Tuesday, July 30, 2019

बरसाती मौसम



पिछले तीन दिनों से लगातार वर्षा हो रही है. दिन और रात दोनों समय. कल सुबह टहलने निकले थे पर बारिश तेज हो गयी, छाता भी काम नहीं आया, सो घर लौट आये. आज सुबह कुछ समय के लिए थमी थी, पर इस समय मूसलाधार पानी बरस रहा है. असम में सर्दियों के बाद सीधे ही बरसात का मौसम आ जाता है, बसंत और गर्मियों को आने ही नहीं देता. वे बीच-बीच में अपना काम करते हैं जब वर्षा कुछ समय के लिए विश्राम लेती है. शाम को वे घर में ड्राइव वे पर कुछ देर टहलते रहे, आकाश घने बादलों से ढका था. पेड़-पौधे फूल सभी पानी में तृप्त नजर आ रहे थे, पूरी तरह से तर ! सुबह जून ने नाश्ते में अप्पम बनाये, फिर फोन पर उसकी रेसिपी भी बताई, उन्हें दक्षिण भारतीय व्यंजन बहुत पसंद हैं.

आज वह टूटा हुआ दांत निकलवाया, तोड़कर निकालना पड़ा, दो इंजेक्शन दे दिए थे डेंटिस्ट ने सो दर्द नहीं हुआ. इस समय एक अनोखी ध्वनि सिर के ऊपरी भाग में उसे सुनाई दे रही है. दर्दनाशक दवा डाक्टर ने दे दी है, जो दर्द न होने के बावजूद वह ले चुकी है, यह सोचकर कि उस दवा का अवश्य ही कुछ और लाभ भी होता होगा. परमात्मा की कृपा अपार है.

आज सुबह उठे तो तेज वर्षा और आंधी से सामना हुआ. बिजली भी चली गयी, पर बारिश फिर रुक गयी. अँधेरे में तैयार होकर वे टहलने निकले, वापस आये तो बिजली आ गयी थी. कल शाम फ्रिज को डीफ्रॉस्टिंग के लिए बंद किया था, सारा सामान बाहर निकाल दिया था, सहेजा. तब तक जून के एक सहकर्मी व उनकी पत्नी आ गये, उनके साथ आधार कार्ड के लिए बैंक जाना था. बैंक मैनेजर छोटे भाई के परिचित हैं, उनकी ही मदद से आधार कार्ड बनने में कुछ आसानी हो रही है. लौटते-लौटते लंच का समय हो गया, जल्दी-जल्दी भोजन बनाया. दोपहर को मृणाल ज्योति गयी. वहाँ से लौटी तो एक सखी का फोन आया, उसकी बिटिया को पिछले चार-पांच दिन से बुखार है, उसे अस्पताल ले जाना है, एक घंटा लग गया. लौट कर आयी तो योगाभ्यास के लिए महिलाएं आ चुकी थीं. दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला.

तीन बजे हैं दोपहर के, आज मौसम अच्छा है, धूप खिली है. कल 'विश्व महिला दिवस' है, कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं, अभी कुछ सुधार करना शेष है. महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के प्रति सजग कराने के लिए मनाया जाता है यह दिवस, उनके प्रति सम्मान दिखाने के भी एक अवसर है यह दिन ! आज सुबह उठे तो आकाश में बादल थे, पर चाँद भी झलक रहा था. सुबह नाश्ते करने के बाद अस्पताल गयी. वापस आई तो दस बजे थे, बिटिया अब ठीक है. सखी को उसके परीक्षा न दे पाने की कोई फ़िक्र नहीं है, पता नहीं यह ठीक है या नहीं, पर इतना ज्यादा लाड़-प्यार बच्चे को कमजोर ही बनाता है. आज शाम क्लब में मीटिंग है. सेक्रेटरी आज ही बाहर से लौट रही है. नैनी ने बताया उसका बेटा स्कूल जाने लगा है, समय कितनी तेजी से बीत रहा है. पिताजी का फोन आया, उन्हें भी सबकी याद आती है, आज वह अकेले हैं, शाम को जून उनसे पुनः बात करेंगे.

