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Wednesday, April 17, 2019

पीले फूलों की माला



साढ़े तीन बजने को हैं, दोपहर बारह बजे से ही लगातार वर्षा हो रही है. हर तरफ पानी ही पानी हो गया है लॉन में. बाढ़ से असम के कई जिले पहले ही कितने पीड़ित हैं, ऊपर से वर्षा रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. प्रकृति की यह विनाश लीला इस सृष्टि चक्र का ही एक भाग है, मानव विवश है इसके आगे. आज एक वीडियो खोला तो एक वायरस का शिकार हो गयी. उसकी तरफ से कई मित्रों को अपने आप संदेश जाने लगे हैं. नन्हे को कहा है, वही कुछ सहायता कर सकता है. मैसेंजर से हट जाना ही ठीक रहेगा भविष्य में अथवा तो फेसबुक से ही. कल लाइब्रेरी से दो किताबें लायी. प्रणव मुखर्जी की एक ‘द ड्रामेटिक डिकेड’ और दूसरी अमेजन के बारे में हैं.

नन्हे ने सहायता की और उसकी तरफ से संदेश जाने बंद हो गये हैं. आज तरणताल में दोनों हाथों का प्रयोग करके तैरना सीखा. धीरे-धीरे ही सही कुछ बात बन रही है. सुबह उठी तो मन टिका था. आज तिनसुकिया जाना है, पूजा के उपहार खरीदने हैं. नैनी व माली के परिवारों के लिए. शिक्षक दिवस के उपहार भी खरीदने हैं. शाम को एक सखी के यहाँ चाय पर जाना है. क्लब की एक सदस्या ने फोन किया, उसे प्रेस जाने के लिए गाड़ी चाहिए. कल शाम वह बहुत परेशान थी. प्रेसिडेंट ने उसे फोन पर कुछ ऐसा कह दिया था जो उसे रास नहीं आया. कुछ देर बात करने के बाद वह खुश हो गयी, सारे दुःख उनके मन की कल्पना से ही बनते हैं और बढ़ते हैं. आज वैदिक टीवी देखा, सुना, कितना उपयोगी है यह साधकों के लिए. सुबह गुरूजी के साथ ‘सत्यं परम धीमही’ ध्यान किया. बड़ी भांजी से बात की, वह आजकल फेसबुक पर उदासी भरी पोस्टस् डालती है.

आज गणेश पूजा है, उन्होंने सुबह घर में गणपति की मूर्तियाँ सजायीं. लड्डू का प्रसाद बनाया. जून और उसने आरती की. नैनी ने पीले फूलों की माला बनाई. गणपति के प्रतीक की व्याख्या सुनी. उनके बड़े सिर, विशाल उदर और कानों, लंबी सूंड और उनकी सवारी, सभी के बारे में गुरूजी ने कितने सरल शब्दों में समझाया. पूजा का अर्थ है पूर्णता से उत्पन्न भाव, शुभता के प्रतीक गणपति उनके मनों को शुद्धता से भरें यही प्रार्थना उन्हें करनी है.

ग्यारह बजने को हैं. टीवी पर प्रधानमन्त्री के ‘मन की बात’ आने वाली है. आज धूप बहुत तेज है. प्रातः भ्रमण के समय ही सूरज की चमक आँखों को चुंधिया रही थीं. पीएम का सम्बोधन आरम्भ हुआ तो वे सुनने बैठ गये, अच्छा लगता है उनकी प्रेरणादायक बातें सुनना. राष्ट्रीय खेल दिवस के बारे में उन्होंने बताया और खेलों के महत्व के बारे में भी. नेवी में काम करने वाली छह महिलाओं का जिक्र किया जो तरिणी पर एक वर्ष के लिए विश्व भ्रमण पर जाने वाली हैं. शिक्षक दिवस पर भी वह एक अभियान चलाना चाहते हैं, जिसमें शिक्षा बदलाव के लिए हो और सीखना जीने के लिए हो. ‘जन धन योजना’ के कारण बैंकों में हुई बचत का जिक्र भी किया. जैन समाज के पर्व ‘पर्यूषण’ का महत्व बताया, जो क्षमा, मैत्री और अहिंसा का प्रतीक है. गणेश चतुर्थी का पर्व एकता, समता और शुचिता का पर्व है. ओणम प्रेम, सौहार्द, उमंग और आशा का संदेश देता है. सामाजिक समरसता का भी उल्लेख किया, जमैतुला हिन्द के कार्य कर्ताओं ने गुजरात के मन्दिरों और मस्जिदों की सफाई की. जाने कितने लोगों को कुछ करने की प्रेरणा देता है उनके संदेश.




