Friday, August 10, 2012

ब्रेड रोल और मैंगो शेक





आज जवाहरलाल नेहरु की पुण्यतिथि है. उनका माली छुट्टी पर गया है, दोपहर को आकाश में बदली थी, उसकी छांह में वह कुछ देर बगीची में काम करती रही, थोड़ी सफाई वगैरह. कल रात भर वर्षा होती रही, हर वर्ष की तरह कुछ जिलों में बाढ़ आ गयी है. रेल व बसें भी नहीं चल रही हैं.

आज सुबह जून को सामने वाले बंगाली मित्र ने अपनी लाल मारुती में लिफ्ट दी, पूरी लेन में सिर्फ उन्हीं के पास कार है, और वह सबको उसमें बिठाने के लिये तैयार रहते हैं. उनके जाने के बाद उसने स्नान-ध्यान करके डायरी उठायी कि नन्हा उठ गया. इस समय वह तकिये उठाकर इस कमरे में चटाई पर रख रहा है दोपहर को पापा के सोने के लिये, बेडरूम में दोपहर बाद धूप से ज्यादा गर्मी हो जाती है, सो वे बैठक में नीचे सोते हैं. कल उसने दीदी को एक बड़ा सा पत्र लिखा. कपड़े ठीक किये और  vocubulary exercise करने का प्रयत्न, कितने ही नए शब्द और पुराने शब्दों की root मालूम हुई. कल उड़िया पड़ोसिन घर से लाए हुए पकवान दे गयी, उसका छोटा भाई व ससुर आये हैं, सदा की तरह उससे एक कौर भी नहीं खाया गया. कल घर से पत्र आया, पिता चिंतित हैं कि वह बी.एड करने के लिए जून के बिना एक वर्ष तक कैसे रहेगी.

आज वह अपने जीवन के एक नए वर्ष में प्रवेश कर रही है, मन में कितने ही अनूठे, सुंदर, पवित्र भाव उठ रहे हैं, आज सुबह जून ने उसे जन्मदिन की शुभकामनायें दीं. किसी का जन्मदिन का कार्ड अभी तक तो नहीं आया है, उसने सोचा, देखें परसों पहले किसका आता है. जीवन में इतने वर्ष उसने कैसे गुजारे हैं यह सोचने का वक्त अभी नहीं है, आने वाला वर्ष कैसा हो यह कल्पना में है. जिन बातों को वह रोज पढ़ती है, गीता में जो भाव सात्विक हैं, उन्हें प्राप्त कर सके और कठिनाइयों से जूझना सीखे. नन्हे के साथ आगे की पढ़ाई नहीं कर पायेगी, ऐसा नहीं, बल्कि कर सकेगी, यही सोचना ठीक है. समय सबको सिखाता है, नन्हा भी सीख जायेगा कुछ देर के लिये उससे दूर रहना. शाम को जून वेल साईट गए थे, दो घंटे में लौट आये. उनकी प्रेस खराब हो गयी है, सो कपड़े इकट्ठे होते जा रहे हैं. कल जून बनवाने ले जायेंगे.

कल जून को पे स्लिप मिल गयी और उन्होंने अच्छा सा जन्मदिन मनाया. उसने ब्रेड रोल बनाये थे और मैंगो शेक. उनके एक परिचित दम्पती आये थे, उसकी कविता के पहले प्रशंसक, अब वह रोज ही कुछ न कुछ ही लिखेगी दोपहर को. कितना अच्छा लगता होगा अपने पाठकों से अपनी कहानी, कविता की प्रशंसा सुनकर लेखक-लेखिकाओं को.. आजकल वह सुबह नन्हे को जल्दी उठा देती है नहीं तो दोपहर को सोने में आनाकानी करता है.  



स्वीमिंगपूल में पहला दिन




पिछले तीन दिन वह फिर नहीं लिख सकी, सुबह न लिखे तो दिन भर व्यस्तता में याद ही नही रहता. कल रात जून के सो जाने के बाद वह कुछ देर पढ़ती रही, कल पांच पत्रिकाएँ एक साथ जो आ गयी थीं. परिणाम यह हुआ कि सुबह उसे बेहद नींद आ रही थी, वह तैयार हो रहे हैं यह नींद में कोई खबर तो कर रहा था, पर उठ नहीं पायी. बाद में उसे अच्छा नहीं लगा, खुद से वादा किया कि आगे ऐसा नहीं करेगी. जाने क्यों मन जिसे इतना चाहता है कभी उदासीन भी हो जाता है उसके प्रति, शायद ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, ऐसा कहीं पढ़ा था. उसने माँ को लिखा है कि वहाँ रहकर बी. एड करना चाहती है. उनका जवाब शायद महीने के अंत तक आ जाये.