Sunday, July 28, 2019

होली की गुजिया



कल दिन भर में केवल एक कविता की आठ पंक्तियाँ लिखीं, अब आगे की पंक्तियाँ कब बनेंगी, बनेंगी भी या नहीं, कौन जानता है. आज शनिवार है, साप्ताहिक सफाई का दिन और कल सुबह वे घूमने जाने वाले हैं, सो कल की जगह आज ही इतवार का विशेष स्नान भी. सुबह टहलने गये तो कोहरा भी था, जैकेट में भी ठंड महसूस हो रही थी. नन्हे से बात की, सोनू का गला ठीक नहीं है. नये घर के लिए उसने कुछ लोगों से बात की, कुछ घरों में किचन का काम भी देखा, काफ़ी जानकारी है उसे और समय भी दे रहा है, उनका घर बहुत सुंदर बनने वाला है. कल जून दोपहर को घर आ गये, मौसम दिन भर ठंडा ही रहा, एक योग साधिका के लिए कविता लिखी, जो वह बहुत दिनों से फरमाइश कर रही थी. एक सदस्या ने कहा, उन्होंने भी उसके लिए एक कविता लिखी है, जो अभी पूरी नहीं हुई है. आज दोपहर जून की एक सहकर्मी की बिटिया के पहले जन्मदिन की पार्टी में उन्हें जाना है.

आज दिन भर बदली बनी रही. मौसम कल और ठंडा होने वाला है, होली पर भी वर्षा का अनुमान है. आज सुबह एक आश्चर्यचकित कर देने वाली घटना हुई. स्कूल से लौटी तो नैनी ने स्वर्ण का कान का बुंदा दिया, जो रसोईघर में गिरा हुआ उसे मिला था, पर पीछे की ठीपी नहीं मिली, उसका हाथ कान पर गया, ठीपी वहीं थी. खराब रास्तों पर कार से दो बार की यात्रा में, बच्चों को व्यायाम और आसन कराने में किसी भी समय वह गिर सकती थी पर जाने किस शक्ति से वह गुरुत्वाकर्षण के सारे नियमों को तोडती हुई अपने स्थान पर बनी रही, जैसे किसी ने अदृश्य हाथ लगाकर थामे रखा हो. एक और बात हुई भोजन करते समय दायीं तरफ का ऊपरवाला एक दांत टूट गया, बाद में देखा तो वह दांत पर लगी कैप थी, जो कई वर्ष पहले लगवायी थी. कल डेंटिस्ट के पास जाना है. कल ही दोपहर को गुजिया भी बनानी है और शाम को एक सखी की विदाई पार्टी में जाना है. कल दो योग कक्षाएं भी लेनी हैं. ईश्वर ही इन सब कार्यों को करने की शक्ति प्रदान करेंगे. आज स्कूल में जो भी बच्चों को कराया और बताया, जैसे कोई और ही भीतर से प्रेषित कर रहा था. स्कूल जाते समय ष अध्यापिका ने अपने चाचा के देहांत का समाचार बताया, जिन्होंने नब्बे वर्ष के अपने बड़े भाई को अपना उत्तराधिकारी बना दिया है. उन्हें कुछ समय पूर्व ही अस्पताल से लाये थे, वह ठीक हो रहे थे. श्रीदेवी की मृत्यु के कारणों पर भी अटकलें बढ़ती जा रही हैं, उसकी मृत्यु पानी में डूबने से हुई. जीवन छोटा हो या बड़ा, अर्थपूर्ण होना चाहिए, उसने अपने जीवन में जो हासिल किया, कम ही लोग कर पाते हैं. समय और लहर किसी का इंतजार नहीं करते, यह वाक्य इस डायरी के पन्ने पर नीचे लिखा है, कितना सटीक है यह वाक्य. समय गुजरता ही जाता है अपनी गति से. कुछ देर पहले सोनू से बात की, उसका बुखार अभी उतरा नहीं है.

सुबह टहलने गये तो कोहरा घना था, धुंधला-धुंधला सा सब कुछ.. जैसे किसी स्वप्नलोक का दृश्य हो. वापस आकर साधना की. कल जो दांत निकल गया था, उसके कारण दायीं तरफ से कुछ भी खाने में दिक्कत हो रही है. आज पूरा दिन व्यस्तता में बीतने वाला है.
दो दिनों का अन्तराल ! आज सुबह से ही वर्षा हो रही है. अच्छा ही हुआ कि होली का उत्सव उन्होंने कल ही मना लिया. सुबह जून दफ्तर जा रहे थे कि मंझले भाई का फोन आया, उसने जून के एक पुराने सहकर्मी से बिटिया के पीजी में रहने की बात की है. दूधवाला, सफाई कर्मचारी, धोबी, नैनी, माली-मालिन, ड्राइवर सभी को गुजियाँ दे दी हैं, शाम को योग साधिकाओं को भी खिलानी हैं. कल शाम को एक परिवार को बुलाया था, होली का विशेष भोज अच्छा रहा. सभी के साथ संबंध अब सहज और प्रेमपूर्ण हो गये हैं, अब कोई पुराना संस्कार नहीं रहा, परमात्मा की कृपा से मन खाली है और कल दोपहर जून भी अपनी नाराजगी ज्यादा देर तक नहीं रख सके. उसकी सकारात्मकता ने  अवश्य उन्हें छुआ होगा. उनके भीतर माँ का दिल है. उसे भूख लगी है यह सुनते ही कितनी सारी वस्तुएं ले आये. सुबह उन्होंने मिलकर दही-बड़े बनाये, बहुत ही अच्छे बने हैं. उन्हें भी शाम के विशेष भोज में परोसेंगे. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति में मीटिंग है. वहाँ ले जाने के लिए भी मिठाई का डिब्बा पड़ा है, जो सोनू के पिताजी लाये थे. देने की इच्छा हो तो सब सामान उपस्थित हो जाता है.



