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Thursday, August 29, 2019

डेंटल क्लीनिक



सुबह के साढ़े दस बजे हैं. नन्हा व सोनू दफ्तर चले गये हैं. रात को नींद खुल गयी थी, असमिया सखी की बेटी का एक चेक लाना भूल गयी, कहाँ रखा होगा, इसके लिए मन में पुनः विचार आ गया. मन को इस गोल्डन रूल से समझाया, जो होता है अच्छा होता है. जो दूध गिर गया है उसके लिए क्या पछताना. मन ने खुद को उस दिन के लिए भी समझाया जब कोर्स के दौरान एक लड़की ने चेहरा धोने के लिए ठंडा पानी माँगा था और उसने देने में एक पल के लिए आनाकानी की थी, क्योंकि गर्मी बहुत थी और वह उसी समय खरीदकर लायी थी. स्वयं में ही व्यस्त रहने का जो सत्य कोर्स के दौरान दिखाया था वह भी याद आया. भोजन के प्रति आसक्ति स्पष्ट दिखी जब नाश्ते के बाद गुड डे बिस्किट अकेले खाया था. समूह में रहने का जो मौका कोर्स ने दिया उसका पूर्ण उपयोग नहीं किया, सबके साथ रहकर भी वह अकेले ही रह रही थी. गुरूजी कहते हैं, प्रवृत्ति और निवृत्ति साथ-साथ चलते हैं, जैसे श्वास का आना और जाना. जब वे ध्यान में हों तब सब कुछ छोड़कर अकेले हो जाना है पर जब व्यवहार में हैं तब स्वयं को भुलाकर दूसरे को ही प्राथमिकता देनी है. आज दोपहर जून की आँख का आपरेशन होना है.

रात्रि के आठ बजे हैं. आज का दिन व्यस्त रहा. सुबह छत पर टहलने गयी, सूर्योदय की तस्वीरें उतारीं. बाद में जून के साथ नीचे उतरे ड्राइव वे पर उसने चक्कर लगाये और जून बेंच पर बैठे रहे. उनकी आँख का आपरेशन कल ठीक से हो गया था. आज बच्चे घर पर हैं. नाश्ते में मेथी के परांठे बनाये कुक ने. दस बजे चेकअप के लिए नेत्रालय गये. साढ़े बारह बजे डेंटिस्ट के पास जाना था. काफी साफ-सुथरा व आधुनिक उपकरणों से युक्त क्लीनिक बहुत प्रभावित करने वाला था. रिसेप्शनिस्ट से लेकर डाक्टर, सहायक तक सभी का व्यवहार मधुर था. उसके दातों का फुल एक्सरे लिया. डाक्टर ने कहा, एक दांत निकालना पड़ेगा, एक ब्रिज लगाना है, एक दांत इम्प्लांट करना है. वापस आकर चार बजे दुबारा गये. डेंटिस्ट ने दांत निकाला और क्राउन के लिए दांत को घिसा. वहाँ से एक शोरुम में गये जहाँ किचन तथा वार्डरोब के मॉडल देखे. दांत में दर्द नहीं है. दो दिन बाद फिर जाना है. सोनू ने खिचड़ी बनाई है रात के खाने में. टीवी पर पद्मावत फिल्म आ रही है, जो उनकी देखी हुई है.

आज सुबह नन्हा उन्हें 'तिंदी ताजा' ले गया जो बंगलूरू का प्रसिद्ध रेस्तरां है, पर वहाँ लाइन लगी थी, सो एमटीआर पहुँच गये. सुबह अलार्म सुनकर नींद खुली पर न तो उठी न ही सजगता रही, सो महीनों बाद स्वप्न आरम्भ हो गया. मन स्वयं ही कल्पनाओं के जाल बुनता है और स्वयं ही उसमें फंस जाता है. सोनू घर को ठीक-ठाक करने में लगी है. उसने कल बेहद स्वादिष्ट केक बनाया था ब्लू बेरी डालकर जो जून लाये थे. उसने आज तेल लगाया और नूना को भी इसके लिए याद दिलाया. वह हर चीज का ध्यान रखती है और ज्यादा वादविवाद में नहीं पडती. कम बोलती है और धीरे भी.

