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Thursday, March 12, 2015

वृक्ष, नदी, आकाश, हवा


आज सुबह वह उठी तो तन-मन दोनों क्लांत थे, पर क्रिया के बाद तेज प्रकाश का अनुभव हुआ आज्ञा चक्र में और उसे लगा कृष्ण ने आश्वासन दिया है. वह सदा उसके साथ हैं, प्रतिक्षण भीतर से आश्वस्त करते हुए, जग की कोई पीड़ा, कोई दुःख उस आनंद को कम नहीं कर सकता जो कान्हा का साथ उसे देता है. वह उसे अपने बहुत निकट महसूस करती है, वही है जो उसकी आँखों से झाँकता है जब वह दर्पण के सामने खड़ी होती है. वही है जो मुस्कान बनकर छा जाता है जब वह ‘ध्यान’ से उठती है. आज ‘जागरण’ में सुना, विवेक को जाग्रत करना है, विवेक का उपयोग करने की स्वतन्त्रता प्रभु ने उन्हें दी है, जितना विवेक जीवन में होगा उतना जीवन उन्नत होगा. माया रूपी रात्रि में संयम रूपी ब्रेक और विवेक रूपी लाइट लगी जीवन की गाड़ी यदि वे चलायें तो दुर्घटना से बचेंगे और ईश्वर के प्रति श्रद्धा अविचल रहेगी. कल शाम को कुछ देर जून को उसने हृदय के भीतर उमड़ते प्रकृति के प्रति प्रेम को बताया, पता नहीं वे कितना समझ पाए. पेड़-पौधे, नदी, आकाश, हवा, पानी, कीट, पंछी और सभी लोग...सभी एक ही डोर में बंध हैं. वह है साँस की डोर. वे किस तरह जुड़े हैं एक-दूसरे से, ईश्वर ही सबका कारण है, उसी एक का विस्तार है यह सृष्टि. वे इसके प्रति कृतज्ञता से भर जाते हैं, समपर्ण करते हैं, उसे प्रेम करते हैं क्योंकि एक वही है जिसे चाहा जाये और उस एक को चाहने से सभी को चाहना हो जाता है. अहैतुकी भक्ति का उदय हृदय में होता है. ईश्वर जानते हैं कि उनके लिए क्या उचित है, वह उनकी सभी उचित कामनाओं की पूर्ति करते हैं, वही उनके जीवन का आधार है. आज बाबाजी ने अपने चुटीले हाव-भावों से बहुत हँसाया.

It’s a lovely June morning. Rain has just stopped. Breeze is cool and wet. She has finished her morning jobs. Mali is cutting hedge. Nanha went  to his friend’s home in the morning. Music sir came and gave three sargam to learn and aaroh- avroh of rag yaman. So she is continuing in second year. Day before yesterday they went to see the Buri dihing river. It was nice to see the sun setting and water flowing calmly. One fisherman was spreading his net perhaps he was not looking at the beauty of the water but only at the fish in the river. When they for evening walks she always looks at the   trees, flowers and surroundings with an awe. Daily she sees some new tree or some change in them. Nature is very beautiful, human beings are not so, they pretend they act and they want to be beautiful, but it is not that natural. Last evening she attended a meeting in club for Mrinal Jyoti. She and one more lady was assign the job of arranging some special classes in the school once a week. She will definitely enjoy doing it. Today she heard babaji. He was in bliss as always and told many beautiful things about life.

आज पूर्णिमा है, सुबह-सवेरे से ईश्वर की भक्ति की चर्चा कानों में पड़ रही है, ईश्वर उस के प्रति  कृपालु हैं, वह उसे सद्प्रेरणा देते हैं था गुरुजनों को जिन्होंने उसे पा लिया है, उन्हें टीवी के माध्यम से उनके घर भेजते हैं. कर्त्तव्य निष्ठ होकर, प्रेमपूर्वक, भक्तिभाव से उन्हें यह जीवन जीना है. ईश्वर के वे निमित्त मात्र हैं. वही कर्ता है और वही भोक्ता है. वही उसे प्रेरित करता है कि उसे जाने और उसके अंश होने के कारण उसी के समान बनने का प्रयत्न करें अथवा तो स्वयं को पहचानें.   



