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Sunday, January 13, 2019

जॉप नाउ और बिग बास्केट



आज सुबह नींद जल्दी खुली. प्रातः भ्रमण, प्राणायाम, व्यायाम सभी कुछ समय से हुआ. ठंडी हवा बह रही थी., जब वे टहलने गये. हल्के बादल भी हैं आकाश पर. गुलदाउदी के पीले पुष्प भी मिले फूल वाली मालिन से, हल्की सी फुहार चेहरे पर पड़ रही थी. नाश्ते में रागी का चीला बनवाया, जून ने जॉपनाउ से मंगवाया था रागी. नन्हा कल रात फिर देर से आया, सुबह उठते ही चला गया. इस समय हल्की धूप निकल आई है. रसोइया दोपहर का भोजन बनाकर चला गया है. महरी सफाई कर रही है. आज ब्लॉग पर दो पोस्ट्स सीधे ही लिखकर डालीं. कल पहली बार एक ब्लॉग पर मोबाइल पर लिखा था. कल विश्व विकलांग दिवस है. असम में होती तो व्यस्तता कुछ अलग होती. कल भतीजी का जन्मदिन है, उसके लिए कविता लिखी है. कल दीदी का फोन आया था, उन्हें नन्हे की मित्र के बारे में नहीं बताया है, एक दिन तो बताना ही होगा.

आज नन्हे का अवकाश है. सुबह का नाश्ता उसी ने बनाया और शाम की चाय भी. इस समय बाजार गया है. मौसम आज अच्छा है, धूप निकली है. कल रात को उसका एक मित्र अपनी पत्नी के साथ आया था, उन्हें पानी-पूरी खिलाई. जून को कल सुबह की प्रतीक्षा है, जब उनका प्लास्टर खोला जा सकता है. पिताजी व छोटे भाई से बात हुई, उसके विवाह की वर्षगांठ है, उसके लिए लिखी कविता उसे पसंद आई. तीन पोस्ट्स भी लिखीं, लिखने के लिए यहाँ समय मिल जाता है, क्योंकि घर का कोई विशेष काम नहीं करना होता. नन्हे का लाया एक खेल खेला, ‘कटान’, उसमें दस अंक मिले, पर एक जगह नियम के खिलाफ जाकर. कुछ देर अक्षय कुमार की फिल्म देखी ‘एयर लिफ्ट’. फिल्म काफी अच्छी है.

आज जून के पैर का प्लास्टर खुल गया है, पर अभी दो हफ्ते उन्हें और यहाँ रहना है. नन्हा अस्पताल ले गया था, फिर घुटने पर लगाने के लिए एक बेल्ट देने आया, जिसका नाम ‘रॉम नी बेल्ट है. वे लोग दुबई भी नहीं जा रहे हैं. छोटी बहन को बताया तो वह कुछ परेशान हुई, पर उन्हें व्यक्ति, वस्तु तथा परिस्थिति पर अपने मन की ख़ुशी को निर्भर नहीं करना है. आज ब्लॉग पर एक त्वरित रचना पोस्ट की.

शाम के पांच बजे हैं, अभी भी धूप निकली है यहाँ. असम में अँधेरा हो गया होगा. जून बेड पर व्यायाम कर रहे हैं. कल रात्रि साढ़े ग्यारह बजे तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का देहांत हो गया. कल शाम से ही उनकी सम्भावित मृत्यु की खबर टीवी पर आ रही थी. वह पिछले दो महीने से अस्पताल में थीं. जयललिता ने राजनीति में कदम रखने से पूर्व फिल्मों में भी काम किया था. हिन्दी की एक फिल्म में भी धर्मेन्द के साथ उन्होंने एक भूमिका निभाई थी, जो वह इस समय मोबाईल पर देख रही है. इस समय बचपन में सुना एक गाना, क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी सूरत छिपी रहे, नकली चेहरा सामने आये, असली सूरत छिपी रहे...बज रहा है. यहाँ नेट की स्पीड बहुत ज्यादा है.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा. सुबह से शाम कैसे हो जाती है और समय कहाँ चला जाता है, पता ही नहीं चलता. आज भी दोपहर के दो बज चुके हैं. कहीं पढ़ा था कि उम्र के साथ-साथ काम करने की गति कम हो जाती है, इसलिए उम्रदराज लोगों को समय सदा जल्दी भागता हुआ लगता है. जून विश्राम कर रहे हैं, सुबह नाश्ते में उन्होंने स्वयं बनारसी तरीके से चिवड़ा-मटर बनवाया, चाय नन्हे ने बनाई, उसने केवल फल काटे. नन्हा शनिवार होने के बावजूद दफ्तर चला गया है, शाम तक आएगा. एक फिल्म लगाकर गया था, B4G, एक बड़े दैत्य की कहानी थी, जो आदमियों को सपने देता है. अद्भुत कल्पना और फोटोग्राफी है फिल्म में. मौसम आज अच्छा है, न ठंड न गर्मी, धूप खिली हुई है. सुबह मीनाक्षी मन्दिर के बाहर से सुंदर फूल मिले, पीले और लाल फूलों की एक माला भी ! आज उन्हें बाजार जाकर फल लाने हैं इससे पहले कि नन्हा बिग बास्केट में आर्डर कर दे.