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Friday, April 10, 2026

टैको और बुरीटो

टैको और बुरीटो


आज दोपहर बाद जून उसे रिलाइंस ट्रेंड्स ले गये। पहली बार पाँच कुर्ते एक साथ ख़रीदे। पापाजी के लिए एक स्वेटर भी लिया। दिन भर वर्षा होती रही। सोलर पैनल में बिजली का न्यूनतम उत्पादन हुआ, मात्र पाँच यूनिट, धूप वाले दिन बीस यूनिट तक हो जाता है। तीन दिन बाद उन्हें यात्रा पर निकलना है। पापाजी उनके आने की राह देख रहे हैं। जून ने छोटी बहन के नये फ़ैमिली ट्री के लिए फ़ोटो प्रिंट कर लिए हैं।


आज शाम जून कगली पूरा थाने में सर्कल इंस्पेक्टर से मिले, साथ ही बेसकॉम के एक अधिकारी से भी। वे लोग कल सोसाइटी में आयेंगे। असोसिएशन के काम के सिलसिले में उन्हें नये-नये लोगों से जान-पहचान के साथ, नये अनुभव भी हो रहे हैं। 


आज वे दोनों एक नये परिचित परिवार से मिलने गये। संयोग वश उनका जन्मदिन था, केक, बोंडा व मिठाई से स्वागत किया। वापसी में एक रिटर्न गिफ्ट भी। सुबह घर पर मीटिंग थी, परसों जून को सोसाइटी के बिल्डर के दफ़्तर भी जाना है। विशेष सभा की सूचना दे दी गई है। 


आज बहुत दिनों बाद नूना ने डायरी उठाई है। यात्रा से आने के बाद से सर्दी लगी हुई थी, गला चुभ रहा था। आज कोरोना टेस्ट कराया है, रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आएगी। सुबह टहलने गई तो कुछ तस्वीरें खींचीं, एक फ़ोटो ‘प्रतिबिंब’ कई लोगों को अच्छा लगा।जून अपने काम में फिर पूरी तरह जुट गये हैं। 


सुबह पाँच बजे नींद खुली। घर से आने के बाद ‘साधना’ पूरी तरह से आरम्भ नहीं हुई है। रिपोर्ट आनी बाक़ी है, नेगेटिव ही होगी। उसे याद है, वहाँ खुले में प्राणायाम, ध्यान आदि करती थी, तभी सर्दी लगी होगी।पापाजी ने उससे लेखन के बारे में पूछा।कविता लिखना जैसे छूट ही गया है, फिर किसी दिन अपने आप ही रस बरसेगा काव्य का। छोटे भाई की नातिन के लिए उसके पहले जन्मदिन पर एक कविता लिखी है। भतीजी व भांजी के छोटे पुत्र के लिए भी।


आज भी रिपोर्ट नहीं आयी। सोनू की रिपोर्ट निगेटिव आयी है। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, बहुत सी बातें भूल जाते हैं, अब अकेले रहने में थोड़ी दिक़्क़त होने लगी है। परमात्मा उनकी सहायता करेंगे। नन्हा व सोनू आये थे, चायनीज सब्ज़ी व चावल बनाये दोनों ने, शाम को कॉफ़ी। दोपहर को सबने जुरासिक वर्ल्ड देखी, बहुत रोमांचक फ़िल्म है। 


आज सुबह पक्षी विहार से शुरू हुई और शाम विलेज ड्राइव पर समाप्त हुई। दोपहर को पहली बार दम बिरयानी बनायी। शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। बाइबिल में आये विरोधाभासों पर एक चर्चा सुनी।चर्चाकार ने अलग-अलग पुस्तकों में सुसमाचारों के विवरण और वंशावलियों में आये अंतर का ज़िक्र किया। बाइबिल में उत्पत्ति के दो वृत्तांत हैं और ईसामसीह की मृत्यु के विवरण भी अलग-अलग हैं। शायद इसलिए कि इसे कई लोगों ने लिखा था और बाद में संकलित कर दिया गया। लेकिन इसके मूल संदेश में इन विरोधी बातों के कारण कोई अंतर नहीं आता। 