आज उसका काम जल्दी हो गया, नन्हा अभी उठा नहीं है, कल वे उसे इस वर्ष पहली बार स्वीमिंग पूल ले गए थे. उसे बड़ा आनंद आ रहा था, एक बार तो वह पूरा पानी में ही चला गया था, कितना डर गयी थी वह, और नन्हा भी पानी में तैरने-उतराने लगा था ऊपर आने के लिये. अब वे कभी उसे पानी में अकेले नहीं छोड़ेंगे. कल दोपहर भर भी वह पढ़ती रही, इसी कारण आँख में हल्की पीड़ा थी रात को. टीवी पर ‘जिंदगी’ का अंतिम एपिसोड था, अंत सुखद था पर अप्रत्याशित. शायद इसके सिवा औए कुछ सोच ही नहीं सकते थे वे लोग. दोनों घर से पत्र आये हैं, एक शुभ समाचार मिला मंझले भाई-भाभी माता-पिता बनने वाले हैं, पर अब वे लोग यहाँ नहीं आ पाएंगे.

कल उनके नेपाली पड़ोसी अपना कलर टीवी उनके घर रख गए, घर गए हैं अपने परिवार को लाने. उन्होंने The old fox देखा, कुछ समझ में आया, कुछ नहीं, पर रंगीन टीवी की बात ही और है फिर ओनिडा हो तो और भी अच्छा है, सोने पे सुहागा. कल शाम बहुत दिनों बाद दो परिवार उनसे मिलने आये, अच्छा लगा. आज ईद है, जून के दफ्तर में अवकाश है, सोचा था आराम से उठेंगे, पर सुबह-सुबह बिजली चली गयी, गर्मी से नींद खुल गयी. उन्होंने शाक-वाटिका से भिन्डी व भुट्टे तोड़े, अंगारों की तरह गैस पर ठीक से भुन नही पाते, भीतर से कुछ कच्चे ही रह जाते हैं.

पिछले हफ्ते डायरी नहीं खोली, कई दिनों से उसने कुछ नहीं लिखा है कोई कविता आदि. आलस्य की पराकाष्ठा पर पहुँच गयी है वह, माना कि सुबह जब नन्हा साथ ही उठ जाता है तो संभव नहीं होता पर दोपहर को लिखा जा सकता है, मन भी बस कितना सुविधा-आराम सहित पसंद है. सारे किये-कराये पर इतने दिनों के नियम पर पानी फेर देता है. आज भी उसका मन हुआ वही किताब पढ़ने का, Jean pludiy की Queen Caroline अच्छी किताब है पर इसका मतलब यह तो नहीं कि दिनभर उसे ही लेकर बैठो. कल वह हॉस्पिटल गयी थी, दो परिचित महिलाओं को देखने, एक ने पांच किलो की बेटी को जन्म दिया है, गोल-गोल प्यारी सी. कल छोटे भाई और बड़ी बहन के पत्र भी आये, भाई अभी घर से दूर है, अगले माह घर जायेगा तभी वह उसे जवाब लिखेगी, बहन ने एक और सवाल पूछा है, जवाब के लिये मन में कितने विचार आ रहे हैं.

Thursday, August 9, 2012

बात बन जाये



कल दोपहर ‘कादम्बिनी’ पढ़ती रही, अच्छी पत्रिका  है और इसका रूप जरा भी नहीं बदला है, वही पहले वाला है, जब वह कॉलेज में थी तब हमेशा पढ़ती थी. कल वे फिर बाजार गए थे, पैसे तो इस तरह भागते हैं जैसे कैद से निकला चूहा, आज पांच तारीख है और आधा वेतन खर्च हो चुका है. शुक्रवार को क्लब में फिल्म थी ‘प्यार झुकता नहीं’ वे एक घंटा किसी तरह बैठकर लौट आये, नन्हा एक मिनट और नहीं बैठना चाहता था हॉल में, गर्मी भी बहुत थी.

