Wednesday, June 5, 2019

वैदिक गणित का अभ्यास

वैदिक गणित का अभ्यास 




आज का इतवार भी बीत गया. सुबह चार बजे से पहले ही उठे, गर्मी बहुत थी. प्रातः भ्रमण के समय सूर्योदय का सुंदर दृश्य दिखा. जून को 'विश्वकर्मा पूजा' के लिए दफ्तर जाना था. उनके जाने के बाद कुछ देर के लिए ध्यान में बैठी पर घंटी बजी और बीच में ही उठना पड़ा. आज नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन है. पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं, अब प्रधानमन्त्री के पद पर वह स्वयं हैं, किससे अपील करेंगे. दोपहर को बच्चों को गणित पढ़ाया. स्वयं वैदिक गणित का अभ्यास किया, कई वर्ष इसकी पहले पुस्तक खरीदी थी. शाम को योग कक्षा में आने वाली एक परिचिता से मिलने अस्पताल  गयी, अब ठीक हो रही है. उसका आपरेशन ठीक हो गया है. वापस आकर गुरूमाँ का 'मुद्रा ध्यान' किया, फिर टीवी चलाया, भारत-आस्ट्रेलिया का एक दिवसीय मैच वर्षा के कारण बीच में रुक गया है. जून गोभी पुलाव बनाने चले गये हैं रात्रि भोजन के लिए. वर्षों बाद पंजाबी दीदी व उनके पतिदेव से फोन पर बात की, अगले महीने जब एक मित्र की बेटी के विवाह में जायेंगे तब उनसे भी मिलेंगे. नन्हे से भी बात हुई, उसके यहाँ उसका एक मित्र आया है, वह भी उसी  सोसाइटी में घर देख रहा है, जब तक घर नहीं मिलता उसके साथ ही रहेगा.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, आज फुर्सत ही फुर्सत है. शाम को क्लब जाना है, सुबह फोन आया ड्रेस कोड है हैंडलूम की साड़ी. महिला क्लब की कमेटी में उसे शामिल कर लिया गया है. उसने सोचा, कोलकाता एअरपोर्ट पर खरीदी बंगाल की साड़ी पहन कर जाएगी. अभी तक एक बार ही पहनने का अवसर मिला है. उस सखी से बात हुई जिसकी बिटिया के विवाह में शामिल होने उन्हें जाना है, उसने बताया, तैयारी जोर-शोर से चल रही है. जून ने दफ्तर में आज पहली बार वार रूम में होने वाली वीडियो कांफ्रेसिंग में भाग लिया. स्कूल की पत्रिका का काम आगे बढ़ रहा है. परसों एक अध्यापिका के घर गयी, वह एक अन्य अध्यापिका से किसी बात पर नाराज थी, उसे समझाया तो अब ठीक है.

ग्यारह बज गये हैं, जून को आने में आज देर होगी. नैनी से पैंट्री की सफाई करवाई, उसने भी दिल लगाकर काम किया. सब कुछ चमक रहा है जैसे. ब्लॉग पर दो पोस्ट्स प्रकाशित कीं. ग्रीन टी पी. इन्द्रियों से परे मन है, मन से परे बुद्धि, बुद्धि से परे आत्मा..जिसे कोई भौतिक वस्तु नहीं चाहिए. मन भी अशरीरी है, चाय जाती है देह में, कुछ रसायनों के कारण देह में संवेदना होती है, जिसे मन अनुभव करता है, अंततः आत्मा अनुभव करती है. देह के लिए जो वस्तु हानिकारक है, उसे भला इन्द्रियां क्यों चाहेंगी, जब तक मन प्रेरित न करे. संस्कार के वशीभूत हुआ मन ही अपने लिये हानिप्रद परिस्थतियों का भी चयन कर लेता है, उन्हें चाहने लगता है. यही तो माया है. बुद्धि की धृति शक्ति जब कमजोर होती है तो मन पर बुद्धि का नियन्त्रण नहीं रहता, मनमानी करता है मन जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता है. आज सुबह क्लब में फोटो सेशन था. कमेटी में उसे जो पद मिला है इस कारण. जो भी सहज रूप से प्राप्त होता है, उसे स्वीकारना और अस्तित्त्व का धन्यवाद करना, यही साधक के लिए उचित है.

