आज सुबह उठने से पूर्व मन में कितना अनोखा दृश्य क्रम चल रहा था। किताबें और उनमें लिखे शब्द स्पष्ट दिखायी दे रहे थे। जैसे सारा ज्ञान अपने ही भीतर हो, वैसा ही कुछ। आत्मा के रहस्य अपार हैं। जून को आजकल योगनिद्रा करना बहुत अच्छा लग रहा है।छोटी बहन का फ़ोन आया, आज से उसका फ़ोन रखवा लिया जाएगा, संभवतः अब उससे मिलना तभी संभव होगा, जब कोर्स समाप्त हो जाएगा। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, छोटी बहन बहुत बोल्ड है, वाक़ई वह ऐसी ही है।वह स्वयं बहुत शांत लग रहे थे, दिव्य ऊर्जा से युक्त!
आज भी ऐप पर अभ्यास किया, बात धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। शाम को आर्ट ऑफ़ लिविंग के एक वरिष्ठ शिक्षक के साथ ऑन लाइन ‘पतंजलि योग सूत्रों’ का पाठ किया। पाँच दिनों का कार्यक्रम है, जिसमें सुबह योग-साधना होगी। बड़ी भांजी की बिटिया का जन्मदिन है, उसने एक कविता लिखी, जिसे जून ने सुंदर चित्र से सजा दिया है।आज फ़ेसबुक पर असम वाले घर की एक तस्वीर पोस्ट की तो कितनी सखियों की यादें ताजा हो गयीं।
सुबह वह उठी तो अलार्म की आवाज़ ऐसे सुनायी दी जैसे कोई संगीत बज रहा हो।एक परिचित परिवार पहली बार घर आया, रास्ते में कई बार अभिवादन का आदान-प्रदान हो चुका है। बातों-बातों में उन्होंने बताया, मेट्रो से इस्कॉन मंदिर जाया जा सकता है। बैंगलुरु के ट्रैफ़िक की बात सोचकर वे अभी तक कार से जाने की बात टालते जा रहे थे। परसों छोटी ननद आ रही है। देश में धर्म के नाम पर दूरी बढ़ती जा रही है। कोई भी यदि स्वयं को विशेष मानेगा तो सामने वाले के मन में विरोध स्वाभाविक होने वाला है। सदियों से ईश्वर के नाम पर लड़े जा रहे इस झगड़े को ज्ञान के सिवा कौन सुलझा सकता है? ज्ञान का आश्रय लेना सीखना होगा।
आज सुबह नन्हा व सोनू आ गये थे, परिवार सहित ननद दोपहर को पहुँची। नन्हे ने पुलाव तथा पावभाजी बनाया। शाम तक खूब चहल-पहल रही। बच्चे चले गये, तो वे ननद-ननदोई को लेकर आश्रम गये। एक झील के किनारे भी कुछ समय बिताया।
आज उन्हें एपिक रॉक ले गये। मौसम सुहाना था। आकाश में दो इंद्र धनुष बन गये थे। सूर्यास्त होने वाला था, बादलों के पीछे से सूर्य की किरणें अनोखा दृश्य उपस्थित कर रही थीं। अचानक आँधी चलने लगी। तेज हवा में धूल उड़ रही थी, बहुत तेज़ी से पेड़ झूम रहे थे। कुछ देर में सब थम गया, जैसे किसी ने स्विच बंद कर दिया हो।सभी ने बहुत आनंद लिया। वहाँ एक मुस्लिम लड़की मिली, जिसने हिंदू लड़के से ब्याह किया है, वह अच्छी हिन्दी बोल रही थी। उसकी बातें सुनकर प्रेम की शक्ति पर गर्व अनुभव हुआ। सृजन का फूल आज़ादी की हवा में ही खिलता है।
