट है. वे लोग दुबई भी नहीं जा रहे हैं. छोटी बहन को बताया तो वह कुछ परेशान हुई, पर उन्हें व्यक्ति, वस्तु तथा परिस्थिति पर अपने मन की ख़ुशी को निर्भर नहीं करना है. आज ब्लॉग पर एक त्वरित रचना पोस्ट की.

शाम के पांच बजे हैं, अभी भी धूप निकली है यहाँ. असम में अँधेरा हो गया होगा. जून बेड पर व्यायाम कर रहे हैं. कल रात्रि साढ़े ग्यारह बजे तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का देहांत हो गया. कल शाम से ही उनकी सम्भावित मृत्यु की खबर टीवी पर आ रही थी. वह पिछले दो महीने से अस्पताल में थीं. जयललिता ने राजनीति में कदम रखने से पूर्व फिल्मों में भी काम किया था. हिन्दी की एक फिल्म में भी धर्मेन्द के साथ उन्होंने एक भूमिका निभाई थी, जो वह इस समय मोबाईल पर देख रही है. इस समय बचपन में सुना एक गाना, क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी सूरत छिपी रहे, नकली चेहरा सामने आये, असली सूरत छिपी रहे...बज रहा है. यहाँ नेट की स्पीड बहुत ज्यादा है.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा. सुबह से शाम कैसे हो जाती है और समय कहाँ चला जाता है, पता ही नहीं चलता. आज भी दोपहर के दो बज चुके हैं. कहीं पढ़ा था कि उम्र के साथ-साथ काम करने की गति कम हो जाती है, इसलिए उम्रदराज लोगों को समय सदा जल्दी भागता हुआ लगता है. जून विश्राम कर रहे हैं, सुबह नाश्ते में उन्होंने स्वयं बनारसी तरीके से चिवड़ा-मटर बनवाया, चाय नन्हे ने बनाई, उसने केवल फल काटे. नन्हा शनिवार होने के बावजूद दफ्तर चला गया है, शाम तक आएगा. एक फिल्म लगाकर गया था, B4G, एक बड़े दैत्य की कहानी थी, जो आदमियों को सपने देता है. अद्भुत कल्पना और फोटोग्राफी है फिल्म में. मौसम आज अच्छा है, न ठंड न गर्मी, धूप खिली हुई है. सुबह मीनाक्षी मन्दिर के बाहर से सुंदर फूल मिले, पीले और लाल फूलों की एक माला भी ! आज उन्हें बाजार जाकर फल लाने हैं इससे पहले कि नन्हा बिग बास्केट में आर्डर कर दे.


Friday, November 16, 2012

सलमान रश्दी -ग्रिमस



परसों वे लोग डिब्रूगढ़ गए थे, मौसम बहुत अच्छा था, दोनों मंदिर देखे, तिरुपति और जालान मंदिर दोनों आकर्षक हैं. आजकल पंखा बंद करते ही गर्मी हो जाती है पर पंखा चलाने पर भी उतना भला नहीं लगता, नन्हे को हल्की खांसी हो गयी है.

कल दोपहर शनिवार होने के कारण जून भी घर पर थे, भोजन के बाद वे कुछ देर को लेटे, सोने जा ही रहे थे कि बाहर स्कूटर तथा कुछ लोगों की बातचीत की आवाज कानों में पड़ी, और उनकी धड़कन बढ़ गयी, क्यों हुआ ऐसा...रात को आठ बजे के बाद घंटी बजती है...तो मस्तिष्क में सबसे पहले एक ही बात आती है- अल्फ़ा. शाम को जून उसे व नन्हे को कार में दूर तक घुमाने ले गए. नन्हा तो आराम से बैठा था पर वह ही जरा टेंस थी. जरा भी खुशी नहीं हो रही थी...अजीब सी हालत हो रही थी- डर?


सितम्बर की चौदह तारीख हो गयी और उसने आज डायरी खोली है. पिछले दिनों कितनी ही बातें हुईं. पिछले से पिछले इतवार को उनका तिनसुकिया जाना और वह हादसा..फिर पिछले शनिवार को अस्पताल में रहना..और आज सुबह से होती वर्षा, सर में हल्का भारीपन, दीदी-छोटी बहन के पत्र. नन्हे के इम्तहान जो अगले हफ्ते हैं. लाइब्रेरी से लायी किताब- सलमान रश्दी की , Grimus  क्या लिखते हैं मिस्टर रुश्दी भी. इराक-कुवैत युद्ध के इतने हफ्ते और उन सज्जन का अभी तक पता नहीं. चीन का आतंकवाद पढ़ा उस दिन सर्वोत्तम में...तो अपने देश से और प्यार हो गया. छोटे फुफेरे भाई का पत्र और वह आत्मकथा...जून का प्यार और उसकी शिकायतें..वह महान है और उसका प्यार भी. नन्हे के पसंद के राजमा और नम्रता का जन्मदिन, उनके एक परिचित की बेटी का. कल उन्हें एक पंजाबी परिवार के यहाँ जाना है, जिनके पूर्वजों के साथ उसके पूर्वजों के सम्बन्ध थे. वह केक बनाकर ले जायेगी.

