Thursday, March 13, 2014

पीपल का पेड़



कल शाम को जून का फोन आया, वह होटल जाने से पूर्व ही छोटी बहन के यहाँ उतर गये, अच्छी बात है अपनों के प्रति स्नेह और सम्मान प्रकट करना और मन में होना. कल रात भी स्वप्न देखे, अजीब से स्वप्न. नन्हा भी सुबह एक बार उठा, उसे हल्का जुकाम हो गया है, आज गणित का टेस्ट नहीं दे पायेगा. मौसम फिर ठंडा हो गया है. कल शाम जब वह उसे पढ़ा रही थी, एक मित्र परिवार आया, वे नन्हे के लिए किताबें लाये थे, इस साल उसके पास कई किताबें हो गयी हैं, पढने के लिए उचित माहौल घर में बन रहा है. स्कूल में भी है. कल शाम वह अकेले टहलने गयी, शाम ठंडी थी और सडकें लगभग खाली, घर से निकलते ही पीपल की सूनी टहनियों पर उगे नये कोमल पत्ते दिखे, एक पंक्ति मन में कौंधी जो अब याद नहीं है. हवा चेहरे को सहलाती हुई बह रही थी और आँखें जैसे हरियाली को पी लेना चाहती थीं. क्लब के सामने से गुजरते हुए महसूस हुआ कि पेड़ भी विद्यार्थियों की तरह हैं, कुछ ने नयी ड्रेस पहन ली है और तैयार हैं, कुछ ने अभी तक कपड़े नहीं बदले हैं, असम में पतझर नहीं होता इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण दिखा. आज सुबह ‘कन्हैया लाल प्रभाकर’ का निबंध पढ़ा, पढ़ाया, देश प्रेम की भावना से युक्त लेख मन पर असर करता है. अब से तीन बजे तक पांच घंटे उसके पास हैं, जिनमें एक भरपूर जीवन जीना है.

आज आखिर सफाई करने का मुहूर्त निकल ही आया और उसने नन्हे के स्कूल जाते ही काम शुरू कर दिया. साढ़े दस बजे तक तीनों कमरे स्वच्छ हो गये. घर आज बेहद अच्छा लग रहा है. उसके बाद भोजन, पत्रों के जवाब, विश्राम और दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. एक सखी का फोन आया, उसने कल नन्हे और उसे लंच पर बुलाया है, कहने लगी, जून के न रहने से उन्हें अकेलापन लगता होगा, पर सच तो यह है कि उन्होंने अकेलेपन को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया है, स्वयं को काम में व्यस्त रखकर और सामान्य दिनचर्या अपनाकर ही ऐसा सम्भव हुआ है. उनका कम्प्यूटर गोहाटी से रवाना हो चुका है शायद एक-दो दिनों में पहुंच जाये. कल स्कूल से आकर जब नन्हे ने किसी बच्चे से सुनी, डीपीएस में दाखिले के लिए किसी के एक लाख रूपये डोनेशन देने की बात कही तो कुछ देर के लिए तो वह सन्न रह गयी, पर फिर मन अपने रस्ते पर आ गया कि इस बात में कितनी सच्चाई है कहना कठिन है. जून के लिए एक पार्सल भी कोरियर से आया है, उन्हें फोन पर सारी खबरें देनी हैं, पर जब फोन आता है वह अन्य सब भूल जाती है.

They are ready to go to friends house, she and Nanha. Day is warm today, full of sun shine. Woke up at 6 am and taught till 8. Washed some clothes, linen etc, their Dhobi is away since last one and half month, washing machine is doing his job efficiently. Last night jun called and told about his presentation. His voice was nice to hear, clear and full of love, he is happy there, change of place and journey makes one happy generally. They are also fine, there is so much to do. They do not have a single moment to worry about , of course his presence is needed but he has made them strong enough. Just now phone rang but before Nanha had picked it up, it stopped. Who wants to talk to them… to two persons ?, who are going to share food with friends on this pleasant April noon !

