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Thursday, September 24, 2020

विश्वनाथ मंदिर

 

दोपहर के ढाई बजे हैं, आज नेट नहीं चल रहा और हिंदी लिखने का सॉफ्टवेयर भी काम नहीं  कर रहा, सो लिखने का काम नहीं हो पाया. अब मकैनिक आया है, कम्प्यूटर चेक कर रहा है और एक अन्य व्यक्ति टेलीफोन ठीक कर रहा है. मौसम आज भी बदली भरा है. सुबह इतनी तेज बारिश हो रही थी कि वे टहलने नहीं जा पाए. उसने टीवी खोला तो पता चला आज प्रधानमंत्री का आगमन काशी में हुआ है. वह विश्वनाथ मन्दिर पहुँच चुके हैं, जिसकी बहुत मान्यता है. वह गर्भ गृह में पूजा-अर्चना के लिए बैठे हैं, अशोक द्विवेदी जी उन्हें आचमन करा रहे हैं. योगी जी पीछे हाथ जोड़कर खड़े हैं. वे सभी देश के विकास का संकल्प ले रहे हैं. भारत को विश्व पटल पर एक आदर्श देश के रूप में स्थापित होते हुए  देखने का संकल्प लिया जा रहा है. काशी को उन्होंने अपना चुनाव क्षेत्र चुना है तो इसके पीछे कोई कारण होना ही चाहिए. यह अति प्राचीन नगरी है, जहाँ शिव का अति प्राचीन मंदिर है. इसे आधुनिक काल के अनुरूप स्वच्छ व सुंदर बनाने का काम भी सरकार की तरफ से चल रहा है. उसे वे दिन याद आने लगे जब वे काशी में रहते थे और विश्वनाथ के दर्शन हेतु जाया करते थे. उस समय वहां बहुत भीड़, फूल-पत्तियों के ढेर और कीचड़ हुआ करता था. शायद अब जब उन्हें वहाँ जाने का अवसर मिले तो सब कुछ बदला हुआ होगा. 


रात्रि के पौने आठ बजे हैं. मौसम आज गर्म है, अब दिनोंदिन और गर्म होता जायेगा. जून ने उनके सामान को बंगलूरू ले जाने के लिए पैकर्स से बात करना आरंभ कर दिया है. वे कुछ गमले और पौधे भी ले जायेंगे. आज सन्ध्या योग कक्षा में सभी महिलाओं को उसने आश्रम से लायी गुरूजी की तस्वीर भेंट की. वे चने की मिठाई भी लाये थे, खिलाई. योग साधना करते समय सहज ही ध्यान लग रहा था, आज सुबह उठने से पूर्व कैसा विचित्र अनुभव हुआ, बिना हाथ उठाये वस्तु को उठाने का अनुभव. आँख बन्द किये हुए पढ़ने का अनुभव. सब कुछ कितना रहस्यमय है. जब से बैंगलोर से आयी है, एक विचित्र सी गंध का अनुभव होता है. जून को स्टोर से कोई दुर्गन्ध आ रही थी जबकि उसे उसका पता ही नहीं चल रहा था, जबकि फूलों की गन्ध अनुभव कर पा रही है. आज भूटान यात्रा का विवरण टाइप किया, आयल की हिंदी पत्रिका में छपने के लिए देना है. बहुत दिनों बाद एक कविता भी लिखी और एक अन्य पोस्ट. इतने दिनों बाद कम्प्यूटर पर काम करना अच्छा लग रहा है. 

आज शाम महिला क्लब की कमेटी की मीटिंग थी. इस बार ज्यादातर महिलाएं असमिया हैं, वे हिंदी या अंग्रेजी में नहीं बोल रही थीं. उसे याद आया भूतपूर्व प्रेजिडेंट के समय पर सभी भाषाओँ का समान प्रयोग होता था. वक्त के साथ हर चीज बदलती है. वैसे नई सेक्रेटरी ने बखूबी संचालन किया. अगले महीने की क्लब की मासिक मीटिंग के लिये कार्यक्रम की रूपरेखा बनानी थी. इस बार कमेटी के सदस्यों को भी भाग लेना है. तय हुआ सारा कार्यक्रम मानसून थीम पर आधारित होगा. उसके लिए यह अंतिम अवसर होगा. बरसात पर कितनी ही सुंदर कविताएं व मनोरंजक गीत मिल सकते हैं. दोपहर को एक कविता लिखी, बल्कि एक विशेष भाव दशा में लिखी गयी जैसे अपने आप ही, देर शाम तक वह भाव दशा रही, पर नींद में रह पायेगी, पता नहीं. 