आज नन्हे का पहला इम्तहान है, कल विश्वकर्मा पूजा के कारण जून का दफ्तर जल्दी बंद हो गया. उन्हें चार दिन के बाद लम्बी यात्रा पर निकलना है. सोनू के स्कूल जाकर छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र देना है. आज सुबह झमाझम वर्षा हुई पर अब धूप निकल आयी है.

नवम्बर का प्रथम दिन ! खिली-खिली धूप और सब कुछ साफ-शफ्फाफ सा..जून और सोनू दोनों अपने-अपने ऑफिस व स्कूल गए हैं और वह यहाँ अपने चिर-परिचित स्थान पर..कितने दिनों के बाद.. वे लोग कितने स्थानों पर गए, बनारस, उल्हास नगर, मुम्बई, सहारनपुर, देहली, और पुनः बनारस...फिर कोलकाता, कितने लोगों से मिले ..जून की मासियों, मामाओं, बुआ  और उनके बच्चों से.. पहली बार वह उन सबसे मिली..फिर अपने परिवार जनों से...अब वे आ गए हैं अपने घर. यहाँ सब कुछ वैसा ही है. उसने सोचा धीरे-धीरे सभी को पत्र लिखेगी. श्रीमती गाँधी की पुण्यतिथि भी बीत गयी, छह वर्ष हो गए, समय कितनी जल्दी गुजर जाता है. आज शाम को उसकी छात्रा आयेगी पढ़ने, अच्छा ही है, लगेगा कि उसने कुछ किया दिन भर में ऐसा जो उसे अच्छा लगता है. आज ‘डेफिनिट इंटीग्रल’ पढाना है.

गुलाबी सर्दियाँ पड़ने लगी हैं, नौ बजे हैं, सब ओर सन्नाटा एक चुप्पी सी लगी है. उसने कोलकाता से लाए पैंजी के बीज माली से भूमि में डलवाए फिर उन्हें हल्का पानी डाल कर ढक दिया. उसे सोनू का ध्यान हो आया, आज फिर उसका टेस्ट है, घर आयेगा तो स्कूल की सारी बातें कहेगा. आजकल सुबह उसे उठाने के लिए बहुत मनाना पड़ता है. पढ़ाने के लिए भी उसे नए-नए तरीके सोचने पड़ते हैं, उसका ध्यान खेल में कुछ ज्यादा रहता है. जून जब थोड़ा जोर से बोलते हैं समझाने के लिए तो बैठ जाता है पर उसका भी असर कुछ देर ही रहता है. शायद सभी बच्चे ऐसे ही खेलते-कूदते बड़े हो जाते हैं.

Tuesday, October 30, 2012

सारनाथ का टूर



कालेज में नागर मैडम ने कुछ आवश्यक बातें बतायीं, जो हर टीचर पहले भी कई बार दोहरा चुकी है, उसके बाद कोई टीचर नहीं आयी. एक बजे ही वह घर आ गयी थी, रास्ते में अखबार खरीदा और कम्पीटीशन सक्सेस. थोडा बहुत पढ़ते रहना चाहिए, आरती मैडम ने बताया कि यूजीसी परीक्षा की तैयारी करके अगले वर्ष जरूर देनी चाहिए. जून को भी लिखेगी इस बारे में और रही बात नवोदय स्कूल में नौकरी की तो वह  उसके लिए नहीं है. स्वप्ना से उसने सेंट्रल स्कूल के फार्म के लिए कहा है, अभी उसे कल की कक्षा में पढ़ने के लिए पढ़ना है.

फरवरी के पांच दिन बीत गए, आज कालेज में थोड़ी पढ़ाई जरूर हुई. अगले हफ्ते मंगल को उनका सारनाथ जाने का कार्यक्रम है, एक्टिविटी में वही फ़ाइल शेष रह गयी है. जून ने लिखा है कि अप्रैल में जीएम से छुट्टी मांगना उनके लिए बहुत मुश्किल होगा, सिर्फ पांच सीएल लेकर वह यहाँ आएंगे जससे अक्टूबर में ज्यादा छुट्टियाँ ले सकें. पर वह जो दम भरते हैं कि उसके लिए कुछ भी कर सकते हैं, देखें उसकी बात कहाँ तक मानते हैं.

