Showing posts with label नदी. Show all posts
Showing posts with label नदी. Show all posts

Wednesday, May 5, 2021

अंजीर का पेड़

सुबह पाँच बजे के कुछ देर बाद उठे वे। अंगुली में दर्द अब नहीं है। आज सिरके व पानी का इलाज किया, तीन बार, काफी असरकारक है। सूजन अभी भी है, दवा साथ में रखनी होगी जब परसों वे ‘काबिनी वन्‍य-जीव अभयारण्य’ के लिए रवाना होंगे। आज एनी का दूसरा भाग देखा, वह कविता सुनाकर अपनी टिकट के पैसे एकत्र करती है, मारिला उसकी कीमत जानती है तभी उसे वापस बुला लेती है। गाँव के दृश्य भी बहुत सुंदर हैं पर लोगों के दिल कितने कठोर हैं, कैसे अपशब्द वे उसके लिए बोलते हैं। दलितों ने न जाने सदियों तक ऐसे ही कटु वाक्य अपने लिए सुने होंगे भारत  में भी, आज भी उन्हें नीच जाति का कहकर अपमानित किया जाता है, उसे आश्चर्य होता है, ब्राह्मण स्वयं को वेदों का ज्ञाता मानते हुए भी इतना भेदभाव कैसे सहन करते रहे, जबकि वेदों में लिखा है, सभी में एक ही चेतन सत्ता है। आज सुडोकू  शीघ्र हल कर पाई, अभ्यास से कौन सा काम नहीं हो पाता ? परमात्मा की स्मृति जीवन को कैसी सुवास से भर देती है, आश्चर्य होता है कि जिन्हें इसकी खबर नहीं वे कैसे रहते होंगे ! 


आज नैनी ने गमले से कोई स्थानीय साग तोड़ कर दिया, जिसके बीज उसने पालक के बीजों के साथ ही डाले थे. पालक के पत्ते भी अगले हफ्ते तक तोड़ने लायक हो जायेंगे. जून कमरे में तथा सीढ़ियों पर रखे गमलों को बाहर गैरेज में रख रहे हैं, अगले चार दिन वे घर से बाहर रहेंगे तो बंद घर में उन्हें धूप-हवा-पानी नहीं मिल पायेगा. पिटूनिया के नन्हे पौधे भी निकल आये हैं, नैनी को दिन में एक बार आकर पानी डालने को को कहा  है. एनी का तीसरा भाग देखा, स्कूल में उसे कितनी दिक्कत होती है, अब वह पेड़ों-फूलों के साथ समय बिताती है, किताबें पढ़ती है, पर एक दिन उसका झूठ पकड़ा जायेगा. आज दो किताबें आयीं, ओल्ड पाथ विथ क्लाउड्स और द विज़डम ऑफ़ लाओत्से, दोनों ही यात्रा पर साथ ले जाएगी. बुद्ध के जीवन पर आधारित पहली पुस्तक अवश्य ही बहुत अच्छी होगी. लाओत्से का ज्ञान तो अनुपम है ही. आज मंझले भाई-भाभी से बात की, कल वे लोग पिताजी के पास जा रहे हैं, उनका दामाद भी साथ जा रहा है, उनसे मिल लेगा. आज सुबह पुराने हिंदी गीत सुने और शाम को शिव भजन, संगीत अंतर्मन को कितना सुकून देता है, यह जानते हुए भी वह केवल संगीत सुनने के लिए समय बहुत कम ही निकालती है. 


आज सुबह लगभग नौ बजे वे घर से चले थे, दोपहर एक बजे ‘रेड अर्थ रिजॉर्ट’ पहुँच गए. रास्ता बहुत अच्छा था, हरियाली, जंगल, खेत, झीलें और कर्नाटक के गावों से गुजरते हुए, गीत सुनते हुए आराम से कट गया. आते ही स्वादिष्ट भोजन मिल गया. उनकी कॉटेज की छत झोंपड़ी जैसी है भीतर से चटाई, बाहर से पुआल की.बाहर छोटा सा लॉन है तथा एक जाकुजि भी। कमरे में सभी आधुनिक सुविधाएँ हैं. लकड़ी का पुराने ढंग का फर्नीचर है, पीछे बालकनी है, जिसमें दो चमड़े की कुर्सियां रखी हुई हैं. सामने जंगल नुमा फलों का बगीचा है और कुछ ही दूरी पर कपिला नदी है, जिसे काबिनी नदी भी कहते हैं। एक बड़ा सा अंजीर का पेड़ भी है जिसपर सैकड़ों अंजीर के फल लगे हैं। उन्होंने एक घंटा विश्राम किया फिर नदी तक गए। तट पर हरी घास थी, जो दूर तक फैला है।  नन्हा व जून दो साइकिलें लेकर आए, बारी-बारी से सभी ने साइकिल चलायी। नदी की लहरों को देखते रहे जो सागर का सा आभास दे रही थीं। कुछ ही दूर पर बाँध बनाया गया है, इसलिए पानी काफी है और लहरें भी। नदी किनारे एक रेस्तरां है जिसके सामने पेड़ों से लटके कई झूले लगे हैं जिन्हें हेमॉक कहते हैं शायद। शाम की चाय उन्होंने वहीं बैठकर पी। कई तरह के पक्षी भी नदी के जल में मछलियाँ पकड़ने आए थे। हवा ठंडी थी, सो अंधेरा होते ही वे कमरे में आ गए। रात्रि आठ बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बोन फायर भी है। 


आज सुबह वे इस सुंदर स्थान में बसने वाले पक्षियों को देखने तथा प्राकृतिक भ्रमण के लिए पूरे समूह के साथ गए। पथ प्रदर्शक को स्थानीय पक्षियों के बारे में जो भी जानकारी थी, सभी के साथ बाँट रहा था। नन्हे ने अपने कैमरे से कई सुंदर पक्षियों की तस्वीरें उतारीं। रंग-बिरंगे पंछियों और नदी के स्वच्छ जल में  सूर्योदय के सुंदर दृश्य का प्रतिबिंब देखकर सभी प्रसन्न थे। वापस आकर नाश्ता किया फिर वहाँ से एक घंटे की दूरी पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर देखने गए। पुजारी राघवन एक किसान है और मंदिर में पूजा का काम भी करता है। उसने सबका नाम पूछा, राशि भी, और पूरे भाव से पूजा करवायी। मंदिर का इतिहास बताया। ढाई हजार साल पुराना शिवलिंग है यहाँ, नंदी भी सुंदर काले पत्थर का है। वापस आकर नन्हा व सोनू वापस चले गए, आठ बजे तक घर पहुँच जाएंगे। दो दिन बाद उन्हें लेने आएंगे। शाम को वे पुन नदी के तट पर गए, हवा ठंडी थी और आकाश पर बादल थे। एक घंटा टहल कर वे वापस लौट आए। आज के सांस्कृतिक कार्यक्रम में आदिवासी लोकनृत्य था। श्वेत वस्त्र पहने कई युवा व प्रौढ़ कलाकार बड़ी दक्षता के साथ विभिन्न स्वर निकालते हुए नृत्य कर रहे थे। दो व्यक्ति ढोल बजा रहे थे। नया साल आने में दो दिन शेष हैं, जिसमने उन्हें कर्नाटक के वन्य जीवन को निकट से देखने का अवसर मिलेगा। 

 

Tuesday, June 23, 2020

डांगरिया बाबा का मंदिर



शाम के सवा छह बजे हैं, वे पासीघाट के सर्किट हाउस में के अति विशेष अतिथिगृह में हैं. पासीघाट अरुणाचल का सबसे पुराना शहर है, 1911 में इसका नामकरण हुआ था. खुला-खुला सा वातावरण है, जनसंख्या कम है. सुबह आठ बजे एक अन्य परिवार के साथ सदिया-धौला पुल से नदी पार कर दोपहर को ही पहुँचे  हैं. रास्ते में एक शांत जगह पर रुककर साथ लाया पाथेय ग्रहण किया. सन्तरे के बगीचे देखे, ढेर सारी तस्वीरें उतारीं। नदी, पुल, पत्थर और सूर्यास्त के सुंदर दृश्य तथा पहाड़ों, बादलों और आकाश की तस्वीरें ! वे लोग सियांग नदी के पुल पर सूर्यास्त देखने गए फिर नीचे उतर कर पत्थरों पर चलते हुए नदी तक भी. हवा शीतल थी और इतनी शुद्ध कि जैसे शुद्ध प्राणवायु ही नासिक पुटों में भर रहे हों.  रंग-बिरंगे सुडौल हर आकार के पत्थर नदी तट को बेहद आकर्षक बना रहे थे. सियांग नदी ही आगे चलकर ब्रह्मपुत्र कहलाती है. उनके कमरे की बालकनी से नील पर्वत दिखाई देते हैं. 

