Wednesday, July 22, 2020

वसिष्ठ और राम



आज सुबह अप्पम बनाये नाश्ते में, जून के एक सहकर्मी आये थे दस बजे कुछ जानकारी लेने, उन्हें भी खिलाये. पसन्द आये उन्हें. उन्होंने अपने बाल्यकाल की बातें बतायीं, किस तरह उनके माता-पिता ने कृषि का काम करना सिखाया तथा भोजन बनाना भी. कक्षा पांच में थे तब दोसा बना लेते थे. अब भी वे घर पर खेती करते हैं, उनके लिए खुद की उगाई सब्जियां लाये थे. टीवी में रामदेव जी को देखकर नियमित योग अभ्यास भी करते हैं. जून ने भी उन्हें सहजन व नारियल तुड़वा कर दिए. कल माली ने बहुत सारे सहजन तोड़े थे, दो तीन अन्य परिवारों को भी बांटे। सुबह शिवानी को सुना, कितना ज्ञान उनके भीतर भर है सीधा परमात्मा से उतरता है ज्यों ! दोपहर को सब्जी-फल लेने वे तिनसुकिया गए. बीहू के कारण बहुत चहल-पहल थी. नन्हे-सोनू  से बात की कल वे लोग किसी मित्र के विवाह में राजस्थान जा रहे हैं. नए घर में रंगरोगन का काम शायद कल से शुरू होगा. दोनों के लिए उसने वस्त्र खरीदे, पहली बार एक साथ दोनों के लिए ! बड़े भांजे के विवाह की सालगिरह है आज, दीदी के यहां फोन किया, सभी आये हुए हैं, विदेश में रहने वाली भांजी भी आयी है. शनिवार को वे पुस्तकालय गए थे उसे याद करते हुए शाम को एक घन्टा पढ़ने में बिताया. पिताजी ने बताया वह आजकल योगवशिष्ठ व भागवद पढ़ रहे हैं, पर इन ग्रन्थों को नॉवल की तरह नहीं पढ़ना चाहिए, नियमित एक या दो पृष्ठ का अध्ययन करना चाहिए. योग वसिष्ठ में राम ने हर अवस्था में मानव के दुखों का कैसा मार्मिक वर्णन किया है. कलात्मक भाषा में अहंकार, मोह व तृष्णा के दुष्परिणामों का वर्णन किया गया है. चित्त की अशुद्धि को दूर रखने के लिए मन को स्थिर रखना होगा. समता को भावना में टिके बिना आत्मपद में स्थित होना असंभव है. तेनाली रामा में मुल्ला नसरुद्दीन भी आ गए हैं आजकल, उन्हें त्रिदेव के दर्शन करने हैं !

मौसम आज सुहाना है. सुबह साढ़े तीन बजे ही उठ गयी, उससे पूर्व ही एक स्वप्न देखकर नींद खुल गयी थी. छोटे भाई को देखा और उसके पूर्व स्वर्गवासी सास-ससुर को भी, वे अस्पताल में हैं. मन पुरानी स्मृतियों को दोहराता है पर कुछ इशारे भी करते हैं ये स्वप्न. मन आकर्षक दृश्यों को दिखाता है ताकि अपनी उपस्थिति जताता रहे. अव्यक्त की अनुभूति अब कितनी स्पष्ट होती है, एक प्रकाश, एक शांति और एक चैन के रूप में ! सुबह प्रातः भ्रमण से लौटते समय पलाश के फूलों से लदे  लाल वृक्ष देखे, कल वे  मोबाईल लेकर जायेंगे  और उनकी तस्वीरें उतारेगें. पहली बार पूरे के पूरे वृक्ष फूलों के लद गए हैं.  दोपहर को अचानक तेज हवा चलने लगी और एक घण्टे  तक मूसलाधार वर्षा होती रही. योग सत्र में ध्यान किया व करवाया, गुरूजी का ज्ञान पत्र पढ़ा; यह देह भी एक युद्ध क्षेत्र है, ऐसा उन्होंने कहा. उन्हें अपने भोजन पर ध्यान देना है, एक वृद्ध व्यक्ति से सुना था, ‘कम खाओ और अधिक खाओ’ भोजन  ऐसा हो कि देह में सुस्ती न आने पाए स्फूर्ति बनी रहे. टीवी पर प्रधानमंत्री की उड़ीसा में की गयी विशाल रैली दिखाई जा रही है. विपक्षी उनकी उपलब्धियों पर प्रश्नचिह्न लगा  रहे हैं और बीजेपी कांग्रेस के घोषणा पत्र को ढकोसला पत्र कह रहे हैं. गंधराज खिल गए हैं अभी उनकी तस्वीर उतारी ! 

शायद कोई संदेश मिला था उस दिन जो उसने बरसों पहले लिखा होगा - 

आ सकती नहीं वह 
आ सकता वह 
आएगा 
या बन जायेगा पत्थर पर खुदा
उसने उठाया उसे बाँहों में 
हवा उठाती ज्यों चिन्दी को 
ज्यों उठाते हैं जल चढ़ाने सूर्य को 
नसीब एक भारी पत्थर 
वे बच्चे 
करते हैं कोशिश हटाने की 
पत्तों के बीच थिरकती किरणों से खेल 
बनना नहीं चाहती वह नाव 
उसे ला दो समुन्दर 
वह घुल जाये बह जाये उसी में 
हवा आती है गुजर जाती है 
जैसे दूसरे देश का वासी 
जैसे परछाईयाँ तेज बादल की 
घाटी पर रुकती नहीं चली जाती हैं !

