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Friday, December 27, 2013

रहीम के दोहे


कल शाम को उसे एक फोन कॉल आया, उसे क्लब की अगली कमेटी में जॉइंट सेक्रेटरी का पद  भार सम्भालना है. ख़ुशी हुई, उसने सेक्रेटरी को धन्यवाद दिया जिसने उसका नाम सुझाया था. उसे बाद में लगा वह ठीक से अपनी बात कह भी पाई या नहीं पर अगले ही पल मन ने कहा, भावना देखी जाती है शब्द नहीं. उसे एक और बात याद आई, God gives in the evening if takes in the morning. उसने सोचा वह पूरी निष्ठा से उस काम को करेगी जो उसे सौंपा जायेगा. तीन वर्ष पूर्व वह इस क्लब की सदस्या बनी थी.

आज आसू ने असम बंद की घोषणा की है. नन्हा और जून घर पर हैं. आज धूप बहुत तेज है और गर्मी भी उतनी ही ज्यादा. कल शाम कक्षा चार के एक बच्चे की हिंदी ट्यूशन के लिए एक फोन आया पर जून के अनुसार उसे छोटी कक्षाओं को नहीं पढ़ाना चाहिए, छोटे बच्चों को सम्भालना व पढ़ाना ज्यादा कठिन है बनिस्बत बड़े बच्चों को. उसकी छात्रा जैसी किसी गम्भीर बालिका को पढ़ाना सरल है. कल घर से फोन पर एक उल्लास भरा समाचार आया अक्तूबर में वे सब यहाँ आएंगे.

आज फिर असम बंद है, गर्मी आज हद से ज्यादा है, वे तीनों एसी कमरों में बैठे हैं और ठंडक का आनन्द ले रहे हैं. नन्हा पढ़ रहा है, जून गाँधी जी की एक किताब जो स्वास्थ्य से सम्बन्धित है, पढ़ रहे हैं, उसने कुछ देर क्रोशिए से काम किया और अब लिखना शुरू किया है. Few minutes ago she was hearing news on TV and was not able to concentrate wandering mind for two consecutive news items. Mind always wanders here and there, it demands attention for every second otherwise it slips away like sand through the palms. Today they vacuumed clean their house, took lunch at 11.30 rested for a while and since then doing all above said work. Life at present is sailing smoothly in cool breeze coming from their new AC in Nanhs’s room. Yesterday by mistake she wrote down on next  page and adjoin g empty page was attracting her to pen some thing new and refreshing like Dohas of Rahim, she read some time before.

जीवन एक पहेली है जो बूझे सो ज्ञानी
सपनों सा संसार है आँख खुले तो फानी

हवा, धूप, माटी, गगन और अनल की मूरत
अंतर में जो झांक ले दिखे उसी की सूरत

चिंता, लालच, डाह, प्रमाद, मन के ये व्यापार
तज कर उस की शरण ले उतरे सागर पार

बीता जो वह न रहा भावी से अनजान
जो पल अपने सामने उसकी कीमत जान

यह जग एक सराय है पक्का नहीं मुकाम
आना-जाना अटल है रहने का नहीं काम

सूरज, धरती से मिला अनगिन कर फैलाये
वसुधा कातर प्रेम से फूल अश्रु बरसाए

After so many days clouds have shown their grace and it rained in the morning. At this moment weather is cool, garden is green after a shower. She got up early, perhaps 6 and ½ hours  sleep was not enough, eyes are yearning/paining to be closed but there are so many works and miles to go before she sleeps. Today she has to go music class also. Nanha went to school in a crowded bus today could not get seat also. After two days of ‘BAND all buses have not come today.
  