Wednesday, April 10, 2019

स्वच्छ भारत



सवा ग्यारह बजने को हैं. आज जून की मनपसन्द पकौड़ों वाली कढ़ी बनायी है. दो सप्ताह तक गाय के दूध की एकत्र की हुई मलाई से ‘घी’ बनाया और बचे हुए अंश में आता भूनकर गेहूँ का चूर्ण भी. सारी सुबह रसोईघर में ही बीत गयी जैसे. अभी-अभी एक परिचिता का फोन आया, स्व्च्छता पर कम्पनी की तरफ से आयोजित ‘स्लोगन प्रतियोगिता’ के बारे में बताया, उसने हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं, भाषा शुद्ध है या नहीं, पूछ रही थी. परसों यहाँ कम्पनी की तरफ से स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के कार्यक्रम में ‘वाकाथन’ है यानि कुछ दूर तक बैनर लिए पैदल चलना है. रास्ते में गंदगी भी दिखेगी, उसे साफ नहीं करना है बस लोग साफ करें इसका प्रचार करना है. पता नहीं मनुष्य अपने आप को कब तक धोखा देता रहेगा. अचानक तेज वर्षा होने लगी है. घर के बाहर नाले में पानी भर जाता है जो वर्षा समाप्त होने के घंटों बाद तक भी बना रहता है, बड़े नाले से उसका सम्पर्क शायद टूट गया है. आज सिविल विभाग से कोई कर्मचारी देखने के लिए आया है. सुबह तरणताल गयी पर बहुत भीड़ थी, ठीक से अभ्यास नहीं हो पाया. कल से वह समय चुनेगी जब कम से कम लोग हों. कल मृणाल ज्योति की वार्षिक सभा है.

आज जुलाई का अंतिम दिन है. टीवी पर प्रधानमन्त्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम आ रहा है. वह कह रहे हैं, वर्षा मनोहारी है पर बाढ़ की विभीषिका भयंकर होती है. बरसात में हर वर्ष देश के कितने ही भागों में बाढ़ आती है. वह जीएसटी की बात भी कर रहे हैं. उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन तथा अगस्त क्रांति की बात भी कही. साथ ही कहा, इस वर्ष को संकल्प वर्ष के रूप में मनाएं तो पांच वर्ष में भारत का चित्र बदल जायेगा. संकल्प को सिद्धि में बदलना है. गणेश पूजा का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूजा को मनाते हुए इस वर्ष सवा सौ वर्ष हो जायेंगे. प्रधान मंत्री कुछ ही देर में इतने सारे विषयों को लेते हुए इतना सार गर्भित भाषण देते हैं. महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की तो साथ ही राखी बनाने वाले कारीगरों की भी.

अगले हफ्ते रक्षाबन्धन का त्यौहार है. अभी अभी मृणाल ज्योति से फोन आया, पूछ रही थी, क्या वह और कुछ अन्य महिलाएं उस दिन स्कूल आएँगी. राखियाँ अभी तक बन नहीं पाई हैं, पर तब तक बन जाएँगी, अन्यथा वे बाजार से भी खरीद सकते हैं. आज तैराकी में हाथ चलाना सिखाया, दांया हाथ उठाकर श्वास लेना है. अब लगता है कुछ आगे बढ़ रही है. आजकल योग दर्शन पर नियमित व्याख्यान सुन रही है, काफी कुछ स्पष्ट हो रहा है. आज शाम को योग कक्षा में ‘क्रिया’ के बारे में ठीक से बताना है. सुना कि अन्तरायों का अभाव होने लगता है जब आत्मदर्शन होता है. कोई कहता है अंतराय खत्म होने पर आत्मदर्शन होता है ! ‘व्याधि’ और ‘उपाधि’ आदि अंतराय ही उन्हें समाधि से दूर रखते हैं. योग के प्रभाव से ही वे स्वस्थ रहते हैं, यानि ‘स्व’ में स्थित रहते हैं. ‘स्व’ में प्रतिष्ठित होने पर ही वे जगत में अभय को प्राप्त होते हैं. चित्त की शुद्धि होने पर ही ‘स्व’ का दर्शन होता है. इन्द्रियों पर जय होने पर ही चित्त शुद्ध होता है. एकाग्रता में ही इन्द्रियों पर जय होती है और चित्त में आत्मा की झलक मिलती है.