  

Monday, August 5, 2013

सपनों का ताजमहल



....और कल शाम बस स्टैंड पर बेहद प्रतीक्षा करने के बाद जून आ गये, नन्हे ने दूर से ही देख लिया था, बढ़ी हुई दाढ़ी मैले कपड़े और सफर की थकान, उसने आते ही मौन में ही उससे बात की, उनके एक मित्र भी वहीं थे, उन्हीं की कार से वे लोग गये थे बाद में नहा-धोकर जब वे बाथरूम से निकले तो पहले से नजर आने लगे छलकती हुई मुस्कान के साथ. इस बार भी वह  उनके लिए ढेर सारे उपहार लाये हैं, अपने लिए प्याजी रंग की ऊन जो पहली नजर से देखने पर उसे उतनी अच्छी नहीं लगी पर अब पसंद आ रही है. नन्हा अपना स्कूल बैग पाकर खुश है. घर कैसा भरा-भरा लग रहा है. काम भी जैसे बढ़ गया है, अब उसे समय बिताने के तरीकों के बारे में नहीं सोचना होगा, हर वक्त वे साथ जो होंगे.
आज शाम जब वे टहलने गये तो जून ने सुझाव दिया, सूरत वे नहीं जा रहे तो आगरा ही चलते हैं, ताजमहल देखने की उसे बरसों से तमन्ना है. नन्हे को भी बहुत अच्छा लगा, उसने अभी-अभी ताजमहल के बारे में काफी कुछ पढ़ा है. साथ ही देहरादून जाने पर एक दिन के लिए मसूरी भी जाया जा सकता है.
फरवरी का प्रथम दिन. जून ने फोन किया वह गैराज जाने के कारण देर से आएंगे. धूप बहुत तेज है सो वह खिड़की के पास वाली कुर्सी पर कमरे में ही बैठी है. जैसा कि संदेह था वह आंवले वाला बूढ़ा आज नहीं आया और अभी-अभी उसने पड़ोसिन से उसके माली से बात करने के लिए कहा है. परसों दीदी का पत्र आया था, उन्होंने लिखा है घर में चोरी की बात सुनकर उन्हें अपना आत्मनिर्भर न होना खल रहा था. वह लिख रही थी कि अचानक कानों को चुभने वाला तेज शोर शुरू हुआ और लगभग ५-७ मिनट तक जारी रहा, एक अजीब सी कैफियत थी, और अब वह शोर थम गया है, नन्हा गेट तक देखने गया आकर बताया, गैस को लीक किया जा रहा था. कुछ देर बाद फिर से शोर आने लगा.
 आज उसने लाहौर रेडियो से गजलें सुनी, तो.. टीवी पर रेडियो का भी आनन्द लिया जा सकता है. इस वक्त धूप में बैठे हुए जब बीच-बीच में ठंडी हवा का झोंका आकर सहला जाता है तो हल्की ठंडक का अहसास होता है. कल इतवार था, दोपहर को थोड़ी देर फिल्म देखी, शाम को ब्यूटी पार्लर गयी, एक मोटी सी लडकी थी वहाँ, उसके चेहरे पर एक अच्छा सा भाव था जैसे पुरानी जान-पहचान हो, पार्लर वाली सभी लडकियों के चेहरे पर एक अलग ही भाव होता है, जैसे देखते ही सब जानना चाहती हों. वहाँ से वे एक मित्र के यहाँ गये जहाँ उनके एक मित्र मिले, बता रहे थे, सुबह पांच बजे उठ जाते हैं, ७ बजे तक बेटा पढ़ाई करता है, नन्हा सुबह उठकर पढ़ाई नहीं कर पाता, पर आज समझाने पर थोड़ी देर की. अचानक वह पंछियों की आवाजें सुनने लगी और दस मिनट तक वही सुनती तरही, लॉन में झाडू लगाती नैनी की बेटियों की आवाज भी आ रही थी, वे दोनों कल रात भर अपनी सहेली के यहाँ रहकर आई हैं, कल शाम से उनकी माँ परेशान थी.