सत्यार्थ प्रकाश



आज मौसम सुहावना है, हल्की सी धूप है और हल्की सी बदली ! आज एक प्रसिद्ध महिला ब्लॉगर ने उसकी एक पुरानी कविता, 'हरसिंगार के फूल झरे' पुनः प्रकाशित की है. कल होली पर एक कविता लिखनी आरम्भ की थी. जून आज गोहाटी जा रहे हैं. कल सुबह वह उन दोनों महिलाओं से उनके घर जाकर अथवा फोन पर बात करेगी जिनके लिए विदाई कविताएँ लिखनी हैं. टीवी पर दीपक भाई 'नई दृष्टि - नई राह' में आ चुके हैं. कहते हैं, वे सभी शुद्धात्मायें हैं, यदि किसी में दोष देखा तो प्रतिक्रमण करना है. किसी को दुःख न हो इसका ध्यान रखना है. आत्मा में रहने पर कर्म नहीं बंधता और जन्म-मरण का चक्र छूटता है. प्रारब्ध कर्म प्रकट होता है, फिर फल देता है और खत्म हो जाता है. जगत किसी को नहीं बांधता, मन के राग-द्वेष ही जगत से उन्हें बांधते हैं. जगत निर्दोष है, वे व्यर्थ ही उसके प्रति अपने भाव बिगाड़ लेते हैं. उनके भाव शुद्ध हों तो मन हल्का रहता है. आत्मा के प्रकाश में जगत जैसा है वैसा ही दिखता है, उन्हें आत्मा में स्थित रहना है. यदि किसी के प्रति राग-द्वेष आदि है तो हिसाब चुकता नहीं हुआ और पुनः उनका सामना होगा. इसीलिए इसी जन्म में सभी आसक्तियों को त्याग कर मुक्तभाव से जीना है.

पौने दस बजे हैं रात्रि के, जून कल आ रहे हैं. आज गोहाटी में उनका कार्यक्रम अच्छा रहा, तस्वीरें बहुत अच्छी आई हैं. कम्पनी ने 'स्टार्ट अप इंडिया' के लिए काफ़ी बजट रखा है. आज 'जीत चैनल' पर स्वामी रामदेव पर आधारित कार्यक्रम देखा. वह बालक जिसे इतने अत्याचार सहने पड़े, पर जो असीम शक्ति का मालिक है, उसे सत्यार्थ प्रकाश पढने को मिली आज. वर्षों पहले उसने भी पढ़ी थी एक बार, पूरी नहीं पढ़ पायी, बहुत कठिन लगी थी. शायद वह एमएससी कर चकी थी, एक विद्यार्थी ने दी थी या फिर पुस्तकालय से ली थी, याद नहीं है. उस विद्यार्थी ने कहा था कि जैसे कोई जन उपन्यास पढ़कर आनंद का अनुभव करता है वैसी ही ख़ुशी उसे यह पुस्तक पढ़कर होती है. कमरे में न जाने कहाँ से एक छोटा सा पतंगा आ गया है, शायद कोई संदेश लाया हो परमात्मा का..नासिकाग्र पर मनमोहक गंध आ रही है, कभी मीठी कभी किसी पकवान की गंध..पता नहीं कहाँ से आती है ये गंधे, और कैसे ? अस्तित्त्व के लिए मन अपार प्रेम का अनुभव करता है, उसकी उपस्थिति अब एक क्षण के लिए भी नहीं हटती. उस अदृश्य से मुलाकात करनी हो तो ध्यान ही माध्यम है. आज शाम को पिताजी से बात की. छोटी बहन का वीडियो कॉल भी आया, वह बाल बांधकर बहुत प्यारी लग रही थी, काले रंग की सुंदर वेस्टर्न ड्रेस पहनी थी. उसे पार्टी में जाना था दुबई, वह समय के साथ-साथ और युवा दिखने लगी है, मोह-माया से छूटकर मुक्त आत्मा... शाम की योग कक्षा में एक सदस्या ने बताया, उनका तबादला हो गया है, दिल्ली जाना होगा, उसने एक मैथिली गीत सुनाया, जिसे नूना ने रिकार्ड कर लिया, उसकी स्मृति उन सबके साथ रहेगी. उसने बताया, छोटा पुत्र आ रहा है, उसे कम उम्र में कई रोग लग गये हैं. उससे कहा, एक दिन उसे लेकर आये, प्राणायाम या योग का महत्व बताकर शायद उसे प्रेरित कर सके. उन्होंने एक भजन पर नृत्य किया, एक अन्य सदस्या ने रिकार्ड कर लिया. डिनर में 'पत्ता गोभी और पालक' बनाया, दीदी ने यह रेसिपी बतायी थी. आज ब्लॉग पर कोई पोस्ट नहीं डाली. आलमारी ठीक की, ड्रेसिंग टेबल की दराजें भी सहेजीं. 'मातृत्व' पर स्वामी अनुभवानंद जी के सुंदर व्याख्यान सुने, संत के भीतर माँ का हृदय होता है. कितना सुंदर गीत भी सुना अभी वात्सल्य पर आधारित जो व्हाट्स एप पर आया है. सुबह गुरूजी का सुंदर प्रवचन सुना, शुद्ध चेतना में अपार क्षमताएं हैं, वह देह को स्वस्थ कर सकती है यदि कोई उससे जुड़ा रहे. नन्हा और सोनू उनके नये घर के लिए इंटीरियर डेकोरेटर ढूँढ़ रहे हैं.


