Tuesday, August 4, 2020

हनुमान जयंती


आज ये सुंदर वचन सुने, अच्छे लगे तो लिख लिए. “मित्रता और शत्रुता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जब तक वे दूसरे के प्रति बह रहे हैं, स्वयं से दूर ही जा रहे हैं. चित्त की शुद्धि के लिए आवश्यक है कि वे देह के श्रृंगार और स्वादिष्ट भोजन में अत्यधिक रस न लें. अन्य की मौजूदगी में यदि वे स्वयं को अनुभव करते हैं तो स्वयं की अभी खबर नहीं है. भीतर की ऊर्जा को अनुभव करने के लिए उन्हें मात्र स्वयं को जानना है.” इस समय रात्रि के साढ़े सात बजे हैं. बाहर से टहलकर आये तो गंधराज का एक फूल लाये. आजकल फूलों की बहार है यहाँ, टेसू, रूद्र पलाश और भी न जाने कितने सुंदर फूल ! आज एक योग साधिका अस्वस्थ थी, उसे अस्पताल जाने को कहा है, ईश्वर करे वह जल्दी स्वस्थ हो जाये. सुबह उठने से पूर्व स्वप्न में नैनी के पुत्र का पूर्वजन्म देखा, उसका बचपन का चेहरा, फिर किशोरावस्था का, नीले रंग की कमीज पहने था, वह बहुत बहादुर था उस जन्म में. इसीलिए वह जरा भी नहीं डरता, बारिश में भीगता है. मिट्टी पर लोटता है और मन को दिन भर तक देता है. आज ही सुना कि साधना गहरी होती है तो अपने ही पूर्वजन्म का पता नहीं चलता अपने आस-पास के लोगों के पूर्वजन्म का भी ज्ञान होने लगता है. 

रामदेव जी जयपुर में राज्यवर्धन राठौर के नामांकन कार्यक्रम में लोगों का आवाहन कर रहे हैं कि वे एक बार फिर मोदी जी को जिताएं और देश को ऊँचाइयों तक ले जाने में अपना भी योगदान दें. आज चुनाव का दूसरा चरण है, मोदी जी अपने कामों के द्वारा एक बार पुनः भारी बहुमत से जीतकर आ जायेंगे, ऐसा उसे ही नहीं हर देशभक्त भारतीय को पूर्ण विश्वास है. लगभग एक महीने बाद परिणाम आ जायेंगे. आज एओल के एक शिक्षक का संदेश आया, गुरूजी के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन होगा, उसके लिए दो कविताएं भेजनी हैं. वे इस वर्ष बंगलूरू में रहेंगे उस दिन. उसने कवि सम्मेलन के लिए रजिस्ट्रेशन किया. व्हाट्सएप पर एओल कवियों के ग्रुप में शामिल हुई. कविता बाहर-भीतर सब ओर मुखरित हो रही है. आत्मा की छिपी और गूढ़ सौंदर्य राशि का भावना के आलोक में प्रकाशित हो उठना ही कविता है ! 

आज सुबह उठने से पूर्व किसी ने चेताया वह उसकी बात सुनेगी या नहीं ? ये शब्द एक बार नहीं अनेक बार सुने. इतनी तीव्रता से कि जैसे कोई धमका रहा हो. परमात्मा उन्हें प्यार से अनेक इशारों से और फिर दृढ़ता से समझाता है. वह उन्हें अपने जैसा देखना चाहता है, वह उनका सुहृद है, उनका सखा और उनका अपना ! आज हनुमान जयंती है, नैनी ने हनुमान जी की तस्वीर के आगे सुंदर फूल सजाये. पूरी हनुमान चालीसा पढ़ी वर्षों बाद. सत्य के मार्ग पर उन्हें अपार आनंद मिलता है फिर भी वे राग-द्वेष के शिकार हो जाते हैं. शाम को मीटिंग थी, नई अध्यक्ष को क्लब का चार्ज दे दिया. 

अब अतीत की बात.. बरसों पुरानी, कालेज के अंतिम वर्ष की. सुबह नींद नहीं खुली और आज वह स्वतन्त्र है, कल से जल्दी उठ सकती है. बाजार गयी थी, सूट सिल गया, बेहद सुंदर लग रहा है पर पहनने वाला सुंदर हो तब तो बात भी है.  होली का दिन, महीना फागुन का नहीं सावन का लग रहा है, या आषाढ़ का एक दिन !  पानी तेजी से बरस रहा है. ईश्वर भी होली खेलना पसन्द करते हैं. वह इस समय किताबें लेकर बैठी है. तीन बजने वाले हैं, किसी को होली खेलना पसन्द नहीं, पिछले वर्ष भी होली इसी तरह मनायी गयी थी. दरबारा सिंह जी, पंजाब के मुख्य मंत्री का भाषण सुना, उसने इससे पूर्व प्रधान मंत्री या जगजीवन राम के अतिरिक्त किसी का भाषण नहीं सुना. दरबारा सिंह जी बोले और खूब बोले लेकिन अधिकतर बातें ऐसी थीं जो कई बार सुनी हुई थीं. इसके अलावा पंजाब में सिखों के अलग प्रदेश बनाये जाने के बार में, उस विवाद के बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की, जिसकी कि कुछ लोग उनसे आशा रखते होंगे जो कि आज के भाषण से सम्बन्धित भी थी. कौमी एकता कमेटी के प्रेसीडेंट की आवाज में जो जोश था, उससे उनके दिल की गहराई में जो बात है, वह वाकई में है, यह जाहिर हुई. वे जहनी तौर पर इस कदर सहमे हुए हैं मुसलमानों से, उन्हें उनसे एक दूरी का अहसास बराबर होता रहता है. जब तक ये आंतरिक जड़ें जो मन में दूर तक धंस गयी हैं समाप्त नहीं होतीं, जब तक सिर्फ यह भाव पैदा नहीं होता कि कोई व्यक्ति इस वजह से कि वह बंगला भाषी है या मुसलमान है या किसी अन्य प्रदेश का है, इस तरह का या उस तरह का है, कौमी एकता दूर की चीज है. प्रश्न सिर्फ भाषा का नहीं है. भाषा का प्रश्न उछाला जाता है नारे बाजी में, दरअसल वे अपने-अपने खानों में इस तरह फिट बैठ गए हैं कि बाहर निकल कर देखना ही नहीं चाहते. कूप मंडूक की तरह अपने इर्दगिर्द नजर डालकर चुप हो जाते हैं, इस पीढ़ी को अपनी पुरानी पीढ़ी से क्या मिला ! कुशिक्षा, असभ्य भाषा, आधुनिकता के नाम पर भोंडापन, फ़िल्में और नारेबाजी. वे अपनी पीढ़ी को क्या देकर जायेंगे इससे भी नीचे की चीजें. आदर्शवाद का जिस तरह मखौल आज उड़ाया जा रहा है, आगे चलकर तो वह सिर्फ कल्पना की वस्तु रह जाएगी. 

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर।
    राम मन्दिर के शिलान्यास की बधाई हो।

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    1. स्वागत व आभार !आपको भी बधाई !

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 6.8.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    https://charchamanch.blogspot.com
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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    1. बहुत बहुत आभार !

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