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Tuesday, July 14, 2020

तेनाली रामा में कौए



दोपहर बाद के चार बजे हैं. जून पिताजी से बात कर रहे हैं. उनके यहाँ भी ग्यारह अप्रैल को चुनाव होने हैं. कल रात को गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई. पिछले एक-दो दिन से बाएं कान में भारीपन लग रहा है, व सांय-सांय की आवाज आ रही है. नाक-कान के विशेषज्ञ को फोन किया पर वह शहर से बाहर गए हैं. सम्भव है उनके लौटने तक कान ठीक-ठाक ही हो जाये. पिछले दिनों होली पर गहमा-गहमी रही. उस दिन तीन परिवार आये , सभी को गुझिया खिलाईं. असम में यह उनकी अंतिम होली थी. आज दोपहर को कम्पनी  के भूतपूर्व उच्च अधिकारी के परिवार को लंच पर बुलाया था, उन्हें एक स्टोल दिया जो बड़ी भांजी विदेश से लायी थी, उन्हें अच्छा लगा. वे भी उनके नए घर के लिये कांच का एक कछुआ लाये हैं. कहते हैं, शुभ होता है. जीवन इसी आदान-प्रदान का नाम है. नैनी ने उनसे कहा है, उसके पति को गेस्टहाउस में नौकरी दिला दें, पर अब जब वह यहाँ से जा रहे हैं, शायद ही कुछ कर पाएं. कल सुबह स्कूल गयी थी. नई अध्यक्षा ने स्कुल के अकाउंट में काफी रूचि दिखाई. वह स्वयं एक कम्पनी में सीएसआर प्रोजेक्ट देखती हैं. पिछले दिनों कई अनोखे स्वप्न देखे, जिन्हें लिखा नहीं सो अब याद नहीं हैं , पर उनसे पिछले जन्मों के कई राज पता चले जिनका असर वर्तमान तक चला आया है. वे  जिन विकारों का अनुभव अपने भीतर करते हैं उनकी गाठें उन्होंने पिछले जन्मों में बाँधी होती हैं या कहना चाहिए कि उनके जीवन में जो भी घटता है वह पूर्व का फल होता है, उसके प्रति उनकी प्रतिक्रिया वर्तमान में किया उनका कर्म होता है. उन्हें अपने भीतर की गाँठों को पहले देखना है, फिर उन्हें खोलना है. बंधी हुई चेतना से विकार ही जन्म लेते हैं. मुक्त चेतना के साथ जीना सीखना है, जिसमें पूर्व के संस्कार के कारण कोई यन्त्रवत प्रतिक्रिया नहीं होती, बल्कि सजग होकर नए कर्म बढ़ने से रोकने भी हैं. 

तेनालीराम में आज कौओं का प्रकोप दिखाया गया, कम्प्यूटर ग्राफी का कमाल था. आज योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, उसे आज क्रोध आया. जो भीतर भरा है वह बाहर तो आएगा ही, पर इसके लिए प्रतिक्रमण करना होगा. आगे उसने कहा, पिछले दो वर्षों से जब से वह योग साधना करने आ रही है, उसने अपने को अतीत के बंधनों से मुक्त किया है. इंसान कितनी जंजीरों में जकड़ा रहता है. गुरूजी के वाक्य उसे शीतलता से भर देते हैं. कल उसकी बहने आ रही हैं, उन्हें भी साथ लेकर आएगी एक दिन. आज दोपहर कई दिन बाद ‘डायरी के पन्नों पर’ ब्लॉग में  लिखा, मन में उत्साह जगा और सद प्रेरणा मिली एक पुरानी डायरी से, और उस समय भी परमात्मा के प्रति श्रद्धा थी, पर अनुभव नहीं था. एक लंबी यात्रा रही है उसके जीवन में अध्यात्म की, जो अभी तक चल रही है. सुबह देर से उठे वे आज, कल शाम एक विदाई समारोह में गए थे, सोने में देर हुई. कल दोपहर तिनसुकिया में डॉ को कान दिखाया, पहली बार सिरिंज से साफ़ भी करवाया. अभी भी टिंगलिंग की आवाज आ रही है. उसकी देखा-देखी अचानक जून भी अपने कान में कुछ आवाज सुनने का प्रयत्न करने लगे हैं. 