आज पड़ोसिन ने दोपहर के खाने पर बुलाया है, नन्हा भी स्कूल से आकर वहीं खायेगा, सो आज का दिन भी व्यस्त रहेगा, आज संगीत की कक्षा भी है. उसने कल शाम और आज सुबह भी कुछ देर अभ्यास किया. फिर सोचा, देखें, उनकी कसौटी पर कितना खरा उतरता है उसका अभ्यास, शांत मन से बिना विचलित हुए अपना कार्य नियमानुसार करना, अपने आस-पास होती घटनाओं तथा प्राकृतिक सुन्दरता/बदलाव के प्रति सजग रहना ही एक सचेतन मन की निशानी है, जे कृष्णमूर्ति ने इस पुस्तक में बच्चों के लिए कई ज्ञानवर्धक उपयोगी बातें कही हैं लेकिन साथ-साथ वह यह भी कहते हैं कि बच्चों की उत्सुकता को, उनकी प्रश्न पूछते रहने की प्रवृत्ति को न दबाएँ, उन्हें खिलने, आगे बढने के लिए पूरा स्पेस दें, उन्हें अच्छी आदतें सिखाएं जरूर पर उन पर लादें नहीं बल्कि उन्हें इस योग्य बनाएं कि वह स्वयं अपना अच्छा-बुरा समझें, हर वक्त एक आज्ञा की छड़ी लिए उनके पीछे-पीछे फिरना उन्हें कुंठित करता है, वे एक स्वतंत्र व्यक्तित्त्व हैं और उन्हें हमारे स्नेह और सम्मान की जरूरत है न कि डांट-फटकार की, जून का फोन आज आयेगा, और दो दिन बाद वे लौट आएंगे, सम्भव है, बड़ा भांजा और छोटी भांजी भी उनके साथ आयें.  





