Thursday, May 8, 2014

पेपर मैशे- एक सुंदर कला


Today when they got up in the morning at 5 am, it was quite cold, put sweaters first time in this winter but now weather is sunny and warm. Nanha, was not well so did not go to school, is doing his remaining home work. Last evening he started writing a ‘story’. Jun asked about his health on phone and told her that he had 99  fever  he had checked it in the morning but did not tell them to avoid unnecessary tension. Nanha is feeling normal at this moment, she took breakfast with him, thought they  should be very careful in this changing weather. She did not write letters this week, in fact not felt close enough to write from dil se… one day pen will automatically write, mind will be responsive and then she will feel like saying something to someone.

पिछले तीन दिन यूँ ही बीते गये, घर में पेंटिंग का काम चल रहा था, शनिवार को काम पूरा नहीं हुआ, वे कारीगर का इंतजार करते रहे. शाम को एक मित्र परिवार आया. इतवार को गमलों की सफाई व रंग रोगन करवाया. आज सुबह पड़ोसिन से मिलने गयी, उसके पैर में मोच आ गयी थी, जहाँ वे लोग गये थे, संगमरमर की सीढ़ियों से पैर फिसल गया, अब वह काफी ठीक है. कल उसने आंवले का मुरब्बा बनाया, जो प्रक्रिया पिछले पांच दिन पहले शुरू की थी, कल पूर्ण हुई. दो दिन के लिए चने के पानी में रखना, फिर अच्छी तरह धो कर उन्हें कांटे से गोदकर चौबीस घंटों के लिए फिटकरी के पानी में, फिर उसी पानी में उबालकर चाशनी में डालना. उन पंजाबी दीदी ने एक किताब दी थी जिसमें पढ़कर उसने यह विधि सीखी थी. उनके लॉन में लगे दो पेड़ों पर अभी सैकड़ों आंवले लगे हैं. पिछले तीन-चार दिनों से वह स्वयं में थोड़ा बदलाव महसूस कर रही है,  अपने आप के प्रति जैसे ज्यादा सजग हो गयी है.

पिछले कुछ दिनों से वह अपने-आप में नहीं है, हर वक्त एक उल्लास सा छाया रहता है, जैसे आँखों के सामने कोई रेशमी पर्दा झिलमिला रहा हो. अपना अस्त्तित्व अर्थपूर्ण लगने लगा है. ध्यान में मन नहीं लगता पर हर वक्त गुनगुनाने का सा मूड रहता है, उसने दो गीत अपने आप सीखे, टीवी पर जब छोटे-छोटे बच्चों को इतने विश्वास से गाते हुए देखती है तो बहुत अच्छा लगता है. संगीत किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाता है. आज भी मौसम खिला-खिला है, धूप अच्छी लगने लगी है, अब कमरे में ठंड लगती है, यानि सर्दियां आ गयीं. कल जून मोरान गये थे वापसी में ऊन और कई फल लाये, पैंजी के फूलों के पौधों के लिए खर्च करना उन्हें थोड़ा ज्यादा लगा जबकि फलों पर खर्च करना नहीं, एक उनके तन को पुष्ट करेंगे और दूसरे मन को ख़ुशी देंगे. नन्हा कल स्कूल से पेपर रिसाईकलिंग का तरीका सीख कर आया था, उसके पास शाम को बनाने का समय नहीं था सो सुबह वही बनाती रही, नैनी के बेटे ने भी सहायता की, पर पेपर बहुत स्टिफ बन गया है, पापड़ जैसा, पता नहीं उसकी टीचर क्या कहें, शायद हँसे, revive शायद कुछ ज्यादा पड़ गया, नन्हा स्कूल से आकर प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा. उसने स्कूल में होने वाले skit में भाग लिया है, एक कहानी भी लिख के दी है. इस स्कूल में उसे अच्छा मंच मिला है.