सोमवार होने के बावजूद आज भी कालेज में वही हाल रहा, एक टीचर को छोड़ कर कोई क्लास में ही नहीं आई. कल सारनाथ जाना है.

सारनाथ गयी, नन्हे को नहीं ले जा सकी जैसा उसने सोचा था. ले जाती तो कोई हर्ज नहीं होता पर यह उनकी नागर मैडम उसूलों से बंधी हुई जैसे एक नन्हे के जाने से...खैर प्रोग्राम अच्छा ही रहा, कभी-कभी बोरियत भी हुई लड़कियों के बेहिसाब गाना गाने से. मंदिर भी देखे, स्तूप भी और खंडहर भी, पर उनके बारे में लिखना भी तो है. संग्रहालय भी देखा. जितना स्वयं लिख सकती है वह तो एक-डेढ़ पन्ने का ही होगा..खैर शायद किसी किताब से थोड़ी सहायता मिल जाये. नन्हे के लिए दो-तीन किताबें खरीदीं उसने कहा था, ‘मेरे लिए पुस्तक लाइयेगा’. भोजन जितना ले गयी थी आधा भी खत्म नहीं हुआ था, एक भिखारिन को दे दिया. स्वप्ना, रीता, कविता और एक लड़की, वह खुद, इन पाँचों ने सभी कुछ साथ देखा. लिम्का पिया उसने, जून के साथ कहीं जाने पर वे लिम्का ही पीते थे. घर आते ही उसका पत्र मिला, वह  आस्ट्रेलिया जायेगा. लिखा है, क्या मंगाना है लिस्ट बना लो..वह उसे कितना चाहता है.  

मन परेशान है, आँखें बरसने को आतुर, घबराहट, आक्रोश, दुःख सभी कुछ एक साथ महसूस हो रहा है. जून का एक बहुत प्यारा सा खत मिला है, पर इस मन का क्या करे. खत मिला था तब बहुत खुश थी, पर नन्हे की परवरिश को लेकर एक ऐसी बात हो गयी है कि...समझ नहीं आता क्या होगा अब. कल सारनाथ जाने से पूर्व वह चने की उबली दाल रख गयी थी कि इसको छौंक लगाकर नन्हे को खिला दें, मकानमालिक के यहाँ ब्राह्मणों को खिलाने के लिए खूब मिर्च वाली पूरी-सब्जी बनी थी वह नहीं, पर शाम को आकर देखा तो दाल वैसे ही पड़ी थी, सुबह कालेज जाने से पूर्व वह किसी बर्तन को ढूँढ रही थी तो कटोरी में खराब दाल की महक आयी, तभी उसे फेंक देना चाहिए था, क्योंकि कालेज से वापस आकर पता चला कि वही दाल आज उसे खिला दी, उसे बहुत खराब लगा और उसने कह दिया कि ऐसा नहीं होना चाहिए था, इसी बात पर सभी नाराज हैं. हुआ करें नाराज, आज के बाद नन्हे को बासी तो नहीं खिलाएंगे न.






Wednesday, February 22, 2012

गणपति बप्पा मोरया



यह कमरा(ड्राइंगरूम+डाइनिंग रूम) जहाँ वह बैठी है, ठंडा है, बाकी दोनों कमरों की तुलना में. बाहर कितनी तेज धूप है, सुबह-सुबह काफ़ी ठंड थी. पुराने घर में धूप का पता ही नहीं चलता था, यहाँ इतन खिड़कियों के कारण रोशनी से भरा रहता है घर. सुबह नल में पानी नहीं आया पहली बार वह स्नान नहीं कर सकी. परसों वे तिनसुकिया गए थे, “शिवधाम” शिव मंदिर देखा पहली बार. भाई का पत्र आया है राखी मिल गयी है. वह चेयर बैक पर फूल काढ़ रही है आजकल. इस हफ्ते भी चार पत्र आये हैं, कोई हफ्ता ऐसा नहीं जाता जब एक या दो पत्र न आते हों.
आज जून ने दांत का एक्सरे कराया है, कहता है कि निकलवाना पड़ेगा, नूना को सोच कर ही डर लगता है, कितना पीड़ादायक होगा यह अनुभव. उसे याद आया माँ ने एक बार दांत निकलवाया था, चेहरा सूज गया था.
कल शाम वे गणेशोत्सव देखने गए थे, पंडाल में काफ़ी भीड़ थी. परसों विश्वकर्मा पूजा देखी, जगह जगह हाथी पर बैठे हुए विश्वकर्मा जी की मूर्तियां स्थापित की गयीं थीं. एक प्रदर्शनी व पूजा के कारण आजकल सब जगह बहुत भीड़ रहती है.