शाम को पापाजी का फ़ोन आया, उन्होंने नूना की कविताएँ पढ़ीं, लेख भी। कह रहे थे, संभवत: उसके पिछले जन्म के संस्कार जागृत हुए हैं। उसने उन्हें बचपन में घर पर मिले संस्कारों की बात कही। उन्हीं से उसे प्रेरणा मिली है कि अपना समय व ऊर्जा परमात्मा को समर्पित रचनाओं को लिखने में लगानी हैं। 


आज वे सोसाइटी में रहने वाली एक परिचिता की बिटिया के विवाह समारोह में होटल ललित अशोक गये।वापसी में यहाँ की प्रसिद्ध कृत्रिम झील सैंकी टैंक देखने के लिए रुके, जो वहाँ से नज़दीक थी, किंतु उसका प्रवेश द्वार बंद था। यह टैंक बहुत पुराना है और सैंतीस एकड़ भूमि में फैला है, इसकी अधिकतम चौड़ाई आठ सौ मीटर है। जून किसी काम के सिलसिले में आज नापा के एक अन्य निवासी के यहाँ गये, उनकी पत्नी हिन्दी धारावाहिक “घर घर की कहानी” को कन्नड़ में डब करने का काम कर रही हैं।


आज घर पर असोसिएशन की विशेष सभा हुई। कमेटी ने दो प्रस्ताव रखे थे, पर पास नहीं हो पाये। अगली मीटिंग मार्च में होगी। दोपहर को नन्हे ने मेक्सिकन खाना बनाया था, “टैको और बुरीटो” बहुत स्वादिष्ट लगा। लगभग एक महीने बाद शाम को वे आश्रम गये। वहाँ जाते ही एक अनोखी ऊर्जा का अहसास होता है। गुरुजी शाम को एक बार नित्य दर्शन देते हैं, पर तब तक वह जा चुके थे, ऐसा चौकीदार ने बताया। वे सूचना केंद्र भी गये, मुख्य द्वार पर जो होर्डिंग लगी है, उसका प्रिंट पुराना हो गया है। उसे बदलवाने के लिए जून ने बात की। अगले महीने दो दिन तक सुबह एक घंटे के लिए गुरुजी का भगवद् गीता का कार्यक्रम है, जून ने कहा है, वह उसे छोड़ आयेंगे।बहुत दिनों के बाद आश्रम में गुरुजी को सुनने का अवसर मिलेगा।  


आज दिन भर सुबह देर से उठने का असर बना रहा। रात्रि की नींद से जो शक्ति शरीर व मन एकत्र करता है, यदि सुबह, समय से न उठकर तंद्रा में व्यतीत हो, तो सारी ऊर्जा व्यर्थ ही चली जाती है।भगवद् गीता के लिए रजिस्ट्रेशन हो गया, परसों पहचान पत्र लेना है।


आज कुन्नूर में भारतीय वायुसेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल विपिन रावत तथा उनकी पत्नी का देहांत हो गया। उनके साथ बारह जवान और थे। वे कोयंबटूर के सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज जा रहे थे।घने बादलों और धुंध के कारण शायद पायलट सामने ठीक से देख नहीं पाया, जिससे हेलीकॉप्टर पहाड़ों या पेड़ों से टकरा गया।


आज सुबह वे दोनों आश्रम गये, फिर शेखर नेत्रालय। लगभग दो वर्ष बाद आँखों की जाँच करवायी।एक नया चश्मा बनने दिया है।वहाँ से नन्हे के घर चले गये। सोनू ने बहुत अच्छी तरह से स्वागत किया। उसने अपने ऑफिस के मज़ेदार किस्से भी सुनाये। नूना ने छोटे भांजे के जन्मदिन पर कविता लिखी।


