दोपहर का समय है, आज कई दिनों बाद ब्लॉग पर लिखा. जब से कार चलाना सीखना आरम्भ किया है, लेखन का समय घट गया है पर आजकल जून टूर पर गए हैं सो थोड़ा सा उलटफेर दिनचर्या में किया जा सकता है. आज सुबह एक सखी के साथ कोऑपरेटिव गयी, परसों मृणाल ज्योति में टीचर्स की कार्यशाला है. कुछ देर में डिब्रूगढ़ जाना है, फोन चार्ज हो रहा है, हाथ खाली हैं, सो कलम को कुछ देर हाथ में रहने का अवसर प्राप्त हो गया है. धूप आज बहुत तेज है, ड्राइवर का फोन आया वह आ गया है. सो अब शेष लेखन कार्य शाम को डिब्रूगढ़ से वापस आकर ही होगा.
कुछ दिनों का अंतराल, आज से नए महीने का आरम्भ है, अगस्त का महीना यानि आजादी दिवस का महीना, वर्षा का मौसम बदस्तूर जारी है. इसी महीने रक्षाबंधन का त्योहार भी है, सभी भाइयों को राखी भेजनी है, उसके पहले पत्र लिखने हैंऔर एक कविता भी. इस महीने ईद भी है और नाग पंचमी है, छोटी भतीजी का जन्मदिन है, बड़े भांजे का भी. इसी महीने रुद्राभिषेक भी होने वाला है, उन्हें उसमें सहयोग देने को कहा गया है. कल जून के एक सहकर्मी का जन्मदिन है, जिनके घर वे पहले सदा ही जाया करते थे, वक्त बदलता है, मित्र भी वक्त का ही हिस्सा है, सो वे भी बदल जाएँ तो इसमें कैसा आश्चर्य ? जून का जन्मदिन भी इसी महीने पड़ता है. आज व कल भी अमेरिका में रहने वाले दो भारतीय बच्चों के बारे में पढ़ा, सुना, जो छोटी सी उम्र में इतना बड़ा काम कर रहे हैं, उनका तन छोटा है पर ज्ञान वृद्धों का है, वैज्ञानिकों का है. कल टीवी पर एनआरसी पर अमित शाह की प्रेसवार्ता सुनी. असम में ऐसी अफवाह है कि चालीस लाख लोगों को भारत से कभी न कभी जाना पड़ सकता है, जो अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं. भविष्य ही बताएगा, कल क्या होने वाला है. धोबी ने पूछा, एनआरसी में उनका नाम है या नहीं, नैनी भी एनआरसी को लेकर परेशान थी, अधूरी जानकारी के कारण लोग कितना कष्ट पाते हैं, उनका भी सारा कष्ट अधूरी जानकारी के कारण ही है. क्लब की प्रेसीडेंट ने स्कूल का संविधान भेजा है, देखने के लिए, काफी संशोधन उन्होंने स्वयं ही कर दिए हैं.
सुबह उठे तो पिछले कुछ दिनों की तरह फुहार पड़ रही थी और मंद पवन भी बह रही थी, यानि घूमने के लिए आदर्श मौसम ! लौटकर प्राणायाम किया. सुबह के साढ़े नौ बजे हैं, आज से नैनी के बच्चों का स्कूल गर्मियों के अवकाश के बाद खुल गया है. वह घर काम आधा करके ही उन्हें स्कूल छोड़ने गयी है. आज कई दिनों बाद अपने पुराने समय पर ध्यान किया, परमात्मा से लगन लगी रहे तो भीतर कैसी शांति रहती है. अनावश्यक कार्यों को करते हुए वे बेहद आवश्यक कार्यों को भुला देते हैं. मौसम आज भी बादलों भरा है. अभी-अभी बगीचे में जाकर फोन से फूलों की तस्वीरें उतारीं, एक फेसबुक पर पोस्ट की, धीरे-धीरे फेसबुक पर बीतने वाले समय को कम करना है. आज शाम क्लब में मीटिंग है.
