Showing posts with label फरवरी. Show all posts
Showing posts with label फरवरी. Show all posts

Monday, August 28, 2017

मोदी की कहानी


आजकल वह Andy Marino की नरेंद्र मोदी जी पर लिखी किताब पढ़ रही है. किताब बहुत रोचक है. मोदीजी की कर्मठता और नये-नये विचारों को अपनाने का गुण बहुत अच्छा है. वह हर काम को नये अंदाज में करना चाहते हैं. आज ब्लॉग पर नयी कविता पोस्ट की, ‘मन की बात’ पर. भारत और अमेरिका को ऐसे नेता मिले हैं जो राजनीतिज्ञ कम देशभक्त ज्यादा हैं. किसी व्यक्ति के बारे में बिना सच जाने कितनी गलत बातें फैलायी जा सकती हैं, पर सच एक न एक दिन उजागर हो ही जाता है. दिल्ली का चुनाव उनके लिए एक चुनौती है.

रात्रि के साढ़े नौ बजे हैं, जून के दफ्तर में आज ऑडिटर आये थे, उनका डिनर क्लब में है. कल दोपहर लंच भी बाहर ही होगा. कल रात देर तक सजगता बनी रही. नींद के लिए तमोगुण चाहिए. सुबह व्यायाम करने से पहले तन में अलस लग रहा था, पर बाद में तन-मन दोनों हल्के हो गये. आज शाम को वे एक वृद्ध महिला के घर गये, जिनकी बहन ह्यूस्टन से आयी हुई हैं, वर्षों पहले वे जब अमेरिका गये थे, उनके घर भी गये थे. उसने सोचा उस समय लिखा हुआ अपना लेख उन्हें दिखाएगी, पर वह नहीं मिला. इसी तरह बोस्टन की यात्रा पर लिखा संस्मरण भी अवश्य कहीं तो होगा.

कल क्लब में मीटिंग थी, जहाँ BMI तथा BMR अदि टेस्ट करवाया. एक महिला अपने साथ सारे उपकरण लेकर आई थीं, सभी को उनकी रिपोर्ट के आधार पर भोजन आदि में बदलाव करने की सलाह भी दी. कल रात को ओले गिरे, समाने वाला बरामदा सफेद छोटे-छोटे दूधिया ओलों से भर गया था. जून दोपहर को दो बजे घर आये, ऑडिटर चले गये हैं, अभी भी कुछ काम शेष है. नन्हे से होली पर घर आने को कहा है. आज सुबह किशोर कुमार के कई अच्छे गीत सुने, फिर जगजीत सिंह की गजलें. संगीत दिल को गहराई तक छू जाता है.

फरवरी का प्रथम दिन ! आज मौसम खिला रहा दिन भर ! सुबह आकाश विभिन्न रंगों से आच्छादित था, हवा में फूलों की सुवास. आज फलाहार का दिन था, पर दिन भर के हल्के भोजन के पश्चात शाम के लिए जून ने कोटू के आटे का हलवा बना दिया जब वह बच्चों की संडे क्लास में गयी थी. आज वह गुलदाउदी का एक पौधा लायी बाजार से !

जून आज जोरहाट गये हैं, कल लौटेंगे. सुबह उसने पोहा-मटर का नाश्ता बनाया. दोपहर के भोजन में देह के लिए ज्वार की रोटी बनायी. आत्मा के भोजन के लिए प्रवचन सुने. विवेकानन्द की जीवनी पढ़ी. मन की तृप्ति के लिए ब्लॉग पर पोस्ट लिखीं. आज तेज चलने का अभ्यास अभी तक नहीं हुआ है, क्लब में होने वाली मीटिंग के लिए जाने में कुछ अभ्यास तो हो ही जायेगा और ‘फिटबिट’ के अनुसार आज का कोटा पूरा हो जायेगा. 

Sunday, July 6, 2014

शिवरात्रि का उत्सव


There was a time when  mind was full of despair and there was a time when  mind was full oh hope. In fact both were not real.