Thursday, May 30, 2019

शब्दों के बीज



आज हफ्तों बाद सुबह लिखने का सुयोग मिला है. कल रात से लगातार वर्षा हो रही है. भीषण गर्जना के कारण रात को एक बार नींद खुल गयी, जब आई तो बहुत दिनों बाद एक दुःस्वप्न देखा. पिताजी व माँ को भी स्वप्न में काफ़ी देर तक देखा. उन्होंने कोई फोटो खोजने को कहा था, जब पूछा, मिल गया तो याद आया, अभी तो खोजना भी शुरू नहीं किया. एक स्वप्न में उन्हें मदद के लिए बुलाती है, आवाज भी दी है, और कानों से उसे सुना भी. स्वप्नों की दुनिया कितनी विचित्र होती है. आज धौती व नेति दोनों की, तन हल्का लग रहा है. जून ने कहा है अपना सोनी का नोटपैड मृणाल ज्योति के एक टीचर को दे देंगे. कोई वस्तु किसी के काम आये, इसीमें उसकी सार्थकता है. दीवाली के लिए घर की सफाई का कार्य चल रहा है, पर हो सकता है इस दीवाली पर वे बंगलूरू जाएँ. वहाँ की दीवाली भी देखने योग्य होगी.

आज 'हिंदी दिवस' है. व्हाट्सएप पर संदेश भेजे. फेसबुक पर हिंदी दिवस की शुभकामनायें दीं. इसके अलावा तो हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कुछ नहीं किया. छोटा सा लेख या कविता जो हिंदी के महत्व को दर्शाती हो, अभी भी लिखी जा सकती है. बचपन से हिंदी की कहानियाँ पढ़ते-पढ़ते हिंदी के लेखकों-कवियों का सान्निध्य प्राप्त करते-करते यह भाषा इस तरह भीतर घुल-मिल गयी है कि थोड़े से प्रयास से ही कुछ भीतर से झरने लगता है. शब्दों के बीज जो बचपन में बोये थे मन की धरती पर, वह आज विचारों की पत्तियां और शाखाओं के रूप में खिल रहे हैं. वे ऋणी हैं इस भाषा के, जिसने उन्हें सूर, तुलसी के रूप में कृष्ण और राम का अवतार दिया. गीतों और कविताओं की एक लम्बी श्रंखला जो हिंदी के साहित्य को समृद्ध कर रही है, उनकी धरोहर है. इसे सम्भालना है, इससे पोषित होना है और इसे पल्लवित भी करना है !

शाम के सात बजे हैं, कुछ देर पूर्व ही वे डिब्रूगढ़ से आये हैं. उसने कुछ वस्त्र खरीदे और जून ने विवाह के कार्ड्स पर लगाने के लिए स्टिकर्स लिए. नन्हे से बात की, वह परसों मुम्बई जा रहा है. कोकिला बेन और हिंदुजा अस्पताल के मैनेजमेंट से मिलने, वे उसकी कम्पनी के बड़े क्लाइंट हैं. अपनी मेहनत के बल पर कम्पनी आगे बढ़ रही है, पर वह अपनी सेहत का ध्यान ठीक से नहीं रख पाता है. आज जून ने दोपहर का लंच अकेले किया, दोपहर को उसे महिला क्लब द्वारा चलाये जाने वाले छोटे बच्चों के स्कूल जाना पड़ा. डेढ़ घंटे से भी कुछ ज्यादा समय सभी अध्यापिकाओं के साथ अध्यक्षा का भाषण सुनते हुए बिताया. उसे आश्चर्य होता है, वह इतना समय तक बिना थके कैसे बोल लेती हैं. आज श्वास लेते हुए कई बार पूल की चौड़ाई पार की. प्राणायाम करते समय भी श्वास को पूरी तरह अनुभव किया, इतने वर्षों से श्वास को देखने का ध्यान किया है पर श्वास को आरम्भ से अंत तक इस तरह महसूस पहले नहीं किया था. सुबह टहलने गयी तो चलने में जरा भी प्रयास नहीं करना पड़ रहा था. उठने से पूर्व एक स्वप्न में अपने किसी पूर्व जन्म का दृश्य देखा, एक कहानी जैसा. जिसमें एक लड़की दरजिन के पास कपड़े सिलवाने जाती है, जिसे किसी शाह ने उसके लिए खरीदे हैं. इस जन्म के कई सवालों के जवाब इस स्वप्न में मिल गये.  

