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Monday, July 30, 2018

मछलियों की बारिश



आज क्लब में मीटिंग है, ‘काव्य पाठ’ प्रतियोगिता भी है. निर्णायकों के लिए उपहार आ चुके हैं और प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार लेने वह एक सखी के साथ को-ओपरेटिव गयी, जहाँ पुरस्कार पैक भी हो रहे हैं. इस सखी के दांत में दर्द था उसका रक्तचाप भी बढ़ा हुआ है. वे अपने तन की देखभाल अच्छी तरह नहीं करते, तभी वह उनके लिए दर्द का कारण बनता है. उसकी कमर का घेरा इस ड्रेस में स्पष्ट नजर आ रहा है, आधा घंटा टहलना उपयुक्त रहेगा तैयार होने से पूर्व. अभी कुछ देर पूर्व उसने रसीद स्कैन की जो ट्रेजरर को देनी है, तीन-चार महीने में तो पैसे मिल ही जायेंगे, कार्यक्रम अच्छा होना चाहिए. इस महिला को पैसे देने में बहुत तकलीफ होती है, वह चाहती है क्लब में कोई खर्च ही न हो. कल एक सदस्या का फोन आया, उसने ‘मातृ दिवस’ पर एक गीत लिखा है, जो क्लब के कार्यक्रम में प्रस्तुत करना चाहती है. आज ब्लॉग पर ‘अयोध्या काण्ड’ का सैतींसवा सर्ग लिखा, कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है.

आज मौसम कितना अच्छा है, मंद पवन का स्पर्श और झूले पर बैठकर लिखना एक सुखद अनुभव है. वर्षों बाद मुरारी बापू की कथा सुनी, आज ही ब्लॉग पर पढ़ा कि पहले कैसे सुनती थी. सीता जी का पालन-पोषण महलों में हुआ था पर वह वन में भी कितनी प्रसन्न हैं, क्योंकि वह बचपन से ही प्रकृति के सान्निध्य में पली-बढ़ी थीं. बचपन में दिए संस्कार जीवन भर साथ चलते हैं. आज सुबह एक वरिष्ठ सदस्या का फोन आया, कल उसके कहने पर उन्होंने कविता पाठ में भाग लिया, पर उन्हें कहा गया, निर्णायक महोदय को संबोधित करने के कारण उनके अंक कम हो गये और पुरस्कार नहीं मिला. एक सखी का फोन आया, उन वरिष्ठ सदस्या ने उसे स्टेज के सामने जाकर एक महिला का फोटो खींचने के लिए, फटकारा, प्रेम भरा उलाहना ही रहा होगा. महिला क्लब भी राजनीति का अखाड़ा बन गया है क्या, खैर, उसे क्या फर्क पड़ता है, बल्कि एक कविता का जन्म हो गया उनसे बातचीत के बाद. कल के कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत भी था, सुगम संगीत भी और पश्चिमी संगीत भी.

एक सखी का फोन हृदय को सुखद अहसास से भर गया जो वर्षों पहले यहाँ से चली गयी थी, वे लोग दुबारा यहाँ आ रहे हैं. एक अन्य सखी से वर्षों बाद फेसबुक पर पुनः मुलाकात हुई. नन्हे की मित्र से बात हुई, हिंदी की किताबें ‘रश्मिरथी’ और ‘मधुशाला’ के बारे में राय पूछ रही थी, किसी को उपहार में देनी हैं. दोपहर के तीन बजे हैं, न ठंडा न गर्म, न वर्षा..बल्कि वसंत का मौसम ! शाम को क्लब में युवा गायक ‘पापोन’ का कार्यक्रम है, पर वे तेज आवाज में संगीत नहीं सुन सकते. दोपहर को अभ्यास के समय ही ड्रम की आवाज क्लब से घर तक आ रही थी. उसका गीत मोबाइल पर सुन रही है, आवाज तो अच्छी है उसकी, ‘बर्फी’ में भी उसने गाया है. कल रात तेज वर्षा के कारण बोगेनविलिया जो गुलमोहर पर टिका था, गिर गया, कुछ भाग ही गिरा है, मुख्य भाग अभी भी शेष है. आकाश से मछलियाँ गिरने का एक वीडियो देखा, गूगल में पढ़ा, वर्षा में ऐसा होना कोई नई बात नहीं है. सदियों से ऐसा होता आया है, पहले समुद्र से वे ऊपर जाती हैं फिर नीचे आती हैं.

Friday, February 9, 2018

मोदीजी का भाषण



आज क्लब की मीटिंग थी, अभी तक नयी कमेटी का गठन का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है. उससे पूर्व बगीचे में टहलते समय भगवद् गीता के एक श्लोक की व्याख्या सुनी. जगत को देखने का किसी का ढंग यदि विधायक है तो जगत सुखमय दिखाई देगा. भीतर यदि श्रद्धा होगी तो अस्तित्त्व उसके लिए अपना द्वार खोल ही देगा. दोपहर को बगीचे में कितनी सारी तितलियाँ उड़ रही थीं. एक की तस्वीरें लीं. कल छोटी भतीजी का जन्मदिन है, उसे फोन किया, पर शायद उसका फोन नम्बर बदल गया है. जून के न रहने पर उसे साढ़े तीन घंटे लगते हैं सुबह की सभी क्रियाओं में. परसों से दो घंटों में करना होगा सभी काम. उन्हें सुबह पौने सात बजे ही दफ्तर जो जाना होता है.

डायरी में पिछली एंट्री पांच तारीख की है. आज पूरे बारह दिन बाद लिख रही है. जून अगले दिन लौटे थे, फिर छोटी बहन परिवार सहित आई और साथ ही नन्हा भी. वे लोग अरुणाचल प्रदेश घूमने गये, नदी के तट पर घूमे और अनगित यादें समेट कर तीन दिन पहले वह वापस गयी और कल नन्हा भी चला गया. आज सुबह से उसे हल्का जुकाम है.

सुबह से वर्षा हो रही है हल्की-हल्की सी. आज घर की विशेष सफाई भी करवाई, साफ घर में रहना सभी को पसंद है. मंझली भाभी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें त्वचा का कोई रोग हो गया है. उन्हें अपने आपको खुश रहना सिखाना होगा. भतीजी विदेश से वापस आना चाहती है. भाई तभी अपनी नौकरी ठीक से कर पायेगा. आज सुबह क्लब के लिए कितने नये-नये विचार मन में आ रहे थे. सदस्यों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए कुछ उपाय तो करने ही होंगे. कल वार्षिक सभा थी इसके बावजूद संख्या कम थी. अगले महीने कमेटी की तरफ से कार्यक्रम होगा, उसने सोचा वह एक कविता लिखेगी, जिसमें  अपने सुझाव भी दे सकती है और अपनी बात भी रख सकती है. नन्हे ने इस बार उन्हें उपहारों से लाद दिया है. उसने मृणाल ज्योति की सदस्यता के लिए भी फार्म भरा पर जमा नहीं कर पाया. कल क्लब में ‘दृश्यम’ दिखाई जाएगी.

आज बड़े भांजे का जन्मदिन है, सुबह उसके फेसबुक अकाउंट पर जाकर फोटो देखे और छोटी सी कविता लिखी, आजकल मिलना तो ऐसे ही होता है. दो दिन बाद छोटे भाई का जन्मदिन भी है, उसके लिए भी कुछ लिखना है. राखी पर भी एकम कविता लिखनी है. सुबह से बादल बने हैं. मौसम अच्छा है अब जुकाम भी ठीक हो गया है. यू ट्यूब पर प्रधानमन्त्री के स्वागत का कार्यक्रम देखा. यूएइ में उनका भव्य स्वागत किया वहाँ रहने वाले भारतीयों ने. मोदी जी का भाषण आ रहा है, जैसे किसी राजनीतिज्ञ का होता है, उन्होंने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है. देशभक्ति का जज्बा उभरने में भी कामयाब हुए हैं. सुबह नींद खुली अलार्म सुनकर, पर दो मिनट तक लेटी रही, फिर किसी ने भीतर से कहा, जगे हुए का सोये रहना बहुत खतरनाक होता है. जो सोया है उसे क्षमा किया जा सकता है पर जो जगा हुआ है और सोने का नाटक कर रहा है, वह क्षमा के योग्य नहीं. उठकर प्रातः भ्रमण को गये, वापस आकर बोगेनविलिया की छंटाई करवाई, उसे अपराजिता की बेल ने छाकर ढक लिया था. माली व नैनी का  झगड़ा जो उनके न रहने पर हुआ था, उसकी सुलह करवाई. दोपहर को नींद में स्पष्ट दृश्य देखे, लगा जैसे जागकर ही देख रही है. एक रहस्य भीतर खुलता जाता है और एक रहस्य भीतर जुड़ता जाता है. आकर देखा, बगीचे में अभी तक झाड़ू नहीं लगा है. तरीके से माली को रोज आकर अपना काम करना चाहिए, पर कई बार बुलवाना पड़ता है, यह सोचते हुए ही भीतर हल्की सी क्रोध की रेखा दिखी, तो उसने सोचा यह क्रोध उसका ही नुकसान तो नहीं कर रहा, एक पल पहले जो था अब नहीं है, आत्मा तो सदा एकरस है.  