आज भारत सेटेलाइट को मार गिराने वाली क्षमता को हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है, प्रधानमंत्री ने इस बात को देश के सम्मुख रखा तो विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. चुनाव आने वाले  हैं, मात्र तरह दिन रह गए हैं, सो सभी पार्टियां  वोटरों को रिझाना चाहती हैं. बीजेपी ही चुनाव जीतेगी इसमें दो राय नहीं हैं. प्रधानमंत्री का चुनावी दौरा आरंभ हो गया है. सुबह आजकल सुहानी होती है अब स्वेटर की आवश्यकता नहीं है. 

और अब उन पुराने दिनों की बात.. दादाजी के यहाँ रहते दो दिन हो गए, परसों उसे घर वापस जाना है. घर जाना भी कितना सुखद अवसर है, उसका कमरा, मेज.. उसका बेड, किताबें, माँ-पिताजी, बहन, भाई, भाभी, दीदी, भांजे, भांजी.. सबसे मिलना. कमलकुंड, मधुवन या फिर वह मैदान, उसका प्रिय वृक्ष.. सब ही तो उसकी कमी महसूस करते होंगे, सूरज निकलता होगा वहाँ पर उसे उसकी तरह देखने वाला कौन होगा ! उसके पत्थर मेज पर रखे होंगे. फिर परीक्षा की तैयारी. यहाँ रहकर कुछ लाभ हुआ है तो यही कि दादी-दादा जी का आशीर्वाद मिला. लग रहा है कितने दिन बाद जा रही है ! 

क्या लिखे ? उसके बचपन की सखी के पिताजी नहीं रहे. कल शाम वह उससे मिली थी, वह खुश थी, क्या मालूम था कि तीसरा दिल का दौरा कल रात को ही पड़ना है. वह उससे मिलने नहीं गयी, क्या कहेगी मिकलर, समझ नहीं आता... उसका मन आज ही जाने को हो रहा है, अच्छा नहीं लग रहा कुछ भी. आज शिवरात्रि है, पिछली शिवरात्रि कैसे मनायी उसे याद नहीं, [अर उससे पिछली अच्छी तरह याद है, तब वे दूसरे शहर में थे. तब भी उसने व्रत रखा था. कल जाने से पहले कहना बनकर जाएगी, दिन का भी और शाम का भी. 

उस सखी को देखा आज, उसके घर गयी थी, बेहद उदास, सूजी आँखें, रूखे बाल, उसकी दीदी उससे भी ज्यादा उदास थीं. 