आजकल जब वे उठते हैं, बाहर अंधकार छाया रहता है, सूर्य उनके जगने के बाद ही आकाश में ऊपर चढ़ता है पर वे भीतर अपने कामों में व्यस्त रहते हैं सो उसकी लालिमा और आकाश में उसका ऊपर उठना देख नहीं पाते. सर्दियों में काम की गति भी कुछ कम हो जाती है. जब नन्हा स्कूल चला जाता है तब जून और वह दस मिनट के लिए गाइडेड मैडिटेशन के लिए बैठते हैं और उगते हुए सूर्य को कल्पना में देखते हैं. वह हिन्दी पुस्तकालय से एक किताब लायी है, ‘हिंदी भाषा की समस्या’, हिंदी सारे देश में बोली व समझी जाती है फिर भी इसे राष्ट्र भाषा तो दूर राज भाषा का दर्जा भी नहीं मिल पाया है, लोग इसे बोलने में अपनी हेठी समझते हैं. उसने अभी किताब की भूमिका ही पढ़ी है.  






Tuesday, May 6, 2014

एक रोमांचक फिल्म- एयर फ़ोर्स


Roof repairing work is going on since morning and creating loud noises. There telephone is still ie out of order. Weather is sunny and she has done most of the morning jobs. Got up early in the morning, first thing was jun‘s lovely good morning and then she saw a pitch black bird perhaps koel in their backyard, she was sitting on the cloth line, she flew after few moments, beautiful it was ! today she heard Mirza Galib CD but due to Nanha’s screen saver could not continue till end. Yesterday evening she again spoke harshly with jun and nanha but after that felt her mistake, today she will be aware every moment what, whom and why she is speaking. Now she has some time to solve the crossword in English magazine.

Today is Assam bandh for 24 hours called by All Assam Student Union, it means they have to sit at home whole time, of course they can go for a walk in the evening. Jun said, he will make sindhi curry today. Nanha is bit upset because he could not see “Disney Hour”

उनकी वापसी की टिकट भी रिजर्व हो गयी है. कल जून ने घर फोन करके पता किया. उसने सोचा, अब वहाँ सभी को उनके आने का इंतजार होगा. एक महीना दस दिन बाद उनकी उड़ीसा यात्रा का शुभारम्भ होगा. कल शाम एक मित्र परिवार डिनर के लिए आया, उन्होंने नये सोफे की तारीफ बहुत संयत तरीके से की. अगले बुधवार को उसकी एक सखी का जन्मदिन है, जिसे अब स्कूल में परेशानी नहीं होती, उसका आत्मविश्वास देखकर उसे भी काम करने का मन होता है, एक थोड़ी सी झिझक ही तो उसे रोक रही है. उसे नये साल में निर्णय ले लेना चाहिए नई जिन्दगी का. अभी भी बहुत से काम करने शेष हैं. हिंदी का कार्य अधूरा रह गया है, उसे भी पूरा करना है. नई कविताएँ लिखनी हैं और एक सतत प्रयास भी स्वयं को एक सार्थक जिन्दगी देने का !

सुबह किसी छोटी सी लडकी ने फोन पर उसे happy birth day कहा और फोन कट गया, आज न तो उसका जन्मदिन है और न ही पहले किसी नन्ही लडकी ने उसे विश ही किया है, जरूर वह फोन किसी और के लिए होगा पर उस वक्त तो उसके होठों पर मुस्कराहट दे ही गया. नन्हे को सुबह जब देर हो रही थी तो स्वयं ही कहने लगा कल से जल्दी उठेगा. कल उसको कुछ बातें जिन्दगी के बारे में समझायीं, जो उसके बचपन में किसी ने कहीं हों उसे याद नहीं पड़ता. कहकर गया है उसके स्कूल में फिजिक्स प्रोजेक्ट वर्क कराया जा सकता है शायद वह देर से आये. बरामदे में रखी रॉकिंग चेयर पर बैठकर लिखना अच्छा अनुभव है, हवा ताजी मिलती है और हरियाली आँखों को सुकूं देती है, कानों में न जाने कितने पंछियों की आवाजें सुनाई देती हैं, फूलों की सुगंध भी नासापुटों को..उसे याद आया पॉट प्लांट्स को वार्षिक खुराक देने के लिए माली से कहना है. कल वह गुलाबी स्वेटर पूरा हो गया जो वह ननद के होने वाले बच्चे के लिए बना रही थी.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, शनिवार को जून के एक मित्र दोपहर के भोजन पर आने वाले थे, सारी सुबह उसी की तैयारी में बीती, दोपहर को टीवी पर क्रिकेट मैच और शाम को क्लब में ‘असमिया’ फिल्म Adajaya, आजकल क्लब में साल में एक बार होने वाला ‘फिल्म समारोह’ चल रहा है. इतवार की शाम भी मेहमान आये, सुबह तो साप्ताहिक सफाई में निकल जाती है. गोभी के पौधों के लिए कागज की टोपियाँ भी बनायीं.

