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Saturday, May 3, 2014

पका हुआ फल


It is a hot, humid afternoon and her mind is full of that book, book of laughter, forgetfulness, letters, passion, love and so many things. Writer opens the hearts of people and looks the nakedness. He is very right when says that life is a battle of capturing other’s ear, no one wants to listen, everybody wants to say, and when someone says something, response will be, that is right…in fact  I mean …and then other begins his own story. Then there are laughter of two types one is innocent, full of joy and other is over a joke. But most important is love, love among all human beings and love between two souls, two minds, which share so many thoughts, ideas, smiles and tears also, Joy of knowing other person and having complete faith in him ! But now she doesn't know why her heart is empty with a sudden void and feeling of remorse perhaps it is filled… her limbs are listless and she is feeling lightness. Is it guilt, may be because since morning she has not done something meaningful except reading that book.

वे ऐसी कौन सी जंजीरें हैं जिन्होंने उस रोका हुआ है, वह क्यों हर वक्त अपराध भावना से ग्रस्त रहती है, क्यों नहीं खुल के जी पाती, क्यों हर पल उसे एक ऐसे दिन का इंतजार रहता है जब सब कुछ ठीक हो जायेगा, जब दिन बेहतर होंगे, आखिर आज में ऐसी कौन सी कमी है, उसके जीवन में ऐसा कौन सा अभाव है जो उसे सालता रहता है. उसके मन में बचपन की कई कटु यादें हैं जिन्हें वह भुलाना चाहती है, फिर युवावस्था की कुछ बातें जिन्हें वह याद करना नहीं चाहती, पर उन बातों का आज से क्या लेना-देना, जो बीत गया है वह मृत है और जो आज है वह  जीवित है. आज उसके सामने कौन-कौन से ऐसे उद्देश्य हैं, लक्ष्य हैं जिनके प्रति उसे समर्पित होना है, जो उसे पूरे करने हैं. घर को संवारना, सम्भालना तथा जून और नन्हे की देखभाल करना स्वयं के स्वास्थ्य का न केवल शारीरिक, मानसिक बल्कि आध्यात्मिक भी, इसके अतिरिक्त संगीत जो उसे शांति प्रदान करता है, उनका बगीचा और लेखन, किताबें भी जो प्रेरित तो करती हैं नये-नये आयाम भी दिखाती हैं. जीवन मात्र उतना ही नहीं है जितना दिखाई देता है, बल्कि उससे कहीं आगे है, और यह उसका सौभाग्य है कि उसके पास इसे अनुभव करने का, उसे जानने का समय और क्षमता है. वह इस ब्रह्मांड में अकेली नहीं है सो घबराने की कोई बात नहीं है, वह भी इस विशाल ब्रह्मांड का एक भाग है, सबके साथ है, उस शक्ति की निगाह में है और जिन्दगी के जितने बरस शेष हैं बिना किसी पूर्वाग्रह के बिना किसी अपराध भावना के बिताएगी. सचमुच जीवन मात्र उतना नहीं है जितना दिखाई देता है..लगता है कि संशय के बादल छंट रहे हैं और विश्वास और आशा का सूर्योदय हो रहा है.


Last evening they went to club to join the technical forum, the topic was ‘The holistic approach to healing with awareness’, speaker was MR Subhash Gogte a Maharashtrian,  who is preaching Yoga since last 30 years. Jun already have attended the workshop organized by his institution “Atnha Pragya” . He told so many informative and knowledgeable things  but she liked the most was the explanation of death as a natural and essential phenomenon, when a fruit ripens it detaches itself from the main stem and drops, it spreads fragrance, not disease, similarly we human beings as we grow older should be more mature, more perfect and then when time comes should drop from the tree of life as a ripe fruit effortlessly and easily. Death and old age are as natural as our childhood and youth, and we the observer is same then what is the cause of fear, the same Atma, remains with us throughout our journey and will remain  there after death also. 