उसने दशकों पुरानी डायरी खोली - उस दिन एक और पेपर देकर वापस आ रही थी. एक सखी ने पूछा, कैसा हुआ, कहना चाहिए था अच्छा नहीं हुआ पर स्वभाव वश कह दिया अच्छा ही हो गया, पर इतना तो तय है कि पेपर उतने में से ही आता है जितना वह पढ़ती है, बस कुछ चीजें वह सरसरी तौर पर पढ़ती है. लौटते समय बस मिल गयी थी. एक मुसलमान ग्रामीण की मूर्खता या अज्ञानता पर आश्चर्य हुआ थोड़ा सा, क्योंकि यह उसकी ही गलती नहीं उसके परिवेश तथा उसके आस-पास के लोगों की भी है. एक सात-आठ साल की बच्ची ने रोना शुरू कर दिया कि उसके बापू उसे बस में बैठाकर नीचे चले गए हैं. वह डर रही होगी कहीं वह छूट न जाएँ. शायद पहली बार बस में बैठी थी, पर कौन जानता है वह क्यों रो रही थी ? पर उसके रोने में एक लय थी, धीरे-धीरे बच्चों की मासूम आवाज़ में वह रोना लोगों को खल नहीं रहा था. एक अन्य छोटी सी बच्ची उसके पास बैठी थी, जिसकी माँ घूँघट निकाले थी, वह उसकी अंगुली पकड़ लेती थी कभी- कभी, पर इतनी देर में वह एक बार भी मुस्कुरायी नहीं. कितनी ही बार उसने नूना की ओर देखा होगा, पता नहीं बड़ी होकर क्या बनेगी !   


Tuesday, March 27, 2018

चोखम का बौद्ध मंदिर



यह वर्ष समाप्त होने में मात्र चार दिन रह गये हैं, जिनमें से दो वे अरुणाचल प्रदेश में बिताने वाले हैं. आज सुबह दो महिलाएं आई थीं योग कक्षा में. सोलह मिनट सूर्य नमस्कार किया, बीस मिनट का सूर्य ध्यान किया तथा शेष समय प्राणायाम तथा थोड़ा व्यायाम. सुबह का एक घंटे का अभ्यास दिन भर कैसा तरोताजा रखता है. दोपहर को बच्चे आये, कुछ नये भी थे. उन्होंने सुंदर चित्र बनाये. मंझले भाई-भाभी के विवाह की वर्षगांठ है आज. छोटी बहन ने व्हाट्सएप पर अच्छा सा गीत गाकर उन्हें शुभकामनायें दी हैं. अभी-अभी मोदी जी की ‘मन की बात’ सुनी, वह बहुत अच्छा बोलते हैं, उनका विरोध करने के लिए कांग्रेस को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी.

मात्र तीन दिन ही शेष हैं इस वर्ष को बीतने में. जीवन भी इसी तरह एक दिन चुक जायेगा. जब तक वे जीवित हैं, जीवित रहने का कुछ तो सबूत दें अपने कृत्यों द्वारा, अपने व्यवहार द्वारा किसी के जीवन में कोई परिवर्तन ला सकते हैं तो लायें, अपने शब्दों से किन्हीं हृदयों के सुप्त पड़े भावों को जगा सकें तो उनकी कलम सार्थक होगी. वे अपने विचारों को इतना शुद्ध बनाएं कि उनकी गरिमा उनके व्यक्तित्त्व से झलके. कल प्रधान मंत्री का भाषण सुनकर बहुत अच्छा लगा. आज रूस में दिया उनका एक भाषण सुना, एक पॉप सिंगर द्वारा गए वैदिक मन्त्रों को सुना. सचमुच विश्व पुनः दैवी संस्कृति की ओर बढ़ रहा है. भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सुधर रहे हैं. जैविक खेती के प्रयोग बढ़ रहे हैं. गली-मोहल्ले सफाई की तरफ ध्यान दे रहे हैं. विकलांगों के प्रति सोच बदली है, विश्व शरणार्थियों को बाहें फैलाये स्वागत करने को तैयार है. भारत में संस्कृत भाषा का प्रचार हो रहा है. देश में आशा की लहर जगी है.