कल शाम क्लब में AIR FORCE देखी, it was a fantastic फिल्म. आज वहाँ ‘चाची चार सौ बीस’ दिखाई जाएगी. आज सुबह भी जून के ‘शुभ प्रभात’ ने उसे उठाया, नन्हे को भी वही उठाते हैं और आजकल दोनों कमरों की नेट उतारना, रजाई रखना भी उन्होंने अपने जिम्मे ले लिया है. उसे नन्हे के लिए टिफिन और सबके लिए नाश्ता बनाने के अलावा कोई काम नहीं होता, यहाँ तक कि सुबह की चाय भी अक्सर वही बना लेते हैं.

कल गुरुनानक जयंती के उपलक्ष में अवकाश था, जून के दफ्तर में भी और नन्हे के स्कूल में भी. दोपहर को वे दोनों कम्प्यूटर की reformatting करवाने में व्यस्त थे, उसने वह टोपी व मोजा पूरा किया, आज नया set शुरू करना है, उस दिन पिता ने फोन पर बताया  कि सासुमा के लिए भी हाफ स्वेटर बनाना है, जिसके लिए ऊन उन्हें तिनसुकिया से मंगवानी होगी. शाम को एक जन्मदिन में गये, एक सखी की बातों से उसका एक नया ही पक्ष देखने को मिला, she is rather bold but..इस तरह की बातें अपने तक ही रखना ठीक है. खैर, आज नैनी के हाथ में चोट के कारण डस्टिंग व सब्जी काटने के काम भी उसके जिम्मे आ गये, काम निपटाकर उसे कुछ भूख का अहसास हुआ तो ख्याल आया, ओवन में मूंगफली भूननी है, नहीं तो जैसा यहाँ का मौसम है कुछ ही दिनों में खराब हो जाएगी. सुबह वे उठे तो काफी ठंड थी, जून ने सभी के लिए स्वेटर निकाल दिए, लगता है सर्दियों के कपड़े निकालने का वक्त आ ही गया है. पिछले हफ्ते कोई पत्र नहीं आया, उसे ख्याल आया,  उनके घर जाने की बात सुनकर किसी ने पत्र द्वारा कुछ नहीं कहा, फिर सोचा, कि दुनिया में सब, सब कुछ अपने ही लिए तो करते हैं न, याज्ञवल्क्य ने मैत्रेयी को हजारों साल पूर्व ही यह बता दिया था, वे भी तो अपनी ख़ुशी से जा रहे हैं न !




नया सोफ़ा और लैम्प शेड


...और दीवाली का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया, आज सब ओर कैसी शांति है, जून दफ्तर गये हैं और नन्हा स्कूल, उसका दिन भी अपने पुराने क्रम में गुजर रहा है. पहले उसकी छात्रा आई फिर कपड़े धोने थे. संगीत, लंच और दोपहर को हिंदी क्लास. रात्रि स्वप्नों में रिश्तेदारों से मिलती रही, अभी अपने लोग, दीदी भी थीं, उनका गला खराब था, उस दिन फोन पर बात की तो थोड़ा खांस रही थीं. आज उसने आलू व कसूरी मेथी की सब्जी बनाई है, गुलाब जामुन अभी भी बचे हैं. बगीचे में जाकर देखा तो बीज अंकुरित हो गये हैं पर साथ ही खर-पतवार भी निकल आये हैं, जिन्हें साफ करना जरूरी है. उसने plumber को बुलाकर कहा जो उनके बेडरूम का फ्लश ठीक करके गया था और लौट रहा था कि पानी नहीं चढ़ रहा है, पर उसने आते ही चलाकर दिखाया and she felt like a fool and last evening when one family came late when they were least expecting them she could not talk properly, she thought she can not adjust in odd situations, she even does not try, finds easy always known things and situations, but life is full of new events, her music teacher gave syllabus, may be next year she should appear in exam.