सुबह जल्दी उठकर बालकनी से सूर्योदय देखा पर एक बड़े वृक्ष की शाखाएं उसे छिपा रही थीं, नीचे उतर कर गए तो स्पष्ट दिखा. पूरे भारत में अरुणाचल में ही सबसे पहले सूर्य के दर्शन होते हैं. कल शाम वे डांगरिया बाबा व बाला जी के मंदिर देखने गए थे. मंदिर के प्रांगण विशाल थे, वहाँ आरती और भजन चल रहे थे. दशकों पहले बिहार से कुछ लोग यहाँ आकर बसे थे, उन्होंने ही यह बनाये होंगे. अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय लोग भी अच्छी हिंदी बोल लेते हैं. अभी कुछ देर बाद उन्हें वापसी की यात्रा के लिए निकलना है. 

इस वर्ष में पहली बार दोपहर के समय बगीचे में  झूले पर बैठकर लिख रही है. लॉन की घास ठंड के कारण हल्की भूरी नजर आ रही है. आंवले के पेड़ की पत्तियां झर गयी हैं, नीचे छोटे-छोटे आंवले भी गिरे हैं. जगह-जगह मिट्टी के ढेले घोंघों ने निकाल दिए हैं. हल्की हवा बह रही है और रह-रह कर पंछियों के स्वर वातावरण की निस्तब्धता को भंग कर रहे हैं. एक समरसता का अनुभव जैसे सृष्टि कर रही है. कल ही वे पासीघाट से लौटे. एक दिन की छोटी सी यात्रा ने कितने अनुभव कराये. सदिया और बोगीबिल दोनों पुलों को देखा, लोगों की भीड़ थी बोगिबील पर. मकर संक्रांति के कारण लोग घरों से बाहर निकले हुए थे.नदियों में पानी कम था, वे शांत लग रही थीं. पैंगिंग में जहाँ वे हैंगिंग ब्रिज देखने गए, वहाँ सियांग नदी तीव्र गति से बह रही थी. पुल को पार करते समय वह नीचे नदी को तभी देख पायी जब स्थिर खड़ी थी. चलते समय पानी की ओर देखने पर भीतर भय जैसा  कुछ लगता था. आज सुबह टाइनी टोट्स स्कूल का पुराना फर्नीचर मृणाल ज्योति भिजवाने का प्रबन्ध किया. जब तक यहाँ है स्कूल की खोज खबर लेते रहनी है. 


उस पुरानी डायरी में गणतन्त्र दिवस का जिक्र था. देश का सबसे प्रिय दिन रिपब्लिक डे ! माँ ने बताया जब वह छोटी थीं तो देशवासी जो उस समय गुलाम थे, सुख की साँस नहीं ले पाते थे. वे सरकारी नौकरी नहीं पा सकते थे, जो भी पा लेते थे उन्हें अपने भाइयों पर जुल्म करने पड़ते थे. कैसी भयानक होती थी वह जिंदगी. आज आजाद भारतवासी अपने गांवों, शहरों अपनी मिट्टी में घूम सकते हैं, निर्बन्ध, मुक्त ! क्या वे किसी दूसरे देश में इस तरह रह सकते हैं, आ जा सकते हैं, क्या वे उनके लिए अजनबी नहीं रहेंगे ? अपने देश में ही वह सब कुछ किया जा सकता है जो भी कोई करना चाहता है. लड़ाई कितनी बुरी है दुनिया में, बदतर चीजों में से बदतर लड़ाई, उसे किसी दिन फ्रंट पर जाना पड़े तो... 


Thursday, May 17, 2018

गुलाब की टहनियाँ



सुबह एक अजीब सा स्वप्न देखा, वह एक नदी के तट पर है, उस पार से एक छोटी सी नौका में बैठकर एक नन्हा सा बच्चा उसके पास आता है. उसके हाथों में पीले-सफेद फूलों की एक सूखी माला है, जो वह उसे देता है. वह बदले में उसे कुछ देने के लिए, उसे वहीं छोड़कर भीतर आती है, फूल के बिना गुलाब की टहनियाँ हैं, कांटों से बचाने के लिए वह केवल पत्तियाँ तोड़ती है कि बाहर से किसी महिला के रोने की आवाज आती है, मेरा बच्चा पानी में डूब रहा है, उसे बचाओ, फिर आवाज आती है, डूब गया. वह घर के भीतर से ही समझ रही है कि महिला उसके घर की तरफ हिकारत भरी नजर से देख रही है, तभी नींद खुल जाती है. यह दुःस्वप्न अवश्य ही आत्मा ने जगाने के लिए गढ़ा होगा. आत्मा कितनी विचित्र है, कितनी मनमोहिनी ! सुबह वह स्कूल गयी थी, बच्चों व अध्यापिकाओं के साथ ध्यान किया. दोपहर को काफी दिन बाद ब्लॉग पर लिखा. इस समय रात्रि के दस बजने को हैं. पूरे गर्जन-तर्जन के साथ बाहर वर्षा हो रही है. शाम को देर तक मालिन ने बगीचे में पानी डाला था, और अब बादल भेज रहे हैं. मालिन का बेटा जो कल अस्पताल में भर्ती था आज खेल रहा था. जून कल देहली गये हैं, परसों लौटेंगे. देहली का मकान अगले महीने बिक जायेगा. सप्ताहांत में उन्हें बंगलूरू जाना है.

पौने छह बजे हैं शाम के, कुछ देर में योग कक्षा आरम्भ होगी और एक घंटा कैसे बीत जायेगा पता ही नहीं चलेगा. सुबह एक स्वप्न देख रही थी कि मध्य में ही नींद खुल गयी, कोई कह रहा था, यह तो स्वप्न है, कितना आनंद आया. ऐसे ही एक दिन नींद में भी पता चल जायेगा कि यह तो नींद है और तब स्वप्न आने ही समाप्त हो जायेंगे. दिवास्वप्न तो अब बहुत कम हो गये हैं, हर पल भीतर जागरण की एक धारा बहती रहे, यह प्रयास रहता है. आज क्लब की एक डाक्टर सदस्या से मिलने उनके घर गयी, अगले महीने वह सदा के लिए यहाँ से जा रही हैं. उन्होंने बताया, डिब्रूगढ़ में जन्मी थीं. वे लोग चार भाई तथा तीन बहने हैं, सभी पढ़े-लिखे तथा उच्च पदों पर हैं. पिता चाय बागान में फैक्ट्री प्रमुख थे. उन्होंने आसाम मेडिकल कालेज से डाक्टरी की पढ़ाई की, फिर एपीएससी की परीक्षा पास करके सरकारी नौकरी में आ गयीं. वर्तमान में वह तिनसुकिया में स्वास्थ्य विभाग में डिस्ट्रिक्ट प्रमुख हैं. स्कूल के समय से ही उन्हें पेन फ्रेंड बनाने का शौक था, पतिदेव पहले पेन फ्रेंड बने, फिर फ्रेंड और अंत में हसबेंड. अब वे समाजसेवा से जुड़ना चाहती हैं. चाय बागान के मजदूरों काम लिए कुछ काम करना चाहती हैं. उसने इन सभी बातों का जिक्र करते हुए उनके लिए एक कविता लिखी, ताकि क्लब की अन्य सदस्याओं को भी उनके कर्मशील जीवन के बारे में जानकारी हो. समाज को ऐसी महिलाओं की बहुत आवश्यकता है.