अरुणाचल प्रदेश के रोइंग जिले का ‘मिशिमी हिल कैम्प’ दो दिनों के लिए उनका घर बन गया है. जिसे श्री पुलू चलाते हैं. इस प्रदेश की यह उनकी पहली यात्रा नहीं है, पिछले कई वर्षों के दौरान खोंसा, मियाओ, बोमडिला, तवांग, देवांग, परशुराम कुंड, आदि स्थानों को देखने के बाद इस वर्ष के दो अंतिम दिन बिताने वे रोइंग आए हैं. उत्तर-पूर्व भारत का सबसे बड़ा राज्य अरुणाचल जिसकी सीमाएं देश में असम तथा नागालैंड से मिलती हैं तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन, भूटान और बर्मा से, प्राकृतिक सुन्दरता के लिए विख्यात है. कल सुबह साढ़े सात बजे वे घर से रवाना हुए और असम की सीमा पार कर चोखम नामक स्थान में स्थित बौद्ध मन्दिर ‘पगोडा’ में कुछ देर रुक व नाश्ता करके पांच घंटों की रोमांचक यात्रा के बाद यहाँ पहुंच गये. आलूकबाड़ी में लोहित नदी को वाहन सहित फेरी से पार किया, एक साथ चार-पांच वाहन तथा बीस-पच्चीस व्यक्तियों को लेकर जब नाव नदी पार कर रही थी तो दृश्य देखने योग्य था. नदी पर पुल निर्माण का कार्य जोरों से चल रहा है, पर आगे भी दो-तीन जगह छोटी-उथली नदियों को उनमें से गुजर कर पार करना पड़ा, जिन पर पुल बनने में अभी काफी समय लगेगा. छोटे-बड़े श्वेत पत्थरों से ढके विशाल नदी तट देखकर प्रकृति की महिमा के आगे अवनत हो जाने अथवा विस्मय से भर जाने के अलावा कुछ नहीं किया जा सकता.


Monday, January 29, 2018

उड़ीसा के मंदिर


सवा दस बजे हैं, दोपहर का भोजन लगभग बन गया है. आज भी गर्मी बहुत है. पंखे के नीचे  बैठकर भी पसीना सूख नहीं रहा है. परसों दोपहर वे लौटे. सफाई का काम शुरू किया है. अगले महीने छोटी बहन आ रही है. उसके आने से पहले सभी कुछ ठीक-ठाक करना है. यात्रा विवरण लिखन आरम्भ किया  है. कल नन्हे का जन्मदिन है, कोई अच्छा सा व्यंजन बनाकर बंगाली सखी को भेजेगी. उसने परसों पनीर की स्वादिष्ट सब्जी भिजवाई थी, जब वे लौटे थे. उन्हें जो कुछ भी मिलता है, प्रकृति से, जगत से, वह उन्हें भरने के लिए है. उन्हें बिना किसी प्रतिरोध के स्वीकार करना आ जाये तो वे हर क्षण भरे जा रहे हैं. परमात्मा हर क्षण बरस रहा है. भीतर खाली आकाश है, जिसे जितना भी भरें वहाँ जगह है. यदि वे किसी का विरोध भी बिना विरोध के स्वीकारने की कला सीख जाते हैं तो हर क्षण उनके लिए एक नया अनुभव लेकर आता है. उनका अहंकार ही जगत से दूरी सिखाता है. उस दिन लेह में एक सखी का फोन आया, उनका तबादला पुनः यहाँ हो गया है. सम्भवतः इसी वर्ष वे लोग आ जाएँ. दुनिया गोल है, उनका जीवन भी लौट-लौट कर वहीं घूमता है. मन खाली है और भीतर एक गहन शांति है. अब जीवन जो भी लायेगा, सहज स्वीकार्य होगा !

आज गर्मी अपेक्षाकृत कम है. सुबह वर्षा के आसार नजर आ रहे थे. कल शाम काफी तेज वर्षा हुई. जून तिनसुकिया गये थे, ढेर सारे फल व सब्जियां लाये. आज नन्हे का जन्मदिन है उसने बायीं तरफ के दो दांत निकलवाये हैं, कह रहा था, काफी दर्द है. शाम को एक मित्र परिवार आ रहा है, दक्षिण भारतीय भोजन बनाया है यानि इडली, सांबर और नारियल की चटनी साथ में सेवईं की खीर और आम रस. बगिया से कच्चा नारियल भी तोड़ा है, उसके मीठे पानी के लिए. एक पका अनानास भी मिल गया. बगीचे में कटहल पकने लगे हैं, आज धोबी ने देखे, पर उसे तोड़ना नही आता. कह गया है, अगली बार ले जायेगा. वह माली से कह कर तुड़वा देगी.