Tuesday, August 8, 2017

जीवन-चित्र-विचित्र


आज शाम को क्लब में मैजिक शो है. कल ‘गुरू पर्व’ है, ‘देव दीवाली भी’, दूरदर्शन पर वाराणसी से सीधा प्रसारण किया जायेगा, प्रधानमन्त्री भी जायेंगे. परसों वह दो अन्य महिलाओं के साथ दिगबोई व तिनसुकिया के स्कूलों में जायेगी. विकलांग दिवस के अवसर पर मृणाल ज्योति में एक चित्रकला व निबन्ध प्रतियोगिता के लिए निमन्त्रण देना है. सप्ताहांत में एक स्कूल में उसे वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में जाना है. लेडिज क्लब की पत्रिका के लिए लेख लिखना है. इस बार विषय क्लब से संबंधित होना चाहिए. बरसों से वह इसमें जा रही है. कितनी ही यादें हैं. लिखना शुरू करे तो कई पन्ने भर जायेंगे. जब इसकी सदस्या बनी थी, उस वक्त को याद करती है तो लगता है कल की ही बात है. आरम्भ में तो अधिक सक्रिय नहीं रही, केवल मीटिंग में सम्मिलित होना ही याद है. फिर एक दिन स्वरचित कविता का पाठ किया जिसके बाद सेक्रेटरी ने वार्षिक कार्यक्रम के लिए हिंदी में कुछ लिखने का काम दिया था. क्लब की पत्रिका में हिंदी लेखों के संपादन का कार्य भी कई बार किया. कितनी ही बार समूह गान में भाग लिया, जिनकी रिहर्सल में जाना एक यादगार अनुभव बन गया है. उन दिनों मीटिंग के बाद की चाय के लिए भोजन घरों पर ही बनाया जाता था. उसे याद है दोपहर को कुछ महिलाएं किसी एक घर में एकत्र होकर यह कार्य करती थीं. रात को भोजन बच जाने पर सभी के यहाँ पहुंचाया जाता था. तब से अब तक बहुत सा पानी गंगा में बह चुका है. अब लोग ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं, अब भोजन कुक बनाते हैं परोसने का काम भी उन्हीं के लोग करते हैं. उस समय ज्यादा वक्त वेशभूषा तथा साज-सज्जा पर खर्च होता था, पर आज की महिला अपने को एक पूर्ण व्यक्तित्त्व मानती है. वह समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को पहचानती है, उन्हें निभाना चाहती है. क्लब द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न प्रोजेक्ट इसकी गवाही देते हैं.

आज मृणाल ज्योति के संस्थापक महोदय ने अपने जीवन के अनुभव बताये. बहुत रोचक और रोमांचभरी कहानी है उनकी. जीवन में उन्होंने इतने संघर्ष झेले हैं पर उनमें काम करने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है. एक बार वह एक बस में यात्रा कर रहे थे. हाथ में रूसी लेखक बोरिस येल्स्तीव की पुस्तक थी. साथ बैठे व्यक्ति ने पूछा, यह पुस्तक कहाँ से मिली, तो उन्होंने कहा, खरीदी है, क्योंकि ऐसी किताबें पढने का शौक है’. उस व्यक्ति ने अपना पता दिया और मिलने को कहा. उन्हें एक सीक्रेट संस्था में काम मिल गया, मगर वह किसी को इस बारे में बता नहीं सकते थे, कोई पहचान पत्र नहीं था. पुलिस तक को पता नहीं था कि ऐसी कोई सरकारी संस्था है. उन्हें वैसी कई पुस्तकें पढने को दी गयीं. नक्सल आन्दोलन तथा गुरिल्ला युद्ध के बारे में जानकारी मिली. प्रशिक्षण दिया गया. उसी दौरान एक बार ऊँचाई से गिर गये, काफी चोट आई. छह महीने इलाज चला. जॉब जारी रहा पर बाद में तनाव बढ़ने लगा. गिरने के कारण सर में चोट आई थी, उसका भी असर था. नौकरी छोड़ दी. आगे पढ़ाई की और अध्यापक बने. उसी दौरान एक केस के सिलसिले में बड़ी बहन ने कहा, इस काम को ऐसे अंजाम दो, तब पता चला वह भी उसी संस्था में थी, अभी तक उसी क्षेत्र में है. घर में किसी भी पता नहीं था कि वह यह काम करती है. जीवन कितना विचित्र है, इतनी बड़ी धरती पर कब, कहाँ क्या हो रहा है, कौन जान सकता है.


कल जून वापस आ गये, घर जैसे भर गया है, पहले की दिनचर्या आरम्भ हो गयी है. आज एकादशी है, लंच में साबूदाने की खिचड़ी बना रही है. कल से ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ का कोर्स आरम्भ हो रहा है. आज सुबह एक दु:स्वप्न देखा. मेहमान के लिए भोजन बना रही है पर बन नहीं पा रहा है. कभी जल जाता है कभी कुछ और समस्या. मेहमान भी वही है जिसके बारे में एक व्यर्थ विचार मन में जागृत अवस्था में आया था, अर्थात उस स्वप्न का बीज तब बोया गया था. उनके हर भाव, विचार तथा कृत्य का फल मिलता है. कर्म पर ही उनका अधिकार है, फल पर नहीं, फल तो भोगना ही पड़ेगा. यदि उस समय जग जाती तो स्वप्न टूट जाता. सद्गुरू के अनुसार इसी तरह अज्ञान की नींद से जगने पर भी भीतर के सारे दुःख नष्ट हो जाते हैं. 

Monday, January 2, 2017

तरह-तरह के ध्यान


कल कुछ नहीं लिखा, शाम को क्लब गयी थी. लेडीज क्लब की मीटिंग थी. एक सदस्या का विदाई समारोह था, उसने उनके लिए लिखी कविता पढ़ी, उन्हें शायद उम्मीद नहीं थी. लौटकर पद्म साधना की, जैसे आजकल वे रोज करते हैं. आज भी बदली है आकाश में. पिताजी बाहर बरामदे में बैठकर अखबार पढ़ रहे हैं, माँ कमरे में अपनी चिर-परिचित मुद्रा में कुर्सी पर बैठी हैं. कल वे उनका जन्मदिन मनाने वाले हैं, उसने उनके लिए एक कविता लिखी. शाम को नन्हे के बचपन के फोटो चुनने हैं, वे उसके जन्मदिन पर उसे एक कोलाज बनाकर भेजेंगे. आज का ध्यान भी अच्छा था, जब कोई विचार नहीं है और इच्छा नहीं है तब क्या कोई कह सकता है कि ‘वह है’ ? दो श्वासों के बीच जो अन्तराल है, वे वहाँ भी नहीं होते, दो विचारों के बीच भी वे नहीं होते. आकाश में बादलों की तरह विचार आते और चले जाते हैं, उन पर कोई वश भी नहीं है. आत्मा में कोई क्रिया ही नहीं है, क्रिया करने की शक्ति है, जानने की शक्ति है और मानने की शक्ति है, लेकिन वे शक्तिमान हैं, शक्ति नहीं..अपने शुद्ध रूप का एक बार ज्ञान हो जाये तो चाहे वे शक्ति का कितना ही उपयोग करें..गलती तब होती है जब वे स्वयं को शक्ति ही मान लेते हैं और चुक जाते हैं...

दीदी को माँ के लिए लिखी कविता भेजी थी, उनकी यह अच्छी आदत है, फौरन जवाब देती हैं. आज का ध्यान भी अच्छा था. शरीर से बाहर वे कहाँ हैं और देह के भीतर वे कहाँ हैं, इसका अनुभव करना था. वे सब जगह हैं और कहीं भी नहीं है. देह से जब तक तादात्म्य रहता है, वे बंधन महसूस करते हैं, शरीर से जब तादात्म्य टूट जाता है तब वे पहली बार मुक्ति का अनुभव करते हैं..और मुक्ति ही आनंद है. उस आनन्द में किसी को अपना भागीदार बनाने के लिए फिर वे परमात्मा की भक्ति करते हैं, प्रेम बांटते हैं और सारा जगत उन्हें अपना ही रूप नजर आता है. आज छोटी बुआ पर संस्मरण लिखा.

कल जो कविता उसने ब्लॉग पर डाली थी. ध्यान के अनुभव के बाद लिखी थी और जो ध्यान नहीं करते, साधना पथ पर नहीं हैं, उन्हें समझ में नहीं आएगी. आज का ध्यान भी अनूठा था. सभी कुछ ब्रह्म है, इसका अनुभव करना था, पदार्थ का विश्लेषण करते जाएँ तो ऊर्जा मिलती है और ऊर्जा के भी पार चेतना है, जड़ अथवा चेतन सभी के मूल में एक ही तत्व है ! आज सुबह से वर्षा की झड़ी लगी है. शनिवार है सो भोजन में बेसन की कढ़ी बन रही है.

आज ध्यान में विचार शून्यता की अनुभव किया. विचार ही सीमा है. विचार से परे जहाँ केवल चैतन्य है, वहाँ सब एक है. सच्चा संवाद मौन में ही होता है. जब दो मौन मिलते हैं तब एकात्मकता का अनुभव होता है. विचारों में एकता कभी सम्भव नहीं है. मन में जो दिन-रात चटर-पटर चलती रहती है वह ऊर्जा को व्यर्थ नष्ट करती है. वे कभी भी मौन का अनुभव नहीं करते. नींद में लगातार भीतर चलता रहता है एक प्रवाह..उसे जो प्रतीक्षा थी कि विचारों वाली कविता पर कुछ लोग कुछ कहेंगे वह कितनी मूर्खता थी. उस कविता पर टिप्पणी तो मौन रहकर ही की जा सकती है. उनके भीतर मान पाने की इच्छा भी एक विचार ही है और पाकर भीतर जो प्रसन्नता होती है वह भी एक विचार ही है अथवा तो एक संवेदना है जो उन्हें सुखद मालूम पडती है. सुखद संवेदना के प्रति वे राग जगाते हैं, फिर उन्हें बार-बार उस संवेदना की ललक उठती है, जब वह नहीं मिलती तो भीतर दुखद संवेदना जगती है. जिसके प्रति वे द्वेष जगाते हैं, वह भी उन्हें नहीं भाता तो और द्वेष जगाते हैं और इस चक्र में फंस जाते हैं. सारा खेल संवेदनाओं का है. इनका एक नशा होता है. यदि किसी संवेदना को साक्षी भाव से देखें तो कुछ ही देर में नष्ट हो जाती है, वे पुनः पहले की तरह हो जाते हैं.   