Tuesday, March 11, 2014

कागजी अखरोट


टीवी पर काश्मीर से सम्बन्धित एक धारावाहिक ने बाँध लिया है, काश्मीर में जब यूरोपियन और अमेरिकी पर्यटकों को बंधक बनाया गया था, उसी घटना का कथात्मक चित्रण किया गया है, लोगों की परेशानी, आर्मी व पुलिस की कार्यवाही, पत्रकारों और टीवी चैनल की नई कहानी पाने की इच्छा, सभी का वर्णन अच्छा है. अपह्रत व्यापारी की पत्नी का दुःख, ड्यूटी पर जाते हुए पुलिस अधिकारी की पत्नी का उससे कागजी अखरोट और केसर लाने की फरमाइश करना. असमिया समाचारों ने बचा लिया वरना उसका सारा कार्य वहीं का वहीं रह जाता और टीवी के सामने से हटने का मन नहीं करता. कल शाम वे टहल कर लौटे तो दो मित्र परिवार मिलने आये, तब महसूस हुआ, आजकल घर की साज-सज्जा पर उसका ध्यान थोड़ा कम है, अब जून के बाहर जाने के बाद पूरी सफाई करेगी. सुबह-सुबह बड़े भाई से बात हुई, माँ-पापा अभी तक डॉक्टर के पास नहीं गये हैं, ईश्वर की मर्जी मानकर वे अपनी अपनी समस्या को ख़ुशी ख़ुशी सह रहे हैं. इन्सान का मन कितने भुलावों की रचना कर लेता है. स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए आसपास कितनी ही दीवारों की रचना कर लेता है. शायद वृद्धावस्था में वह भी ऐसी ही हठी हो जाये. आज सुबह Frankenstein दुबारा पढ़नी शुरू की, बहुत रोचक पुस्तक है.
कल शाम नन्हा थका हुआ लग रहा था, आज सुबह उठा तो उसे उसका बदन गर्म लगा पर शायद यह उसका वहम हो क्योंकि वह ठीक महसूस कर रहा था. आज से उसे एक घंटा खेलने के लिए जाने को कहा है, पिछले चार-पांच दिनों से मित्रों से बिलकुल दूर हो गया है. आज  मौसम गर्म है, पंखा सुहावना लग रहा है. उसने भरवां आलू-बैगन बनाये हैं, जो माँ ने बचपन की एक गर्मी की शुरुआती शाम को बनाये थे. जब गर्मियां शुरू होती थीं तो उनकी रसोई बाहर आ जाती थी. वे भी क्या दिन थे ! कल शाम जून और वह दूर तक घूमने गये, अगले आठ दिन उसे अकेले ही टहलना होगा शाम को अपने ही घर में.  सुबह उसने सोचा जून के तैयार होने तक घर पर फोन कर लेगी, पर पता नहीं ध्यान कहाँ था, शायद अपने को गर्व के पर्दे के पीछे छिपा लिया था, लोकल फोन पर एसटीडी नम्बर मिला रही थी. सारा घमंड पानी-पानी हो गया जब जून ने उसे ऐसा करने से रोका. हर पल स्वयं पर नजर रखनी बेहद जरूरी है नहीं तो उसे भटकने में देर नहीं लगती. कल रात उनके बेडरूम के रोशनदान में एक साथ सैकड़ों काले चींटे आ गये, जून ने पहले एक चींटे को मारा  तो नूना ने उसे मना किया पर कुछ ही देर में उन्हें उन सभी को मारना या बेहोश करना पड़ा. अभी भी इक्का-दुक्का कमरे में घूम रहे हैं, उनके लिये तो कयामत का दिन कल ही था.
अभी आठ ही बजे हैं पर सूरज आकाश में ऊंचा चढ़ आया है. आज सुबह जून ने उसे कालिमा में उगता हुआ लाल सूरज दिखाया, अनुपम था वह दृश्य ! उसे लगा जैसे नेहरू की काली अचकन पर  लाल गुलाब सा उषा का सूर्य और गाँधी के मौनव्रत सी शांत सुबह ! वे दोनों चले गये, उसने घर संभाला और भगवद् गीता का एक अध्याय पढ़ा, कुछ देर ध्यान किया और अब लिखने बैठी है. ध्यान करने बैठी थी तो मन में उपन्यास के पात्र घूमने लगे, कभी भोजन में क्या बनाना है आदि पर इस समय मन एकदम खाली है. जून शाम को दिल्ली पहुंचकर फोन करेंगे. नन्हा खेलने गया है, उसे गणित पढ़ाते समय बहुत अच्छा लगा, जल्दी समझ जाता है, उसने मन ही मन अपने अध्यापकों को धन्यवाद किया जिन्होंने उसे पढ़ाया था. अरुंधती राय की वह किताब आज समाप्त हो गयी, उसकी भाषा कितनी अलग है, आज वह उसे लाइब्रेरी में जाकर वापस कर देगी ताकि कोई और पढ़ सके. जून जाते-जाते भी उनके लिए सब्जियां और काजू देकर गये, कितना ध्यान है उन्हें परिवार का और कितना स्नेह !  





नये स्कूल में पहला दिन


आज का इतवार कुछ अलग है, जून सुबह नौ बजे ही नाश्ता करके निकल गये, दो बजे लौटे. नन्हा यहीं पडोस में किसी के यहाँ पिकनिक पर गया है. मौसम आज गर्म है, कुछ देर पूर्व कुछ बूँदें पड़ीं फिर थम गयीं. कल दोपहर भर और सुबह भी नन्हा टेनिस खेलता रहा, धूप से चेहरा लाल हो गया पर जोश कम नहीं था. वह DPS जाने के लिए तैयार हो गया है, अब कुल मिलाकर बीस बच्चे हो गये हैं जो यह से जायेंगे.