Tuesday, July 21, 2020

विनोबा भावे के विचार


शाम के पौने पांच बजे हैं. बाहर धूप है, पंखे के बिना बैठना नहीं भा रहा है. आज नवरात्रि की सप्तमी तिथि है. कल कन्या पूजन करेंगे. सुबह नैनी व माली की बेटियां बीहू नृत्य की ड्रेस पहनकर आयीं, स्कूल के कार्यक्रम में जा रही थीं. उसने उनकी तस्वीरें उतारीं. अभी कुछ देर पहले मालिन आयी आशीर्वाद लेने, किसी ने उसे कह दिया है कि आज के दिन बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए. उसने मन ही मन प्रार्थना की परमात्मा इन सबको ढेर सारी खुशियाँ दे. सुबह उठने से पूर्व जैसे कोई भीतर कह रहा था, उन्हें किसी को बदलने की आवश्यकता नहीं है, वे जैसे हैं अति प्रिय हैं. सभी अपने-अपने संस्कारों के अनुसार कर्म करते हैं , यदि उन्हें वे संस्कार कष्ट देते हैं तो वे खुद ही उन्हें बदलने का प्रयास कर सकते हैं परमात्मा भी आकर यह काम नहीं कर सकता. बगीचे में जैसे बैंगन, आलू, भिंडी सभी कुछ जैसे बीज हों वैसे ही उगते हैं. वे यदि किसी को दोषी  देखते हैं तो वह दोष उनमें भी होता है. यदि वे स्वयं को आत्मा देखते हैं तो अन्यों को भी निर्दोष ही देखेंगे. परमात्मा के सिवा जब इस जगत में कुछ है ही नहीं तो कौन दोषी और कौन निर्दोष ! 

कुछ देर पहले नन्हे से बात की वह नए घर में था, काफी काम हो गया है पर काफी कुछ बाकी भी है. दो सप्ताह बाद वे वहाँ जा रहे हैं, शेष कार्य उनके जाने के बाद होगा. आज रामनवमी भी है और बैसाखी भी, बीहू का अवकाश भी शुरू हो गया है. उन्हें इस समय का अच्छा उपयोग करना है. सुबह अष्टमी की पूजा का कार्यक्रम ठीक रहा. मौसम आज भी गर्म है. पीछेवाली सब्जी बाड़ी में मजदूर काम कर रहे हैं, सीवर की पाइप बदलनी है जो इलेक्ट्रिकल विभाग के लोग जब खुदाई करने आये थे टूट गयी थी. छोटा भाई बहुत दिन बाद घर गया है. पिताजी के साथ तस्वीर भेजी है, वह बहुत शांत लग रहे हैं. सामने वाले लॉन में माली सफाई कर रहा है. कल रात आंधी बारिश के बाद ढेर सारे पत्ते गिरे. सुबह टहलते समय देखा, बस स्टैंड के पास एक फूलों वाले पेड़ की बड़ी सी डाल टूटकर गिरी हुई थी. बाद में नैनी ने बहुत से फूल लाकर सजा दिए. दोनों ननदों से बात की, दोनों का स्वास्थ्य नासाज था, नियमित दिनचर्या व व्यायाम कितने जरूरी हैं स्वस्थ रहने के लिए ! 

आज बाबा रामदेव का दीक्षा दिवस है, छोटे-छोटे बच्चों को अष्टाध्यायी के सूत्र सुनाते हुए देखा टीवी पर. उनके गुरुकुल में सैकड़ों बच्चे संस्कृत सीख रहे हैं. लता मंगेशकर ने पीएम के द्वारा गायी पंक्तियों को गीत बनाकर रिकार्ड किया है. प्रधानमंत्री के रूप में वह उनके सम्मान के पात्र हैं, उन्हें रशिया का एक पुरस्कार भी मिला है. 

उसने विनोबा भावे का यह विचार पढ़ा- दूसरों को प्रेम करने से ही प्रेम मिलता है. वर्षों पहले लिखा  था इसे पढ़कर, कल शाम पिताजी की टाई ढूंढते समय वह बिलकुल यही बात सोच रही थी. यह दुनिया एक दर्पण है कोई जो कुछ करता है वही उन्हें दिखाई देता है. सब लोग एक जैसे होते हैं, थोड़ा बहुत अंतर हो तो हो, नीचे गहराई में सबका मन भरा हुआ है लबरेज प्याले की तरह छलक पड़ने को आतुर ! वैली ऑफ़ फ्लावर का सुंदर पोस्टकार्ड मिल गया टाई ढूंढते- ढूंढते उसके लिए ! उसे लगा, यह किसी और की बात है, पिताजी कभी टाई भी बांधते थे, यह तो जरा भी याद नहीं आता. 