साढ़े आठ हुए हैं, रात्रि के. जून को आज ही टूर पर निकलना पड़ा है, कार्य तो सोमवार को ही है, पर कल की कोई टिकट ही नहीं मिल रही थी. नन्हा घर से काम कर रहा है, उसका संदेश आया. आज नूना ने कटहल के बीजों की सब्जी बनायी थी. शाम को बगिया में कुछ देर काम किया, आजकल तितलियाँ बहुत आती हैं. गोयनका जी को सुनकर सोयी थी, स्वप्न में उन्हें देखा. सुबह स्नान के बाद एक गीत रचा पर बाद में भूल गयी, कुछ पंक्तियाँ ही याद रहीं. परमात्मा जिस क्षण मुखर होता है, तभी उन्हें अंकित कर लेना होगा. कभी-कभी ही ऐसे पल आते हैं. अब उसी का घर है उसका मन, स्वयं का होना ही तो दुःख है. मन का दूसरा नाम उलझन है, माया है, तो ऐसे मन को खाली रखना ही बेहतर है. अमन इसी में है और जब भी किसी का मन खाली हो जाता है, वही रहता है वहाँ !

इतवार की शाम. योग कक्षा में उड़िया सखी ने कोणार्क मन्दिर की कहानी बताई. मन्दिर का कलश नहीं लग पा रहा था तब एक कारीगर के बारह वर्षीय पुत्र ने आकर उसे लगाया था और स्वयं पानी में कूद गया. पुरी में सुभद्रा, बलराम व कृष्ण की मूर्तियाँ बनाने की कथा भी बहुत रोचक है. एक वृद्ध कारीगर मूर्तियाँ बना रहा था. वायदे के खिलाफ जब राजा ने उसे बीच में ही टोका तो हाथ नहीं बने थे. कितनी अनोखी कथाएं हैं भारत के अद्भुत मन्दिरों से जुड़ी. कृष्ण के पास तुलसी की सुगंध से भरा राधा का पत्र आया ऐसा एक गीत में उसने सुना था, यह भी उसने बताया. अगले हफ्ते रथयात्रा का त्यौहार है. उसी दिन ईद का उत्सव भी है. नन्हे से शाम को बात हुई, अब वह ठीक है.


Friday, September 23, 2016

नई गाड़ी में सैर


तू ही रस्ता, तू ही मंजिल, तू ही राही है..!

कहाँ जा रहा यह मानवदल, किसे ढूँढ़ते होता बेकल
सुबह-सवेरे उठते ही क्यों, चिंता ने आ इनको घेरा
गगन, फूल, कलियां तो छोड़ो, पंछी सुर न सुनते देखा
कदम-कदम पर निशां हैं जिसके, ढूँढा करते जाकर मन्दिर
जिसके कारण हैं दुनिया में, ढूँढा करते हैं उसका घर
कैसे बेसुध दीवाने हैं, आग लगाते स्वयं ही मन में
कभी क्रोध की, कभी ईर्ष्या, अकुलाते सुंदर जीवन में
स्वयं जगाते तृष्णा, आशा, सुखी रहें करते अभिलाषा
सुख से ही तो बने स्वयं हैं, थमकर न सीखें यह भाषा
तन में एक आग जलती है, मन हारा चिन्तन कर करके
फिर भी रुकना न जानें, क्या पाना कुछ साबित करके
पीना और पिलाना सीखा, जीना न आया अब तक
चाहा जिसको सदा भुलाना, मन वह वश में किया न अब तक
तन के लिए सभी उपाय, दौड़, खुराक कभी जिम जाये
मन पाता विश्राम जहाँ, उस निज घर जाना न आये
तन पाता विश्राम नींद में, मन पाता आराम कहाँ
जाना जिसने भेद वह ज्ञानी, मिलते उसको राम यहाँ
नैन थके तो मुंद जाते हैं, श्रवण कहाँ सुनते निद्रा में
बैन हुए चुप अधर शांत हैं, मन फिर भी दौड़े निद्रा में
घर से निकले पहुंचे मंजिल, पैरों ने पाया विश्राम
मन की गति न थमती देखो, कैसे हो हमको आराम
तन के सेवक पांच इन्द्रियां, खुद के तीन सिपाही सच्चे
मन, बुद्धि व अहंकार के, आगे होते अनगिन बच्चे
स्वयं की महिमा स्वयं ही जाने, सेवक न बखान कर पाए
स्वयं में टिक जाये पल भर तो, तीनों को तुष्टि मिल जाये
जीने का है यही सलीका, लौट के कुछ पल घर में आये !

