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Friday, August 9, 2019

काले खट्टे शहतूत



रात्रि के पौने नौ बजे हैं. अभी-अभी जून से बात हुई. वह एयरपोर्ट से सीधे लाजपतनगर गये, सूखे मेवों की दुकान पर, जहाँ से वह पिछले अनेक वर्षों से खरीदारी करते हैं. बात चल रही थी कि कुछ गिरने की आवाज आई, पर सब तरफ देखा, कहीं भी कुछ दिखा नहीं, बाद में बाहर जाकर भी देखा, सब कुछ अपनी जगह व्यवस्थित था. जीवन एक रहस्य है, यह बात मन में कौंध गयी. पिता जी से भी बात हुई, दोपहर को पता चला था, उन्हें ज्वर है, इस समय ठीक थे. आज ही बड़ी बुआ जी से भी बात की, अस्वस्थ हैं, दर्द में थीं. अंत समय में कितना कष्ट होता है किसी-किसी को, और कोई सहज ही देह का त्याग कर देता है. आज दोपहर ब्लॉग पर मृत्यु के बारे में ही लिखा. एक न एक दिन तो देह की मृत्यु होनी ही है. कल सुबह मृणाल ज्योति के किसी काम से अकेले डिब्रूगढ़ जाना है. बहुत पहले सासु माँ जब अस्पताल में थी, कई बार जाया करती थी. दोपहर को बच्चों की संडे क्लास चल रही थी, उड़िया सखी का वीडियो कॉल आया, जो पहले हर इतवार को उसकी मदद किया करती थी, उसने बच्चों से कुछ सवाल पूछे. सभी को बहुत आनंद आया. आज भी पिछले कुछ दिनों की तरह 'मान्डूक्य उपनिषद' की व्याख्या सुनी. जागृत, स्वप्न और सुषुप्ति से भी परे है तुरीया और इन सबमें  है एक ही आत्मा या ब्रह्म, ऊँ इन चारों का प्रतीक है. वैश्वानर, तैजस और प्राज्ञ इन तीन अवस्थाओं के प्रेरक हैं तथा इनका प्रेरक ब्रह्म ही है.  

जून से बात हुई, उन्हें गले में खराश व हरारत महसूस हो रही थी. ईश्वर से प्रार्थना है कि वह शीघ्र स्वस्थ हो जाएँ. परमात्मा उन्हें शक्ति प्रदान करेंगे. वह सफर में हैं और घर का आराम उन्हें नहीं मिल पायेगा, अभी दो दिन और उन्हें बाहर रहना है. कल रात दो बजे उठना होगा, सुबह की फ्लाईट के लिए. दिन भर गोहाटी में भी व्यस्त रहना होगा. घर आकर ही उन्हें पूरा आराम मिलेगा. इतवार को उनका इंटरव्यू भी है. परमात्मा सदा उसके साथ है. वैश्वानर, तैजस और प्राज्ञ के रूप में वह हर घड़ी सबके साथ है. अभी-अभी टीवी पर समाचार देखे. अमिताभ बच्चन को भारी पोशाक की वजह से शरीर में दर्द हो गया था, डाक्टरों की टीम उन्हें देखने गयी. फुफेरे भाई से बात हुई, बुआ जी अस्पताल में हैं, उनेक पैर का आपरेशन हुआ है. दोपहर को उनकी कितनी बातें याद आ रही थीं. आज काश्मीर में गुरूजी के कार्यक्रम के बारे में वीडियो देखे. कोई-कोई मडिया कितनी गलतबयानी करता है. आज वह पूना में है. वह अपने आराम की परवाह किये बिना जगह-जगह घूमकर लोगों में प्रेम व शांति का संदेश दे रहे हैं. सुबह पाकिस्तान में योग के प्रति बढ़ते आकर्षण पर भी वीडियो देखा, गुरूजी को मानने वाले वह भी हैं. आज भागवद् में कृष्ण का ऊद्ध्व को दिया गया उपदेश भी पढ़ा जिसे बहुत सुंदर ढंग से लिखा गया है. टीवी पर रामदेव जी पर जो कार्यक्रम आ रहा है, उसमें रामकिशन का अभिनय करने वाला बालक बहुत अच्छा काम कर रहा है. बचपन से ही कितना संघर्ष किया है उन्होंने. गुरूकुल में रहकर पढ़ाई की, अपने आदर्शों पर डटे रहे. उनके गुरूजी का भी बहुत बड़ा योगदान है उनके जीवन को गढ़ने में. बालकृष्ण भी बहुत अच्छी तरह बात करता है. आज उम्मीद पर एक कविता लिखी, शायद ब्लॉग समूह पर पहुँच गयी हो.