आज यहाँ छठा दिन है, अभी छह दिन और शेष हैं. सुबह नींद जल्दी खुल गयी, नीचे टहलने गये तो अँधेरा था. चौकीदार सिर पर एक सफेद वस्त्र ओढे बैठा हुआ सो रहा था. जून के आपरेशन को हुए आज चौथा दिन है. अज वह अपने पुराने जोश में हैं. सिर पर पानी भी डाल लिया और किचन में कुक के साथ मिलकर पनिअप्प्म बनवाया. आज शाम को उनका भी एक डाक्टर के साथ अपॉइंटमेंट है, नन्हे की कम्पनी के एप द्वारा किया है. उसकी कम्पनी कितने लोगों का कितना भला कर रही है. कल शाम वे उनके नये घर गये थे, घर अब साफ-सुथरा हो गया है, अगले कुछ महीनों में वहाँ इंटीरियर का काम आरम्भ हो जायेगा. असम में सब कुछ पूर्ववत होगा, उसने सोचा नैनी को फोन करके घर की खबर लेगी. बस पौने दो वर्ष उन्हें और वहाँ रहना है, फिर बंगलूरू ही उनका निवास बन जायेगा. यह शहर सभी का स्वागत खुली बाहों से करता है.

Monday, February 8, 2016

कृष्ण चरित्र - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय की पुस्तक


आज द्वादशी है, रंग पाशी का उत्सव, होली के आने में अब तीन-चार दिन रह गये हैं. आज दोपहर को कोई पढ़ने नहीं आया और उसे कहीं जाना भी नहीं है. कल डेंटिस्ट के पास पुनः जाना है. उसने सोचा क्यों न कुछ पंक्तियाँ उसी के लिए लिखे, उस दिन उसका व्यस्तम दिन था. मरीजों की कतार बढ़ती जा रही थी, हरेक के दातों का इतिहास उसकी डायरी में दर्ज था. कैसा लगता होगा लोगों के मुखों में झांकना, श्वेत मोती से, पान मसाला खाने से हुए काले, पीले, गंदे, टूटे-फूटे दातों को देखना और फिर दुरस्त करना, दातों का डाक्टर बनने का निर्णय कोई कैसे और क्यों लेता होगा या ईश्वर स्वयं ही उनके भीतर बैठ ऐसी बुद्धि देते होंगे, ईश्वर की दुनिया में सभी तरह के कार्यकर्ता मिलते हैं. वह स्वयं ही अनेक होकर बैठ गया है.

‘कृष्ण चरित्र’ अभी-अभी खत्म की है, बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित तथा ओमप्रकाश द्वारा अनुवादित इस पुस्तक में कृष्ण को ईश्वर को अवतार मानते हुए उनके मानवीय रूप को प्रकाशित किया गया है. ईश्वर जब मानव रूप लेकर अवतरित होते हैं तो वे मानवीय गुणों की सीमा का अतिक्रमण नहीं कर सकते, यदि उन्हें दैवीय शक्ति का ही उपयोग करना हो तो वे बिना मानवीय रूप लिए भी कर सकते हैं, हाँ, मानव होते हुए उनके गुण चरम सीमा तक पहुंच सकते हैं. वे सोलह कला सम्पूर्ण थे, जीवन के सभी क्षेत्रों में अग्रणी तथा कुशल, चाहे वह कला हो, धर्म हो अथवा राजनीति, ऐसे कृष्ण को जो आदर्श मानव थे प्रणाम करके कौन अपना उद्धार करना नहीं चाहेगा. आज सुबह ‘मृणाल ज्योति’ गयी, योग के बाद हास्य आसन भी कराया, लौटकर डाक्टर के पास जाना था. कल जो कविता लिखी थी, दंत चिकित्सक उसे दे दी. असमिया होने के बावजूद वह भी हिंदी में थोड़ा-बहुत लिख लेते हैं. आज मूसलाधार वर्षा हुई, गर्जना भी भी बड़े जोरों से की बादलों ने. इस समय रुकी हुई है. आज उसका विद्यार्थी मेघनाथ पढ़ने नहीं आया, जो मेघ का नाथ है वह मेघों से भयभीत होकर घर में छुपा बैठा है.

उत्सव मन में कैसा उल्लास जगा देता है. आज गुरूजी की बातें सुनीं और उसके बाद प्रेम का कैसा ज्वार चढ़ा भीतर, बड़े, मंझले, छोटे तीनों भाई-भाभी, दीदी-जीजाजी, पिताजी, चचेरी बहन सभी से बात की, फुफेरी बहन को कल फोन किया था. छोटी बहन का दुबई से फोन आया वे लोग सागर किनारे होली खेलेंगे, फिर स्नान तथा वहीं भोजन का भी प्रबंध होगा. ‘लेडीज असोसिएशन’ की तरफ से यह कार्यक्रम होली के उपलक्ष में आयोजित किया गया है. छोटा चचेरा भाई भी वहाँ पहुंच गया है, उसे टाइल्स फैक्ट्री में काम मिला है. आज भी मौसम भीगा है, प्रकृति भी होली खेल रही है.