Wednesday, July 17, 2019

पक्षी विहार



आज सुबह तेज गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई, लगा कि फरवरी में ही वर्षा का मौसम आ गया असम में, पर दोपहर होते-होते बादल छंट गये और मौसम सुहाना हो गया. इस समय शाम होने को है, जून अभी तक नहीं आये हैं. दोपहर को उन्होंने तिनसुकिया के पास स्थित डिब्रू सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान यानि पक्षी विहार जाने के लिए कार्यक्रम को रूप दिया. रिजार्ट के मालिक से बात करके इतवार सुबह आठ बजे पहुंचने का समय तय हो गया. एक और परिवार भी उनके साथ जायेगा, उनसे भी बात कर ली है. कल मृणाल ज्योति की 'क्षेत्रीय अभिभावक सभा' के लिए तैयारी भी कर ली है. नेट पर दिव्यंगो के लिए बनी राष्ट्रीय नीतियों के बारे में पढ़ा. सरकार ने कई संस्थाएं खोली हैं और कई नीतियाँ बनाई हैं ताकि दिव्यंगों को समाज और राष्ट्र में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल सके. देश की जनसंख्या का तीन से पांच प्रतिशत हिस्सा इस श्रेणी में आता है, यानि ढाई करोड़ से भी ज्यादा दिव्यांग हैं देश में, जिन्हें यदि उचित अवसर मिले तो सक्षम बन सकते हैं. कोई भी समाज तभी विकसित कहा जा सकता है जब उसमें सभी के लिए समान अवसर हों. संवेदनशील समाज अपने कम सक्षम नागरिकों के लिए, उन लोगों के लिए जो किसी न किसी कारण से पीछे रह गये हैं, अपने द्वार खुले रखता है. उन्हें बाहरी रूप को देखकर किसी की क्षमता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाने हैं, भीतर की शक्ति को जगाना है ताकि एक सम्मानपूर्ण जीवन उनके हिस्से आ सके, उन्हें दया अथवा सहानुभूति की नजर से नहीं देखना है. उन्हें भी एक सामान्य नागरिक की तरह शिक्षा का अधिकार है तथा अपनी बात कहने का भी अधिकार है. हर जीवन को दिव्य मानकर उन्हें किसी के प्रति पूर्वाग्रहों से ग्रसित नहीं होना है. उनके साथ काम करने वाले शिक्षक व अन्य लोग समझते हैं कि वे अपने को व्यक्त करना चाहते हैं और उन्हें इस बात का अवसर दिया जा चाहिए.

