Friday, July 12, 2013

घर की सफाई


आज मन शांत है, स्थिर और उदासी का नामनिशान भी नहीं, दर्द है, बेचैनी है मगर उसे सहने की ताकत भी है, परेशानी तभी बढ़ती है जब कोई पीड़ा से भागना चाहता है. ईश्वर की बनाई हुई इस दुनिया में, प्रकृति में जो जैसा है उसे वैसे ही स्वीकारना होगा. अंत में सब ठीक हो ही जाने वाला है, दोपहर को फिर से डाक्टर के पास जाना है, वह एक बजे तक आ जायेंगे, वह अर्थात जून. सोमवार को भी जाना है, यानि दो दिन बाद, सो खतों का जवाब इन दो दिनों में ही दे देना होगा. कौन जाने, भविष्य में क्या छिपा है ? पिछले दो-तीन दिन से जो ख्याल मन में छाया हुआ था, एक दूसरी दुनिया का ख्याल, अपने आप पीछे छूट गया है. अपने आप को खोल कर रख देने से ही शायद यह सम्भव हुआ है. अन्तर्मुखी होना हर वक्त अच्छा नहीं होता...स्वास्थ्य के लिए, कल यही कहा था उसकी सखी ने, वह आत्मविश्वास से भरी थी, प्रसन्न और बातूनी.. आज उन्होंने छोटी बहन से बात की वे लोग अक्तूबर में आ रहे हैं. उसके पहले घर की सफाई करनी होगी, उसने सोचा, तबियत ठीक होते ही लगना होगा. कितना सारा काम है, अलमारी की सफाई, सारी क्राकरी भी धो-पोंछ कर रखनी होगी. और सारी दराजें भी साफ करनी हैं, पूरा एक हफ्ता लगेगा.
मौसम आज भी अच्छा है, बादल हैं, सो धूप तेज नहीं है, हवा चल रही है सो अमलतास की डालियाँ रह-रह कर हिल उठती हैं. दर्द कम है कभी बिलकुल भी नहीं सो वह अपने सभी कार्य व्यायाम को छोडकर कर पा रही है. अभी अभी पी टीवी पर एक मजाहिया खेल देखा, सीधीसादी सी भाषा और पात्र भी भोले भाले, महमूद साहब हमारे जहीर साहब से कितने मिलते-जुलते हैं और जहाँआरा की भाषा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भाषा जैसी ही है. उसका गला अभी भी ठीक नहीं हुआ है, कुछ देर पहले तुलसी की चाय पी. उसकी सखी ने आज सुबह-सुबह फोन किया, वह उसके प्रति कृतज्ञता से भर गयी. वह लिख रही थी, तभी घंटी बजी, गोबर वाला था, उसने एक ठेला लिया, गुलदाउदी के पौधे लगाने के लिए. बाद में माली गोबर, मिटटी व बालू को मिलाकर गमलों में भरेगा. उसने सोचा बहन के आने के पूर्व उसे गमले तैयार कर लेने हैं.

Today she is restless. Mind is wondering and she is not able to concentrate it at one place. Tomorrow is the D day, they were waiting for it since last 20 days.

She wrote her favorite lines-
The woods are lovely dark and deep
But I have promises to keep
And miles to go before I sleep
And miles to go before I sleep

She read in a book-

In every thing that happens there is a hidden meaning of mercy ie there is a hidden blessing.

So whatever comes greet that experience? Everything happens at right time. Rejoice at everything that happens to you. It has come to you as gift of God.

Everyday we should practice some silence.

Have child like trust in Him. The day on which you have not helped other is a useless day.

It is your birth right to live in the divine presence of God.




Monday, July 8, 2013

सावन तो सावन है


इस क्षण उसके पास करने को कुछ नहीं है यही विचार मन में बार-बार आ रहा है, शाम के सवा चार हो गये हैं, जून अभी तक लौटे नहीं हैं. उसकी बायीं बांह में इंजेक्शन के कारण हल्का दर्द है और सिर भी भारी है. पिछले कई दिनों से स्वास्थ्य की एक समस्या के कारण, जो उसे कुछ सिखाने आई है. उसे लगता है यह आत्म निरीक्षण और साहसी बनने का समय है. ईश्वर चाहेगा तो अगले दो हफ्तों में वह बिलकुल ठीक हो जाएगी. अच्छा लगता है जब जून बहुत स्नेह से उसका ध्यान रखते हैं. शाम को वे क्लब जायेंगे उसे लाइब्रेरी से पुस्तकें बदलनी हैं. उसे याद आया दो हफ्ते पहले उसने स्वास्थ्य पर  विशेष ध्यान देना शुरू किया था, उसके चार-पांच दिनों बाद ही यह समस्या शुरू हुई...अर्थात..

