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Friday, November 29, 2019

बुद्धं शरणं गच्छामि




कल का पन्ना कोरा ही रह गया है, स्वास्थ्य ठीक न हो तो उत्पादक क्षमता कितनी घट जाती है. डायरी में आज भी कल की तरह नासिका में विचित्र सी गंध आ रही है . कल दिन भर मन में अनुत्तरित प्रश्न चलते रहे, आज सुबह तक सन्देह का सा वातावरण था. कोई स्वास्थ्य संबन्धी समस्या है या कोई रहस्य है सृष्टि का. आज दोपहर कोर्स का अंतिम दिन था, सेंटर गयी, वहाँ का सकारात्मक वातावरण तथा टीचर के प्रेरणादायक वचन सुनकर मन पुनः आह्लाद से भर गया है. जो भी  है परमात्मा का प्रसाद है, आज से पूर्व किसी भी स्वास्थ्य संबंधित समस्या ने उसे परेशान नहीं किया, पर गंध आने पर भविष्य में कोई समस्या हो सकती है, इसी भय का असर था कि मन घबरा गया था. कल किसने देखा है, जो ‘है’ उसी पर ध्यान देना है. जो नहीं है उसे महत्व नहीं देना है. गुरु का ज्ञान भी उसी वक्त काम आता है जब वे शरणागत हो जाते हैं उनके हाथ में कुछ नहीं है, जो भी जब भी होगा उसका सामना वे करेंगे, यह भरोसा गुरु उन्हें देता है. गुरूजी कहते हैं, परमात्मा, आत्मा और गुरु में कोई भेद नहीं है. उसका जीवन किसी के काम आये तभी सार्थक होगा. जो काम वह भली प्रकार कर सकती है, उसी के द्वारा संसार के किसी काम आ सकती है. उसने सोचा कल स्कूल जाना है, एक नए सन्देश के साथ, फिर कैलेंडर पर नजर गयी, कल बुद्ध पूर्णिमा है. वह लिख रही थी कि ड्राइवर का फोन आया, उसे दस किलो अख़बार की रद्दी चाहिए, शाम को ले जायेगा. छोटे भाई ने आज छोटी बुआ से वीडियो कॉल पर बात करायी, उनका सुंदर घर भी देखा. कुछ वर्ष अस्वस्थ रहने के बाद अब वह पुनः ठीक हो रही हैं. 

नौ बजने वाले हैं आज बुद्ध पूर्णिमा है. भगवान बुद्ध  के जीवन पर आधारित एक धारावाहिक  भी है यू-ट्यूब पर, दो एपिसोड देखे. सभी भाग देखेगी एक एक कर ! ब्लॉग पर उनके बारे में दो पोस्ट्स लिखीं, उनका जीवन आज भी एक मिसाल है, अनोखी थी उनकी तपस्या और अद्धभुत था उनका ज्ञान.  आनन्द ने उनके उनकर वचनों को संग्रहित किया. काश्यप उनके प्रिय शिष्य थे. रात वे समय पर सोये सो सुबह भी सहजता से उठे. माली से कुछ काम करवाना था, बुलवाया पर उसके सर में पीड़ा थी, शायद ज्यादा नशा करने के कारण. योग कक्षा में आज बच्चों को आनंद पूर्वक बड़ा करने के कुछ उपाय बताये, जो उस किताब में पढ़े थे. नैनी को भी बताना है, वह अपने बेटे को बहुत डांटती है. विचित्र गन्ध विदा हो गयी, इस समय नासिका से भीनी-भीनी मधुर गन्ध आ रही है. परमात्मा की सृष्टि में सब कुछ कितना रहस्यमय है. आज दोपहर डॉक्टर के पास भी गयी थी, उसने एक फ्री एयर स्प्रे दिया है, दिन में एक ही बार डालना है. एक्स रे  भी किया. आज क्लब में ‘अक्टूबर’ फिल्म थी. जून गए थे. 

परसों वे शिवसागर गए थे, कल तीन कविताएं लिखीं, एक परसों के पन्ने पर है, आशा और विश्वास से भरे शब्द.. यदि पीड़ा न हो जीवन में तो सुख का सम्मान भला कौन करेगा. इन कविताओं को एक-एक कर ब्लॉग पर प्रकाशित करेगी, हो सकता है उसके शब्द किसी आकुल उर को शांति की एक छांव दे जाएँ. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं अभी-अभी छोटे भाई का फोन आया. आज सुबह छह बजे उसे कोई उठाने आया था, किन्हीं हाथों ने उसे स्पर्श किया और थपकी देकर कहा भोई, उठो, उठो ! उसने आवाज भी स्पष्ट सुनी और वह सुबह से ही आश्चर्य विमुग्ध है. परमात्मा उनके आस-पास है, वह कभी उनसे दूर नहीं होता, वे ही अपनी व्यर्थ की उलझनों में उसे भुला बैठते हैं. टीवी पर तेनालीराम की चतुराई की कहानी आ रही है. 