Monday, July 20, 2020

समंदर की लहरें



कल शाम वे गेस्टहाउस गए, उस सखी की बिटिया का जन्मदिन था, जो अपना घर देखने आयी थी . उसके पूर्व दो माह बाद एओल टीचर द्वारा करायी सुदर्शन क्रिया में भाग लिया. क्रिया के बाद कुछ ज्ञान चर्चा भी हुई. सार निकला, वे अपना समय तथा ऊर्जा उन लोगों के सामने स्वयं को कुछ सिद्ध करने में लगा देते हैं जिन्हें उनकी जरा भी परवाह नहीं होती. वे अपना प्रेम उन पर लुटाते हैं जिन्हें प्रेम के बारे में केवल अपने हानि-लाभ ही ज्ञात होते हैं.  सरल और सहज रहकर यदि वे अपने काम से काम रखें तो जीवन कितना सुंदर होगा. परमात्मा अपनी कृपा दोनों हाथों से नहीं बल्कि हजार हाथों से लुटा रहा है, उनकी झोली इतनी छोटी है और मोह, कामना के इतने छिद्र हैं उसमें कि वे उसको पहचानें इसके पहले ही वह झर जाती है. वे जो वास्तव में हैं वही जगत के सम्मुख आये, कोई भी दम्भ या दिखावा उन्हें छू न जाये. जून आयकर के सिलसिले मेंआज डिब्रूगढ़ गए हैं. आज सुबह उसे पीठ में जकड़न सी  हुई,  दवा लगाकर हीटिंग पैड से सेंक किया. सो आज सुबह की साधना नहीं हुई, बाद में ध्यान किया कोई जैसे भीतर से पढ़ा रहा था. जगत से लिया हर सुख दुःख के साथ मिला हुआ होता है, जैसे कड़वी दवा पर मीठी परत होती है कुछ ऐसे ही. उन्हें आत्मानुभव बढ़ाते जाना है. जीवन में जो भी परिस्थिति आए उससे कुछ सीखकर आगे बढ़ जाना है यदि असजग रहे तो पत्थर की तरह वह पैरों में बंध जाती है और जितनी गति से वे पहले चल रहे थे उससे भी कम गति रह जाती है. दिन में दो बार और पीठ पर सेंक किया, दोपहर को हल्का भोजन सो अब सब ठीक है. कल उन्हें मतदान करने जाना है, हायर सेकेंडरी स्कूल में सेंटर है. आज सुबह सुना स्वामी अनुभवानंद जी कह रहे थे, परमात्मा से मांगने योग्य वस्तु क्या है ? उन्हें ऐसा दिल मिले जिसमें किसी भी प्राणी के लिए स्वप्न में भी कोई द्वेष या कटुता न हो, ऐसे दिल में ही परमात्मा बसते हैं. 

शाम के चार बजने वाले हैं. टीवी पर चुनाव समाचार आ रहे हैं. पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा की खबरें आ रही हैं. आज सुबह वे वोट डालने गए. पिताजी से बात हुई, वे छोटी भाभी के साथ अठ्ठासी वर्ष की उम्र में भी पैदल चलकर मतदान करने गए.  उन्हें बहुत अच्छा लगी यह बात. आज बड़ी भाभी की चौथी पुण्यतिथि है, भाई ने बहुत सुंदर वीडियो उनकी स्मृति में बनाया है. उनकी बिटिया अगले हफ्ते आ रही है, अब वहीं रहकर जॉब करेगी. छोटे भाई से बात हुई, वह साधना में  अपने समय का सदुपयोग करता है. अब सिओल में पुरस्कार समारोह में मोदी जी का भाषण आ रहा है. इतने प्रभावशाली ढंग से वह भारत की बात कर रहे हैं. वह एक विश्व नेता हैं, सरे विश्व में उनकी बात सुनी जाती है. आज माली की पत्नी ने बताया उसकी बेटी को स्कूल में नृत्य में भाग लेना है, ड्रेस माला आदि खरीदने के लिए  पति ने पैसे नहीं दिये. उसे आवश्यक पैसे दिए और अपना अकाउंट खोलने को कहा, ताकि अपने लिए कुछ बचत कर सके.

पता नहीं वर्षों पूर्व उस दिन उस पन्ने पर क्यों लिखा होगा, 
‘समुन्दर ! तुम कितना बड़ा दर्द हो ! अपनी बाँहों, टांगों से सारा दर्द फेंकते किनारे को, लेकिन किनारा एक ही ठोकर से लौटा देता तुम्हारा दर्द तुम्हीं को !’ 
परीक्षाओं के कारण एक लाभ उसे अवश्य हुआ है कि पढ़ने के लिए एकांत मिल जाता है. न किसी के साथ किसी संबन्धी के घर जाना और न बाजार न फिल्म देखने. पर यह खुशफहमी जल्दी ही दूर हो गयी, भाभी की भाभी आयी और अगले ही दिन उनके साथ गयी ‘सत्ते पे सत्ता’ देखने, केवल उन्नीस दिन रह गए हैं परीक्षाओं को. कम से कम अब तो उसे पढ़ाई के प्रति गम्भीर हो जाना चाहिए. कुछ दिनों की पीड़ा जीवन भर के सुख का आधार बन जाएगी,  इसलिये सहो, जितना सम्भव हो सहो गणित के सवालों की तीखी धारों को अपने मस्तिष्क के तन्तुओं पर... उसे अब अचरज होता है क्या पढ़ाई पीड़ा लगती थी उसे. 