एक सामान्य सा दिखने वाला जीवन भी अपने भीतर इस सम्पूर्ण सृष्टि का इतिहास छिपाए रहता है, "यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे" के अनुसार हर जीवन उस ईश्वर को ही प्रतिबिम्बित कर रहा है, ऐसे ही एक सामान्य से जीवन की कहानी है यह ब्लॉग !
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Wednesday, February 19, 2020
Friday, March 1, 2019
चुकन्दर की फसल
परसों वे मिजोरम से लौट आये. यात्रा के दौरान लिखे विवरण से एक
आलेख लिखा है, ब्लॉग पर पोस्ट करना है. कल मृणाल ज्योति में ‘डाउन सिंड्रोम दिवस’
मनाया गया, डिब्रूगढ़ स्थित एक समाज सेवी संस्था व समाज के कई लोग शामिल हुए. पिछले
दिनों अनोखे स्वप्न भी देखे, एक में स्वयं को चाबी के बिना एक ताला खोलते देखा, माना
अपना ही घर था, पर इससे पता चला कि किसी न किसी जन्म में यह कला भी आती थी, तभी मन
में झट संदेह जागता है जब कोई वस्तु नहीं मिलती. एक स्वप्न में आकाश में विशाल रीढ़
की हड्डी देखी, सारी कशेरुकाएं ! कितनी विशाल आकृति थी, वह नन्हे को बुलाकर कहती
है, देखो आकश में क्या है, तब तक आकृति बदल जाती है. एक पक्षी को देखा, काले रंग
का कौआ, जो निकट आ जाता है और उसे वे सहलाते हैं, उस पर साबुन लगाते हैं, वह आराम
से बैठा रहता है. जून डेंटिस्ट के पास गये हैं.
आज अपेक्षाकृत मौसम गर्म है. सुबह सामान्य थी, ब्लॉग पर
लिखा, कई अन्य ब्लॉगस पढ़े, प्रतिक्रिया दी. लेखक या कवि के लेखन के लिए पाठक न हों
तो किसी हद तक उसका उद्देश्य अधूरा ही रह जाता है, लिखे को पढ़ने वाले हों तभी रचना
सार्थक है. स्वान्तः सुखाय लेखन भी पाठकों के कारण ही अपने लक्ष्य को पाता है.
टीवी पर समाचार देखे, उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए नई
सरकार पूरा जोर लगी रही है. जून मिजोरम से वापस आकर देहली भी घूम आये हैं. आज
दोपहर लंच पर नहीं आये, दफ्तर में कोई आयोजन था. बंगाली सखी के पतिदेव को दफ्तर
में प्रमोशन मिल गया है, शायद अब उसकी नाराजगी दूर हो. दुःख का कारण सुख की चाह ही
तो है. कई दिनों से उससे बात नहीं हुई है. छोटी बहन की खांसी अभी तक दूर नहीं हुई
है, उसे अपने मन को खाली रखना होगा पहले. दीदी से बात हुई, वह शायद इस वर्ष
आस्ट्रेलिया जाएँगी, शायद नार्वे भी जाएँ. नन्हे और सोनू से होली पर बात की, उन्हें पहली होली की बधाई दी,
अच्छा लगा उन दोनों को. आज अपने विवाह के वर्ष की डायरी पढ़ी, उसमें लिखा था, जून
अपने सीनियर्स के प्रेम पात्र बने रहें, ऐसे कामना वह करती है. ..और ऐसा ही हुआ है
!
आज अयोध्या कांड का अगला अध्याय लिखा. बड़ी ननद से फोन पर
बात की, उसके यहाँ जाने की बात भी, एक दिन अवश्य वहाँ जाना सम्भव होगा. अनेक वर्ष
पूर्व वे वहाँ गये थे, शायद दस-बारह वर्ष पूर्व. आज भी मौसम गर्म है, सर्दियों के
वस्त्र सहेज दिए और गर्मियों के निकाले. कौन जाने कल से वर्षा शुरू हो जाये और ठंड
पुनः लौट आये. आज बगीचे से चुकन्दर तोड़े और एक कटहल भी. अगले दो वर्ष वे ताज़ी
सब्जियों का आनंद और ले सकते हैं. उसका वजन आजकल बढ़ गया है. व्यायाम अधिक करना
होगा और भोजन कम, सीधा सा उपाय है.