उसका पेन आज ठीक से लिख नहीं रहा है, नन्हे ने गिरा दिया था शायद उसकी निब मुड़ गयी है. कल उसकी तबियत ठीक नहीं थी, ऐसे में वह छोटी-छोटी बातों को भी गम्भीरता से लेने लगती है. हल्का सा मजाक भी सहन नहीं कर पाती. तन के साथ मन भी कैसे टूटा टूटा सा रहता है और आँखें हैं कि हर वक्त भरी-भरी सी. जून ने उसे कुछ भी करने नहीं दिया, आज वह ठीक महसूस कर रही है, कल इतवार था, शाम को टीवी पर ‘बात बन जाये’ आयी थी, मजेदार थी और दोपहर की मलयालम फिल्म भी.

सुबह के साढ़े सात ही बजे हैं पर लग रहा है दिन चढ़ आया है. कल ननद व देवर के पत्र मिले, जवाब देना है, मंझले भाई का पत्र भी आया है. कल शाम वे काफ़ी दिनों के बाद घूमने गए. उसने सोचा कि नन्हे को दूध सोते में ही पिला दे तो क्या अच्छा हो ! उठने के बाद एक गिलास दूध पीने में कितना समय लगाता है. कल के संडे रिव्यू में पढ़ा कि दूध पीना ही अच्छा नहीं है, आश्चर्य है हजारों सालों से लोग दूध पीते आ रहे हैं. एक दिन कोई लिख देगा कि अनाज खाना व सब्जियां खाना ही अच्छा नहीं है, फिर तो आदमी हवा खाकर( वह भी तो प्रदूषित है) ही जिन्दा रहेगा.

कल जून ने कहा कि ऐसा भी क्या काम होता है उसे जो ग्यारह बज जाते हैं, तो आज सुबह के दस बजकर पांच मिनट ही हुए हैं और वह अपने सारे काम कर चुकी है. वह लिखने बैठी तो नन्हा क्यों पीछे रहता, उसे भी कापी पेन दिया है, लिख रहा है कुछ अपनी भाषा में. पर उसे वही पेन चाहिए जिससे वह लिख रही है, अपने हाथ पर कुछ लिख लिया है उसने और अब हाथ धोने गया है. बच्चे भी बस...आज सुबह गिलास से दूध न पीने के लिये कितनी जिद कर रहा था पर आखिर में पी ही गया, आज से उसकी बोतल बंद. कल वे पत्रिकाएँ लेने गए, बहुत भीड़ थी, पर उनकी पसंद की एक भी पत्रिका नहीं मिली, आज फिर जायेंगे, लाइब्रेरी भी जाना है, jean plaidy की एक और किताब लाने, Barbara cartland की भी.




Wednesday, August 8, 2012

सपने में हनुमान



उन्होंने तीन बर्तन खरीदे स्टील की छोटी सी प्लेट, कटोरी और गिलास. और जन्मदिन मनाने का तरीका भी उन्हें अच्छा लगा, कोई औपचारिकता नहीं, जैसे सभी एक दूसरे से नितांत परिचित हों. गृहणी भी उसे अच्छी लगीं, उसने सोचा कि बाद में एक बार और वह उनके घर जायेगी यदि जून भी जाने को तैयार हुए. उसने शिफान की बहुत सुंदर साड़ी पहनी थी, जिसकी छवि निहारते उसे थकान नहीं हो रही थी. कल रात जून ने अपने तीन दिनों से चल रहे सलीम शरीफ (समदर्शन के डायरेक्टर) के सेमिनार की कई बातें बतायीं, बहुत अच्छी बातें, उसने बेहद अच्छी तरह बतायीं. लेकिन उसका असर कितना और कब तक होगा, यह कौन बताएगा उनके सिवा. स्वयं को जाने-पहचानें यही सार था उन बातों का.

उनके घर से दो घर छोड़ कर रहने वाली एक और परिचिता (वे भी उड़िया हैं) ने बुलाया और अपनी बहन की दी हुई मिर्चें देते हुए कहा, आपके खीरे की बेल में कितने खीरे लगे हैं. एक वह तोड़ कर लायी है. कल माँ का पत्र  आया है वे लोग एक सप्ताह के लिये जम्मू जा रहे हैं मंझले भाई के पास, सो वे उन्हें अगले हफ्ते पत्र लिखेंगे. कल शाम वे एक हिंदी फिल्म देखने गए जिसमें थोड़ा सस्पेंस भी था. नन्हें का पैर उस दिन गर्म पानी के पाइप से जल गया था अभी तक घाव ठीक नहीं हुआ है पूरे तीन दिन हो गए हैं आज चौथा दिन है. जलने पर भी वह सिर्फ पांच मिनट ही रोया, बहादुर बच्चा है. कल रात उसकी बाँह में फिर पुराना दर्द उभर आया, दबाने से कुछ राहत मिली. टीवी पर देखे धारावाहिक ‘इंतजार’ में देखा था कि जटाशंकर का ब्याह होते-होते रह गया पर स्वप्न में देखा उसकी मंगनी हो गयी है. एक और अच्छा स्वप्न था, एक पुराना स्कूल, उसमें हनुमान जी का प्रकट होना और चट्टानों पर चढ़कर उनका घर तक पहुँचना.