Wednesday, September 25, 2013

डॉ जगदीश चन्द्र बसु - एक महान वैज्ञानिक


कल फिर नहीं लिख सकी, सुबह घर के कामों में व्यस्त थी, दोपहर को एक सखी के यहाँ गयी. आज भी सुबह के कामों में कपड़े प्रेस करने शेष हैं, यूँही रोजमर्रा के साधारण कार्यों में व्यस्त रहते हुए उसकी साधारण सी जिन्दगी गुजर जाएगी और तब मन से सवाल पूछेगा क उसने जीवन भर क्या किया ? छोटी-छोटी बातों में यूँ अपने को खपाए रहने वाला मन, और उस मन को इतना महत्व देने वाली वह, क्यों नहीं अपने समय व जीवन को सही ढंग से बिताने का प्रयत्न करती. अपना स्वाभाविक कर्म ‘कविता’ भी हफ्तों से नहीं उपजी है, मन उस उच्च भाव को प्राप्त हो ही नहीं सका जिसमें कविता का जन्म होता है. पिछले दिनों उसने अच्छी पुस्तकें भी नहीं पढ़ीं. आज यह सब सोचने की प्रेरणा भी नन्हे द्वारा पढ़े जा रहे ‘डॉ जगदीश चन्द्र बसु’ पाठ को सुनकर हुई है. जीवन में उन्होंने एक लक्ष्य बना लिया था और फिर उस लक्ष्य को पूरा करने की ठान ली. उसके जीवन का लक्ष्य है बहुत सारी कविताएँ लिखना और लिखते ही जाना... पर इसके लिए प्रयास वह बहुत कम करती है. अपने समय के एक-एक मिनट का उपयोग करना चाहिए, यह बात सुनने और पढ़ने में तो अच्छी लगती है, पर व्यवहार में लायी नहीं जाती. फिर भी कोशिश करेगी की व्यर्थ समय न बिताये. फ़िलहाल तो कपड़ों का ढेर निमन्त्रण दे रहा है और उसके बाद जून आ जायेंगे, फोन करके पूछा था आज नाश्ता कर लिया या नहीं. आज से नन्हे की पूजा की छुट्टियाँ भी शुरू हो गयी हैं और अब उसका काफी वक्त तो उसके साथ बीतेगा.

आज सुबह माली ने टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च तथा जीनिया के बीज पौध बनाने के लिए लगा दिए. मिटटी डालने के लिए सिविल विभाग से मजदूर भी आ गये हैं. धीरे-धीरे सभी काम हो जाते हैं, व्यर्थ ही जल्दी मचाने व परेशान होने की जरूरत नहीं है. आज सुबह जागरण में मुरारी बापू को सुना, आज वह प्रसन्न मुद्रा में थे, कभी-कभी तो इतने उदास हो जाते हैं कि लोगों की आँखों में आंसू आ जाते थे, जिससे उसे अच्छा नहीं लगता था. कल गाउन की कटिंग भी कर दी, रिसीवर का कवर भी अभी थोड़ा सा बाकी है, क्रोशिये का काम उसे अच्छा लगता है, जून का वह स्वेटर भी बन गया है. लेकिन जो नहीं हो पा रहा है वह है निरंतर मन का संतुलन, थोड़ी सी बात को दिल पर लेना और उस भाव को चेहरे पर भी ले आना, यह तो कमजोर मन की निशानी है. आज सुबह एक दुखद घटना हुई, बिल्ली का वह बच्चा जो कल शाम तक बहुत चिल्ला रहा था, रात में सम्भवतः ठंड से मर गया था, या फिर जिस डब्बे में उसे रखा था, उसमें से न निकल पाने के कारण, उसकी माँ ने उसे बिलकुल ही त्याग दिया था, अनाथ का यही हश्र होना था.

परसों वे खुंसा गये थे, सुबह नौ बजे यहाँ से रवाना हुए, एक परिवार और था, उनकी मारुति वैन में यात्रा अच्छी रही, वहाँ जिस गेस्ट हाउस में ठहरे थे, सफाई नहीं थी, सिर्फ एक रात ही वे रुके. शनिवार को वह अस्पताल गयी थी, आँख में पानी आना बंद नहीं हुआ है, डॉ ने छोटे से आपरेशन के लिए कह दिया है. नैनी को दूध न रहने के कारण सुबह से चाय नहीं मिली शायद इसी कारण उसका मुख उतरा हुआ है.



Wednesday, April 17, 2013

जुरासिक पार्क



आज फोन ठीक हो गया, कल रात पिता भी वापस आ गए. बिजली आज दिन भर रही, घिसाई का काम चलता रहा, दस-बारह दिन में पूरा हो जायेगा ऐसी उम्मीद है. बैठक का फर्श साफ निकल आया है, सुंदर लग रहा है. पहली कटाई है यह, एक बार फिर करेंगे. बढाई का काम हो जाये तो राहत मिले. साढ़े दस हुए हैं, उसने सोचा जून शायद सो चुके होंगे, वह रोज लगभग इसी वक्त लिखती है. दिन भर के काम व्यवस्थित हो चुके हैं. सुबह उठकर नौ बजे तक व्यायाम, स्नान, नाश्ता आदि, फिर नन्हे की पढ़ाई, मकान का चक्कर, अखबार पढ़ना. उसके बाद फलाहार जिसे माँ फ्रूट टाइम कहती हैं. क्रोशिये पर कुछ देर काम, फिर दोपहर का भोजन, एक झपकी. उठकर फिर कुछ देर कढ़ाई आदि, धूप थोड़ा कम होने पर मकान का एक और चक्कर, शाम को घूमना. रात का खाना, कुछ पढ़ना फिर टीवी. आज उसने एक नया डिजाइन सीखा है क्रोशिये का. काफी बन गया है, इसके बाद यू पिन से बनाएगी. हवा में ठंडक है, कूलर चलाने की जरूरत नहीं है. वहाँ असम में तो वर्षा हो रही होगी, उसने सोचा.