"जलता हुआ दीपक जिस समय बुझ जाता है, अंधकार छाने में पल भर भी नहीं लगता, वैसे ही एक क्षण का प्रमाद भी आत्मा के प्रकाश को ढक लेता है और भीतर अंधकार छा जाता है." महावीर स्वामी का यह वचन आज सुना, इसीलिए संत कहते हैं, प्रमाद मृत्यु है क्योंकि आत्मा अमृत है ! आत्मा का सूर्य भीतर प्रज्ज्वलित हो रहा है पर प्रमाद रूपी बादल उसे ढक लेता है और वे उसके प्रकाश से वंचित हो जाते हैं. मन जिस क्षण भी उद्ग्विन हो यही समझना चाहिए कि अज्ञान के बादल ने आत्मा को ढक लिया है. आज आत्मा कितनी मुखर है, सिर के ऊपरी भाग में हल्की सिहरन हो रही है, दाहिने कान में संगीत गूँज रहा है, मन बिलकुल खाली है. पिछले तीन-चार दिनों से न समाचार सुने न अखबार पढ़ा. ध्यान किया और सद्वचन सुने, जैसे कोई कोर्स घर बैठे कर लिया हो, ऐसा ही लग रहा है. ध्यान रखना होगा कि अध्यात्मिक यात्रा ऐसे ही चलती रहे. भोजन हल्का होना चाहिए और समय का सदुपयोग !

'पीस ऑफ़ माइंड' पर कितना सुंदर गीत आ रहा है, और नासिकाग्र पर कितनी दिव्य गंध आ रही है. आजकल कोई न कोई मदमाती गंध आसपास डोलती रहती है. परमात्मा की कृपा अनंत है, वह अकारण दयालु है और सच्चा सुहृद है, अनंत प्रेम करने वाला है. वह लिख ही रही थी कि जून भोजन ले आए, मेथी पुलाव, भिन्डी की सब्जी और पापड़, पूरा सिन्धी खाना.


Monday, July 15, 2019

साईं भजन



जून शाम को आये तो उन्होंने टीवी पर एक फिल्म का कुछ अंश देखा, फिर आमिर खान की 'सीक्रेट सुपर स्टार' का भी. सोने गयी तो नींद का दूर-दूर तक पता नहीं था, पता नहीं चला बाद में कब नींद आई, सुबह फिर कोई देवदूत जगाने आया. आज इतवार है सो जून ने नया नाश्ता बनाया, 'पनिअप्पम तथा फिल्टर कॉफ़ी'. बाद में सभी से फोन पर बात की, हर इतवार को वे एक-डेढ़ घंटा इसी में बिताते हैं, हफ्ते भर के समाचार मिल जाते हैं. बगीचे में ढेर सारे फूल खिले हैं, फूलों का ही मौसम है यह फाल्गुन का महीना. दो दिन बाद शिवरात्रि है. उस दिन बीहुताली में ब्रह्माकुमारी का कोई कार्यक्रम भी होने वाला है. वह इस बार रात्रि जागरण करेगी, वैसे भी देर तक नींद कहाँ आती है. भीतर सुमिरन चलता रहता है चाहे आँख खुली रहे या बंद. कभी रूप बनकर, कभी गंध बनकर आस-पास ही कोई डोलता रहता है. अब वह जगाता भी है, पढ़ाता भी है. जून ने एक नयी डायरी दी है, उसमें विशेष अध्यात्मिक अनुभव लिख रही है आजकल. सुना है, कबीर पहले भगवान को पुकारते थे और फिर एक दिन भगवान उनके पीछे कबीर-कबीर कहकर पीछा करने लगे. कैसा अनोखा है प्रेम का यह आदान-प्रदान ! दोपहर को नन्हे और सोनू से बात हुई, वे दोनों भी प्रेम के एक बंधन में बंधे हैं, जहाँ अभिमान की गंध भी नहीं. प्रेम और अभिमान का साथ हो ही नहीं सकता, प्रेम तो समर्पण का ही दूसरा नाम है. जून बाहर टहलते हुए फोन पर अपने मित्र से बात कर रहे हैं. दोपहर को तीन छोटी लडकियाँ आयीं जिन्हें गणित पढ़ाया, फिर कुछ देर बैडमिंटन खेला. अब समय है 'अष्टावक्र गीता' पर गुरूजी की व्याख्या सुनकर ध्यान करने का. ध्यान मन के पार होकर ही किया जा सकता है, बल्कि मन के कारण ही ध्यान उपलब्ध नहीं होता. अमन अवस्था ही ध्यान है. ध्यान कार्य-कारण में नहीं आता. कार्य-कारण के कारण ईश्वर को नहीं पाया जा सकता है. कार्य-कारण का सिद्धांत जहाँ लागू होता है वहाँ नियति है, पर परमात्मा भाग्य से नहीं मिलता, अर्थात उनके कुछ करने से नहीं मिलता. परमात्मा कृपा से मिलता है. बल्कि परमात्मा सदा ही है, सब जगह है, उसे देखने की दृष्टि हमें जगानी है. परमात्मा सब सीमाओं के पार है. ध्यान उन्हें वह अवसर देता है कि वह दृष्टि अपने भीतर जागृत कर लें.  