Saturday, July 18, 2020

श्री मद देवी भागवत



रात्रि के पौने आठ बजे हैं. पिछले चार दिन खुद से मिलना नहीं हुआ, भला ऐसी भी क्या व्यस्तता ... कल एक सखी आयी, वे लोग कुछ वर्ष पहले तबादला होने पर चले गए थे, अब पुनः वापस आ गए हैं, अपना घर देखने आयी थी. सम्भवतः अगले महीने वे लोग सामान लेकर आ जायेंगे. आज से चैत्र नवरात्र आरंभ हो रहे हैं. सात्विक भोजन और देवी पुराण का पाठ, अष्टमी को कन्या पूजन, नवरात्र साधना के लिए उत्तम समय है. जीवन को उच्च बनाने ले लिए कुछ व्रतों को धारण करना बहुत आवश्यक है. सुबह मृणाल ज्योति गयी, जून ने अपने बहुत से वस्त्र दिए जो भविष्य में काम नहीं आएंगे. हॉस्टल के बच्चे थे और कुछ टीचर्स, उसने योगासन करवाये और एक खेल भी. स्कूल में पीले रंग की मुख्य दीवारों पर बच्चों ने सुंदर कलाकृतियां बनायी हैं. लगभग सभी बच्चे आर्ट में कुशल हैं. 

सुबह उठे तो मौसम खुला था, धूप थी, दस बजे जब क्लब गयी तो हल्की गर्मी भी, पर एक घण्टे बाद जब बाहर आयी तो हवा चलने लगी थी और बाद में वर्षा भी हुई, शाम तक बूंदा बांदी जारी रही. क्लब का सेल का आयोजन अच्छा रहा है आज, आज किसी को भी ज्यादा काम का अहसास नहीं हुआ. भूतपूर्व अध्यक्षा दिन भर स्वयं भी वहीं रहकर अन्यों को भी रुके रहने के लिए प्रेरित करती थीं.  उसने भी कुछ सामान खरीदा. मृणाल ज्योति का भी एक स्टाल था, उन्होंने कहा, ‘बोहनी हो गयी’. दोपहर को योग कक्षा के लिए बच्चे व महिलाएं प्रतीक्षारत थे. बच्चों ने बाद में चित्र बनाये और कागज के फूल बनाना भी उन्हें सिखाया. सुबह पिताजी से फोन पर बात हुई, वह बदले हुए मौसम से खुश हैं और अब रोज स्नान करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होती. उन्होंने कहा, मोदी जी बहुत ज्ञानवान हैं और वही भारत को आगे ले जा सकते हैं. करोड़ों भारतवासी मोदी जी के साथ हैं, उनके विरोधी कितना भी प्रयास कर लें, उनसे जीत नहीं पाएंगे. वह हर दिन तीन रैलियां कर रहे हैं. देश में चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गयी हैं. टीवी, अख़बार, या मोबाइल सभी पर नेता और पार्टियां अपना प्रचार करती नजर आ रही हैं. नवरात्रि का दूसरा दिन है आज. प्रकृति के देवी स्वरूपों के विषय में ‘देवी भागवतम’ में पढ़ा, अद्भुत व्याख्या है देवियों के रूप में जीवन की. 

अहंकार कितने सूक्ष्म रूप में मन में रहता है, इसको प्रकट करने के लिए परमात्मा ही भिन्न परिस्थितियों को उत्पन्न करते हैं. आज फेसबुक पर एक लेखिका द्वारा उसकी एक कविता को  अपरिपक्व कहे जाने पर उसने हटा लिया, यह अहंकार ही तो है. आलोचना को सहने के लिए निरहंकार होना है और दूसरों की राय से प्रभावित होना भी उचित नहीं. उसने देखा है, वह दूसरों की राय से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाती है, वह स्वयं को दिखावा करते हुए भी देख पाती  है कभी-कभी. अभी तक अपने समय और ऊर्जा का सही उपयोग भी नहीं कर पाती। समय बीतता जा रहा है, आसक्ति से मुक्ति अभी नहीं हुई. ‘मैं ‘की सही पहचान हो भी गयी है, पर ‘मैं’ की मिथ्या पहचान अभी भी बनी हुई है. समाधि का अनुभव सतत नहीं बना रहता. आज बीजेपी ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है. उनका संकल्प पत्र एक मिशन को लेकर आगे बढ़ने का पत्र है जिसमें अंत्योदय, राष्ट्रवाद तथा सुशासन की बात कह़ी गयी है. 

और अब वह पुरानी डायरी... जिसकी बातें पढ़कर उसे लगता है जैसे किसी और ने लिखी हैं... यूँ तो वर्तमान में भी वह केवल साक्षी है जो भी घट रहा है, जिसके साथ घट रहा है उससे वास्तविकता का जरा सा भी तो मेल नहीं...उस दिन के पन्ने पर ऊपर लिखी सूक्ति पढ़कर उसे लगा था, फिर वही बदमिजाज वाक्य उसे चिढ़ाने आ गया है. वाक्य था, ‘लोमड़ी खाल बदलती है आदत नहीं’ आज तो और भी, पर आज तो उसे खुश रहना चाहिए. उसने किसी को मुक्त कर दिया है, उसने ऐसा चाहा नहीं फिर भी उसने कहा, वह उसे आजाद करती है. आज उसकी समझ में आ रहा है कि वे व्यर्थ के जंजाल में फंसे थे. कुछ नहीं होता यह सब.... अर्थात मित्रता आदि. यह ठीक है कि वह अच्छा है और इसलिए वह उसका आदर करे उसकी अच्छाई के लिए पर वह नहीं जो वह समझता है या वह समझना चाहती थी. आज उसका पत्र मिला, पढ़कर कुछ भी नहीं हुआ. उसे निहायत बचकाना पत्र लगा, वह घिसापिटा चुटकुला और नसीहतें. उसका टाइम टेबल जानने की उत्सुकता या फिर आई एम ओके यू आर ओके पुस्तक की बात. वह उसे पत्र नहीं लिखेगी. वह जिस ओर जा रहा है उधर क्या है, कभी इधर कभी उधर कभी नौकरी, कभी  कुछ, उसकी तो कुछ समझ नहीं आता. कभी शोध कार्य करने की बात. एक लक्ष्य क्यों नहीं है. परीक्षाओं की भी चिंता नहीं उसके पेन की चिंता है. उसने सोचा दूसरा पत्र आने से पूर्व वह कोई पत्र नहीं लिखेगी. लगता है ज्यादा मीठा खाने को मिल गया है सो अब अच्छा नहीं लगता. अब वह हवा से हल्की है, कोई बोझ नहीं, कोई बंधन नहीं, मुक्त, बिलकुल मुक्त ! सिरदर्द मोल ले लिया था या पता नहीं क्या था वह, खैर ! अब तो सब ठीक है. अभी पढ़ाई करनी है जब तक नींद नहीं आएगी, और नींद आने का वक्त निकल चुका है अब जाग सकती है देर तक. कल विवेकानन्द की किताब से एक वाक्य पढ़ा था - मुक्ति का संदेश ! कुछ देर पहले एक अपनी जैसी एक लड़की से भेंट हुई रेडियो पर. गाड़ी में यात्रा करते-करते वह कितनी कल्पनाएं करती जाती है, स्वप्न देखती है कि .. कि .. और फिर स्टेशन आ जाता है. समांतर पटरियों पर चलने वाली गाड़ी !  


