Monday, September 28, 2020

सरोजिनी नायडू की स्मृति

सुबह नींद खुली तो सबसे पहले जून ने जन्मदिन की बधाई दी, फिर दिन भर शुभकामनायें मिलती रहीं. फेसबुक, व्हाट्सएप और फोन पर, नैनी और उसके परिवार के बच्चों ने कार्ड्स बनाकर दिए, उसकी सास ने पीले फूलों का एक गुलदस्ता दिया जिसमें चम्पा के भी दो फूल थे तथा . उसकी देवरानी ने एक दिन पहले ही लाल गुलाब का फूल देकर शुभकामना दी थी, कहने लगी सबसे पहले मेरी बधाई मिले इसलिए एक दिन पहले ही दे रही है. छोटी ननद ने एओल का गीत गाकर बधाई दी. अकेले ही टहलने गयी, जून को तीन दिनों के लिए पोर्ट ब्लेयर जाना है, तैयारी में लगे थे. वापस आकर प्राणायाम करने बैठी. जून ने माली को बुलवाया था पर वह नहीं आया सो थोड़ा सा क्रोधित थे, उनके क्रोध का आभास स्पष्ट हो रहा था योग कक्ष में बैठे हुए भी,  तरंगों का प्रसारण कितनी शीघ्रता से होता है. उनके दफ्तर जाने के बाद ध्यान किया. शाम की पार्टी की तैयारी की. दो मित्र परिवार आने वाले हैं. वह बंगाली सखी फोन करेगी ऐसी तो उम्मीद नहीं थी पर उसने व्हाट्सएप पर शुभकामनायें दीं, अच्छा लगा. शाम की योग कक्षा में सभी कुछ न कुछ बनाकर लाये थे, उन्होंने भजन गाये और ढेर सारे व्यंजन खाये. एकादशी थी पर उसने प्याज का प्रयोग कर लिया अनजाने में, किसी ने कुछ कहा नहीं पर उन्हें ज्ञात तो अवश्य हो गया होगा, प्रेम सारे नियमों से ऊपर होता है. इस जगत में प्रेम से बढ़कर कोई पावन वस्तु नहीं और प्रेम में होना ही आनन्द में होना है ! अर्थात परमात्मा में होना है ! इन साधिकाओं के प्रेम का कोई हिसाब नहीं, सभी एक से बढ़कर एक हैं. एक की तबियत ठीक नहीं थी फिर भी आयी थी, एक ने माँ शारदा के वचनों की छोटी सी पुस्तक तथा फूल दिए. इन सबका प्रेम देखकर लगता है, गुरु कृपा का पार पाना मुश्किल है. 


आज सुबह छह बजे जून अंडमान की यात्रा के लिए रवाना हो गए. उधर नन्हा और सोनू भी बीजिंग पहुँच चुके हैं. कई दिनों बाद मृणाल ज्योति गयी. वाइस प्रिंसिपल अस्वस्थ होने के कारण छुट्टी पर थी, प्रिंसिपल भी घर के कामों में व्यस्त थीं, उनकी आया लम्बी छुट्टी पर गयी हुई है. बाकी कई जन मिले, बच्चों को योग कराया. घर से लाये शकरपारे खिलाये. टीचर्स को मिठाई दी. जन्मदिन पर मिला फूलों का गुलदस्ता एक बच्चे को दिया, वह बहुत खुश हुआ. वापसी में आज़ार के बैंगनी फूलों से लदे वृक्षों के चित्र लिए. कल सुबह भी कैमरा लेकर जाना है, पूरे कैम्पस में बीसियों पेड़ों पर ये पुष्प खिले हैं. गुलमोहर पर भी बहार आयी है. पीछे वाली पड़ोसिन के यहां भी जाएगी, चम्पा का वृक्ष देखने. उसे मानसून पर कुछ बातें नेट पर मिलीं, उन्हें रोचक ढंग से लिखना है. छोटी भांजी का फोन आया, उसके जन्मदिन की कविता लिखनी है और गायत्री योग साधिकाओं के लिए भी यहां से जाने से पूर्व कुछ लिखना है. बिजली चली गयी है, सुबह से ही आ जा रही थी. आज मंत्रीमण्डल का गठन भी हो गया, मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के लिए पुरे जोश के साथ काम करने के लिए तैयार है. 


अतीत के पृष्ठ - उस दिन उसने एक पत्र लिखा तो उसमें उस अनुभव के बारे में भी लिख दिया जो हुआ था कुछ देर पूर्व ! अद्भुत ! अनोखा ! शांत और प्रिय ! ईश्वर ने उसके प्रेम का प्रतिदान उपहार देकर दिया. शायद वह बिना किये ही ‘ध्यान’ का पहला अनुभव था, उस समय ‘ध्यान’ से वह अपरिचित थी. उसके बाद भी एक कविता सहज ही लिखे जाने का जो अनुभव हुआ वह भी कम रोचक नहीं, सरोजिनी नायडू की स्मृति उसे सदा आ जाती है ऐसे वक्त पर, और चौड़ा मस्तक भी. कुछ अरसा पहले वह छोटी बहन के साथ एक वृद्ध अध्यापक के पास अंग्रेजी पढ़ने जाती थी, वह उसकी दुविधा और चिंता कितनी अच्छी तरह समझते थे, तभी उन्होंने कहा था, तुम्हारा मस्तक चौड़ा है.  स्नेह का एक बोल मन को फूल सा हल्का मगर शक्ति में चट्टान सा दृढ बना देता है. उस दिन वह बेहद प्रसन्न थी, उत्साह से लबरेज उसका प्याला छलका जा रहा था, जैसे सारा जहाँ उसके लिए पूजा की वस्तु बन गया हो. अगला पेपर फ्लूइड डायनामिक्स का है, उसने सोचा मानसून कब आएगा. 


8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (30-09-2020) को   "गुलो-बुलबुल का हसीं बाग  उजड़ता क्यूं है"  (चर्चा अंक-3840)    पर भी होगी। 
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
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  2. अनुभूतियों की सघनता से लदा लेख! बहुत चित्ताकर्षक शिल्प!

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आभार !

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  3. स्नेह का एक बोल मन को फूल सा हल्का मगर शक्ति में चट्टान सा दृढ बना देता है.।
    बहुत सटीक....

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