कल उनकी शादी को तीन महीने हो गए, इस खुशी में एक फिल्म देखी ‘प्रेम रोग’. Guide पूरी पढ़ ली वही जिस पर देवानंद की फिल्म भी बनी थी, पर उपन्यास व फिल्म में बहुत अंतर है, और अब यहाँ लॉन में है, हवा का शीतल स्पर्श भला लगता है. कितने दिनों बाद इस तरह प्रकृति के सान्निध्य में बैठकर कलम हाथ में ली है. आज वह देर से आने वाला है. कल कुछ नहीं लिख सकी, इस ओर ध्यान ही नहीं गया. कल रात खाना उसने बनाया, नूना ने थोड़ी सी सहायता की. वह सब कुछ बहुत अच्छी तरह कर लेता है, और उसके न होने पर घर कितना सूना-सूना लगता है. कल घर में रंग-रोगन होगा, घर कितना साफ-सुथरा लगेगा तब, काश यह बगीचा भी ठीक हो जाये !
एक सामान्य सा दिखने वाला जीवन भी अपने भीतर इस सम्पूर्ण सृष्टि का इतिहास छिपाए रहता है, "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" के अनुसार हर जीवन उस ईश्वर को ही प्रतिबिम्बित कर रहा है, ऐसे ही एक सामान्य से जीवन की कहानी है यह ब्लॉग !
Thursday, June 30, 2011
तीन महीने
कल उनकी शादी को तीन महीने हो गए, इस खुशी में एक फिल्म देखी ‘प्रेम रोग’. Guide पूरी पढ़ ली वही जिस पर देवानंद की फिल्म भी बनी थी, पर उपन्यास व फिल्म में बहुत अंतर है, और अब यहाँ लॉन में है, हवा का शीतल स्पर्श भला लगता है. कितने दिनों बाद इस तरह प्रकृति के सान्निध्य में बैठकर कलम हाथ में ली है. आज वह देर से आने वाला है. कल कुछ नहीं लिख सकी, इस ओर ध्यान ही नहीं गया. कल रात खाना उसने बनाया, नूना ने थोड़ी सी सहायता की. वह सब कुछ बहुत अच्छी तरह कर लेता है, और उसके न होने पर घर कितना सूना-सूना लगता है. कल घर में रंग-रोगन होगा, घर कितना साफ-सुथरा लगेगा तब, काश यह बगीचा भी ठीक हो जाये !
Wednesday, June 29, 2011
मसहरी, मच्छर और नींद
कल रात मीठी नींद आयी थी कि मसहरी में चोरी से चले आये जनाब मच्छर ने जगा दिया. सो सुबह नींद कुछ देर से खुली. इस समय रेडियो सीलोन से ‘एक रंग एक रूप’ कार्यक्रम आ रहा है. आज मौसम सुहावना है जैसे वसंत का मौसम हो. सुबह वह जाते समय कह गया था पूरा एक गिलास दूध पीना, पता नहीं वह नूना को क्यों इतना प्यार करता है, उसका इतना ख्याल रखता है. उसके स्नान के लिये गर्म पानी रखकर गया, सचमुच लगता है वे एक हो गए हैं. कह गया है आराम करना कोई काम न करना, जैसे वह सब जानता हो कि उसे आज आराम की जरूरत है, कल घर से पत्र आया था बहुत दिनों के बाद माँ के हाथ का लिखा पत्र.
Monday, June 27, 2011
गीता ज्ञान
समय है शाम का, वे दोनों डाइनिंग कम रायिटिंग टेबिल वाले कमरे में हैं, आज का दिन अच्छा सा था, उजला-उजला. सुबह नींद खुली छह बजे, जल्दी-जल्दी में बस हॉर्लिक्स बनाया. दोपहर बाद टीटी खेलने गए फिर लाइब्रेरी, शाम का नाश्ता और अब यहाँ हैं, पत्र लिखने हैं. आजकल नूना लोकदास बर्मन की सरल गीता पढ़ रही है पर पढ़ते वक्त जितना समझ में आता है, बाद में याद नहीं रहता, आचरण में नहीं ला पाती. जैसे क्रोधित न होने की सीख है, छोटी-छोटी बातों पर रुष्ट होना और दुखी होना नहीं छूटता. वह सोचती है कि ईश्वर उसके साथ है और वही उसे मार्ग दिखायेगा.