Monday, August 20, 2018

हरी घास पर नंगे पांव



रात्रि के नौ बजने वाले हैं, जून गोहाटी में हैं, कल वापस आ रहे हैं. ‘वेस्ट फ्यूल मैनेजमेंट’ पर आज उन्हें एक प्रजेंटेशन देना है. कल रात ही सवा ग्यारह बजे डायरेक्टर का फोन आया, जिसमें आज गोहाटी जाने को कहा था. आज ही पूना में प्रधानमंत्री ‘स्मार्ट सिटी योजना’ का शुभारम्भ कर रहे हैं. गोहाटी को भी स्मार्ट सिटी समूह में रखा गया है. आज एक समाचार पढ़ा, नागालैंड का अलग ध्वज होगा तथा वहाँ जाने के लिए पासपोर्ट लेना होगा, यकीन नहीं होता कि ऐसा हो सकता है, जरूर किसी सिरफिरे ने अफवाह फैलाई है. दोपहर को उसने भांजी व उसकी सखी को कविताएँ मेल कर दीं. दोपहर बाद बाजार गयी, गाजर, टमाटर, कुंदरू, परवल, बैंगन, खीर, डांगबूटी, भिन्डी, अदरक व मिर्च सभी कुछ लिया. पूसी अब बिलकुल ठीक है, दोपहर को उसे मस्ती में सोते देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कोई बच्चा सो रहा हो. प्रकृति कितनी विचित्र है, कितनी रहस्यमयी. छत पर दो भिन्न पक्षी भी दिखे शाम को, शायद बुलबुल. जैसे ही वह उनकी तस्वीर लेने निकट गयी, फुर्र से उड़ गये. छोटे से छोटा जीव भी दुःख नहीं चाहता, आनन्द चाहता है, प्रेम चाहता है. अपने अस्तित्त्व की रक्षा करना चाहता है अर्थात शक्ति चाहता है. प्रकृति ने मनुष्य के अलावा सभी प्राणियों को ये सब प्रदान किये हैं. मनुष्य का मन जितना-जितना शुद्ध होता जायेगा, भीतर ये सभी स्वतः प्रकट होने लगेंगे. ज्ञान वही है जो हर काल में सत्य है, विज्ञान की मान्यताएं बदल जाती हैं पर जीवन के मूलभूत मूल्य अनंत काल से वही हैं.

जून को डिनर का आमन्त्रण था पर वह घर पर ही भोजन कर चुके हैं और जाना नहीं चाहते हैं. जीवन कितना विरोधाभासी है, पहले युवाकाल में पार्टी में निमंत्रण के लिए चाहत थी, तब मिलते नहीं थे. अब देर रात तक जगना व्यर्थ लगता है. टीवी पर ‘सिया के राम’ आ रहा है. हजार बार सुनी देखी यह कथा आज भी कितने हृदयों को लुभाती है, संत इसे लीला कहते हैं. राम और रावण जिसकी दृष्टि में एक लीला के दो पात्र से अधिक कुछ नहीं, उसने शाश्वत को जान लिया है. कल क्लब की मीटिंग है, बंद के कारण आज प्रतियोगता में आने वाले निर्णायकों के लिए गुलदस्ते नहीं मिले. एक महिला का विदाई समारोह भी है, उसके लिए गुलदस्ता वह स्वयं बनाकर ले जाएगी. माली ने गुलदाउदी की कटिंग्स लगाने के लिए रेत तैयार कर दी है.

जुलाई का प्रथम दिन ! मौसम आजकल सुहावना चल रहा है, लगभग रोज ही वर्षा होती है और शीतल पवन बहती है. कल शाम उड़िया सखी को विदाई भोज के लिए घर पर बुलाया था. आज मंझली भाभी का जन्मदिन है, सासु माँ जब थीं, उनका भी जन्मदिन इसी दिन मनाते थे वे, उनसे पूछा तो उन्हें अपने जन्म की तारीख का पता नहीं था, पसंद का महीना पूछा तो बरसात का महीना बताया, इसीलिए वे कई वर्षों तक पहली जुलाई को ही उनका जन्मदिन मनाते रहे. बाद में पिता जी भी साथ रहने लगे तो दोनों का. भाभी से पता चला, बड़े भाई का स्वास्थ्य ठीक नहीं है. आज टेस्ट कराए हैं, वह कल पूछेगी, तब तक रिपोर्ट मिल जाएगी. जून के पैरों में भी गर्मी से जलन हो रही थी, और पीठ में दर्द भी था. उन्होंने ने भी रक्त जांच करवाई, सभी परिणाम सामान्य हैं. सुबह ओस की बूंदों पर नंगे पावों टहलना उनके लिए औषधि रूप है. कल से वे ऐसा ही करने वाले हैं. मोदीजी ने ओलम्पिक में जाने वाले खिलाडियों से बात की, उन्हें शुभकामनायें देकर विदा किया तथा मंत्रीमंडल में नये मंत्रियों को शपथ दिलाई. देश को विकास के पथ अपर ले जाने के लिए वह अपनी पूरी शक्ति लगा रहे हैं. देशवासी भी यदि उसी उत्साह से काम करें तो कितना अच्छा हो.