आज दो वर्षों के बाद पहली बार आश्रम में किसी कोर्स में गुरुजी को सुना।कल भी जाना है।भगवद् गीता के आठवें अध्याय की व्याख्या अति सरल लग रही थी। इसमें अर्जुन श्रीकृष्ण से ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के बारे में प्रश्न पूछते हैं।श्रीकृष्ण ने कहा, परम अविनाशी तत्व ही 'ब्रह्म' है और प्रत्येक शरीर में जीवात्मा का रूप 'अध्यात्म' है।जीवों के उन भावों का मिट जाना कर्म कहलाता है, जो उनके भीतर अच्छे या बुरे संकल्प पैदा करते हैं।पाँच भूत अधिभूत हैं और परमात्मा का विराट स्वरूप अधिदैव है, जिसमें सूर्य, चन्द्र, वरुण आदि सभी देवता स्थित हैं। कृष्ण स्वयं सभी देहधारियों में अंतर्यामी रूप से रहते हैं। आज नन्हा व सोनू कर्नाटक के हसन जिले में पश्चिमी घाट पर स्थित एक पहाड़ी स्थान सकलेशपुर गये हैं। यहाँ अति प्राचीन सकलेश्वर शिव मंदिर है। टीपू सुल्तान का एक क़िला भी है।  

Thursday, December 26, 2013

गुलाबी मुसंडा


फिर वर्षा की रिमझिम ! कुछ देर पूर्व एक सखी से बात की उसका बुखार अभी उतरा नहीं है, आज चौथा दिन है, एक और सखी ने बताया कि उसके पति को भी viral fever हो गया था. तन को तोड़ कर रख देता है यह बुखार, चारों ओर फ्लू फैलने की खबर सुनकर कभी-कभी वहम भी होने लगता है. सुबह समय पर उठी, पढ़ाया, पर पाठ करने बैठी तो एक भी श्लोक ठीक से ग्रहण नहीं कर सकी. कुछ देर फिल्म देखी, ‘अंतरीन’ डिम्पल कपाडिया की बंगाली फिल्म, अच्छी थी. कल शाम वे बाजार गये नन्हे को जन्मदिन में मिली एक टीशर्ट का बड़ा साइज़ लेने, छोटा सा ही बाजार है यहाँ सो आसानी से बदल गयी.

इस समय वर्षा थमी है, हल्की धूप, हल्की ठंडी हवा में आज फिर मन ने एक वादा किया है और अब उसे निभाना है. ब्रह्म मुहूर्त में उठ गयी थी गुलमेहंदी के पौधों की लम्बी कतार में वर्षा या ओस की बूंदें मोती सी चमक रही थीं. एक दूसरी छात्रा को आज आना था, पर वह उठ ही नहीं पाई. कुछ देर आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का लेख ‘आत्म निर्भरता’ पढ़ा, फिर ध्यान, पर मन स्थिर नहीं हुआ. अज पत्र लिखने हैं, कितने दिनों से कितने पत्र जवाब की प्रतीक्षा में हैं और उनके पीछे पत्र पाने वाले दिल भी. जून कल शाम अकेले टहलने गये, पर शाम को अकेले रहना उन दोनों को ही पसंद नहीं सो अब केवल सुबह ही पढ़ाएगी.

कल सुबह सिर्फ समय ही लिखा था, याद आया, एक फोन करना है, एक सखी दो-तीन बार फोन कर चुकी थी. उसे नैनी, माली और उस किताब के लिए उसकी सहायता चाहिए थी, अफ़सोस वह  किसी भी मामले में उसकी मदद नहीं कर पाई. सोचा फोन करके इतना तो बता दे कि उसने कोशिश की थी. उसने बताया, ससुर की तबियत ठीक नहीं है, भैया भाभी की बस का एक्सीडेंट हो गया था. समस्याएं कभी कभी एक साथ आकर खड़ी हो जाती हैं. फिर ग्यारह बज गये और उन्होंने फोन रखे. आज सुबह पड़ोसिन के यहाँ हारमोनियम पर अभ्यास करने गयी. कुछ देर बगीचे में काम किया, दोपहर को सिलाई की, पर लगता है लखनवी चिकन का कुरता ज्यादा ही टाइट कर लिया है. जून कल चार पत्रिकाएँ लाये थे, कुछ देर पढ़ीं, अभी सांध्य भ्रमण के लिए जाना है, नन्हे को पढ़ाना है, फिर रात्रि भोजन और एक दिन गुजर जायेगा, भला-भला सा एक दिन, इसी तरह करते-करते इतने साल गुजर गये, नन्हा बड़ा हो गया, वह थोड़ी समझदार हो गयी, जून ने गुस्सा करना छोड़ दिया...उनके पास पहले से ज्यादा सामान हो गया, पर हिसाब लगाने बैठें तो उनकी मुट्ठियों में क्या आयेगा... जिन्दगी एक व्यापर तो नहीं, गाँधी जी कहते हैं और गीता का भी यही उपदेश है. अपनी शक्तिनुसार कर्म करते चलो...फल की कामना मत करो, अंत में अपने पास कुछ भी नहीं रह जाना है.

