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Tuesday, June 11, 2024

एयरो इंडिया शो


पिछले तीन दिनों से भोजन में किए सुधार का असर स्पष्ट दिखने लगा है। आज रात्रि भ्रमण में पैरों में अधिक जकड़न महसूस नहीं हुई। सुबह पड़ोसिन ने बताया, मेन गेट के पास तेंदुआ देखा गया। शहर में तेंदुआ के घूमने की खबरें सामान्य हो गई हैं। तीन-तीन बार लोगों ने अलग-अलग जगह देखा है। आजकल सोसाइटी के सभी पार्कों में रात भर बत्ती भी जलाकर रखी जाती है। उन्हें यह हिदायत दी गई, कि सुबह प्रकाश होने के बाद ही टहलने के लिए निकलें।आजकल नाश्ते में दही ओट्स खाने से भीतर तरावट महसूस होती है और रात को मस्तक पर चंदन लगाने से शीतलता का अनुभव होता है। बड़ी ननद का फ़ोन आया, गुजरात में बड़ी आयु वाले लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है, पूछ रही थी, लगवानी चाहिए या नहीं। टीवी पर बैंगलुरु के येला हांका एयरफ़ोर्स स्टेशन पर होने वाले एयरो इंडिया शो में  हवाई जहाज़ और हेलीकॉप्टर के अलग-अलग फ़ार्मेशन में करतब देखे, कितना अद्भुत कार्य करते हैं फाइटर प्लेन्स के पायलट। एशिया का सबसे बड़ा यह शो हर दूसरे साल होता है। तीन दिन चलेगा, भारत के अलावा और देश भी इसमें भाग ले रहे हैं और पहली बार यह वर्चुअली भी दिखाया जा रहा है। 


रात्रि के नौ बजे हैं, आजकल रात को सोने से पूर्व किए जाने वाले कार्यों में दो-तीन कार्य और बढ़ गये हैं। वास्तव में नींद भी जीवन का एक महत्वपूर्ण अंश है। छह-सात घंटे वे सोने में बिताते हैं तो उसके लिए समुचित तैयारी करनी ही चाहिए। जैसे सुबह उठकर वे दिन के लिए स्वयं को तैयार करते हैं। पैरों को धोना व उन पर वैसलीन या तेल लगाना उनमें से एक है। गर्म दूध में मुन्नका लिया आज। बचपन में दादाजी से सुना था इसके बारे में, जो हकीम थे।सुबह आयल पुलिंग का अभ्यास भी किया, जिसमें तिल के तेल को मुख में लेकर कुछ देर इधर-उधर घुमाना है फिर निकाल देना है। मसूड़े और दांत के लिए अच्छा है। एक पाइप लीक हो रहा था, जून ने पहले एम सील लगायी फिर मेटल पेंट भी, शायद यह काम कर जाये, नहीं तो प्लंबर को बुलाना पड़ेगा। नन्हे का फ़ोन आया, उसकी गरदन में दर्द हो गया था, शायद कंप्यूटर पर देर तक बैठने के कारण। वे लोग एक मित्र के यहाँ उसका नया घर देखने जा रहे थे। उसने काली प्लेट्स व कटोरियों का एक सेट भेजा है, उस दिन कार रैली में ऐसी ही प्लेट्स में खाना परोसा गया था। 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं। आज मौसम बहुत सुहावना है। खिड़की और सिट आउट में खुलने वाले दरवाजे से  ठंडी हवा आ रही है। हवा में फूलों की गंध है, हरसिंगार और ओरेंज जास्मिन साल में कई बार खिलते हैं यहाँ। आज फ्रिज पूरी तरह बिगड़ गया। मेकैनिक आया था, उसने बताया कैपिसिटर जल गया है। अब सोमवार को ही ठीक हो पाएगा या उसके बाद। आज यहाँ वोल्टेज फ़्लक्चुएट हुआ था, किसी ने लिखा उनकी माइक्रोवेव ओवन ही जल गई। कल नन्हा स्टेब्लाइजर लाने वाला है। सारी सब्ज़ियाँ निकाल कर बाहर रखीं, भीगे कपड़े से ढक दी हैं, जैसे बचपन में माँ को देखा था, उन दिनों फ्रिज कहाँ होते थे। आज एक चित्र बनाया, ज़्यादा अच्छा नहीं बना पर रंग भरने में आनंद आ रहा था। मन अब ख़ाली रहना सीख  रहा है। जब वे ट्रेन में बैठ ही चुके हैं तब दौड़ना कैसा ? जब वे कुछ हैं ही नहीं तो करना कैसा ? जब वही करण-करावणहार है तो जो उसे कराना होगा, करा लेगा। उन्हें तो यही याद रखना है, ‘न ऊधो का लेना ना माधव का देना’ बस समय बिताना है, जब साँसें चुक जायेंगी तो चले जाएँगे चुपचाप ! 


