Friday, April 17, 2026

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२


आज नूना को एक मज़ेदार स्वप्न ने उठाया।एक महाशय अपने डॉग(शी) से बातें करते हैं। वह उन्हें कुछ परेशान कर रही थी तो उसे कुछ सबक़ सिखाना चाहते हैं। उसके मुख के पास जाकर कहते हैं, हेलो मिस, वह भी दाँत निपोरती हुई कहती है, हेलो मिस्टर, अगली बार उनके हाथ में कोईं कठोर वस्तु है और नूना जानती है कि वह इसे कहाँ रखने वाले हैं, जैसे कि यह घटना पहले भी हो चुकी हो। वह फिर बड़े ही अच्छे अन्दाज़ से कहते हैं, हेलो मिस, और जैसे ही वह हेलो कहने के लिए मुँह खोलती है, जबड़ों के मध्य वह वस्तु रख देते हैं। वह मुँह बंद करती है तो ज़ोर की आवाज़ होती है। सब हँसने लगते हैं और नींद खुल जाती है। यह स्वप्न जगाने के लिए आया था, क्योंकि अलार्म बंद किए काफ़ी वक्त बीत गया था। परमात्मा को मज़ाक़ बहुत पसंद है, गुरुजी की यह बात एक बार फिर सत्य सिद्ध हो गई।परमात्मा के द्वार जाना हो तो हँसते-हँसते ही जाया जा सकता है। एक अन्य स्वप्न में उनकी सोसाइटी नापा की एक परिचित महिला को वह सनातन धर्म  के बारे में बता रही है। सपने में वह ईसाई धर्म को मानती हैं।नूना उन्हें गहन श्रद्धा तथा ईश्वर के विभिन्न रूपों के बारे में बता रही है। सुंदर स्वप्न था यह !!   


आज इतवार को नन्हे और सोनू के लिए नाश्ते में बेदमी पूरी बनायी, जून ने यू ट्यूब पर उसकी विधि देखी थी।नाश्ते के बाद वे सब बेंगलुरु के चर्च स्ट्रीट में स्थित किताबों की एक दुकान पर गये।ब्लॉज़म बुक हाउस नाम है उसका, २००१ में मयि गौड़ा नाम के व्यक्ति ने उसे खोला था। यहाँ पुरानी, नयी हर तरह की किताबें मिलती हैं। वीडियो कॉल करके पापाजी को भी दिखायी वह दुकान। सबने मिलाकर कुल बीस किताबें खरीदीं। उसके बाद ‘गो नेटिव’ गये। जहाँ परंपरागत शाकाहारी भोजन मिलता है।वापस आते-आते सवा पाँच हो गये थे, उसे अनुवाद कार्य करना था। शाम को बच्चे वापस चले गये। जून सोने चले गये हैं, वह कुछ देर नयी लायी पुस्तक ‘माइंड ऑफ़ गॉड’ पढ़ने वाली है। 


आज सुबह योग साधना करते समय अचानक आकाश पर नज़र पड़ी तो एक सुंदर दृश्य दिखा। एक प्रकाश का स्रोत, जिसके पीछे प्रकाश की तिकोनी छाया थी, लगा कोई धूमकेतु होगा। दूसरी तरफ़ भी बादलों को चीरती हुई सी प्रकाश की एक तरंग थी। कुछ समझ नहीं आया, यह क्या था।बाद में ज्ञात हुआ इसरो ने पीएसएलवी-सी ५२ लांच किया था।दोपहर की वही गॉड वाली पुस्तक पढ़ती रही। मस्तिष्क अरबों, खरबों न्यूरॉन से बना है। कितनी जटिल है इसकी रचना, जिसके द्वारा शरीर के सब कार्य होते हैं। शाम को वे लोग एक परिचित के विशाल और सुंदर घर की गृह प्रवेश की पूजा में गये।वापसी में एक मित्र दंपत्ति घर आये। पापाजी से बात हुई, आज वह वोट देने गये थे, इस उम्र में भी उनका इतना उत्साह देखकर एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की। 