दो दिन कुछ नहीं लिखा, परसों सोनू सुबह साथ ही उठ गया, और कल उसके लिये एक निकर सिलती रही, मगर अभी से छोटी है, कुछ दिन ही पहनेगा, आज अभी तक नन्हा सोया है, आजकल सोते समय वह बहुत पैर चलाता है, शायद उसे गर्मी लगती हो या जगह कम पड़ती हो, जल्दी ही उन्हें उसके लिये अलग बिस्तर लगाना चाहिए. इस समय कैसे स्थिर सोया है, वह जो किताब पढ़ रही थी The Regent’s Daughter जो आज समाप्त हो गयी. उसका अंत अच्छा नहीं लगा पर उसके सिवा तो कहानी बढ़ती ही जाती, कहीं न कहीं तो अंत होना ही था.   



Tuesday, August 7, 2012

कहीं वर्षा कहीं सूखा


उसके शरीर में लचक तो जैसे रह ही नहीं गयी है, व्यायाम या आसन करते समय पता चलता है. कमर का घेरा इतना बढ़ता जा रहा है कि डर लगता है किसी दिन माँ की तरह मोटी न हो जाये. वह नियमित व्यायाम करती भी कहाँ है, प्रातः उठते ही करना ज्यादा अच्छा है, सुबह-सुबह वातावरण इतना शांत होता है, उसने सोचा, कल से ऐसा ही करेगी पर उसके लिये सुबह जल्दी उठना होगा, आजकल तो सुबह का अलार्म भी नहीं सुनाई देता, तामसी वृत्ति का प्रभाव है. इसी तरह उन दिनों जून को भी नहीं देता होगा. कल रात सामने वाले दादा ने भी खाना खाया सो बर्तन तो सभी जूठे पड़े हैं. आठ बजे हैं, नन्हा अभी-अभी उठ गया है, सो अब लिखना बंद.

कल उसकी नव विवाहिता पड़ोसिन ने दुबारा कहा, साड़ी में आप अच्छी लगती हैं, और उस दिन उसकी कीमती और ढेर सारी साडियां देखी थीं, अमीर घर की लड़की है. कल शाम वह उन्हीं आंटी से मिलने गयी जिनकी बहू घर छोड़ कर चली गयी थी. उनसे बातें करके अच्छा लगता है पर कल उनकी बातें सुनकर बहुत दुःख हुआ, हाल ही में हुए पति वियोग के कारण एक तो वह वैसे ही दुखी थीं, होना तो यह चाहिए था कि उनके बेटा बहू इतना ख्याल रखते कि उन्हें पुरानी बातें याद न आतीं  पर हुआ यह कि बहू लड़-झगड़ कर मायके चली गयी. कल एक और दम्पति मिलने आये थे, बिहार के थे, दोनों ही धीरे-धीरे रुक-रुक कर बोलने वाले शर्मीले स्वभाव के लगे. कल शाम वे सब्जी लेने गए तो वर्षा शुरू हो गयी पर वापस आकर देखा तो यहाँ उनके घर के आसपास सब सूखा था. रात को जब वे भोजन कर रहे थे, नन्हें को ड्रेसिंग टेबल का दरवाजा खोलते बंद करते समय मसूड़े में दांत से चोट लग गयी, पल भर को तो वह रोया लेकिन थोड़ी देर में ही चुप हो गया और ऐसे बातें करने लगा जैसे कुछ हुआ ही नही हो.

रोज के कार्य के अलावा उसने आया से दो काम करवाए हैं, उसने सोचा एक रुपया देगी उसे. अच्छी लड़की है, जो कहो सिर हिलाती है. सुबह उसने फ्लॉक्स के बीज इक्कट्ठे किये, अगले वर्ष काम आएंगे. कल शाम वे तेलुगु मित्र के यहाँ गए थे, आइसक्रीम खिलाई औए आलू के भजिये, अच्छा  लगता है उनके घर जाकर, उनका दो साल का बेटा बहुत होशियार हो गया है, अपने खिलौनों को सोनू को हाथ तक नहीं लगाने दिया. आज उनकी लेन के पहले घर में रहने वाली छोटी बालिका का जन्मदिन है, वे शाम को बाजार जाकर कोई उपहार लायेंगे.