आज सुबह भी पहले योग-साधना की, फिर टहलने गये, चंद्रमा की कुछ तस्वीरें उतारीं। शाम को आश्रम गये, गुरु जी का उत्तर देने का तरीक़ा कितना अनुपम है। जीवन जैसा है वैसा ही स्वीकार करते जाना है, और मन को ख़ाली रखना है। बच्चों ने एक छोटा नया फ्रिज भिजवा दिया है, जिसे कल सुबह ऑन करना है। नन्हे ने एक नयी किताब दी है, ‘द ‘सरेंडर एक्सपेरिमेंट’ यह भी आत्मा में स्थित होकर जीने का रास्ता दिखाती है। जीवन में जो मिले उसे स्वीकार करने का रास्ता दिखाती है। छोटे मन की शिकायतों से मुक्त होकर रहने का अमृत मार्ग भी सुझाती है। शाम को सासु माँ की एक तस्वीर और कविता व्हाट्स एप पर भेजी, आज नौ वर्ष हो गये उन्हें इस दुनिया से विदा लिए। असमिया सखी का फ़ोन आया, वे लोग उनके यहाँ आने का कार्यक्रम बना रहे हैं। 


Thursday, June 25, 2015

जस्सी की दुनिया


पिछले दो दिन डायरी नहीं खोली, सुबह का वक्त नियमित कार्यों में बीत गया और सप्ताहांत होने के कारण दिन भर अलग तरह की व्यस्तता रही. आज ससुरजी वापस चले गये, नन्हा और जून उन्हें छोड़ने गये हैं तथा उनका पुराना फ्रिज ट्रेन में घर के लिए बुक करवाने भी, इसी महीने उन्होंने नया फ्रिज लिया है फ्रॉस्ट फ्री ! माँ उनके साथ रहेंगी. उनका प्रिय धारावाहिक टीवी पर आ रहा है, जैसे उसका प्रिय है जस्सी, जो अब रोचक मोड़ पर पहुंच चका है. नन्हा और दो हफ्ते साथ रहकर कॉलेज जाने वाला है. उसे एक अच्छे इंजीनियरिंग कालेज में दाखिला मिल गया है, जो जिसका हकदार होता है उसे ही वह वस्तु मिलती है. वैसे वह आत्मनिर्भर है, जीवन में तरक्की करेगा. दुनिया जिसे तरक्की मानती है वैसी तरक्की न भी करे पर वह खुद की तलाश में लगा है. इन्सान का जीवन खुदा ने इसलिए बनाया है कि वह खुद को ढूँढे, खुदी के पीछे ही खुदा है जो खुद से मिल गया वह खुदा को भी पा ही लेता है. जून उससे बेहद प्यार करते हैं, इसे मोह ही कहा जायेगा. वे उसे कभी किसी तकलीफ में नहीं देख सकते, लेकिन तकलीफ पाए बिना कोई नेमत भी नहीं मिलती है. कल शाम को घर में कितनी चहल-पहल थी. सभी पिताजी से मिलने आये थे, आज चुप्पी छायी है. जीवन इसी उतार-चढ़ाव का नाम है, उन्हें इसका साक्षी बनना है !

इस क्षण को देखे तो सिर में हल्का भारीपन है, वर्षा हो रही है, नन्हा सो रहा है, जून कुछ देर पूर्व घर आकर ऑफिस गये हैं, आज से पांच दिनों तक उनकी ट्रेनिंग है, दोपहर के भोजन के लिए घर नहीं आयेंगे. टीवी पर शहनाई वादन हो रहा है. नैनी कपड़े धो रही है. उसके सिर के भारीपन का एक कारण है मानसिक द्वंद्व, उसे तो द्वन्द्वातीत होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है फिर यह क्या ? यह है असहिशुष्णता, किसी अन्य को सहन न कर सकने की प्रवृत्ति, ‘प्रेम गली अति सांकरी जामे दो न समाय’ उसका मन एकाकी रहना चाहता है, विरक्त, दीन-दुनिया से परे, उसे किसी भी वस्तु की न तो कामना है न ही परवाह, पर समाज ऐसे व्यवहार को अच्छा नहीं मानता. एकाकी व्यक्ति से समाज को डर लगता है. वह उसे भीड़ में वापस लाना चाहता है. उसके मन का दर्द तन में भी प्रकट होने लगा है. मन में जो भी घटता है उसका प्रतिबिम्ब तन पर पड़ता ही है. मन की थोड़ी सी नकारात्मकता भी शरीर के स्रावों पर काफी प्रभाव डालती है. भीतर जो कुछ भी घटता है उसका कारण भी भीतर होता है. वह जो भी सोचती है, कहती है अथवा करती है, उसका परिणाम भीतर पड़ता है. इधर-उधर के दर्द सब उसी का परिणाम हैं !