Wednesday, July 23, 2014

डेंटिस्ट से मुलाकात


उसके दांत में कैविटी है, कल एक्सरे कराया था, डाक्टर आज आगे का इलाज बतायेंग. कल से ही दर्द भी है, यह सब उसकी ही असावधानी के कारण है. खैर इलाज करने पर ठीक हो जायेगा. आज भी वर्षा हो रही है. सुबह के आवश्यक कार्य हो चुके हैं, अब नन्हे को मदद करनी है व जून के आने से दस मिनट पहले फुल्के सेंकने हैं. उन्हें भी सर्दी-जुकाम ने परेशान किया है. कल घर से आने के बाद पहली बार लाइब्रेरी गयी, दो किताबें लीं जो दस दिनों में वापस करनी होंगी वरना फाइन देना पड़ेगा. कल उस सखी में यहाँ भी गयी, उसका छोटा-बेटा बिलकुल माँ पर गया है, छोटे-छोटे हाथ-पैर और लम्बी-लम्बी उँगलियाँ बहुत अच्छी लग रही थीं. उसकी सास से भी पहली बार मिली. बड़ा बेटा बहुत एक्टिव हो गया है. कल अंततः वह संगीत के लिए नहीं जा सकी, अब अगले सोमवार को जा पायेगी या उससे भी अगले सोमवार को. आज सबह व्रत की महत्ता पर सुना, तो उसे लगा, पन्द्रह दिन में एक बार उन्हें व्रत करना चाहिए, या फिर शुरुआत वे महीने में एक दिन पूर्णिमा के व्रत से करते हैं. उसे अपने साथ जून को भी व्रत करवाने का ख्याल तो ऐसे आ रहा है जैसे वह भी फौरन मान जायेंगे, क्योंकि उन्होंने सुख में, दुःख में, स्वास्थ्य में, अस्वास्थ्य में, मृत्यु में, जीवन में यानि जीवन के हर क्षण में साथ निभाने की कसम जो खायी है.

आज बहुत दिनों के बाद उसने ‘योगासन’ किये, फिर देह का नाप लिया और अपने वस्त्रों को अपने अनुसार ठीक करने के बारे में निर्णय लिया. गर्मी के मौसम में कुरते की बाहें यदि कोहनी से ऊपर हों तो सुविधा रहती है और सलवार का पायंचा अगर पैरों में न फंसे तो चला कितना आसान. आज सुबह जून थोड़ा देर से उठे, पर समय पर ही दफ्तर जा पाए. उसकी नासिका में हल्की सी सुरसुरी लग रही है, कहीं यह आने वाले दिनों में होने वाले उपद्रव की शुरुआत के संकेत तो नहीं. कल एक मित्र परिवार को लंच पर बुलाया था, वे कल ही घर से आये थे, सो सारी सुबह उसी में व्यस्त रही, दोपहर नन्हे को पढ़ाने में, पढ़ता तो वह खुद ही है बस उसे उस पर नजर रखनी पडती है, शाम जून के साथ. कल स्पीकिंग ट्री में sub-conscious mind पर कई बातें पढ़ीं. किसी के सोचने का नजरिया ही उसके आने वाले कल को निर्धारित करता है. यदि उनके विचार अच्छे होंगे तो कल भी अच्छा होगा. अभी एक सखी का फोन आया उसने बताया केन्द्रीय विद्यालय में कल ‘वाक इन इंटरव्यू’ है, उसका पिछला अनुभव देखते हुए इस विषय में बात करना या सोचना भी भूल होगी.   

कल जून ने डेंटिस्ट से बात की, वह उसके दांत का rct करने को राजी हो गये. वे दोपहर साढ़े बारह बजे अस्पताल गये और पौने एक बजे डाक्टर आये, उसे लोकल anesthesia के तीन इंजेक्शन दिए. थोड़ी ही देर में दायाँ गाल सुन्न हो गया लगा जैसे गाल फूल गया हो. जून उसे छोड़कर चले गये. पन्द्रह-बीस मिनट बाद ही इलाज शुरू हुआ जो आधा घंटा चला होगा. डाक्टर बार-बार उसे मुँह खोलने के लिए कहते रहे, जितना हो सकता था उतना उसने खोला पर पीछे का दांत होने के कारण शायद उन्हें देखने में परेशानी हो रही थी. न उसे वहाँ दर्द का अहसास हुआ न घर आकर ही, लेकिन मुँह में उस दवा का स्वाद लगातार बना हुआ है जो कैविटी में भरकर उस पर रुई लगा दी है. जून कहते हैं उन्हें दवा के कारण कोई परेशानी नहीं हुई बल्कि दर्द बहुत हुआ था. उन्हें बहुत अजीब लग रहा था कि वह दवा के कारण कुछ कहा खा नहीं रही है पर बाद में वह उसकी हालत समझ गये. आज सुबह ससुराल से फोन आया उन्होंने माँ के स्वास्थ्य के बारे में नूना के पिता को फोन किया था. कल एक परिचित का फोन आया उनकी कक्षा नौ में पढने वाली बेटी हिंदी व्याकरण पढ़ना चाहती है, उसने मंगलवार से आने के लिये कह दिया है. व्यस्त रहकर शायद वह rct का ज्यादा असर नहीं ले, जून ने आज कहा यह तो छोटी सी समस्या है, कइयों को तो इससे कहीं ज्यादा तकलीफ होती है. Living 7 Habits में ही कल पढ़ा कैंसर के बावजूद कुछ लोग जिंदगी से मुंह नहीं मोड़ते सो अगर उसके मुंह में दवा का टेस्ट है तो यह कोई चिंता की बात नहीं !