Friday, March 22, 2013

अखरोट और मूंगफली




आज तो जून देहली में होंगे, कल वापस आना है, अब बहुत इंतजार हो गया, उसने सोचा, जल्दी से वे आ जाएँ, आज शाम से ही मन कैसा हो रहा है, इतने दिन गुजर गए पर अब कुछ घंटे गुजारना इतना मुश्किल लग रहा है. सुबह देर से उठे, नन्हे की छुट्टी थी, आज मूली के परांठे बनाये, जाने से पहले ढेर सारी सब्जियों के साथ एक किलो मूली भी रख गए थे वह, पर दो अभी भी शेष हैं. दोपहर को चने की दाल और सेम-आलू की सब्जी, नन्हे को पसंद है चने की दाल, इतने दिनों में तीन बार बनाई है और अब मन करता है तीन महीने तक नाम न ले. आलू खाते खाते भी...दरअसल बात यह है कि अब उसके बिना कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा, वैसे भी वह किस कदर ध्यान रखते थे उसका. दोपहर भर “डॉक्टरस्” पढ़ती रही, फिर गुजराती फिल्म देखी, शाम को भ्रमण और फिर स्क्रैम्बल, और अब जून के पास है या कहें वह उसके पास है. नन्हे ने उत्साह दिला-दिला कर आलू फ्राई तथा तीन परांठे बनवाये दोनों के लिए. अब वह ब्रश करने गया है, दोपहर से बल्कि सुबह से ही उसका मन कुछ क्रिएटिव वर्क करने का है, दोपहर को दफ्ती की एक मेज बनाई, कुछ उड़ाना चाहता है वह, लिफाफे में आग लगाकर उसे उड़ाना हो या गुब्बारा या पतंग, पर कुछ भी तो नहीं दे सकी वह उसे, अब जून ही आकर देखेंगे और उसके कई सवाल भी इकट्ठे हो गए हैं.

  ओह !...और आज जून ने उसे कितना रुलाया, सुबह जब उसके बॉस की पत्नी ने फोन किया तो वह एकदम से इतनी पजल्ड हो गयी कि...जैसे कोई फूले हुए गुब्बारे में से पिन चुभाकर यकायक सारी हवा निकाल दे या ऐसा कि मंजिल पर पहुँच कर पता चले, मंजिल तो अभी और दूर है. नतीजा आँसू.. नन्हा उसे समझा रहा था, उसने जब कहा, पापा भी बस तुम्हारे....तो बोला क्या किया है पापा ने ? पर उसे तो जून जानते ही हैं, क्या-क्या सोचने लगी कि उसे उनकी फ़िक्र नहीं है, कि वह अपना वायदा भूल गए हैं, याद नहीं रहा कि जाते  समय उसने कहा था, पन्द्रह को पक्का आ जाना. वह सोचने लगी कि जानबूझकर दिल्ली में रुक गए होंगे...दोपहर भर सिर में दर्द रहा, आँखों पर जून का रुमाल रखा, दवा ली. शाम को फिर फोन आया कि वह कोलकाता पहुँच चुके हैं, यानि उसे वह सब नहीं सोचना चाहिए था...सुबह उसकी असमिया सखी अपने बेटे को छोड़ने आई थी, पति के साथ तिनसुकिया जा रही थी, उन्होंने भी कहा, फ्लाईट मिस हो गयी होगी या टिकट कन्फर्म नहीं होगी. तो जून जानबूझकर नहीं रुके बल्कि रुकना पड़ा, उसे बहुत अफ़सोस हुआ अपनी सोच पर. लेकिन सुबह फोन पर पूरी बात बता दी होती तो...पर अब वह उसे करीब ही लग रहे हैं पहले की तुलना में...कोलकाता तो यहाँ से नजदीक है न ? नन्हे को शाम से जुकाम हो गया है, इतने दिनों तक उसे एक छींक भी नहीं आई पर आज दोनों..शाम को उसने “सूरज का सातवाँ घोड़ा” देखी, अच्छी है, शायद जून ने भी देखी हो, एक रात उन्हें और सपनों में मिलना होगा.