Monday, July 15, 2019

साईं भजन



जून शाम को आये तो उन्होंने टीवी पर एक फिल्म का कुछ अंश देखा, फिर आमिर खान की 'सीक्रेट सुपर स्टार' का भी. सोने गयी तो नींद का दूर-दूर तक पता नहीं था, पता नहीं चला बाद में कब नींद आई, सुबह फिर कोई देवदूत जगाने आया. आज इतवार है सो जून ने नया नाश्ता बनाया, 'पनिअप्पम तथा फिल्टर कॉफ़ी'. बाद में सभी से फोन पर बात की, हर इतवार को वे एक-डेढ़ घंटा इसी में बिताते हैं, हफ्ते भर के समाचार मिल जाते हैं. बगीचे में ढेर सारे फूल खिले हैं, फूलों का ही मौसम है यह फाल्गुन का महीना. दो दिन बाद शिवरात्रि है. उस दिन बीहुताली में ब्रह्माकुमारी का कोई कार्यक्रम भी होने वाला है. वह इस बार रात्रि जागरण करेगी, वैसे भी देर तक नींद कहाँ आती है. भीतर सुमिरन चलता रहता है चाहे आँख खुली रहे या बंद. कभी रूप बनकर, कभी गंध बनकर आस-पास ही कोई डोलता रहता है. अब वह जगाता भी है, पढ़ाता भी है. जून ने एक नयी डायरी दी है, उसमें विशेष अध्यात्मिक अनुभव लिख रही है आजकल. सुना है, कबीर पहले भगवान को पुकारते थे और फिर एक दिन भगवान उनके पीछे कबीर-कबीर कहकर पीछा करने लगे. कैसा अनोखा है प्रेम का यह आदान-प्रदान ! दोपहर को नन्हे और सोनू से बात हुई, वे दोनों भी प्रेम के एक बंधन में बंधे हैं, जहाँ अभिमान की गंध भी नहीं. प्रेम और अभिमान का साथ हो ही नहीं सकता, प्रेम तो समर्पण का ही दूसरा नाम है. जून बाहर टहलते हुए फोन पर अपने मित्र से बात कर रहे हैं. दोपहर को तीन छोटी लडकियाँ आयीं जिन्हें गणित पढ़ाया, फिर कुछ देर बैडमिंटन खेला. अब समय है 'अष्टावक्र गीता' पर गुरूजी की व्याख्या सुनकर ध्यान करने का. ध्यान मन के पार होकर ही किया जा सकता है, बल्कि मन के कारण ही ध्यान उपलब्ध नहीं होता. अमन अवस्था ही ध्यान है. ध्यान कार्य-कारण में नहीं आता. कार्य-कारण के कारण ईश्वर को नहीं पाया जा सकता है. कार्य-कारण का सिद्धांत जहाँ लागू होता है वहाँ नियति है, पर परमात्मा भाग्य से नहीं मिलता, अर्थात उनके कुछ करने से नहीं मिलता. परमात्मा कृपा से मिलता है. बल्कि परमात्मा सदा ही है, सब जगह है, उसे देखने की दृष्टि हमें जगानी है. परमात्मा सब सीमाओं के पार है. ध्यान उन्हें वह अवसर देता है कि वह दृष्टि अपने भीतर जागृत कर लें.  

कुछ देर पहले कम्पनी के आई टी विभाग से एक मकैनिक आया माउस बदलने, उसके पिता का कुछ समय पहले देहांत हो गया था, कहने लगा, माँ को योग सिखने के लिए लायेगा किसी दिन. कल सुबह स्कूल में बच्चों को योग के बाद ध्यान कराया, एक अध्यापिका ने धन्यवाद कहा, वह आजकल पहले की तरह क्रोध नहीं करती हैं. कल शाम क्लब में 'पैडमैन' थी, अच्छी फिल्म है, सामाजिक विषय को लेकर बनायी गयी. उसके बाद महिला क्लब की एक सदस्या का विदाई समारोह था. आज आसू ने 'बंद' का आवाहन किया है, कम्पनी के वाहन नहीं चल रहे हैं, जून अपनी गाड़ी लेकर दफ्तर गये हैं. ऐसे में थोडा सा डर तो बना ही रहता है, फ़ील्ड जाने वाली गाड़ियों को पत्थर मारने की घटनाएँ भी कभी-कभी हो जाती हैं. एक सखी ने अपने घर पर 'साईं भजन' रखा है, साईं बाबा को मानने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. उसने देखा है सभी भजनों में थोडा सा परिवर्तन करके साईं के नाम से गाते हैं. उसने मना कर दिया, क्योंकि वही समय शाम की योग कक्षा का होता है.