Friday, September 9, 2016

सागर में नदियाँ


आज उसे अनुभव हुआ भीतर एक ज्वाला है जिसमें निरंतर हवन चल रहा है, कामनाओं की समिधा पड़ रही है, विचारों का धूना जल रहा है और हृदय ही वह हवन कुंड है जिसमें से प्रेम की सुगंधि चारों ओर फ़ैल रही है. भगवद गीता में कृष्ण कहते हैं ज्ञानी का हृदय सागर की तरह होता है, जिसमें चारों और से नदियाँ आकर गिरती हैं. वह अपनी मर्यादा नहीं छोड़ता. सत्व, रज और तम तीनों गुण उसके उर में समा जाते हैं. प्रकाश, प्रवृत्ति और मोह तीनों का आगमन उसे मोहित नहीं करता. उसका हृदय उस भूमि की तरह होता है जहाँ सारा कूड़ा-करकट आकर खाद बन जाता है और फूल उगाता है..सुगन्धि फैलाता है, उस आकाश की तरह होता है जहाँ बादल, कुहरा, गर्जन-तर्जन, बिजली, वर्षा, ओले, सूरज सब होते हैं पर वह ज्यों का त्यों रहता है..तपता नहीं, गलता नहीं..अग्नि की तरह होता है जिसमें सारे विकार आकर जल जाते हैं और..उस जल की तरह जो सब कुछ पावन कर देता है..आज जून आने वाले हैं परसों छुट्टी है कृष्ण जन्माष्टमी की..पंजाबी दीदी को कविता भेजेगी !

कल शाम और फिर रात्रि से ही कुछ छूट गया सा लगता है, जो खो जाये वह था ही नहीं, पर जो एक बार मिले और कभी न खोये ऐसा भी कहीं होता है यह तो अनंत यात्रा है और अनंत अनुभवों से भरी. प्रकाश, प्रवृत्ति और और मोह तीनों के अनुभव होते ही रहेंगे. कल शाम वे मार्केट गये, छोटी ननद ने जो सूट भेजा, उसे सिलने दिया. अब उसकी कलम आगे बढने से इंकार कर रही है. संस्कार कितने गहरे होते हैं और मन कितना बलशाली..बुद्धि की, ज्ञान की, विवेक की वहाँ एक नहीं चलती. इस संस्कार को मिटना ही होगा, वह यदि इस क्षण निर्णय कर ले तो कौन है जो रोकेगा. उसका ही अंतर्मन, अवचेतन मन, अचेतन मन, पूर्व जन्म की स्मृतियाँ..लेकिन आत्मा ही एकमात्र सत्य है, ये सब अनित्य हैं, आत्मा के सातों गुणों को भीतर धारण करे तो सारा नकार क्षण भर में बह जायेगा. सद्गुरू की वाणी को याद करे तो जो वह हैं वही वह है, वही यह सारा जगत है, एक ही तत्व से यह सारा संसार बना है, प्रेम का जितना विस्तार हो उतना अच्छा है..सारा जगत उनका अपना हो जाये, प्रेम ही आत्मा में ले जाता है, प्रेम ही बहता हुआ दरिया है..प्रेम को रोका तो वह सड़ेगा...दुर्गन्ध देगा. सहज होकर सभी को स्वीकारना है तभी मुक्ति है. स्वयं को मुक्त करके वे औरों को भी मुक्त कर देते हैं. स्वयं को बाँध कर रोककर वे दूसरों के लिए भी बाधा खड़ी कर देते हैं. दूसरे को अपना सा जानकर कभी उनके मार्ग में बाधा न बनें, यह भी सेवा है..जियो और जीने दो’ का सिद्धांत यही तो कहता है. उनके कारण किसी का विकास न रुके, सहज ही ईश्वर का प्रेम उनके भीतर से बहता रहे..बहता रहे..  

आज दो दिनों बाद डायरी खोली है, परमात्मा अपनी उपस्थिति हर क्षण ही प्रकट करता है, पर वे सोये रहते हैं तो उसे देख नहीं पाते, वे यानि उनका विवेक...विवेक जगता है तो आत्मा का अनुभव करता है..जिसका अर्थ है जीवन के हर क्षेत्र में सजगता...हर श्वास में सजगता, हर पल जागरूक होकर जीना..वर्ष का नौंवा महीना शुरू हो चुका है. इस वर्ष के शेष रह गये कार्यों को करने का अभी भी वक्त है. परिवार में सभी के साथ संबंध मधुर हों..समाज में जो प्रतिबद्धताएं हैं वे निभती रहें और मन सदा समता में रहे. गुरूजी को आज यू ट्यूब पर सुना, उनेक कितने रूप हैं. ‘हरि अनंत, हरि कथा अनंता’...एक व्यक्ति कितना विकास कर सकता है हजारों, लाखों ही नहीं यहाँ तो करोड़ों व्यक्ति उनसे सीख रहे हैं...परमात्मा उनके द्वारा स्वयं को व्यक्त कर रहा है. उन्हें स्वयं को हटाकर परमात्मा के लिए मार्ग छोड़ देना है...वह अनंत है..ज्ञान स्वरूप है..वह जीवन को सुगंध से भर देना चाहता है..प्रेम, शांति, ज्ञान और आनंद की सुगंध से..



Wednesday, July 29, 2015

नदी किनारे पिकनिक



सत्संग में ही मुक्ति है, सत्संग अर्थात परमात्मा का संग..वही मुक्त करता है. सारा दुःख दो के कारण है, परमात्मा एक है..उसमें टिकने से ही तृप्ति मिल सकती है. जगत के सारे कार्य तब होते हैं, उन्हें करना नहीं होता. जीवन को ठीक से जीने के लिए, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भी उन्हें अपने भीतर की शक्ति को जगाना आवश्यक है, यह शक्ति बिना भीतर गये मिलती नहीं. उसने नये वर्ष के लिए कुछ निर्णय अपने आप के लिए लिए हैं. नये वर्ष में कोई भी व्यक्तिगत कविता नहीं लिखेगी, उसके गीत अब परमपिता परमात्मा तथा सद्गुरु के लिए ही होंगे. नये वर्ष में  वह अपनी  तीसरी पुस्तक को भी छपने के लिए भेजेगी. इस बार वाराणसी में छपवानी है, जिसे पिताजी को समर्पित करना है. अमावस तथा पूर्णिमा की जगह अबसे एकादशी का व्रत रखना है. नया वर्ष उसके लिए परमात्मा की निकटता का वर्ष तो होगा ही पर सेवा का वर्ष भी होगा. हरि कि सेवा तभी होगी जब उसके जगत कि सेवा कोई करता है. आत्मा के लिए कुछ भी नहीं करना है, वह स्वयं में पूर्ण है, कर्म तो संसार के लिए ही हैं, स्वार्थ पूर्ण कर्म ही तो बांधते हैं.