Sunday, January 13, 2019
जॉप नाउ और बिग बास्केट
आज सुबह नींद जल्दी खुली. प्रातः भ्रमण, प्राणायाम,
व्यायाम सभी कुछ समय से हुआ. ठंडी हवा बह रही थी., जब वे टहलने गये. हल्के बादल भी
हैं आकाश पर. गुलदाउदी के पीले पुष्प भी मिले फूल वाली मालिन से, हल्की सी फुहार
चेहरे पर पड़ रही थी. नाश्ते में रागी का चीला बनवाया, जून ने जॉपनाउ से मंगवाया था
रागी. नन्हा कल रात फिर देर से आया, सुबह उठते ही चला गया. इस समय हल्की धूप निकल
आई है. रसोइया दोपहर का भोजन बनाकर चला गया है. महरी सफाई कर रही है. आज ब्लॉग पर
दो पोस्ट्स सीधे ही लिखकर डालीं. कल पहली बार एक ब्लॉग पर मोबाइल पर लिखा था. कल
विश्व विकलांग दिवस है. असम में होती तो व्यस्तता कुछ अलग होती. कल भतीजी का
जन्मदिन है, उसके लिए कविता लिखी है. कल दीदी का फोन आया था, उन्हें नन्हे की
मित्र के बारे में नहीं बताया है, एक दिन तो बताना ही होगा.
आज नन्हे का अवकाश है. सुबह का नाश्ता उसी ने बनाया और शाम की चाय भी. इस समय बाजार
गया है. मौसम आज अच्छा है, धूप निकली है. कल रात को उसका एक मित्र अपनी पत्नी के
साथ आया था, उन्हें पानी-पूरी खिलाई. जून को कल सुबह की प्रतीक्षा है, जब उनका
प्लास्टर खोला जा सकता है. पिताजी व छोटे भाई से बात हुई, उसके विवाह की वर्षगांठ
है, उसके लिए लिखी कविता उसे पसंद आई. तीन पोस्ट्स भी लिखीं, लिखने के लिए यहाँ समय
मिल जाता है, क्योंकि घर का कोई विशेष काम नहीं करना होता. नन्हे का लाया एक खेल
खेला, ‘कटान’, उसमें दस अंक मिले, पर एक जगह नियम के खिलाफ जाकर. कुछ देर अक्षय
कुमार की फिल्म देखी ‘एयर लिफ्ट’. फिल्म काफी अच्छी है.
आज जून के पैर का प्लास्टर खुल गया है, पर अभी दो हफ्ते उन्हें और यहाँ रहना
है. नन्हा अस्पताल ले गया था, फिर घुटने पर लगाने के लिए एक बेल्ट देने आया, जिसका
नाम ‘रॉम नी बेल्ट है. वे लोग दुबई भी नहीं जा रहे हैं. छोटी बहन को बताया तो वह
कुछ परेशान हुई, पर उन्हें व्यक्ति, वस्तु तथा परिस्थिति पर अपने मन की ख़ुशी को
निर्भर नहीं करना है. आज ब्लॉग पर एक त्वरित रचना पोस्ट की.
शाम के पांच बजे हैं, अभी भी धूप निकली है यहाँ. असम में अँधेरा हो गया होगा.