Wednesday, November 2, 2016

फटी हुई पुस्तक


दायें तरफ की पड़ोसिन ने फोन किया और पूछा क्या वह क्लब की कमेटी में है, उसने कहा, नहीं, और फिर कहा इस बार नहीं. वर्षों पहले एक ही बार वह कमेटी में थी, प्रोजेक्ट कन्वेनर तीन साल से है, लेकिन उसकी बात से लग रहा था जैसे वह हमेशा ही रहती है पर इस बार नहीं. मन कितना झूठ बोलता है, अपने आपको कुछ दिखाने के लिए, फिर यह भी कहा कि मीटिंग में देर से जाकर जल्दी आ गयी, जबकि सारा समय वह लाइब्रेरी में ही बैठी रही. मन को झूठ बोलने में सोचना भी नहीं पड़ता. अपनी इमेज बनाये रखने के लिए कितने झूठ बोलता चला जाता है. झूठी इमेज की रक्षा के लिए झूठ के सिवा और साधन हो भी क्या सकते हैं. आज सुबह का अंतिम स्वप्न बड़ा मजे का था. उसने एक पुस्तक नींद में फाड़ दी है पर जिसकी है उसे तो लौटानी होगी सो सेलो टेप लगाकर जोड़ने का प्रयास कर रही है, पर जुड़ना कठिन है सो परेशान होकर नींद खुल जाती है व ठीक अगले ही पल अलार्म बजता है, बल्कि उस क्षण मन में यह विचार आया अब अलार्म बजेगा और ऐसा ही हुआ. तभी बंद आँखों के आगे प्रकाश नृत्य करने लगा, यह परमात्मा के आने का ढंग है, सुबह सन्ध्याकाल में वह इसी तरह मिलने आता है. फिर उसने उससे बात भी की. सुबह उठते ही कुछ पंक्तियाँ उसने लिखीं क्योंकि बाद में वे भाव ओस की बूंदों की तरह उड़ जाते हैं ! कितनी देर तक तो वह भीतर अपनी उपस्थिति जाहिर किये रहा फिर मन पर पर्दे छाते चले गये और वह छुप गया, उनके पीछे, झूठ, अहंकार और अज्ञान के पर्दे ! शाम को सूप उसकी असावधानी से कुर्ती पर गिर गया पर मन ने झट कह दिया कि मैच देखते समय उसका ध्यान विकेट की तरफ था सो..कितना चालाक है उसका मन, एक क्षण में कैसे-कैसे बहाने गढ़ लेता है.पर उसे पता चल गया था, उसके भीतर कोई जाग रहा है जो सब जानता है !

आज सुबह फिर चमत्कार घटा, आज्ञा चक्र पर ज्योति जल रही थी, एक दीपक की लौ, नींद खुली और विचार आया, अब अलार्म बजेगा और वही हुआ, ठीक चार बजे कोई जगा देता है, वही जो भीतर जाग रहा है. परमात्मा उसे धीरे-धीरे अपने नजदीक ले रहा है, पहले वह उसे पुकारती थी अब वह खुद उसे बुलाता है, उसने अपने को प्रकट कर दिया है. उसके अहंकार को चूर करने के उसके प्रयास भी जारी हैं. उसे अपने भीतर सूक्ष्म से सूक्ष्म विकार भी स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं. सभी के भीतर उसी की ज्योति भी दिखाई देती है, किसी को तिलमात्र भी चोट पहुँचाने पर भीतर कैसी पीड़ा जगती है जैसे खुद को ही सताया हो..वे सब एक ही हैं, इस बात का अनुभव भी हो रहा है. अब सारी कामनाएं एक ही केंद्र पर केन्द्रित हो गयी हैं. वह परमात्मा इसी जन्म में उसे मुक्त कर दे. इस में बाधा उसके पूर्व संस्कार हैं व प्रारब्ध कर्म, लेकिन सद्गुरू की कृपा का अक्षय भंडार भी तो साथ है. आज सत्संग है, वे भजन गायेंगे, ध्यान करेंगे और परमात्मा को अपने सारे गुण-अवगुण समर्पित कर देंगे, खाली होकर बैठ रहेंगे फिर वही वह रहेगा, वह एकछत्र साम्राज्य चाहता है..दो दिन बाद नन्हा आ रहा है, उससे भी अध्यात्म पर चर्चा होगी. मुरारी बापू बाबा रामदेव के पतंजलि आश्रम में कथा कर रहे हैं. वे पतंजलि के योग सूत्रों का रामचरित मानस के आधार पर वर्णन कर रहे हैं. यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि ! ये आठ अंग रामायण के सात कांडों में व्यक्त हुए हैं ! वह कह रहे हैं कृपा का पात्र बनना है, अंतर घट को पावन करना है, उसे सीधा करना है तथा उसके छिद्रों को पूरना है.

सुबह अलार्म बजा तो वह पहले से ही जगी थी, परमात्मा को जगाने नहीं आना पड़ा, वैसे भी वह कहीं दूर तो है नहीं जो उसे आना पड़े. वह उनकी आत्मा ही तो है, प्रकाश उसका स्वरूप है, शांति, आनंद, प्रेम, सुख, शक्ति, ज्ञान तथा पवित्रता उसके गुण हैं, जिनके अनंत प्रकार हैं. वह परमात्मा छिपा नहीं है पर उनकी दृष्टि पर ही मोटे-मोटे पर्दे पड़े हैं. उसे देखने के लिए अंतर की आँख चाहिए. कल दिन भर जून ठीक रहे पर शाम को नन्हे का फोन आ गया. वह बंगलूरू में एक घर खरीदने की सोच रहे हैं. उनको भी अपनी स्वतन्त्रता उतनी ही प्रिय है जितनी उसे. कल आभास हुआ कि किसी को जब वे सलाह देते हैं तो उसे कैसे चुभती है, कोई भी नहीं चाहता कि कोई और उसे बताये कि उसके लिए क्या ठीक है, उसे क्या करना चाहिए. अब जबकि वह तथाकथित साधना कर रही है, अहंकार को विसर्जित करना जिसकी पहली शर्त है, उसे कितना नागवार गुजरा चाहे पल भर को ही, क्योंकि तुरंत भीतर वाले ने सचेत कर दिया, लेकिन अब उसे कान पकड़ लेने हैं, किसी को भूल कर भी कोई सलाह नहीं देनी है, क्योंकि उन्हें दी गयी पीड़ा उसे ही मिलने वाली है, अंततः वे जुड़े हए हैं. जून का उसे सम्मान करना करना है और उनकी रजोगुणी प्रवृत्ति स्वत: ही सतोगुण में बदलेगी, वैसे ही नन्हे की भी, वह ऊपर उठ रहा है, उसे तो केवल खुद को देखना है, भीतर कोई दम्भ न रहे, पाखंड न रहे, भेद न रहे, खाली हो जाये मन..तभी तो उस परमात्मा को भरा जा सकता है..सारी इच्छाएं बस इसी एक में मिल गयी हैं..एक ही काम है लिखना, पढ़ना और सुनना..   


Tuesday, May 24, 2016

सुखबोधानन्द जी का आगमन


जून आए और उसी शाम माँ को अस्पताल में भर्ती किया गया. आज चौथा दिन है. बारी-बारी से सभी अस्पताल जाते हैं. रात को नन्हा रहता है दादी के साथ. दिन में देर तक पिताजी. आज उनके स्वास्थ्य में कुछ सुधार नजर आ रहा है. कल क्लब में मीटिंग है, उसे दो कार्य करने हैं, पहला मृणाल ज्योति पर छोटा सा भाषण दूसरा हिंदी कविता पाठ का निर्णायक बनना. उसने सोचा वह मासिक डोनर मेम्बर बनने के लिए सदस्याओं से अपील करेगी. दान की महिमा पर भी कुछ कहेगी.  

नये महीने का आरम्भ हुए आठ दिन हो गये, और वह पहली बार लिख रही है. माँ अस्पताल से वापस आयीं पर दो दिन बाद फिर उन्हें जाना पड़ा. अभी तक वहीं पर हैं. टीवी पर एक सिख संत कह रहे हैं जिन्दगी की राह का आरम्भ गर्भ में होता है, मातापिता की वासना के साथ जब जीव की वासना मिल जाती है तब एक जीवन शुरू होता है. जन्म लेने के बाद जो जन्मदिन मनाते हैं वह वास्तविक नहीं है. कोई अपना आदि नहीं जानता. इसी तरह कोई नहीं जानता सृष्टि कब बनी, क्योंकि जब सृष्टि का निर्माण हुआ उसके पूर्व समय था ही नहीं. जो सूक्ष्म से स्थूल बनता है वही स्थूल से सूक्ष्म हो जाता है. उस सूक्ष्म में प्रवेश करने के लिए सूक्ष्ममति चाहिए. मति स्थूल तब हो जाती है जब हर वक्त संसार के विचार ही मन में घूमते रहते हैं. सत्संग करते करते जब चेतन मन का दायरा बड़ा होने लगता है तब मति सूक्ष्म होने लगती है. जब मति सूक्ष्म हो जाती तब भीतर का ज्ञान प्रकट होता है.