Sunday, August 5, 2012

रवा दोसा और कटलेट



कल वह अभी स्नान ही कर रही थी कि नन्हा उठ गया और उसके बाद पढ़ना-लिखना कुछ नहीं हुआ, दोपहर को भी वह सिर्फ एक सवा घंटा ही सोया, उसके साथ व्यस्त रहते समय का पता ही नहीं चलता. दिन बीत गया और आज अभी तक वह निद्रालोक में है. जून की कल रात की ड्यूटी थी, सुबह आये, सो वह भी सो रहे हैं. कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उनकी ड्यटी ओ.सी.एस.१ पर लगी थी. हड़ताल वापस ले ली गयी है सो सुबह छह बजे वे लौट आये, अन्यथा उन्हें आज का दिन व रात भी अकेले ही रहना पड़ता. कल उसने बड़ी बनाने के लिये दाल भिगोई थी, पीस भी दी थी, पर सुबह से वर्षा, बादल...धूप का तो नाम भी नहीं. आज गीता का चौदहवां व पन्द्रहवां अध्याय पढ़ा, सात्विक, राजसी व तामसी प्रवृत्ति वाले मनुष्यों के गुण बताए गए हैं. उसकी प्रकृति राजसी है, आखिर क्षत्रिय वंश की है.
जिस पेन से वह पहले लिखती थी, नहीं मिला शायद जून ले गए हों. आज सुबह उसने अलार्म सुना था पर फिर सो गई, सोचा जून अभी उठेंगे और उसे उठायेंगे, पर वे खुद भी देर से उठे, जल्दी-जल्दी सब करके उन्हें ऑफिस जाना पड़ा. उसे अपने व्यवहार पर आश्चर्य हुआ, उसे अपना यह व्यवहार खुद भी समझ में नहीं आता. अलार्म सुन कर उसका न उठ पाना और यह सोचना कि उसने ने भी तो सुना होगा, सुबह की नींद कितनी आलस्य भरी होती है, शायद उन्हें सुनाई ही नहीं दिया हो, उसने सोचा आज वह उनसे पूछेगी, सुबह तो समय ही नहीं था. आज क्लब में फिल्म है, Passage to India   वे जायेंगे. उसने याद करने की कोशिश की कि आज क्या पढ़ा था पर सफल नहीं हुई, उसे लगा वह आजकल पाठ पुरे मनोयोग से नहीं करती, कुछ याद नहीं रहता. इससे तो कोई लाभ नहीं सम्भवतः कुछ लाभ तो अवश्य है पर विशेष नहीं.

नन्हा कल रात सो नहीं पाया मच्छरों के कारण सो अभी तक सो रहा है. वे दोनों भी कहाँ सो पाए, उसे तो बहुत देर से नींद आयी और जब नींद खुली तो जून जा चुके थे. पता नहीं कैसे उनकी मसहरी में मच्छर चले आते हैं. कल क्लब में Passage to India  देखी, कोई भी हिंदी फिल्म इस तरह दिल-दिमाग पर नहीं छायी होती, रात भर फिल्म के सीन ही आँखों के सामने आ रहे थे और अभी सुबह भी डॉ आज़िज़ की पुकार, उसका निष्पाप चेहरा. लेकिन जून को बीच में ही नन्हें को लेकर बाहर आना पड़ा, हमने तय किया है अब से एक बार में एक ही जन देखेगा, एक सोनू के साथ घर पर ही रहेगा और बाद में कहानी सुन लेगा. कल दोपहर वह जून से फिर छोटी सी बात पर नाराज हुई, कितना मन को समझाये और कितना पढ़े पर उस वक्त यह सब याद कहाँ रहता है.

कल-परसों दो दिन नही लिख सकी, परसों जून खरसांग गए थे शाम को लौट आये. कल दिन में उसने बारबरा कार्टलैंड का नॉवल lane to rescue पूरा किया, छोड़ने का मन ही नहीं होता था, लगता था सब आँखों के सामने हो रहा है. बेल बजी है सफाई कर्मचारी आया है. नन्हा अभी सोया है. कल शाम वे लोग प्रार्थना गए थे, रवा दोसा और कटलेट मंगवाया, अच्छा लगा, घर आकर दोनों टेली फिल्म देखीं अच्छी थीं दोनों ही. पता नहीं कैसे कल वे दोनों अलग-अलग सोच रहे थे कि शाम को बाहर जायेंगे किसी रेस्त्राँ में.