Tuesday, May 28, 2019

तेनाली रामा



छह बजने को हैं. आज शुक्रवार है, पर सुबह जब स्कूल गयी तो मन में यही था कि आज बृहस्पतिवार है. कुछ दिन पूर्व भी ऐसा हुआ था कि शनिवार को सोमवार समझ लिया था, कहीं यह बढती हुई उम्र के कारण तो नहीं है ? अब से हर हफ्ते मृणाल ज्योति के छात्रावास में रहने वाले बच्चों को योग सिखाने जाना है. उन्हें भी योग-प्राणायाम अच्छा लगता है, उनके शांत चेहरे देखकर पता चलता है. यह उसकी ही इच्छा थी और परमात्मा ने इस तरह स्कूल की वाईस प्रिंसिपल को निमित्त बनाकर इसे पूरा किया है. बगीचे में श्वेत गुलाब खिले हैं, उनकी तस्वीर बेहद सुंदर आई है. नई कविता लिखे कई दिन हो गये हैं.

जून गोहाटी गये थे, आज सुबह साढ़े पांच बजे ही उन्हें पहुँच जाना चाहिए था, पर उनकी ट्रेन कल शाम की बजाय रात सवा एक पर चली, दोपहर तक आयेंगे. तेज वर्षा के कारण सब कुछ धुला-धुला सा लग रहा है. नैनी ने सुबह पर्दे धोये, अब जाकर फैलाये हैं. वह काम अच्छा करती है बस उसकी एक आदत, बिना बताये कुछ लेने की है, जो उन्हें कभी-कभी परेशान कर देती है. वे भी तो परमात्मा की सृष्टि में उसकी वस्तुओं को उसकी इजाजत के बिना उपयोग करते रहते हैं. उनके भीतर किसी बात की तरफ ध्यान दिलाने के लिए ही शायद परमात्मा ने ऐसी परिस्थिति में उन्हें रखा है. आज सुबह किसी ने बड़े प्रेम से उठाया, परमात्मा की कृपा निरंतर बरस ही रही है. उसकी उपस्थिति को महसूस करने वाला मन किसी के पास हो तो वह हर समय अमृत का पान ही करता रह सकता है ! अभी-अभी नन्हे का फोन आया, पूछ रहा था, कौन-कौन मेहमान आ रहे हैं और कब ? विवाह का दिन नजदीक आता जा रहा है. उसने कहा है, कार्ड का नमूना भेजेगा.

टीवी पर 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' दिखाया जा रहा है. आजकल वे जिसे देखते हैं तेनाली रामा भी अच्छा हास्य धारावाहिक है. आज स्कूल गयी तो प्रिंसिपल ने कहा, यूनिट टेस्ट के कारण अगले दो हफ्ते योग कक्षा नहीं होगी. योग जैसे आवश्यक विषय को परीक्षा के दिनों में नहीं कराकर वह छात्र-छात्राओं का लाभ कराएंगी या हानि ? यह विचारणीय विषय हो सकता है. आज सभी ब्लॉग्स पर पोस्ट्स प्रकाशित कीं. छोटी बहन से बात की, अगले वर्ष कनाडा जाने की बात कह रही है वह. वे कब जायेंगे यह तो समय ही बतायेगा. योग कक्षा में एक साधिका ने एक प्रश्न पूछा, उसके जवाब में उसे परमात्मा की बात बताने का अवसर मिला. आज पहली बार श्वास के साथ तरणताल की चौड़ाई पार की.

