Saturday, March 21, 2020

नीम का दातुन


जून आज फिर गोहाटी जा रहे हैं, वहीं से दिल्ली जायेंगे.  सुबह वे जल्दी उठे, नाश्ते में अप्पम बनाये. दूर रहने वाले सभी परिवार जनों से फोन पर साप्ताहिक बात भी हो गयी. उन्होंने पिछले पांच दिनों से एक नए दूध वाले से दूध लेना शुरू किया है, आज पुराने वाले को पैसे देकर विदा कर दिया. उसे अच्छा नहीं लगा इसके पीछे राग ही तो है. एक दिन तो उन्हें भी यहां से जाना ही है तब सभी छूट जायेंगे. आत्मा अपने स्वरूप में टिकी रहे तो वहाँ कोई हलचल होती ही नहीं। उनके हर भाव, विचार और हर कर्म का फल उन्हें प्राप्त होने ही वाला है.अब इस बात का ध्यान रखना है कि भीतर व्यर्थ के संकल्प न जगें, वे किसी के भी निर्णायक न बनें. उनकी वाणी कठोर न हो, आवाज ऊंची न हो, उसमें शिकायत का स्वर न हो. उसने ड्राइविंग ट्रेनर से फोन पर शिकायत की  की और उसने सिखाते समय डांटकर उसका प्रतिदान दे दिया, यहां सभी कुछ लौटकर आने ही वाला है। देते समय ही उन्हें ध्यान रखना होगा. अपने भाग्य के निर्माता वे स्वयं ही हैं. जीवन में हर कदम पर न्याय है, एक महान शक्ति इसके पीछे कार्य कर रही है, यहां भूल-चूक होने का सवाल ही नहीं है. अभी-अभी नन्हे से बात की, उसने बताया पहले जिस कंपनी को इंटीरियर का काम दिया था, उन्हें मना कर दिया है, अब उनकी पहचान की एक दूसरी डेकोरेटर को नए घर का कार्य दिया है. 

दोपहर के साढ़े बारह बजे हैं, बाहर तेज धूप है. पिछले दिनों धूप में गाड़ी चलाने के कारण पसीना निकलने से घमौरी निकल आयी थी, अब काफी आराम है. कल शाम नीम की एक टहनी तोड़कर नीम के दातुन बनाये, उसके पत्ते भी चबाये. एलोवेरा का एक पत्ता भी तोड़कर रखा है. घर में जड़ी-बूटी होते हुए भी वे उसका लाभ नहीं उठा पाते. भोजन में भी मिर्च-मसाले बंद हैं. कल शाम योग-कक्षा में तीन-चार साधिकाओं ने अपनी स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के बारे में बात की. उसे तो पूर्ण स्वस्थ होना ही पड़ेगा ताकि वह उन्हें कुछ सलाह दे सके. शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए नियमित दिनचर्या पहली आवश्यकता है . अभी-अभी वजन घटाने के कुछ वीडियो देखे, डाउनलोड कर लिए, ये उसके भी काम के हैं औरों के भी. आज दोपहर की कक्षा में ये आसन करवाये जा सकते हैं, कमर की चर्बी से तो सभी परेशान हैं. कल रात को एक दुःस्वप्न देखा, आग भी थी और भोजन के प्रति आसक्ति का जिक्र भी. धृति शक्ति को उपयोग में लाना होगा, धृति वह शक्ति है जो उनके भीतर समस्त धैर्य चुक जाने के बाद भी रहती है. वैसे उसने तो कभी आने धैर्य के भंडार को पूरा कभी खर्च किया ही नहीं. स्वयं को स्वतन्त्र मानने का भ्रम  ही है जब तक मन आसक्त है. जून का जन्मदिन आने वाला है, उनके लिए कविता लिखनी है, छोटे भाई का जन्मदिन भी इसी महीने है. मृणाल ज्योति का वार्षिक अधिवेशन भी आने वाला है, हर साल की तरह इस बार भी एक कविता लिखेगी. कल दोपहर मृणाल ज्योति में हिंदी कक्षा लेने जाना है. साइन लैंगुएज में हिंदी सिखाने का पहला अनुभव, नेट पर कितने लोगों ने उपयोगी वीडियो बनाकर पोस्ट किया है, जो भी जानकारी चाहिए ली जा सकती है. 

शाम के चार बज कर पचपन मिनट हुए हैं. आज सुबह उठी तो वर्षा हो रही थी. बगीचे से कटहल के बीज उठाये फिर छाता लेकर टहलने गयी. साढ़े सात बजे कर का अभ्यास, ट्रेनर ने कहा, अभी बहुत सीखना होगा, दो-तीन जगह गलतियां कीं. वर्षा के कारण भी कुछ असुविधा महसूस की. दीदी से बात करे ऐसा मन हुआ फिर याद आया जीजा जी का जन्मदिन आने वाला है, उसी दिन करेगी. आज बाबा रामदेव जी ने कहा, मन में कोई कामना उठे तो कभी भी राजसिक अथवा तामसिक आलंबन नहीं लेना चाहिए , सात्विक ही लेना चाहिए. दोपहर को देर तक कम्प्यूटर पर बैठने के बाद थकान लगी तो ध्यान का आश्रय लिया. कल शाम को योग कक्षा में कमरा पूरा भर गया था, एक साधिका अपनी बेटी व माँ को लेकर आयी, सभी ने एडजस्ट कर लिया. ज्ञान और प्रेम जहाँ हों वहां कोई कमी नहीं रह सकती. सद्गुरु कहते हैं, हर घटना के पीछे ज्ञान है, हर वस्तु के पीछे अनन्त और हर व्यक्ति के पीछे प्रेम है.  यदि कोई ऐसा अनुभव करे तो उसे कुछ भी  प्रभावित नहीं कर सकता.  



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