Friday, June 13, 2014

सांध्य भ्रमण


आज शनिवार है, दस बजने में कुछ समय शेष है और यही है उसके लिखने का समय. कल शाम को एक सखी के साथ क्लब में ‘करीब’ देखी, आधी फिल्म देखकर जब वे लौट रहे थे तो उसने बताया कि उसे पैदल चलना और रास्ते में दिखने वाले फूल-पौधे, घास, पेड़ सब बहुत अच्छे लगते हैं, वह खुश थी पर घर जाकर उसने फोन किया, एक मित्र की कार का टायर पंक्चर होने से एक्सीडेंट हो गया, वे लम्बी यात्रा करके नई कार ला रहे थे, सभी सुरक्षित हैं पर गाड़ी को काफी क्षति पहुँची है. हर क्षण जीवन में कुछ न कुछ घटित होता रहता है लेकिन स्वप्न मानकर इन सब स्थितियों का सामना करने का माद्दा मानव में तभी आता है जब उसके विवेक का तीसरा नेत्र खुला हो, तब दुःख होता है जरूर पर कम होता है और उसका असर भी देर तक नहीं रहता.. उनके साथ घटी उस घटना को वे भी आज तक नहीं भूल तो नहीं पाए हैं पर उस वक्त भी उन्होंने समझ से काम लिया था और व्यर्थ की चर्चा से बच गये थे.

फिर एक अन्तराल, लिखने का अभ्यास बीच-बीच में छूट जाता है फिर एक दिन प्रेरणा होती है और कोरे पेज भरने लगते हैं. आज सुबह कई कार्यों के बारे में सोच रही थी जो करने हैं, कपड़ों की आलमारी सहेजना, फ्रिज की सफाई, बैठक की साज-सज्जा और रुमाल बनाने हैं जिनके लिए कपड़ा पिछले महीने लाई थी. माह का आज अंतिम दिन है, सुबह-सुबह छोटी बहन को जन्मदिन की बधाई दी. फोन से बात करके लगता है भेंट हो गयी, पत्रों का जमाना अब पीछे छूट गया, न किसी के पास पत्र लिखने का समय है न पढ़ने का. कल घर बात करके पता चला छोटे भाई को वायरल फीवर हो गया है. कल वे जून के जन्मदिन के लिए टीशर्ट खरीदने गये पर उन्हें कोई पसंद ही नहीं आई. आज सुबह जे कृष्णामूर्ति की किताब में पढ़ा, “जैसे-जैसे लोग बड़े होते जाते हैं, उनके मस्तिष्क मृत होते जाते हैं, वे संवेदनहीन बनते जाते हैं जिज्ञासा करना छोड़ देते हैं. शरीर की मृत्यु से पूर्व ही ज्यादातर मस्तिष्क की मृत्यु हो चुकी होती है.. ऐसा मन जो अपनी आदतों का गुलाम है, पलायनवादी है, संकुचित है मृतक के समान है. शब्द भी अपना असर न छोड़ें न ही यह दुनिया और उसके कार्यकलाप, न ही हर दिन को नया दिन मानने की और उत्साह पूर्वक उसका सामना करने की आकांक्षा, तब मानना पड़ेगा कि मन हार मान चुका है. उसे भी लगता है मानव वही है जो वह सोचता है. जो वह आज है वह उसके अतीत के विचारों का परिणम है और जो वह आज सोचती है वैसी ही भविष्य में होगी. परमात्मा ने उसे यह अवसर दिया है और उसे इसका सच्चाई और कृतज्ञता पूर्वक लाभ उठाना चाहिये.

अगस्त महीने का आरम्भ हुए तीन दिन हो गये हैं. But she could not write earlier. Today in the morning when she was reading “Ramayana” by R.K. Narayana based on Tamil Ramayana composed by “Kamban” , one known  lady,who is principal of a school, rang her and asked about joining her school, said that she had told her earlier about her wish to work in school. But Nuna said, no, it was she who had asked her. But now she has made her mind and is interested in teaching. Lady  was not at home, in fact she had not reached home when she rang her to tell her affirmation. She likes doing something more useful than sitting and passing time in this or that. Of course she will not leave music or reading books. Last evening they went to a birthday party, but the main topic of discussion was the train accident occurred on Monday night near Jalpaigudi between Avadh-assam and Brahma putra express. Many people died and many got injured. When she heard the news on TV, she was shocked and could forget it only while practicing music in her teacher’s place.