आज योग कक्षा के बाद 'जल नेति' करना सिखाया, पर शायद ही किसी को इसे करने का उत्साह जगे, क्योंकि जब उसने जलनेति पात्र मंगाने के लिए कहा, तो किसी ने भी हामी नहीं भरी. आज गुरूजी के पुराने वीडियो देखे. नारद भक्ति सूत्र पर वे बोल रहे थे. उनके जीवन पर भी फिल्म बन सकती है. दोपहर को लेखन कार्य किया.

जून दोपहर को एक बजे के थोड़ा बाद ही आ गये थे. भोजन करके दो बजे पुनः चले गये, शाम को लौटे तो हल्की हरारत थी. शाम से ही उपचार आरम्भ कर दिया है. जल्दी ही वह ठीक हो जायेंगे. आज सत्संग पूरा होते ही वर्षा होने लगी, उन पांच साधिकाओं ने मिलकर परमात्मा के नाम का कीर्तन जो किया था. बगीचे में शहतूत लगे हैं आजकल. दिन में कई बार बच्चों की टोली उन्हें तोड़ने जाती है. अभी काफ़ी खट्टे हैं काले रंग के शहतूत. आज एक ब्लागर ने टोन-टोटके आदि के बारे में विचार पूछा. कल वाणी कजी का मेल आया था, ईबुक के बारे में. आज एक कविता लिखी जो ध्यान के अनोखे अनुभव के बाद हुई मस्ती से उत्पन्न हुई थी, कितना अनोखा था आज का अनुभव..अनूठा. ध्यान पर जितना कहा जाये कम है, ध्यान की महिमा अपार है. दीदी ने बड़े पुत्र तथा परिवार से वीडियो चैट करवाई, पता चला बुआ जी अब पहले से बेहतर हैं.


Wednesday, August 6, 2014

लालकिले की शान


आज नन्हा स्कूल नहीं गया, कल शाम से उसे ज्वर है, जून अभी कुछ देर पूर्व ही दवा देकर गये हैं. उन्हें एलोपैथी से ज्यादा होमियोपैथी पर भरोसा है. नन्हे ने गर्म पानी से नहा भी लिया है. बचपन में जब उसे ज्वर होता था उसे कहीं जाने नहीं देता था पर अब वह बड़ा हो रहा है, समझ रहा है यह ज्वर तो चला ही जायेगा. कल स्कूल में होने वाली क्विज प्रतियोगिता में भाग ले पायेगा या नहीं इसकी उसे जरूर चिंता है. कल रात से ही वर्षा लगातार हो रही है, असम में कई स्थानों पर बाढ़ पहले से ही आई हुई है. कुछ दिन पहले ही हिमाचल प्रदेश में भी अचानक  बाढ़ आ गयी. कल काश्मीर के श्रीनगर में दो बम विस्फोट हुए, मरने वालों में हिंदुस्तान टाइम्स के फोटोग्राफर प्रदीप भाटिया भी थे. हिजबुल ने विस्फोट का जिम्मा लिया है. कश्मीर को भारत से अलग कर देने की पाकिस्तान की कोशिशें भद्दा रूप लेती जा रही हैं, हजारों की हत्या हो चुकी हा, कितने घायल पड़े हैं, कितने परिवार अनाथ हुए हैं और कितना धन सेना पर खर्च हो रहा है, आखिर इस सब का अंत क्या होगा और कब होगा. आज सुबह जागरण में सुना, साधक की पहली जरूरत है अभिमान मुक्त होना. अभिमानी व्यक्ति छिद्रान्वेषी होता है, वह स्वयं को जानकार व दूसरों को अपने से कम समझता है. ईश्वर की खोज में जाना है तो पहले अहम् का त्याग करना होगा, पूर्ण समर्पण करना होगा.