कुछ देर पहले कम्पनी के आई टी विभाग से एक मकैनिक आया माउस बदलने, उसके पिता का कुछ समय पहले देहांत हो गया था, कहने लगा, माँ को योग सिखने के लिए लायेगा किसी दिन. कल सुबह स्कूल में बच्चों को योग के बाद ध्यान कराया, एक अध्यापिका ने धन्यवाद कहा, वह आजकल पहले की तरह क्रोध नहीं करती हैं. कल शाम क्लब में 'पैडमैन' थी, अच्छी फिल्म है, सामाजिक विषय को लेकर बनायी गयी. उसके बाद महिला क्लब की एक सदस्या का विदाई समारोह था. आज आसू ने 'बंद' का आवाहन किया है, कम्पनी के वाहन नहीं चल रहे हैं, जून अपनी गाड़ी लेकर दफ्तर गये हैं. ऐसे में थोडा सा डर तो बना ही रहता है, फ़ील्ड जाने वाली गाड़ियों को पत्थर मारने की घटनाएँ भी कभी-कभी हो जाती हैं. एक सखी ने अपने घर पर 'साईं भजन' रखा है, साईं बाबा को मानने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. उसने देखा है सभी भजनों में थोडा सा परिवर्तन करके साईं के नाम से गाते हैं. उसने मना कर दिया, क्योंकि वही समय शाम की योग कक्षा का होता है.


Saturday, July 13, 2019

सेमल के फूल



पिछले पांच दिन कुछ नहीं लिखा, कारण क्या हो सकता है सिवाय प्रमाद के. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं. जून बंगलूरू में हैं, परसों वापस आ रहे हैं. आज दिन भर कुछ नहीं सुना, अब और कुछ सुनने की आवश्यकता नहीं है, भीतर के मौन को ही सुनना है. निरंतर भीतर एक स्मृति बनी रहती है. एक अचल मौन का भान होता है. कानों में कोई रुनझुन बजती है और विचार दूर प्रतीत होते हैं. उनके पास परमात्मा का दिया बहुत कुछ है. उसके लिए कृतज्ञ होना है. जीवन में चुनौतियाँ तो आने ही वाली हैं, उनका सामना करना है, बचना या भागना नहीं है उनसे. हर दिन कोई न कोई सृजनात्मक कार्य करना है और अन्यों का सहयोग भी. यदि किसी का हाथ नहीं बंटा पाए तो सोचना है किसी को कोई दुःख तो नहीं दिया. यदि स्वस्थ हुए तो भी परमात्मा का धन्यवाद करना है और अगर अस्वस्थ भी हो गये तो भी यही सोचना है कि हमारी मृत्यु तो नहीं हो गयी, अभी श्वासें शेष हैं तो मुक्ति की सम्भावना है !  

कल रात स्वप्न में बूढ़े माली को देखा, कह रहा था, साहब ने उसका अपमान किया था, उससे नाराज नहीं था. इसलिए बगीचे से सब्जी तोड़कर नहीं देगा. स्वप्नों की दुनिया जागृत से कितनी भिन्न होती है. हर बार स्वप्न देखने वाला अलग ही होता है, कोई दो रात लगातार धारावाहिक सपने नहीं आते. कल शाम दायीं तरफ की पड़ोसिन के यहाँ भजन है, वे जायेंगे. बाद में रात्रि भोजन भी वहीं होगा. दोपहर को अगले हफ्ते डिब्रूगढ़ में होने वाली मृणाल ज्योति की मीट के लिए कुछ पढ़ा, अभी दो-तीन दिन और पढ़ना होगा. उसे एक भाषण में सहायता करनी है. दीदी का फोन आया सुबह, जीजाजी का स्वास्थ्य अब ठीक है. उससे पूर्व एक मराठी सखी का नया घर देखने गयी, उसके माता-पिता से मिली. गणेश की मूर्ति ले गयी थी, उन्हें अच्छी लगी. एक अन्य सखी के यहाँ गयी, और बड़े आराम से उससे बातें कीं. उसके प्रति जो भी दुविधा मन में थी, अब नष्ट हो गयी है. अब इस पूरे संसार में कोई नहीं है जो उससे उद्ग्विन हो और जिससे वह उद्ग्विन हो. सारा संसार अपना घर बन गया है, गुरूजी का ज्ञान सफल हो रहा है. सुबह सेमल के वृक्ष की फोटो भी उतारी. कितने सुंदर फूल होते हैं सेमल के. इतने वर्षों में पहली बार इस बड़े वृक्ष के फूल देखे, पहले कई बार सेमल के फाहे देखे थे हवा में उड़ते हुए. जून का फोन आया अभी-अभी, उन्होंने अकेले ही भोजन किया. नन्हा फ्लाइट में है, रात को साढ़े बारह बजे तक आएगा. सोनू भी ग्यारह बजे तक आएगी. आज पिताजी से बात नहीं हुई. वह बंगलूरू जाने के लिए तैयार हैं. उनका नया घर जब तैयार हो जायेगा, वह वहाँ जायेंगे.