Wednesday, July 15, 2020

ट्रैफिक कंट्रोल



आज तीसरे दिन भी चार पोस्ट्स प्रकाशित कीं. योग कक्षा में एक साधिका अपनी बिटिया को लायी थी जो गोहाटी यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रॉनिक्स में शोध कर रही है. उसने भी एओल का कोर्स किया हुआ है, सबके साथ सुदर्शन क्रिया की. आज महीनों बाद लौकी के कोफ्ते बनाये, इस मौसम की पहली लौकी जो बगीचे से मिली थी. कल पीएम के जीवन पर चेतन भगत द्वारा निर्मित एक फिल्म देखी, बचपन में चाय बेचते थे और बड़े होने पर भी अपने चचेरे भाई के साथ एक कैंटीन में काम करते थे. संघ के प्रचारक बने. पहले सन्यासी बनना चाहते थे. अद्भुत है उनके जीवन की गाथा ! उनमें दृढ संकल्प शक्ति बचपन से ही थी. 

सुबह उठने से पूर्व एक अद्भुत स्वप्न देखा. परमात्मा की ओर से आया एक और संदेश जो उसे गुलामी से छुड़ाने के लिए है. वह एक परिवार में गयी है, साथ में दो अन्य जन भी हैं. वे पड़ोस के परिवार में चले जाते हैं. वे सब बात कर रहे हैं, फिर नूना किसी पत्थर पर कोई संदेश लिखती है, जब अपना नाम लिखने की बारी आती है तो उस खुरदुरे पत्थर पर कुछ भी लिखा नहीं जाता. नाम का पहला अक्षर नहीं लिखा है, तभी पिताजी कहते हैं, यह कैसा नाम है ? वह पुनः प्रयास करती है पर उस स्थान पर कोई भी रंग या चाक काम नहीं करता. वह उसे छोड़कर एक अन्य काले पत्थर पर लिखकर देखती है. श्वेत अक्षरों में ॐ ॐ लिखती है तो झट से पूरा स्थान भर जाता है, फिर अंत में छोटे अक्षरों में अपना नाम भी लिखती है अंग्रेजी में. तभी भीतर से आवाज आती है, स्वयं के नाम को मिटाना होगा, हाथ से मिटाने का प्रयत्न किया पर मिटा नहीं, यह यशेषणा का प्रतीक है. अगले स्वप्न में एक छोटा सा बच्चा है जो सम्भवतः उसी परिवार का है जिससे मिलने गयी थी, वह रात भर उनके घर पर ही रहा है, सुबह उसे छोड़ने जाना है. दृश्य बदलता है, जून फोन  करके उसके परिवार को कहते हैं कि उसे ले जाएँ. वह चाय बनाती है, पतीले में चाय उबल रही है तभी भीतर से आवाज आती है, इसे गिरा दो, दो सफेद कप भी दिखते हैं, उन्हें भी तोड़ देने का ख्याल आता है. यह आसक्ति है. जब तक भीतर जरा सा भी राग शेष है परमात्मा दूर ही रहता है. वह खाली मन में प्रवेश करता है. मन में कोई भी कामना शेष हो तो मिलन होगा भी कैसे ? 

रात्रि के आठ बजे हैं. वर्षा आरंभ  हो गयी है. कुछ देर पूर्व वे बाहर टहल रहे थे तब बरामदे के बल्ब पर पतंगों की वर्षा हो रही थी, सैकड़ों पतंगों ने गिरकर अपनी जान दे दी. क्या रहस्य है इन पतंगों के जन्म और मृत्यु का, कोई नहीं जानता. कल शाम व आज सुबह शिवानी को सुना, कितने सुंदर व सरल शब्दों में वह जीवन के सूत्र बता देती हैं. कहा, यदि हर घंटे एक मिनट के लिए वे जो भी काम कर रहे हों, उसे रोककर  अपने मन को देखें, ध्यान करें व अपने स्वरूप में स्थित हों तो अगले पूरे घंटे मन नियंत्रण में रहेगा, वह इसे ट्रैफिक कंट्रोल कहती हैं. सुबह बच्चों के स्कूल गयी, भूतपूर्व अध्यक्षा से अंतिम मुलाकात हुई, उन्होंने उस पार्क का उद्घाटन किया जो अभी बनना आरंभ नहीं हुआ है, एक दिन तो बन ही जायेगा. शायद वही ‘नाम’ की अभिलाषा... महीनों बाद आज बंगाली सखी से बात हुई, उसकी इकलौती पुत्री और दामाद कनाडा जा रहे हैं सदा के लिए. 