अज टीवी पर एक शायर का इंटरव्यू सुना तो कुछ अधूरी कविताएँ पूरी कीं, लिखने वालों को शायरों, कवियों से काफी प्रेरणा मिलती है, लगता है कोई जाना-पहचाना मिल गया, दिल की कैफियत तो हर जगह एक सी होती है. शायर का दिल, चाहे वह कहीं का भी हो, एक सा धडकता है, उसे हर उस शै से प्यार होता है, जिसमें खलूस हो, जो दुनिया को बेहतर बनाने में मददगार हो. प्यार तो दुनिया को जोड़े रखने का बहुत बड़ा साधन है, कुदरत से भी और इंसानों से भी, जानवरों, पेड़ों से भी. कल लाइब्रेरी से नई किताबें लायी है, स्वामी योगानन्द जी की भी एक किताब है, ध्यान में मदद मिलेगी. उनके लम्बे बाल देखकर उसने भी बाल न कटवाना तय किया है, और धोने के लिए शैम्पू की जगह बेसन व दही से धोएगी. अभी जून का फोन आया, उन्हें दफ्तर में रहकर भी घर का ख्याल बना रहता है, उसने सोचा, वह यदि काम करे तो पूरा ध्यान बाहर ही रहेगा, उतने वक्त तक घर को भूली रहेगी, वह दो तरफ ध्यान नहीं बंटा सकती सिवाय उस वक्त के जब ध्यान कर रही हो, तब तो मन हजार दिशाओं  में जाता है.

अभी-अभी घर वापस आई है, कल music class नहीं जा पाई थी सो आज गयी थी, टीचर ने गाउन पहना हुआ था जैसे वह क्लास लेने के मूड में न हों, हमेशा वह साड़ी या सूट पहने होती हैं, उसने सोचा शायद वह आराम कर रही थीं, सुबह उन्होंने कहा था अपनी एक मित्र को खाना देने अस्पताल जाना है, शायद देर से आई हों, उसे दो बुलेटिन भी दिए जो उसके घर के पास ही भिजवाने थे. मौसम अच्छा था और वह जल्दी आ गयी थी सो खुद ही देने चली गयी. सभी के दरवाजे बंद थे, अपने-अपने घरों में बंद लोग आराम कर रहे थे, एक के लॉन में गुलाबों के इर्द-गिर्द गड्ढे खुदे हुए थे, सब्जी की क्यारी में पौधे काफी बड़े-बड़े थे और दूसरे का बगीचा बहुत सुंदर था, फूलों से लदे मुसन्डा के पेड़ और गुलदाउदी के ढेर सारे गमले और क्यारियां, उनका घर भी बहुत सुंदर हैं नूना को कुछ वैसी ही कैफियत हुई - भला उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद कैसे ? पर एक पल के लिए. आज हल्की बूंदा-बांदी हो रही है इसलिए छत पर काम करने वाले मजदूर नहीं आए, जिन्होंने कल से काम करना शुरू किया है. कल नये सोफे, कारपेट, लैम्पशेड तथा डोर मैट बिछाने के बाद उनकी बैठक भी बहुत सुंदर लग रही है, उनके मन भी सुंदर बनें !





Monday, May 5, 2014

दीवाली का उजास


Just now she read some shlokas from sixth chapter of ‘Bhagvad Gita’ edited by Dr Radhakrishnan, he was a great scholar, earlier politicians used to be great philosophers  but nowadays they are ordinary people, not all, but most of them are dishonest. She learned, to be aware is most essential and meditation helps in this. Gita also teaches methods of meditation, concentrating our mind on a single object. The wandering unstable mind causes misery. June is practicing yoga regularly, he gets up as soon as the alarm rings, and says very sweet ‘good morning’, he is very calm and controlled these days. Every minute he is busy doing something or reading, understands the power of love and harms of anger. So there mornings have become very very pleasant and before going to office they sit for 15 minutes listening and meditating on the instructions given by that teacher. It soothes the nerves and calms the mind. Then she picks up her harmonium. She thought, should also improve herself and most of all, should accept all her weaknesses and drawbacks, then undo them. According to J Krishnamurti when one goes into her/his foolishness, it goes. Also, one should not be judgmental. Take the things as they come.   


Today, after so many days of hot sun, is wet. Since morning clouds were visible and then around 8, it started raining. Last night she made paper caps for dahlia saplings to protect them from intense rays of sun but today all plants are happy to feel water and cold breeze after weeks. She did some more cleaning, Deepawali is very near, and also talked to some friends.