  सोमवार सुबह, इस समय उसका हृदय स्नेह से लबालब भर गया है जैसे बादलों में से झाँकते हुए सूर्य ने धरती को रोशनी से भर दिया हो. कल शाम जब वह आया तो उनका मिलना कितना शांत था, कल्पना में उसका स्वागत जिस तरह किया था उसे बिलकुल अलग...और नन्हा कितना खुश था, उत्साह से भरा-भरा..जून ने उन दोनों को हमेशा ही इतनी खुशी दी है ! अभी-अभी वह दफ्तर गए हैं, कार में बैठकर सिर हिलाकर विदा कहना, उसे अंदर तक छू गया और अंदर आकर वह यह डायरी खोलकर बैठ गयी है, उसकी अलमारी खुली है..दूसरे कमरों में भी उसके कल लाए सामान इधर-उधर बिखरे हैं..उसके कारण घर कितना भरा-भरा लग रहा है..एक-एक सामान सहेजते हुए वह याद आते रहेंगे...आते ही रहेंगे. कल रात को उसने पिछले कई दिनों की तरह पन्नों पर अपने दिल का हाल नहीं लिखा बल्कि जून के मन पर..प्रेम में यह कैसा जादू है जो उन दोनों को इतने करीब ले आया है..वे बारह-तेरह दिन बाद मिले पर भीतर कैसी सिहरन पैदा हो रही थी जैसे वे पहली बार मिले हों. कल सुबह और रविवारों की तरह ही थी, दोपहर को टीवी पर फिल्म देखी, उन की प्रतीक्षा में समय बिताना आसान हो गया था..शाम अभी हुई भी नहीं थी शायद साढ़े तीन बजे होंगे कि आ गए. इतने सारे उपहारों की साथ- अंगूर, अनार, रसभरी, दो तरह की गजक, खजूर, तिल की मीठा, मूंगफली, अखरोट, चिरौंजी, चने, उसके लिए गाउन का कपड़ा, नन्हे के लिए दस्ताने, चप्पल और न जाने क्या-क्या...पर अपने लिए तो उसने कुछ नहीं लिया न, और अभी नाश्ता करते समय उनका पीछे हुए खर्चे का हिसाब जानना भी कितना संयत था, डिप्लोमैटिक, वह हैं ही ऐसे. वह उसे सदा प्रेम करेगी..सदा...




Saturday, January 19, 2013

कभी खुशी कभी गम



अयोध्या में निर्माण तोड़ने पर लोकसभा में हंगामा, यूपी सरकार को चेतावनी..वही राममंदिर बाबरी मस्जिद विवाद. कल बहुत दिनों के बाद उन्होंने घर के कोर्ट में बैडमिंटन खेला और सांध्य भ्रमण को भी गए. मौसम सुधरा था पर रात इतनी तेज वर्षा हुई कि लॉन की हालत देखी नहीं जाती, माली भी नहीं आया है, सुबह तीन बजे के करीब जोरों का तूफान आया था और शायद ओले भी गिरे थे, आवाज से ऐसा लग रहा था और इस समय भी सूर्य देव आंखमिचौली खेल रहे हैं. सुबह उठते ही उसे गले में हल्की चुभन महसूस हुई, लिपटन का टी बैग शायद कुछ राहत दे.

उल्फा नेता परेश बरुआ हथियार समर्पण को तैयार नहीं. कल शाम लगभग साढ़े पांच बजे  फोन आया और साढ़े सात बजे जब वे क्लब से वापस आए, उनकी कार वे लोग ले गए. एक ही लड़का था, उम्र भी कुछ खास नहीं थी, उसने गुस्से में या आवेश में कुछ बातें कह दीं, जो उसे नागवार गुजरीं, और उसे लगता है कि जल्दी वह कार वापस नहीं करेगा. कल उस समय से कितनी ही बार मन में वे सारी बातें स्पष्ट हो आयी हैं, कितना दूसरी बातों में मन लगाये पर ध्यान उसी ओर चला जाता है, अब जब तक कार वापस नहीं आ जाती, ऐसा ही होगा.

आज तीसरा दिन हो गया. कल दिन भर आँखें दरवाजे पर लगी रहीं और कान आहटों को पहचानने में, पर कार वापस नहीं आयी. अब तो इंतजार करना छोड़ दिया है, आ जायेगी अपने आप. जून के चेहरे से हँसी ही गायब हो गयी है, आँखों में एक अजीब सा सन्नाटा. कुछ दिन पहले बल्कि पिछले हफ्ते आज ही के दिन तो वे कितने खुश थे, होली थी उस दिन. ठीक ही कहा है किसी ने-
मुरझा जाती हैं कुछ कलियाँ, सारी कलियाँ कब खिलती हैं?
इस दुनिया में सारी की सारी खुशियाँ किसको मिलती हैं ?