प्रेम का जो ज्वार चढ़ा था उस दिन, उसी की परिणति है, आज उसने लाइन की सभी महिलाओं को आमंत्रित किया है, होली मिलन की दावत के लिए.. कल दोपहर डेढ़ बजे. गुझिया और गुलाब जामुन तो हैं ही, छोले और टिक्की और बनाएगी. आज सुबह सुना साधक को मनसा निराकारी रहना है, वाचा निरहंकारी रहना है तथा कर्मणा निर्विकारी अवस्था में रहना है. देह भान में आते ही मन कमियों को देखने लगता है, वाणी में अहंकार भी तभी आता है और ऐसे में कर्म भी पावन नहीं होते. मन आत्मा के जागृत होने पर बेबस हो जाता है, वह इधर-उधर जाना तो चाहता है पर एक क्षण की सजगता उसे वापस खींच लाती है, उसकी डोर आत्मा के हाथ में आ जाती है. अभी कुछ देर पूर्व वर्षा होने लगी थी, अब पुनः तेज धूप निकल आई है, ऐसे ही मन है एक पल में भूत में चला जाता है अगले ही पल भविष्य में छलांग देता है, आत्मा सदा वर्तमान में रहती है, वह पवित्र, शांतिमय, आनन्द से भरी, शक्तिशाली, ज्ञानयुक्त, सुख स्वरूप तथा प्रेमिल है. ऐसी आत्मा का ज्ञान उसे सद्गुरू की कृपा से हुआ है !   

Wednesday, July 23, 2014

डेंटिस्ट से मुलाकात


उसके दांत में कैविटी है, कल एक्सरे कराया था, डाक्टर आज आगे का इलाज बतायेंग. कल से ही दर्द भी है, यह सब उसकी ही असावधानी के कारण है. खैर इलाज करने पर ठीक हो जायेगा. आज भी वर्षा हो रही है. सुबह के आवश्यक कार्य हो चुके हैं, अब नन्हे को मदद करनी है व जून के आने से दस मिनट पहले फुल्के सेंकने हैं. उन्हें भी सर्दी-जुकाम ने परेशान किया है. कल घर से आने के बाद पहली बार लाइब्रेरी गयी, दो किताबें लीं जो दस दिनों में वापस करनी होंगी वरना फाइन देना पड़ेगा. कल उस सखी में यहाँ भी गयी, उसका छोटा-बेटा बिलकुल माँ पर गया है, छोटे-छोटे हाथ-पैर और लम्बी-लम्बी उँगलियाँ बहुत अच्छी लग रही थीं. उसकी सास से भी पहली बार मिली. बड़ा बेटा बहुत एक्टिव हो गया है. कल अंततः वह संगीत के लिए नहीं जा सकी, अब अगले सोमवार को जा पायेगी या उससे भी अगले सोमवार को. आज सबह व्रत की महत्ता पर सुना, तो उसे लगा, पन्द्रह दिन में एक बार उन्हें व्रत करना चाहिए, या फिर शुरुआत वे महीने में एक दिन पूर्णिमा के व्रत से करते हैं. उसे अपने साथ जून को भी व्रत करवाने का ख्याल तो ऐसे आ रहा है जैसे वह भी फौरन मान जायेंगे, क्योंकि उन्होंने सुख में, दुःख में, स्वास्थ्य में, अस्वास्थ्य में, मृत्यु में, जीवन में यानि जीवन के हर क्षण में साथ निभाने की कसम जो खायी है.