उसने पढ़ा, कालेज में थी तो स्कूल के दिनों को याद करती थी.... कभी-कभी उसे इंटर के वे दिन याद आते हैं जब राजकीय  इंटर कालेज में छुट्टी होने पर वह गेट पर भीड़ होने के कारण आगे जाने की जल्दी न करते हुए सबसे पीछे खड़े रहकर कबूतरों को देखा करती थी. उस स्कूल में कितने कबूतर थे. उसकी उस मनोस्थिति को या चेहरे के भाव को देखकर कुछेक छात्राएं आश्चर्य में आपस में कुछ कहा करती थीं. वे दिन भी क्या दिन थे, जब कोई चिंता न थी. उस लगा इंसान जहाँ और जब होता है वहाँ सुखी रहना नहीं जानता इसलिए अतीत के गुण गाया करता है. 

अगले दिन वह घर आ गयी थी, अपने कमरे में अपनी मेज पर. चचेरी बहन उसके बारे में कोई बात कह रही होगी, वह कितनी नादान है कितनी भोली मगर आज्ञाकारी बिलकुल नहीं. वह उसके लिये कभी कुछ कर सकी तो कितना अच्छा होगा. कालेज जाना था फ़ीस जमा करने और लाइब्रेरी से किताबें लेने. सबसे मिलने का भी आखिरी दिन था, परीक्षाओं के दौरान किसी को फुर्सत नहीं होती और यह अंतिम वर्ष है कालेज का सो... एक छात्रा ने पढ़ाई के बारे में पूछा तो उससे मिथ्याभाषण किया, वह उसका अहम ही तो था. सच बात कहने की उसमें हिम्मत नहीं. सच बात तो यह थी कि पिछले पांच दिन वह उस तरह बिल्कुल नहीं पढ़ पायी पर कहा, टाइमटेबल के अनुसार पढ़ी थी. इससे धोखा उसे दिया या स्वयं को. एक अन्य सखी मिली कालेज में जो आगे पढ़ना चाहती है पर घर वाले उसका रिश्ता तय कर रहे हैं, वह भी झुक जाएगी अपने मम्मी डैडी और भैया के विचारों से जो शहर के बड़े व्यापारी हैं. एक अन्य सखी मिली जो उसे बहकती हुई सी लगती है, बेवजह के शब्द उगलती. एक ने कहा, ‘आषाढ़ का एक दिन’ बकवास है. एक ने उसकी किताब नहीं लौटाई न ही पैसे दिए हैं जबकि वह उस दिन कह रही थी... और पुस्तकालय से जो पुस्तकें उसने ली हैं उसे देखकर लगता है किसी काम में आने वाली नहीं ...

Tuesday, July 14, 2020

तेनाली रामा में कौए



दोपहर बाद के चार बजे हैं. जून पिताजी से बात कर रहे हैं. उनके यहाँ भी ग्यारह अप्रैल को चुनाव होने हैं. कल रात को गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई. पिछले एक-दो दिन से बाएं कान में भारीपन लग रहा है, व सांय-सांय की आवाज आ रही है. नाक-कान के विशेषज्ञ को फोन किया पर वह शहर से बाहर गए हैं. सम्भव है उनके लौटने तक कान ठीक-ठाक ही हो जाये. पिछले दिनों होली पर गहमा-गहमी रही. उस दिन तीन परिवार आये , सभी को गुझिया खिलाईं. असम में यह उनकी अंतिम होली थी. आज दोपहर को कम्पनी  के भूतपूर्व उच्च अधिकारी के परिवार को लंच पर बुलाया था, उन्हें एक स्टोल दिया जो बड़ी भांजी विदेश से लायी थी, उन्हें अच्छा लगा. वे भी उनके नए घर के लिये कांच का एक कछुआ लाये हैं. कहते हैं, शुभ होता है. जीवन इसी आदान-प्रदान का नाम है. नैनी ने उनसे कहा है, उसके पति को गेस्टहाउस में नौकरी दिला दें, पर अब जब वह यहाँ से जा रहे हैं, शायद ही कुछ कर पाएं. कल सुबह स्कूल गयी थी. नई अध्यक्षा ने स्कुल के अकाउंट में काफी रूचि दिखाई. वह स्वयं एक कम्पनी में सीएसआर प्रोजेक्ट देखती हैं. पिछले दिनों कई अनोखे स्वप्न देखे, जिन्हें लिखा नहीं सो अब याद नहीं हैं , पर उनसे पिछले जन्मों के कई राज पता चले जिनका असर वर्तमान तक चला आया है. वे  जिन विकारों का अनुभव अपने भीतर करते हैं उनकी गाठें उन्होंने पिछले जन्मों में बाँधी होती हैं या कहना चाहिए कि उनके जीवन में जो भी घटता है वह पूर्व का फल होता है, उसके प्रति उनकी प्रतिक्रिया वर्तमान में किया उनका कर्म होता है. उन्हें अपने भीतर की गाँठों को पहले देखना है, फिर उन्हें खोलना है. बंधी हुई चेतना से विकार ही जन्म लेते हैं. मुक्त चेतना के साथ जीना सीखना है, जिसमें पूर्व के संस्कार के कारण कोई यन्त्रवत प्रतिक्रिया नहीं होती, बल्कि सजग होकर नए कर्म बढ़ने से रोकने भी हैं. 