आज शाम को क्लब में सुखबोधानन्द जी का कार्यक्रम है. उनके प्रवचन सीडी से सुने हैं पहले, एकाध बार टीवी पर भी सुना है. किताब पढ़ने का अवसर कभी न कभी मिल जायेगा. टाइम्स ऑफ़ इंडिया में उनके लेख पढ़े हैं पर सामने सुनने का अवसर मिलेगा, अवश्य अच्छा लगेगा. जून एक बार घर आएंगे, नन्हे को अस्पताल व पापा को घर छोड़ देंगे. उनकी नई नैनी काम ठीक कर रही है, उसे आज एक हफ्ता हो गया है, सभी काम जान गयी है. घर जाने की जल्दी नहीं होती उसे, अभी विवाह नहीं हुआ, एक बार इस चक्कर में आ गई तो फटाफट काम खत्म करके भागने की फ़िक्र में रहेगी. पुरानी के साथ किस्मत ने जो किया उसका चले जाना ही ठीक था. पिछले महीने उसके अपाहिज पति का लम्बी बीमारी के बाद देहांत हो गया, दो बच्चे हैं, पांच वर्ष की बेटी दो वर्ष का पुत्र. ससुराल में रहकर ठीक एक महीने का शोक उसने मनाया पर उसके अगले ही दिन पड़ोसी के पुत्र के साथ कहीं चली गयी. बच्चे दादा-दादी के पास हैं. ममता को किस तरह भुला कर उसने यह कदम उठाया होगा. आस-पड़ोस के लोग आश्चर्य कर रहे हैं पर वह जानती रही होगी, उसके बिना भी बच्चे सुरक्षित हैं. रोज-रोज के कलह से तो अच्छा है दूर चले जाना. जीवन कितना विचित्र है, माँ जब ठीक थीं उसके बच्चों के साथ खेलती थीं, बीमार होने के बाद एक दिन कहने लगीं देखना यह चली जाएगी, उस वक्त सबने उनकी बात को मजाक में लिया था. 

Wednesday, December 3, 2014

चित्रकला का संसार


आज सुबह से ही अपने–आप में नहीं है, एक के बाद एक मूर्खतापूर्ण कार्य और वाणी का प्रयोग उसे असमंजस में डाले जा रहा है. सुबह जून देर से उठे उसकी वजह भी वही थी. कल उसके सामने ही घड़ी reset हो गयी पर न तो उसे ठीक ही किया न ही जून को बताया. सुबह नन्हे को डांटा. जून से असत्य कहा, संगीत कक्षा भी है, फिर शीघ्रता में ही स्वीपर के न आने की खबर सफाई दफ्तर में कर दी जबकि बाद में वह आ गया है, उन्हें कितनी असुविधा हुई होगी उसकी वजह से दूसरा व्यक्ति परेशान हुआ जिसे काम मिल गया था. नैनी को तो उसकी गलती के लिए टोकना आवश्यक था. ...और अब उसका मन उसे ही कोस रहा है या फिर वह मन को...उसे स्वयं पर संयम नहीं था इसी का परिणाम था यह सब. शायद वह संगीत सीखने नहीं जा पायी इसकी वजह से..बाबाजी कहते हैं..छड्डो परे....और ईश्वर से सच्चे दिल से क्षमा मांग लो. परम शांति तो स्वयं की ही है..हर क्षण ..हर पल !

पिछले कई दिनों से अधर्म की वृद्धि हो रही थी और ईश्वर अपने वायदे के अनुसार मन के द्वार पर दस्तक देने आया है. उसके साथ सदा ऐसा ही होता है. जब कभी संसार उसे घेर लेता है एक बेचैनी उसे वहाँ से भागने पर विवश कर देती है. कुछ दिन या कुछ पल यदि ईश्वर के स्मरण के बिना गुजरे हों तो एक छटपटाहट सी होने लगती है जो कहती है कि यह मार्ग उसका नहीं है. आज सुबह गुरुमाँ ने सत्य कहा था कि यदि कोई सुख चाहता है तो उसे याद करे वरना न करे. उसे याद करते रहें तो अपने कर्त्तव्यों का बोध भी बना रहता है. कर्त्तव्य अपने देह, मन, आत्मा के प्रति, अपने परिवार, संबंधियों, पड़ोसियों के प्रति, अपने समाज, शहर व देश के प्रति तथा मानवता के प्रति अपने मातहत काम करने वालों के प्रति. जीवन एक उपहार है जो ईश्वर ने दिया है. हर श्वास पर उसी का अधिकार है, अभिमान करने योग्य यदि कुछ है तो यही कि मानव जन्म पाया है. इसे सार्थक करना या इसका अपमान करना उसके वश में है. आज कैलेंडर देखा तो पता चला कि कल अमावस्या थी, उसके व्रत का दिन पर उसे याद नहीं रहा, इतवार का दिन जो था. अब आने वाले कल रखेगी. कल एक पुराने परिचित आये, उन्हें भोजन कराया वह मिठाई लाये थे अपने शहर की. यह प्रेम का संबंध ही तो है जो उन्हें उनके पास लाता है. ईश्वर के प्रति प्रेम हो तो वही प्रेम अन्यों के प्रति झलकता है. उसका हृदय प्रेमयुक्त हो !


आज गयी थी संगीत सीखने, सो ‘जागरण’ नहीं सुना. लौटी तो ध्यान आदि किया, भोजन बनाया. पत्र अधूरे ही पड़े हैं, कुछ नया लिखा भी नहीं, पत्रिकाएँ पढने का भी समय नहीं मिला. चित्रकला का अभ्यास भी उसने कुछ दिन पहले शुरू किया था, बीच में ही छूट गया है, पर कल नन्हे ने बहुत दिनों के बाद एक चित्र बनाया अपने स्कूल में होने वाली एक प्रदर्शनी के लिए  आज सुबह वह अपने आप ही उठा, फिर बस स्टैंड तक उसे छोड़ने जून गये. अभी-अभी उनका फोन भी आया. कल कहा कि उन सभी को घर पर भी अच्छी वेशभूषा में ही रहना चाहिए, अस्त-व्यस्त सा नहीं. क्लब की मीटिंग का बुलेटिन भी आया है, जाने का अभी तो ज्यादा उत्साह नहीं है लेकिन सदस्या बनी है तो मीटिंग में जाना कर्त्तव्य भी तो है जब तक कि बेहद आवश्यक कार्य न हो अनुपस्थित नहीं होना चाहिए. कल माली ने तीन क्यारियों में खाद डाल दी है, इस बार वे सर्दियों की सब्जियां शीघ्र लगा सकते हैं. अभी एक सखी से बात हुई, उसने घर आने का निमन्त्रण दिया है, वे अवश्य जायेंगे.

Monday, September 1, 2014

योग वशिष्ठ - महारामायण


कल शाम से ठंड एकाएक बढ़ गयी है, अभी तक कोहरे ने सूरज को ढक रखा है. ऐसी शीतलता पहाड़ों पर लोग रोज ही महसूस करते होंगे. कल दुबारा डायरी नहीं खोल सकी. दोपहर को चार पत्र लिखे, शाम को वे टहलने गये, क्लब जाने का उत्साह नहीं हुआ. अभी-अभी पड़ोसिन का फोन आया, उसे लगा था सम्भवतः अस्वस्थता के कारण वे क्लब नहीं जा रहे हैं, फिर उस बातूनी सखी का फोन आया, उसे अपने बेटे के लिए एक ऐसी ट्यूटर चाहिए जो होमवर्क करा सके. दोपहर को वह कुछ समय निकाल सकती है और क्लास वन के बच्चे का साथ यकीनन अच्छा रहेगा, सो उसने हाँ कर दी है. जून को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी. कल वह जा रहे हैं, उन्हें इतवार को किये जाने वाले कार्य आज ही कर लेने हैं जिसमें बालों में मेंहदी लगाना भी शामिल है. कल रात उसने जून से पूछा कि विवाह की वर्षगाँठ मनाने का उनकी नजर में क्या औचित्य है, उन दोनों के सोचने का ढंग एक ही निकला. उसे भी हर दिन उतना ही खास लगता है जितना वह दिन !

कल शाम अंततः वे क्लब गये और वहाँ का माहौल बेहद खुशनुमा लगा. हर तरफ फूलों की बहार ही बहार थी. सामने के बरामदे को बेहद कलात्मक ढंग से सजाया गया था. पीछे स्टेज था तथा शामियाना लगाया गया था. आग तपने के लिए भी इंतजाम था. लोग आकर्षक पोशाकों में थे.

सुबह जून से बात हुई, कल शाम गन्तव्य पर पहुंच कर भी उन्होंने समाचार दे दिया था. कल रात कई बार उसकी नींद खुली, स्वप्न भी देखे जो परेशानी को बढ़ाने वाले थे. उनके जाने पर पहली रात ! सुबह सवा छह बजे उठी, नैनी कल बिना कहे दिन भर नहीं आयी, इस समय काम कर रही है, उसने अपनी गलती मान ली और उसकी फटकार का कोई विरोध नहीं किया जैसा कि वह पहले करती है. इधर कुछ दिनों से उसमें बदलाव आया है. कल क्लब गये थे वे, नीली साड़ी सुंदर लग रही थी, जून होते तो फोटो खींचते. नन्हा लिख रहा है, सुबह उसे नॉवेल पढने पर कुछ दिनों के लिए रोक लगाने को कहा तो बुरा मान गया. ‘नसीहत’ पचाना आसन काम नहीं है. आज ‘योग वशिष्ठ’ की कथा प्रारम्भ हुई है, कहानी में कहानी कहने की संस्कृत साहित्य में अनोखी प्रथा है. आज गोयनका जी भी आये थे, विपासना के बारे में आरम्भिक व्याख्यान दिया. मन को ऊपरी सतह पर शांत कर लेना तो सहज है पर भीतर का पता तो वक्त पड़ने पर ही चलता है. उस दिन ट्रेन में यात्रियों की भीड़ देखकर वे विचलित हो गये थे. आज सभी के फोन आये सभी ने एनिवर्सरी की मुबारकबाद दी.