एक पल खुशी का तो दूसरा उदासी भरा, उसकी आँखें किसी भी पल बरसने को तैयार हैं, अंदर ही अंदर कोई घुटन सी खाए जा रही है जैसे, पर जानती है रोने से कुछ होने वाला नहीं है, इसी घुटन को अपनी हिम्मत बनानी है. ऐसे में जिन्हें वे अपना हित चिंतक समझते हैं तथाकथित मित्र गण भी कैसे चुपचाप बैठ जाते हैं..जैसे उनसे कोई परिचय ही न हो. वह ही मूर्ख है जो...पर यह सब लिखकर वह कोई अच्छा कार्य तो नहीं कर रही. इस दुनिया की यही रीत है हरेक को रोना अकेले ही पड़ता है, जबकि साथ हँसने के लिए कई साथी मिल जाते हैं.

कल रात आठ बजे कार मिल गयी. आज मन हल्का है और स्वास्थ्य भी ठीक है. कल कितनी कमजोरी महसूस कर रही थी, जून का भी यही हाल था कल शाम तक. अब सब पूर्ववत् हो गया है, हाँ वे कुछ और करीब आ गए हैं, दुःख व्यक्तियों को जोड़ता है और असली-नकली दोस्तों की पहचान भी कराता है. वे थोड़े गम्भीर भी हो गए हैं इस घटना के बाद..पता नहीं कितने दिनों तक.



Friday, March 9, 2012

फोन पर मुलाकात


शाम हो गयी है, नूना को उसके फोन का इंतजार है, जो सात से आठ बजे के बीच कभी भी आ  सकता है. पर फोन पर वह कुछ भी बात नहीं कर पाती, सिर्फ सुनती है. अभी तीन दिन और हैं जून को वापस आने में. आज सुबह से वह घर पर ही थी. सामने वाली उड़िया लड़की घर गयी है और दूसरी काफ़ी देर से घर आयी है. बाहर अँधेरा हो गया है. सुबह का भोजन फिर बच गया है. एक किताब पढ़ी, The Promise अच्छी प्रेम कहानी है, उसने सोचा जून के आने पर उसे सुनाएगी. आज एक खत भी आया है घर से.
कल शाम जून का फोन नहीं आया, काफ़ी इंतजार के बाद उसने कुछ नहीं किया, भोजन भी वैसे ही पड़ा रहा. बाद में पता चला कि फोन किया था पर जिनके यहाँ किया था वे ही बता नहीं पाए थे. आज शाम वह बाजार गयी, वे तीन थीं, कार आ गयी थी, उसने खीरा व कोल(केले) खरीदे. दोपहर को एक तेलुगु परिचिता के यहाँ गयी. इस समय उसके सर में हल्का दर्द हो रहा है, शायद दिन भर आराम नहीं किया इसलिए या कि मार्केट से वापस वे पैदल आये इसलिए. उसने सोचा जून के न रहने से ही सारी समस्या है. उसकी दिनचर्या भी यहाँ की तरह नियमित नहीं रह पाती होगी.
आज उन्होंने फोन पर आराम से बात की. नूना बहुत खुश है. जून ने बताया काम बहुत है, दिन भर व्यस्त रहना होता है, तो उसने कहा, कोई बात नहीं, वह तो कभी काम से घबराता नहीं, जिस काम के लिये वह गया है बस उसे शीघ्र ही पूरा करके लौट आये. दोपहर को वही तेलुगु परिचिता आ गयी थीं, कुछ देर लूडो खेला फिर रमी भी, कुछ समय पंख लगा के उड़ गया. आज रात भी वह फलाहार करने वाली है, पहले खीरा, फिर कुछ देर बाद केला व दूध. सुबह तोरई की सब्जी व रोटी बनायी थी पर रात को कुछ बनाने का मन नहीं होता.