तेनालीराम में आज कौओं का प्रकोप दिखाया गया, कम्प्यूटर ग्राफी का कमाल था. आज योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, उसे आज क्रोध आया. जो भीतर भरा है वह बाहर तो आएगा ही, पर इसके लिए प्रतिक्रमण करना होगा. आगे उसने कहा, पिछले दो वर्षों से जब से वह योग साधना करने आ रही है, उसने अपने को अतीत के बंधनों से मुक्त किया है. इंसान कितनी जंजीरों में जकड़ा रहता है. गुरूजी के वाक्य उसे शीतलता से भर देते हैं. कल उसकी बहने आ रही हैं, उन्हें भी साथ लेकर आएगी एक दिन. आज दोपहर कई दिन बाद ‘डायरी के पन्नों पर’ ब्लॉग में  लिखा, मन में उत्साह जगा और सद प्रेरणा मिली एक पुरानी डायरी से, और उस समय भी परमात्मा के प्रति श्रद्धा थी, पर अनुभव नहीं था. एक लंबी यात्रा रही है उसके जीवन में अध्यात्म की, जो अभी तक चल रही है. सुबह देर से उठे वे आज, कल शाम एक विदाई समारोह में गए थे, सोने में देर हुई. कल दोपहर तिनसुकिया में डॉ को कान दिखाया, पहली बार सिरिंज से साफ़ भी करवाया. अभी भी टिंगलिंग की आवाज आ रही है. उसकी देखा-देखी अचानक जून भी अपने कान में कुछ आवाज सुनने का प्रयत्न करने लगे हैं. 

आज भारत सेटेलाइट को मार गिराने वाली क्षमता को हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है, प्रधानमंत्री ने इस बात को देश के सम्मुख रखा तो विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. चुनाव आने वाले  हैं, मात्र तरह दिन रह गए हैं, सो सभी पार्टियां  वोटरों को रिझाना चाहती हैं. बीजेपी ही चुनाव जीतेगी इसमें दो राय नहीं हैं. प्रधानमंत्री का चुनावी दौरा आरंभ हो गया है. सुबह आजकल सुहानी होती है अब स्वेटर की आवश्यकता नहीं है. 

और अब उन पुराने दिनों की बात.. दादाजी के यहाँ रहते दो दिन हो गए, परसों उसे घर वापस जाना है. घर जाना भी कितना सुखद अवसर है, उसका कमरा, मेज.. उसका बेड, किताबें, माँ-पिताजी, बहन, भाई, भाभी, दीदी, भांजे, भांजी.. सबसे मिलना. कमलकुंड, मधुवन या फिर वह मैदान, उसका प्रिय वृक्ष.. सब ही तो उसकी कमी महसूस करते होंगे, सूरज निकलता होगा वहाँ पर उसे उसकी तरह देखने वाला कौन होगा ! उसके पत्थर मेज पर रखे होंगे. फिर परीक्षा की तैयारी. यहाँ रहकर कुछ लाभ हुआ है तो यही कि दादी-दादा जी का आशीर्वाद मिला. लग रहा है कितने दिन बाद जा रही है ! 

क्या लिखे ? उसके बचपन की सखी के पिताजी नहीं रहे. कल शाम वह उससे मिली थी, वह खुश थी, क्या मालूम था कि तीसरा दिल का दौरा कल रात को ही पड़ना है. वह उससे मिलने नहीं गयी, क्या कहेगी मिकलर, समझ नहीं आता... उसका मन आज ही जाने को हो रहा है, अच्छा नहीं लग रहा कुछ भी. आज शिवरात्रि है, पिछली शिवरात्रि कैसे मनायी उसे याद नहीं, [अर उससे पिछली अच्छी तरह याद है, तब वे दूसरे शहर में थे. तब भी उसने व्रत रखा था. कल जाने से पहले कहना बनकर जाएगी, दिन का भी और शाम का भी. 

उस सखी को देखा आज, उसके घर गयी थी, बेहद उदास, सूजी आँखें, रूखे बाल, उसकी दीदी उससे भी ज्यादा उदास थीं. 

