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Tuesday, May 28, 2019

तेनाली रामा



छह बजने को हैं. आज शुक्रवार है, पर सुबह जब स्कूल गयी तो मन में यही था कि आज बृहस्पतिवार है. कुछ दिन पूर्व भी ऐसा हुआ था कि शनिवार को सोमवार समझ लिया था, कहीं यह बढती हुई उम्र के कारण तो नहीं है ? अब से हर हफ्ते मृणाल ज्योति के छात्रावास में रहने वाले बच्चों को योग सिखाने जाना है. उन्हें भी योग-प्राणायाम अच्छा लगता है, उनके शांत चेहरे देखकर पता चलता है. यह उसकी ही इच्छा थी और परमात्मा ने इस तरह स्कूल की वाईस प्रिंसिपल को निमित्त बनाकर इसे पूरा किया है. बगीचे में श्वेत गुलाब खिले हैं, उनकी तस्वीर बेहद सुंदर आई है. नई कविता लिखे कई दिन हो गये हैं.

जून गोहाटी गये थे, आज सुबह साढ़े पांच बजे ही उन्हें पहुँच जाना चाहिए था, पर उनकी ट्रेन कल शाम की बजाय रात सवा एक पर चली, दोपहर तक आयेंगे. तेज वर्षा के कारण सब कुछ धुला-धुला सा लग रहा है. नैनी ने सुबह पर्दे धोये, अब जाकर फैलाये हैं. वह काम अच्छा करती है बस उसकी एक आदत, बिना बताये कुछ लेने की है, जो उन्हें कभी-कभी परेशान कर देती है. वे भी तो परमात्मा की सृष्टि में उसकी वस्तुओं को उसकी इजाजत के बिना उपयोग करते रहते हैं. उनके भीतर किसी बात की तरफ ध्यान दिलाने के लिए ही शायद परमात्मा ने ऐसी परिस्थिति में उन्हें रखा है. आज सुबह किसी ने बड़े प्रेम से उठाया, परमात्मा की कृपा निरंतर बरस ही रही है. उसकी उपस्थिति को महसूस करने वाला मन किसी के पास हो तो वह हर समय अमृत का पान ही करता रह सकता है ! अभी-अभी नन्हे का फोन आया, पूछ रहा था, कौन-कौन मेहमान आ रहे हैं और कब ? विवाह का दिन नजदीक आता जा रहा है. उसने कहा है, कार्ड का नमूना भेजेगा.

टीवी पर 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' दिखाया जा रहा है. आजकल वे जिसे देखते हैं तेनाली रामा भी अच्छा हास्य धारावाहिक है. आज स्कूल गयी तो प्रिंसिपल ने कहा, यूनिट टेस्ट के कारण अगले दो हफ्ते योग कक्षा नहीं होगी. योग जैसे आवश्यक विषय को परीक्षा के दिनों में नहीं कराकर वह छात्र-छात्राओं का लाभ कराएंगी या हानि ? यह विचारणीय विषय हो सकता है. आज सभी ब्लॉग्स पर पोस्ट्स प्रकाशित कीं. छोटी बहन से बात की, अगले वर्ष कनाडा जाने की बात कह रही है वह. वे कब जायेंगे यह तो समय ही बतायेगा. योग कक्षा में एक साधिका ने एक प्रश्न पूछा, उसके जवाब में उसे परमात्मा की बात बताने का अवसर मिला. आज पहली बार श्वास के साथ तरणताल की चौड़ाई पार की.

कल रात विचार श्रंखला व्यर्थ ही आरंभ हो गयी थी. श्वास पर ध्यान देने की विधि करनी चाहिए ऐसे समय. सुबह ध्यान किया, मन ठहरा है. काव्यालय की संयोजिका ने उसके ब्लॉग पर टिप्पणी की है, कल प्रकाशित किया था एक अनुभव के बाद. आज दोपहर बाद एक परिचिता के यहाँ श्राद्ध पर जाना था, काफी स्वच्छ वातावरण था, दही, चिवड़ा व गुड़ भी परोसा, दाल-पूरी के साथ. जून इस समय अख़बार में शब्दों का जम्बल हल कर रहे हैं. आज उन्होंने नये घर के लिए अपने ऍफ़ डी तुड़वाये, सेवा निवृत्ति के बाद जिसमें रहने वाले हैं वह विला, जिसका स्वप्न उन सबने देखा था !