आज क्लब में मीटिंग है, उसे संचालन का कार्य करना है. कल रात्रि देर तक ज्ञान श्रृंखला सुनती रही. दोपहर को नींद आ गयी, उठकर एक नये ब्लॉग पर पूर्व की लिखी कविताएँ डालीं. कल जून नई गाड़ी में उन्हें घुमाने ले गये, कुछ देर एक मित्र के यहाँ रुके. परमात्मा जब तक अपना नहीं बन जाता तब तक जीवन से दुःख नहीं जाता, पर उसे जो हर वक्त एक नामालूम सी ख़ुशी घेरे रहती है, लगता है वह आसपास ही है. सद्गुरू के शब्दों में पास-पास. मन से परे, बुद्धि से परे एक और सत्ता है जो प्रेम से ही बनी है, उसमें और नूना में दूरी नहीं है, वे दोनों एक ही हैं, कितना अद्भुत ज्ञान है यह.     


  

Thursday, November 27, 2014

हैरी पॉटर की दुनिया


सतगुरू मेरा सूरमा, करे शब्द की चोट ! टीवी के माध्यम से उसे गुरू प्रतिदिन मिलते हैं, शब्द की चोट करते हैं, सदुपदेश देते हैं, अंतः करण में उस परम शक्ति का आवाहन करने की प्रेरणा देते हैं, कभी-कभी लगता है वह सही मार्ग पर जा रही है पर फिर असावधानी वश पीछे लौटना हो जाता है और स्वयं को उसी स्थान पर पाती है जहाँ से चली थी. परसों सुबह संगीत कक्षा में गयी, लौटी तो ध्यान आदि किया, भोजन बनाया, जून को फ़ील्ड जाना था. पूरा दिन उउपन्यास पढ़ते या टीवी देखते गुजरा. कल सुबह-सुबह ही जून से गुस्सा हुई, लेकिन इतना तो मानना पड़ेगा कि पता था गुस्सा हो रही है सो ५-१० मिनट से अधिक नहीं टिका, पर दिन उसी तरह गुजरा जैसे शनिवार गुजरा था. कल रात भर डरावने सपने देखती रही, harry potter मन मस्तिष्क पर जो छाया हुआ था. स्टार टीवी पर ‘आत्मा’ आ रहा है. गुरू माँ ने भक्ति का महत्व तथा भक्त के लक्षण बताए.

“मन में भाव न हो तो पूजा-अर्चना व्यर्थ है, ईश्वर के प्रति श्रद्धा का माप पूजा व आरती नहीं बल्कि अंतर्मन में ज्ञान का दीपक जलाने से होता है. गुरुनानक ने कहा है उस परमेश्वर की आरती का थाल यह गगन है, सूर्य, चाँद, तारे मानो उसमें दीपक जल रहे हैं, हवा, फूलों और वनस्पतियों रूपी धूप की सुगंध फैला रही है और चंवर डुला रही है. ऐसे विराट स्वरूप को क्या कोई मन्दिर में कैद कर सकता है ? मन्दिर की पवित्रता भी यदि किसी के भीतर पवित्र भाव न जगा सकी तो वहाँ जाना या न जाना बराबर है. हर क्षण जो उसकी याद में बीते, पूजा का क्षण है और हर स्थान पवित्र है, जितनी साँसें उसके स्मरण में लीं वही सार्थक हैं और जितनी उसे भुलाकर समझें गंवा दीं”. आज गुरू माँ ने उपरोक्त प्रेरणास्पद बातें कहीं. उसे लगा जैसे वह यह भी कह रही हों, सुबह-सुबह जब आकाश में सूर्य उदय हो रहा हो तो अपने अंतर में भी ज्ञान का सूर्य उदय हो ! पंछियों की चहचहाहट से जब बाहरी वातावरण गुंजित हो तो अंतर के प्रांगण में उसके नाम की गूँज हो. वे मन्मुख न हों तथा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानें. अपने भीतर ही उच्च जीवन की सम्भावनाएं छिपी हैं, सृजन की क्षमता है, सुख और आनंद का स्रोत है. कल जून पहले की तरह के अपने मूल स्वभाव में आ गये थे, आज सुबह उसने संयम की बात कही तो उन्होंने ‘जिद’ कहा. कभी न कभी यह संयम उन्हें भी सधेगा, तब मिठाई देखते ही उसे खाने की इच्छा को नियंत्रित कर सकेंगे. आज नन्हे की गणित की परीक्षा है, कल अंग्रेजी की हो गयी, उसका आत्मविश्वास बढ़ रहा है. बड़े भाई ने अभी तक फोन नहीं किया, ईश्वर ही मदद करेगा.