फरवरी आरम्भ हुए अठारह दिन हो गये हैं और आज प्रथम बार डायरी खोलने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है, पिछले दिनों काफी कुछ घट गया जिसमें उसका यह निश्चय स्पष्ट हो गया कि अगले सत्र से वह स्कूल नहीं जा रही है. जून की अस्वस्थता का कारण उसका घर से बाहर जाना ही था. आजकल वह ठीक हैं, पर यहाँ तक पहुंचने के लिए उन दोनो को ही तनाव और घुटन के माहौल से गुजरना पड़ा. उन दिनों डायरी खोलते हुए भी डर लगता था कहीं मन की पीड़ा कटु शब्दों का रूप न धर ले. नन्हे की परीक्षाएं ठीक चल रही हैं, आज उसका संस्कृत का इम्तहान है. उसका स्कूल आज बंद है. पिछले दिनों वहाँ भी काफी कुछ बदल गया है. हेड मिस्ट्रेस ने इस्तीफा दिया, एक सीनियर टीचर को उनका कार्यभार सौंपा गया. अभी तक दिसम्बर की भी पे टीचर्स को नहीं मिली है. वार्षिक परीक्षाएं पहली मार्च से आरम्भ होनी हैं. स्कूल में तैयारियां ठीक हो रही हैं पर टीचर्स में पहले का सा उत्साह नहीं है. उसका सेकंड सिग्नेट्री होना भी किसी-किसी को खटक रहा है पर उसने अब मन से अपने को स्कूल से पूरी तरह अलग कर लिया है सो किसी बात का असर नहीं पड़ता. वैसे भी सदा उसका प्रयास यही होता है कि मन को मुक्त रखे, जिससे उच्चता की ओर उन्मुख हो सके. पिछले दिनों जिन्दगी ने एक और पाठ सिखाया है कि आपका प्रिय से प्रिय पात्र भी अथाह दुःख का कारण हो सकता है. यह बात तो वह पहले से मानती थी कि व्यक्ति को अपना रास्ता स्वयं तय करना पड़ता है उस दिन जून को अपने मन की बात बताकर उस मार्ग का पता भी चल गया, उसका मार्ग सहज है.. सरल भी और जून और नन्हा दोनों के मार्गों को छाया और स्नेह से पूर्ण करने वाला.

आज फरवरी का अंतिम दिन है. पुनः वह अपना लेखन का अभ्यास जारी नहीं रख पायी. कल से स्कूल में परीक्षाएं आरम्भ हो रही हैं. उसके बाद कापी जांचने का काम शुरू होगा, रिजल्ट मार्च के अंत में दिया जायेगा. इसका बाद ही वह त्यागपत्र दे देगी और पुनः स्वतंत्र हो जाएगी अपने समय को अपने अनुसार बिताने के लिए. संगीत, किताबें और बागवानी में. राज्य के एक मंत्री की मृत्यु के विरोध में आज ‘एजीपी’ ने असम बंद का आह्वान किया है. सभी को पैदल ही दफ्तर जाना पड़ा है. लंच में जून घर देर से आएंगे. आज उसने बहुत दिनों बाद दो पत्र लिखे. बढ़ई ने नन्हे की स्टडी टेबल में रैक्स लगा दिए हैं, बहुत सुंदर और सफाई से काम किया है उसने. नन्हा अपने मित्रों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया है. कल रात्रि उसने स्वप्न में सुंदर स्थान देखे, मनोहर बगीचे और झील, झरने आदि. कल पड़ोसी मिलने आये थे, उन्होंने यात्रा के फोटोग्राफ्स उन्हें दिखाए और इसी बहाने स्वयं भी पुनः देखे, वही स्वप्न में एक बार फिर. जून और नन्हा आयें इससे पहले, अभी वह कुछ देर भगवद् गीता पढ़ेगी, फिर कुछ मिनट का ध्यान और रियाज. मौसम आज खिला हुआ है जो उसके दिल के करीब है.

आज शिवरात्रि का उत्सव है. अभी कुछ देर पूर्व वह बैक डोर पड़ोसिन के यहाँ गयी, उसके स्कूल छोड़ने की बात वह पहले से ही जानती थी. जून आज आ रहे हैं, परसों वह शिवसागर गये थे. नन्हे और उसे अब अकेले रहने का अभ्यास हो गया है सो अकेलेपन के अलावा और कोई दिक्कत नहीं हुई. परीक्षा की कापियां जांचने में कल तो उसे समय का पता ही नहीं चला, अभी कुछ दिन और चलेगा यह सिलसिला, फिर सिलाई के काम में व्यस्त रहेगी और तब मेहमानों के आने की तैयारी व उनके साथ कुछ दिन बेहद व्यस्त बीतेंगे. बैसाखी पर उनके जाने के बाद घर की सफाई, स्वेटर आदि धोकर रखना. फिर मई में उनके खुद के जाने की तैयारी यानि जून में जाकर वे कम व्यस्त होंगे, फिर नन्हे के स्कूल खुलने का वक्त आ जायेगा और जिन्दगी का सफर यूँ ही चलता चला जायेगा.