आज सुबह सवा छह बजे चिड़ियों की चहचहाहट सुनकर नींद खुली. उठते ही जून के होटल का नम्बर लगाया, वे भी उठ चुके थे. रात को दस बजे सो गयी थी, पर कुछ देर बाद बड़ी भाभी का फोन आया, वे परसों शुभकामना देना भूल गयी थीं, भाई से भी बात हुई. जून दिल्ली में उनसे मिलने जायेंगे. कल एक परिवार को लंच पर बुलाया था, वे लोग सुबह ही तिनसुकिया मेल से आये थे. एक और सखी तभी घर की चाबी देने आई, वे मुम्बई जाने के लिए एयरपोर्ट जा रहे थे. उन्हें इतनी जल्दी थी कि एक मिनट भी नहीं बैठे. जून की समय की पाबंदी की आदत के कारण वे लोग यात्रा पर निकलने से आधा घंटा पहले ही पूरी तरह से तैयार होकर बैठ जाते हैं.





Thursday, May 8, 2014

नार्मन विंसेट पील - एक प्रेरक व्यक्तित्व


पिछले दस दिनों से उसने डायरी नहीं खोली, भई, ऐसी भी क्या बेरुखी अपने आप से, दिल परेशान तो होगा ही न, दुःख भी मनायेगा जब उसे पता चलेगा कि उसकी बात सुनने वाला कोई नहीं था पिछले दिनों. क्यों नहीं लिख सकी, इसका कारण व्यस्तता ही है या कुछ और भी, स्वेटर बनाना इतना बोझिल काम बन जायेगा सोचा नहीं था, हर काम अपनी कीमत वसूलता है, हर वक्त अपनी कद्र करवाना जानता है. उसने पिछले दिनों बहुत सी किताबें पढ़ी हों ऐसा भी नहीं हुआ. दो-तीन फ़िल्में जरूर देखीं, जून के दो दाँतों का RCT भी हुआ. उन्हें पांच दिनों तक इंजेक्शन भी लेने होंगे. पत्र लिखे, कार्ड भेजे, और आज सुबह घर से फोन आया, ननद के पति ने पास वाले शहर में ज्वाइन कर लिया है, अब जाकर उनका परिवार एक साथ हुआ है. आज भी कल की तरह बादल तो हैं पर बरस नहीं रहे हैं, पिछले दो-तीन दिन तो वह घर से बाहर ही नहीं निकल पायी, हर वक्त आसमान टपकता रहा.

उसने जून को एक पत्र लिखा, उसका दिल प्रेम से भरा था, प्रेम नन्हे के लिए, जून के लिए और सारे ब्रह्मांड के लिए, हर इन्सान की जरूरत है प्रेम और हर एक के दिल की गहराइयों में असीम प्रेम है. उसके भीतर का यह प्रेम जगाने का काम किया था एक किताब ने, उसे लगा, किताबें इन्सान के लिए कितनी जरूरी हैं भोजन से भी ज्यादा जरूरी. कितने तरीकों से वे मानव को प्रेरित करती हैं, वे हृदय के भीतर छिपी नरमी, गर्मी और करुणा को जगा देती हैं. The book written by “Norman Vincent Peale” has got filled her heart with a tender feeling. Yesterday she decided to go Ladies club meeting after reading a line in it and enjoyed there very much. To talk and to listen is very encouraging and self stimulating. Today is sunny day, she has to finish mother’s sweater.
सुबह का काम खत्म होते ही वह बाहर गयी, मौसम सुहाना है, बगीचे में खिले ढेर सारे फूल धूप में मुस्करा रहे था, सर्दियों में धूप कितनी भली लगती है, यही धूप गर्मियों में सताती है तो चिढ़ होती है. उसने कुछ पालक और फ्रेंच बीन्स तोड़ीं, शाम को सूप बनाएगी. और एक सखी से फोन पर बात की. कल शाम वे दूर तक टहलने गये, दुनिया में कितनी सुंदर और कितनी आश्चर्यजनक वस्तुएं हैं, जिन्हें देखकर इन्सान खुद को ही भूल जाता है. कल समाचारों में एक रेल दुर्घटना की दुखद खबर सुनी, अगले माह उन्हें भी तो रेल यात्रा पर जाना है, यही जीवन है. ईश्वर ही उन्हें सुरक्षित रखेगा और वापस घर सुरक्षित पहुंचाएगा.

नवम्बर का अंतिम दिन, आज जाकर वे स्वेटर पूरे हुए जो उसने दीवाली के बाद से शुरू किये थे. आज वह पार्सल बनाकर जून को देगी. लिखना–पढ़ना कितना कम हुआ इन दिनों. कल वे तिनसुकिया गये थे, सभी के लिए उपहार खरीदे इस उम्मीद पर कि उन्हें पसंद आयेंगे, नहीं भी आये तो कोई चारा नहीं. नन्हे के स्कूल में आज Elocution था, उसने भाग लिया. आज सुबह  एक परिचित टीचर ने स्कूल से फोन किया कुछ हिंदी शब्दों के अर्थ जानने के लिए, और कल ही क्लब की पत्रिका में लिखने के लिए बुलेटिन आया है, पर अभी उसमें कुछ लिखने का उत्साह नहीं है, वापस आकर यात्रा विवरण लिख सकती है. इसी हफ्ते जून के विभाग की पिकनिक भी होने वाली है, वे तीनों  यदि पूरी तरह स्वस्थ रहे तो जायेंगे, वे अस्वस्थ क्यों होते हैं, that is a big question ?






Tuesday, April 1, 2014

लैब में पानी


कल शाम ही वे वहाँ गये, उस आलीशान फ्रिज को देखने. जो बहुत सुंदर है और बहुत सारे काम भी करता है जैसे कि बर्फ फ्रीजर में जमने नहीं देता, खाने के पौष्टिक तत्व कायम रखता है, सब्जियां सूखी रहती हैं और नीचे वाली पानी की ट्रे आगे से ढकी है. पहले क्लब में कोरस का रिहर्सल भी हुआ, उसे असमिया गाना सीखने में थोड़ी भी परेशानी नहीं हो रही है., मुख्य गायिका इतनी मधुर आवाज में इतनी सहजता से गाती हैं कि कोई भी उनके साथ गा सकता है. आज मौसम सुबह से साफ और सूखा है, शाम को क्लब में फिल्म है और रिहर्सल भी.

कल उसे क्लब से आने में देर हो गयी जून को अच्छा नहीं लगा, नूना ने उसे एक पत्र लिखा, सारी बातें साफ हो गयीं. इतवार को वे मोरान गये थे, उस दिन मोरान के स्वच्छ गेस्ट हाउस में बैठे कई बातें मस्तिष्क में आ रही थीं घर को और सुंदर बनाने की. सबसे पहला चरण था सफाई और सबसे अंतिम भी सफाई. परिणाम, घर पहले से काफी सुंदर नजर आता है. नन्हे ने कोरस में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के नाम कम्प्यूटर पर टाइप कर के सेव कर दिए थे, जून उसे फ्लॉपी में ले गये हैं प्रिंट करने के लिए. कुछ देर पहले मुख्य गायिका का फोन आया, कहा, बहुत काम है, क्लब के कर्मचारी का भी फोन आया, उसे अपने साथ एक और आदमी चाहिए, बहुत काम है. पिछले कई दिनों से उसका हिंदी का कार्य भी आगे नहीं बढ़ा है, इस वर्ष तो कोर्स पूरा करना कठिन लगता है. अभी तक उसके पहले पेपर का जवाब भी नहीं आया है. कल नन्हे का जन्मदिन है इस बार वह पार्टी नहीं चाहता, बल्कि बचत करना चाहता है ताकि बाद में CD खरीद सके.

पिछले तीन दिन वह व्यस्त थी, शनि को सुबह, दोपहर, शाम तीनों पहर क्लब गयी. कोरस  कम्पीटिशन ‘स्वरांजलि’ सम्पन्न हो गया. एक सदस्या ने उसे पहनने के लिए सुंदर मेखला चादर दिया था, कई लोगों ने तारीफ की. प्रेसीडेंट ने भी. सब कुछ स्वप्न सा अलग रहा था. जैसे वह  कोई और थी. सारा दृश्य किसी काल्पनिक कहानी का भाग था. क्लब की लाइब्रेरी से कुछ किताबें भी लायी है बहुत दिनों बाद, एक परिचिता ने एक किताब का सुझाव दिया था, Kane and Able by Jeffrey Archer, जरूर अच्छी होगी. नन्हा अपनी छुट्टियाँ अपनी तरह से बिता रहा है, प्रोजेक्ट कार्य धीरे-धीरे चल रहा है. कल उन्हें ‘देशराग’ पर आधारित गाने की धुन सिखाई गयी, इस हफ्ते वह ठीक से अभ्यास करके जाएगी. कल प्रवीन सुल्ताना को कहते सुना ‘रियाज करो और राज करो’, सो अगर उसे गाना सीखना है तो अभ्यास नियमित ही करना होगा !

कल रात दो बजे होंगे जब जून के दफ्तर की सिक्युरिटी से फोन आया, कि एक लैब में, जो उनके ही नियन्त्रण में है, पानी का एक नल खुला रह गया है. उस वक्त तो वह वहाँ नहीं गये पर सुबह पौ फटते ही गये तो पता चला कि एक पाइप ही फट गयी है जिसके कारण पानी पूरी तेजी से छत से टकरा कर सारे इंस्ट्रूमेंट्स व पंखे, लाइटस को भिगोता हुआ निचे गिर रहा है. एक घंटा तो उस वाल्व को ढूंढने में लग गया जिससे पानी का आना बंद हो सकता था. जून को घर आने में छह बज गये और फिर फील्ड ड्यूटी थी सो लंच टाइम पर घर नहीं आ सके. उसे छोटी बहन की याद हो आयी जिसकी पांच-छह बार नाईट ड्यूटी लग चुकी है. उसको पत्र लिखा है पर पता नहीं पोस्टल स्ट्राइक कब खत्म होगी.    