आज इस वक्त सुबह के छह भी नहीं बजे हैं और उसने अपना मूड या कहें चित्तावस्था बिगाड़ ली है. सुखे-दुखे समेकृत्वा लाभा-लाभौ जया जयौ...यह पढने वाली वह भी छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाती है. कल शाम अपनी की एक गल्ती (सिलाई में) पर तथा नन्हे पर झुंझला उठी थी फिर उसी बातूनी सखी के उस अर्थहीन काम पर भी और आज सुबह-सुबह ही उस नई छात्रा के न आने पर, उसे पढ़ान उसे अच्छा लगा था, वह होशियार है थोड़ी सी लापरवाह है, उसका न आना अच्छा नहीं लगा, पर दुनिया में ऐसी कई बातें हैं जो अच्छी नहीं लगतीं या लगती हैं, सब पर तो किसी का वश नहीं है. फिर बेवजह मस्तिष्क की नसों को क्यों तनावग्रस्त करें. ध्यान करने बैठी तो वही खिंचा-खिंचा सा मस्तिष्क और ऐसे में पीठ में भी हल्का दर्द. शारीरिक लक्षणों का स्रोत तो मन ही है और यदि दिन की शुरुआत ही ऐसी हो तो...गुलाबी फूलों वाला मुसन्डा का पेड़ अभी भी मुरझाया हुआ है. उसको पानी दिया, आधा कप चाय पी, कुछ देर असमिया किताब व health पढ़ी. समाचारों में सुना K R Narayanan नये राष्ट्रपति चुने गये हैं और लालू प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय जनता दल को संयुक्त मोर्चा में शामिल न करने का फैसला किया है. and now she is feeling better equipped to face the humdrum of life.

   


Saturday, August 17, 2013

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय


कल वे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ‘जोरहाट’ गये थे, सुबह सात बजे घर से निकले और रात साढ़े आठ बजे वापस लौटे. दोपहर लगभग पौने एक बजे वे जोरहट में ONGC के गेस्ट हाउस पहुंचे. पहले BHU की प्रार्थना पढ़ी गयी, फिर एक-एक करके सभी सदस्यों ने अपने BHU प्रवास के संस्मरण सुनाये, जून ने भी अपना अनुभव बताया. फिर भोज हुआ, सभी लोग एक दूसरे के लिए कुछ हद तक नये थे. सदा की तरह वह भीड़ में खुद को अकेला महसूस कर रही थी. पौने तीन बजे वापसी की यात्रा शुरू हुई, कुल मिलाकर यात्रा अच्छी रही. रात को सोते वक्त अहसास हुआ नौ-दस घंटे बस में बैठे रहने से हो गयी थकान का, स्वप्न भी वहीं के आते रहे. इस समय नन्हा हिंदी का अभ्यास कर रहा है और उसने छोटी भांजी के लिए जन्मदिन का कार्ड पोस्ट करने के लिए जून को दिया है. वह दुबली-पतली, शर्मीली सी लेकिन अपने इरादों की पक्की बालिका है. आज सुबह देर से उठी तो जागरण नहीं सुन पायी, पर नहा-धोकर जब गीता पाठ करने बैठी तो कुछ श्लोक पढकर यह महसूस हुआ, जब वह इन बातों का पालन ही नहीं कर सकती तो मात्र पढ़ने से क्या लाभ है, गीता के उपदेश बहुत महान हैं और उन पर चलना उसके लिए मुश्किल है, फिर यही संतोष दिया मन को कि बार-बार पढने से स्मरण रहेगा, भीतर चलने वाले द्वंद्व को जीतने के लिए इन्द्रियों से परे मन और मन से परे बुद्धि, बुद्धि से परे आत्मा की शरण में जाना होगा.

