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Wednesday, September 25, 2024

कोरोना की रिपोर्ट

कोरोना की रिपोर्ट 


आज दिन भर ऐसा लगा जैसे कुछ अधूरापन है, जैसे कोई ज़रूरी काम रह गया है, जिसे करना था। सेवा का कार्य भी कई दिनों से नहीं किया, कल एक छोटा सा अनुवाद का काम आया था, सो कर दिया। सुबह समय से उठे, छह बजे से पहले टहलकर वापस आ गये थे। जून ने सोलर पैनल की सफ़ाई की, वर्षा हुए कई हफ़्ते हो गये हैं, सब तरफ़ धूल जम गई थी। पड़ोस में जो घर बन रहा है, उसके कारण धूल अधिक आती है। यहाँ पानी कुछ खारा है, पानी को कोमल करने के लिए मशीन लगायी है, उसमें हर महीने पच्चीस किलो नमक डालना पड़ता है।आज उसमें तथा बर्तन धोने की मशीन में भी नमक भरा।नाश्ते में दलिया बनाया, जिसमें बाबा रामदेव की सलाह पर सात-आठ पदार्थ मिलाये हैं, गेहूं का दलिया, छोटे चावल, मूँग छिलका दाल, अलसी, अजवायन, सफ़ेद तिल और  ओट्स ! चाहें तो ज्वार या मकई का दलिया भी मिला सकते हैं। बनाते समय हरी सब्ज़ियाँ तो डालते ही हैं। बहुत पौष्टिक है और स्वादिष्ट भी। एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है, लिविंग ऑन द एज, अच्छी लग रही है। 


आज शाम को हम टहल कर लौटे तो पड़ोसिन श्रीमती दत्ता पीछे के बरामदे में मिलीं। सहज ही पूछ लिया, आप टहलने नहीं गयीं, तो उन्होंने बताया, उनकी बहू की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है। एक जन्मदिन की पार्टी में गई थी, वापस आकर गले में ख़राश लगी, आज तो तेज बुख़ार भी था। आर एंटीज़न की रिपोर्ट तो फ़ौरन मिल गई। आर टी पी सी यानी ‘रियल टाइम ट्रांसमिशन चेन’ की रिपोर्ट आज आनी थी। ज़रूर पॉज़िटिव आयी है, क्योंकि उनके घर के आगे बैरियर के रूप में फीता लगा दिया गया है, और घर का फ़्यूमिगेशन भी किया गया। अब उन्हें ख़ुद भी बहुत सावधान रहने की ज़रूरत है। रात्रि भ्रमण के लिए नहीं गये। इस समय यहाँ कई घरों में कोरोना के मरीज़ हैं।आज नाश्ते में मकई के आटे में बगीचे से तोड़ी पालक मिलाकर रोटी बनायी। मौसम अब गर्म हो गया है, एसी चलाने लायक़ गर्म। आज दोपहर को एक और घर को सैनिटाइज करने की आवाज़ आ रही थी। शायद कोई और मरीज़ मिला है। कल यहाँ पर आर टी पी सी टेस्ट के लिए कैंप लग रहा है,शायद कुछ और निकल आयें। देश व दुनिया में तेरह करोड़ लोग इससे ग्रसित हो चुके हैं। 


सुबह जब वे घर से निकले, आकाश में चाँद तारे खिले हुए थे।वातावरण शांतिदायक था खुली हवा में टहलते समय कितने सुंदर विचार आते हैं।  हवा, धरती, सूरज और आकाश के साथ एक्य का अनुभव हो रहा था। वापस आकर छत पर योग साधना की, ऊपर विशाल गगन था पर बादलों के कारण सूर्योदय नहीं दिखा।रोज़ सुबह सबसे पहले घर से बाहर निकल जाने वाले पड़ोसी छत पर टहल रहे थे, उनके घर से न कोई बाहर जा सकता है, न कोई आ सकता है।कभी अपने ही घर में नज़रबंद होना पड़ेगा, ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। उनसे बात हुई तो कहने लगे, बहू को स्वाद व सुगंध का कुछ पता नहीं चल रहा है।