कल वे पिकनिक पर गये. धूप और पानी का यानि अनल और नीर का संग बहुत भला था. पानी में ठंडक थी, नीचे बालू थी, नदी गहरी नहीं थी. वे काफी दूर तक आगे बढ़ते ही गये. नदी किनारे आग  जलाकर भोजन भी बनाया. कोई फ़िक्र नहीं, कोई चिंता नहीं, वे बस थे..प्रकृति का अंग बनकर उसके साथ जीते हुए. कल फिर उन्हें पिकनिक पर जाना है, दो दिनों के लिए पुनः प्रकृति के साथ जीना है. जून का मन नहीं है, पर वे क्यों घबरा रहे है इसका कारण उन्हें स्वयं भी अस्पष्ट है. नन्हा पूर्णतया निश्चिंत है, वह अपने मित्र को भी साथ ले जाना चाहता है. आज नैनी को काम करने का विशेष उत्साह जगा है, वह लॉन की सफाई पूरे मन से कर रही है. वे सभी अपना-अपना निर्धारित काम दिल से करें तो काम अच्छा होगा ही. अभी-अभी उसने एक केक बनाया पर निकालते समय शीघ्रता कर दी जिससे वह टूट गया, यदि थोड़ी समझदारी से काम लिया होता तो पहले की तरह साबुत बनता. कल की थोड़ी सी थकान का अनुभव हो रहा था, सो वह सो गयी लेकिन उतनी ही देर में स्वप्नों की दुनिया शुरू हो गयी. गोहाटी में अकेले सफर कर रही है. कुछ थोड़े से पैसे पास में हैं. रास्तों का भी ज्ञान नहीं है. एक व्यक्ति कुछ पैसे मांगता है..न जाने कैसा है मन..कहाँ-कहाँ की सोचता रहता है, उधेड़बुन में लगा रहता है. जागृति ही उचित है. 

Friday, August 1, 2014

प्रकृति का वैभव



William Bennett is absolutely right when he says that there are no menial jobs, only menial attitudes. Today in the morning itself when mind should be calm and quite, she accused jun for his poor GK, he did not know that yes minister was a serial not a talk show. Then he did not go to see off Nanha because he had no time and necessity to say bye, she should be more patient with them because she is doing practice.

मैं मेरे का भाव उत्पन्न करने वाली, राग-द्वेष पैदा करने वाली, एक दायरे में सीमित करने वाली  तथा अखंड तत्व के प्रति उदासीन रहने वाली चार तरह की बुद्धियाँ अनर्थकारी हैं. ऐसी जो ईश्वरीय ऐश्वर्य का अनुसन्धान करने वाली हो, प्रकृति के रहस्यों को समझने वाली उसको सराहने वाली हो, अर्थकारिणी है. ईश्वर का सौन्दर्य चारों ओर बिखरा पड़ा है. ब्रह्मांड के असंख्य नक्षत्रों, ग्रहों, सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी और पृथ्वी पर बर्फीले पर्वत, नीला सागर, हरियाली, विशाल वन संपदा उसके ऐश्वर्य के रूप में हमें प्राप्त है और उसका वैभव मीठे फलों, पंछियों की बोली और जीवन के पोषक तत्वों के रूप में हमें प्राप्त है. बाबाजी ने यह बताकर आज एक मुल्ला और सिन्धी की कथा भी बतायी, मुल्ला ने कहा, खुदा की खुदाई कोई नहीं जानता, इन्सान के मन की बात कोई नहीं जानता और कयामत का दिन आने वाला है. पर सिन्धी के पास दूसरी तरह की बुद्धि थी, वह नदी दिखाकर खुदा की खुदाई दिखा देता है. कहता है, इन्सान के मन की बात वह स्वयं तो जानता ही है. और कयामत का दिन उसी क्षण आ जाता है जब किसी की मृत्यु होती है.


Today since early morning she is feeling his presence ‘Allah’ this was the first word she uttered and felt inner peace, joy and happiness. They themselves make their life complicated otherwise it is so simple and easy to live in the shadow of God ie all that is good and beautiful. When one leaves everything he gets Him and when one gets Him he gets everything. This is so simple, when her mind is calm she can do all things well. Just now she talked to one friend, her husband’s team could not make to final of Sur-Sangam antakshari. She wrote all five letters with Rakhi’s greetings. Yesterday jun made beautiful cards for  brothers.

Swedish proverb says, God gives every bird his worm, but he does not throw it into the nest. She thought, God gives every man his love but he does not grow it into the mind. Man himself has to grow it, develop it and nurture it, because without love, life is but a desert dry and horrid. To grow the flowers and springs they have to have feelings of love and compassion. When her mind is full of God’s love she is the happiest person on earth. She feels full of energy, directed towards her goal and is more sensitive to others. God is with her in her thoughts and in her heart. Last night she dream t of sour throat and when she got up felt some dryness in throat. They drank tulsi tea and now she is OK. Also she knows deep in her heart that she will be all right when He is with him. Last evening when they came back from walk, one friend’s family was there, while talking with them she noticed that they talked about other people’s personal life . it is not good for a devotee, she has to be careful in future. Today is Nanha’s hindi unit test so he took her pen and this pen is not much good. From today onward she will devote daily one hour for house keeping.



Tuesday, May 13, 2014

नंदन कानन के शेर


कल वे पिकनिक पर गये थे, यहाँ से थोड़ी ही दूर पहाड़ियों के उस पार नदी के किनारे, पहाड़ियों पर चाय बागान थे, उन्होंने उनके मध्य से होते हुए चढाई भी की और कुछ लोग नदी पार करके दूसरे किनारे पर भी गये. दिन भर वे बहुत खुश थे, शाम को एक मित्र परिवार कई दिनों बाद मिलने आया और रात्रि को उसने एक बहुत दीर्घ स्वप्न देखा, स्वप्न में ही उसका अर्थ जानने का प्रयत्न भी किया. वह शायद यही जता रहा था कि वह सबकी नजरों में बने रहना चाहती थी ! परसों उन्हें जाना है सो आज दो सखियों को फोन करके विदा ली. आज सुबह ससुराल से फोन आया, बड़ी ननद आ गयी है, छोटी की डेट आने वाली है. उस दिन वे ट्रेन में होंगे. असमिया सखी नये घर में जा रही है, उसने सोचा नये वर्ष में उसका नया घर देखने वे जरूर जायेंगे. शाम को लाइब्रेरी जाकर किताबें वापस करनी हैं, और यात्रा में साथ ले जाने के लिए कुछ पत्रिकाएँ भी लानी हैं.

आज की सुबह की शुरुआत बड़े अजीब ढंग से हुई, जून ने उसे रोज की तरह उठाया और उसने स्वभावतः कहा कि कल उन्हें जाना है तो सुबह और भी जल्दी उठना पड़ेगा और फिर यह भी कि नन्हे और जून को तो कल स्कूल व दफ्तर  नहीं जाना होगा सो सम्भवतः उतनी जल्दी भी नहीं होगी, पर जून के अनुसार उनकी छुट्टी कल से शुरू नहीं हो रही है, जिस दिन जाना हो दफ्तर जाकर यदि sign कर दिए और वापस आकर भी यदि sign कर दिये या फोन से इन्फॉर्म भी कर दिया तो ड्यूटी ज्वाइन कर ली ऐसा माना जाता है. सब ऐसा ही करते हैं. कैसा अजीब सिस्टम है यह, उसकी समझ से बाहर. वैसे ही ऑफिस के दिनों में लोग सीट से गायब रहते हैं और.. इसी बात पर उसने जून को कुछ कहना चाहा पर उनको यह बात इस कदर नागवार गुजरी कि नाराज हो गये, खैर थोड़ी देर बाद( उनके क्रोध से उसके सिर से नैतिकता का भूत उतर गया) सब शांत हो गया, इन्सान सिस्टम का शिकार होकर इतना तटस्थ हो जाता है कि उसे इस बात का अहसास तक नहीं होता कि जो वह कर रहा है गलत है. वह जो इतनी किताबें पढ़ती है, सच्चाई, ईमानदारी, नैतिकता, और मूल्यों की बात करती है, क्या वह केवल किताबों तक ही सीमित नहीं है, कदम-कदम पर लोग समझौते करते हैं, वे सुविधा उठाना चाहते हैं जिन पर उनका अधिकार नहीं है. यह मानसिक उथल-पुथल कहीं उसे अस्वस्थ न कर दे.