Friday, May 17, 2013

तेजपुर का स्कूल



फरवरी का प्रथम उजला-उजला सा दिन ! दोपहर को जून जब गये तो अख़बार उठाई पढ़ने के लिए, उसके नचे ही एक पत्रिका दिख गयी, उसने ऐसा बांधा कि...ये सितारे भी किसी जादूगर से कम नहीं होते, अपने आकर्षण में खच ही लेते हैं, खास तौर से उस जैसे कमजोर इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति को...अब दोपहर के दो बजे हैं, नन्हा कह गया था एक बजे तक लौट आएगा पर अभी तक नहीं आया है, सम्भवतः अब जून उसे अपने साथ लायेंगे लौटते वक्त. सुबह उसने वाशिंग मशीन लगाई, मच्छरदानी धोयी जैसा कि उसे मालूम था, जून ने कहा, क्या जरूरत थी, साफ तो थी. कल नन्हे का एडमिशन कार्ड भी आ गया, इसी माह की तेरह को तेजपुर जाना होगा. स्कूल की इमारत आदि सब देखकर आएंगे, शायद देखने के बाद नन्हे का मन परिवर्तित हो. टीवी पर ‘शांति’ शुरू हो गया है, अब वह स्वेटर बुनेगी, तीनों भांजियों के लिए स्वेटर बना रही है, चमकदार पीले रंग की ऊन से.

  आज टीवी पर केरल के इमरान खान की, सोलह राज्यों की ४४९ दिनों की दौड़ कर की गयी यात्रा का, विश्व रिकार्ड बनने की खबर सुनकर मन प्रेरित हुआ और अपनी दिनचर्या को सुचारू रूप से चलाने का भाव उदित हुआ. जीवन क्षण भंगुर है और जिसे पलों में जीना आ जाता है वह अनंत में जीता है. जो हो चुका उस पर उनका वश नहीं और जो होगा वह वे जानते नहीं. तो वर्तमान जो उनका अपना है क्यों न ख़ुशी ख़ुशी जिएँ... उद्देश्य पूर्ण, क्रियाशील और सारे आरोपों, प्रत्यारोपों से परे. कल शाम उसने काले चने बनाये थे, जून के एक मित्र भी आये थे, दोनों को पसंद आये. आज नन्हे की पसंद पर मटर-पनीर बनाया है. उसके स्कूल में सोशल साइंस की विशाल प्रदर्शनी लगी है, जून ने भी कल देखी, और वापस आते समय उन्हें काफी देर हो गयी थी.

आज सरस्वती पूजा है, वसंत पंचमी अर्थात फूलों का मौसम. अगले शनि-रवि को क्लब में फ्लावर शो और गार्डन कम्पीटीशन है. कल तीन खत मिले, छोटी बहन, मंझले भाई व माँ-पिता के. छोटे भाई का पत्र पहले ही आ चका है, दीदी का पिछले महीने आया था, एकाएक सारे भाई-बहन उसके करीब आना चाहते हैं. छोटे भाई ने लिखा था जब भी वह खुश या उदास होता है, उन्हें अपने करीब पाता है. छोटी बहन ने लिखा है कि वह जानती है वे उसकी बात सुनेंगे अनसुनी नहीं कर देंगे. उसका खत पढ़कर थोड़ी सी हँसी भी आई और उदासी भी, वह अभी तक ससुराल में अपने को एडजस्ट नहीं कर पायी है. उसको जवाब लिखा तो है, पता नहीं उसे पकर साहस मिलेगा अथवा वह यह सोचेगी कि उपदेशों की उसे जरूरत नहीं है. जून ने भी कल रात उसे व उसके पति को पत्र लिखा. कल शाम एक मित्र के यहाँ एक नया बोर्ड गेम खेला. घर में आज काम चल रहा है, सुबह आठ बजे से ही खट-खट  की आवाजें आ रही हैं, जो खल तो रही हैं पर काम एक न एक दिन तो होना ही था, कुछ दीवारों में क्रैक आ गये हैं. नन्हा आज घर में है, उसने सोचा आज वह उनके साथ ही ग्यारह बजे लंच करेगा, रोज स्कूल में साढ़े बारह बजे तक उसे इंतजार करना पड़ता होगा टिफिन टाइम का. आज वह पीले चावल बनाएगी तथा प्याज, टमाटर, धनिये का रायता और मिक्स्ड वेजिटेबल.