Wednesday, May 27, 2015

गुलाबी हाथी


आज सद्गुरु शिवतत्व की महिमा बखान कर रहे थे. शिव राम को भजते हैं और राम शिव के उपासक हैं. वह तो कृष्ण की उपासक है, वह उसके मन को पहले ही हर चुके हैं. आज सुबह क्रिया के बाद कुछ भिन्न अनुभूति हुई, जैसे वह अपने किसी पिछले जन्म में पहुंच गयी है. कल बच्चन की आत्म कथा के तीनों भाग समाप्त हो गये, चौथा भाग लेने एक दिन पुस्तकालय जाना होगा, उन पर लेख लिखने के बाद. आज श्री श्री ने निज स्वरूप से भी परिचित कराया. स्वयं का ‘होना’, ‘इसका ज्ञान होना’ और आनंद होना यही तो सच्चिदानंद है, पर अभी तक वह उस स्थिति तक नहीं पहुंची है. कभी प्रमाद घेर लेता है, कभी क्रोध, कभी वाणी में रुक्षता आ जाती है और कभी अहंकार का शिकार हो जाती है. परनिंदा में सुख आता है, न जाने कितने अवगुण अभी भी हैं जो ईश्वर की कृपा से ही निकल सकते हैं. अभी तो ‘तू ही है’ भाव ही सिद्ध हुआ है. ईश्वर ही सब कुछ है, यह जगत ब्रह्म का ही स्वरूप है, और जगत में वह भी है, सो वह भी उसी का स्वरूप हुई, यह बात जब तक अनुभव में न आये तब तक मन से मानकर ही चलना होगा. वह मौन में ही अनुभव में आ सकती है, सत्य को बोलकर व्यक्त नहीं कर सकते क्योंकि उसी क्षण वे अलग हो जाते हैं.

सुबह दो फूल चढ़ाकर जब वह आँखें बंद करती है तो एक ज्योति निकल कर उसे छूती हुई प्रतीत होती है. बहुत दिनों पहले ‘शारदा माँ’ का जीवन चरित पढ़ा था, वह कहती हैं कि कृष्ण ज्योति के रूप में भक्त के दिए फूलों व प्रसाद को स्पर्श करते हैं. वह हर क्षण उनके साथ है, उनकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए, पर पूजाघर में व्यवहार कितना भी शालीन क्यों न हो यदि बाहर विकारों के अधीन हुए तो पूजा व्यर्थ ही हुई. आज सुबह समय पर उठे वे, सारे काम समयानुसार हो रहे हैं पर ध्यान नहीं कर पायी. फोन पर काफी वक्त गया, लगभग सभी सखियों से बात हुई. सुबह सद्गुरु के वचन सुने, हृदय को शुद्ध करना ही होगा, उसके बिना ईश्वर कैसे प्रकट होंगे. देहात्म बुद्धि से स्वयं को मुक्त करना होगा. तभी ध्यान सधेगा और पुराने कर्मों के बीज अपने आप नष्ट होने लगेंगे. उसे इस जन्म में इतना कुछ मिला है कि जन्मों की साध मिट गयी, अब कुछ पाना शेष नहीं है सिवाय उसके ! कल शाम जून ने कहा कि वह अपने आप से बातें करती है और हँसती है. उन्हें क्या पता हर वक्त उसका मन उस दिव्य लोक में रमण करता है जहाँ कृष्ण हैं. एक पवित्रता का भाव छा जाता है अनिवर्चनीय आनंद..कल्पनातीत शांति और सुख जो इस जगत की वस्तुओं में तो नहीं ही मिलता...

आज सुबह उसने थोड़ी देर के लिए उदास होने का अभिनय करना चाहा, पर नहीं हुआ. दिल तो भीतर छलक रहा था सो थोड़ी ही देर में अभिनय से मन भर गया. जून कुछ समझ पाए या नहीं पर वह भी बहुत धैर्यवान हैं अथवा तो मन की बात छिपाने में माहिर हैं, सो कुछ कहा नहीं कुछ भी जाहिर नहीं किया न क्रोध न आश्चर्य, पर उसने स्वयं को अपनी परीक्षा में सफल पाया. यह प्रभु की कृपा है, वह हर पल उसके साथ हैं. अगले महीने नामरूप में एडवांस कोर्स है, उसे जाना है. जून भी तैयार हैं उसे भेजने के लिए. टीवी पर बाबाजी ध्यान करा रहे हैं. हजारों की संख्या में लोग ॐ नमो शिवाय का जप कर रहे हैं. उन्हें ध्यान से पहले प्रेम से उस चैतन्य को पुकारना है. धीरे-धीरे भीतर उतरना है, परमात्म रस प्रकट करना है. हृदय प्रेम से इतना परिपूर्ण हो कि अन्य किसी भाव के लिए कोई स्थान न रहे. कल शिवरात्रि है, वह उपवास रखेगी, जो शरीर के दोषों को दूर करने के साथ-साथ मन के दोषों को भी दूर करेगा तो मिथ्या उदासी ग्रहण करने की प्रेरणा भी नहीं होगी. वाणी रुक्ष नहीं होगी, प्रियजनों की उपेक्षा नहीं होगी, सभी के लिए कल्याण की भावना होगी. परदोषों  पर  नजर नहीं जाएगी. वास्तविकता को जानने का विवेक जगेगा. कामनाएं नष्ट होंगी. परमात्मा का स्वरूप स्पष्ट होता जायेगा !