कोलकाता गेस्ट हाउस
It is their first morning away from. Yesterday at 10.45 they started from home to air port. Air Bus took one and half hour to reach Calcutta. Flight was good except one thing, their’s was last seat and two times they suffered foul smell but it was nothing compared to the smell they felt while coming from Calcutta airport to guest house in park street. They passed it in few minutes but people who live their day and night continuous breath in it, in that sense Calcutta is a stinking city. Here in park street their guest house is on sixth floor but traffic noise is as much as on first floor in any other city. She could not sleep due to noise and due to excitement of journey and their meeting with Punjabi didi’s family. She got three dress materials from a shop near by. Cloth is very good and of a different texture.

पुरी गेस्ट हाउस
आज सुबह उसकी नींद साढ़े तीन बजे ही खुल गयी, एक स्वप्न उसे सूर्योदय देखने जाने के लिए जगा रहा था, जून ने समय देखा और वे कुछ देर और सो गये. पांच बजे उठकर समुद्र तट पर गये, रास्ते में अँधेरा था, तट सुनसान था, पर सोडियम लाइट के कारण काफी उजाला था, जो दूर तक लगी हुई हैं. आकाश और पानी का रंग पहले श्याम था, फिर नीला हो गया और बाद में सुरमई, लाल होने की प्रतीक्षा करते रहे पर धुंध की वजह से सूर्य दिखाई नहीं दिया, सुबह की शुद्ध हवा में समुद्र की लहरों का उतर-चढ़ाव और दूर पानी में तिरती पाल वाली नावें बहुत अच्छी लग रही थीं. सवा छह बजे वे वापस आ गये, नहा-धो व नाश्ता करके भ्रमण के लिए निकले. कोणार्क मन्दिर, धौली, उदयगिरी की गुफाएं, नन्दन कानन और लिंग राज मन्दिर देखे. चन्द्रभागा तट पर नारियल पानी पिया. ‘पिपली’ से कुछ खरीदारी की, भुवनेश्वर से बुद्ध की एक मूर्ति खरीदी. पूरा दिन उड़ीसा की नई-पुरानी जगहों को देखने में निकल गया. नंदन कानन में सफेद बाघ व शेरों को देखना नन्हे के साथ उनके लिए भी एक सुखद अनुभव था, शेर खुले में घूमते-घूमते सड़क तक आ पहुंचे थे, और आराम फरमा रहे थे. जून ने कई तस्वीरें उतारीं. कल पुरी में उनका अंतिम दिन है. सुबह समुद्र तट पर नहाने का कार्यक्रम है, नन्हा इसके लिए तैयारी करके आया है.





Wednesday, February 26, 2014

शिवरात्रि का अवकाश


कल ही वह दिन था, जिसके लिए इतने दिन से तैयारी चल रही थी, वह लगभग सारा दिन व्यस्त रही, सुबह का थोड़ा वक्त, दोपहर के दो घंटे और पूरी शाम वहीं बीती, बल्कि रात्रि को लौटने में उन्हें आधी रात हो गयी थी. नन्हा गहरी नींद में सो रहा था. उसने असम सिल्क की साड़ी पहनी और एक कमरे की चाबी भी उसे दी गयी थी, जिसकी देखभाल उसे करनी थी. बहुत सी समर्पित सदस्याएं थीं जो बड़ी लगन से सब काम कर रही थीं. आज फिर वह क्लब गयी और एक सखी से मंगाई लकड़ी की बड़ी मेज उनके यहाँ वापस भिजवाने का प्रबंध किया. शाम को वहाँ बधाई देने जाना भी है, उन्होंने एक पुरस्कार जीता है, तीन दिनों के लिए दो बड़ों और दो बच्चों के लिए मुफ्त गोवा यात्रा का पुरस्कार.

आज उसे लग रहा है, जीवन एक वफादार दोस्त की तरह हर पल साथ निभाता है. खुशियाँ देता है, उन्हें महसूसने की सलाहियत भी और कितने नये किस्से कहानियाँ गढ़कर मन बहलाता है उसका असीम-अतीव अनोखा स्नेह भाव, जो वह अंतर में भर देता है, कोमल भावनाएं, सिहरन और शांत हृदय की हिलोरें, ऊपर उठने का मौका देती हैं. वह सम्भालता है अपने दोनों हाथों से संवारता है आज और कल को, वह मौका देता है दानी बनने का और उसकी खुद की झोली में तो न जाने कितने कितने उपहार भरे हैं, नीले आकाश पर टंके सितारे, हरी धरती पर चमकते मोती, कोई अनोखा गीत और संगीत !

जीवन प्रतिपल बदलता रहता है, यह नदी की उस धारा के समान है जिसमें गति है, स्पंदन है, गहराइयों और अनंत की चाह है न कि उस तालाब के पानी की तरह जो अपनी सीमाओं में बंधा हुआ है.

आज नन्हे ने कहा परीक्षाएं आने वाली हैं, वह घर में ज्यादा पढ़ सकता है, सो स्कूल नहीं जायेगा, पर उस समय भूल ही गया कि आज स्कूल में निबंध प्रतियोगिता होनी थी. उसकी छात्रा का कोर्स भी पूरा हो गया है. आज संगीत कक्षा उनके घर में होगी. सुबह जून के जाने के बाद समाचार सुने, वही चुनाव सम्बन्धी और उत्तर प्रदेश के संवैधानिक संकट के समाचार, फिर zee पर सुधांशु जी महाराज का प्रवचन आ रहा था, बहुत अच्छी बातें कहीं उन्होंने, अच्छे भाव का मन में प्रस्फुरण होना कभी-कभी ही होता है सो ‘शुभस्य शीघ्रम’ का पालन करते हुए उस कार्य का सम्पादन कर ही लेना चाहिए. सात्विक लहरें मन में यदा-कदा ही उठती हैं जैसे वसंत ऋतु में वाटिका से उठने वाली सुवासित पवन ! पौधों को सहेज रही थी कि जून आ गये, आज उन्हें जल्दी जाना था. कल फोन से घर पर बात की, सासु माँ की आवाज ख़ुशी से भरी हुई थी, वहाँ इतनी परेशानियों को सहकर भी वे लोग खुश हैं, यह इन्सान की जिजीविषा का ही तो परिणाम है, मानव मन की विचित्रता पर ही तो आज प्रवचन में कहा गया - यह ऊंचा उठे तो आकाश की ऊँचाइयां भी कम हैं और गिरने को आये तो पाताल की गहराई भी कम पड़ेगी.

कल सुबह जब सारे कार्य हो गये तो जून की बात याद आयी कि वह घर पर पत्र लिख दे जिसमें सासु माँ को होली पर साड़ी खरीदने के लिए कहना था, क्योंकि जो पार्सल उन्होंने भेजा था, खुला हुआ मिला और साड़ी गायब थी. उसने एक के बजाय दोनों घरों पर पत्र लिखे. फिर कुछ देर टीवी पर ‘हम पांच’ देखा, पूरी टीम बाँध लेती है और एक बार देखना शुरू कर दें तो पूरा देखे बिना मन नहीं मानता. जून आज सुबह तीन दिनों के लिए ‘शिकोनी’ गये हैं, इस समय जोरहाट पहुंचने वाले होंगे, नन्हा आज घर पर है, आज शिवरात्रि का अवकाश है. मौसम ठंडा है, बादलों की वजह से पूरे घर में बल्ब जल रहे हैं. माँ होतीं तो पीछे आंगन में या बरामदे में चारपाई पर बैठतीं कि सुबह हो गयी है इसका पता तो चले.