“जब दिल में राग-द्वेष न हो, स्वर्ग भीतर होता है, जब स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने के लिए अन्यों को नीचा दिखाते हैं तो हृदय में नर्क उत्पन्न होता है. जो व्यक्ति सामने न हो, उसकी बात करना उचित नहीं है. अन्यों के कल्याण की बातें ही मन सोचे, चारों दिशाओं में शुभकामनायें भेजे, जो हृदय की गहराइयों से निकली हों. सभी के प्रति, चाहे वे मित्र हों या अपरिचित स्नेह भाव बना रहे. भूलकर भी कोई अप्रिय बात या कटु वचन अथवा भावना भी दिल में न उपजे, तभी कोई ईश्वर का भक्त होने का दावा कर सकता है. हृदय पवित्र होगा, स्फटिक की तरह चमकदार, झील के शांत पानी की तरह स्वच्छ और स्थिर तो उसकी झलक मिलती है”. संतों के वचन उसे एक अनोखी दुनिया में ले जाते हैं, जहाँ प्रेम है, करुणा है, हित की भावना है, उच्च विचार हैं, जहाँ भौतिक वस्तुओं के प्रति उतना ही आदर है जिसके वे योग्य हैं पर मानसिक शांति व सुख की बड़ी पूछ है. आज नन्हे का गणित का इम्तहान है.



Tuesday, May 13, 2014

नंदन कानन के शेर


कल वे पिकनिक पर गये थे, यहाँ से थोड़ी ही दूर पहाड़ियों के उस पार नदी के किनारे, पहाड़ियों पर चाय बागान थे, उन्होंने उनके मध्य से होते हुए चढाई भी की और कुछ लोग नदी पार करके दूसरे किनारे पर भी गये. दिन भर वे बहुत खुश थे, शाम को एक मित्र परिवार कई दिनों बाद मिलने आया और रात्रि को उसने एक बहुत दीर्घ स्वप्न देखा, स्वप्न में ही उसका अर्थ जानने का प्रयत्न भी किया. वह शायद यही जता रहा था कि वह सबकी नजरों में बने रहना चाहती थी ! परसों उन्हें जाना है सो आज दो सखियों को फोन करके विदा ली. आज सुबह ससुराल से फोन आया, बड़ी ननद आ गयी है, छोटी की डेट आने वाली है. उस दिन वे ट्रेन में होंगे. असमिया सखी नये घर में जा रही है, उसने सोचा नये वर्ष में उसका नया घर देखने वे जरूर जायेंगे. शाम को लाइब्रेरी जाकर किताबें वापस करनी हैं, और यात्रा में साथ ले जाने के लिए कुछ पत्रिकाएँ भी लानी हैं.

आज की सुबह की शुरुआत बड़े अजीब ढंग से हुई, जून ने उसे रोज की तरह उठाया और उसने स्वभावतः कहा कि कल उन्हें जाना है तो सुबह और भी जल्दी उठना पड़ेगा और फिर यह भी कि नन्हे और जून को तो कल स्कूल व दफ्तर  नहीं जाना होगा सो सम्भवतः उतनी जल्दी भी नहीं होगी, पर जून के अनुसार उनकी छुट्टी कल से शुरू नहीं हो रही है, जिस दिन जाना हो दफ्तर जाकर यदि sign कर दिए और वापस आकर भी यदि sign कर दिये या फोन से इन्फॉर्म भी कर दिया तो ड्यूटी ज्वाइन कर ली ऐसा माना जाता है. सब ऐसा ही करते हैं. कैसा अजीब सिस्टम है यह, उसकी समझ से बाहर. वैसे ही ऑफिस के दिनों में लोग सीट से गायब रहते हैं और.. इसी बात पर उसने जून को कुछ कहना चाहा पर उनको यह बात इस कदर नागवार गुजरी कि नाराज हो गये, खैर थोड़ी देर बाद( उनके क्रोध से उसके सिर से नैतिकता का भूत उतर गया) सब शांत हो गया, इन्सान सिस्टम का शिकार होकर इतना तटस्थ हो जाता है कि उसे इस बात का अहसास तक नहीं होता कि जो वह कर रहा है गलत है. वह जो इतनी किताबें पढ़ती है, सच्चाई, ईमानदारी, नैतिकता, और मूल्यों की बात करती है, क्या वह केवल किताबों तक ही सीमित नहीं है, कदम-कदम पर लोग समझौते करते हैं, वे सुविधा उठाना चाहते हैं जिन पर उनका अधिकार नहीं है. यह मानसिक उथल-पुथल कहीं उसे अस्वस्थ न कर दे.