रात को अलार्म साढ़े बारह बजे ही बज गया, उनकी नींद टूट गयी, उठने को हुए, पर जून ने घड़ी देखी तो पता चला फिर सुबह पांच बजे के बाद ही उठ पाए. जून समय से ऑफिस चले गये, व्यायाम आदि किया बस सत्संग नहीं सुन पाए. जून के जाने के बाद गुरूमाँ के वचन सुने. जीवन में सतोगुण कैसे आये इसका वर्णन वह कर रही थीं. ईश्वर भक्त से उसकी भलाई की अपेक्षा के अतिरिक्त कुछ भी अपेक्षा नहीं रखता. वह कदम कदम पर चेताता है कि व्यर्थ के कार्यों से बचें. सद्गुरु को कल उसने स्वप्न में देखा, वे सभी सत्संग में बैठे हैं. एडवांस कोर्स कर रहे हैं. वह रंगों को ब्रश से कागज पर उतार रही है. हाथी रंगना है तो वह गुलाबी रंग लगाती है तभी एक परिचित साधक गुरूजी को पेंटिंग करने के लिए सब कुछ उठाकर दे देते हैं. वह ब्रश से कई सारे रंग एक-एक कर लगाने लगते हैं, ब्रश फ़ैल जाता है, वे उनके निकट हैं. पता नहीं यह स्वप्न क्या कहना चाहता है या मात्र स्वप्न ही है !



Wednesday, February 4, 2015

वेद की ऋचाएं


आज शिवरात्रि है. सुबह दीदी का फोन आया, परसों शाम वह श्री श्री रविशंकर जी के कार्यक्रम में गयीं और अगले हफ्ते AOL का कोर्स करने जा रही हैं. टीवी पर आत्मा आ रहा है जिसमें भक्तियोग की महत्ता पर बल दिया जा रहा है. अभी-अभी एक सखी से बात की, वह शिवरात्रि का व्रत रख रही है, श्री श्री के बारे में भी चर्चा हुई और भौतिक संसार की भी, जो उनके मनों में गहरा समाया हुआ है. कृष्ण को स्थापित करें तो कैसे करें, मन में इतना बड़ा ब्रह्मांड समाया है. जो इसका स्रोत है, जिस तत्व से सारे तत्व उत्पन्न हुए हैं उसी को स्थान नहीं है, यह एक विडम्बना ही तो है. कृष्ण आदि हैं, समस्त सृष्टि का कारण हैं. ज्ञान, प्रेम और आनंद का सागर हैं और वे भौतिक देह नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिक स्फुलिंग हैं जो परम सत्य का अंश हैं. पूर्ण का अंश होते हुए वे क्यों विखंडित जीवन व्यतीत करें, कृष्ण का आश्रय लेने पर ही वे शांति व संतोष का अनुभव करते हैं. ऐसा सुख जो शाश्वत है, जो बदली हुई परिस्थितियों के कारण प्रभावित नहीं होता. यह जगत स्वप्नवत है, क्षणिक है, देह के संबंध भी शाश्वत नहीं हैं. युगों युगों से तो वे संसार के गुलाम रहते आये हैं, यदि इस जन्म में भक्ति का उदय हुआ है तो उसे प्रश्रय देना होगा, आँधी, धूल से उसे बचाना होगा. कृष्ण से स्नेह करना होगा और वह तो हर पल उनसे स्नेह करता है !