जून के बिना यह शाम कितनी सूनी-सूनी लग रही है, दिल है कि बैठा जा रहा है, हाथ-पाँव ठंडे हो रहे हैं और आँखें पता नहीं क्या तलाश रही हैं, मालूम नहीं था कि जून के बिना वक्त काटना इस कदर भारी होगा, दिन भर तो ठीक ही रहा, नन्हे को पढ़ाने में कुछ टीवी देखने में गुजर गया पर शाम...लम्बी हो गयी है, फोन भी नहीं मिला, यूँ शाम को उन्होंने फोन किया था, नम्बर भी दिया था पर अभी करने पर नहीं मिला, कल सुबह बैक डोर पड़ोसिन के यहाँ जाना है, शाम को मीटिंग है, सो बीत जाएगी, वैसे, कमेटी की मीटिंग में जाने का उत्साह दिनोंदिन कम होता जा रहा है. अब उसे कोई ऐसा कार्य ढूँढना चाहिए जिसमें एक घंटा आराम से बीत जाये और याद न सताये.


Wednesday, October 9, 2013

गर्मागर्म पकौड़े


आज दिन बदली भरा है, सो हल्की ठंडक महसूस हो रही है आज काम जल्दी समाप्त करके उसे टोपी बनानी है. शाम को एक सखी के घर जाना है, उसका जन्मदिन है, उसके हाथ में हरी मिर्च छूने से जलन हो रही है, किसी पत्रिका में इसके मिटाने का उपाय पढ़ा था पर याद नहीं है, वक्त पर याद न आये ऐसे पढने से क्या लाभ, वह पत्रिकाएँ पढकर बहुत जल्दी ही भूल जाती है. लेडीज क्लब की मीटिंग में एक सरप्राइज गेम था, पर न तो वह विज्ञापन ही पहचान सकी न कलाकारों के चित्र, किसी ने कहा आप इतनी पत्रिकाएँ पढ़ती हैं, ठीक ही कहा, उसे ज्यादा पहचान होनी चाहिए, पर वह विज्ञापन न तो देखती है न पढ़ती है. टीवी पर ‘झूठी’ फिल्म आ रही है, माँ-पिता बहुत शौक से देख रहे हैं. कल शाम असमिया सखी बहुत दिनों बाद आयी, उसने पकौड़े बनाये, और लगा कि उसमें तेल बहुत लगता है, इतना तेल स्वास्थ्य के लिए शायद ठीक नहीं है, अच्छा है कि वह साल में एक या दो बार ही बनाती है. कल दोपहर ‘बुनियाद’ देखा, अच्छी लगती है लाजो जी की बातें और हवेलीराम का उसे ‘लाजो जी’ कहना. नन्हे का आज हाफ डे है, २६ से उसकी परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं शायद इसीलिए. नैनी बगीचे से मूला का साग तोड़ कर लायी है, इस वक्त काट रही है.

  
ठंड एकाएक पिछले दो दिनों से बढ़ गयी है, कल सारे स्वेटर, स्कार्फ आदि निकाल दिए, आज धूप दिखाने के लिए रखे हैं. जून आज सुबह माँ-पिता को गोहाटी तक छोड़कर वापस आ गये, उस दिन जब वे जा रहे थे उसकी आँखें भर आई थीं. उनका रहना उसे अच्छा भी लगा और कुछ बंधन सा भी था. फिर इतवार और कल का दिन नन्हे को पढ़ाते व पढ़ते बीते. इस बार उसे पढ़ाने में मेहनत कम लग रही है, जैसे-जैसे बड़ा हो रहा है उसे याद करने की अथवा रटने की जरूरत कम होती जा रही है.

पिछले दो दिन फिर मौन, कल सुबह आशा पारेख और धर्मेन्द्र के अभिनय में उलझी रही और परसों एक पुराने मित्र के लिए लंच बनाने में, पता नहीं क्यों उनसे मिलकर वह जिसे कहते हैं न दिल से ख़ुशी होना, वह नहीं हुई, जून भी उतना खुलकर नहीं मिले जैसे अन्य मित्रों से मिलते हैं. वह अपने दिल्ली वासी होने के या विदेश भ्रमण करने के गरूर में खोये से लगे खैर.. नन्हे से कहकर उनके बेटे के लिए कार्ड अवश्य बनाना है. कल रात जून से और भी कार्ड बनाने की बात कही थी, नया साल आने वाला है और उन्हें कई जगह कार्ड भेजने हैं. आज धूप नहीं निकली है सूरज बादलों के पीछे छिपा है, सर्दियों में धूप की कीमत कितनी बढ़ जाती है. जून आजकल खुश रहते हैं, कुछ दिनों की नियमित दिनचर्या से मिली आजादी को अच्छी तरह enjoy करते हुए ! कल पूरे एक महीने बाद उसने पत्रों के जवाब दिए, फोन और पत्र दूरियों को कम कर देते हैं.

अपने–अपने घरों में कैद
खुद से बतियाते
अपने इर्दगिर्द ब्रह्मांड रचने वाले लोग
क्या जानें कि नदी क्यों बहती है
दूर बीहड़ रास्तों से आ
ठंडे पानी को अपने अंक में समेटे
तटों को भिगोती, धरा को ठंडक
पहुंचाती चली जाती है
क्यों सूरज बालू को सतरंगी बनाता
नदी की गोद से उछल कर शाम हुए उसी में सो जाता है
आकाश झांकता निज प्रतिबिम्ब
संवारते नदी के शीशे में वृक्ष भी अपना अक्स
सदियों से सर्द हुआ मन
धूप की गर्माहट पाकर पिघल कर
बहने लगता है नदी की धरा के साथ
बर्फ की चादर से ढका धरा का कोना
जैसे सुगबुगा कर खोल दे अपनी आँखें
नन्हे नन्हे पौधों की शक्ल में
मन की बंजर धरती पर भी गुनगुनी धूप
की गर्माहट पाकर गीतों के पौधों उग आयें
हल्की सी सर्द हवा का झोंका घास को लहराता हुआ सा
जब निकल जाये
तो गीतों के पंछी मन के आंगन से उड़कर
नदी के साथ समुन्दर तक चले जाँए..
धूप की चादर उतार, शाम की ओढ़नी नदी ओढ़े जब
सिमट आयें अपने-अपने बिछौनों में
अगली सुबह का इंतजार करते कुछ स्वप्न 

Wednesday, March 20, 2013

डॉक्टर्स की कहानी



नए वर्ष का प्रथम दिवस, नये साल के पहले दिन कई अच्छी बातें हुईं, वे पाइप के पुल पर घूमने गए, बूढी दिहिंग नदी के किनारे दूर-दूर तक रेत फैली थी, नन्हे ने रेत का छोटा सा घर बनाया. कल रात देर तक टीवी पर कार्यक्रम देखने के कारण सुबह नींद देर से खुली, गार्डन में मेरीगोल्ड, फ्लौक्स, एक अनाम फूल, तथा शाकवाटिका में धनिये, पपीते तथा मटर के बीज लगाये. 
  जीवन का कटु सत्य भी बार-बार सामने आता रहा, जिससे भी अपेक्षा रखो यहाँ निराशा ही मिलती है और मन आहत होता है. यह पीड़ा ही शायद उसकी नियति है या वह अपेक्षा ही ज्यादा रखती है. यदि किसी से उसके किये गए वायदे को निभाने की अपेक्षा रखना अधिक है या विवाह की सालगिरह आने पर अपने लिए ज्यादा आत्मीय सम्बोधन की अपेक्षा रखना. उचित यही होगा कि वह किसी से भी कोई अपेक्षा कभी न रखे. कहीं इसका कारण यह तो नहीं कि वह “Great Expectations” पढ़ रही है आजकल ! उसके थोड़ा सा उदास होने पर नन्हा परेशान हो जाता है और जून झुंझला जाते हैं, और उसे महसूस होता है कि उसकी खुशी ही उनकी पहली चाहत है. रविवार की दोपहर को जून के बनाये गाजर के हलवे की सभी ने तारीफ की. शाम को वे दोनों जब घूमने गए तो इस मौसम की पहली शीतलहर चेहरे पर महसूस की, इस साल यहाँ ठंड काफी कम है.