Today she got two letters, one from home and other from manjhla bhai, both are written in good spirit and mood. Father advises us to be healthy and smart and brother says that he is happy to see our small family living together happily. Yesterday some lady called her for maths tuition for her daughter. They also went for dinner to a friend’s place, as usal she made so many things and in large quantity but…anyway it was good after a long time to eat together.

आज ‘जागरण’ में सन्त ने भक्तियोग पर प्रकाश डाला पर यह उसके क्षेत्र की बात नहीं है. कल लाइब्रेरी में health mag में मानसिक स्थिरता व शांति पाने पर पर एक अच्छा लेख पढ़ा, वही बातें जो गीता या अन्य धार्मिक पुस्तकों में उसने पढ़ीं हैं उन्हीं को आधार मानकर उसमें सुझाव बताये गये हैं, बार-बार पढ़ते रहने पर वे उसे याद हो गये हैं, फिर भी कभी कोई बात होने पर उनका उपयोग नहीं कर पाती है उतनी शीघ्रता से. यूँ अपने आपको नकारने और दोषी बनाने की प्रवृत्ति भी ठीक नहीं है उस लेख के अनुसार. अपने उन कार्यों को याद करके जिन्हें कर सकत है स्वयं की सराहना तो कोई करता नहीं. सराहना करने लायक कोई बात नजर न आये तो ? तो अपने अंदर ऐसा कुछ  जागृत करना होगा कि  सराहना की जा सके.

आज दोपहर उसे गणित में ‘सेट थ्योरी’ पढ़ानी है. मौसम अच्छा है. आज सुबह  गीता पाठ करने के बाद ध्यान लगाने का प्रयत्न किया पर मन है कि कहीं से कहीं पहुंच जाता है और जो बातें उस क्षण से पूर्व उसके ख्याल में भी नहीं थीं वह सोचने लगता है. हजारों वर्षों से ऋषि-मुनि मन को नियन्त्रण में रखने के उपाय खोजते आए हैं. सभी धर्मों में संयम पर बल दिया है. कल उसने टीवी पर ‘सैलाब’ देखा, शिवानी और रोहित की प्रेम कहानी. कल उसकी एक मित्र ने जगजीत सिंह का कैसेट insight दिया, अभी सुना नहीं है उसने, जगजीत सिंह की आवाज में बहुत गहराई है. गम की गजल हो या ख़ुशी का नगमा, उनकी आवाज दोनों से इंसाफ करती है. कल उसने पंकज उद्हास के एक कैसेट ‘कभी खुशबू कभी नगमा’ के बारे में भी सुना, कभी तिनसुकिया गये तो लायेंगे, उसने सोचा, शायद यहाँ भी मिल जाये पर यहाँ वह बाजार कम ही जा पाती है. जून आजकल समय से घर लौट आते हैं, इसका अर्थ हुआ कि उनका मन घर में बहुत लगता है,



Tuesday, May 7, 2013

विश्व संचार दिवस



आज जबकि उसे भोजन में सिर्फ दाल ही बनानी थी, पौने ग्यारह बज गए हैं, और अब जाकर वह सुबह के कामों से निवृत्त हुई है. अभी भी सलाद आदि का काम है जो जून के आने के बाद ही करेगी, थोड़े से पल ये जो मिले हैं इनका उपयोग कर ही लेना चाहिए. कल जून ने भगवद्गीता के दो कैसेट और रिकार्ड कर दिए. इस समय भी एक बज रहा है, “जो स्थिरवान पुरुष सर्दी-गर्मी, मान-अपमान, सुख-दुःख में सम है, जो ममता से रहित है, वह मुझे प्रिय है” इतने उच्च आदर्शों तक पहुंच पाना असम्भव नहीं तो कठिन अवश्य है, किन्तु वह किसी सीमा तक इन बातों पर अमल कर सकती है. मन को शांत रखने के लिए यह रामबाण है यानि सर्वोत्तम उपाय. कल उसकी एक उड़िया सखी अपनी नवविवाहिता ननद और उसके पति जो डॉ हैं, को लेकर आई थी, दोनों बहुत शांत स्वभाव के लगे, अच्छा लगा उनसे मिलकर, उसने उन दोनों को एक पेन सेट व दो पेन दिए जो पिता ने उसे बरसों पहले दिए थे. कल दोपहर बाद उसने सात पत्र लिखे, भाइयों को भाईदूज का टीका भेजना था, और दो कार्ड्स भी जो उसकी पड़ोसिन ले आयी थी तिनसुकिया से, शाम को उसे एक सखी के यहाँ जाना है, ‘जूनून’ देखने के बाद, उसे लगा कि वह इतनी छोटी-छोटी बातों को इतना महत्व देने लगी है कि उन्हें लिख रही है, शायद घर गृहस्थी के इस ताने-बाने में उलझ कर रह गया है उसके मन का वह कोना भी जो किसी और तरह सोचता था..पर यह घर संसार उसे इतना प्रिय है कि इसके बदले स्वर्ग भी मिले तो तुच्छ है. नन्हे के भोले-भाले से सवाल और शरारतें, जून का झूठमूठ का गुस्सा, सभी कुछ तो मोहक है. लेकिन उसके पास और भी बहुत कुछ है जो महत्वपूर्ण है.