  उसे जून के फोन की प्रतीक्षा थी, जो नहीं आया, शायद वे मोरान में हों, उनका तीसरा पत्र भी अभी तक नहीं मिला है, आज उन्हें घर से आए पूरे उन्नीस दिन हो गए हैं. आज गर्मी ज्यादा थी दिन में. सुबह छह बजे से ही बिजली गायब थी. शाम को वह सामने वाले घर में गयी, नन्हे की उम्र का एक बच्चा रहता है वहाँ, उसकी दीदी ने गाढ़ा दूध वाला रूह अफजा पिला दिया, उसका जी मिचलाने लगा था. महरी आज दूसरे दिन भी नहीं आयी. शाम को माँ की परिचित एक लड़की मिलने आयी थी, उसे भी सिलाई-कढ़ाई का बहुत शौक है, परसों वह माँ व भाभी के साथ उसके यहाँ जायेगी. आज दोपहर बाद उसने पंजाबी दीदी को एक पत्र लिखा, सोच रही है, एक खत बुआ जी को लिखेगी, एक ससुराल में, एक बड़ी ननद को. एक खत जून को भी लिखना होगा, ऐसा खत जिसे पढकर वह जवाब दिए बिना न रह सके. आज हेमामालिनी के संपादन में छपी पत्रिका ‘मेरी सहेली’ पढ़ी, निहायत ही बचकाना पत्रिका है फ़िल्मी स्टाइल. समय वही है साढ़े दस, शायद स्वप्न में जून को देखे.

  आज शाम को माँ की परिचित एक प्रौढ़ महिला का यहीं कालोनी की सड़क पर टहलते समय स्कूटर से एक्सीडेंट हो गया. उन्हें सिर में काफी चोट आयी है. वे लोग शाम को ही उनके घर गए, माँ तो बहुत देर बाद आयीं, लेकिन तब तक वह अस्पताल से लौटी नहीं थी. वक्त कैसे-कैसे रंग दिखाता है, यहाँ की खुली सड़कों पर जहां कोई ट्रैफिक नहीं, कोई भीड़भाड़ नहीं, यूँ ही खड़े-खड़े स्कूटर से एक्सीडेंट हो गया. आज सुबह पिता ने उसे एक पत्र दिखाया जिसमें खर्चे का ब्यौरा था, जितना अनुमान था उससे कहीं ज्यादा, उसने कहा खत भेजने की जरूरत नहीं है, वे आ ही रहे हैं. शायद उन्हें अच्छा न लगा हो, पर जाहिर नहीं होने दिया. उसे ऐसा कहना चाहिए था या नहीं, पर इतना जरूर है, कि जून परेशान हो जाते, एकाएक इतना ज्यादा बिल देखकर, पता तो चलना ही है, उसने सोचा, पर अभी वह वहाँ अकेले हैं. आज घर में काफी काम हुआ. भाई ने कहा है कल वह उन्हें “जुरासिक पार्क” फिल्म दिखाने ले जायेगा.




Tuesday, April 16, 2013

क्रोशिये की लेस



आज जून का दूसरा पत्र मिला, उसके पत्र कितने संयत हैं मगर कितने नेह भरे. उसकी इसी गंभीरता पर तो वह फ़िदा है. वह अपनी बात अच्छे शब्दों में कितनी आसानी से कह जाते हैं. नन्हा अब ठीक है पर कमजोरी का थोड़ा असर अभी बाकी है, ईश्वर ने चाहा तो कल वह बिलकुल स्वस्थ होगा. वह उसके लिए कैल्शियम टैबलेट्स लायी है और कल से दिन में तीन बार बायोकेमिक दवा भी देनी है. आज उसने भी पापा को एक पत्र लिखा है. आज मकान में मीटर भी लग गया व बिजली भी आ गयी है. दो बल्ब वहाँ लगवा दिए हैं, अब काम शुरू हो गया है तो मई के मध्य तक खत्म भी हो जायेगा फिर बाकी की तैयारी रह जायेगी. माँ ने उसे व नन्हे को उपहार में वस्त्र दिए हैं. 