They are planning to have a get together on Diwali eve, so she rang few of her friends to have special meal.  It will be good to gather and celebrate festival of light with all of them. Tomorrow they will go tnk for shopping and doing air tickets reserved  for dec trip to Bhuvneshvar and puri and then to her home place. Today evening there is a film in the club, and her days are always full of books, computer and writing. One of her friend says, to work is very essential for a woman,  to know herself, to express and to gain confidence but she does not have such intense desire in her, what she will prove, she is what she is and it is nobody’s concern, if she does her duties as a sensible member of society, keeps her surroundings clean, does not harm anyone then it is OK, she is happy in her small world !

Woods are lovely dark and deep
But I have promises to keep
Miles to go before I sleep
And miles to go before I sleep

These lines just came to her mind when she opened this page after cleaning and setting the things of last night party. They celebrated Diwali yesterday, house was looking beautiful, decorated with colored bulbs and candles. Food was also liked by all specially ‘Gulab Jamun’ and chhole, which were  same as they ate in highway . Jun and Nanha both helped her in cooking and arranging table etc. Today they will go to club for fireworks and then take a round trip of town to see the shining lighted homes. Nanha is busy in housekeeping, he dose it very well. Diwali is a festival of love and harmony. When one gives sweets to mali, dhobi, sweeper, dhudhvala, a new bond develops.  She prayed, Let the spirit of Deepwali always remain intact.






Saturday, May 3, 2014

पका हुआ फल


It is a hot, humid afternoon and her mind is full of that book, book of laughter, forgetfulness, letters, passion, love and so many things. Writer opens the hearts of people and looks the nakedness. He is very right when says that life is a battle of capturing other’s ear, no one wants to listen, everybody wants to say, and when someone says something, response will be, that is right…in fact  I mean …and then other begins his own story. Then there are laughter of two types one is innocent, full of joy and other is over a joke. But most important is love, love among all human beings and love between two souls, two minds, which share so many thoughts, ideas, smiles and tears also, Joy of knowing other person and having complete faith in him ! But now she doesn't know why her heart is empty with a sudden void and feeling of remorse perhaps it is filled… her limbs are listless and she is feeling lightness. Is it guilt, may be because since morning she has not done something meaningful except reading that book.

वे ऐसी कौन सी जंजीरें हैं जिन्होंने उस रोका हुआ है, वह क्यों हर वक्त अपराध भावना से ग्रस्त रहती है, क्यों नहीं खुल के जी पाती, क्यों हर पल उसे एक ऐसे दिन का इंतजार रहता है जब सब कुछ ठीक हो जायेगा, जब दिन बेहतर होंगे, आखिर आज में ऐसी कौन सी कमी है, उसके जीवन में ऐसा कौन सा अभाव है जो उसे सालता रहता है. उसके मन में बचपन की कई कटु यादें हैं जिन्हें वह भुलाना चाहती है, फिर युवावस्था की कुछ बातें जिन्हें वह याद करना नहीं चाहती, पर उन बातों का आज से क्या लेना-देना, जो बीत गया है वह मृत है और जो आज है वह  जीवित है. आज उसके सामने कौन-कौन से ऐसे उद्देश्य हैं, लक्ष्य हैं जिनके प्रति उसे समर्पित होना है, जो उसे पूरे करने हैं. घर को संवारना, सम्भालना तथा जून और नन्हे की देखभाल करना स्वयं के स्वास्थ्य का न केवल शारीरिक, मानसिक बल्कि आध्यात्मिक भी, इसके अतिरिक्त संगीत जो उसे शांति प्रदान करता है, उनका बगीचा और लेखन, किताबें भी जो प्रेरित तो करती हैं नये-नये आयाम भी दिखाती हैं. जीवन मात्र उतना ही नहीं है जितना दिखाई देता है, बल्कि उससे कहीं आगे है, और यह उसका सौभाग्य है कि उसके पास इसे अनुभव करने का, उसे जानने का समय और क्षमता है. वह इस ब्रह्मांड में अकेली नहीं है सो घबराने की कोई बात नहीं है, वह भी इस विशाल ब्रह्मांड का एक भाग है, सबके साथ है, उस शक्ति की निगाह में है और जिन्दगी के जितने बरस शेष हैं बिना किसी पूर्वाग्रह के बिना किसी अपराध भावना के बिताएगी. सचमुच जीवन मात्र उतना नहीं है जितना दिखाई देता है..लगता है कि संशय के बादल छंट रहे हैं और विश्वास और आशा का सूर्योदय हो रहा है.