जो भी जान लिया है, उसे जानने की ज़रूरत नहीं है। जो सदा से अनजाना है, उसे कोई कैसे ढूँढे? आज सुबह योग साधना स्वामी सूर्यपाद जी ने गुरुजी के ज्ञान सूत्रों की व्याख्या की।एक साधक के पाँच लक्षण हैं। श्रद्धा, समर्पण, निष्ठा, दृढ़ लगन और धैर्य। मन में किसी भी तरह की आकुलता न हो, पर प्रतीक्षा हो, यह सत्वगुण की निशानी है। थोड़ा सा रजोगुण प्रवेश करते ही वह मन को कहाँ ले जाएगा, कोई नहीं कह सकता। रजोगुण प्रवेश करता है अधैर्य से।मन एक क्षण में ही राग-द्वेष का शिकार हो जाता है। जिस क्षण भी कोई थम कर परमात्मा को पुकारता है, वह अपनी उपस्थिति ज़ाहिर कर देता है, बस धैर्य से प्रतीक्षा करनी है। अशांति को दूर करने के लिए सेवा है। साधक को ज्ञान होना चाहिए कि वह क्या खोज रहा है ? यदि उसे यह पता ही नहीं कि वह क्या खोज रहा है, तो उसे पाएगा कैसे? विरोधी बातों के मध्य समन्वय करने का एक ही तरीक़ा है, मध्य में रुक जाना। जब मन अपने केंद्र में रुक जाता है, दो इच्छाओं के मध्य ही सुख है। उन्होंने जागृत, स्वप्न व सुषुप्ति अवस्थाओं के बारे में भी बताया।गुरु के ज्ञान से साधक के ज्ञान का क्षितिज फैलने लगता है। कोई जगत को ढूँढता है तो हाथ में दुख आता है, दुख से बाहर निकलने का मार्ग ढूँढता है तो भगवान मिलते हैं।
आज का विषय है, स्मृति: एक बाधा या वरदान। साधक पुरानी बातों को एक बोझ की तरह सिर पर लादे रहता है।मन में हज़ारों अनुभव व संस्कार भरे हैं, वह अपने स्वरूप में टिक नहीं पाता।अपने शुद्ध स्वरूप का विस्मरण ही समस्त समस्याओं का मूल कारण है। जन्म-मरण के चक्र से छूटना भी तभी संभव है। जन्म के साथ ही माया, एक छाया की तरह पीछे लग जाती है। उस ‘एक’ की स्मृति के अलावा सभी कुछ माया है। अविद्या, कामनाएँ तथा कर्म उन्हें अपने सच्चे स्वरूप में ठहरने नहीं देते।
आज इतवार है, नन्हे और सोनू ने लंच में मोमोज़ और नूडल्स बनाये। बर्मा की एक डिश भी बहुत स्वादिष्ट बनी थी, बहुत मेहनत और प्रेम से बनायी गई। शाम को नन्हे ने कैमरा लगा कर ड्रोन उड़ाया। छोटी बहन से बात हुई, उसे फ़ोन वापस मिल गया है। वह कल सुबह छह बजे घर आने के लिए तैयार रहेगी।
कल सुबह छोटी बहन को आश्रम से ले आये थे। दिन भर खूब बातें कीं।आज सुबह योग दिवस मनाया। शाम को बोटेनिका और रात को रात की रानी की क्यारी तक टहलने गये, बीस हज़ार से अधिक क़दम हो गये हैं आज। छोटी बहन टीटीपी कोर्स के बार में कुछ लेखन कार्य कर रही है।जून मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। मंझले भाई को बुख़ार हो गया है, उसने ईश्वर से उसके शीघ्र स्वास्थ्य की प्रार्थना की।
आज सुबह वे टहलने गये तो दिन अभी निकला नहीं था। वापस आकर जून ने चाय बनायी, कई दिनों के बाद छोटी बहन ने चाय पी तो कहा, वाह !! अमृत है, सब हँसने लगे। आश्रम में कोर्स के दौरान चाय पीने की मनाही है। वाक़ई चाय ने सबके दिलों पर राज कर लिया है।दिन में बड़े भैया भी आ गये, सबने मिलकर कई बोर्ड गेम्स खेले। शाम को उन्हें आश्रम के गेट-१ तक छोड़ने गये, वहाँ से ओला मिल जाती है।
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