कल रात विचार श्रंखला व्यर्थ ही आरंभ हो गयी थी. श्वास पर ध्यान देने की विधि करनी चाहिए ऐसे समय. सुबह ध्यान किया, मन ठहरा है. काव्यालय की संयोजिका ने उसके ब्लॉग पर टिप्पणी की है, कल प्रकाशित किया था एक अनुभव के बाद. आज दोपहर बाद एक परिचिता के यहाँ श्राद्ध पर जाना था, काफी स्वच्छ वातावरण था, दही, चिवड़ा व गुड़ भी परोसा, दाल-पूरी के साथ. जून इस समय अख़बार में शब्दों का जम्बल हल कर रहे हैं. आज उन्होंने नये घर के लिए अपने ऍफ़ डी तुड़वाये, सेवा निवृत्ति के बाद जिसमें रहने वाले हैं वह विला, जिसका स्वप्न उन सबने देखा था !


वृद्धा की राम राम



महिला क्लब द्वारा संचालित बच्चों के स्कूल की पत्रिका छप रही है, स्वर्ण जयंती समारोह पर. अभी-अभी उसने एक अंग्रेजी व एक हिंदी लेख की प्रूफ रीडिंग की, सोचा, क्यों न वह भी इसमें अपनी एक कविता दे जो काफी पहले बच्चों पर लिखी थी. ब्लॉग पर कुछ दिन पहले लिखी एक कविता प्रकाशित की. काव्यालय पर उसकी प्रतिक्रिया पसंद आई, ध्यान का ही जादू है, यानि परमात्मा का. उसके मन में कल की बात घूम रही है, देश आगे बढ़े इसके लिए उन्हें भी अपने तौर पर कुछ करना होगा. वह स्वच्छता रखने के लिए क्या कर सकते हैं, इस पर मिलकर चिन्तन करना होगा. स्वच्छता ही सेवा है, इस अभियान को उन्हें सफल बनाना है. बच्चों को भी इस काम में बहुत आनंद आता है.

अब एक ही श्वास में पूल की चौड़ाई पार हो जाती है, जब सहज होकर तैरती है तो पता ही नहीं चलता और दूसरा किनारा आ जाता है. कई बार इधर से उधर चक्कर लगाये. आज गहराई वाले स्थान पर भी गयी. सीढ़ी से पूरा नीचे तक, जहाँ फर्श है पूल का. पानी ने पल भर में ऊपर ला दिया. पानी उनका मित्र है, वह देव है, वह डुबाता नहीं है, यदि वे सहज रहें. तभी बच्चे शीघ्र सीख लेते हैं, आज श्वास का अभ्यास किया, एक हाथ पर देह को पानी में संतुलित रखना है, पर अभी तक मुँह ऊपर उठाकर श्वास लेना नहीं आया है. जैसे यहाँ तक पहुंची है, एक दिन वहाँ भी पहुँच जाएगी. तैरना एक सुखद अनुभव है. नाक से पानी गिर रहा है रह-रह कर, कल भी ऐसा हुआ फिर अपने आप ही ठीक हो गया.

आज सुना, धी, धृति और स्मृति बुद्धि के ये तीन रूप हैं. 'धी' समझने की शक्ति है, 'धृति' संयम करने की और  स्मृति याद रखने की शक्ति है. जो हिंसा नहीं करता, उसकी धृति शक्ति बढ़ती है. धृति ही मन का नियमन करती है, मन नियंत्रित रहता है. जहाँ सुख दिखाई देता है, मन उधर जाता है. यदि धृति भंश हुई है तो अहितकर विषयों से स्वयं को रोकने में समर्थ नहीं हो पाता मन. जिस वस्तु से हटना है, धृति यदि प्रबल हो तो हटने में देर नहीं लगती. अहितकर चीजों को भी करता रहता है. हितकारी प्रवृत्ति को धृति नहीं रोकती.