Friday, February 9, 2018

मोदीजी का भाषण



आज क्लब की मीटिंग थी, अभी तक नयी कमेटी का गठन का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है. उससे पूर्व बगीचे में टहलते समय भगवद् गीता के एक श्लोक की व्याख्या सुनी. जगत को देखने का किसी का ढंग यदि विधायक है तो जगत सुखमय दिखाई देगा. भीतर यदि श्रद्धा होगी तो अस्तित्त्व उसके लिए अपना द्वार खोल ही देगा. दोपहर को बगीचे में कितनी सारी तितलियाँ उड़ रही थीं. एक की तस्वीरें लीं. कल छोटी भतीजी का जन्मदिन है, उसे फोन किया, पर शायद उसका फोन नम्बर बदल गया है. जून के न रहने पर उसे साढ़े तीन घंटे लगते हैं सुबह की सभी क्रियाओं में. परसों से दो घंटों में करना होगा सभी काम. उन्हें सुबह पौने सात बजे ही दफ्तर जो जाना होता है.

डायरी में पिछली एंट्री पांच तारीख की है. आज पूरे बारह दिन बाद लिख रही है. जून अगले दिन लौटे थे, फिर छोटी बहन परिवार सहित आई और साथ ही नन्हा भी. वे लोग अरुणाचल प्रदेश घूमने गये, नदी के तट पर घूमे और अनगित यादें समेट कर तीन दिन पहले वह वापस गयी और कल नन्हा भी चला गया. आज सुबह से उसे हल्का जुकाम है.

सुबह से वर्षा हो रही है हल्की-हल्की सी. आज घर की विशेष सफाई भी करवाई, साफ घर में रहना सभी को पसंद है. मंझली भाभी का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, उन्हें त्वचा का कोई रोग हो गया है. उन्हें अपने आपको खुश रहना सिखाना होगा. भतीजी विदेश से वापस आना चाहती है. भाई तभी अपनी नौकरी ठीक से कर पायेगा. आज सुबह क्लब के लिए कितने नये-नये विचार मन में आ रहे थे. सदस्यों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए कुछ उपाय तो करने ही होंगे. कल वार्षिक सभा थी इसके बावजूद संख्या कम थी. अगले महीने कमेटी की तरफ से कार्यक्रम होगा, उसने सोचा वह एक कविता लिखेगी, जिसमें  अपने सुझाव भी दे सकती है और अपनी बात भी रख सकती है. नन्हे ने इस बार उन्हें उपहारों से लाद दिया है. उसने मृणाल ज्योति की सदस्यता के लिए भी फार्म भरा पर जमा नहीं कर पाया. कल क्लब में ‘दृश्यम’ दिखाई जाएगी.

आज बड़े भांजे का जन्मदिन है, सुबह उसके फेसबुक अकाउंट पर जाकर फोटो देखे और छोटी सी कविता लिखी, आजकल मिलना तो ऐसे ही होता है. दो दिन बाद छोटे भाई का जन्मदिन भी है, उसके लिए भी कुछ लिखना है. राखी पर भी एकम कविता लिखनी है. सुबह से बादल बने हैं. मौसम अच्छा है अब जुकाम भी ठीक हो गया है. यू ट्यूब पर प्रधानमन्त्री के स्वागत का कार्यक्रम देखा. यूएइ में उनका भव्य स्वागत किया वहाँ रहने वाले भारतीयों ने. मोदी जी का भाषण आ रहा है, जैसे किसी राजनीतिज्ञ का होता है, उन्होंने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली है. देशभक्ति का जज्बा उभरने में भी कामयाब हुए हैं. सुबह नींद खुली अलार्म सुनकर, पर दो मिनट तक लेटी रही, फिर किसी ने भीतर से कहा, जगे हुए का सोये रहना बहुत खतरनाक होता है. जो सोया है उसे क्षमा किया जा सकता है पर जो जगा हुआ है और सोने का नाटक कर रहा है, वह क्षमा के योग्य नहीं. उठकर प्रातः भ्रमण को गये, वापस आकर बोगेनविलिया की छंटाई करवाई, उसे अपराजिता की बेल ने छाकर ढक लिया था. माली व नैनी का  झगड़ा जो उनके न रहने पर हुआ था, उसकी सुलह करवाई. दोपहर को नींद में स्पष्ट दृश्य देखे, लगा जैसे जागकर ही देख रही है. एक रहस्य भीतर खुलता जाता है और एक रहस्य भीतर जुड़ता जाता है. आकर देखा, बगीचे में अभी तक झाड़ू नहीं लगा है. तरीके से माली को रोज आकर अपना काम करना चाहिए, पर कई बार बुलवाना पड़ता है, यह सोचते हुए ही भीतर हल्की सी क्रोध की रेखा दिखी, तो उसने सोचा यह क्रोध उसका ही नुकसान तो नहीं कर रहा, एक पल पहले जो था अब नहीं है, आत्मा तो सदा एकरस है.