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Tuesday, April 1, 2014

लैब में पानी


कल शाम ही वे वहाँ गये, उस आलीशान फ्रिज को देखने. जो बहुत सुंदर है और बहुत सारे काम भी करता है जैसे कि बर्फ फ्रीजर में जमने नहीं देता, खाने के पौष्टिक तत्व कायम रखता है, सब्जियां सूखी रहती हैं और नीचे वाली पानी की ट्रे आगे से ढकी है. पहले क्लब में कोरस का रिहर्सल भी हुआ, उसे असमिया गाना सीखने में थोड़ी भी परेशानी नहीं हो रही है., मुख्य गायिका इतनी मधुर आवाज में इतनी सहजता से गाती हैं कि कोई भी उनके साथ गा सकता है. आज मौसम सुबह से साफ और सूखा है, शाम को क्लब में फिल्म है और रिहर्सल भी.

कल उसे क्लब से आने में देर हो गयी जून को अच्छा नहीं लगा, नूना ने उसे एक पत्र लिखा, सारी बातें साफ हो गयीं. इतवार को वे मोरान गये थे, उस दिन मोरान के स्वच्छ गेस्ट हाउस में बैठे कई बातें मस्तिष्क में आ रही थीं घर को और सुंदर बनाने की. सबसे पहला चरण था सफाई और सबसे अंतिम भी सफाई. परिणाम, घर पहले से काफी सुंदर नजर आता है. नन्हे ने कोरस में भाग लेने वाले प्रतिभागियों के नाम कम्प्यूटर पर टाइप कर के सेव कर दिए थे, जून उसे फ्लॉपी में ले गये हैं प्रिंट करने के लिए. कुछ देर पहले मुख्य गायिका का फोन आया, कहा, बहुत काम है, क्लब के कर्मचारी का भी फोन आया, उसे अपने साथ एक और आदमी चाहिए, बहुत काम है. पिछले कई दिनों से उसका हिंदी का कार्य भी आगे नहीं बढ़ा है, इस वर्ष तो कोर्स पूरा करना कठिन लगता है. अभी तक उसके पहले पेपर का जवाब भी नहीं आया है. कल नन्हे का जन्मदिन है इस बार वह पार्टी नहीं चाहता, बल्कि बचत करना चाहता है ताकि बाद में CD खरीद सके.

पिछले तीन दिन वह व्यस्त थी, शनि को सुबह, दोपहर, शाम तीनों पहर क्लब गयी. कोरस  कम्पीटिशन ‘स्वरांजलि’ सम्पन्न हो गया. एक सदस्या ने उसे पहनने के लिए सुंदर मेखला चादर दिया था, कई लोगों ने तारीफ की. प्रेसीडेंट ने भी. सब कुछ स्वप्न सा अलग रहा था. जैसे वह  कोई और थी. सारा दृश्य किसी काल्पनिक कहानी का भाग था. क्लब की लाइब्रेरी से कुछ किताबें भी लायी है बहुत दिनों बाद, एक परिचिता ने एक किताब का सुझाव दिया था, Kane and Able by Jeffrey Archer, जरूर अच्छी होगी. नन्हा अपनी छुट्टियाँ अपनी तरह से बिता रहा है, प्रोजेक्ट कार्य धीरे-धीरे चल रहा है. कल उन्हें ‘देशराग’ पर आधारित गाने की धुन सिखाई गयी, इस हफ्ते वह ठीक से अभ्यास करके जाएगी. कल प्रवीन सुल्ताना को कहते सुना ‘रियाज करो और राज करो’, सो अगर उसे गाना सीखना है तो अभ्यास नियमित ही करना होगा !

कल रात दो बजे होंगे जब जून के दफ्तर की सिक्युरिटी से फोन आया, कि एक लैब में, जो उनके ही नियन्त्रण में है, पानी का एक नल खुला रह गया है. उस वक्त तो वह वहाँ नहीं गये पर सुबह पौ फटते ही गये तो पता चला कि एक पाइप ही फट गयी है जिसके कारण पानी पूरी तेजी से छत से टकरा कर सारे इंस्ट्रूमेंट्स व पंखे, लाइटस को भिगोता हुआ निचे गिर रहा है. एक घंटा तो उस वाल्व को ढूंढने में लग गया जिससे पानी का आना बंद हो सकता था. जून को घर आने में छह बज गये और फिर फील्ड ड्यूटी थी सो लंच टाइम पर घर नहीं आ सके. उसे छोटी बहन की याद हो आयी जिसकी पांच-छह बार नाईट ड्यूटी लग चुकी है. उसको पत्र लिखा है पर पता नहीं पोस्टल स्ट्राइक कब खत्म होगी.    