शनि और इतवार पलक झपकते बीत गये. इतवार को बच्चों ने 'शिक्षक दिवस' मनाया. बरामदे में झालर, गुब्बारे आदि लगाकर सजाया. शनिवार को वे डिब्रूगढ़ गये. कुछ देर ब्रह्मपुत्र के किनारे बैठे. जून ने एक तस्वीर उतारी जो एक सुंदर स्मृति बन गयी है. आज ब्लॉग पर कुछ विशेष पोस्ट नहीं कर पायी. हिंदी फॉण्ट को लेकर कुछ समस्या आ रही थी. उस दिन प्रिंटिंग को लेकर जो समस्या थी, उसका हल करने के लिए कम्प्यूटर इंजीनियर आया था, कल फिर आएगा. कल उन्हें मृणाल ज्योति जाना है. शिक्षक दिवस के लिए उपहार लेकर. एक नई कविता भी लिखेगी.

सुबह समय से उठे, हल्का अँधेरा था, आकाश में छाये बादलों की वजह से शायद. सुबह कई बार बल्कि रोज ही एक वृद्ध महिला ( लाठी लेकर चलती हुई )मिलती है. हर मौसम में उसकी भ्रमण के प्रति निष्ठा देखकर एक दिन उसे 'नमस्ते' कह दिया था, अब वह दूर से उन्हें देखकर ही हाथ जोड़कर 'राम राम' कहना नहीं भूलती. सुबह मृणाल ज्योति में 'शिक्षक दिवस' मनाया. दोपहर को सफाई का काम आगे बढ़ा. तीन बजने वाले हैं एक घंटे के लिए पुनः क्लब के काम से बाहर जाना है. आज अभी तक तो चाय पीने के संस्कार को हावी होने नहीं दिया है. 'व्यसन' की परिभाषा एक बार सुनी थी. जिसको पूरा करने से नुकसान होता हो और न करने से चाह बनी रहती हो, अर्थात जो आरम्भ से लेकर अंत तक दुख देने वाला है, केवल मध्य में सुखी होने का भ्रम पैदा करता है.

Wednesday, April 17, 2019

पीले फूलों की माला



साढ़े तीन बजने को हैं, दोपहर बारह बजे से ही लगातार वर्षा हो रही है. हर तरफ पानी ही पानी हो गया है लॉन में. बाढ़ से असम के कई जिले पहले ही कितने पीड़ित हैं, ऊपर से वर्षा रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. प्रकृति की यह विनाश लीला इस सृष्टि चक्र का ही एक भाग है, मानव विवश है इसके आगे. आज एक वीडियो खोला तो एक वायरस का शिकार हो गयी. उसकी तरफ से कई मित्रों को अपने आप संदेश जाने लगे हैं. नन्हे को कहा है, वही कुछ सहायता कर सकता है. मैसेंजर से हट जाना ही ठीक रहेगा भविष्य में अथवा तो फेसबुक से ही. कल लाइब्रेरी से दो किताबें लायी. प्रणव मुखर्जी की एक ‘द ड्रामेटिक डिकेड’ और दूसरी अमेजन के बारे में हैं.

नन्हे ने सहायता की और उसकी तरफ से संदेश जाने बंद हो गये हैं. आज तरणताल में दोनों हाथों का प्रयोग करके तैरना सीखा. धीरे-धीरे ही सही कुछ बात बन रही है. सुबह उठी तो मन टिका था. आज तिनसुकिया जाना है, पूजा के उपहार खरीदने हैं. नैनी व माली के परिवारों के लिए. शिक्षक दिवस के उपहार भी खरीदने हैं. शाम को एक सखी के यहाँ चाय पर जाना है. क्लब की एक सदस्या ने फोन किया, उसे प्रेस जाने के लिए गाड़ी चाहिए. कल शाम वह बहुत परेशान थी. प्रेसिडेंट ने उसे फोन पर कुछ ऐसा कह दिया था जो उसे रास नहीं आया. कुछ देर बात करने के बाद वह खुश हो गयी, सारे दुःख उनके मन की कल्पना से ही बनते हैं और बढ़ते हैं. आज वैदिक टीवी देखा, सुना, कितना उपयोगी है यह साधकों के लिए. सुबह गुरूजी के साथ ‘सत्यं परम धीमही’ ध्यान किया. बड़ी भांजी से बात की, वह आजकल फेसबुक पर उदासी भरी पोस्टस् डालती है.