  आज जून का फोन भाई के यहाँ आया पर उससे बात नहीं हो सकी, उसका समाचार मिल गया, मन को राहत हुई. यहाँ का फोन सुबह से डेड है, पता नहीं कल तक ठीक भी होगा या नहीं. अगर जल्दी ही ठीक हो जाये और तब वे उससे बात कर  सकेंगे. उसको आने में पूरा एक महीना रह गया है. उसने सोचा ..पूरा एक महीना...कैसे बीतेगा गर्मी का यह एक महीना. पिताजी ममेरे भाई की पत्नी की क्रिया में शामिल होने एक-दो दिन के लिए दूसरे शहर गए हैं, एक दिन उनके न रहने से कितनी मुश्किलों का सामना उन्हें करना पड़ा. दो बार माँ को नूना और नन्हे को छोड़कर जाना पड़ा, इतने बड़े घर में अकेले रहना अच्छा नहीं लग रहा था. माँ कड़कती धूप में बिजली वाले को बुलाकर लायीं, यह काम ठेकेदार का था पर वह हमेशा की तरह गायब था. शाम को भाई-भाभी आए, उसने क्रोशिये का गोल रुमाल भाभी को दिया, उन्हें पसंद आया, उसे अच्छा लगा. यू पिन तथा क्रोशिये से रेशमी धागे द्वारा लेस बनाना, ये दोनों काम उसे माँ से सीखने हैं. घिसाई करने से थोड़ा सा साफ फर्श निकल आया है, अच्छा लग रहा है.

   फोन अभी तक ठीक नहीं हुआ, उसने सोचा, शायद आज भी जून ने उससे बात करने प्रयत्न किया हो, जरूर ही किया होगा. आज बिजली ने बहुत परेशान किया, पूरी शाम अँधेरे में बीती, नन्हा शाम को दौड़ते समय गिर गया उसके बाएं घुटने में मामूली खरोंच आ गयी है. शाम को भाई के मकान मालिक उनका निर्माणाधीन मकान देखने आये, बढाई के काम की आलोचना कर रहे थे. शाम को उसे जून की बहुत कमी महसूस हो रही थी, उसे उनके साथ ही आना चाहिए थे, वह उससे कहे तो क्या आ पायेंगे, या जब दिल्ली आएं तो कुछ दिन के लिए ही यहाँ आ जायें. काम करवाने का भी एक ढंग होता है, वैसे तो देर-सवेर सभी काम हो ही जायेगा, पर वक्त पर पूरा हो जाये यह तो जून भी चाहेंगे. हजार तरह की मुश्किलें पेश आती हैं मकान बनवाने में, जो वे वहाँ बैठे-बैठे महसूस ही नहीं कर सकते थे. सबसे बड़ी समस्या अब जो आ रही है वह है बिजली, मीटर शायद ठीक से नहीं लगा है, और सिर्फ एक फेज में होने के कारण सुबह दिक्कत पेश आई. अब देखें कल का सूरज अपने साथ क्या लेकर आता है.  



Wednesday, February 29, 2012

अकेलापन


कल शनिवार था वे शाम को एक जन्मदिन पार्टी में गए. सितम्बर का आखिरी दिन. आज जून को उम्मीद थी कि पे स्लिप मिल जायेगी, पर नहीं मिली, ज्यादातर एक दो दिन पहले ही आ जाती है, उन्हें बहुत इंतजार था. एक शादी में गिफ्ट देना था, फिर उसके मित्रों ने किसी तरह प्रबंध किया और सबने मिलकर एक उपहार दिया. उन्होंने सोचा कि भविष्य में इस तरह खर्च करना है कि वक्त जरूरत पड़ने पर कोई कमी न महसूस हो.
जून आज बाहर गया है. दोपहर नूना ने क्रोशिये का काम आगे बढ़ाया. कुछ देर किताब पढ़ी. उस का मन नहीं लग रहा. उनके घर के सामने एक नौकरीपेशा उड़िया लड़की रहती है. बहुत खुशमिजाज है. साथ में एक असमिया लड़की भी है जो इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है. कुछ देर के लिये उनके घर गयी. घर में फोन भी नहीं है, पास में ही किसी के घर पर जून फोन करके उससे बात करता है. सुबह का खाना बच गया है, उसने सोचा कुछ बनाये या उसी से काम चला ले, यूँ बासी भोजन उसे जरा नहीं भाता, दस-बारह घंटे ही हुए हैं अकेले रहते और उसे लग रहा है जून को कई दिनों से नहीं देखा.