आज सुबह जब नन्हे ने असमिया के अक्षर बनाने सीखे तो उससे वर्गीय ‘ज’ बन ही नहीं रहा था, सो आज से फिर अभ्यास शुरू किया है वरना इतने दिनों की मेहनत व्यर्थ चली जाएगी. उसने टीचर को फोन किया, वह अब लिखने की जगह बोलने का अभ्यास कराएँ पर वह नहीं मिलीं, उसे लगता है गलत बोलने पर लोग हँसेंगे सो वह बोलती ही नहीं, वैसे हिंदी यहाँ सभी समझते और बोलते हैं सो दूसरी भाषा में बोलना अपनी ख़ुशी के लिए ही है,

Feeling  not good. God has punished her. So dull headache and boredom is with her since jun left for field duty. He will be back in the evening. It is about two o’ clock, All is not well. Yesterday they got two letters and day before four, but she was not feeling to reply them. Nanha has made one beautiful greeting card for his teacher in the morning. और वह पिछले दिनों अपने अंतर में झाँकने का प्रयास कर रही थी, उस डिवाइन फ्लेम की खोज में जो  सबके भीतर है, सच पूछो तो उसी ने उसे उजाला दिया है पिछले दिनों. वरना इस दर्द को सहना इतना आसान नहीं था. She will bear it with courage and smiles and she will never ever cry for this. Because if it is superficial then it is not worth crying and if it is something serious then what is the use of crying. She will prepare herself for the long journey. Jun says he will bring six dresses for her, he loves her so much and nanha also. She will make them happy while she is with them. If she is losing interest in her surroundings then it is  not a good sign but it is not true, today in the morning she went to see her neighbor.

गमे दिल को इन आँखों से छलक जाना भी आता है...
आज सुबह के पौने दस बजे पीटीवी की इन सुरीली आवाजों ने न जाने उसके दिल के किस तार को छू दिया है कि आँखें सावन-भादों बन गयी हैं.
ऐ दिल किसी को याद करके इतना उदास क्यों है  और सबाए लाये तन्हा
इस चमन की कली तन्हा ...
ये आवाजें इतनी दर्द भरी थीं कि यादें जो भूली हुई थीं, फिर से ताजा हो गयीं.
सावन तो सावन है बरसेगा
पागल है दिल फिर भी तरसेगा
लगता है मन कहीं गहरे तक उदास था जो जरा सी हमदर्दी पाकर पिघल गया है.
चलो उस मोड़ पर हम भी चढ़ जाएँ
जहाँ से जाके फिर कोई वापस नहीं आता
सुना है एक साये अजनबी बाँहों को फैलाये
जो आए उसका इस्तकबाल करती है
जो तारीकियों में लेके आखिर डूब जाती है
यही वह रास्ता है जिस जगह साया नहीं जाता
जहाँ पे जाके...
जो सच पूछो तो हम तुम जिन्दगी भर से हारते आये
हमेशा बेयकीनी के कुफ्र से कांपते आये
हमेशा खौफ के पैराह्नों से अपने पैकर ढांपते आए
हमेशा दूसरों के साये में एक दूसरे को चाहते आये
बुलाता है अगर उस कोह के दामन में छुप जाएँ
जहाँ पे जाके..
अभी अभी जून का फोन आया वह एक घंटे में आ रहे हैं.
He will miss her so much.