कल फिर उड़ीसा और बंगाल के तटवर्ती इलाकों में तूफान आया सो यहाँ भी बदली फिर छाई है, उन्हें थोड़ी देर बाद दिगबोई के लिए निकलना है, नन्हे की फ़ीस जमा करनी है, ड्रेस व किताबें खरीदनी हैं. कल से वह स्कूल जाएगा. सुबह उसे उठाया तो अपने खराब मूड में था, शायद नींद से उठाने पर बच्चों का ऐसा ही मूड रहता हो, शायद उन्हें सपनों से जगाया जाना नागवार गुजरता हो. वह सुबह-सवेरे ही उस पर झुंझला गयी, कुछ देर वह उदास रहा फिर सामान्य हो गया. कल से उसे और भी जल्दी उठाना होगा, देखें क्या होता है, कहीं उनकी सुबहें करुण दृश्यों से न भर जाएँ ! कल शाम उसने नन्हे को संज्ञा के भेद, उदाहरण आदि पढाये, जाने से पूर्व सर्वनाम भी पढ़ाना है. उसने देखा है, अक्सर उसके जबड़े एक दूसरे पर दबाव डालते हैं. तनाव ग्रस्त होने पर ऐसा होना स्वाभाविक है, पर सामान्य अवस्था में भी ध्यान न देने पर ऐसा हो जाता है. शायद नींद में भी ऐसा होता होगा. नींद में तरह-तरह के विचार एक के बाद एक मन में आते हैं. जिनका आपस में कोई तारतम्य नहीं होता न ही कोई अर्थ निकलता है. ध्यान किये हफ्तों बीत गये हैं. नन्हे के DPS जाने पर सुबह वक्त मिल सकेगा.
आज नन्हा पहली बार अपने नये स्कूल में नई कक्षा में बैठा होगा, सुबह वह पांच बजे उठी, सवा  पांच बजे उसे उठाया और साढ़े छह बजे तक ही जून और वह दोनों तैयार थे. आज उसका रिजल्ट भी निकलने वाला है. पड़ोस का बच्चा ले आएगा. उसकी कुछ किताबें नहीं मिली हैं, स्वेटर भी बाजार बंद होने के कारण नहीं मिला. कल शाम वह पुराना गृह कार्य करता रहा. रात वे जल्दी सो गये ताकि सुबह तरोताजा होकर जल्दी उठ सकें. नन्हे का स्कूल का अनुभव ही बतायेगा कि उनका उसे दिगबोई भेजने का निर्णय सही है या गलत. आज जून को अपना पेपर प्रस्तुत करना है. इतवार को उन्हें बाहर जाना है. आज कृष्णामूर्ति की पुस्तक में पढ़ा कि जीवन में क्रम स्वयंमेव आना चाहिए प्राकृतिक रूप से, ऊपर से थोपी हुई कोई भी वस्तु स्वाभाविक नहीं होती और न ही उसका असर होता है. प्रत्येक मानव यदि अपने स्वाभाविक रूप में रहे तो द्वंद्व पैदा ही न हो.

कल नन्हे का रिजल्ट आया और जैसी कि उन्हें उम्मीद थी वह अपने सेक्शन में प्रथम आया है. वैसे वह इससे भी अच्छा कर सकता है, कल उसका पहला दिन अच्छा रहा, शाम को आया तो खुश था, कल से कई लोगों ने बधाई दी है, कुछ लोग पूछते हैं कि नन्हे को DPS में दाखिला कैसे मिला आदि. उनकी ख्वाहिश थी कि उसे अच्छे स्कूल में पढ़ायें सो ईश्वर ने पूरी कर दी है. आज बहुत दिनों बाद उसने पीटीवी पर एक ड्रामा देखा, दिल को छू जाते हैं भोले भाले किरदार, अपने बेहद अपने लगते हैं. आज सुबह उसने ‘रामकुमार भ्रमर’ की एक कविता रजनी बाला पढ़ाई, उस छात्रा को अपनी लिखी एक कविता भी दिखाई. पिछले पूरे हफ्ते वह DHC के लिए नहीं पढ़ सकी. अर्थात हिंदी लेखन के कोर्स के लिए.  