Thursday, July 9, 2020

भोर का आकाश


कल शाम बच्चों के स्कूल में अध्यापिकाओं का साक्षात्कार था। उसे भी बुलाया गया था, इंटरव्यू लेने का पहला और एक बिलकुल नया अनुभव था और स्वयं को परखने का एक स्थल भी. मेज के इस तरफ बैठी है, यह भाव आया तो भीतर के सूक्ष्म अहंकार का बोध हुआ. प्रश्न पूछते समय खुद को ही लगा, वाणी में अभी भी मधुरता नहीं आयी है. एक क्षण के लिए भीतर हलचल भी हुई, जो बाद में व्यर्थ ही प्रतीत हुई. परमात्मा उन्हें उनसे बेहतर जानते हैं. वह उन-उन परिस्थितियों में भेजते हैं जहाँ से वे चाहें तो सीखकर आगे बढ़ सकते हैं. यह सृष्टि उसी परमात्मा का विस्तार है, वह सर्वज्ञ है और यदि कोई आत्मा उसकी ओर कदम बढ़ाती है तो वह उसे स्वीकार करता है. जैसे धूल से सन हुआ शिशु माँ की तरफ हाथ बढ़ाता है तो माँ उसे झट गोद में उठा लेती है, वह अपने वस्त्रों की परवाह नहीं करती. शिशु को साफ-सुथरा करती है, वैसे ही परमात्मा उन्हें निखारता है. वह प्रेरणाएं भेजता है  जिन्हें वे सुनी-अनसुनी कर देते हैं, पर वह असीम धैर्यशील है. वह बार-बार अपनी ओर खींचता है, क्योंकि उनकी अभीप्सा उसने भांप ली है. संस्कारों के कारण या पूर्व कर्मफल के कारण वे उस पथ से विमुख हो जाते हैं ,पर उसका हाथ उन्हें कभी नहीं छोड़ता. कल एक स्वप्न में स्वयं को कहते सुना कि  जून के जीवन में सच्चाई बढ़ रही है. वह भोजन के प्रति भी पहले के जैसे आग्रही नहीं रहे. परमात्मा उनके हृदय पर भी अपना अधिकार कर रहा है. आज दोपहर मृणाल ज्योति जाना है, सेवाभाव से बच्चों को पढ़ाना है. संध्या को श्लोक उच्चारण का अभ्यास करना है. शेष समय में लिखना-पढ़ना. व्यर्थ अपने आप छूट जाता है जब वे सार्थक  को पकड़ लेते हैं. 

घर के बायीं तरफ वाले मैदान में बीहू नृत्य की शूटिंग चल रही है. कभी संगीत की आवाज आती है कभी ‘कट’ की और सब थम जाता है. छोटी लड़कियाँ भी हैं और बड़ी भी. अप्रैल में तो यहाँ चारों ओर ढोल की थापें सुनाई देती हैं, इस बार मार्च से ही बीहू आरंभ हो गया है. जून दो दिन के लिए आज टूर पर गए हैं. दोपहर को क्लब गयी थी,  शाम के आयोजन की तैयारी चल रही थी, एक अन्य सदस्या भी आयी थी, जो पहले बहुत बीमार रहा करती थी, एक वर्ष पूर्व योग करना आरंभ किया और अब पूर्ण स्वस्थ है. उसने ज्ञान के पथ पर कदम रख दिया है और तेजी से आगे बढ़ रही है.  नैनी भी ढेर सारे फूल लेकर वहाँ आयी और चार गुलदान सजा दिए, वह इस कार्य में दक्ष हो गयी है. घर पर भी शाम के लिए उसने कुछ व्यंजन बनाये हैं.अगले हफ्ते महिला क्लब की तरफ से कम्पनी की एक महिला उच्च अधिकारी का विदाई समारोह है. वह उनसे वर्षों पहले एक बार विदेश में मिली थी. उसके बाद दो-तीन बार क्लब की मीटिंग में. नई प्रेसीडेंट ने कहा, उनके लिए कुछ लिखना है. 

और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - रात्रि के ग्यारह बजने वाले हैं. सुचना और प्रसारण मंत्रालय के ‘नाटक व गीत विभाग’ के ‘दुर्गे कला केंद्र’ के कलाकारों का नृत्य-गीत देखकर बहुत अच्छा लगा. सचमुच नृत्य और संगीत में जादू है, लोक नृत्य का तो कहना ही क्या, उसके पाँव थिरकने लगते हैं धुन सुनते ही, अफ़सोस कि उसने कक्षा सात के बाद कभी नृत्य नहीं किया. कल उसे दादाजी के घर जाना है. किताबें और एक ड्रेस लेकर जाएगी. फिर उसके कमरे में छोटी बहन रहेगी. परीक्षाएं इतनी नजदीक हैं और उसकी पढ़ाई अभी तक गति नहीं पकड़ पायी है. खैर ! अब वह क्या कर सकती है, ऐन वक्त पर उसका पागल मन धोखा दे जाता है. उसे तो केवल नीला आसमान, फूल, नदी, छोटे बच्चों की मुस्कान... देखकर ही ख़ुशी मिलती है. 

बिलकुल वही अनुभूति, बल्कि उससे भी अच्छी ! इस समय वह दादी जी के घर पर है. आस पड़ोस की छोटी-छोटी बच्चियाँ मिलने आयीं, ये सब बहुत अच्छी हैं, भोली.. मगर दुनिया इन्हें ऐसा रहने कहाँ देगी. वह सबसे छोटी रेणु उसने कैसा चुटकुला सुनाया.. एक ने कहा, आप क्यों आजकल हर वक्त सपने बुनती हैं ! ...और दादाजी ने भी एक चुटुकुला सुनाया, कहा, वे वैष्णव हैं सो एक अंडा खाएंगे और फूफा जी यदि आएं तो उन्हें दो खिला देना. कल सम्भवतः बुआ जी आएं. शाम को उसकी घड़ी खो गयी, सारा कमरा ढूंढ लिया तो मिली बड़े सन्दूक के पीछे. चचेरे भाई ने कहा, एक दिन पता चल जाये कि सुबह पांच बजे आकाश में तारों की स्थिति या प्रकाश कितना है तो रोज समय पर उठने में आसानी होगी. उसने सोचा, वह भी कल जल्दी उठेगी और आकाश दर्शन करेगी.