कल दिन में फिर कुछ नहीं लिखा, रात नींद नहीं आ रही थी. सुमिरन करने लगी फिर पता ही नहीं चला, कब नींद आ गयी. स्वप्न देखा जिसमें मन परेशान हुआ तो झट स्मृति आ गयी, यह स्वप्न है. किसी ने कहा, 'अब वह नहीं भटकेगी'. स्वप्न में भी संदेश सुन सकी. जो जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति तथा समाधि का आधार है, उसे वे भुला देते हैं. जो उनको राह दिखाने वाला है, पथ प्रदर्शक है. जून कल वापस आ रहे हैं. उन्होंने ढेर सारे काम निपटाए आज. नये घर के लिए कितने ही जॉब शेष थे. वह आज आँख के अस्पताल भी गये थे, उनकी दूसरी आँख के आपरेशन के लिए भी डाक्टर ने कह दिया है. आज उनके दफ्तर का ड्राइवर घर आकर गाड़ी धोने के लिए कहने लगा, फिर धोयी, खुली जगह और खुला पानी देखकर उसे अच्छा लगता होगा. शाम को नैनी ने कहा उसका राशिफल पढ़कर सुनाये. उसकी राशि मीन है. वह उदास थी. उसके माता-पिता भी नहीं हैं, इस बात को लेकर आँसूं भी बहाये. मानव का मन कितना नाजुक होता है, एक फूल से भी कोमल. उसे समझाया पर इस दुःख का इलाज तो खुद ही ढूँढना होता है. थोड़ी ही देर में वह सामान्य भी हो गयी. बगीचे से फूल गोभी, शलजम, पत्ता गोभी, लाइ साग आदि लाकर दिए. काफ़ी दिनों से सब्जी नहीं लाये हैं वे बाजार से, काम चल ही रहा है. उसकी सास ने सहजन के फूल भी लाकर दिए, उसके दायें हाथ का अगूँठा कितना सूजा हुआ था. अपने छोटे-मोटे दर्द को ये लोग सहते ही रहते हैं. पिताजी से बात हुई आज. छोटी भाभी ने पकौड़े बनाये थे शाम को, आलू के पकौड़े. पिछले दिनों से अक्सर उसे भिन्न-भिन्न तरह की गंधों का अनुभव होता रहा है. हलवा बनने की गंध, मीठी सी गंध, कभी घी की गंध, कभी विचित्र सी गंध. कल-परसों से मुख का स्वाद भी कुछ अलग सा है. जीवन एक रहस्य है और वह रहस्य गहराता ही जा रहा है. आज सुबह भी प्रातः भ्रमण से वापस आकर कुछ शब्द लिखे, जिन्हें दोपहर को ब्लॉग में लिखा. परमात्मा कितना सृजन शील है, इसलिए ही उसे कवि कहते हैं. आज योग कक्षा में उपस्थिति ज्यादा थी. शिव के नाम का जप किया और उनके 'चन्द्रशेखर' नाम पर चिन्तन भी.

Friday, July 12, 2019

वीरवार की पूजा



शाम के पांच बजने वाले हैं. ''जब वे अपने आप से भी बात करना बंद कर देते हैं तब वास्तविक मौन होता है, ऐसा संत कह रहे हैं. मन पर काम करने का पहला उपाय है अपने आप से बातें करना बंद करना, दूसरा उपाय है दृश्य से हटकर द्रष्टा में टिक जाना. मन में जब विचार आते हैं तब शब्दों के वस्त्र पहन कर ही आते हैं, शब्दों के बिना वे कोई चिन्तन नहीं कर सकते, शब्द निर्माण होते ही मन निर्माण हो जाता है. मन ही दृश्य है, इसे देखने वाला साक्षी जब अपने आप में ठहर जाता है, तो विचार बंद हो जाते हैं. आगे उन्होंने कहा, जगत के विषयों का प्रभाव इन्द्रियों पर नहीं पड़ता. जैसे  शब्द होने या न होने से कानों को कोई लाभ या हानि नहीं होती. इसी तरह इन्द्रियों का प्रभाव मन पर नहीं पड़ता और मन का प्रभाव साक्षी पर नहीं पड़ता. साक्षी सदा अलिप्त रहता है. आत्मा भी अलिप्त है, जिसका संसार से कोई भी संबंध नहीं है. परछाई जैसे दिखती है, उसकी अपनी कोई सत्ता होती नहीं, संबंध भी ऐसे ही होते हैं, जो दीखते तो हैं होते नहीं. कुछ देर पहले जून से बात हुई, आज उनका प्रेजेंटेशन था, ठीक हो गया. कल भी जाना है, वह कह रहे थे कि एक दिन के लिए घर हो आयें, पर उसने मना कर दिया, जिस कार्य के लिए गये हैं, उसे ही पूरा करना ज्यादा ठीक होगा. दोपहर की योग कक्षा में पांच महिलाओं के अलावा बच्चे भी थे, शाम की कक्षा में पता नहीं कौन-कौन आएगा ? आज भी एक कविता लिखी, संगीत सुनते हुए मन में सहज ही कुछ पंक्तियाँ आ रही थीं. सुबह गाँधी जी के चित्र सहित उनके कुछ विचार पोस्ट किये फेसबुक पर, आज उनकी पुण्यतिथि है. सुबह ओशो को सुना, ताओ पर उनका प्रवचन अद्भुत है.