  कल जून देहरादून जाने वाले हैं, दोपहर तक यह ख्याल मन को बेचैन नहीं कर रहा था, पर अब धीरे-धीरे उदासी की हल्की परत मन पर छाने लगी है. जून इतना ख्याल रखते हैं उसका व नन्हे का. उनकी हर छोटी से छोटी बात में वह शामिल हैं. आज दोपहर को ‘पिप’ की कहानी आगे पढ़ी, और नन्हे के टूटे हुए पैराशूट को ठीक किया. उसकी छात्रा ने कार्ड के लिए धन्यवाद दिया और नन्हे को उसके मित्र ने एक कार्ड दिया. ऐसी छोटी-छोटी घटनाएँ फिर से विश्वास दिलाती रहती हैं कि जीवन इतना कठोर नहीं कि उदास हुआ जाये. दोनों छोटे भाइयों के कार्ड भी मिले, पत्रों के लिखने का दिन था, पर हर हफ्ते फोन पर बात हो जाती है जून की, पत्रों की अहमियत कम हो गयी है.

नीले से फिर हुआ सलेटी, काला होता अम्बर
नृत्य अनोखा करते पत्ते हवा बहे जब सर सर,
टप टप बूंदें बरस पडीं लो तेज हुआ वर्षा स्वर
बिजली चमकी मेघ गरजते, समां बंधा कितना सुंदर !

 आज जून को गये पहला दिन है, उसके लिए स्वेटर बना रही है.  टीवी के सामने काफी देर बैठे रही, शाम को टहलने गयी नन्हे के साथ. सो दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. माली आया था पानी का नल खोल तो दिया पर उससे बंद ही नहीं हुआ, कल उसे ठीक करवाना है.  शाम को ‘सरस्वती पूजा’ का चंदा मांगने एक दल आया था, जिन्हें शिक्षा से कोई मतलब नहीं ऐसे लोग पूजा के नाम पर मौज करते हैं, जून होते तो मना करते, पर उसने दे दिया. नन्हा कह रहा है कल वह स्कूल नहीं जायेगा, छुट्टियों के बाद पहले दिन पढ़ाई नहीं होती है. उसने लकड़ी के बक्से से सारी चम्पक निकालीं, इस वक्त उनमें से एक पढ़ रहा है. दिन भर वह कुछ भी करती रही पर जून का ख्याल हमेशा साये की तरह लगा रहा.

 एक दिन और बीत गया, उसकी बंगाली सखी का फोन आया उसके बगीचे से गुलाब के पौधे चोरी हो गए, सुनकर व सोचकर उसे बहुत दुःख हुआ, वह कितनी उदास रही होगी. आज सुबह नन्हा उसे गुलदस्ते के लिए फूल तोड़ने से मना कर रहा था वह रूठ ही गया इस बात पर कि फूलों को दर्द होगा. पड़ोस का बच्चा भी स्कूल नहीं गया, वह अपनी माँ के साथ सुबह आया था. दोनों खेलते रहे. शाम को उसे लेकर टहलने गयी, झूला पार्क दिखाया नन्हे ने. कुछ देर बैडमिंटन खेला. “डॉक्टर्स” किताब के कुछ पृष्ठ पढ़े. कुछ देर पहले सोच रही थी, अब जब भी समय मिलेगा लिखेगी, एकांत खोजते-खोजते कभी एकांत नहीं मिलता और जब मिलता है तो कविता नहीं बनती, रचना और जीवन जब एक हो जायेंगे, तब हर वक्त मन कुछ रच जाने के काबिल रहेगा. किसी खास वक्त का मुहताज नहीं रहेगा.








Wednesday, August 22, 2012

बारिश लायी बाढ़



कल उसने तीन बार लिखने के लिये डायरी उठाई पर हर बार कुछ न कुछ बात हो गयी और आज अभी सुबह के आठ बजे हैं, सोनू अभी उठने वाला है. कल दिन भर व रात भर भी पानी बरसता रहा, मौसम में खुनकी है अर्थात नमी..सुबह एक बार उठकर फिर सो गयी, उठी तो जून तैयार होकर जा रहे थे, नाश्ते में कॉर्नफ्लेक्स व कोला खाकर, यहाँ केले को कोला कहते हैं, शुरू में यह बात उन्हें अजीब लगती थी अब मुँह से कोला ही निकलता है. उसने एक बार फिर खुद से वादा किया है कि आज से उसका ज्यादा ध्यान रखेगी, कल बहुत दिनों बाद लाइब्रेरी से दो किताबें लायी, बाद में वे एक बच्चे के जन्मदिन की पार्टी में गए, अच्छा लगा सभी परिचित लोग थे वहाँ.

कल शाम जून और उसने एक प्यारा सा वादा किया, मधुर बातें कीं, एक दूसरे के स्नेह में डूबते-उतराते रहे, सुबह जल्दी उठ गए तभी आज सभी काम समय से हो गए हैं. कल शाम एक नया परिचित तेलुगु जोड़ा उनके घर आया, श्रीमती राव की एक बात उसे बहुत पसंद है, हर समय टिपटॉप रहती हैं, तैयार चुस्त-दुरस्त. एलआइसी की नौकरी के लिये तैयारी कर रही हैं, परीक्षा सितम्बर में है. इसी हफ्ते माँ व ननद जा रही हैं, जून उन्हें छोड़ने गोहाटी तक जायेंगे. नन्हा बुआ से नाश्ता खा रहा है, उसे माँ की साड़ी पर फाल लगानी है, जो उस दिन जल गयी थी उससे प्रेस करते समय.

जून उन्हें गोहाटी तक छोड़कर कल वापस आ गए. दो दिन केवल नन्हा और वह दोनों ही थे घर में, उसने लिखने नहीं दिया, आज भी पेन मांग रहा था, उसे किसी काम में लगाकर वह आयी है. उनके पड़ोस की एक महिला जो बीमार थीं, आज महीनों बाद वापस आयी हैं, बेटे का जन्म हुआ है, गोल गोल शक्ल है बिल्कुल माँ जैसी. कुछ देर पहले वह मिलकर आयी. 

कुछ दिनों का अंतराल और आज छोटे भाई का जन्मदिन है, उसे पत्र लिखेगी उसने मन ही मन सोचा. नन्हा पड़ोस की दीदी के साथ खेल रहा है, आज वह स्कूल नहीं गयी. वर्षा जो यहाँ के जीवन का अविभाज्य अंग है, रात भर होती रही अब भी काले काले बादल बने हुए हैं. सुबह ठंड लग रही है कहकर जून ने नहाने में आनाकानी की तो वह उससे व्यर्थ ही नाराज हो गयी, सोचा है, उसकी पसंद के मूली के परांठे बनाएगी तो वह खुश हो जायेंगे,  

शहर में बाढ़ आ गयी है, बूढी दिहिंग में पानी बहुत बढ़ गया है. कल वे लोग नदी व बाढ़ देखने गए थे. सेटलमेंट एरिया में तो घरों में पानी घुस गया है. सेंट्रल स्कूल जाने वाली सड़क बिल्कुल पानी में डूब गयी है. संभव है रात भर में पानी कुछ कम हआ हो. डिब्रूगढ़ के कई गाँव खाली करवा दिए गए हैं, बहुत से लोग यहाँ भी स्कूलों में रह रहे हैं. बिहार में कल फिर भूचाल आया कुछ सेकंड्स के लिये. पिछले भूकम्प में हजारों व्यक्ति घायल हुए और पांच सौ मारे गए., शायद उससे भी ज्यादा, यहाँ भी पिछले कई दिनों से लगातार वर्षा हो रही है, कुछ देर को थमती है फिर शुरू हो जाती है. मौसम काफ़ी ठन्डा हो गया है.


