  परसों रात की तरह कल स्वप्न में बिल्ली को फिर देखा, एक बार लगा गला घुट रहा है, शायद उसकी चेन फंस गयी थी. दीवाली की सफाई अभी बहुत शेष है. कल दोपहर बाद वे पड़ोसी के यहाँ गए, लगभग शाम को ही उनके यहाँ कम्यूनिटी फीस्ट था, अच्छा लगा, लोगों को बेहिचक मिलते-जुलते देखना उसे हमेशा ही अच्छा लगता है.

  कल दोपहर से ही उसे वही हर बार वाला सिर दर्द था, जून ने ऑफिस जाने से पहले दवा दी, फिर चाय बनाकर भी. कुछ देर सोयी. शाम को वह बाम लगाकर लेटी थी और जून साइकलिंग करके आये ही थे कि एक मित्र परिवार आ गया, और वे लोग जा ही रहे थे कि एक दूसरा परिवार. कल सुबह से ही बैठक की शक्ल बिगाड़ दी थी सारे कुशन कवर आदि धोबी को दे दिए थे, खैर, आज अभी रेडियो पर कमेंट्री आ रही है, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के बीच मैच हो रहा है. कल नन्हा दोनों घुटनों में चोट लगाकर आया, बहादुर है, इतनी चोट पर भी रोया नहीं, शायद रोया भी हो उसे बताया नहीं. ही इज सच अ स्वीट ...जेम ऑफ हर हार्ट. उसे अपने से दूर भेजने की हिम्मत कैसे आयेगी. कल जून ने घरों पर फोन से बात की, वे लोग भी पीएंडटी फोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं. जून उसका व नन्हे का पासपोर्ट भी बनवा रहे हैं, इसका अर्थ हुआ कभी न कभी वे विदेश यात्रा पर जायेंगे ही.
  नवम्बर माह का पहला दिन, “विश्व संचार सप्ताह” का भी पहला दिन. दीवाली में सिर्फ एक दिन बाकी है, कल शाम उन्होंने नमकपारे बनाये आज नारियल के लड्डू बनाएंगे. उसकी उड़िया सखी का फोन आया था, उसे कैलेंडुला के पौधे चाहिए थे, वे उनका इंतजार करते रहे, जब वे नहीं आए तो वे एक मित्र के यहाँ चले गए, असमिया सखी ने आलू क्रश करके पकौड़े बनाये, जून को बहुत पसंद आये, कभी वह भी बनाएगी उनके लिए. कल शाम से ही वे एकदूसरे के साथ निकटता महसूस कर रहे थे, जैसे पहले-पहल किया करते थे, और जो कभी- कभी दुनिया भर के कामों में कहीं खो सी जाती थी. नन्हे की चोट अब ठीक हो रही है, आखिर उस दिन जून ने अन्ताक्षरी में भाग ले ही लिया, उन्हें गानों का शौक है और व गानों की धुन भी जानते हैं, लेकिन झिझक के कारण अपने इस शौक को बढ़ा नहीं पाते हैं, वह तो काम करते-करते ही गुनगुनाती रहती है. यकीनन गाना गाना थोड़ा बहुत तो आना ही चाहिए.