आज गणेश पूजा है, उन्होंने सुबह घर में गणपति की मूर्तियाँ सजायीं. लड्डू का प्रसाद बनाया. जून और उसने आरती की. नैनी ने पीले फूलों की माला बनाई. गणपति के प्रतीक की व्याख्या सुनी. उनके बड़े सिर, विशाल उदर और कानों, लंबी सूंड और उनकी सवारी, सभी के बारे में गुरूजी ने कितने सरल शब्दों में समझाया. पूजा का अर्थ है पूर्णता से उत्पन्न भाव, शुभता के प्रतीक गणपति उनके मनों को शुद्धता से भरें यही प्रार्थना उन्हें करनी है.

ग्यारह बजने को हैं. टीवी पर प्रधानमन्त्री के ‘मन की बात’ आने वाली है. आज धूप बहुत तेज है. प्रातः भ्रमण के समय ही सूरज की चमक आँखों को चुंधिया रही थीं. पीएम का सम्बोधन आरम्भ हुआ तो वे सुनने बैठ गये, अच्छा लगता है उनकी प्रेरणादायक बातें सुनना. राष्ट्रीय खेल दिवस के बारे में उन्होंने बताया और खेलों के महत्व के बारे में भी. नेवी में काम करने वाली छह महिलाओं का जिक्र किया जो तरिणी पर एक वर्ष के लिए विश्व भ्रमण पर जाने वाली हैं. शिक्षक दिवस पर भी वह एक अभियान चलाना चाहते हैं, जिसमें शिक्षा बदलाव के लिए हो और सीखना जीने के लिए हो. ‘जन धन योजना’ के कारण बैंकों में हुई बचत का जिक्र भी किया. जैन समाज के पर्व ‘पर्यूषण’ का महत्व बताया, जो क्षमा, मैत्री और अहिंसा का प्रतीक है. गणेश चतुर्थी का पर्व एकता, समता और शुचिता का पर्व है. ओणम प्रेम, सौहार्द, उमंग और आशा का संदेश देता है. सामाजिक समरसता का भी उल्लेख किया, जमैतुला हिन्द के कार्य कर्ताओं ने गुजरात के मन्दिरों और मस्जिदों की सफाई की. जाने कितने लोगों को कुछ करने की प्रेरणा देता है उनके संदेश.




Tuesday, April 16, 2019

लालकिले पर तिरंगा



आज नेट नहीं चल रहा है. लगातार वर्षा हो रही है. पिछले तीन दिनों से वे सुबह निकल नहीं पाते. जून के दफ्तर जाने के बाद जब वर्षा कुछ कम हुई, वह छाता लेकर भ्रमण पथ पर घूमने गयी. पांच-छह मजदूर वर्षा में भीगकर काम कर रहे थे, दो-तीन औरतें भी थीं. एक महिला अत्यंत बूढ़ी है पर उसे भीगने से सर्दी होने का जरा भी भय नहीं है. वह अक्सर कई बोरियां भरकर घास काटती है, अपने लिए या बेचने के लिए, पता नहीं. वर्षा में भीग रहे हैं मजदूर सो अलग पर उनके पास उचित उपकरण भी नहीं होते. सरकार की मदद इनके पास पहुँचे इसकी जिम्मेदारी कम्पनी को लेनी चाहिए. उसने सोचा चाय पिलाकर उनकी थोड़ी सी मदद कर सकती है, पर वे काम में व्यस्त थे और अब तक तो शायद वे चले ही गये हों. आज भी गुरूजी का प्रवचन सुना, हर बार सुनने पर कोई नई बात सुनने को मिलती है. वे पूरी बात सुनने का श्रम नहीं उठाते या तो उनकी क्षमता ही नहीं है. जब तक पिछले वाक्य को समझते हैं, एक वाक्य और बोला जा चुका होता है. कल जून का जन्मदिन है.