भक्ति मार्ग सरल है, लेकिन भक्ति उसी के हृदय में पल्लवित होगी जो सरल हृदय का होगा. भगवद गीता में कृष्ण का वचन है कि निराकार की अपेक्षा साकार की पूजा करना शीघ्र प्रगति प्रदान करता है. अचिन्त्य, अव्यक्त, निराकार रूप की अपेक्षा मनमोहन का सुंदर, सुहावना रूप हृदय को शीघ्र एकाग्र करता है और व्यवहारिक भी है भक्ति मार्ग, इसमें कुछ छोड़ना नहीं पड़ता बल्कि ईश्वर को स्वयं से जोड़ना होता है और धीरे-धीरे भौतिक विषयों से मन अपने आप विरक्त होता जाता है. आज नन्हे की गणित की परीक्षा है, पिछले चार-पांच दिनों में उसने बहुत परिश्रम किया है. जो अवश्य रंग लायेगा. कल सुबह दीदी से पिताजी के स्वास्थ्य की बात की, उनकी आँखों का इलाज चल रहा है, उसने भी बात करनी चाही पर आज सुबह से ही फोन काम नहीं कर रहा है. कल भागवद में वेद की ॠचाओं द्वारा कृष्ण की स्तुति पढ़ी, जैसे सब कुछ स्पष्ट होने लगा, अब कोई संदेह नहीं रह गया है, सारे संशय मिट गये हैं. अध्यात्म जो कभी रहस्य प्रतीत होता था, अपने सारे सौन्दर्य के साथ उसके सम्मुख प्रकट हो उठा है. यह सभी सद्गुरु की कृपा से सम्भव हुआ है. उस दिन जो अनुभव हुआ था उसके बाद ही ज्ञान क्लिष्ट नहीं लगता है. भगवद गीता भी स्पष्ट हुई है पहले कई श्लोक बिना समझे ही पढ़ जाती थी, गुरू की कृपा महान है.

कल रात टीवी पर सद्गुरु को देखा, उनकी मुस्कुराहट मोहने वाली है और सहजता आकर्षक है. ज्ञान की बात वह सरल शब्दों में कहते हैं. “Intelligence with innocence is enlightenment. ‘I don’t know’ becomes beautiful when one starts knowing that he does not know everything or there is lot more to know.” वे जितना जानते हैं वह बहुत कम है इस बात का ज्ञान हो तो अहंकार नहीं होता, वे सहज होते हैं और मन सरल होने पर ही भक्ति को प्राप्त होता है. गुरूजी कहते हैं you are love and you should smile always what may come. AOL के सूत्र उन्हें सदा याद रखने चाहिए तो ही जीवन सुखमय और सरल रहेगा. नन्हे का गणित का पेपर ठीक हुआ है. अगले हफ्ते अंग्रेजी का अंतिम पेपर है और उसके अगले दिन उन्हें  यात्रा पर निकलना है. पिछले पन्द्रह-बीस मिनट से वह फोन पर बात कर रहा है. कल शाम बल्कि रात को कुछ देर उसने भागवत सुनी. गुरूजी का इंटरव्यू भी देखा. धीरे-धीरे उसे भी अध्यात्म का ज्ञान मिल रहा है. रोज सुबह कानों में ईश्वर की चर्चा पडती है और ईश्वर का नाम इतना प्रभावशाली है कि कोई भी उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता. उसकी भक्ति भी नैतिकता से शुरू हुई थी !


Sunday, July 6, 2014

शिवरात्रि का उत्सव


There was a time when  mind was full of despair and there was a time when  mind was full oh hope. In fact both were not real.