आज सुना, नींद में देहात्म भाव खो जाता है. स्वप्न में कुछ-कुछ बना रहता है और जागृत अवस्था में पूर्ण रूप से बना रहता है. देहात्म भाव से मुक्त होना है और जीव भाव से भी मुक्त होना है. स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर दोनों से परे जाना है. ध्यान में साधक को कुछ नहीं होना है, जब वे कुछ भी नहीं हैं, उन्हें कुछ भी सिद्ध नहीं करना होता. जब वे स्वयं को कुछ भी देखते हैं, उसी के अनुरूप उन्हें कर्त्तव्य कर्म करने होते हैं. मन वृत्तियों को जगाता है. मन के दो मुख्य कार्य हैं, पहला- देह में होने वाली क्रियाओं को करना तथा दूसरा- देह का आकार ले लेना. जो मन सभी के लिए समान है वह पहला कार्य करता है तथा दूसरे कार्य में व्यक्ति स्वयं को अन्यों से पृथक समझने लगता है. यदि हाथ में कोई वस्तु हो और कोई उसी हाथ से लिखने का प्रयास करे तो लेख अच्छा नहीं होगा. इसी तरह मन जिस देह को धारण करता है, उसी के विषय में विचार करता है, जब देह भाव से मुक्त हो जाता है, तब विचारों से भी मुक्त हो जाता है. इस समय पौने दस बजे हैं रात्रि के. कल जून आ रहे हैं. क्लब में 'पद्मावत' दिखाई जाएगी. गुरूवार का सत्संग वे दोपहर को ही करेंगे. कर्ता भाव से मुक्त होने पर कोई कर्म करना ही है, ऐसा भाव नहीं रहता, जो होता है वही संतुष्टि देता है.

आज फरवरी का प्रथम दिन है. सुबह नींद खुली तो सदा की तरह मन में चिन्तन आरम्भ हो गया. आज का चिन्तन बिलकुल अलग था, लगा जैसे हृदय से कुछ बाहर निकला और सभी कुछ तोड़ता हुआ पूरे विश्व में फ़ैल गया. खुदी को जैसे खुदा का ठिकाना मिल गया. कितने ही सत्य प्रकट होने लगे, जो इतनी बार शास्त्रों में पढ़े थे. सद्गुरु कहते हैं, आत्मा, परमात्मा और गुरू में कोई भेद नहीं है, तीनों एक ही सत्ता से बने हैं. एक ब्रह्म ही विभिन्न रूपों में प्रकट हुआ है. देवी-देवता भी उसी की शक्तियाँ हैं. जीव-जगत के सारे प्राणी भी उसी की शक्ति से प्रकट हुए हैं. देह को आधार देती है आत्मा और आत्मा की गहराई में छिपा है परमात्मा. जिस तरह एक ही व्यक्ति विभिन्न भूमिकाएं निभाता है वैसे ही एक ही चेतना जाग्रत, स्वप्न तथा सुषुप्ति अवस्था को आधार देती है. जीवन उस आधार भूत सत्ता पर ही टिका है. आज स्वयं ही श्वेत वस्त्र पहनने का मन हुआ तथा प्रार्थना भी भीतर स्वयं घटी, पूजा भी स्वयं घटी. गुरूजी कहते हैं, पूर्णता से ही पूजा प्रकट होती है. देवता का स्मरण भी हो आया. बचपन में बड़ी बुआ को वीरवार को पूजा करते देखा करती थी, उसमें की गयी प्रार्थना वर्षों से नहीं सुनी थी. आज मन पंजाबी की उस प्रार्थना को अपने-आप ही गाने लगा. परमात्मा की कृपा निरंतर बरस रही है.