Saturday, June 25, 2011
दादा जी
कल फिर पता नहीं क्या हुआ मुट्ठी में से रेत की तरह समय फिसल गया और नूना कुछ भी नहीं लिख सकी...वास्तव में यह लिखना अर्थयुक्त है या नहीं? किन्तु वह बिना इसकी परवाह किये अपने विवाहित जीवन के आरंभिक वर्ष की सुखद या कभी दुखद भी, घटनायें लिखती जायेगी, फिर साल दर साल बीतते जायेंगे... उन्हें यहाँ आये पूरे दो महीने दो दिन हो गए हैं. कल लाइब्रेरी में साप्ताहिक हिंदुस्तान व धर्मयुग के होली विशेषांक के कुछ भाग पढ़े, Captain Pascoe की एक मार्मिक कहानी Rose and Rainbow भी पढ़ी. कल सुबह वह बोला, नींद आ रही है, सो जाओ तुम भी, हाफ सीएल ले लेंगे, पहले भी कितनी बार वह ऐसा कहता है पर कल वह सचमुच बहुत थका लग रहा था सो पहली बार वे पुनः सो गए और आठ बजे उठे, पर दिन भर भारीपन बना रहा. अब कभी वह उसे ऐसा नहीं करने देगी. उसने सोचा अब तक घर में सभी दादाजी की मृत्यु की घटना के दुःख से उबर चुके होंगे.
Friday, June 24, 2011
भरवां टमाटर
आज यह गीत याद आ रहा है, यह जिंदगी चमन है, सुख-दुःख फूल और काँटे, क्यों न हम तुम मिलकर इनको बांटें...आज दोपहर को नूना ने उसे खुशी-खुशी विदा नहीं किया था, बाद में वह सोचती रही कि क्या वह भी अब तक इस बारे में सोचता होगा या काम में व्यस्त होकर भूल गया होगा, अब वह आने ही वाला है, कल उसने एक अच्छी बात कही थी कि जहाँ अपनत्व होता है कोई अपने मन की बात झट कह देता है, और मजा तब है जब दूसरा उसको अन्यथा न ले. पर उसे अपनी ही बात याद नहीं रही. आजकल वह टैटिंग सीख रही है. शाम को वे पहले टेबल टेनिस खेलते हैं फिर लाइब्रेरी जाते हैं. आज उसने वही नीली कमीज पहनी है, जो पहन कर घर आया था मंगनी के वक्त, कितने फोटो हैं उसके इन कपड़ों में. कल साप्ताहिक हिंदुस्तान से पढ़कर भरवां टमाटर बनाये थे उसे बहुत पसंद आये.
Thursday, June 23, 2011
पूर्वाभास
आज एक बार फिर तीन दिन बाद इस डायरी से बातें कर रही है. शुक्रवार की दोपहर एक अजीब स्वप्न देखा, वह दादाजी के घर पर है, सीढ़ियों से उतर रही है चाचाजी कुछ कह रहे हैं समझ नहीं पाती. फिर अचानक लगा कोई सफेद छाया छत से उतर कर उसके पास आयी और छूकर चली गयी. नींद खुल गयी और मन कितनी आशंकाओं से भर गया, और आज ही यह दुखद समाचार मिला कि दादाजी नहीं रहे. कितना जरूरी होता है परिवार में एक बुजुर्ग का साया. शनिवार को गोल्फ फील्ड में एक चौकीदार ने उन्हें टोका तो उन्होंने निर्णय लिया कि अब से शाम को वहाँ टहलने नहीं जायेंगे. पर वे बहुत उदास थे इस घटना से. कल लगभग दो माह बाद वे तिनसुकिया गए, यात्रा अच्छी रही. आजकल नूना Elk Moll की Sideman and son पढ़ रही है. वह इस समय लैब में होगा. उससे इतना प्यार करने के बावजूद नूना कभी कभी उसके प्रति विनम्र नहीं रह पाती पर वह इतना भरा हुआ है स्नेह से कि उसकी बात घुल जाती है और बाकी रहता है प्यार बस प्यार !
Wednesday, June 22, 2011
भुने चने
आज सुबह उसे बहुत नींद आ रही थी, पर ऑफिस जाना था सो नूना ने उठा दिया. कल रात्रिकालीन भोज अच्छा रहा. वे ग्यारह बजे घर लौटे. वह पहली बार ऐसी किसी पार्टी में शामिल हुई थी, कभी तो बहुत उलझन सी लगती थी, पर यहाँ के लोगों के जीवन का यह भी एक हिस्सा है. नए लोगों से परिचय भी हुआ एक बंगाली व एक असमिया महिला से बातचीत हुई. कल शाम को बहुत तेज वर्षा हुई, दोपहर को वह जल्दी घर आ गया था, वे बाहर खड़े थे, एक माली को आवाज दी नूना ने, उनके लॉन की घास बहुत बड़ी-बड़ी है, एक बार बराबर हो जाने पर लॉन कितना सुंदर लगेगा. कल उसे अचानक रेत में चने भूनने का ख्याल आ गया, कितने दिनों बाद भुने हुए चने खाए उन्होंने. आजकल ज्यादातर समाचार इराक-इरान युद्ध के बारे में होते हैं, पिछले साढ़े चार वर्षों से चली आ रही यह लड़ाई जाने कब खत्म होगी. सोने का मूल्य दो हजार से ऊपर जा रहा है.
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