आज बहुत दिनों के बाद उसने ‘योगासन’ किये, फिर देह का नाप लिया और अपने वस्त्रों को अपने अनुसार ठीक करने के बारे में निर्णय लिया. गर्मी के मौसम में कुरते की बाहें यदि कोहनी से ऊपर हों तो सुविधा रहती है और सलवार का पायंचा अगर पैरों में न फंसे तो चला कितना आसान. आज सुबह जून थोड़ा देर से उठे, पर समय पर ही दफ्तर जा पाए. उसकी नासिका में हल्की सी सुरसुरी लग रही है, कहीं यह आने वाले दिनों में होने वाले उपद्रव की शुरुआत के संकेत तो नहीं. कल एक मित्र परिवार को लंच पर बुलाया था, वे कल ही घर से आये थे, सो सारी सुबह उसी में व्यस्त रही, दोपहर नन्हे को पढ़ाने में, पढ़ता तो वह खुद ही है बस उसे उस पर नजर रखनी पडती है, शाम जून के साथ. कल स्पीकिंग ट्री में sub-conscious mind पर कई बातें पढ़ीं. किसी के सोचने का नजरिया ही उसके आने वाले कल को निर्धारित करता है. यदि उनके विचार अच्छे होंगे तो कल भी अच्छा होगा. अभी एक सखी का फोन आया उसने बताया केन्द्रीय विद्यालय में कल ‘वाक इन इंटरव्यू’ है, उसका पिछला अनुभव देखते हुए इस विषय में बात करना या सोचना भी भूल होगी.   

कल जून ने डेंटिस्ट से बात की, वह उसके दांत का rct करने को राजी हो गये. वे दोपहर साढ़े बारह बजे अस्पताल गये और पौने एक बजे डाक्टर आये, उसे लोकल anesthesia के तीन इंजेक्शन दिए. थोड़ी ही देर में दायाँ गाल सुन्न हो गया लगा जैसे गाल फूल गया हो. जून उसे छोड़कर चले गये. पन्द्रह-बीस मिनट बाद ही इलाज शुरू हुआ जो आधा घंटा चला होगा. डाक्टर बार-बार उसे मुँह खोलने के लिए कहते रहे, जितना हो सकता था उतना उसने खोला पर पीछे का दांत होने के कारण शायद उन्हें देखने में परेशानी हो रही थी. न उसे वहाँ दर्द का अहसास हुआ न घर आकर ही, लेकिन मुँह में उस दवा का स्वाद लगातार बना हुआ है जो कैविटी में भरकर उस पर रुई लगा दी है. जून कहते हैं उन्हें दवा के कारण कोई परेशानी नहीं हुई बल्कि दर्द बहुत हुआ था. उन्हें बहुत अजीब लग रहा था कि वह दवा के कारण कुछ कहा खा नहीं रही है पर बाद में वह उसकी हालत समझ गये. आज सुबह ससुराल से फोन आया उन्होंने माँ के स्वास्थ्य के बारे में नूना के पिता को फोन किया था. कल एक परिचित का फोन आया उनकी कक्षा नौ में पढने वाली बेटी हिंदी व्याकरण पढ़ना चाहती है, उसने मंगलवार से आने के लिये कह दिया है. व्यस्त रहकर शायद वह rct का ज्यादा असर नहीं ले, जून ने आज कहा यह तो छोटी सी समस्या है, कइयों को तो इससे कहीं ज्यादा तकलीफ होती है. Living 7 Habits में ही कल पढ़ा कैंसर के बावजूद कुछ लोग जिंदगी से मुंह नहीं मोड़ते सो अगर उसके मुंह में दवा का टेस्ट है तो यह कोई चिंता की बात नहीं !


Wednesday, April 9, 2014

नामघर का पुजारी


कल शाम जब जून ऑफिस से आए तो अभी तीन ही बजे थे, नन्हा भी उसी वक्त आ गया, उन्होंने रोज की तरह चार बजे तक नाश्ता खत्म किया. जून को डेंटिस्ट के पास जाना था और नन्हे को कम्प्यूटर क्लास, उसे किचन में काम था. सभी कुछ ठीक था फिर शाम पौने छह बजे वह क्लब गयी, लौटी तो उसकी आँखों में दर्द था, नन्हा आया तो उसका चेहरा उतरा हुआ था. कार न होने के कारण उसे साइकिल से जाना पड़ा था, थकान से या अन्य किसी कारण से वह ठीक महसूस नहीं कर रहा था. सुनकर नूना का दर्द और बढ़ गया और बिना डिनर खाए वे तीनों ही जल्दी सो गये. सुबह वह तो ठीक थी पर नन्हे को हल्का बुखार था.