जून बेड पर व्यायाम कर रहे हैं. कल रात्रि साढ़े ग्यारह बजे तमिलनाडु की
मुख्यमंत्री जे जयललिता का देहांत हो गया. कल शाम से ही उनकी सम्भावित मृत्यु की
खबर टीवी पर आ रही थी. वह पिछले दो महीने से अस्पताल में थीं. जयललिता ने राजनीति
में कदम रखने से पूर्व फिल्मों में भी काम किया था. हिन्दी की एक फिल्म में भी धर्मेन्द
के साथ उन्होंने एक भूमिका निभाई थी, जो वह इस समय मोबाईल पर देख रही है. इस समय बचपन
में सुना एक गाना, क्या मिलिए ऐसे लोगों से जिनकी सूरत छिपी रहे, नकली चेहरा सामने
आये, असली सूरत छिपी रहे...बज रहा है. यहाँ नेट की स्पीड बहुत ज्यादा है.
पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा. सुबह से शाम कैसे हो जाती है और समय कहाँ चला
जाता है, पता ही नहीं चलता. आज भी दोपहर के दो बज चुके हैं. कहीं पढ़ा था कि उम्र
के साथ-साथ काम करने की गति कम हो जाती है, इसलिए उम्रदराज लोगों को समय सदा जल्दी
भागता हुआ लगता है. जून विश्राम कर रहे हैं, सुबह नाश्ते में उन्होंने स्वयं बनारसी
तरीके से चिवड़ा-मटर बनवाया, चाय नन्हे ने बनाई, उसने केवल फल काटे. नन्हा शनिवार
होने के बावजूद दफ्तर चला गया है, शाम तक आएगा. एक फिल्म लगाकर गया था, B4G, एक बड़े दैत्य की कहानी थी, जो आदमियों को सपने देता
है. अद्भुत कल्पना और फोटोग्राफी है फिल्म में. मौसम आज अच्छा है, न ठंड न गर्मी,
धूप खिली हुई है. सुबह मीनाक्षी
मन्दिर के बाहर से सुंदर फूल मिले, पीले और लाल फूलों की एक माला भी ! आज उन्हें
बाजार जाकर फल लाने हैं इससे पहले कि नन्हा बिग बास्केट में आर्डर कर दे.
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Wednesday, July 11, 2018
किन्डल पर रामायण
कल रात्रि चेतना सघन थी, जो भी विचार आता था,
मूर्त रूप होकर दिखने लगता था. कल दोपहर भी कितने अद्भुत दृश्य दिखे. छत की दीवार
से लटकते हल्के बैंगनी रंग के फूलों की झालरें..तथा तेज हवा में उड़ते पत्ते,
वृक्षों की डालियाँ, धूल तथा हवा का शोर भी कितना स्पष्ट था. अद्भुत है उनके भीतर
का संसार ! सुबह उठी तो मन उत्साह से भरा हुआ था. वे टहलने गये, फिर स्कूल गयी,
बच्चों ने ध्यान किया, उससे पूर्व ॐ की ध्वनि सुनाई दी तो वे सहज ही शांत हो गये.
घर लौटी तो नैनी घर में काम कर रही थी, पर पीछे का दरवाजा पूरा खुला था, उसने नैनी
को फटकारा, पर भीतर तब भी सन्नाटा था. ब्लॉग पर पोस्ट डालने के बाद कुछ देर किन्डल
पर पढ़ने का विचार आया, पिताजी बाल्मीकि रामायण की बहुत तारीफ कर रहे थे. छोटी बहन भाई
के घर पहुंच गयी है. वे उसे पुरानी तस्वीरें दिखा रहे हैं, जो वह व्हाट्सएप पर डाल
रही है. अभी कुछ देर पहले घर के सामने के हैलीपैड पर एक हेलिकॉप्टर उतरा, फिर उड़
गया, उसका शोर इतना अधिक था कि घरों से लोग निकल कर देखने आ गये. ‘पवन हंस’ नाम है
शायद इसका. जून के दफ्तर में एक टेंडर के कारण काफी हलचल है. बात दिल्ली तक जा
पहुँची है, आज उन्हें मंत्री के पीए का फोन आया था, जाने क्या हल निकलता है.