Saturday, August 4, 2012

बीहू का अवकाश


वर्षा अभी थमी नहीं है, आज भी बीहू का अवकाश है, नया वर्ष आरम्भ हुआ है तो ‘म्यूजिक कॉर्नर’ वाले उनकी सिलाई मशीन आज ठीक नहीं करेंगे क्योंकि नए वर्ष के पहले दिन वे कोई काम नहीं करते. जून कुछ देर के लिये ओ.सी.एस. गए थे, लौट आये हैं और व्यस्त हैं. नन्हा उनकी नई उड़िया पड़ोसन के घर गया है. पिछले दो दिन से वह कुछ परेशान लगता है, बेवजह ही रोता है, शायद बेवजह नहीं, पर वे समझ नहीं पाते. शायद वे उसकी ओर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. छुट्टी के दिन वैसे भी घर में काम ज्यादा होता है और सुबह सोकर देर से उठने से और भी समय कम मिलता है. कल शाम नूना का मन अशांत था, जैसे मन में कितना कुछ घुमड़ रहा था. शाम को वे लोग एक पुराने परिचित के यहाँ गए थे, पर उनका व्यवहार उदासीनता भरा था, वह कुछ ज्यादा ही संवेदनशील है, उसे लगा अब उनके सम्बन्धों में वह पहले जैसी बात नहीं है.

वर्षा के कारण लगता है महरी आज भी काम पर नहीं आयेगी, उसे छाता खरीदने के लिये पैसे देने के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं. नन्हा अभी कुछ देर पूर्व ही सोकर उठा है और इस समय दूध पी रहा है, लेकिन कब पीना छोड़ कर खेलने बैठ जायेगा कुछ नहीं कह सकते, बीच-बीच में वह उस पर नजर रखती है. उसका रोज का काम अभी आधा ही हुआ है और यदि बर्तन व कपड़े भी धोने पड़े तो पूरे ग्यारह ही बजेंगे आज. कल शाम उन्होंने नए पड़ोसी उड़िया जोड़े को चाय पर बुलाया था, नयी दुल्हन में उसे बहुत बचपना लगा.

परसों शाम या कहें दिन भर ही कुछ अनाप-शनाप सभी कुछ खाया सो कल सुबह से ही सिर भारी था. शाम को जाकर ठीक हुआ. मानसिक तनाव के कारण सिरदर्द होता है इसका अनुभव उसे कभी नहीं हुआ पर अपच के कारण कई बार हुआ है. जून ने उसकी बहुत देखभाल की. खाना बनाने में भी सहायता की, पर भिन्डी की सब्जी जो उसने बनायी, नमक भूल गया. कल क्लब में उनकी देखी हुई ‘इंकलाब’ फिल्म थी, मौसम ठंडा था वर्षा भी यदाकदा हो जाती थी, सो वे नहीं गए.

आज उसने कई दिन बाद योग के आसन किये. परिणाम पता नहीं क्या हो. चाहे इसका कोई ठोस कारण न हो पर उसे ऐसा लगता है की नन्हे के जन्म के बाद वह जब भी कुछ दिन व्यायाम करती है, दो एक हफ्ते तो ठीक रहती है फिर कुछ न कुछ समस्या अवश्य होती है. सर्दी, जुकाम, सरदर्द या कमर में दर्द कुछ न कुछ. नन्हे के ऊँ ऊँ की आवाज आ रही है, अभी चुप होकर जब वह उसे आवाज देगा तभी वह जायेगी, नहीं तो रोने का जो मूड उठते समय शुरू हुआ है, वह भूलेगा नहीं. कल फिर वर्षा होती रही, वे कहीं नहीं गए, सुबह वह कुछ देर के लिये पड़ोस में गयी और शाम को सामने रहने वाली अकेली लड़की के यहाँ, पर शायद उसे उसके आने की उम्मीद नहीं थी, वह नर्वस हो गयी जब उसके बेड पर सोये एक व्यक्ति को उसने देखा, उसे न तो आश्चर्य हुआ न ही इससे कोई मतलब है, पर उसने तय किया है अब वह उसके घर तभी जायेगी जब पूरा पता हो कि वह अकेली है. कल टीवी पर ‘श्रावंती’ एक अच्छी तेलेगु फिल्म देखी, परसों रात की ‘विद्यापति’ इससे कहीं ऊपर थी.