कोलकाता गेस्ट हाउस
It is their first morning away from. Yesterday at 10.45 they started from home to air port. Air Bus took one and half hour to reach Calcutta. Flight was good except one thing, their’s was last seat and two times they suffered foul smell but it was nothing compared to the smell they felt while coming from Calcutta airport to guest house in park street. They passed it in few minutes but people who live their day and night continuous breath in it, in that sense Calcutta is a stinking city. Here in park street their guest house is on sixth floor but traffic noise is as much as on first floor in any other city. She could not sleep due to noise and due to excitement of journey and their meeting with Punjabi didi’s family. She got three dress materials from a shop near by. Cloth is very good and of a different texture.

पुरी गेस्ट हाउस
आज सुबह उसकी नींद साढ़े तीन बजे ही खुल गयी, एक स्वप्न उसे सूर्योदय देखने जाने के लिए जगा रहा था, जून ने समय देखा और वे कुछ देर और सो गये. पांच बजे उठकर समुद्र तट पर गये, रास्ते में अँधेरा था, तट सुनसान था, पर सोडियम लाइट के कारण काफी उजाला था, जो दूर तक लगी हुई हैं. आकाश और पानी का रंग पहले श्याम था, फिर नीला हो गया और बाद में सुरमई, लाल होने की प्रतीक्षा करते रहे पर धुंध की वजह से सूर्य दिखाई नहीं दिया, सुबह की शुद्ध हवा में समुद्र की लहरों का उतर-चढ़ाव और दूर पानी में तिरती पाल वाली नावें बहुत अच्छी लग रही थीं. सवा छह बजे वे वापस आ गये, नहा-धो व नाश्ता करके भ्रमण के लिए निकले. कोणार्क मन्दिर, धौली, उदयगिरी की गुफाएं, नन्दन कानन और लिंग राज मन्दिर देखे. चन्द्रभागा तट पर नारियल पानी पिया. ‘पिपली’ से कुछ खरीदारी की, भुवनेश्वर से बुद्ध की एक मूर्ति खरीदी. पूरा दिन उड़ीसा की नई-पुरानी जगहों को देखने में निकल गया. नंदन कानन में सफेद बाघ व शेरों को देखना नन्हे के साथ उनके लिए भी एक सुखद अनुभव था, शेर खुले में घूमते-घूमते सड़क तक आ पहुंचे थे, और आराम फरमा रहे थे. जून ने कई तस्वीरें उतारीं. कल पुरी में उनका अंतिम दिन है. सुबह समुद्र तट पर नहाने का कार्यक्रम है, नन्हा इसके लिए तैयारी करके आया है.





Wednesday, December 11, 2013

उदय पुर - झीलों का शहर


उदयपुर में यह उनकी दूसरी सुबह है, मौसम अच्छा है और कल की वर्षा के कारण हवा में ठंडक है. कल दोपहर वे चित्तौडगढ़ देखने गये जो यहाँ से १२५ किमी दूर है. बूढ़ा बस ड्राइवर बड़ी सावधानी से गाड़ी चला रहा था तथा गाइड का काम भी कर रहा था. वहाँ राजा रतन सिंह तथा रानी पद्मिनी का महल देखा. जय स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, राणा कुम्भा पैलैस, मीरा तथा कृष्ण के मन्दिर देखे. एक संग्रहालय भी था जो वे देख नहीं पाए. काली माता का एक ८०० साल पुराना मन्दिर भी वहाँ था, जिसका सहन बहुत बड़ा था. कुछ जैन मन्दिर भी थे. वे जय स्तम्भ के  ऊपर तक चढ़े. पास में ही एक विशाल पीपल का वृक्ष था जिस पर सैकड़ों श्वेत लंगूर थे, छोटे, बड़े, मोटे, पतले हर तरह के लंगूर बेहद आराम से वहाँ झूल रहे थे. वापसी की यात्रा में एक अद्भुत  दृश्य देखने को मिला, उनकी सड़क के किनारे एक खेत से उगता हुआ इंद्र धनुष दूसरी ओर के खेत को छू रहा था, मानो स्वागत के लिए कोई द्वार हो. एक अन्य हल्का इन्द्रधनुष उससे थोड़ा आगे भी था. दो को एक साथ देखने का यह पहला अनुभव था, उन्होंने फोटोग्राफी भी की. एक जगह चाय पीने रुके तो कुछ पनिहारिनें पानी भर रही थीं, एक बहुत सुंदर थी और सिर पर दो मटके (एक सुनहरा, एक रुपहला) एक के ऊपर एक रखे तथा एक काली मटकी हाथ में लिए आराम से चल रही थी. होटल पहुंचते पहुंचते पौने न हो गये थे, ‘सैलाब’ का थोड़ा सा भाग देखा, पर नायक-नायिका को रोते हुए देखना अच्छा नहीं लग रहा था.