संध्याकाल का भ्रमण नहीं हुआ। हिम्मत करके मास्क पहनकर रात्रि भ्रमण के लिए निकले। सड़क ख़ाली थी, केवल एक व्यक्ति अपने कुत्ते को घुमाने लाया था।लोग फिर से अपने घरों में बंद रहने को बाध्य हो गये हैं। श्रीमती दत्ता ने बताया कि उनके परिवार में बहू को छोड़कर सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आयी है। उन्होंने अपने पोते को कहा दिया है, माँ बाहर गई है। वह फ़ोन से बात कर लेता है। छोटे भाई की रिपोर्ट भी पॉज़िटिव है, पापाजी को भी बुख़ार हो गया है। भाभी अभी तक ठीक है, भाई ने बताया, वह नियमित शंख बजाती है और गरम पानी में नींबू और शहद डालकर रोज़ सुबह पीती है। ईश्वर उसकी रक्षा करेंगे। उसे ही दोनों मरीज़ों की देखभाल करनी है। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, उसे नाइट ड्यूटी पर जाना था, थोड़ी चिंतित थी। 


सुबह पापाजी से बात हुई, उन्हें भी कोरोना हो गया है। पर बुख़ार होने पर भी सुबह की चाय स्वयं बनायी। भाभी नाश्ता-खाना ऊपर रख जाती है। दीदी से बात हुई, वह आजकल ब्रेनविटा खेलती हैं, अभी तक अंत में एक कंचा नहीं आ पाया है। यू ट्यूब पर उसका हल देखकर सीखने से ही आयेगा शायद। आज गर्मी कल से अधिक है। उनका एसी काम नहीं कर रहा है, शायद उसका कंप्रेसर ख़राब हो गया हो। आज शाम को श्रीमती दत्ता को इतने वर्षों में पहली बार छत पर देखा। दत्ता जी को भी खांसी व बदन दर्द की शिकायत हो गई है, पुत्र की तबियत भी ठीक नहीं है। 


Thursday, November 1, 2012

देखो मम्मा, चढ़ा बुखार



कल शाम से ही नन्हा कुछ अस्वस्थ लग रहा था, सुबह उठा तो और भी ज्यादा परेशान था, वह उसी के पास बैठी रही, साढ़े ग्यारह बजे निकली, कालेज बंद था सोचा लिफाफे ही खरीद लेगी, खत्म हो गए हैं, कल इतवार है सोच रही है सुबह जल्दी उठकर कपड़े धोएगी, कई दिन से सारा काम माँ पर आ गया है, ननद को बाहर जाना था, वह कल ही वापस आयी है.

पिछले चार दिनों से नन्हे को बुखार चढ़ता-उतरता रहता है, दवा ले रहा है पर उसका असर नहीं हो रहा है, उसका खुद का स्वास्थ्य भी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, पढ़ाई तो हो नहीं पा रही है पर उसकी चिंता अवश्य है. घर का माहौल भी प्रफ्फुलित नहीं रह गया है, सभी के मन जैसे इस जिंदगी ने स्नेह से वंचित कर दिए हैं, नन्हा ठीक था तब वे उसके साथ हँसते-खेलते थे.
आज वह नन्हे की रिपोर्ट लेने गयी थी, डाक्टर ने रक्त की जाँच करने को कहा, दवा बदल दी है. कल से उसका ज्वर तेज नहीं हुआ है. कल कालेज गयी थी, लाइब्रेरी से किताबें बदलनी थीं. उनसे कुछ नोट्स बनाने हैं, पूर्णिमा मैडम बहुत सहयोगी स्वभाव की हैं, सुधा मैम उतनी ही अक्खड़.