Last evening they went to club to join the technical forum, the topic was ‘The holistic approach to healing with awareness’, speaker was MR Subhash Gogte a Maharashtrian,  who is preaching Yoga since last 30 years. Jun already have attended the workshop organized by his institution “Atnha Pragya” . He told so many informative and knowledgeable things  but she liked the most was the explanation of death as a natural and essential phenomenon, when a fruit ripens it detaches itself from the main stem and drops, it spreads fragrance, not disease, similarly we human beings as we grow older should be more mature, more perfect and then when time comes should drop from the tree of life as a ripe fruit effortlessly and easily. Death and old age are as natural as our childhood and youth, and we the observer is same then what is the cause of fear, the same Atma, remains with us throughout our journey and will remain  there after death also. 

Friday, May 2, 2014

मिलान कुंदेरा की किताब



दिल था कि संभल ही गया
जां थी कि मचल ही गयी
अक्तूबर महीने का प्रथम दिन, लॉन में हरसिंगार में फूल झरने शुरू हो गये हैं. शरद पूर्णिमा भी आने वाली है, जब चाँदनी रात में चावल की खीर बनाकर चाँद की किरणों से सेवित होने के लिए रखी जाती है. वर्षों पहले उसने वाराणसी में शरद पूर्णिमा की महत्ता पर एक प्रवचन सुना था, जिसकी स्मृति अभी तक बनी हुई है, उसमें रास का जिक्र था, राधा-कृष्ण के प्रेम का, गोपियों के मधुर भाव का. आज भी अवकाश है, उसने लंच में कढ़ी-चावल बनाये. कल शाम एक मित्र के यहाँ भोजन किया, वह भी एक सब्जी बनाकर ले गयी थी पर उसे किसी भी वस्तु में स्वाद नहीं आया.
आज दिन भर कुछ नहीं लिखा पर रात्रि भोजन के बाद बाहर वे टहलने गये तो जुगनुओं की झिलमिल ने मन मोह लिया, नन्हे ने पल भर के लिए एक जुगनू को मुट्ठी में बंद कर लिया और अंगुलियों की दरारों से झांकती रोशनी देखकर मुग्ध हो गया. उसे याद आया कभी-कभी कोई जुगनू खिड़की से उनके कमरे में आ जाता है, अँधेरे कमरे में उसकी उपस्थिति स्पष्ट हो जाती है.

बस थोड़ा सा तम हरते, टिमटिम यूँ चमका करते
बागों, खेतों, जंगल, रस्तों को जलकर उजला करते

अद्भुत काया, पंख सुनहरे, नन्हे-नन्हे दीप जलाये
सूने पथ पर साथी बनते, मीलों संग चलते-चलते

कोमल तन, छुअन कोमल, हाथों पर आ कर टिकते
हुई शाम तो दिया जलाकर, रजनी का स्वागत करते

आज उसने टीवी पर एक हास्य कवि सम्मेलन देखा-सुना, एक किताब पढ़ी Milan Kundera की, बहुत अच्छी लग रही है यह किताब. laughter का विश्लेषण लेखक ने बखूबी किया है. हँसी जो कभी-कभी आती ही जाती है, यूँही रूकती ही नहीं, महान लेखक वाकई महान होते हैं. सोचा हँसी पर खुद भी कुछ लिखे-

खन-खन करती और कभी रुनझुन पायल सी
हँसी बिखरती ज्यों नभ से वर्षा होती

अंतर से फूटे ज्यों झरना अधरों से बिखरे ज्यों नगमा
पड़ श्रवणों में मन को भी गुदगुद करती

गूँज किसी निर्दोष हँसी की बन स्मृति दिल में बसती
कभी भिगोती आँखें भी कभी नम करती  

आज भी धूप काफी तेज है, सफाई अभियान में आज वह स्टोर की सफाई करवा रही है, सुबह हल्का व्यायाम किया, पर इतना पसीना आया और श्वास भी फूलने लगी, शायद यह उसका वहम हो या अभी तक.. थक जाने की हद तक काम करने का मन अब नहीं होता. कल शाम एक सखी के यहाँ एक विज्ञापन देखा, पर इंटरव्यू उसी दिन है जिस दिन उन्हें दीवाली की खरीदारी के लिए तिनसुकिया जाना है, दिसम्बर में घूमने जाने के लिए टिकट भी उसी दिन रिजर्व करानी है. सखी ने लक्ष्मी पूजा के दिन हलवा(सूजी का) खिलाया, लगा कि प्रसाद ही खा रहे हैं. घर से ‘सगड़ा’ भी आया है, वे हर वर्ष भेजते हैं या स्वयं देते हैं, उन तीनों को हाथ पर बांधना है और फिर वापस भी भेजना है. उसे याद आया भैयादूज का टीका भी भेजना है.