आज भी नन्हा घर पर है, सुबह के साढ़े आठ हुए हैं, अगस्त की एक भीगी सुबह, चिड़ियों की मिली-जुली आवाजें आ रही हैं, सुबह से वह ज्यादातर नन्हे के साथ व्यस्त रही, उसका ज्वर काफी कम हो गया है. कल दोपहर बढ़ गया था. जून और उसकी देखभाल, दवा और परहेज, गरारे आदि सभी का असर हो रहा है. उसने जून के सामने निश्चय किया है कि वे अपनी बातचीत में किसी पर भी कभी व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करेंगे, उन्हें कोई हक नहीं है और ऐसा करके वे अपनी ही नजरों में गिर जाते है और उन्हें पता तक नहीं चलता, न ही कभी समूह में इसमें साथ देंगे. चन्दन तस्कर वीरप्पन ने राजकुमार की रिहाई के लिए नई मांगें रख दी हैं.

शाम के सात बजे हैं. अभी कुछ देर पूर्व ही वे सांध्य भ्रमण करके आये हैं, शाम को कुछ देर तेज वर्षा हुई, सडकों पर पानी भरा था पर हवा में शीतलता और ताजगी थी. तन-मन दोनों तरोताजा हो गये. नन्हे का बुखार अभी तक नहीं उतरा है पर वह दोपहर को कुछ देर सोने के अलावा बिस्तर पर रहना ही नहीं चाहता.

Today is jun’s birthday. He was looking so fresh and good today in the morning. Nanha is doing his home work, is feeling well. He has a made a card also for papa. It is half past ten and she has to go to kitchen, could not write earlier because she was writing a poem for jun in that birthday card which she made on computer. Today in the morning father called to wish jun. today she has made jun’s favorite dishes.

कल उन्होंने ‘स्वतन्त्रता दिवस’ मनाया. कल के आयोजन की तयारी वे पहले ही कर चुके थे. सभी कुछ यथासोच हो गया. मौसम ने भी साथ दिया. सुबह ही भैया-भाभी को फोन किया फिर दीदी का फोन आया, सभी के समाचार मिले. परसों शाम राष्ट्रपति जी का व कल सुबह प्रधानमन्त्री जी का भषण लालकिले से सुना. मन आश्वस्त हुआ, देश की बागडोर अनुभवी हाथों में है, वे असुरक्षित नहीं हैं. पन्द्रह अगस्त को जिस मन से वर्षों पूर्व मनाते रहे थे वही जज्बा आज भी कायम है. नन्हे व जून ने मिलकर झंडा व भारत का नक्शा कम्प्यूटर पर बनाया, प्रिंट लिया और वे उनके बैठक की शोभा बढ़ा रहे हैं. सुबह घर से फोन आया, जो सखी परिचय पत्र लेकर मिलने गयी थीं, उनके लिए माँ-पिता का संदेश व कुछ सामान ला रही हैं.  

 