सुबह स्वयं नहाकर फिर सोनू को उठाने आयी, थर्मामीटर लगा रही थी कि सुनील (इसी मकान में रहने वाला दस-बारह साल का बच्चा) ने आकर बताया, भैया आए हैं, वह जानती थी जून जरूर आएंगे, अगले ही पल सीढ़ियों पर चिर-परिचित आवाज जूतों की और वह  अपने हाथ में सूटकेस लिए कमरे में आ रहे थे, वह खुश थी उस क्षण और भय भी था...दुःख था ही,  नन्हे का थर्मामीटर निकालते-निकालते उसकी ऑंखें बरस पडीं, कितने दिनों से आँसू बहना चाहते थे और आज वह आए हैं इतनी दूर से, जिन्हें उन आंसुओं की कद्र थी. नन्हे को देखकर वह भी उदास हो गए, पर अब सब ठीक हो जायेगा, कल उन्हें राजस्थान जाना है दस दिनों के लिए, जब तक लौटेंगे सब सामान्य हो चुका होगा. दोपहर को वे उन्हें लेकर मार्केट गए, उसे दो बेहद सुंदर साड़ियां उपहार में दिलायीं और नन्हे के लिए भी एक ड्रेस खरीदी.

जून किसी काम से बाहर गए हैं, कह गए थे दो-ढाई बजे तक आएंगे, वह जानते नहीं कि हर पल कोई उनका इंतजार करता होगा. अभी-अभी उनका एक पत्र मिला तब उन्हें पता नहीं था कि वह यहाँ आ सकेंगे, आज डीलक्स से दिल्ली, फिर वहाँ से जोधपुर तथा आगे फील्ड, दस दिन बाद एक दिन के लिए पुनः यहाँ और फिर वापस असम. उसने कल्पना में देखा कि परीक्षाओं के बाद वह नन्हे को लेकर अपने माँ-पिता के यहाँ गयी है, वहीं उसे लेने जून आए हैं, फिर वे सब अपने घर गए हैं और जीवन पूर्ववत् हो गया है, खूब घूमना...कहानियाँ पढ़ना.. खूब सारे पानी से जी भर कर नहाना...सब तरह की दालें बनाना..और भी कई काम, जिंदगी में सभी कुछ एक साथ तो नहीं मिल जाता है, कभी धूप कभी छाँव, कभी प्यार तो कभी इंतजार...कभी मिलन तो कभी बिछड़ना..पर अब और नहीं बिछड़ना.

अभी-अभी वह चले गए, कल सुबह आए और आज शाम चले गए पर इस एक रात और दो दिनों में कितना-कितना स्नेह भर गए हैं, उसने वादा किया कि कभी उदास नहीं होगी, उन्हें भी मालूम है और उसे भी की उनकी याद कितनी आयेगी और कभी रुला भी जायेगी लेकिन उनका आना उसे बहुत अच्छा लगा, इतने दिनों से एकाकी मन जो एक ख़ामोशी से भर गया था, उसे तोड़ना कितना सुकून दे गया. कितनी खुशी से भर गया, जो इतनी दूर थे, जिन्हें वह रोज बुलाती थी, वह उसकी आवाज सुनकर एक सच्चे मित्र की तरह उनके पास आ गए. नन्हा भी बहुत खुश है वह जल्दी ठीक हो जायेगा अब. कुछ दिन बाद फिर आएंगे अब उसका समय उसी दिन के इंतजार में कटेगा.

सोनू आज सुबह से उठा है तभी से बहुत परेशान सा है, बात-बात पर रो देता है, दूध नहीं पीना...ब्रश नहीं करना..चाय भी नहीं..और बिस्किट भी नहीं...हर बात में नहीं और ज्यादा कहने पर सिसकियाँ लेकर रोना, उसे लगता है पापा की याद आ रही है. जब तक वह आएंगे तब तक तो बिल्कुल ठीक हो जायेगा, कितना कमजोर हो गया है, पर ठीक होकर पुनः दौडेगा पहले की तरह छत पर, फिर अपने घर में.. वह सोच रही थी आज कालेज जायेगी, पर अब मुश्किल लगता है. बहुत दिनों का गैप हो गया है उसका, अब तो लगता है सब खुद ही पढ़ना होगा. अगर अच्छे नम्बर नहीं भी आए तो कोई बात नहीं, नन्हे से बढकर कुछ नहीं उसके लिए. उसे छोड़कर तो नहीं जा सकती.