Friday, March 21, 2014

खलनायक से साक्षात्कार


इस वक्त उसका मन उदास है, उसे जो कार्य सौंपा गया उसे पूरा नहीं कर पायी. उसका सर नीचा हुआ, क्लब के काम को अपना काम न मानकर जो भूल उसने की, उसी का खामियाजा भुगत रही है. अभी-अभी जून का फोन आया, उन्होंने उसका अधूरा कार्य पूरा करवाने की पूरी कोशिश की है. ड्राइवर जो उस दिन पांच एरिया में बुलेटिन नहीं बाँट पाया था आज उसे डांट पड़ी और अब दूसरे ड्राइवर को हाथ वे बुलेटिन भेजे हैं. उसकी मुश्किल थोड़ी आसान हुई है. कल मीटिंग है सो आज शाम तक सभी को सूचना मिल ही जाएगी. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, वापस आकर पता चला, नन्हे को ढेर सारे नोट्स उतारने हैं, फिर जून ने कहा फोटोकॉपी कर देंगे, स्कूल में पढ़ाई का बोझ यहाँ से काफी अधिक है. कल उसकी संगीत अध्यापिका ने विलम्बित सिखाया, उसे कठिन लगा.
कल शाम वह परेशान थी कि बुलेटिन नहीं पहुंचे हैं, नन्हा परेशान था कि स्कूल का कार्य शेष है, जून उन दोनों को परेशान देखकर परेशान थे, ऐसा लेकिन बहुत कम ही होता है, वे लोग ज्यादातर समय हँसते-खेलते ही रहते हैं. जब परेशानी हो तो छोटी-छोटी खुशियाँ भी कितनी मायने रखती हैं. लेकिन इतना तो आभास हुआ कि वह कितनी नाजुक है जो थोड़ी सी परेशानी से घबरा जाती है.
कल उसने कुछ नहीं लिखा, सुबह एरिया की महिलाओं को फोन करने में गुजरी और दस बजे बायीं तरफ की पड़ोसिन के यहाँ से होते हुए क्लब गयी. वह उदास थी, घर से खबर आई थी कि उसकी भांजी, जिसने इंजीनियरिंग पास कर ली थी और नौकरी कर रही थी सड़क दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी. दोपहर को कुछ देर कम्प्यूटर पर काम करने की कोशिश की. शाम को मीटिंग थी. पूरा दिन व्यस्तता में गुजरा, उसने नया सूट पहना था, नया पर्स लिया और नई चप्पल भी. सेक्रेटरी का फोन आने के बाद थोड़ी परेशान थी पर दीपक चोपड़ा की बात याद आ गयी, किसी भी बात पर हम क्या react करें यह हम पर निर्भर करता है. choice is always ours !  जून ने भी कहा जब कोई सही हो तो offensive नहीं deffensive होना चाहिए, mood change हो गया. words are very powerful ! कल जून बहुत सहयोग कर रहे थे, नन्हा भी क्लब जाते समय उसकी मदद कर रहा था, उसे लगा they are a close knit family and love each other very very much. आज जून ने children’s meet के लिए हिंदी की कविताएँ चुनकर रखने के लिए कहा है. सुबह दीदी और छोटी बहन से बात की, छोटी बहन महाराष्ट् जा रही है.


मई का महीना शुरू हो गया, यानि उसके जन्मदिन का महीना...सुबह जून ने कहा नये सूट के रूप में वह उपहार पहले ही दे चुके हैं, उसने नहीं माना. इतनी उम्र गुजर जाने पर भी मन जन्मदिन मनाने को उत्सुक रहे और उपहार की लालसा भी रखे, क्या यह अजीब नहीं लगता, पर ऐसा ही है और जून भी इस बात को जानते हैं. नौ बजने को हैं, आज सुबह ध्यान करते समय उसे पिछले दिनों सुनी दो मृत्यु की घटनाओं की स्मृति हो पायी, और दो रेखा चित्र अंकित हो गये, लेखन के लिए ऐसी ही स्वतः प्रेरणा की जरूरत होती है. कल हिंदी कविताएँ लिख कर दीं और अंग्रेजी कविताओं के लिए तीन किताबें भी, ईश्वर से भी प्रार्थना है कि तीनों किताबें सही-सलामत वापस लौट आयें. कल से नन्हे के यूनिट टेस्ट शुरू हो रहे हैं, वह काफी उत्साहित है, नये स्कूल में पहली बार सारे टेस्ट देगा और टीचर्स को पता चलेगा कि नये बच्चे कितने पानी में हैं. कल जून उसे हिंदी कक्षा से वापस छोड़ने आये तो वापस नहीं गये, उनके बॉस छुट्टी पर हैं तो वे भी छुट्टी के मूड में आ गये हैं. कल वह हिंदी का दूसरा पेपर हल करती रही, एक प्रश्न अभी शुरू ही नहीं किया, किसी फ़िल्मी खलनायक से साक्षात्कार लेने के लिए प्रश्नों की सूची. इतना कठिन भी नहीं है. इतवार तक फेयर करना शुरू कर देना होगा.

Thursday, February 20, 2014

एड़ी का घाव


पता नहीं कैसे उसे कल या परसों याद नहीं आया कि मीटिंग की तैयारी के लिए दो जनों को फोन करने हैं. आज सुबह नाश्ता करते समय अचानक मन में खटका हुआ और नतीजा यह कि पहले ने शिकायत की, एक दिन पहले बोल देने से उसे सुविधा होती है. शिकायत कैसे सुन लेता मन, झट प्रतिक्रिया की कल भी फोन किया था. बाद में स्मरण आया अपनी आत्मा पर एक धब्बा और लगा लिया जिसे छुड़ाने के लिए न जाने कितने जन्म और लेने पड़ेंगे. सेक्रेटरी हर बार एक से अधिक बार फोन करके याद दिलाती हैं इस बार उन्होंने भी याद नहीं दिलाया. अभी कुछ देर पहले ही वह क्लब से आ रही है, हॉल बिलकुल गंदा पड़ा था, पर उस व्यक्ति ने बताया शाम तक हो जायेगा. वह साइकिल से गयी थी, खोलते समय उसका लाक टूट गया, अनाड़ी है वह जिन्दगी के खेल में अभी.

आज शाम से skit की रिहर्सल शुरू होनी है, कल की मीटिंग अच्छी रही, पर व्यर्थ में ही बहुत समय लग गया. डॉ बरुआ ने महिला स्वास्थ्य पर एक लेक्चर दिया, HRT के बारे में बताया यहाँ के अस्पताल में भी इसकी सुविधा है उसे जानकर आश्चर्य हुआ. वह लौटी तो जून का चेहरा उतरा हुआ था, उसने सोचा यदि रोज-रोज जाना पड़े तो क्या होगा..खैर..जो होना है वह होगा ही. नन्हे की पढ़ाई आजकल जोर-शोर से चल रही है. उसे ‘ऊर्जा संरक्षण’ पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में भाग लेना है.

शाम हो गयी है, पिता कैसेट सुन रहे हैं, माँ किताब पढ़ रही हैं. वह एक क्षण भी खाली नहीं बैठ सकतीं. उसके और जून के लिए स्वेटर बना दिए हैं, उनके जाने में केवल दस दिन शेष रह गये हैं. उसने सोचा अब तक तो उन सभी को एक-दूसरे के साथ रहने का अभ्यास हो गया है. कितना कुछ मिल रहा है उनके साथ से, और वे उन्हें क्या दे रहे हैं बस थोड़ा सा स्नेह और सम्मान ! उसने सोचा वह भी स्वेटर के कुछ डिजाइन सीखेगी. आज सुबह राग आसावरी पर आधारित एक गीत का अभ्यास किया, अभ्यास ठीक ही रहा पर अभी तक सुर सधे नहीं हैं. पता नहीं वे लोग कैसे होंगे जो पूरी तरह अपने कार्य से संतुष्ट होने का सुख अनुभव कर पाते होंगे, उसके जीवन में एक पल तो ऐसा आये जब अपने कार्यों से पूरी तरह संतुष्ट हो पाए.

हवाई जहाज का तेज शोर ! आज बहुत दिनों बाद घर के ऊपर से उडकर कोई प्लेन गया है. कल से बसंत का मौसम शुरू हो गया है. जून के एक मित्र ने माँ-पापा को भोजन पर बुलाया है, पर पिता का कहना है कि वे लोग तो चले जायेंगे फिर ये लोग कहाँ मिलेंगे और उनके खिलाये अन्न का ऋण लेकर वह जाना नहीं चाहते, उनका ऋण कोई और चुका देगा इसका उन्हें विश्वास नहीं है, न ही वे इतनी निकटता किसी के साथ महसूस करते हैं. जल में रहकर जैसे कमल उसमें लिप्त नहीं होता उसी तरह अपने परिवार से भी वह लिप्त नहीं हैं. यही उनकी शांति का सबसे बड़ा कारण है.

आज सुबह नैनी के बेटे को एक कुत्ते ने बुरी तरह से काट लिया. इतनी बुरी तरह से किसी जानवर का काट खाना उसने पहली बार देखा है, खून से लथपथ एड़ी और घाव के गहरे निशान, वह बुरी तरह से चिल्लाया, सोच कर भी कंपकंपी होती है कि...ईश्वर ने साथ दिया जून फोन पर मिल गये और समय पर अस्पताल ले जा सके. उसका मन देर तक सामान्य नहीं हो पाया, भूख भी जैसा गायब हो गयी. और नैनी पर क्या बीत रही होगी, वह अंदाजा लगा सकती है, हँसता-खेलता बच्चा घर में बंद होकर रह गया है.