Thursday, July 4, 2013

टूटा हुआ विंड स्क्रीन


कितनी ही बार भगवद्गीता में पढ़ चुकी है सुख-दुःख, मान-अपमान में सम भाव रहना चाहिए, उस वक्त यह सम्भव भी लगता है, पर आज सुबह जब जून ने पूरी गम्भीरता के साथ कहा कि दस वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे  आग जलाना नहीं आया (कि दलिया न गिरे) तो उससे सहन नहीं हुआ और आधे घंटे तक मन पर असर रहा. जून भी बाद में पछता रहे होंगे कि उन्होंने वे शब्द क्यों कहे. उसे इतना कमजोर नहीं होना चाहिए और इस बात को हल्के ढंग से ही लेना चाहिए था लेकिन वह रोई इस छोटी सी बात पर. इस समय दोपहर के ढाई बजे हैं, कुछ देर पूर्व पड़ोसिन से मिल कर आई है, एक हफ्ते बाद उसका अपेंडिक्स का ऑपरेशन होना है, बेटे के लिए वह परेशान  थी. उसने कहा तो है कि वह निस्संकोच बेटे को उनके यह भेज सकती है, लेकिन जानती है, वह नहीं आएगा. वे लोग उनमें से हैं जो पड़ोसियों से कोई मदद लेना पसंद नहीं करते. कल छोटे भाई से बात हुई, उसके यहाँ दूसरी बेटी का जन्म हुआ है. आज सुबह उसने ध्यान करने का प्रयास किया पर मन एकाग्र नहीं हो पाया. समाचारों में सुना, काश्मीर में विदेशी कैदी पिछले इक्यावन दिनों से कैद हैं.

फिर तीन दिनों का अन्तराल, शुक्र व शनि दोनों दिन सुबहें पंजाबी दीदी के साथ गुजरीं, वह कुछ दिनों से अपने पति के साथ कोलकाता से आयी हुई हैं, कम्पनी से उनकी विदाई पार्टी है. इतवार को यूँ ही समय नहीं मिलता. पिछले दिनों कई जगह कई बार पढ़ा व सुना कि अंतर्मुख होकर, अपने अंदर झांक कर देखने पर, खुद अपने-आप के करीब आने पर उस ‘स्व’ से साक्षात्कार किया जा सकता है जिसे हम आत्मा कहते हैं. एक दो बार कोशिश भी की ध्यान लगाने की लेकिन मन की गति को सम्भालना कठिन लगा, पर उसका असर अच्छा रहा, वह शीघ्र शांत हो सक, जब भी कोई ऐसी परिस्थिति आई. आज सुबह नन्हे को गणित पढ़ाते समय आवाज ऊंची हो गयी थी जो उन दोनों के लिए ही ठीक नहीं था, उसे पढ़ाने के लिए मन का शांत व स्थिर होना अत्यंत आवश्यक है. वह परेशान हो जाता है उसका हल्का सा क्रोध देखकर भी. जून आज तिनसुकिया जा रहे हैं, उनके एक मित्र की गाड़ी का विंड स्क्रीन किसी ने पत्थर मारकर तोड़ दिया था सो नया लगवाने जा रहे हैं. कल सुबह वह जागरण सुन रही थी एक मित्र परिवार प्रातः भ्रमण करते हुए आया, उसका मन मौन की अवस्था को छोडकर बाहर आने को तैयार नहीं था. कई दिन हो गए उसने कोई कविता नहीं लिखी, खट्टे-मीठे कई अनुभव तो हुए, लेकिन मन को छू जाये ऐसा नहीं. उनका पिछला माली जिसे उन्होंने क्वार्टर खाली करने के लिये कह दिया था, अभी भी बाहर से काम करने आता है,  शायद उसे अभी इस घर से या बगीचे से लगाव हो, धीरे-धीरे, वक्त गुजरने के साथ लगाव भी कम होता जाता है. जैसे उसकी बंगाली सखी ने उसके पत्र का जवाब नहीं दिया है, लेकिन उसे कोई शिकायत नहीं है, क्योंकि यह स्वाभाविक है.

 अभी-अभी उसने स्वामी विवेकानन्द के कुछ प्रेरणास्पद विचार पढ़े, उसका मन उदात्त भावनाओं से भर गया है. वे एक सच्चे सन्त थे. उसने घड़ी की ओर देखा, नन्हा आने वाला होगा, वह उसके लिए चपाती बनने किचन में चली गयी.