Sunday, April 14, 2013

फर्श की घिसाई



रात को नन्हे को हल्का ज्वर था, भाई क्लीनिक ले गया, उसने भोजन नहीं खाया सिर्फ तुलसी, अदरक की ज्यादा दूध वाली चाय पीकर सो गया, सुबह उठा तो ठीक था.  शायद उस दिन के गरिष्ठ भोजन की वजह से ऐसा हुआ, अब उसका ध्यान रखेगी. उसे घर पर छोड़कर जाने से शायद वह धूप में चला गया हो, उसने सोचा, सचमुच उसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए. जून का एक खत मिला है पर वह उसी दिन का है जब उन्हें ट्रेन में बिठाकर वह वापस घर गए थे, शायद उन्हें भी उसका पत्र मिला हो. बढाई को आज आना था, अगर नहीं आया तो कल पिताजी को उसे बुलाने जाना होगा.  शाम को छोटा भाई-पेंटर भाभी के साथ आया था, वह अपने रंगों से उसकी पेंटिग पूरी कर के लायी थी, उसने जो रंग लाकर दिए थे, उन्हें वैसे का वैसा वापस ले आयी. भाभी ने अपने पेपर क्लीपिंग्स के शौक के बारे में बताया, उसके पास ढेरों कटिंग्स हैं. वे कुछ देर खानों में बारे में बातें करते रहे, उसने आइसक्रीम बनाने के विभिन्न तरीके भी बताए. पिताजी ने पूछा, संगीत क्या है ? नूना कुछ जवाब नहीं दे पायी. दरअसल उसे हारमोनियम बजाना अच्छा नहीं लगता क्योकि उसके साथ गाना पड़ता है, गाना उसके वश का नहीं है, वह भी किसी के सामने.
  कल रात को उसे नींद नही आ रही थी, बेचैनी सी महसूस हो रही थी. गरमी के कारण या भोजन के कारण, मगर उसने किसी को कुछ नहीं कहा, बरसों पहले एक बार ऐसा होने पर पिता की प्रतिक्रिया याद आ गयी सो वह चुप ही रही. सुबह उठी तो जैसे शक्ति कम हो गयी थी, धीरे-धीरे शाम तक सम्भल पायी, सुबह भाभी के साथ बाजार जाने का कार्यक्रम था, उसे कैंसल करना पड़ा, अब वे कल शाम को जायेंगे. जून का फोन आया था, घर के बारे में पूछा, पर उनका जवाब वही पुराना था, काम मजदूरों के न आने के कारण अटका हुआ है. दो दिन पहले ननद का फोन भी आया था, उसने ससुराल आने के लिए कहा, वह ठीक से जवाब नहीं दे पाई, फोन पर सोचने के लिए वक्त कहाँ होता है.

  आज वह वे दो सूट ले ही आई जिनके बारे में वहाँ घर में सोचा करती थी, जून को अवश्य पसंद आएंगे. अभी दुपट्टे लेने बाकी हैं. नन्हे के लिए एक ड्रेस, घर के लिए चम्मच, संडसी और एक चाकू  खरीदा. पिछले दो-तीन दिन से न तो उसका सुबह का व्यायाम हो रहा है न ही शाम का टहलना. कमर का घेरा बढ़ता ही जा रहा है. दोपहर बाद उसने सिंधी कढ़ाई से चादर काढ़नी शुरू की, माँ से हरे रंग से बेल बनाना सीखा, बहुत सिस्टमेटिक है यह कढ़ाई, बहुत धैर्य है माँ के भीतर, नूना बार-बार भूल जाती थी पर वह एक बार भी झुंझलाए बिना दुबारा-दुबारा उसे बताती रहीं, जैसे पहली बार बताया था. आज सुबह उसने जून को पत्र पोस्ट कर दिया, कल उसे सपने में देखा था, उनके साथ बैठना भला लग रहा था. मंझले भाई का खत आया है वह अगले महीने आयेगा उसके वापस जाने से पहले. आज सुबह घिसाई वाला भी आ गया और दोपहर में मीटर भी लग गया.





Tuesday, October 30, 2012

लौंग-इलाइची वाली तहरी



कल के बादल अभी घिरे हैं, कालेज गयी थी, लौटी तो देखा नन्हा फिर सोया नहीं था दोपहर को. जून को पत्र लिखा, गोंद नहीं थी सो सेलो टेप से चिपकाया, पर ठीक से नहीं हो पाया है. सारनाथ के बारे में अभी तक नहीं लिखा है, सिन्हा व सुधा मैम से कहा किताब के लिए पर उन्होंने नहीं दी, लड़कियों का हक है जिन पर उन किताबों पर भी अध्यापिकाएं अपना अधिकार जमा लेती हैं. उसने तय किया भविष्य में कभी उनसे कुछ नहीं मांगेगी. एक किताब खरीदी उसने, पर विशेष लाभ नहीं हुआ, खैर कुछ ही सही. कल से तीन दिनों के लिए कालेज बंद है. ढेर सारे काम करने हैं और पढ़ाई तो करनी ही है.