Tuesday, February 18, 2014

राजस्थानी रजाई


आज उसके लिए एक अहम् दिन है. लेडीज क्लब की प्रेसिडेंट और सभी मेम्बर्स शाम को उनके यहाँ मीटिंग के लिए आने वाले हैं. planning तो की है पर सब कुछ ठीक-ठाक रहेगा थोड़ा शक है. पहली बार इस तरह का अनुभव होगा. जीवन के अनेक अनुभवों में से एक ! कम्पनी के मुख्य अधिकारी की पत्नी भी जो मृदुभाषिणी हैं, आएँगी. आज सुबह के कार्यों में से न तो व्यायाम किया ( जो दिन भर व्यस्त रहने में अपने आप ही होने वाला है) न ध्यान, और ध्यान टिकता भी कैसे, हर वक्त तो मन को यह करना है, वह करना है के सिगनल सुनाई पड़ते, हर वक्त इधर-उधर के कार्यों की इतनी फ़िक्र लगी रहती है, स्थिर मन हो ईश्वर का स्मरण करने का सुअवसर कभी हाथ नहीं आता. दीदी के खत में लिखा है कि इस जन्म में तो ईश्वर सान्निध्य मिलना दुर्लभ है, कुछ कर लें. न करें तो अधूरापन, यह भावना स्थिर होकर बैठने नहीं देती, राजयोग और कर्मयोग में तो कर्मों के द्वारा भी ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सुझाया गया है. वे क्षत्रिय वंश के हैं फिर ब्राह्मणों की तरह घंटों ध्यान में नहीं बैठ सकते, लेकिन हर छोटे-बड़े संकट में ईश्वर का स्मरण झट हो आता है, लगता है वह कहीं आस-पास ही है, उसके स्नेह भरे हाथ का स्पर्श, उसके स्नेह की गर्माहट महसूस होती है, लगता है दुनिया का कोई भी संकट आ जाये सह लेंगे क्यों कि ईश्वर उनका रक्षक साथ है.

आज बंद है, अल्फ़ा ने राज्य बंद घोषित किया था जो पूरी तरह सफल रहा. सुबह से एक भी गाड़ी जाती हुई नहीं दिखी. कल रात नींद गहरी नहीं थी, दिन भर की थकावट, फिर शाम का कार्यक्रम, जो कमी रह गयी थी वह याद आ रही थी, जो तारीफ मिली वह नहीं. खैर, समय के साथ इस मीटिंग की सुखद स्मृतियाँ ही साथ रह जाएँगी. कल उसकी पड़ोसिन ने सहायता की अच्छा लगा, उसने अपनी छात्रा को भी गाजर का हलवा और सैंडविच खिलाये, उसने तारीफ की उसी पर विश्वास हुआ. दोपहर को कुशन कवर सिले. सेक्रेटरी ने हसबैंड नाइट के लिए सभी एरिया coordinators को फोन करने कहा है, कम से कम एक घंटा लगेगा. क्लब के इस काम में कम से कम फोन से बात करने में तो एक्सपर्ट हो जाएगी. आज धूप मद्धिम सी है, उत्तर भारत का कोहरा यहाँ तक आ गया है. नन्हा मित्रों के साथ खेल रहा है और जून उस पेपर को पढ़ रहे हैं जिसे उन्हें फरवरी में present करना है. डिपार्टमेंट में उनका प्रेजेंटेशन संतोष जनक नहीं रहा था पर पहले इस तरह तैयारी भी नहीं की थी, उसने तो स्वयं को जिन्दगी के मैदान में loser मान ही लिया है पर नन्हे और जून को ऐसा नहीं करने देगी.

जून आज गोहाटी गये हैं, नाईट सुपर की ठंड से बचने के लिए राजस्थानी रजाई ले गये हैं. शाम को उन्हें पडोस से आई मूली के परांठे बना कर दिए, बहुत कोमल मूली थी. आज सुबह भी कोहरा काफी था और आज वे सारे काम भी हो गये जिनके लिये सिविल डिपार्टमेंट में कहा था, स्टोर में कोट हैंगर लगाना, झूले और सिस्टर्न पर पेंट का काम. एक मित्र के यहाँ से फोल्डिंग कॉट भी आ गयी. आज हिंदी कोर्स की पहली पुस्तक पढनी शुरू की है, पहले कोर्स में कुल बीस इकाई हैं, बहुत विस्तृत कोर्स है.

आज इतवार है, दिन भर व्यस्तता में गुजरा. इस समय रात्रि के दस बजने वाले हैं, जून के फोन दिन में तीन बार आए पर अभी तक माँ-पिता के गोहाटी आने की खबर नहीं मिली. राजधानी का इंजन बोगाई गाँव के पास खराब हो गया था. कल सुबह उठते ही जून का फोन आएगा, कल शाम को वे सब आ भी जायेंगे, सचमुच उन्हें कष्ट तो हुआ है, यात्रा कभी-कभी ही आरामदेह होती है.

 


Thursday, February 13, 2014

कैरम की प्रतियोगिता


अभी-अभी सद्वचन पढ़ा पर अभी-अभी मन में नकारात्मक भाव आया. आज सुबह बिस्तर छोड़ने में ५-७ मिनट लगाये और उन क्षणों में मन में इधर-उधर के विचार आ रहे थे, उसकी आध्यात्मिक प्रगति एक कदम आगे बढ़ती है और दो कदम पीछे लौट आती है. ईश्वर की अनुकम्पा अभी उस पर नहीं हुई है. कल डायरी नहीं लिख सकी, लेडीज क्लब की कमेटी की उन सदस्या के घर गयी थी जिनके यहाँ से कल शाम मीटिंग से उसे जल्दी लौट आना पड़ा था, कुछ खाकर नहीं आई थी. घर में मेहमान आये थे और जून ने फोन करके उसे बुला लिया था. वह  गाना अच्छा गाती हैं, बताने लगीं, उनके सिखाये हए विद्यार्थी को सर्वोत्तम गायक का पुरस्कार मिला. उन्होंने उसे स्वादिष्ट नाश्ता खिलाया. आज आसू ने बंद की घोषणा की है, सो जून आधे रास्ते तक जाकर ही लौट आये हैं, उन्हें खाली समय बिताना भारी पड़ रहा है. किसी महिला को इस स्थिति से गुजरना नहीं पड़ सकता, They know and They know !

स्वामी योगानन्द जी कहते हैं ध्यान के द्वारा वे महाचेतना के स्तर तक पहुंच सकते हैं और उसके बाद ईश्वर निकट होता है. उसी ईश्वर ने आज सुबह उसे पांच बजे से ठीक पहले उठाकर बचा लिया वरना उसकी छात्रा को वापस लौटना पड़ता. आज मौसम बेहद ठंडा है, घने बादलों के कारण सूरज का कोई बस नहीं चल रहा, पूरे देश में हो वर्षा हो रही है. अभी-अभी कल होने वाली मीटिंग के सिलसिले में दो-तीन जगह बात की, जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यहाँ लोगों से जान-पहचान बढ़ रही है, और जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, स्वयं में जो वरिष्ठता या गरिमा का अहसास होना चाहिए था कम हो रहा है. दिल से वही छोटी ही बने रहना चाहती है छोटी बहन की तरह, अब तो उसने भी स्वयं को बदल लिया है, दूसरी बेटी की माँ बनने के बाद. ईश्वर अभी भी उतना ही दूर है, शायद यही एक प्यास है जो मानव को इधर-उधर भटकती है, मानव को ईश्वर ने बनाया फिर छिप गया. मानव अपने निर्माता को खोजता है, ढूँढ़ता-फिरता है पर वह कहीं नजर नहीं आता, ध्यान करने बैठती है तो सिवाय ईश्वर के इधर-उधर के सारे विचार गड्ड-मड्ड होने लगते हैं, फिर लगता है जो वस्तु है ही नहीं उसके पीछे भागना... यानि श्रद्धा डोलने बढ़ती है, घड़ी-घड़ी मन डांवाडोल क्यों होता है ? ऊर्जा संरक्षण पर कविता लिखनी है सो जून के आने तक के समय में ही पूरी कर लेनी चाहिए. आज नन्हा सुबह कोचिंग में नहीं जा सका, वह उसे नहीं उठा पायी, कुछ देर नाराज था फिर स्वयं ही ठीक हो गया पर उसे बहुत बुरा लगा, जो काम अन्यों के लिए इतने सरल हैं वह उसके लिए कितने मुश्किल हैं.

आज कई दिनों बाद लिख रही है, धूप में बैठकर तो शायद महीनों बाद लिख रही है, अभी सुबह के साढ़े आठ हुए हैं, धूप फिर भी तेज लग रही है. स्वच्छ वातावरण के कारण असम में धूप तेज होती है. पिछले दिनों बहुत कुछ घटा, उसने कैरम की प्रतियोगिता में भाग लिया, कई घंटे उसमें दिए पर फाइनल में नहीं पहुँची. नन्हा और जून उसकी वजह से परेशान भी हुए होंगे. इस वर्ष क्लब मीट पहले से ज्यादा उत्साह व धूमधाम से मनायी जा रही है. यहाँ National Tennis Championship भी खेली जा रही है. कल वे तिनसुकिया गये, माँ-पापा के आने से पहले घर को और सुंदर बनाना चाहती है इसी सिलसिले में कुछ खरीदारी की. नन्हे का स्कूल आजकल बंद है, वह अपने समय का सही उपयोग करना सीखे, अच्छी आदतें डाले यह ख्याल हर वक्त बना रहता है, जून भी अक्सर उसे समझाते हैं कई बार वह मानता है पर कई बार नहीं भी, यह उम्र ही ऐसी है बाद में पता चलता है कि जिन्दगी के कई कीमती वर्ष व्यर्थ ही गंवा दिए. आज उसका फलाहार है, पर सब्जी कटवाते वक्त याद नहीं रहा, अब एक सब्जी उसके रात्रि के विशेष भोजन की शोभा बढ़ाएगी. कल जून कार्ड्स लाये, पत्रों के जवाब का कार्य भी हो गया है, अब उसके सम्मुख नये साल से पहले नन्हे का स्वेटर पूरा करने का उद्देश्य है.