व्यक्ति के अहंकार के कारण ही ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं. पहली बार ऐसा हुआ
है कि उनका वास्ता मंत्रालय से पड़ा है. उच्च अधिकारी भी दबाव में हैं.
मार्च का अंतिम दिन ! सुबह सामान्य थी, रात्रि को हुई वर्षा के कारण हल्की
ठंडक थी, पर बादलों के पीछे से सूरज झांक रहा था. जून कल रात किसी सोच में मग्न थे
पर सुबह सहज थे. वह अपने दफ्तर में चल रहे एक केस के कारण पिछले दो माह से व्यस्त
हैं. सब कुछ को किसी खास कोण से देखा जाये तो सही जान पड़ता है. हर मानव को प्रकृति
आगे बढ़ने का अवसर देती है. यदि जीवन में संघर्ष न हो तो विकास भी नहीं होगा, हाँ,
विकास तभी सही होगा जब तथाकथित संघर्ष के पार कोई जाना सीख ले. आज भाई के घर पूजा
हो गयी होगी और वे आगे यात्रा पर निकल गये होंगे. आज भी ब्लॉग पर दो पोस्ट
प्रकाशित कीं, उसकी एक नई फेसबुक मित्र इन रचनाओं में काफी रूचि ले रही हैं. उसे
ब्लॉग की पोस्ट फेसबुक पर भी पोस्ट करनी चाहिए ऐसा भांजे ने कहा था.
जून आज कुछ परेशान लगे. जो स्वाभाविक है, उन्हें अनजान व्यक्तियों से फोन पर
व्यर्थ के आक्षेप सुनने पड़ रहे हैं. पर वह जरा भी क्रोधित नहीं होते, क्रोध से कोई
हल नहीं होने वाला, यह वह जानते हैं. यदि किसी के पास धन हो क्या वह भूखा रहेगा,
वस्त्र हों तो क्या वह ठंड में काँपेगा, फिर मानव क्यों अशांत रहे जब उसके भीतर
शांति का अपार स्रोत है. आत्मा के रूप में उसे आनंदका स्रोत मिला है और वह दुखी
है..आश्चर्य ही हो सकता है यह देखकर. जब भी कोई दुखी होता है, अपनी क्षमता का
अनादर ही कर रहा होता है. किन्तु वे अपने कार्य के प्रति समर्पित थे, अब उसमें कुछ
तो बदलाव आएगा ही, जीवन हर पल नया है, कब कौन सा मोड़ सामने आएगा, कौन जानता है.
नन्हे से बात की, वह भी किसी केस का सामना कर रहा है. किसी मरीज का डाटा लीक हो
गया. रात को एक-दो बजे तक घर पहुंच रहा था. आज सुबह वह उठी तो कितने अद्भुत दृश्य
दिखे, वाणी भी दिखी, लिखी हुई ! रात की कोख से सुबह का जन्म होता है, नींद के आगोश
से जागरण का !
Tuesday, December 19, 2017
भात करेले की बेल
रात्रि के सवा आठ बजे हैं. जून आईपीएल मैच का फाइनल देख रहे हैं
जो चेन्नई और मुम्बई के मध्य खेला जा रहा है. इसके पूर्व ‘पृथ्वीराज चौहान’ पर एक
एपिसोड देखा. उसने दिन भर में हुई विशेष बातों को स्मरण किया. आज दोपहर की कक्षा
में एक नया बच्चा आया, जिसके पिता उसे खुद छोड़ने आये थे और विशेष ध्यान देने को कह
गये हैं. बच्चों ने बहुत सुंदर कला कृतियाँ बनायीं. दोपहर को भात करेला की सूखी
सब्जी बनाई थी, जो जरा भी कड़वा नहीं होता. बगीचे में उसकी बेल अपने आप ही हर वर्ष
निकल जाती है और सब तरफ फ़ैल जाती है. आज मंझले भाई का फोन आया, वह तबादले पर लेह
जा रहा है. जून में वे भी वहाँ जायेंगे.