आलू-प्याज की सब्जी


अभी कुछ देर पूर्व बिजली चली गयी, मौसम भी आज अपेक्षाकृत गर्म है, नन्हे का स्कूल २० तक बंद है, आज सोलह तारीख है. जून के जाते ही हमारा नया माली काम करने आ गया, चुपचाप सारे काम कर देता है. वह सोच रही थी कि कुछ देर नन्हे को पढ़ाने का वक्त मिल जायेगा पर उन्होंने अभी फोन करके एक मित्र को भोजन पर साथ लाने की बात कही, एक सब्जी और बनानी थी, पर घर में आलू-प्याज के आलावा कुछ भी नहीं, देखें जून को यह आलू-प्याज की सब्जी पसंद आती है अथवा नहीं. पिछले हफ्ते उसकी पुरानी पड़ोसिन लौट आई, इतवार तक उनके साथ ही वे व्यस्त रहे, सोमवार को जून का जन्मदिन था, नन्हे का स्कूल बाढ़ के कारण बंद चल रहा था, कल उन्होंने पन्द्रह अगस्त मनाया सुबह अपने घर में छोटी सी पार्टी, शाम को एक मित्र के यहाँ गये. अचानक उसे किचन याद आ गया और लिखना छोड़कर वह बाकी काम निपटाने चली गयी.

समाचारों में सुना फिरोजाबाद के पास कालिंदी व पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में टक्कर से भयंकर दुर्घटना. उसे ट्रेनों के नाम पर आश्चर्य हुआ, कालिंदी यमुना का नाम है और पुरुषोत्तम कृष्ण का, जैसे यमुना का जल उमड़ आया था कृष्ण के चरण छूने, वैसे ही कहीं..दोनों की टक्कर..

मन एक गाय है जो ‘मैं’ के खूंटे से बंधी
एक संकुचित दायरे में अनवरत घूम रही है
दूर.. जहाँ तक दृष्टि जाती है
नीले पहाड़ों के नीचे
घाटियों में है चाँदी सी चमकती जल धारा
वह उस मीठे पानी की ठंडक महसूस करना चाहता है  
लेकिन अपने अहम् के दायरे में ‘मैं’ के दायरे में बंधे होना उसकी नियति है
उसके इर्दगिर्द की हरियाली सूख गयी है
ऊपर तपता हुआ सूरज है
और सुदूर.. मैदानों में ठंडी छाँव
पर उस छाँव तक पहुंच पाना कितना दुर्लभ है
और ‘मैं’ के खूंटे से बंधे रहना कितना सुलभ....

Yesterday night she was feeling so helpless. She could not sleep much and then she thought above poem. It shows the true state of her mind. Jun has more stable mind. He is so calm and she does,nt know why did she behave so badly. She must be above the mere myness . There are others also beyond me and true happiness one can get only when he/she forgets him/herself. She shall always remember this and she knew this yesterday also when she was furious for nothing.


सुबह की शुरुआत ‘जागरण’ के साथ हुई. अन्तर्मुखी होकर ही अपने अंदर परमात्मा से साक्षात्कार किया जा सकता है. प्रतिदिन आधा घंटा ध्यान का अभ्यास करना होगा. नन्हा आज बहुत दिनों के बाद स्कूल गया है, सो सुबह तैयार होने में नखरे कर रहा था, कहा, ‘अच्छा नहीं लग रहा है’, शायद उसने नूना को ऐसा कहते सुना होगा, बच्चे नकल करने में होशियार होते ही हैं. जून तभी कहते हैं वह उस पर गया है. आजकल वे नियमित खेलने क्लब जाते हैं, अच्छा लगता है, तन-मन दोनों शक्ति से भर जाते हैं.

Wednesday, July 3, 2013

क्लोज़अप अन्ताक्षरी



ऐसा लगता है अब से उसे लिखने का वक्त दोपहर को ही मिलेगा, सुबहें स्टार टीवी, जी टीवी और पी टीवी के कारण कितनी व्यस्त हो गयी हैं. समय का पता ही नहीं चलता कहाँ उड़ जाता है. इस समय उसका दिल टीवी में है पर वह जानती है, यह ठीक नहीं है, कोई अपने काम काज ही भुला बैठे किसी टीवी कार्यक्रम के कारण, यहाँ तक कि  नन्हा भी इस छोटी सी मगर बेहद जरूरी बात को समझता है, जून भी कुछ ज्यादा उत्सुक नहीं दीखते, बस वही है जिसके पास कुछ ज्यादा समय है.