Monday, August 20, 2012

चल कहीं दूर निकल जाएँ



आज भगवद् गीता का दूसरा अध्याय पढ़ा, ऐसे लगा जैसे पहली बार पढ़ रही है. एक-एक श्लोक अनमोल हीरे की तरह है, सचमुच गीता भटके हुए को राह दिखाने वाली है. उसने सोचा कि भविष्य में सदा इसका नियमित पाठ करेगी. सवा आठ बजे हैं, सोनू के उठने का समय. कल ‘एक बार फिर’ देखी, कुछ खास नहीं लगी, शायद बड़े स्क्रीन पर ज्यादा सुंदर लगती खासतौर पर लन्दन के दृश्य. आज ईदुलफितरहै. जून के दफ्तर में अवकाश है. सुबह उसने रसोईघर साफ किया, जून ने सारे घर के जाले साफ किये. मौसम में वही ठंडक है और आसमान में बादल. कल शाम वे इतवार की फिल्म देख रहे थे कि एक परिचित दम्पति मिलने आये, एक बार पहले भी वे रविवार को आये थे, वे लोग स्वयं कभी किसी के यहाँ इतवार शाम नहीं जाते. वह लिख रही थी कि नन्हा बार-बार उसका पेन  लेने की कोशिश करने लगा है और गोद में बैठना चाहता है, जब वह पाठ करती है तो किताब उठाता है, कभी हाथ जोड़ कर प्रणाम करता है. उसकी बांह पर मच्छर ने काट लिया है, कोमल त्वचा पर निशान उभर आया है.

आज डिब्रूगढ़ बंद है, जून घर में हैं, सुबह के साढ़े नौ बजे हैं, सभी का स्नान, नाश्ता हो गया है और अब सभी आराम से बैठे हैं. कल वे जून के बॉस के घर गए चाय पर गए थे. उनका विशाल व भव्य बरामदा व बैठक देखकर तो वह मंत्रमुग्ध रह गयी. इतना साफ-सुथरा आलीशान लग रहा था और शांत व शालीन भी. एक एक वस्तु चमक रही थी. उन्होंने भी अपनी बैठक की साज-सज्जा में कुछ परिवर्तन किया है, आँखों को भला लग रहा है. अपने घर को कैसे सुंदर बनाएँ यही सोच रहे हैं कल रात से. उसकी असमिया मित्र ने आज बहुत सुंदर पारंपरिक पोषाक पहनी थी, मेखला-चादर, काले कपड़े पर लाल व हरे रंग से कढ़ाई की हुई थी. उसने सोचा वह भी उससे सीखेगी और अपना एक कुरता काढ़ेगी.

कल रात पता नहीं जून को क्या सूझा कि अपनी मूँछें ही साफ कर दीं, अच्छा लग रहा है उसका चेहरा ऐसे भी, अपनी उम्र से कम का मालूम होता है. आज सम्भवतः नन्हें के जन्मदिन के फोटो मिल जाएँ. कल शाम वह जून के साथ सब्जी व चीनी लेने डेली मार्केट गयी थी, चीनी नौ रूपये किलो हो गयी है. कल उनकी लेन की एक महिला ने पत्रिका क्लब का सदस्य बनने से यह कहकर इंकार कर दिया कि उनके पास अखबार तक पढ़ने का समय नहीं है पत्रिका तो दूर की बात है, नूना को बहुत आश्चर्य हुआ, वह एक और महिला से मिली, सुख कर कांटा हो जाना किसे कहते हैं यह उन्हें देखकर जाना, बेहद दुबली हो गयी हैं कुछ ही महीनों में, पता नहीं क्या दुःख है या क्या रोग है जो उन्हें खा रहा है. मौसम हसीन है ऐसे में मन होता है कि दूर तक निकल जाएँ पर गृहस्थी के कामों में उलझे वे कहाँ जा सकते हैं.