Monday, March 10, 2014

असम स्टाइल का घर


सच्ची ख़ुशी का राज है सृजन, कल शाम उसने इस वर्ष की अपनी पहली कविता लिखी..और लग रहा है असीम सम्भावनाओं के द्वार खुल गये हैं, आज प्यार की सच्ची परिभाषा पढ़ी जहाँ कोई प्रतिदान चाहता है वहाँ व्यापार होता है और जब किसी का मन अपनी ख़ुशी के लिए किसी अन्य पर निर्भर करता है तो वह आजाद नहीं है, वह प्रेम नहीं कर सकता. यह खुबसूरत दुनिया और इसमें बसने वाली हर शै से हमें प्यार तो करना है पर उन पर निर्भर नहीं होना है. आत्मनिर्भरता ही निडरता को जन्म देती है, जब हम किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे तो भयभीत होने की भी जरूरत नहीं, एक नाजुक बेसहारा, कमजोर आश्रित होकर जीने से कहीं बेहतर है मजबूत आत्मशक्ति के साथ जीना, क्योंकि वह शक्ति कहीं बाहर से मिलने वाली नहीं है, हमारे अंदर ही मौजूद है. जगत में सच का सामना करते हुए निर्भयता पूर्वक अपनी बात कह देने का आत्मविश्वास लिए जीना ही सही मायनों में आजाद होकर जीना कहा जायेगा. आज सुबह हिंदी कक्षा में ‘वियोगी हरि’ का एक निबंध पढ़ा, ‘विश्व मन्दिर’ फिर IGNOU में एक अफ्रीकन लेखक का साक्षात्कार सुना/देखा. लेखक अपने समाज की विसंगतियों, विषमताओं, कलह तथा अराजकता के प्रति सचेत होता है, लोगों का ध्यान इनकी ओर दिलाना तथा उनको दूर करने के उपाय सुझाना भी उसीका काम होता है. अपने परिवेश तथा समाज, राष्ट्र में चल रही गतिविधियों के प्रति जागरूक होता है और अनुभव करने की उसकी शक्ति तीव्र होती है. वह बदलाव को भी भांपता है और ठहराव को भी. कवि बनने का उसका स्वप्न भी एक दिन पूर्ण होगा !

कल रात भीषण वर्षा हुई, आंधी और तूफान के साथ, एक बार तो बिजली इतनी जोर से कड़की की उनकी नींद टूट गयी, लगा जैसे पास ही में कहीं बिजली गिरी हो. उसके बाद जो नींद आई, एक स्वप्न देखा जिसमें उसे बिजली का करेंट लग जाता है. सुबह आधा घंटा देर से आँख खुली. कल शाम एक मित्र के यहाँ गये, वे लोग जैसे उनका इंतजार ही कर रहे थे, चेहरे बदल जाते हैं लेकिन कोई न कोई ऐसा परिचित परिवार सदा रहा है जहाँ उनका दिल से स्वागत होता है. वहाँ से हँसते-हँसाते लौटे तो रास्ते में ही मूसलाधार वर्षा शुरू हो गयी, एक भीगते हुए परिचित को लिफ्ट भी दी. समाचारों में उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में आये तूफान के बारे में सुनकर प्रकृति की भीषणता और शक्ति का अहसास होता है, प्राकृतिक आपदाओं के सामने मानव विवश है. यहीं आकर उसे ईश्वर की याद आती है, इस विशाल ब्रह्मांड में अपनी तुच्छ स्थिति का बोध होता है. किन्तु मानव ने भी प्रकृति के आगे हार न मानने की कसम खायी है, उन्हीं तटवर्ती इलाकों में जहां तूफान आते हैं, लोग फिर भी बसेंगे. कल दिन भर लिखने-पढने में व्यस्त रही, अरुंधती राय की किताब रोचक है, आराम से पढ़ रही है, उसका बचपन पढ़ते-पढ़ते अपना भी याद आने लगता है.
   