आज शनिवार है, ग्यारह बज गये हैं, जून अभी तक नहीं आए हैं. उसने घर की साप्ताहिक सफाई करवाई, अभी कुछ देर पहले स्नान किया, कुछ देर प्रार्थना की और अब कल का अख़बार व डायरी लेकर बैठी है. कल शाम टीवी के साथ थी सो वे अख़बार नहीं पढ़ सके, शाम को एक मित्र परिवार आया और उन्होंने क्लोजअप अन्ताक्षरी देखी, अच्छा लगा यह कार्यक्रम. पर आज सुबह से उसने टीवी नहीं चलाया है, क्योंकि शनिवार है और शाम को वे देर तक देखने ही वाले हैं इसीलिए.

अगस्त का पहला दिन बेहद गर्म है, बिना पंखे के दो मिनट भी रहने से शरीर पसीने से भीग जाता है. इस वर्ष गर्मी की शुरुआत काफी देर से हुई है. ग्यारह बजने बजने को हैं, उसने लंच बना लिया है, जून आज थर्मस में चाय ले गये हैं, उनके ऑफिस में टी बॉय को लेकर कुछ झमेला चल रहा है, परसों शाम को जब वे मित्र की प्रतीक्षा कर रहे थे उन्होंने वे सब बातें उसे बतायीं.

और आज ग्यारह अगस्त आ गया, मौसम आज भीगा-भीगा सा है. कल रात से वर्षा हो रही है, पिछले दिनों लगभग रोज ही लिखने का ख्याल मन में आया पर शुरू के तीन-चार दिन सफाई में निकल गये, फिर उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था, एक दिन सुबह दो पड़ोसिनें मिलने आ गयीं. कल वे तिनसुकिया गये, वह कुछ कपड़े खरीदने की सोच रह थी, एक नीली टी शर्ट जून के लिए, नाईट सूट नन्हे के लिए और गाउन, सलवार कमीज अपने लिए. पर जून की पसंद की टी शर्ट नहीं मिली, न ही गुसी की नाईट ड्रेस नन्हे के लिए. कल उसने इतने वर्षों में पहली बार फोन से घर बात की. आज सुबह से ही मन शांत है, उठते ही ‘जागरण’ सुना, जागरण के नाम से ही दीदी की याद आ जाती है. उन्हें खत भी लिखना है. इन्सान को आईने की तरह होना चाहिए, आईना सब देखता है और दिखाता है पर कुछ पकड़ता नहीं, संसार में रहकर भी संसार से अलग. आज शाम को एक मित्र परिवार भी आ रहा है, उनसे मिलने के लिए भी शांत होना जरूरी है, पता नहीं वे किस मूड में होंगे, उसने प्रार्थना की, ईश्वर उन्हें खुशियाँ दे. नन्हे का आज चौथा यूनिट टेस्ट है, परसों शाम वे किन्ही मित्र के यहाँ थे तो वह ठीक महसूस नहीं कर रहा था, शायद बच्चे घर की महक को ज्यादा महसूस कर पाते हों. कल सुबह उठा तो ठीक था.


Tuesday, July 2, 2013

डिश एंटीना- स्वप्नों का संसार


सोमवार के बाद आज शनिवार को डायरी खोलने का समय मिला है, यूँ दोपहर को समय होता है पर उस वक्त मन नहीं होता, सुबह ही लिखने का अभ्यास हो गया है और वह है कुछ नियम-कायदों पर चलने वाली, हाँ, यह बात और है कि सारे नियम-कायदे अपनी सुविधा के अनुसार बनाये हैं, और हो भी क्यों न, आखिर वही तो उन्हें बना रही है और उनका उपयोग कर रही है ! तो पिछला पूरा हफ्ता इतनी व्यस्तता में गुजरा कि कल आखिर उसने जून से बात कर ही डाली कि साधू माली को हटाकर जो आजकल उनके आया रूम में रह रहा है, एक नैनी ही रख लेते हैं, बाहर से आकर काम करने वाली नैनी के साथ खुद भी लगना ही पड़ता है. उसने अपनी पड़ोसिन से बात की है, उसकी नौकरानी यदि आने को तैयार हो जाती है तो अच्छा रहेगा तब वह साफ-सफाई और सब्जी काटने के कामों के अलावा कुछ रोचक काम कर सकती है.
 बुधवार की शाम को बिजली चली गयी तो वे अपने एक मित्र के यहाँ चले गये, कल भी बिजली सुबह चार बजे से ही गायब थी, जो शाम को तीन बजे आई, दोपहर को जून भी नहीं आये, उसका मन कुछ अस्त-व्यस्त सा था, पहले दो घंटे एक किताब पढ़ती रही फिर साइकिल चला कर बिना फोन किये असमिया सखी के यहाँ गयी, उसे शायद उम्मीद नहीं थी, खैर, उसे साइकिल चलाना अच्छा लगा. नन्हे को उसकी कक्षा का कैप्टन बनाया गया है, उसने ध्यान दिया कि वह भी उसकी तरह एक ही बात को बार-बार पूछने पर नाराज हो जाता है. उसकी बैक डोर पड़ोसिन गढ़वाली है, उसकी तबियत का हाल पूछने वह उसके घर गयी थी बातों-बातों में उसने बताया कि उसके पति भी उसी वर्ष गढ़वाल के उसी शहर में थे जब वे लोग वहाँ थे.