आज सुबह योग-प्राणायाम के बाद, सुखबोधानन्द जी की ताई चि क्रिया की।उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं तथा नृत्य भी कराया। कह रहे थे, वह योग निद्रा नहीं प्रेम निद्रा कराते हैं, आनंद लहरी के साथ-साथ प्रेम लहरी जगाते हैं। जून ने वर्षों बाद नृत्य किया होगा। वह चाहें तो कर सकते हैं। भजन व नृत्य उनके मन को तनाव से मुक्त रखने में सहायक होगा। नाश्ते में जून नापा के प्रसिद्ध शेफ़ शेट्टी जी से दोसा लाए, चटनी तथा सब्ज़ी में मिर्च बहुत थी।नूना ने एक व्हाट्सेप समूह बनाया है, जिसमें पंचायत की अध्यक्षा तथा नापा की कुछ महिलाएँ हैं, मंगलवार को पहली मीटिंग है। गाँव से जुड़कर महिलाएँ बहुत कुछ कर सकती हैं, ऑर्गेनिक खेती, पेपर बैग्स बनाना , सफ़ाई अभियान, योग-ध्यान सिखा सकती हैं। सेवा के अतिरिक्त अब करने को कुछ है भी कहाँ। शाम को जून कमेटी की मीटिंग में व्यस्त थे और उसने ज्ञानेशावरी गीता का पाँचवाँ व अंतिम भाग सुना।नन्हे ने एक किताब भेजी है, ‘लोकतंत्र के टूटे स्तंभ’, वह यू ट्यूब पर इसे सुनता है।शाम को पापाजी से बात हुई, वह टीवी पर प्राइम वीडियो नहीं देख पा रहे थे।जून ने उन्हें उपाय बताया, शायद बाद में देख पाये हों।  


जून आज सुबह जल्दी चले गये।शनि व रविवार को उन्हें असोसिएशन के काम में और अधिक समय देना होगा।वह अपने कार्य में बहुत रुचि ले रहे हैं, और उन्हें अपने काम में बहुत आनंद आ रहा है। उसने काव्यालय में एक कविता प्रकाशित की। छोटी ननद ने बताया छोटे पुत्र का कॉलेज दो वर्ष के बाद खुल रहा है। 


आज एक परिचित दंपत्ति की शादी की सालगिरह है।उनकी जीवन यात्रा में एक मात्र ऐसा परिवार, जो उनसे ऐसा नाराज़ हुआ कि माना ही नहीं। ख़ैर ! आज सुबह शिव सूत्र पर चर्चा सुनी।वक्ता के अनुसार शिव रात्रि का अर्थ है, अज्ञान की रात्रि में प्रकाश का अवतरण और ज्ञान में जागरण ! उन्होंने पाणिनि तथा पतंजलि व्याकरण के बारे में बताया, जो शिव के डमरू से निकली ध्वनियों के आधार पर बनाया गया था। दोपहर एओएल के अनुवाद कार्य में बीती ।पापाजी ने कहा, आत्मा में रहने से मन में शांति बनी रहती है, शरीर में तो कुछ न कुछ लगा ही रहता है।आज एक महिला ब्लॉगर से बात हुई, उनके तीन पुत्र हैं, एक सिडनी में दो बैंगलोर में हैं। वह मध्य प्रदेश आती-जाती रहती हैं, पर अब ज़्यादातर यहीं रहेंगी। वह बहुत अच्छी लेखिका हैं। कभी न कभी उनसे मुलाक़ात भी हो ही जाएगी। 


आज सुबह पहली मीटिंग में कुल छह महिलाएँ आयी थीं। पंचायत की अध्य्क्षा कुछ देर से आयीं, पर उन्होंने काफ़ी ध्यान से चर्चा में भाग लिया। काफ़ी विषयों पर बात हुई। नये लोगों से परिचय हुआ। जून ने मीटिंग का सार लिखने में मदद की। कल वह एक नयी सोसाइटी देखने जा रहे हैं। आज सुबह नन्हा आया था, कंप्यूटर का एक पार्ट खोल कर ले गया। बिटकॉइन माइनिंग का उसका स्वप्न बीच में ही बिखर गया है।  


No comments:

Post a Comment