Wednesday, February 5, 2014

पूसी की आवाजाही


कल शाम वह क्लब की वार्षिक पत्रिका के लिए बुलाई गयी मीटिंग में गयी थी. उसे हिंदी सेक्शन का काम देखना है. जून उसे समय पर छोड़ आए और बाद में लेने भी आये, उसके मन में एक ख्याल आया यदि वह स्वयं कार चलाना जानती तो उन्हें परेशान न होना पड़ता. आज पुराने वर्षों की पत्रिकाएँ खोल-खोल कर देखीं, ताकि उन लोगों के नाम देख सके जो हिंदी में लिखते हैं, उन्हें इस वर्ष भी लिखने के लिए प्रेरित करने हेतु फोन किये, कुछ ने सकारात्मक जवाब दिए. सुबह उठते ही जून ने ट्रांजिस्टर चला दिया समाचार सुनने के लिए. कल रात्रि एक स्कूल बस की दुर्घटना की हृदय विदारक खबर सुनी. बाद में बस पानी में गिर गयी. उनके दिल लेकिन पत्थर के हो चुके हैं, इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद भी जिन्दगी वैसे ही चलती रहेगी, उन माँ-बाप के आँसू सूख जायेंगे और...यहाँ अपेक्षाकृत वे सुरक्षित हैं, ज्यादा ट्रैफिक नहीं है. अभी जून का फोन आया, उन्हें अख़बार लेने बाजार जाना ही होता है, पूछ रहे थे कुछ लाना है, इतना ख्याल घर का कम लोग ही रखते होंगे. आज वह लंच में केवल फल और सलाद ही ले रही है, हफ्ते में एक दिन ऐसा करना अच्छा है. पर मन है कि...वैसे भूख पर कंट्रोल किया जा सकता है पर जब मनाही हो तो ध्यान खानों की तरफ ही जाता है.

आज सुबह ‘जागरण’ देखा, और अभी-अभी योगानन्द जी का एक भाषण पढ़ा, ईश्वर स्वयं ही संयोग उत्पन्न कर देते हैं. रात भर लगातार हुई वर्षा के कारण मौसम आज ठंडा है, कंपा देने वाली ठंड. बादल अब भी बने हैं और वैसे ही बादल उसके अंतर में भी घुमड़ रहे हैं. कल से नन्हे के इम्तहान हैं. पहला पेपर गणित का है, वह तैयारी कर रहा था फिर पढ़ाई खत्म करके टीवी देखने लगा, .बच्चे भी बस बच्चे होते हैं, पल भर में परीक्षा को भूलकर टीवी में व्यस्त हो गया. कल भी TN Seshan का इंटरव्यू बड़े मजे ले कर देख रहा था, बड़े ही होते हैं जो परीक्षा से पहले ही घबराए-घबराए से रहते हैं. अब टीवी पर चाट बनाने की विधि  बताई जा रही है, अभी-अभी नन्हा कहकर गया है. कल संगीत कक्षा में वह ठीक से गा नहीं पायी, गाने में सुर की देन तो ईश्वर ही दे सकता है, आज ईश्वर से प्रार्थना की है और स्वामी योगानन्द जी के अनुसार यदि प्रार्थना सच्ची हो तो उत्तर अवश्य मिलेगा. अभ्यास तो उसे करना ही होगा पहले की तरह ही प्रतिदिन.

आज ठंड कल से भी जयादा है. बंद कमरे में स्वेटर पहनकर भी ठंड का अहसास हो रहा है, आज ही हीटर निकलना पड़ेगा किन्तु उनका क्या जिनके पास न तो कमरा है, न स्वेटर, और हीटर की तो बात ही जिन्हें पता नहीं, उन्हें भी हीटर के बिना रहने का अभ्यास होना चाहिए जब तक कि जनवरी की कड़कती ठंड न आ जाये. नन्हे की आज हिंदी की परीक्षा है, उसे पढ़ाते हुए पिछले कुछ दिन कैसे बीत गये पता ही नहीं चला, उसका रिजल्ट जरुर अच्छा आयेगा, वह मेहनत करता है पर नूना को लगता है वह इससे भी अच्छा कर सकता है. कल शाम वे एक डिनर पार्टी में गये, एक मित्र के विवाह की वर्षगाँठ की पार्टी में. उनकी शादी की फोटो देखकर लगा कि सारी पंजाबी शादियाँ एक सी होती हैं.

आज सुबह अलार्म की आवाज सुनकर नींद वक्त पर खुल गयी, दरवाजा खोलते ही जानी पहचानी सी वही बिल्ली दिखाई दी, पर कल रात उसने भोजन नहीं बनाया था सो उसे रोटी नहीं दे सकी, बिस्किट दिए, उसका पेट पिचका-पिचका सा लग रहा था, शायद वह अपने लिए खाना नहीं जुटा पाती है. वे सुबह शाम ही तो दे सकते हैं, एक छोटे से जीव को पालना भी कितना प्रयास लेता है, उस दिन बरामदे में जो गंदगी उसने की, उसके बाद वे उसे बाहर ही खाना देते हैं. जो लोग पशुओं से दिल से प्यार करते हैं वे उनके द्वारा की गयी गंदगी को ख़ुशी-ख़ुशी साफ कर देते होंगे, पर ऐसा करना जून व उसके बस की बात तो बिलकुल नहीं है, नन्हा लेकिन उसका ध्यान रखता है, बच्चे स्वभाव से ही कोमल होते हैं. उसे खाना खिलाने का काम उसे ही सौंपना चाहिए. उनकी निष्ठुरता कहीं उसके हृदय को भी कठोर न बना दे.  




Wednesday, January 29, 2014

हावड़ा ब्रिज - कोलकाता की शान


आज उनका टीवी खराब हो गया, टीवी के बिना दिन जैसा भी गुजरे रोज से काफी अलग होगा. टीवी उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. जून के अनुसार शाम तक ठीक हो जायेगा. कल शाम मीटिंग थी, क्लब में कुछ खा लिया, आठ बजे जब जून और नन्हा भोजन कर रहे थे, उसे जरा भी भूख नहीं थी, दस बजे उसे भूख लगी, उस समय कुछ खाना ठीक नहीं है यह सोचकर नहीं खाया, पर खाली पेट नींद काफी देर तक नहीं आ रही थी.

अब धूप में पहले की सी तेजी नहीं है. सुबह नाश्ता करने के बाद उसने नन्हे के लिए पेपर की छोटी-छोटी कारें बनायीं जो हावड़ा ब्रिज पर खड़ी की जाएँगी. उसका प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो गया है, जिसे पिछले कई दिनों से वह और उसके मित्र मिलकर बना रहे थे. आज दो अक्तूबर है, बापू की १२८वी जयंती ! दोपहर को दूरदर्शन पर ‘गाँधी से महात्मा’, श्याम बेनेगल की फिल्म ‘Making of Mahatma’ का हिंदी रूपांतरण देखा. गाँधी दिल के और करीब हो गये. आज क्लब में कार्यक्रम है पर इतने बड़े महापुरुष के जीवन पर फिल्म देखने के बाद कुछ और देखना शेष नहीं रह जाता. बापू के पुत्रों को विशेषकर हरिदास को उनसे शिकायत रही, वैसे कुछ न कुछ शिकायत हर बेटे को अपने पिता से रहती ही है.

कुछ देर पहले छोटी बहन से फोन पर बात की, उसने अभी तक नवजात शिशु का नाम नहीं सोचा है, ३.४ केजी की गोरी सी बच्ची का नाम जो बड़ी बहन से कुछ मिलता-जुलता भी होना चाहिए. जून आज तिनसुकिया गये हैं, वापसी की टिकट के लिए, नहीं मिलने पर जाने की टिकट भी कैंसिल कर देंगे, सुनने पर यह वाक्य उसे कठोर लगा किन्तु यथार्थ यही है. आजकल बिना रिजर्वेशन के सफर करना उनके लिए असम्भव है, अपनी सुविधा की कीमत पर परिवार के साथ त्योहार में शामिल नहीं हुआ जा सकता. यह आधुनिक समाज की देन ही है जिसने एक ओर प्रगति की है दूसरी ओर कठिनाइयां भी बढ़ा दी हैं. घर से इतनी दूर रहने का खामियाजा ही समझ लें. पर यहाँ रहना उसे सदा से ही भाता रहा है और भाता रहेगा जब तक भी यहाँ रहना पड़े.

उसकी एक सखी बीएड करना चाह रही है, और उससे नोट्स मांग रही है. उसे आश्चर्य हुआ ऐसा कहते हुए वह बहुत निरीह लग रही थी, पहले कुछ ज्यादा ही उत्साहित थी. यही तो जिन्दगी है, जो कभी सिखाती है कभी झकझोरती है. हर दिन एक नया संदेश लेकर आता है. अगर कोई ध्यान से देखे और समझे तो !

कल सुबह जून को तिनसुकिया में कम्प्यूटर लिंक न होने के कारण वापस लौटना पड़ा पर उनके मित्र के छोटे भाई( जो एक ट्रेवल एजेंट बन गया है) ने टिकट ले ली है, उन्हें ख़ुशी तो हुई पर छोटी ननद उसी समय ससुराल जा रही है, उससे शायद मिलना न हो. शाम को वे टहलने गये मौसम में एक ठंडक सी आ गयी है और हरसिंगार के फूलों की महक भी. उनके हरसिंगार में अभी कलियाँ ही आई हैं. जून ने उस दिन गुलाबों की कटिंग भी कर दी है, अगले हफ्ते वे गोबर भी डलवा देंगे. कल शाम बल्कि रात को ही पड़ोसिन ने कागज की कारें बनाने के लिए कहा, पर उसके पास समय नहीं था, मना करने में अच्छा नहीं लग रहा था, पर किया, it means she is learning to be assertive, अपने वश से बाहर के काम को भी पहले वह ले लेती थी फिर चाहे कितना परेशान होना पड़े. जून अभी आने वाले हैं, उन्हें आज अस्पताल भी जाना है, उसके कान में हवा की कुछ खुसुर-पुसुर सी लग रही थी, आज सुबह से ठीक है, फिर भी कहा है न कि छोटे रोग की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए.