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Friday, May 31, 2024

चंदन का लेप

चंदन का लेप


आज रविवार है, माली आने का दिन, सो योगाभ्यास का अवकाश। उसने माली से सारे गमलों की निराई-गुड़ाई करवायी और ‘रात की रानी’ के पौधे ज़मीन में लगवाये। ‘मॉर्निंग ग्लोरी’ के गमले ऊपर सिट आउट में रखवाए हैं। बच्चे आये तो उन्हें नाश्ते में कटहल दोसा मिक्स से बना दोसा खिलाया। जून ने गेहूं का दलिया भी बनाया था, वह इसमें निपुण हो गये हैं। दोपहर बाद सब मिलकर दो मकान देखने गये, सोनू के माँ-पापा भी बैंगलुरु में आकर बसना चाहते हैं। शाम को चार बजे से ‘जोड़ों के दर्द’ पर डेढ़ घंटे के वेबिनार के एक सत्र में भाग लिया, जिस पर आधारित एक लेख उसे लिखना है।स्वस्थ रहने के लिए कितने ही नुस्ख़े और आदर्श जीवन शैली के बारे में वैद्य ने बताया। सुबह मुँह का स्वाद कुछ कड़वा सा था, ‘धौति’ क्रिया की। इस समय भी देह में ताप का अनुभव हो रहा है। वे आयुर्वैदिक अस्पताल जाने का विचार कर रहे हैं। 


आज फ़रवरी का प्रथम दिवस है।वसंत ऋतु दस्तक दे रही है। आम के बगीचे से भीनी-भीनी सुगंध बहती रहती है। सुबह वे टहलने गये तो आकाश पर तारे टिमटिमा रहे थे। वापस आकर ‘हेल्थ इन योर हैंड’ पुस्तक निकाल कर कुछ पन्ने पढ़े, उसमें लेखक ने सामान्य रोगों को दूर करने के कई सरल उपाय बताये हैं। आज भी स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक नहीं है। सुबह से सिर में हल्का दर्द है। इस समय मस्तक पर चंदन का लेप लगाया है, जो भीतर की गर्मी को खींच लेगा। जीरा-सौंफ वाला पानी पिया। कैस्टर आयल लिया। दिन  में  नारियल पानी व मट्ठा भी लिया था।शरीर में अग्नि तत्व बढ़ गया है। शाम को कुछ देर ‘चन्द्र नाड़ी प्राणायाम’ भी किया, ‘शीतली प्राणायाम’ भी। नाड़ी की गति बैठे रहने पर भी ९५ रहती है। चलते समय पैरों में जकड़न सी महसूस होती है। अचानक ही इतने सारे लक्षण आ गये हों, ऐसा नहीं है। पाचन क्रिया मंद रहने की समस्या तो कुछ दिनों से थी ही। ख़ैर, यह सब शरीर को हो रहा है, मन भी शरीर का ही सूक्ष्म हिस्सा है। पिछले दिनों रात को नींद ठीक से नहीं आयी, उसका असर रहा होगा।जो भी हो, आत्मा साक्षी भाव से सब कुछ देख रही है, उस पर कुछ भी असर नहीं हो रहा है।आज सुबह एक सखी से बात की, दोपहर को दीदी-जीजा जी से, शाम को भी एक परिचिता  से वार्तालाप हुआ, सभी से सामान्य बातें हुईं। दोपहर को ‘जोड़ों के दर्द’ पर लेख लिखना आरम्भ किया। ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की। आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वार्षिक बजट प्रस्तुत किया, जिसे बहुत सराहा जा रहा है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। एक और दिन स्वास्थ्य की देखभाल करते बीत गया। सुबह कितना हल्का महसूस हो रहा था पर दोपहर बाद कुछ भारीपन लग रहा था। रात्रि भ्रमण के समय पैरों को भली प्रकार पता चला कि चलने के लिए  भी एक प्रयास करना पड़ता है। सुबह सवा चार बजे नींद खुल गई थी। सुबह सामान्य रही। याकुल्ट, नारियल पानी, ग्रीन टी तथा खीरा नींबू वाला पानी पिया दिन भर।संभवत: वजन भी बढ़ गया है। सारी समस्या इसी कारण हो रही है। इसे कम करने का उपाय करना होगा।छोटी भांजी के जन्मदिन के लिए लिखी कविता उसे भेज दी, बहन के साथ उसने दुनिया की सबसे लंबी ‘ज़िप लाइन’ में भाग लिया। शाम को नन्हे का फ़ोन आया, सोनू की मौसेरी बहन को एक और सर्जरी करानी पड़ेगी। उसे गॉल ब्लेडर में स्टोन हो गया था। 


आज एक संत को सुना, “आगे से जवाब देना, उल्टा बोलना, ज़ोर से बोलना, दूसरे की बात को न सुनना या नकार देना, ये सभी वाणी के दोष हैं, जिनसे साधक को बचना चाहिए। अहंकार ही आत्मा को प्रकट न होने देने में सबसे बड़ी बाधा है, और उपरोक्त सभी बातें अहंकार से उपजती हैं, न कि विवेक से।विवेक तो सदा आत्मा से युक्त रहता है, जो प्रेमस्वरूप है।” उसकी अस्वस्थता में उसका इतना ध्यान रखने वाले जून को जब वह कभी आगे से जवाब दे देती है तो उन्हें कितना बुरा लगता होगा। उनका धैर्य अपार है, जो उसकी सारी हिमाक़त चुपचाप सह लेते हैं और सुबह से शाम तक हर कार्य में उसकी सहायता करने को तत्पर रहते हैं। आज से बल्कि अभी से वह प्रण करती है कि उनकी हर बात को अपने लिए आज्ञा मानकर शिरोधार्य करेगी ताक़ि उसका अहंकार छूट जाये और आत्मा में स्थिति दृढ़ हो जाये; जो कि उसका वास्तविक स्वरूप है। उसका रोग भी तो शरीर के साथ स्वयं को जोड़कर देखने से ही हुआ है। भोजन के प्रति आसक्ति का ही यह फल है।


Tuesday, April 28, 2020

एक कप चाय



आज कम्पनी के शेयर होल्डर्स की वार्षिक सभा है, ड्राइवर सुबह ही वह गिफ्ट बॉक्स दे गया जी सभी शेयर धारकों को मिलता है, जिसमें मिठाई, नमकीन, भुजिया, जूस, चॉकलेट सभी कुछ है. सुबह नींद खुलते ही जैसे भीतर किसी ने कहा, चाय में नशा होता है, उस नशे से ही मुक्त होना है. कल या परसों नींद से जगते समय  दूध से आधा भर एक कप दिखाई दिया था. रात को किसी वक्त स्वप्न देखा, वह बाजार गयी है, कैमिस्ट की दुकान पर है, कोई दवा खरीद रही है, कम से कम डोज मांगी है, फिर दुकानदार से पूछा, यह नुकसानदायक है न, वह हामी भरता है. चाय में नशा होता है यह बात इस स्वप्न से जुड़ी है और जुड़े हैं वे चाय के कप, जो नींद में दिखे थे. परमात्मा कितने-कितने उपाय करके उसे इस आदत से, आसक्ति से छुड़ाना चाहता है. उसकी कृपाओं का अंत नहीं. आज पूरे दो हफ्तों बाद कार चलाई, अभ्यास छूट गया है और भीतर एक भय भी समा गया है इसलिये धीरे-धीरे ही चला ही पायी. ब्लॉग पर लिखा, कुछ पढ़ा भी और टिप्पणी की. जून अभी एक घण्टे बाद आने वाले हैं, सर में दर्द हो रहा है शायद निकोटिन के लिए, नौ बजे आधा कप बोर्नविटा लिया था. कल शाम क्लब में वरिष्ठ महिलाओं की मीटिंग थी, लौटते हुए सवा आठ बज गए थे, जून को भी डिनर पर  जाना था, पर वह सबसे मिलकर  जल्दी ही लौट आये. उन्हें भी आधी रात तक जगना पसन्द नहीं है. जीवन जब एक लक्ष्य को सम्मुख रखकर आगे बढ़ता है तो मार्ग में आने वाली बाधा स्वयं ही दूर होने लगती है. वे सत्य के पथ के राही हैं. नन्हे से बात हुई, वह नए घर में था, काम शुरू हो गया है, तीन महीने में उम्मीद है पूरा हो जायेगा. सोनू अपनी सखी से मिलने गयी है, हल ही में जिसके पिता की मृत्यु हो गयी है. सर्वेंट लाइन में झगड़ा हो गया था आज सुबह, कारण पूछा तो पता चला, किसी पियक्कड़ ने नशे में अपनी तीन-चार वर्ष की बेटी को भी दो-चार घूंट पिलाने का प्रयत्न किया. विरोध होने पर झगड़ा बढ़ गया. नरक क्या इससे कुछ अलग होगा. 

टीवी पर इण्डिया-पकिस्ताम मैच हो रहा है. एशिया कप के दावेदार दो देशों के मध्य, हजारों लोग इस मैच को देख रहे हैं. कल से आश्विन माह का आरंभ हो रहा है. पहली बार पितृ पक्ष पर कुछ विशेष जानकारी ली और इसके बारे में लिखा. आज शाम फोन पर ज्ञात हुआ कि पीछे कुछ दिनों से बड़े भाई का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इस समय वह अस्पताल में हैं, ईश्वर उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करें. छोटा भाई भाभी टूर पर हैं, पिताजी अकेले हैं घर पर पर इस उम्र में भी वह अपना सारा काम स्वयं कर लेते हैं. सुबह बंगाली सखी के यहाँ गयी, उसकी माँ को अब वार्ड में शिफ्ट कर दिया  हैं, पर उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है. 

वही कल का समय है. टीवी चल रहा है पर आवाज बंद है. जून फोन पर बात कर रहे हैं. उसने भी पिताजी से बात की. मंझला भाई वापस आ गया है, बड़े भाई को नर्सिंग होम में दाखिल करवा दिया है. उनको डेंगू बुखार है यह बात पक्की हो गयी है. उनके कान में भी कुछ दिन से समस्या थी पर अब वह ठीक है. भतीजी आज सुबह घर आ गयी है, वह घर से ही काम करेगी, पापा की सेवा भी जितना हो सकेगा, करेगी. जीवन में कभी-कभी बड़े कष्ट का अनुभव करना पड़ता है, ऐसे में भी जो मन की समता बनाये रख सके, वह साधक है. दोपहर को उसने भाई से बात की तो हीलिंग मेडिटेशन करने को कहा, बुखार जब बढ़ जाता है तब तो वह कुछ नहीं कर पाते होंगे. एक योग साधिका को भी बुखार है, उसे भी उसने श्वासों पर ध्यान देने को कहा. शारीरिक रोग उनकी परीक्षा लेने के लिए आते हैं या उनकी ही लापरवाही के कारण, कोई नहीं जानता. कर्मों के फल के रूप में भी रोग आते हैं और बाहरी वातावरण के कारण भी. उनकी मानसिक स्थिति कितनी मजबूत है इस पर भी निर्भर करते हैं. आज शाम को भी फॉलोअप हुआ, दीर्घ सुदर्शन क्रिया के बाद मन कितना शांत हो जाता है. गुरूजी की कृपा का कोई अंत नहीं, घर बैठे ही उन्हें फॉलोअप का वरदान प्राप्त हुआ है. दोपहर को बच्चे व महिलाएं भी आये योग करने, प्रसाद में उन्हें बगीचे का नारियल खिलाया. विज्ञान भैरव पर एक-दो प्रवचन सुने, अद्भुत ग्रन्थ है यह. ध्यान की एक सौ बारह विधियाँ शिव पार्वती को सिखाते हैं. सूत्रों के रूप में नहीं हैं, प्रश्रोत्तरी के रूप में हैं. सुबह क्लब की प्रेसीडेंट से फोन पर काफी देर तक बात हुई स्कूल के बारे में, वह बोलने से थकती नहीं हैं. दोपहर को सिर में हल्का दर्द था, नशा है जानते हुए भी चाय पी. संस्कार को मिटाना परमात्मा के भी हाथ में नहीं है. 

Friday, March 24, 2017

पंछी और कलियाँ


नन्हे की मित्र के लिए उसने कविता लिखी थी, उसका जवाब आया है, उसने दिल को छूने वाला जवाब लिखा है. कल दिन भर वह ठीक रही पर रात बेचैनी से भरी थी. आश्चर्य होता है खुद पर, कहाँ सोचा था कभी कि डायरी के पन्नों पर अपनी हेल्थ रिपोर्ट लिखेगी एक दिन, लेकिन इसकी नींव रख दी गयी थी वर्षों पहले, जन्मते ही सम्भवतः..उनके सारे रोग नए नहीं होते, उनका आयोजन पहले ही शुरू हो चुका होता है.

आज नन्हे का जन्मदिन है, उसे फोन किया तो नहीं उठाया, शायद रात को जगता रहा हो, सुबह ही सोया हो. उसके लिए बधाई के फोन आये. मोरारीबापू साऊथ अफ्रीका पहुंचा गये हैं, उनकी कथा आ रही है टीवी पर. जून आज कोलकाता गये हैं. दिसम्बर में वे बंगलूरू आश्रम जायेंगे, इस बात को सोचने से ही कैसी पुलक उठती है. आज तन और मन दोनों हल्के हैं. सारे रोगों का कारण प्रज्ञापराध है. उनका तन कितना बहुमूल्य है, इसे स्वच्छ व स्वस्थ रखना कितना आवश्यक है. यह ज्यादा कुछ मांग भी नहीं करता, लगातार काम करता रहता है. ‘कम खाओ और गम खाओ’, यह नियम अपनाना होगा यदि भविष्य में भी स्वस्थ रहना है. आज ध्यान में अच्छा अनुभव हुआ, जून जब घर पर रहते हैं उसका ध्यान गहरा नहीं हो पाता. अब उनके आने पर भी सजग रहना होगा ! परसों वे आ जायेंगे.

कुछ देर में उसे एक परिचिता के साथ मृणाल ज्योति जाना है. जब कहीं जाना हो तो प्रतीक्षाकाल में कार के हॉर्न की आवाजें ज्यादा ही सुनाई देने लगती हैं, वैसे जिनकी ओर ध्यान भी नहीं जाता. ‘लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन’ कितना जबर्दस्त है. आज ही उसने चाहा कि माली ग्यारह बजे से पहले आये, सो आ गया है. इस तरह तो उनका भाग्य उनके ही हाथों में है. वे जो चाहते हैं, वैसा ही सोचना आरम्भ कर दें तो प्रकृति उसका इंतजाम करने लगती है. आज सद्गुरू ने अपने जीवन के कुछ प्रसंग बताये. इक्कीस वर्ष की अवस्था तक वे दुनिया के सारे सुख-आराम देख चुके थे, विदेशों में घूम चुके थे. एक विश्व प्रसिद्ध संस्था के उत्तराधिकारी बन सकते थे, पर वे लौट आये और सेवा का मार्ग चुना. ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की स्थापना की. अद्भुत है उनकी कहानी. ऐसे लोग दुनिया में विरले होते हैं, जो करोड़ों लोगों तक पहुंच पाते हैं, सभी उनसे प्रेम करते हैं.


जून आज आ रहे हैं. उनकी पसंद की ड्रेस पहनी है. प्रेम क्या होता है, इसका पता ईश्वर से प्रेम करने के बाद ही चलता है. इसीलिए संत-महात्मा युगों-युगों से उन्हें प्रभु की ओर चलने का मार्ग बताते आये हैं. परमात्मा उनके प्रेम का प्रतिदान अनंत गुणा देता है. एक बूंद जो सागर से बिछुड़ी थी, कितनी छोटी  थी और जब पुनः सागर में जा मिली तो अनंत गुणा जल उसे मिल गया. उनकी चेतना इस देह में कितनी नन्ही सी लगती है, एक चिंगारी हो जैसे या सूर्य की एक किरण और जब वह चिंगारी किसी तरह पुनः आग में गिर जाये तो...या सूर्य की किरण पुनः सूर्य में पहुंच जाये तो..कितना प्रकाश न भर जायेगा उसके भीतर; लेकिन एक बात यह भी है कि सूर्य स्वयं जाकर कलियों को खिला नहीं सकता, वह अपने हाथ बना लेता है किरणों को, जो आहिस्ता से सहलाती हैं और किरणें खिल जाती हैं; ऐसे ही अनंत परमात्मा स्वयं आकर सोए हुओं को कैसे जगायेगा, मानव उसका तेज सह ही नहीं पायेगा, वह संतों को अपना हाथ बना लेता है जो आहिस्ता से आकर जगाते हैं. कलियों के लिए किरणें संत से कम नहीं..पंछियों के लिए भी...ऊपर से तुर्रा यह कि फूल के भीतर जो भोजन बनता है वह भी सूर्य के बिना सम्भव नहीं. सूर्य उसके भीतर सदा ही है, पर वह जानता नहीं, मानव के भीतर भी परमात्मा के कारण ही चेतना है, पर वह जानता नहीं, वास्तव में स्वयं को ही जगाने आता है वह क्योंकि उसे स्वयं का अनुभव करना हो तो मन का आश्रय लेना होगा, उसके पास तो मन है नहीं..तो भक्त का मन भगवान ले लेता है और बदले में स्वयं को दे देता है, अदला-बदली हो जाती है और प्रेम का यह खेल गुपचुप चलता ही रहता है !      

Wednesday, December 28, 2016

बैलगाड़ी से यात्रा


आज दसवें दिन बाबा ने अपना अनशन तोड़ दिया. गुरूजी और बापू के कहने पर ही यह सम्भव हुआ. उसके मन से भी जैसे कोई बोझ उतर गया है. चार जून को राजधानी में जो हुआ वह अप्रत्याशित था. उसके बाद की घटनाएँ भी कम दुखद नहीं थीं. आज वह अस्पताल से छूट जायेंगे. शायद कल से वे उन्हें पुनः आस्था पर देख पायें. कल दिन भर गर्मी बहुत रही पर आज बदली छायी है. नन्हे के लिए जो कविता उसने लिखी थी वह जून को भेजी है, पत्र से अच्छा है उसे ही भेज दे. समझदार को इशारा ही काफी है. आजकल नेट पर उसकी कविताएँ ज्यादा लोगों द्वारा पढ़ी जा रही हैं. परमात्मा की कृपा है, बल्कि कहना चाहिए उसीका गुणगान हो रहा है. भगवद्गीता का पांचवा अध्याय लिखना आरम्भ करना है. मन में अब भी विकार नजर आते हैं, संस्कार पुराने हैं लेकिन ध्यान में उनकी स्मृति भी नहीं रहती. तब केवल प्रकाश ही शेष रहता है. वाणी की कठोरता जाते-जाते भी नहीं जाती, शायद यह उसका प्रारब्ध है, लेकिन इससे नये कर्म तो संचित नहीं हो रहे, सद्गुरू हँस रहे होंगे उसकी इस बात पर. जिसने अपना-आप परमात्मा के साथ एक करके देख लिया वह अभी तक कर्मों के फेर में पड़ा है. यदि कोई यह मान ही बैठा है कि उसकी वाणी कठोर है और इसमें कभी कोई परिवर्तन हो ही नहीं सकता तो नहीं हो सकता. मान्यता ही संस्कारों को दृढ करती है !

कल दोपहर हिंदी पढ़ने उसकी दोनों छात्राएं आयीं और बैठी रहीं, उसे बुलाया नही और वह दूसरे कमरे में नई कविता टाइप करती रही यह सोचकर कि आज गुरूवार है. असजगता ही इसका कारण है. आज सुबह माली को डांटा, बाद में लगा क्रोध उचित नहीं था. वे किस तरह जीते हैं, रोबोट की नाईं  ही तो. आज नैनी का आपरेशन है, पिताजी को उसकी चिंता हो रही है. उनका हृदय बहुत कोमल है, उसकी बेटी से भी उन्हें मोह हो गया है.

आज फिर उसके सिर में हल्का दर्द है कारण वही पेट से सम्बन्धित होना चाहिए. उस दिन सुना था कि देह में मैल तभी जमता है जब मन में बात जम जाती है. उसके मन में एक ही नहीं अनेक बातें जम गयी हैं. भगवद्गीता पढ़ रही है तो पता चल रहा है, मन कितना चंचल है, कुछ पल भी इसे टिकाना कितना कठिन है और मक्खी की तरह यह जाता भी बार-बार कीचड़ की तरफ ही है. काम, क्रोध व लोभ को नर्क के द्वार बताया है. कितना सही है. रोग से बढ़कर और कौन सा नर्क होगा. अचेतन मन एक अथाह सागर है. कितने जन्मों की वासनाएं छिपी हैं उसमें. साधना की गति बैलगाड़ी की चाल से बढ़ रही है फिर भी भीतर एक आनन्द छाया रहता है. सद्गुरू के निकट रहकर जो साधना कर पाते हैं वे शीघ्र पहुँच जाते हैं, ऐसा भी कोई नियम नहीं है. आज बड़े भाई को दो कहानियाँ भेजी हैं, देखे, उनकी बिटिया को स्कूल में काम आती हैं या नहीं.


आजकल कितने अजीब-अजीब स्वप्न आते हैं. देखते समय यह भी पता चलता है, यह स्वप्न है. उस दिन स्वप्न में एक जैन मुनि को प्रवचन देते सुना और बाद में एक गोल-गोल घूमने का, ध्यान का अनुभव हुआ. परसों एक यात्रा की, मोटरबाइक पर लम्बी यात्रा. मन की क्या कहे कोई, कहाँ-कहाँ घूमने चला जाता है. कल रात स्वप्न में साईं बाबा को देखा. विशाल प्रांगण था. वह दूसरी मंजिल की बालकनी में थी. एक गार्ड बारी-बारी से उनसे मिलाने ले जा रहा था. एक वृद्ध व्यक्ति उनके चरणों को छू रहा था पर वह नाखूनों को एक-एक कर पकड़ रहा था. उनका चेहरा नहीं दिखा पर उनके गाउन का केसरिया रंग झलक रहा था. वह एक डायरी पर कुछ लिख रही थी, शायद वे प्रश्न जो उसे पूछने थे. पर जब उसकी बारी आयी तो गार्ड ने कहा, आप पढ़-पढ़ के उनसे बात करेंगी तो उसने  डायरी और पेन रख दिए और कहा, नहीं वह ऐसे ही जाएगी. तब वह एक ऐसे कमरे में पहुंची जहाँ जमीन पर काले रंग का बिछावन बिछा था. कई लोग साधना कर रहे थे. वह बैठ गयी तो साईं बाबा प्रवचन देने वाले थे पर एक महिला वहाँ खड़ी होकर उनकी जगह बोलने लगी और उसकी नींद खुल गयी अथवा तो स्वप्न टूट गया. यह स्वप्न कहीं उसके मन का मायाजाल तो नहीं अथवा..लेकिन आज सुबह ध्यान में कृष्ण के दर्शन हुए तथा भीतर चलने वाले यज्ञ का आभास हुआ जिसमें श्वासों की समिधा निरंतर पड़ रही है. उसने एक कविता लिखी थी ‘यज्ञ भीतर चल रहा है’  पर आज उसका अर्थ स्पष्ट हुआ. कृपा निरंतर बरस रही है..वे ही अपना पात्र उल्टा करके बैठे रहते हैं. देह को ही सब कुछ मानकर उस अनुपम खजाने से वंचित रह जाते हैं. परम ही चारों ओर खेल कर रहा है. उनका मन एक रोबोट की नाईं है, बटन दबाया और उसका काम शुरू हो जाता है. वे खुद तो सोये रहते हैं तो जीवन का हाल तो बेहाल होना ही है...सद्गुरू के बिना कौन बतायेगा यह सब ? आज विश्व संगीत दिवस है.     

Sunday, July 31, 2016

दर्द का अनुभव


सन् अठानवे में TTC Phase1(शिक्षक कोर्स) भी कर लिया और उसके बाद से पूर्णकालिक शिक्षिका हैं और सदा यात्रा करती रहती हैं, सरल स्वभाव है, रंग गोरा है, मीठा बोलती हैं, धीरे-धीरे बोलती हैं, उसे उन्होंने मन्त्र दीक्षा दी है. स्नेहमयी हैं, मस्त हैं और प्रसाद पूरी रुचि से ग्रहण करती हैं. गुरूजी के प्रति पूर्ण समर्पित हैं, कहती हैं कि वे सब कुछ जानते हैं. सहज समाधि कहाँ हुआ, किसके घर हुआ, उसे तो सुनकर ही सिहरन होने लगी. सद्गुरू के साथ उन्हें भी कृपा के कई व्यक्तिगत अनुभव हुए हैं. वह जादूगर हैं..ईश्वर से अभिन्न हैं, ऐसे महापुरुष, महात्मा कभी-कभी ही होते हैं, बिरले ही होते हैं. वह एक सखी के यहाँ बैठी थी, उनकी प्रतीक्षा कर रही थी कि सहज ध्यान होने लगा. सद्गुरू का भावपूर्वक स्मरण करते ही वह भीतर अनुभूत होने लगते हैं, वह एक ही सत्ता है, वह कैसी अनोखी सत्ता है..जितना रहस्य खुलता जाता है, उतना ही बढ़ता जाता है.  

आज बैसाखी है, पंजाब का त्यौहार ! फसलों और मेलों का उत्सव ! कुछ लोगों को उसने SMS संदेश भेजा है. कल से बीहू की छुट्टियाँ हैं. जून का दर्द अभी तक ठीक नहीं हुआ है. पूरा एक महीना होने को है. आज वह न तो टहलने गये न ही सुबह प्राणायाम, व्यायाम आदि कर पाए.

बीहू का पहला अवकाश. मौसम आज खुला है. धूप के दर्शन हो रहे हैं. कल रात जून को दर्द के कारण नींद नहीं आ रही थी. उनकी छाती में दायीं ओर पसलियों में दर्द होता है, दिल की धड़कन भी महसूस होती है. कल डिब्रूगढ़ दूसरी बार गये इसी सिलसिले में. इस वक्त भी लेटे हैं. मानव का बस, बस थोड़ी दूर तक ही चलता है, रोग, बुढ़ापा और मृत्यु के सामने उसका कोई बस नहीं चलता. इस समय दोपहर के साढ़े बारह बजने को हैं. वह सहज ध्यान करने बैठी तो दुनिया भर के विचार आने लगे, पहले कुछ शारीरिक व्यायाम करके ध्यान करने बैठो तो सहज ही होता है !
योग शिक्षिका का SMS आया है –

छोटे से जीवन में छोटी सी
मुलाकात थी प्यार भरी
आज आपका शब्दों का गुलदस्ता पाया मैंने और समर्पित किया उनको जो मुझे बनाये आप जैसे उनके प्यारों के लिए !  

उसे जवाब लिखना है –

माना छोटी सी थी मुलाकात
दिल ने दिल से कर ली बात,
आपका जीवन जन-जन अर्पित
सृष्टा को है पूर्ण समर्पित !

शांति सरलता की जो मूरत
सदा प्रेम झलकाती सूरत,
नृत्य भरा कदमों में जिनके
याद रहेगी उनकी मन में !

मस्त चाल अनोखी मुद्रा
सजल नयन विश्वास भरा,
सारी पूजाएँ, अर्चना
हों एक के लिए सदा !





Tuesday, March 25, 2014

लीची का शरबत


कल उन्हें पता चला कि एक मित्र को vertigo हो गया है, उसने पहली बार यह शब्द सुना था, शायद कान से जुड़ा कोई रोग है. वे लोग देखने गये तो पीने के लिए कोल्डड्रिंक दिया गया, जुकाम होने के बावजूद शिष्टाचार वश उससे मना नहीं किया गया, वैसे ज्यादा ठंडा नहीं था, पर उसके कारण नुकसान तो हुआ ही होगा. गले में दोनों ओर सूजन  हो गयी है और छूने से एक ग्लैंड में हल्का दर्द भी होता है, धीरे-धीरे खुद ही ठीक हो जायेगा, जून उसकी बीमारी से घबरा जाते हैं.

आज भी वह स्वस्थ नहीं है, बांया गाल फूल गया है, ब्रश करते समय व खाते समय दर्द होता है. आज डॉ को दिखा ही लेना होगा, जून ने परसों भी फोन किया था, पर उसके मना करने पर वे मान गये, उसे यकीन था कि एक-दो दिनों में ठीक हो जाएगी, पर उसके अस्वस्थ रहने से घर का माहौल ही अस्त-व्यस्त हो जाता है. कल शाम एक मित्र परिवार मिलने आया, उन्होंने पहली बार लीची का शरबत बनाया, खुद उसे पसंद नहीं आया, उसकी सखी जान ही नहीं पाई कि वह  अस्वस्थ है, शायद जैमिनी अपनी बीमारी छिपाने में माहिर होते हैं, खास-तौर से उसे तो अपने रोग के बारे में बात करना बहुत खराब लगता है, अस्वस्थ होना एक गुनाह लगता है, मानसिक उदासी हो या शारीरिक परेशानी स्वयं तक ही सीमित रखना ठीक है, जब तक कि ऐसा किया जा सकता हो. जून को लेकिन वह सब कह देती है, उनसे छिपाना मुमकिन भी नहीं है जो चेहरे के एक-एक भाव को पढ़ लेते हैं.

आज शाम लेडीज क्लब की कमेटी मीटिंग है, जो अब मात्र तीन और रह गयी हैं, इसके बाद नई कमेटी बनेगी और उसकी व्यस्तता कम हो जाएगी. जिस वक्त फोन आया, वह बहुत परेशान थी, कुछ देर पहले ही नन्हे पर झुंझलाई थी, अपनी अस्वस्थता से तंग आ चुकी थी, कल अस्पताल से ढेर सारी दवाइयाँ लेकर आई थी, चार-पांच दिन की अस्वस्थता ने ही जब इतना बेचैन कर दिया है तो उनकी मनोस्थिति कैसी होती होगी, जिन्हें मालूम होता होगा कि सारी उम्र उन्हें इसी के साथ जीना है. साढ़े नौ हो गये हैं, उसने पूरा एक घंटा फोन पर बात की होगी, एक-एक करके तीन सखियों से, इधर-उधर की बातें करना यूँ ही बिना किसी वजह के, शायद वह स्वयं को यकीन दिलाना चाहती है कि वह ठीक हो गयी है. शाम को जाना भी है, नई साड़ी में कल शाम फाल लगाई और आज पीको करवाने के लिए दी है. पिछले एक घंटे में कुछ देर पीटीवी पर एक धारावाहिक ‘सियाह सुफेद’ देखा, जिसका मुख्य चरित्र एक काला मन लिए है, उसका बेटा जिसे हीरो भी कह सकते हैं, काला है न सफेद बल्कि सलेटी है पर एक न एक दिन उसे अपना रास्ता चुनना ही पड़ेगा, आदमी या तो अच्छाई के रास्ते पर पूरी तरह चल सकता है या नहीं चल सकता. आज भी धूप उतनी ही तेज है, आज उसे पत्र भी लिखने हैं, सारी दोपहर सामने है और मन में उत्साह भी कि वह स्वस्थ हो रही है.

आज फिर उसे अपनी अस्वस्थता का अहसास हो रहा है, सुबह सेक्रेटरी आई थीं, लेडीज क्लब के बुलेटिन की कॉपी लेने जो उसने कम्प्यूटर पर टाइप किया था. मशहूर संगीतकार मदन मोहन को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित किया गया एक सीडी सुना.

आज स्वस्थ है, बिलकुल ठीक होना कैसा होता है, वह तो भूल ही गयी है, पर अपेक्षाकृत काफी ठीक है, दस बजे संगीत कक्षा में जाना है. आज भी गर्मी पहले सी है, कल शाम बंगाल की खाड़ी में आये तूफान की वजह से ठंडी हवा बहने लगी थी पर बादल भी उसी के साथ हवा हो गये. सवा नौ हुए हैं, थोड़ी देर पहले ही स्वीपर को ढंग से काम न करने पर फटकारा है, कल भी उसने एक बाथरूम बिना धोये ही छोड़ दिया था, शायद बीमारी के कारण, अस्वस्थता हर इन्सान को एक सा दुख देती है, ठीक ही कहा है, अस्वस्थता से बढकर कोई अभिशाप नहीं, कोई गरीबी नहीं, कोई गुनाह नहीं.

And today she could do exercise also. It rained in the night, every thing is clean, cold and wet outside but inside is still stuffy. ‘Teacher’ is being shown on zee tv, one of the good serial. Yesterday could not write, went to see the doctor for pain in arm, then to hindi class and evening was with shahrukh khan and juhi chawla. Secretary  picked her up for going to give fare well bouquet to one lady, (singer and radio artist) she is leaving this place  for ever. In the morning talked to mother who is with younger sister. Sister is happy, she is now captain. Got her letter also, she is very very sensitive and sensible girl. Nuna is proud of her !