अभी कुछ देर पहले सुबह के काम खत्म हुए थे कि ध्यान आया, एक सखी से बात कर ली जाये, उसने कल शाम अपने बगीचे से पत्ता गोभी भिजवाई थी. वह एक सुलझी हुई पढ़ी-लिखी अच्छी मित्र है, उसके साथ कभी नाराजगी या गलतफहमी होने का डर नहीं है. कल शाम बहुत दिनों बाद असमिया सखी से भी मिली, लेकिन जैसी उम्मीद थी, वह इतने दिन न मिलने पर नाराज होगी, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, शायद उसने भी यह मूलमंत्र समझ लिया है कि अपेक्षा ही दुःख देती है. कल सुबह खत लिखने बैठी ही थी, जून आ गये वह छोटी बहन का पत्र लाये थे, पढ़कर अच्छा नहीं लगा, रिश्तों के कारण कितना खिंचाव हो सकता है इस जगत में. जून भी थोड़ा परेशान हो गये. मार्च में उनके घूमने जाने के कार्यक्रम के बारे में सोचकर, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे उन्हें अपनी ओर से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और अपने कार्यक्रम को दर्शनीय स्थानों को देखने तक ज्यादा केन्द्रित रखना चाहिए न कि रिश्तेदारों से मिलने तक. एक तटस्थता बनाये रखकर अपने उन स्वप्नों को सच होते देखना चाहिए जो ताजमहल और मसूरी की कल्पना में उन्होंने देखे हैं. माँ-पापा तो यकीनन उन्हें देखकर प्रसन्न होंगे ही...इतना ही पर्याप्त है.






Monday, February 11, 2013

नए साल की नयी सुबह




 आज उससे पहले ही नन्हे ने उसकी डायरी में कुछ लिख दिया-
“इस साल यानि १९९३ में मैं बहुत खुश हूँ. आज मैं इतना खुश हूँ कि कोई सोच भी नहीं सकता. वैसे यह डायरी है तो माँ  की, पर मैं यानि सोनू इसमें लिख रहा हूँ. इसलिए मैं यह डायरी बंद कर रहा हूँ, अब माँ कल से इसमें लिखेंगी”,

जब वह लिख रहा था अपने छोटे छोटे हाथों से तो वह सोच रही थी-

उसकी आँखों की चमक में छुपी हैं
मेरी सारी खुशियाँ, नन्हे हाथों में कैद हैं.
मेरी आत्मा की हँसी ही तो फूट रही है
उसकी मुस्कानों में
नन्हे कदमों में चैन है, थिरकन है जिंदगी की...


  आज सुबह उठते ही एक दुखद समाचार मिला, पास के गांव के दो व्यक्तियों (पति-पत्नी) ने ट्रेन के आगे जाकर आत्महत्या कर ली, वह बेचैन हो उठी, भीतर कैसी कड़वाहट भर गयी, कुछ था जो बाहर आना चाहता था, कुछ कहना, कुछ लिखना चाह रही थी पर विचारों को केंद्रित नहीं कर पा रही थी. कोई इतना दुखी भी हो सकता है कि ..आत्महत्या जैसा विचार मन में आये..और फिर उस विचार को क्रियान्वित भी कर ले. शायद वे अज्ञात भविष्य से डर गए थे-
जब अज्ञात का भय इंसान को जकड़ लेता है,
सुन्न कर देता है मस्तिष्क को,
आस-पास की हर वस्तु डराती है,
छूटना चाहे पर नहीं छूट पाता उसके शिकंजे से...


नए वर्ष के दस दिन बीत गए हैं, आज ग्यारहवाँ दिन है, परसों छोटा भाई, अपने परिवार के साथ वापस चला गया, अभी वे लोग सफर में ही होंगे. इतने दिनों बाद इस तरह अकेले शांत वातावरण में बैठकर स्वयं से सम्बोधित होना अच्छा लग रहा है. उसने छह खत लिखे, माँ-पिता को तो खत भाई के हाथों कल ही मिल जायेगा. नए साल के दो कार्ड आए हैं, एक उसकी छोटी ननद व उसके पति का, एक चचेरे भाई का..फूलों से सजे हुए कार्ड्स. मौसम बहुत ठंडा और भीगा सा है, शायद नन्हे को ठंड लग रही होगी, या फिर बच्चे खेल-कूद, और पढाई में इतने व्यस्त रहते हैं कि उन्हें भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी की परवाह ही नहीं रहती. आज सुबह पता नहीं क्यों उसका मन उदास था, कुछ भी करने को मन नहीं कर रहा था, तभी लक्ष्मी ने हेल्पिंग हैंड बढ़ाया और मन हल्का हो गया, उसने कहा, छोटे-छोटे कपड़े प्रेस कर देगी और बड़े वह कर ले. शाम को उसकी एक सखी आएगी, उन्हें पॉपी की पौध देनी है और चिवड़ा-मटर खिलाना है