आज भी अभी तक जून नहीं आए हैं, उसने मेज पर खाना लगा दिया और इंतजार के क्षणों को काटने के लिए पत्र लिखने लगी, तीन पत्र पूरे भी हो गये और उनका पता नहीं था तो उसने डायरी उठा ली है. कल रात लगभग ग्यारह बजे उन्हें कमरे में कुछ आवाज सुनाई दी, पर जगकर देखने के बाद कहीं उसका स्रोत नजर नहीं आया, वह कुछ देर सो नहीं सकी, रात को मन कितनी जल्दी  आशंकित हो जाता है. अचानक उसे याद आया एक खत और लिखना है, जो वह लंच के बाद लिखेगी. बीते हुए कल उसने डिश एंटीना के बारे में जून से बात की और आने वाले कल उनके बगीचे के पिछवाड़े में वह लग भी जायेगा, उसने सोचा कितना अच्छा होगा जब वे जी टीवी के सभी कार्यक्रम देख पाएंगे.

आज फिर जून लंच पर नहीं आएंगे, वे अपने साथ टिफिन ले गये हैं और उसके पास हैं किताबें और ढेर सारा समय, जो चाहे करने के लिए या कहीं जाने के लिए, लेकिन वह तय नहीं कर पाई, कहाँ जाना चाहिए, फिर उसने सोचा, वह स्वयं को कुछ नये कामों में व्यस्त रखेगी, पर वह जानती है ज्यादा समय तो पढ़ने में ही बीतेगा. वह कुछ लिखने का प्रयास भी कर सकती है जैसे कोई भूली हुई कविता या कोई अच्छी सी बात उस किताब से नोट कर सकती है बाद में पढ़ने के लिए. उसे अभी अखबार भी पढ़ना है इतवार का स्पेशल एडिशन भी और नन्हे का लाया बच्चों का जासूसी उपन्यास भी है ‘हार्डी बॉयज’, जो उसे अच्छा लग रहा है, अपने बचपन में उसने ऐसी कोई किताब कभी नहीं पढ़ी. कल जून ने माली की सहायता से डिश के लिए पोल लगवा दिया, नन्हा बहुत खुश है और वे दोनों भी,किसी ने सही कहा है, हर चीज का एक वक्त होता है, कुछ दिन पहले तक वे सोचते थे कि डिश एंटीना लगवाना व्यर्थ है और किसी हद तक हानिकारक भी, पर आज लग रहा है, घर में डिश एंटीना होना तो बिलकुल सामान्य सी बात है. नन्हे को पिछले कुछ दिन से हल्की खांसी है उसे होमियोपैथी दवा दिलवाने शाम को ले जायेंगे.

जून आज दोपहर को खाने पर आएंगे, अभी अभी फोन पर कहा है और वह उत्साह से भर गयी है, सुबह वह ‘लंच पैक’ अपने साथ ले गये थे पर शायद उन्हें फील्ड से जल्दी आना पड़ा है. Nanha made her cry in the morning, she told him to gargle and he became irritated, she doesn't know why did she feel pain, pain of losing him, he is grownup and and doesn't listens as before. She cried that one day he will go so far from her that her presence will make no difference for him, but after 10-11 minutes he saw her red eyes and asked the reason, when she told him, he himself brought tear in eyes, He is so sensitive too and she thinks she is not going to lose him ever. All morning chores is done and after writing few more lines she will read that book of positive thinking and health. Yesterday they got one cute letter from her cousin brother. He seems much mature through his letters. They all will reply him. Raksha bandhan is also in next month, she has to bring rakhis for all of them, sending them is must for her, Rakhies  at least binds them together.  