Tuesday, July 10, 2012

नदी तट पर पिकनिक



उसने बहुत दिनों बाद एक पत्र लिखा, उनकी शादी की सालगिरह थी, जून रोज की तरह ऑफिस गए थे. सोचा कुछ तो अलग होना चाहिए, मन में उथल-पुथल मची थी कि ऐसा कुछ लिखे जिससे उसके दिल का हाल वह जान ले. समय कितना जल्दी बीत जाता है, अभी उस दिन की ही तो बात है जब अपने कमरे में बैठकर वह उसका पत्र पढ़ रही थी. और अब तो वह सदा के लिये यहाँ आ गयी है, और उसके बाद आया नन्हा, उनका छोटा सा परिवार बना. उसे लगता है बचपन में वह भी इतना ही प्यारा लगता होगा, गोलमटोल, गोरा-गोरा और गुदगुदा. उसे हँसी आयी कहाँ से कहाँ पहुँच जाता है मन, उसे याद आये शुरू के दिन उनकी बातें ही खत्म नहीं होती थीं. फिर कुछ दिनों के लिये वे अलग हुए थे वह कितना याद करती थी उसे. उसने सोचा कि वह रोज उसे जल्दी उठने के लिये  कहती है, व्यायाम करने के लिये कहती है, इतवार की सुबह नाश्ते के बाद जब वह फिर से सो जाता है तो टोकती है, साहित्य में रूचि जगाने के लिए कहती है, किताब पढ़ने को कहती है, यह सब पत्र में अच्छी तरह समझा कर लिखा.
आज जून कुछ देर से गया है सांध्य भ्रमण पर, पर माहौल वही है. शाम घिर आयी है, नन्हा सो रहा है, किसी किसी दिन वह खूब सोता है जैसे आज सुबह उठने का नाम ही नहीं ले रहा था, उसे
उठाना पड़ा. पेड़ों की पत्तियाँ देखकर कितना खुश होता है वह. आज सुबह वह कुछ लिखने का प्रयास कर रही थी कुछ लाइनें ही लिख पाई. पंजाब के बारे में रोज वही समाचार सुनते हैं, पढ़ते हैं, हत्या, आतंकवाद ने किस तरह अपने शिकंजे में जकड़ लिया है पंजाब प्रान्त को. क्या सोचते होंगे वहाँ के वासी. उसे अलका की याद हो आयी, उसकी मित्र तथा दीदी की भतीजी जिसकी शादी पंजाब में हुई है. उसने सोचा दीदी से कहकर उसका पता मंगवाएगी पंजाब के कुछ दूसरे समाचार तो जानने को मिलेंगे.
आज नेता जी की ९०वीं जयंती है, कुछ माह पूर्व उसने दो खंडों में एक पुस्तक पढ़ी थी, ‘मैं सुभाष बोल रहा हूँ’, पहली बार मालूम हुआ था कि नेता जी ने वास्तव में कितने साहस के साथ एक महान कार्य का बीड़ा उठाया था. जून आज तिनसुकिया गया है, वह नन्हें के साथ एक सखी के यहाँ गयी थी, वह पूरा एक घंटा चुपचाप खेलता रहा जरा भी परेशान नहीं हुआ. जून ने बताया है कि अगले महीने उसके विभाग के सभी लोग परिवार सहित पिकनिक पर जायेंगे, वे भी जायेंगे किसी नदी तट पर.

Thursday, May 24, 2012

स्वप्न की नदी


कल रात भी रिमझिम पानी बरसता रहा, इतवार की सुबह भीगी-भीगी थी, वे उठकर घूमने गए, मोतिया का एक पौधा दिखा, फूल खिले थे, एक टहनी उससे पूछकर ली, अपने घर के बगीचे में लगाने के लिये. जून सब्जी लाने माँ को लेकर बाजार जाने वाला है, यहाँ का बाजार उनके लिये नया सा होगा कुछ सब्जियां भी नयी होंगी, स्क्वैश, भात करेला आदि वहाँ नहीं मिलते. कल बड़ी बहन का जन्मदिन है, नूना ने सोचा, बहुत दिनों से उनका खत नहीं आया.

कल रात स्वप्न में दौड़ती भागती एक नदी को देखा जो खेतों के बीच से जा रही थी. दोनों ओर ऊँचे-ऊँचे कगार तथा जिस ओर वह खड़ी थी अपनी पड़ोसिन उड़िया मित्र के साथ, पुराने मकानों के अवशेष थे. फिर देखा कि उनका तबादला हो गया है, सामान की पैकिंग कर रहे हैं वे, ये स्वप्न उन्हें जगाने के लिये ही आते हैं, नींद खुल गयी, उठकर पानी पिया, फिर देर तक नींद नहीं आ रही थी. भीतर की हलचल अब कितनी स्पष्ट महसूस होती है, जिस ओर करवट ले उसी ओर, बस अब एक माह की प्रतीक्षा और है. बाबूजी भी आज वापस जा रहे हैं.
अभी कुछ देर पूर्व भगवद्गीता का तेरहवां अध्याय पढ़ते हुए उसे कल रात्रि को जून के साथ हुई बातें याद आ गयीं, नित्य पढ़ती है पर उसका मन अभी भी दुर्बल है, जून की कितनी अधिक आश्रित है है वह उसके स्नेह की उसके दुलार की. धीरे-धीरे पढ़ते-पढ़ते सबल होगा मन, अवश्य.. एक दिन. वह कल दोपहर जल्दी आ गया, उसे दिगबोई जाना था, फिर देर शाम को लौटा.



   

Tuesday, February 28, 2012

रेडियो नाटक


दोपहर के तीन बजे हैं अभी, आज दोपहर उसने कुछ देर उसने किताब पढ़ी, क्रोशिये से मेजपोश आगे बनाया, जून के आने पर लस्सी बनायी और वे बाइक से नदी पर गए, मुख्यमंत्री आने वाले थे सो जगह-जगह पुलिस के सिपाही खड़े थे, वे पहले की तरह पुल पर खड़े होकर नदी को देर तक नहीं देख सके. ‘एक सच सारे जीवन का निर्णायक हो सकता है, पर कभी-कभी कितना कटु होता है कोई सच’ चंदामामा में से एक कहानी पढ़कर सुनाई उसे जून ने, उसी का अंतिम वाक्य था यह. विवाह  पूर्व लगभग हर शुक्रवार की रात वह रेडियो पर नाटक सुना करती थी, पर यहाँ नहीं सुन पाती है, सो जून ने उसे पढ़कर सुनाया. शाम को एक परिचित परिवार अपने दो बच्चों के साथ आया था, उन्हें बहुत अच्छा लगा.
आज उमा(महरी) नहीं आयी है. वह रेडियो पर समाचार सुनते हुए बर्तन साफ कर रही थी. अकाली दल को पूर्ण बहुमत मिला है, सुरजीत सिंह बरनाला पंजाब के मुख्यमंत्री बनाये गए हैं, अब उम्मीद करनी चाहिए कि पंजाब में फिर पहले की तरह शांति रहेगी. और भारत का सबसे समृद्ध राज्य होने का गौरव वह कायम रख सकेगा.