Today she is alone at home since 7 in the morning. Jun has joined a training programme for three days in T &D so he is not coming for lunch. She got cleaned dining room and gallery then cooked lunch for Nanha and herself, took bath leisourly at 10.30 then read ‘bhagvad gita’ for half an hour, exercised and watched a music based prog on ptv, anchor was shanaz and guest was a modern lady singer of Pakistan. Song was about freedom, which is very essential thing for every person and for her it is a part of life, to spend some time of day with herself doing the things which she likes, so what is the use of 9-4 job for which she will have to give entire morning also at least eight hours of each day for some money, which she does not want. So ‘yes’ to tinsukiya and no to interview.

आज भी जून दोपहर को घर नहीं आये, कल शाम उन्हें घर आते-आते साढ़े पांच हो गये थे, उनकी ट्रेनिंग अच्छी रही, बहुत सी बातें उन्हें भी बतायीं. ध्यान कैसे करते हैं, मन की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में भी, नींद, स्वप्न, तनाव सभी के बारे में. जून को इन सब विषयों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, सो उन्हें अच्छा लगा. कल रात सोने से पहले व सुबह उठकर भी उन्होंने ध्यान किया. जिन्दगी के एक नये पहलू की ओर उनका ध्यान जा रहा है. वह बेहद खुश लग रहे थे तनाव मुक्त, वाकई में संतुष्ट. उसे इसलिए भी अच्छा लगा कि उम्र के साथ-साथ जो गम्भीरता स्वभाव में आती है वह ध्यान से ही आ सकती है. आज उन्हें प्राणायाम सिखाया जायेगा. उसने सुबह सफाई का काम आगे बढ़ाया फिर पीटीवी देखा, एक फिल्म का थोड़ा सा भाग, फिल्म की नायिका इतनी घरेलू सी लगी. मोहसिन खां का इंटरव्यू भी, जो पहले क्रिकेटर थे फिर फिल्मों में चले गये. एक सखी का फोन आया, उसने व्रत रखा है आज करवाचौथ का, जून को उसने कहा तो हमेशा की तरह उन्होंने टाल दिया उसे भी कहाँ इन बचकानी बातों में रूचि है.




  

Tuesday, April 29, 2014

लोक कथाओं का संसार


Health is wealth इस बात का सही मूल्यांकन एक फ्लू का मरीज ही कर सकता है, जब जिन्दगी एक बिस्तर तक ही सीमित रह गयी हो. मुँह का स्वाद इतना कड़वा हो चुका हो कि चाय, दूध, कॉफ़ी और सूप का अंतर ही पता न चले. सुबह कब हुई, दोपहर कब शाम में ढल गयी, जगती-सोती आँखों को इसकी खबर ही न हो. लोगों से मिलना-जिलना दुश्वार हो जाये. कभी यह डर कि उतरा हुआ चेहरा देखकर आईने से ही बैर न हो जाये. आज पांचवा दिन है उसके बुखार का, मुख का स्वाद इस वक्त बेहद कड़वा है, कसैलेपन की हद तक कड़वा. छाती में जैसे कुछ अटका हुआ है. दोपहर को लगा था जैसे इस कैद से छुटकारा मिलने ही वाला है, भगवान करे यह सच ही हो. Indian Folk Tales पिछले दो-तीन दिनों से पढ़ रही है, बड़ी मजेदार कहानियाँ हैं, कोई-कोई तो इतनी अच्छी कि बस.. जून आज सुबह भी कल की तरह जल्दी आ गये थे, उसे दाल का पानी दिया, खाना बनाया और सुबह-सुबह नन्हे को स्कूल भेजा. दुनिया वैसे की वैसे चल रही है बस कमी है तो उसकी शक्ति की जो बुखार ने छीन ली है. कल शाम दीदी का फोन आया वह ठीक से बात कर सकी बिना यह जाहिर किये कि वह अस्वस्थ है. ऐसा क्यों  है, आखिर वह किसी को बताने से क्यों डरती है, क्या इसके पीछे वह उस रात को माँ-पापा के बीच हुई बात है जो उसने सुनी थी. इस तरह की होने के कारण उसे सहना भी पड़ता है अकेले-अकेले, नहीं, जून और नन्हे के साथ !