Sunday, March 31, 2013

कपड़े धोने की मशीन



चुपचाप युगों से खड़े दरख्त
आकाश को तकते ऊंचे-ऊंचे दरख्त
कभी किन्हीं सवालों का जवाब बन जाते हैं
पीले पत्तों सा झर गया
मन का पतझड़
फिर से अंकुरायी है कोंपल-कोंपल
सूखे पत्तों की खडखडाहट सी
कोई आवाज बुलाती है
अभी अभी कोई हेलिकॉप्टर गया है
सन्नाटे को तोड़ता हुआ !

  फिर तीन दिनों का अंतराल और आज फरवरी महीने के प्रथम दिन दोपहर के पौने एक बजे थकान से बोझिल वह खतों, अख़बारों और पत्रिकाओं को साथ लेकर बैठी है, मन तो बस यह चाहता है कि कम्बल ओढ़कर कोई अच्छी सी कहानी पढ़ते-पढ़ते सो जाये, लेकिन खतों के जवाब कल देने थे, दोपहर को किसी के घर जाना पड़ा, लेडीज क्लब के काम के सिलसिले में. सारी सुबह आज ही की तरह किचन में बीती.

पिछले तीन-चार दिन बेहद व्यस्तता भरे थे, सुबह से ग्यारह बजे तक कामों का सिलसिला खत्म होने में ही नहीं आता था, पर आज कितना सुकून महसूस कर रही है, सवा दस हुए हैं, कपड़े, रसोईघर, घर अभी साफ हो चुके हैं, आज एक नई नौकरानी मिल गयी है और स्वीपर भी समय पर आ गया. उस दिन भी और उसके बाद आज तक पत्रों के जवाब नहीं दे पायी अब अगले सोमवार को ही या उसके पहले अगर माहौल या मूड जमा तो, वैसे जून ने कल दोनों घरों पर फोन से बात तो की है. आज दोपहर से एक नया माली भी आएगा काम करने. आज सुबह नन्हे की सर्दी कुछ बढ़ी हुई लग रही थी पर वह स्कूल गया तो है, बहादुर है, कल उसने कक्षा में तीन कहानियाँ सुनायीं, बड़ा होकर कहानीकार बन सकता है. पडोसिन ने कपड़े धोने की मशीन खरीद ली है, देखने का मन है.

दो दिन बाद, शाम के सात बजे हैं, इस समय एकाएक कुछ लिखे ऐसा शुभ विचार मन में आया है, ऐसे अवसर दुर्लभ होते जा रहे हैं, यही सोचकर झट डायरी और पेन उठा लिए हैं, क्योंकि क्या मालूम यह लिखने का आवेग कितनी देर का है, ऐसा क्यों हो रहा है आजकल इसका माकूल जवाब नहीं है, कभी नहीं था, पहले भी कई बार हफ्तों ऐसे ही गुजर गए और उसने कुछ नहीं लिखा, लेकिन मन के किसी कोने में खलबली सी धीमी-धीमी रहती जरूर है कि...आज सुबह धूप निकली थी, फिर बादल छाये रहे और शाम से बरसने भी लगे हैं, उन्हें क्लब जाना था पर..

दो दिन फिर बीत गए, उस दिन जून ने कहा कि जो चार्ट वह बना रहे हैं उसे नूना पूरा करे नन्हे के लिए और उसका पेन वहीं रुक गया, कल वही जानी-पहचानी सी खुमारी थी बदन में, आज ठीक है, समय भी बहुत है, जून आज देर से आने वाले हैं. नन्हे के स्कूल में अचानक छुट्टी हो गयी, वह तैयार हो चुका था, अब ड्रेस बदले बिना पड़ोसी के यहाँ खेलने चला गया है. उसने सर्वोत्तम में उक्ति पढ़ी अभी कुछ देर पूर्व,
“हमें अपना अच्छा मित्र बनने का प्रयास करते रहना चाहिए क्योंकि अक्सर हम अपने बुरे मित्र बनने के जाल में फंस जाते हैं”.
कितनी सही और सटीक है यह बात, उसके साथ भी अक्सर ऐसा होता है, जब वह बेवजह उदास हो जाती है, झुंझलाने लगती है या स्वयं को कमजोर समझने लगती है, क्यों न वह  अपनी सबसे अच्छी साथी बनना इसी पल से शुरू कर दे. अभी-अभी उसकी एक सखी ने फोन पर बताया कि क्लब की पत्रिका में उसकी कवितायें छपी हैं, शायद जून आज लायें. मौसम आज भी बेहद ठंडा है, वर्षा बस होने ही वाली है, सर्वोत्तम की एक और सूक्ति के साथ ही उसने लिखना बंद किया,
“ हमें अपने बच्चों को खुली आंखों से स्वप्न देखना सिखाना चाहिए.”