आज लालकिले से प्रधानमन्त्री का भाषण सुना, मन जोशीले भावों से भर गया है. उन्होंने कहा, हर भारतीय को शुभ संकल्प लेने हैं और उन्हें सिद्द होते हुए देखना है. आज देश में सकारात्मक माहौल बन रहा है. भारत की आजादी को सत्तर साल हो गये हैं और अब समय आ गया है कि हर भारतवासी अपने कर्त्तव्यों के प्रति सजग हो और अपने तौर पर कुछ न कुछ काम करे. वे स्वतंत्र भारत के नागरिक होने का हर लाभ उठाते हैं. देश को आगे बढ़ाने का जज्बा लेकर उन्हें साथ-साथ काम करना है. वे स्वच्छता के काम में अपना योगदान दे सकते हैं. देश की सुरक्षा के लिए काम करने वाले सैनिकों के लिए उनके दिलों में गर्व की भावना हो. देश के अंदर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हर किसी की है. सुबह वे लोग नेहरू मैदान भी गये. लोगों की भीड़ और तिरंगे के प्रति उनके प्रेम को देखकर सभी उल्लसित थे. उनकी सोच यदि सकारात्मक होगी तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा. पुराने कर्म अपना फल देंगे, पर वर्तमान में यदि वे सजग रहें और समभाव से उन्हें सहन करते जाएँ तो नये कर्म नहीं बंधेंगे. जून के जन्मदिन का भोज आज दोपहर को कुछ मित्रों के साथ किया.

कल ही जन्माष्टमी का उत्सव भी था, शाम को पूजा कक्ष की सफाई की. कृष्ण के चित्र पर माला चढ़ाई, कितने सुंदर लग रहे हैं कृष्ण फूलों के मध्य ! गुरूजी का जन्माष्टमी पर दिया विशेष वक्तव्य पढ़ा. देवकी देह का प्रतीक है और वसुदेव मन का. कृष्ण उनके ही भीतर जन्म लेते हैं, जब अहंकार नष्ट हो जाता है. अहंकार ही उन्हें आनंद से दूर रखता है. अभी-अभी क्लब की एक सदस्या का फोन आया. प्रेस जाने के लिए कह रही थी. इससे अच्छा है लेख ड्राइवर के हाथ ही भेज दिया जाये. उनका समय और श्रम बचेगा. जीवन कितना अनमोल है, यहाँ एक क्षण भी गंवाने जैसा नहीं है. कल दोपहर का भोजन गरिष्ठ था, रात को सिर में दर्द हो गया. सुबह नींद देर से खुली, वर्षा हो रही थी, सो आज भी टहलने नहीं जा सके. इस समय धूप निकली है.

आज पूरे एक सप्ताह के बाद तैरने गयी. अच्छा लगा, अब पानी में स्वयं को नियंत्रित करना आसान लग रहा है. धीरे-धीरे ही सही कुछ बात बन रही है. पानी में ठंड जरा भी नहीं लग रही थी, न ही गर्मी. आज सुबह उठी उसके पूर्व नींद खुल गयी थी पर तमोगुण की प्रधानता के कारण कुछ देर लेटी रही. सतोगुण में टिकना कभी-कभी सहज ही होता है पर कभी-कभी नहीं. यह असजगता की ही निशानी है. कल छोटी बहन से बात हुई, उसे दाहिनी आँख में कुछ चमकदार रंग दिखाई दिए, आँख की जाँच कराने को कहा है.