आज वह ठीक है, कल शाम को बुखार उतर गया था, जून ने जब देखकर बताया कि थर्मामीटर का पारा ९८.६ पर रुका है तो पहले उसे विश्वास ही नहीं हुआ था पर उस वक्त से अब तक फिर नहीं चढ़ा है. स्वाद अभी भी कड़वा है और कमजोरी भी, पर पहले की तुलना में तो यह कुछ भी नहीं. अभी कुछ देर पहले दो सखियों के फोन आये, दोनों को जन्मदिन की पार्टी में पता चला. आज नन्हा घर पर ही था, सुबह खाना बनाने में उसका बड़ा हाथ था. दोपहर को उसके लिए खीरे पर नमक, काली मिर्च, अमचूर और नींबू का रस डालकर लाया कि “अब आपके मुंह का स्वाद बिलकुल ठीक हो जायेगा.” शाम को जून के साथ ‘रिश्ते’ में एक अच्छी कहानी देखी जिसमें हीरो रेस्तरां में सामने बैठी लडकी को देखकर कल्पनाओं में खो जाता है और उसी सपने में उससे शादी भी कर लेता है. जून ने आज मक्खन में आलू-पनीर की सब्जी बनाई है, वह उसे काजू, बिस्किट, दूध खिला-पिला कर जल्दी से ठीक कर देना चाहते हैं. परसों नन्हे के स्कूल का वार्षिक दिवस है, वे दिगबोई जायेंगे. आज उसने एक अंग्रेजी उपन्यास पढ़ना शुरू किया जो वर्षों पहले पढ़ा था. सुबह से एक भी folk tale नहीं पढ़ी.

पिछले दो दिन पूरी तरह आराम किया फिर भी अभी खांसी ठीक नहीं हुई है, सो आज भी घर पर ही रहेगी, संगीत क्लास अगले हफ्ते से ही शुरू होगी. साढ़े आठ बजने को हैं, जून हिदायत देकर गये हैं कि वह ज्यादा काम न करे, वह चाहते हैं कि पूरी तरह स्वस्थ हो जाये तभी अपनी सामान्य दिनचर्या अपनाये.

कल शाम वह बहुत दिनों बाद टहलने गयी, मौसम में हल्की ठंडक थी, शेफाली के फूलों की हल्की गंध भी थी. लोगों के झुंड पूजा देखने जा रहे थे. आज भी पूजा की छुट्टी है. नन्हे का स्कूल शनिवार को खुलेगा, जून का दफ्तर भी, यानि अगले तीन दिन उनके पास हैं अपनी मनमर्जी के मुताबिक बिताने के लिए. कुकर में काले चने उबालने के लिए रखे हैं, गैस कम करने के बावजूद कुकर की सीटी है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही, कभी-कभी सामान्य सी लगने वाली बात भी कितना irritate कर जाती है. अभी कपड़े धोने हैं और सब्जी बनानी है. जब भी वह काले चने की सब्जी बनाती है तो ननद व सासु माँ के बनाने का ढंग याद आ जाता है. ढेर सारे प्याज, पिसे हुए अलग और कटे हुए अलग, जीरा भी पिसा होने के साथ-साथ साबुत भी, ढेर सारा धनिया पाउडर, और उबने के बाद चनों को मसाले में भूनना. उसका तरीका बिलकुल आसान है. कल सुबह ससुराल से फोन आया था, उनके पत्र उन्हें मिल रहे होंगे पर जवाब फोन से ही देते हैं. छोटी बहन के फोन का भी उसे इंतजार था. आज सुबह उठी तो मन में कोई उत्साह नहीं था, एक नये दिन का स्वागत करे ऐसा कुछ भी नहीं था, बल्कि यह भावना थी कि एक और पहाड़ सा दिन, फिर धीरे-धीरे दिनचर्या शुरू की तो रूचि जगने लगी और यह बात भी याद आई कि इतना व्यस्त रहना चाहिए कि यह सब सोचने का वक्त ही न मिले, पर मन तो हर वक्त अपने साथ रहता है जो यह याद दिलाता रहता है.