Tuesday, April 1, 2014

लैब में पानी


कल शाम ही वे वहाँ गये, उस आलीशान फ्रिज को देखने. जो बहुत सुंदर है और बहुत सारे काम भी करता है जैसे कि बर्फ फ्रीजर में जमने नहीं देता, खाने के पौष्टिक तत्व कायम रखता है, सब्जियां सूखी रहती हैं और नीचे वाली पानी की ट्रे आगे से ढकी है. पहले क्लब में कोरस का रिहर्सल भी हुआ, उसे असमिया गाना सीखने में थोड़ी भी परेशानी नहीं हो रही है., मुख्य गायिका इतनी मधुर आवाज में इतनी सहजता से गाती हैं कि कोई भी उनके साथ गा सकता है. आज मौसम सुबह से साफ और सूखा है, शाम को क्लब में फिल्म है और रिहर्सल भी.

कल उसे क्लब से आने में देर हो गयी जून को अच्छा नहीं लगा, नूना ने उसे एक पत्र लिखा, सारी बातें साफ हो गयीं. इतवार को वे मोरान गये थे, उस दिन मोरान के स्वच्छ गेस्ट हाउस में बैठे कई बातें मस्तिष्क में आ रही थीं घर को और सुंदर बनाने की. सबसे पहला चरण था सफाई और सबसे अंतिम भी सफाई. परिणाम, घर पहले से काफी सुंदर नजर आता है. नन्हे ने कोरस में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के नाम कम्प्यूटर पर टाइप कर के सेव कर दिए थे, जून उसे फ्लॉपी में ले गये हैं प्रिंट करने के लिए. कुछ देर पहले मुख्य गायिका का फोन आया, कहा, बहुत काम है, क्लब के कर्मचारी का भी फोन आया, उसे अपने साथ एक और आदमी चाहिए, बहुत काम है. पिछले कई दिनों से उसका हिंदी का कार्य भी आगे नहीं बढ़ा है, इस वर्ष तो कोर्स पूरा करना कठिन लगता है. अभी तक उसके पहले पेपर का जवाब भी नहीं आया है. कल नन्हे का जन्मदिन है इस बार वह पार्टी नहीं चाहता, बल्कि बचत करना चाहता है ताकि बाद में CD खरीद सके.

पिछले तीन दिन वह व्यस्त थी, शनि को सुबह, दोपहर, शाम तीनों पहर क्लब गयी. कोरस  कम्पीटिशन ‘स्वरांजलि’ सम्पन्न हो गया. एक सदस्या ने उसे पहनने के लिए सुंदर मेखला चादर दिया था, कई लोगों ने तारीफ की. प्रेसीडेंट ने भी. सब कुछ स्वप्न सा अलग रहा था. जैसे वह  कोई और थी. सारा दृश्य किसी काल्पनिक कहानी का भाग था. क्लब की लाइब्रेरी से कुछ किताबें भी लायी है बहुत दिनों बाद, एक परिचिता ने एक किताब का सुझाव दिया था, Kane and Able by Jeffrey Archer, जरूर अच्छी होगी. नन्हा अपनी छुट्टियाँ अपनी तरह से बिता रहा है, प्रोजेक्ट कार्य धीरे-धीरे चल रहा है. कल उन्हें ‘देशराग’ पर आधारित गाने की धुन सिखाई गयी, इस हफ्ते वह ठीक से अभ्यास करके जाएगी. कल प्रवीन सुल्ताना को कहते सुना ‘रियाज करो और राज करो’, सो अगर उसे गाना सीखना है तो अभ्यास नियमित ही करना होगा !

कल रात दो बजे होंगे जब जून के दफ्तर की सिक्युरिटी से फोन आया, कि एक लैब में, जो उनके ही नियन्त्रण में है, पानी का एक नल खुला रह गया है. उस वक्त तो वह वहाँ नहीं गये पर सुबह पौ फटते ही गये तो पता चला कि एक पाइप ही फट गयी है जिसके कारण पानी पूरी तेजी से छत से टकरा कर सारे इंस्ट्रूमेंट्स व पंखे, लाइटस को भिगोता हुआ निचे गिर रहा है. एक घंटा तो उस वाल्व को ढूंढने में लग गया जिससे पानी का आना बंद हो सकता था. जून को घर आने में छह बज गये और फिर फील्ड ड्यूटी थी सो लंच टाइम पर घर नहीं आ सके. उसे छोटी बहन की याद हो आयी जिसकी पांच-छह बार नाईट ड्यूटी लग चुकी है. उसको पत्र लिखा है पर पता नहीं पोस्टल स्ट्राइक कब खत्म होगी.