   



Monday, July 1, 2013

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत


आज आखिर असमिया का गृहकार्य पूरा हो गया, मैडम ने पत्र लेखन का कार्य दिया था, जो उसके लिए कुछ कठिन था. जून को भी अभी तक समय नहीं मिल पाया है, आज वह  लंच पर भी नहीं आ रहे हैं, सुबह टिफिन साथ लेकर गये हैं, उसने सोचा है जब जोरों की भूख लगेगी तब अपने लिए फुल्के सेंकेगी. वह स्नानघर में थी तब एक फोन बजा, पता नहीं किसका हो, शायद जून का ही हो. आज भी मौसम बादलों भरा है, लगता है इस बार गर्मियां पड़ने वाली ही नहीं हैं. कल रात कुछेक मधुर स्वप्न देखे, एक में जूही चावला को भी देखा, सुंदर कपड़ों के ढेर में.

उस दिन सिलचर से आते वक्त मन में कितने प्रण किये थे, स्वयं से कितने वायदे किये थे, किन्तु किसी ने सही कहा है, मैन प्रपोज़ेज गॉड डिस्पोज़ेज, ईश्वर की यही इच्छा है कि वह अपना जीवन जून और नन्हे की देखभाल करते हुए घर का माहौल शांत व सुखद रखते हुए बिताये, घर से बाहर जाकर काम करना अथवा घर में रहकर भी ऐसा काम जिसमें आर्थिक लाभ हो उसके वश में नहीं है. यूँ देखा जाये तो उन्हें इसकी जरूरत भी नहीं है. नन्हा उनके साथ रहकर ही अच्छी तरह पढ़ सकता है, उसे हॉस्टल भेजने का ख्याल दिल से निकाल देना ही बेहतर होगा. जिन्दगी जैसी है उसे वैसी ही जी जाये तो इसमें तनाव कम है. कल जून पौने चार बजे आ गये थे, थके हुए थे पर उसके कहने पर असमिया कक्षा के लिए मान ही  गये. पत्र में ज्यादा गलतियाँ नहीं थीं, पर मैडम के पढ़ाने का तरीका कुछ अनोखा ही है, वह  उनसे पूछ कर उन्हें पढ़ाती हैं. खैर, उन्हें पढ़ना अच्छा लगता है. कल शाम उन्होंने नन्हे का नया बोर्ड गेम खेला जो उसके जन्मदिन पर लाये थे, अत्यंत रोचक खेल है.

आज भी मूसलाधार वर्षा हो रही है, नौ बजे नन्हे को बस में बैठाकर जब घर में दाखिल हुई तो मन कृतज्ञता से भर गया. कितनी भाग्यशाली है वह कि एक सुंदर सा घर दिया है ईश्वर ने. वर्षा, धूप, गर्मी और दुनिया भर की आपदाओं से मुक्त एक छत, जिसके नीचे वे सुरक्षित हैं. कैसे रहते होंगे वे लोग जिनके पास कोई घर नहीं होता. नन्हा अवश्य ही स्कूल बस से उतरकर कक्षा में जाते वक्त भीग गया होगा. अभी कुछ देर पूर्व उनकी बैक डोर पड़ोसिन का फोन आया, बाढ़ पीड़ितों के लिए पुराने कपड़े चाहियें, शाम को ही जून से कहकर सूटकेस उतरवाएगी, कुछेक कपड़े निकल ही आएंगे. कल का नन्हे के नाम पत्र व जन्मदिन का कार्ड आया, दीदी से छोटी बहन हर बार मिल पाती है, वह खुद कब मिल पायेगी ईश्वर ही जानता है.
उसने भी नन्हे के लिए जन्मदिन का गीत लिखा..


हवा, पानी और इस संसार की जितनी भी अच्छी चीजें हैं
इस जन्मदिन पर उन्हें ईश्वर का उपहार मानकर देखो
प्यार जो नसों में खून के साथ बहता है
हँसी जो शिराओं में हर उस वक्त खुली रहती है, जब मन साफ-शफ्फाफ होता है
प्यार, हँसी और इस संसार की जितनी अच्छी खुशबुएँ हैं
इस साल उन्हें उपहार मानकर देखो !