आज इतवार को ‘नामघर’ से कुछ लोग चंदा मांगने आये, उन्होंने लाल गमछा ओढ़ा हुआ था, हाथ में कुछ पारंपरिक वाद्य यंत्र भी थे, श्वेत वस्त्र धारण किये हुए थे. जून ने उनमें से एक का नमस्कार सुनते ही कहा, ‘हम चंदा नहीं देते’. पर वापस आकर उन्हें लगा चार-पांच व्यक्ति घर-घर जाकर इस तरह क्यों मांग रहे हैं, जबकि कोई उन्हें कुछ देने को तैयार नहीं है. वह पहले कभी इतना सोचते नहीं थे. आज सुबह उठकर उन्होंने सारे घर का जाला भी साफ किया वैक्यूम क्लीनर की सहायता से. सुबह दोनों घरों पर बात की, माँ से बात करके उसे लगा वह कुछ उदास हैं, ननद से बात करके महसूस किया, उसमें काफी आत्मविश्वास है.

सुबह नन्हा उठा तो डल था, शनिवार को स्कूल नहीं गया था, पर आज उसका टेस्ट है, कल जिसकी तैयारी भी की थी. उसे लगा वह थोड़ी तकलीफ सह सकता है. ईश्वर उसे शक्ति देगा और वह स्वस्थ होकर घर आएगा, लिखते हुए उसने सोचा, जून भी नन्हे के बारे में ही चिंतित होंगे, सुबह वह उसे स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं थे पर उसने कई तरह से उन्हें समझाया, फिर बाद में महसूस भी किया वह कोई बच्चे तो नहीं, पर क्या कई बार बड़ों को भी सलाह की जरूरत नहीं पड़ जाती.

कल वे नन्हे को होमोयोपथिक डाक्टर के पास ले गये. उसे AC चलाकर सोने के लिए मना किया है. कल ‘गणेश पूजा’ के कारण जून के दफ्तर में छुट्टी थी. एक पुराने मित्र को लंच पर बुलाया था, इतवार की शाम वे अचानक मिलने आ गये थे, जून जब उन्हें छोड़ने गये तो ‘हल्दीराम की सोनपापड़ी’ का एक डिब्बा उन्होंने दिया. जो फ्रिज में रखने के बाद कैसे चिपक सी गयी है. रात्रि को उसे पहले तो गर्मी के कारण नींद नहीं आई फिर परेशान करने वाले स्वप्न देखती रही, नन्हे के स्वास्थ्य को लेकर हुई चिंता के कारण आये सपने. मेडिकल गाइड में ‘ब्रोंकाइटिस’ के बारे में कल काफी कुछ पढ़ा था, वही सत्य होकर रात को भयानक लग रहा था. सुबह के सारे कार्य करते और दो लेख पढ़ने के बाद जिनमें से एक डेल कार्नेगी का था और दूसरा जे कृष्णामूर्ति का, मन कुछ संयत हुआ है. दोनों के विचार प्रेरणा देते हैं, जीवन को बहुत करीब से देखने की, सही मायनों में जीने की और मानसिक आवश्यकता को भी पूर्ण करते हैं अर्थात कुछ सोचने को विवश करते हैं. नन्हा कल से बेहतर है. आज दोपहर को उनके बाएं तरफ की पड़ोसिन आएगी, उससे सिन्धी कढ़ाई का टांका सीखने, जो उसे भी पुनः याद करना पड़ेगा. अभी तो उसे कपड़े धोने हैं, BPL वाशिंग मशीन के सौजन्य से. कल शाम बच्चों ने एक प्रश्नावली दी working mothers vs house wives, जो उसकी जगह नन्हा ही भर देगा.

कल समाचारों में सुना, मिलावटी सरसों का तेल खाने से कुछ लोगों की मृत्यु हो गयी और कितने ही अस्पताल में हैं. उसे आश्चर्य हुआ, अल्प लाभ के लिए कुछ व्यापारी कितना नीचे गिर जाते हैं. कल शाम जून के एक मित्र आये उनके कम्प्यूटर पर कुछ cd चलाकर देखने जो उनके यहाँ नहीं चल पा रहे हैं, उसे बुनते देखकर कहा, सर्दियों की तैयारी शुरू हो गयी. मोज़े जो उसने पिछले हफ्ते शुरू किये थे अभी तक नहीं बन पाए हैं, घर में बच्चा अस्वस्थ हो तो सारा ध्यान उधर ही रहता है फिर आजकल वे टीवी बहुत कम देखते हैं, पिछले साल टीवी देखते उसने बुनने का काफी काम किया था. जून ने उसके नाम से दो ड्राफ्ट भेजे हैं फिक्स्ड डिपाजिट के लिए, वह उसे पिछले पन्द्रह वर्षों में की गयी हर छोटी-बड़ी बचत के बारे में बताना भी चाहते हैं.