  
आज भी बादल हैं पर बरस नहीं रहे हैं, सुबह नींद देर से खुली, जून जल्दी-जल्दी तैयार होकर गए. ठंड से किसी हद तक डरते भी हैं. नन्हे का गणित का टेस्ट है आज, कल उसे गुणा करना सिखाया गया. मेज पर ढेर सारी पत्रिकाएँ पढ़ने के लिए एकत्रित हो गयी हैं, पिछले दिनों वे सब घूमने में व्यस्त रहे, पर अब उसका मन इन पत्रिकाओं में उतना नहीं लगता, अब कुछ और चाहिए मस्तिष्क को, जो इस तरह की पत्रिकाएँ नहीं दे पातीं, जो पूरी तरह से भौतिकतावादी होती हैं.


Monday, March 12, 2012

घर वापसी


उजाला रहते वह लाइब्रेरी गयी थी, लौटी तो अँधेरा होने लगा था. जबकि छह ही बजे थे, सात व आठ के बीच फोन आयेगा इसकी स्मृति मन में उल्लास जगा रही थी. आज फ्रिज की सफाई की, शायद एक दो दिन में जून वापस आने वाला है.
अभी-अभी जून वापस गया है, पहले ऑफिस फिर वहीं से दुबारा फील्ड. कल शाम जब फोन आया तो उसने शायद नूना की आवाज में छुपे दुःख को समझ लिया था. उसे किसी तरह नींद भी आ गयी पर रात को साढ़े ग्यारह बजे जानी-पहचानी डोर बेल बजी तो वह चौंक कर उठ बैठी. कितनी खुशी हुई उसे जून को देखकर, कितना सुकून मिला मन को और कितनी राहत आँखों को. उन्होंने कितनी बातें कीं, कितने आँसू पोछें, उसका कोई हिसाब नहीं, पर यह रात उसे कभी भी नहीं भूलेगी. वह उसे ही खोज रही थी और तब वह आया अपने अंतर का सारा स्नेह लिये. उसकी पुकार व्यर्थ नहीं गयी.
आज फोन आया कि वह वापस आ रहा है और फिर नहीं जाना है. नूना को लगा कि कहीं वह उसकी वजह से तो नहीं आ रहा या कि कल रात को उसके आने से किसी ने कोई बात कह दी है. वह आकर ही बताएगा कि क्या कारण है इस शीघ्र वापसी का. दोपहर को मेजपोश बनाने किसी परिचित के यहाँ गयी वह बुनाई का कार्य कर रहीं थीं.
जून आया तो कार से उतर कर दरवाजे तक आते समय उसकी मुस्कान देखकर ही (वह विवश मुस्कान) वह समझ गयी थी कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है. पिछले दिन फोन पर बात करने से और यह जानकर कि वह तीन-चार घंटे तक काम के समय सो रहा था, वह समझ गयी थी कि उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है. अब वह घर आ गया था, उसे एक-दो दिन में ठीक हो जाना था. वहाँ उसे धूप में खड़ा होना पड़ता था और कुछ घर की, कुछ उसकी चिंता के कारण वह ठीक से नहीं रह पाया. पहली बार उसे दो दिन की सिक लीव लेनी पड़ी. आज गया है वह ऑफिस. दो दिन वे चौबीस घंटे साथ रहे, वह जो मोरान जा कर दूर हो गया था भौतिक रूप से, यहाँ उसके बहुत पास आ गया था, दिन भर वर्षा होती रही शाम को वे टहलने गए.