पिछले दो दिनों में कितना कुछ घट गया, नन्हे को वे परसों दिगबोई ले गये. लंच उन्होंने दिगबोई के Blw No २६ में किया. असम स्टाइल का खूबसूरत लकड़ी का दुमंजिला घर, खुले-खुले कमरे, ड्राइंग रूम से आगे काफी खुला बरामदा ऊपर, बेडरूम से थोड़ा नीचे उतर कर बाथरूम, सामने सुंदर लॉन और कई वृक्ष. ऊँचाई पर स्थित इस बंगले में घुमावदार मार्ग से आना पड़ता है. दिगबोई वाकई सुंदर जगह है. डीपीएस स्कूल भी काफी अच्छा लगा, बगीचा है, सुन्दर फूल-पौधे हैं, कक्षाओं में रंगीन फर्नीचर है, डेस्क ऐसे हैं जिसके अंदर बच्चे अपना बैग रख सकते हैं. नन्हे का टेस्ट अच्छा हो गया, वह खुश था पर थोड़ा परेशान भी. कल वे सुबह-सवेरे ही दिगबोई चले गये, दोपहर को लौटे, नन्हे का दाखिला भी हो गया. कल रात को चोर फिर आए थे, गाड़ी की बैटरी चोरी करने, पर बोनट में चेन बंधी होने के कारण काट नहीं पाए. जून बेहद परेशान हैं, नन्हा अलग परेशान है कि उसे सेंट्रल स्कूल छोड़कर नहीं जाना है, उसे समझाना आसान कार्य नहीं है. उसे रोज इतना सफर करके पढ़ने जाना होगा, वह पता नहीं किस बात घबरा रहा है. बच्चे खुलकर अपने मन की बात बता भी नहीं पाते, शायद सभी चीजों का मिलाजुला असर हो. उसका मेडिकल checkup भी आज होना है और फोटो भी खिंचानी है. इस वक्त जून उसे लेकर अस्पताल गये हैं.


Friday, March 7, 2014

भारतेंदु हरिश्चन्द्र का कवित्त


आज नन्हे की काम करने की गति देखते ही बनती है, सुबह साढ़े सात बजे उठकर भी नहा-धोकर नाश्ता करके पढ़ाई करने बैठ गया ताकि नौ बजे खेलने जा सके. जाते समय फरमाइश करके गया है कि दोपहर को भोजन में दाल माखनी, मिक्स्ड वेज तथा मलाई कोफ्ता तीनों ही होने चाहियें. सो नूना का ध्यान आज किचन की ओर ही लगा हुआ है. कल उसने पापा से एक केक के लिए भी ढेर सारा सामान मंगवाया है, पर स्वयं बनाने या सहायता करने के लिए घर में रुकना गवारा नहीं, खैर, उसकी पहली पसंद टेनिस है, इससे यह तो पता चलता है है. कल शाम जून बहुत अच्छे मूड में थे, पर आने वाले कल की शाम नहीं होंगे, क्यों कि कल शाम चार बजे उसे फिर मीटिंग में जाना है. उसके बिना उनकी शामें बेहद अकेली हो जाती हैं.

नन्हे का Black Forest cake बन कर तैयार हो गया है, उसने जून से कहा भी इसकी एक तस्वीर खींच लें, बहुत सुंदर दिख रहा है पर उन्हें उसके स्वाद से मतलब है न कि रूप से.. नन्हा और वह दोनों ही उसे काटने के लिए बेताब हो रहे हैं.

मार्च की एक सुहानी सुबह ! अलसुबह तेज आंधी आई, कुछ क्षणों के लिए अँधेरा छा गया, हवा की गति प्रचंड थी, फिर वर्षा हुई और देखते ही देखते हवा भी थम गयी, बादल न जाने कहाँ उड़ गये, सूर्य का राज्य पुनः छा गया और धूप चमकने लगी. ईश्वर के मंच पर दृश्य परिवर्तन इतनी शीघ्र होता है कि मन रोमांचित हो उठता है. आज सुबह उसकी छात्रा आयी थी, आधुनिक हिंदी साहित्य के जन्मदाता प्रसिद्ध कवि भारतेंदु हरिश्चन्द्र की एक कविता कवित्त छंद में पढ़ी, पढ़ायी. अभी नौ भी नही बजे हैं, नन्हे का मित्र उसे लेने आ गया है, वह अभी पढ़ रहा है, अच्छा तो यही होगा कि मित्र उसकी पढ़ाई में मदद करे. कल कमेटी मीटिंग में सेक्रेटरी देर से आई, उसे ही पिछली मीटिंग के मिनट्स पढ़ने पढ़े, बाद में उन्हें अपने पति के कोलकाता से लौटकर आने के बाद भी पूरे समय रुकना पड़ा, उनका मन घर पर रहा होगा लेकिन ड्यूटी तो ड्यूटी है. वह देर से आई तो भी जून सामान्य मूड में थे, बल्कि उन्होंने डिनर भी बना दिया था. कल रात उसने एक विचित्र स्वप्न देखा, मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि स्वप्न छिपी हुई इच्छाओं और कामनाओं का प्रतीक होते हैं तो बिना उसे ज्ञात हुए कब उसकी यह कामना हुई, समझ से बाहर है, नींद को मोहक इसीलिए कहा गया है न कि व्यक्ति एक दूसरी ही दुनिया में विचरण करने लगते हैं जहाँ कोई नियन्त्रण नहीं रहता.