छुट्टी का पहला दिन कैसे शुरू हुआ और कैसे बीत गया वह स्वयं भी नहीं समझ पायी, सुबह का वक्त तो रोज ही व्यस्तता में गुजरता है, फिर नन्हे को पढ़ाने लगी, दोपहर का भोजन, उसे सुलाना और तीन बजे जब पढ़ने आई तो बिजली गायब, दस मिनट बिना बिजली के पढ़ा तो माँ ने ऊपर बुला लिया, घर का वातावरण सामान्य हो गया है. फिर ननद का फोन आया, उसकी किसी मित्र के यहाँ जाना है. तभी पोस्टमैन आ गया, जून के दो पत्र थे, पढते ही सुधबुध खो गयी पर उन्हें देर तक एन्जॉय करने का समय ही नहीं था, अर्थात वह फौरन उसे जवाब नहीं लिख सकी. वहाँ से लौटे तो आठ बज चुके थे. भोजन बनाया, पत्र लिखा..आम पत्र नहीं , प्यार का दस्तावेज, चालीस नम्बर का नहीं पैंतालीस...पिछले दिनों वह  नम्बर गलत डाल रही थी
शुभ प्रभात ! आज वह सुबह जल्दी उठ गयी है, रात को आशिक चन्द्र ग्रहण देखा था, मकान मालकिन के यहाँ गांव से कुछ महिलाएं आयीं थीं कल गंगा स्नान करने. अभी समाचार देखने के बाद टीवी बंद क्र रही थी कि पेन नीचे गिर गया, रिफिल बेकार हो गयी, कितना प्रयास करना पड़ रहा है उसे चंद पंक्तियाँ लिखने में. दक्षिण अफ्रीका में पुलिस कितनी बर्बर है, अभी महिलाओं पर लाठी चार्ज होते देखा समाचारों में.

जैसे नियमित वह लिख रहे हैं वैसे ही नियमित आजकल उसे खत मिल रहे हैं. माँ-पिता जी का भी पत्र आया है, उन्होंने लिखा है, अप्रैल में वे तीनों वहाँ आएंगे, इसकी प्रतीक्षा वे लोग कर रहे हैं. उसने सोचा तब की तब देखेंगे, अभी से कुछ नहीं कह सकती. उसने एक सप्ताह में एक विषय पढ़ने का निश्चय किया, ग्यारह बजे उसने बत्ती बंद कर दी.

तीन दिन बाद कालेज गयी, आरती मैडम जब लेक्चर दे रही होती हैं, उसे बहुत अच्छा लगता है, उनकी क्लास ही सबसे अच्छी होती है. और एक मेहरा मैम हैं, कल के लिए पढ़ने को कहा  है पर..कल या तो वह खुद अनुपस्थित हो जाएँगी या भूल ही जाएँगी. फिर भी उसे पढ़ना तो है ही. यह प्रथम पेपर है भी द्रौपदी के चीर की तरह कहीं भी इसका ओर-छोर दिखाई नहीं देता.

आज उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं लग रहा है, हल्का ज्वर सा लग रहा है, कालेज में थकान लग रही थी. सुबह अंगूर खाए, अच्छे लगे, बाकी चीजें कड़वी या फीकी लग रही हैं.

आज फिर वह सुबह कालेज चली तो गयी पर बीच में छोड़ कर आना पड़ा, बुखार बढ़ गया था. अब लगता है कुछ दिन घर पर ही आराम करना होगा.

आज स्नान किया उसने पूरे आठ दिनों बाद, अभी भी मुंह कड़वा है, पिछले आठ दिनों में मन में न जाने कितने बवंडर उठे हैं पर उन्हें याद करना क्या बहुत जरूरी है.

आज शिव रात्रि है, काफी ठीक महसूस कर रही है पर सब्जी में कोई स्वाद नहीं आ रहा. सोच रही है रात को खाना खुद ही बनाएगी. यहाँ खाने में विविधता नहीं है, रोज वही मसूर की दाल या मूंग मिली अरहर, इसके अलावा भी दुनिया में कुछ होता है, यहाँ लोग जानते ही नहीं. सब्जी भी वही आलू गोभी टमाटर, खूब भुनी हुई. वड़ी वाले चावल, गोभी वाले चावल, लौंग बड़ी इलाइची वाली तहरी, मूली, गोभी के परांठे..सब सपने की चीजें होकर रह गयी हैं. यहाँ खाने का मतलब पेट भरने से है, सच है आजादी से बढकर कोई वस्तु नहीं , अपने घर में वह आजाद थी, खुश, निर्द्वन्द्व कुछ भी करने को स्वतंत्र !