फरवरी आरम्भ हुए अठारह दिन हो गये हैं और आज प्रथम बार डायरी खोलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है, पिछले दिनों काफी कुछ घट गया जिसमें उसका यह निश्चय स्पष्ट हो गया कि अगले सत्र से वह स्कूल नहीं जा रही है. जून की अस्वस्थता का कारण उसका घर से बाहर जाना ही था. आजकल वह ठीक हैं, पर यहाँ तक पहुंचने के लिए उन दोनो को ही तनाव और घुटन के माहौल से गुजरना पड़ा. उन दिनों डायरी खोलते हुए भी डर लगता था कहीं मन की पीड़ा कटु शब्दों का रूप न धर ले. नन्हे की परीक्षाएं ठीक चल रही हैं, आज उसका संस्कृत का इम्तहान है. उसका स्कूल आज बंद है. पिछले दिनों वहाँ भी काफी कुछ बदल गया है. हेड मिस्ट्रेस ने इस्तीफा दिया, एक सीनियर टीचर को उनका कार्यभार सौंपा गया. अभी तक दिसम्बर की भी पे टीचर्स को नहीं मिली है. वार्षिक परीक्षाएं पहली मार्च से आरम्भ होनी हैं. स्कूल में तैयारियां ठीक हो रही हैं पर टीचर्स में पहले का सा उत्साह नहीं है. उसका सेकंड सिग्नेट्री होना भी किसी-किसी को खटक रहा है पर उसने अब मन से अपने को स्कूल से पूरी तरह अलग कर लिया है सो किसी बात का असर नहीं पड़ता. वैसे भी सदा उसका प्रयास यही होता है कि मन को मुक्त रखे, जिससे उच्चता की ओर उन्मुख हो सके. पिछले दिनों जिन्दगी ने एक और पाठ सिखाया है कि आपका प्रिय से प्रिय पात्र भी अथाह दुःख का कारण हो सकता है. यह बात तो वह पहले से मानती थी कि व्यक्ति को अपना रास्ता स्वयं तय करना पड़ता है उस दिन जून को अपने मन की बात बताकर उस मार्ग का पता भी चल गया, उसका मार्ग सहज है.. सरल भी और जून और नन्हा दोनों के मार्गों को छाया और स्नेह से पूर्ण करने वाला.

आज फरवरी का अंतिम दिन है. पुनः वह अपना लेखन का अभ्यास जारी नहीं रख पायी. कल से स्कूल में परीक्षाएं आरम्भ हो रही हैं. उसके बाद कापी जांचने का काम शुरू होगा, रिजल्ट मार्च के अंत में दिया जायेगा. इसका बाद ही वह त्यागपत्र दे देगी और पुनः स्वतंत्र हो जाएगी अपने समय को अपने अनुसार बिताने के लिए. संगीत, किताबें और बागवानी में. राज्य के एक मंत्री की मृत्यु के विरोध में आज ‘एजीपी’ ने असम बंद का आह्वान किया है. सभी को पैदल ही दफ्तर जाना पड़ा है. लंच में जून घर देर से आएंगे. आज उसने बहुत दिनों बाद दो पत्र लिखे. बढ़ई ने नन्हे की स्टडी टेबल में रैक्स लगा दिए हैं, बहुत सुंदर और सफाई से काम किया है उसने. नन्हा अपने मित्रों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया है. कल रात्रि उसने स्वप्न में सुंदर स्थान देखे, मनोहर बगीचे और झील, झरने आदि. कल पड़ोसी मिलने आये थे, उन्होंने यात्रा के फोटोग्राफ्स उन्हें दिखाए और इसी बहाने स्वयं भी पुनः देखे, वही स्वप्न में एक बार फिर. जून और नन्हा आयें इससे पहले, अभी वह कुछ देर भगवद् गीता पढ़ेगी, फिर कुछ मिनट का ध्यान और रियाज. मौसम आज खिला हुआ है जो उसके दिल के करीब है.