कल रात्रि भी वर्षा हुई पर इस वक्त आकाश नीला है. सुबह के सात बजे हैं, धूप खिली है. शाम सात बजे की ट्रेन से उन्हें अहमदाबाद जाना है, उससे पूर्व उदयपुर के दर्शनीय स्थानों पर जाना है. उसके आसपास की कुछ महत्वपूर्ण स्थान उन्होंने कल देखे, आठ बजे रवाना होकर ग्यारह बज रणकपुर के मन्दिर पहुंच गये, एक विशाल प्रांगण में बना २९ मन्दिरों का समूह, संगमरमर का यह विशाल मंदिर है, जिसमें पत्थर पर अद्भुत कलाकृतियाँ उकेरी हुई हैं. मन्दिर ट्रस्ट की ओर से ही भोजन की भी व्यवस्था थी, अल्प मूल्य में इतना स्वादिष्ट प्रसाद जैसा भोजन पाकर सभी हर्षित हुए. वहाँ से कंकरोलीराज समंद गये, जहाँ द्वारकाधीश का मन्दिर तथा एक विशाल सुंदर झील है, झील में हजारों की संख्या में मछलियाँ थीं, जिनको उन्होंने आटे की गोलियां खिलायीं. चतुर्भुज जी का एक मन्दिर एक गली में से होकर था, जहाँ स्वर्ण व चांदी का बहुत प्रयोग हुआ है. तथा छत पर शीशा लगा था व मीनाकारी भी थी. इसी तरह नाथ द्वारा मन्दिर तथा एकलिंगी मन्दिर भी देखे, वर्षा बहुत तेज हो रही थी सो भीगते-भीगते नाथद्वारा जी के दर्शन किये. काले पत्थर की सजी हुई मूर्ति थी, सोने-चांदी की चक्की, मीरा माँ का मन्दिर और घी का कुंड आदि भी गाइड ने दिखाए. एक लिंगी जी का मन्दिर ८वी शताब्दी का है. चांदी के दरवाजे और सोने की प्रतिमा, कहानियों में पढ़ी बातें सच में देखने को मिलीं. टैक्सी की हालत अच्छी नहीं थी, एक-दो बार जून को धक्का भी लगाना पड़ा और एक बार तो सडक से छींटे भी अंदर आये, इन दिक्कतों को छोडकर यात्रा अच्छी रही.

अहमदाबाद- आज सुबह सात बजे वे यहाँ पहुंच गये थे, कल सुबह नौ बजे उदयपुर दर्शन के लिए निकले, भारतीय लोक कला मंडल में कठपुतली नृत्य देखा. और राज्य की विभिन्न कलाओं के चित्र आदि भी. फतेह सागर लेक में मोटरबोट से नेहरु स्मारक देखने गये. सिटी पैलेस में गाइड ने महाराणा प्रताप के हल्दी घाटी युद्ध के बारे में विस्तार से बताया, शीशे पर पच्चीकारी का काम, मोती महल तथा दरबार दर्शनीय थे. चौथी मंजिल से पिछौला झील में जल महल देखा, जिसमें आजकल एक पांच सितारा होटल खुल गया है. वर्मा उद्यान तथा गुलाब बाग के दर्शन बाहर से ही कर लिए, धूप बहुत तेज थी. सबसे अच्छा स्थान लगा प्रताप स्मारक जहां महाराणा की एक विशाल प्रतिमा है, उद्यान है, एक धूप घड़ी है और उनके सेनापति की एक मूर्ति भी थी. शाम के साढ़े पांच बजे उन्होंने होटल छोड़ दिया मित्रों से विदा लेने का वक्त आ गया था, सहयात्री परिवार का गन्तव्य अब उनका घर था और जून अपनी बहन से मिलने जा रहे थे. बिछड़ते समय दोनों परिवारों का मन भारी हो गया था. उनकी ट्रेन डेढ़ घंटा लेट थी, रात आराम से गुजरी, सुबह स्टेशन पर वे लोग लेने आये थे. घर काफी खुला-खुला सा है, हाइवे पर है इसलिए शोर ज्यादा सुनाई देता है.