Showing posts with label रात्रि भोज. Show all posts
Showing posts with label रात्रि भोज. Show all posts

Wednesday, June 22, 2011

भुने चने


ज सुबह उसे बहुत नींद आ रही थी, पर ऑफिस जाना था सो नूना ने उठा दिया. कल रात्रिकालीन भोज अच्छा रहा. वे ग्यारह बजे घर लौटे. वह पहली बार ऐसी किसी पार्टी में शामिल हुई थी, कभी तो बहुत उलझन सी लगती थी, पर यहाँ के लोगों के जीवन का यह भी एक हिस्सा है. नए लोगों से परिचय भी हुआ एक बंगाली व एक असमिया महिला से बातचीत हुई. कल शाम को बहुत तेज वर्षा हुई, दोपहर को वह जल्दी घर आ गया था, वे बाहर खड़े थे, एक माली को आवाज दी नूना ने, उनके लॉन की घास बहुत बड़ी-बड़ी है, एक बार बराबर हो जाने पर लॉन कितना सुंदर लगेगा. कल उसे अचानक रेत में चने भूनने का ख्याल आ गया, कितने दिनों बाद भुने हुए चने खाए उन्होंने. आजकल ज्यादातर समाचार इराक-इरान युद्ध के बारे में होते हैं, पिछले साढ़े चार वर्षों से चली आ रही यह लड़ाई जाने कब खत्म होगी. सोने का मूल्य दो हजार से ऊपर जा रहा है.