आज शिवरात्रि का उत्सव है. अभी कुछ देर पूर्व वह बैक डोर पड़ोसिन के यहाँ गयी, उसके स्कूल छोड़ने की बात वह पहले से ही जानती थी. जून आज आ रहे हैं, परसों वह शिवसागर गये थे. नन्हे और उसे अब अकेले रहने का अभ्यास हो गया है सो अकेलेपन के अलावा और कोई दिक्कत नहीं हुई. परीक्षा की कापियां जांचने में कल तो उसे समय का पता ही नहीं चला, अभी कुछ दिन और चलेगा यह सिलसिला, फिर सिलाई के काम में व्यस्त रहेगी और तब मेहमानों के आने की तैयारी व उनके साथ कुछ दिन बेहद व्यस्त बीतेंगे. बैसाखी पर उनके जाने के बाद घर की सफाई, स्वेटर आदि धोकर रखना. फिर मई में उनके खुद के जाने की तैयारी यानि जून में जाकर वे कम व्यस्त होंगे, फिर नन्हे के स्कूल खुलने का वक्त आ जायेगा और जिन्दगी का सफर यूँ ही चलता चला जायेगा.






Tuesday, May 21, 2013

शिवरात्रि का व्रत



सोमवार की सुबह वे तेजपुर के लिए रवाना हुए. नन्हे के इन्टरव्यू के बाद परसों, मंगल की शाम को वापस आये. कल सुबह घर व कपड़ों की सफाई में गुजर गयी. जून को पूरा विश्वास है, दाखिला हो जायेगा. उन्हें स्कूल की इमारत काफी शानदार लगी, अभी फर्नीचर वगैरह नहीं थे कक्षाओं में. पहली अप्रैल से स्कूल शुरू हो रहा है. इतने कम समय में कैसे होगा और अभी टीचर्स का इन्टरव्यू भी होना शेष है. लेकिन ये सब स्कल वालों की समस्याएं हैं. उनके सामने  है, नन्हे की कक्षा तीन की वार्षिक परीक्षा. जिन बातों का कोई हल नहीं उन्हें वक्त पर छोड़ देना ही बेहतर है. नन्हे ने कल पहली बार स्वयं बोर्डिंग स्कूल जाने को कहा, वे जानते हैं, वह  वह खुश रहेगा और कक्षा में अच्छे विद्यार्थियों में से भी. तीन महीने शुरू में रहने के बाद दो महीने की छुट्टियाँ होंगी. जिन्दगी में परिवर्तन होगा, पिछले नौ-दस सालों से चली आ रही जिन्दगी में.
आज फिर कुछ दिनों के अन्तराल के बाद डायरी खोली है. कुछ दिन अस्वस्थता और फिर अव्यवस्था, यानि ओढ़ी हुई व्यस्तता. आज माह का अंतिम दिन है. सुबह से वर्षा के कारण  मौसम काफी ठंडा हो गया है. कल शाम नन्हे को जून ने किस बात पर डांटा तो वह बहुत रोया, उसके डांटने पर वह इतना परेशान कभी नहीं होता. कल शिवरात्रि का व्रत था, जून ने भी उसका साथ दिया और उन्होंने सिर्फ फलाहार किया, शाम को मन्दिर गये पर विधि के अनुसार पूजा करना उसे आता ही नहीं है, सिर्फ दर्शन करके आ गये. पिछले कई महीनों से उसने कोई कविता नहीं लिखी, अपने आप से सम्बोधित होते हुए अपने करीब जाते हुए कतराने लगी है, कविता तभी उपजती है जब अपने अंतर में झांक कर पूरे दिल से कुछ महसूस करें, ऊपर –ऊपर से शान्त दिखने वाल मन रूपी सागर के अंदर जो खलबली मची है उसे देखना होगा, एक दर्द से दो चार होना पड़ेगा, पिछले दिनों जून धर्मयुग की कई प्रतियाँ एक साथ लये, क कविताएँ उनमें अच्छी थीं. छोटी बहन ने उसके खत का जवाब नहीं दिया, अपनी जिन्दगी की बागडोर जब तक वह स्वयं अपने हाथ में नहीं लगी, खुश नहीं रह पायेगी, जितनी जल्दी यह बात समझ ले अच्छा है. ‘ऊर्जा संरक्षण’ पर लिखी कविता के लिए उन्हें पुरस्कार मिला है, हिंदी दिवस पर एक नारे के लिए भी एक पुरस्कार घोषित हुआ था. एक  स्वेटर पूरा हो गया है, अब दूसरा शुरू किया है.