इन्सान का मन मिटटी के कोमल लोंदे की तरह होता है, जैसी छाप डाल दें वैसा ही बन जाता है, दुनिया की कोमलतम वस्तु से भी कोमल, छुईमुई की तरह लजीला और यही मन वक्त पड़ने पर कठोर भी बन जाता है, जो हल्की सी उपेक्षा भी सहन नहीं कर पाता वही समय के थपेड़ों को सह पाने में सक्षम हो ही जाता है, भावुक मन हो तो सोने पर सुहागा, जहाँ अपने प्रतिकूल कुछ भी होता या घटता दिखाई दिया, झट कुम्हला गया, जैसे किसी ने ऊर्जा शक्ति ही छीन ली हो, मुरझाए हुए फूल की तरह फिर पड़ा है जमीन पर. आज पत्रों के जवाब का दिन है और अभी कुछ देर पूर्व जून का फोन आया, तिनसुकिया जाने का दिन भी है. कल शाम वे असमिया सखी की बेटी के नामकरण संस्कार में गये, उसने एक स्वेटर बुना था उसके लिए, लेकर गयी पर वह अभी भी उठने की हालत में नहीं थी, पतिदेव की समझ में नहीं आ रहा था मेहमानों का स्वागत कैसे करें. वहाँ से वे लाइब्रेरी गये, और कुछ नई किताबें लाये, Gods of small things भी मिल गयी. अरुंधती राय की किताब ! जिसमें उसका एक बहुत सुंदर सा फोटोग्राफ है. 

Tuesday, March 4, 2014

चुलबुली सी बालिका


आज वह बेहद हल्का महसूस कर रही है. दादा धर्माधिकारी की पुस्तक में मनुष्यता की परिभाषा पढकर मनुष्य की गरिमा और उसकी शक्ति पर विश्वास और बढ़ गया है. कल का दिन एक भरपूर दिन था. कल दिन भर उसने एक एक पल को पूरे मन से जीया. मानव होना और फिर स्त्री होना, संस्कार युक्त, शिक्षित और स्वस्थ होना, अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, कुछ न कुछ करते रहने की तीव्र इच्छा, निरंतर कुछ न कुछ सीखने की आकांक्षा, जीवन को कलात्मक रूप से जीने का प्रयास, स्वयं को समाज के प्रति या परिवार के प्रति उत्तरदायी मानते हुए अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करना, ये सारी बातें उसमें किसी हद तक तो हैं न, और हर बात के लिए स्वयं को दोषी मानते रहना अपनी शक्ति पर संदेह करना, अपने आप पर भरोसा न कर पाना ये दोष भी हैं. पर अब उसे भयभीत होकर पीछे-पीछे रहकर चलने की जरूरत नहीं है, उसकी कमियां जो भी हों उन्हें लेकर स्वयं को अपमानित महसूस करने की जरूरत नहीं है. सदा ही तृतीय स्थान पाने की अपनी आदत को जारी रखने की भी नहीं. आज नन्हे का गणित का इम्तहान है जो उसे कठिन लगता है, पर वह जानती है वह बहुत होशियार है, अवश्य अच्छा करेगा. कल शाम वे टहलने गये, हवा ठंडी थी और चेहरे को छूकर सिहरा जाती थी

Today again she is so happy ! yesterday one friend got a prize of 16,000 Rs from the makers of Nyle Shampoo. They went there to celebrate the joy and to eat sweets. Today she rang her to say that they liked it, then she talked to asamiya friend, she is waiting for the D-day, she promised her to be there in the hour of need and it makes her happy that she will be of some use to someone ! Nanha has prepared well for Sanskrit exam. He has learnt twenty shlokas in Sanskrit, when she was of his age she never learned so many shlokas..