Friday, April 12, 2019

झीनी सी फुहार



अगस्त का आरम्भ वर्षा से हुआ है. सुबह वे हल्की फुहार में ही टहलने गये. बाद में वर्षा लगभग रुक गयी थी. आज उसने मोबाइल से खींची एक तस्वीर पर ‘सुप्रभात’ लिखकर व्हाट्सएप पर भेजा, अब कोई सूक्ति लिखना भी सीखना होगा. कल छोटी ननद की भेजी राखी मिली, सुंदर है. दोपहर को उसने भी कुछ राखियाँ बनायीं. आज बाजार जाकर डोरी लानी है, कल भी बनाएगी. इस वर्ष नैनी का पुत्र अस्वस्थ है. अपने हाथ से बनाने में भी अलग आनन्द है. सुबह उठी तो मुंह का स्वाद कटु था, पित्त बढ़ गया लगता है. परमात्मा क्लेशों से अछूता है, वे क्लेशों से ग्रस्त होते हैं. कल माली के पैर में तलवार से चोट लग गयी, टांके लगे हैं, उसका काम भी छूट गया है. जीवन एक संघर्ष है इन लोगों के लिए. आज एक पुराने परिचित का जन्मदिन है, उसने कल एक कविता लिखी उनके लिए जैसे पिछले कई वर्ष में लिखती आई है. बंगाली सखी ने बुलाया नहीं है, वह तो उसे जून के जन्मदिन पर बुलाने वाली है. सुबह ध्यान नहीं हुआ. मन में एक मौन तो निरंतर बना हुआ है. प्रत्यक चेतना का अनुभव होता है, परमात्मा उनके साथ है. उन्हें जो कर्म करने हैं, उसका संयोग तो वही बिठाता है. वे कर्म में अकर्म महसूस करें तो..कर्म की पकड़ छूटने लगती है.

बड़े भाई का फोन आया, उन्हें राखी मिल गयी है, फुफेरे भाई को भी. जून को पिछले दो तीन दिन से सर्दी लगी हुई है. कल सुबह पूल में उतरते समय उसे भी पानी ठंडा लग रहा था, शावर में भी पानी ठंडा लगा और तभी यह विचार आया कहीं ठंड न लग जाये और यही हुआ, कल रात से गले में दर्द था. आँख से पानी आ रहा है. तुलसी व अदरक ग्रीन टी को ओपरेटिव से लायी.

योग दर्शन में सुना, इस जन्म में वे जो कर्म करते हैं, उनके अनुसार ही अगला जन्म मिलता है. उनके संचित कर्मों में से ही कुछ कर्म नये जन्म का कारण होते हैं. जीवन में कुछ चीजें नियत हैं, कुछ अनिश्चित. उनका वर्तमान का पुरुषार्थ ही उसमें फेरबदल कर सकता है. यह भी सत्य है कि कर्म के मूल में यदि क्लेश होगा तभी कर्म का फल मिलता है. कर्मों के आधार पर ही के भोग मिलते हैं, आयु भी कर्मों के अनुसार कम या अधिक होती है..

सुबह से वर्षा हो रही है, सर्दी ठीक नहीं हुई, हीलिंग ध्यान किया कल की तरह. सुबह गुरूजी को सुना, शुद्ध चेतना में स्थित होकर वे अपने शरीर व मन को स्वस्थ रख सकते हैं. वे चाहें तो आत्मा में स्थित रहकर शांति, आनंद, प्रेम, सुख, शक्ति, ज्ञान तथा पवित्रता का अनुभव कर सकते हैं. और क्रमशः श्वसन तन्त्र, हृदय, रक्त वाहिनियाँ, पाचन तन्त्र, पेशी तन्त्र, नर्वस सिस्टम, तथा इन्द्रियों को स्वस्थ रख सकते हैं. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं.

आज भी सुबह वर्षा के कारण प्रातः भ्रमण के लिए नहीं गये. जून के जाने के बाद वह घर के सामने सड़क पार भ्रमण पथ पर टहलने गयी. श्री श्री का प्रवचन सुना. चेतना द्वारा शरीर का निर्माण, भरण पोषण तथा इलाज होता है. यदि मन चेतना से जुड़ा है, तो स्वस्थ है. मन जिस क्षण स्वयं में ठहर जाता है, ध्यान में स्थित होता है. मन के विकारों का प्रभाव ही देह पर पड़ता है. आत्मा से यदि देह सीधी जुड़ जाती है तो स्वस्थ होने लगती है. वापस आकर गुरूजी का गाइडेड मेडिटेशन किया. आज सर्दी काफी ठीक है. जून कल मुलेठी, काली मिर्च व मिश्री भी लाये. नैनी ने सरसों के तेल का नुस्खा बताया था, वह भी काम में लिया.