पिछले चार दिनों से नहीं लिख पायी, आज उन्हें तिनसुकिया जाना है, लंच भी वहीं खाना है. कल होली मनायी, परसों शाम बड़े भाई भाभी को फोन किया, छोटी बहन को फोन किया कल सुबह -सवेरे दीदी का फोन आया, उन्होंने कहा, बड़ा भांजा और छोटी भांजी शायद यहाँ आयें छुट्टियों में.

आज संगीत कक्षा में ‘काफी’ की तान सिखाई गयी. कल वे तिनसुकिया में ही थे कि पता चला उस सखी ने बिटिया को जन्म दिया है, वापसी में अस्पताल गये, गुलाबी रंग की छोटी सी बच्ची आँखें बंद किये लेटी थी, अभी तक चेहरा स्पष्ट नहीं था कि किस पर गया है, माँ स्वस्थ लगी, साहसी है वह, वैसे भी उम्र के इस मोड़ पर आकर माँ बनने का निश्चय करना ही साहस पूर्ण कदम था जो वह नहीं उठा पायी थी, अपना सब कुछ दे देना पड़ता है न. आज से उसकी छात्रा ने फिर से आना शुरू कर दिया है. कल उसने एक चप्पल ली, एक जोड़ी बुँदे, एक नेल पॉलिश और एक लिपस्टिक यानि अपने ऊपर खर्च ! इस समय तीन बजे हैं, नन्हा एक कहानी लिखते-लिखते बीच में ही टेनिस खेलने गया है. शाम को वे पुनः अस्पताल जायेंगे और बाद में एक मित्र के यहाँ, उनकी छोटी बेटी बहुत प्यारी है उतनी ही चुलबुली भी.   

‘कविता लेखन के सामान्य सिद्धांत’ पढना शुरू किया तो भीतर विचार जगने लगे. उसे लगा, मन जितना संवेदन शील होगा जितना गहराई से सोचेगा जीवन उतना ही अर्थपूर्ण होगा, वे हैं कि उथले-उथले ही जीए जाते हैं, अंतर में झाँकने से डरते हैं खुद के भी और इर्दगिर्द भी, कहीं कुछ ऐसा न दिख जाये जो आँखों में खटक जाये, बस आँखें बंद किये ताउम्र जिए चले जाते हैं, न ही टूटकर प्यार करते हैं न ही नफरत, बस कामचलाऊ जिंदगी जीते हैं, शिद्दत की कमी है अहसासों  में ती जीवन में गहराई कहाँ से आये.

पिछले कई दिनों से, हफ्तों से, महीनों से कुछ नहीं कहा, कविता लिखी नहीं जाती, कही जाती है पहले अपने आप से फिर कागज से, ऐसा तो नहीं कि महसूस करने की शक्ति नहीं रही, अब भी एक मार्मिक शब्द आँखों को धुंधला जाता है, मौसम के बदलते रूप और ढंग अदेखे नहीं रहते, आते-जाते उगता डूबता सूरज और चाँद जब दिखता है तो मन में एक हिलोर सी जगती है, फूल अब भी भाते हैं और दर्द अब भी होता है पर ऐसा भी बहुत कुछ है जो अब नहीं होता जैसे कि अपनी सुविधा-असुविधा की परवाह किये बिना किसी की सहायता करने की ललक. अपना ख्याल पहले आता है जैसे कि इस डर से फोन न पकड़ना कि कहीं पड़ोसिन किसी काम के लिए न बुला ले, अब अपने नियमित रूटीन को तोड़कर उसके लिए समय निकालना जबकि अपना सिर भी दुःख रहा हो, सेवा/सहायता ही कहलायेगा न, पर क्यों कि लोग नितांत अपने लिए जीते हैं ! दूसरों के लिए इसमें जगह कहाँ है ?