चार बजने को हैं शाम के. सुबह बिस्तर त्यागने से पूर्व संध्याकाल का अनुभव किया. बाहर वर्षा हो रही थी, बरामदे में ही टहलते रहे कुछ देर. अब जाकर थमी है. आज मंगलवार है, साप्ताहिक भजन का दिन, समूह में सत्संग किये सालों हो गये हैं. जून को पसंद नहीं है पर घर पर करना उन्हें अच्छा लगता है. संस्कार पड़ रहे हैं, एक दिन तो पनपेंगे. आज सुबह मृणाल ज्योति गयी, बच्चों को व्यायाम कराया, उन्हें अच्छा लगा. आज तीनों ब्लॉगस पर पोस्ट प्रकाशित कीं. जीवन में क्या महत्वपूर्ण है, यह समझने में व्यक्ति कितना समय लगा देता है. कल शाम को जून के एक सहकर्मी अपने परिवार के साथ आये थे, उनके साथ फिल्मों की बातें कीं, और पौधों की भी. वे मैकरोनी लाये थे. सालों बाद खायी.
एक दिन का अन्तराल, आज
का दिन कुछ अलग सा बीता, जून को चेन्नई जाना था सो भोजन दस बजे ही कर लिया. उसे भी
स्कूल से एक शिक्षिका के साथ अन्य स्कूलों में जाना था, लौटी तो एक बजने को था. वे
किशोरियों के एक कार्यक्रम के लिए आमन्त्रण देने कई स्कूलों में गयीं. हिंदी हाई
स्कूल, नहोलिया, गोपीनाथ बरदलै हाई स्कूल, लखिमी बरुआ हाई स्कूल, दुलियाजान गर्ल्स
कालेज, राष्ट्रभाषा हाई स्कूल और दुलियाजान उच्च विद्यालय. कल एक और स्कूल आशादीप
में जाना है. वापस आकर कुछ देर सोने की कोशिश की पर नींद नहीं आई. माली की बेटी
कुछ मांगने आयी थी, होते हुए भी उसे नहीं दी, शाम को दी. गधा अपनी मर्जी से ही
चलता है. परमात्मा उन्हें बेशर्त हर पल ही दे रहा है पर वे कितने सुविधा लोभी हैं.
कुछ देर नेट पर किशोरावस्था के बारे में पढ़ा. वह छात्राओं को कुछ व्यायाम सिखाएगी
और प्राणायाम भी. शाम को टहलते हुए उन वृद्ध सज्जन से मिलने गयी. बहुत जिंदादिल
हैं, उन्होंने अपना जीवन बहुत सलीके से जीया है. अभी भी सामाजिक कार्यों में
व्यस्त रहते हैं. सुबह उठकर योगासन करते हैं. आंटी ने दोनों हाथ फैलाकर घूमकर
दिखाया जो वे सुबह इक्कीस बार करती हैं. ज्ञान जीवन को पुष्पित करता है और गुरू का
होना कितना अंतर ला देता है किसी के जीवन में. गुह्यतम ज्ञान का खजाना मिल जाता
है, भीतर का प्रकाश मिल जाता है. उस प्रकाश के बिना ज्ञान टिकता नहीं. अंकल ने कहा,
वह उस प्रकाश को पा चुके हैं इसके बारे में कुछ नहीं कहेंगे. वाकई उसके बारे में
क्या कहे कोई. उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा है. नन्हे को भी बताया उनके बारे में. उसने
बताया वह एक अच्छे से नये घर में रहने लगा है, पौष्टिक आहार भी लेने लगा है.
तैराकी भी शुरू की है. उन्हें वहाँ आने के लिए निमन्त्रण दिया. अगस्त में वे उसके
पास जा सकते हैं. जून अभी तक चेन्नई नहीं पहुंचे होंगे, फोन अभी आया नहीं है.
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Wednesday, August 16, 2017
जगन्नाथ मंदिर - डिब्रूगढ़
आज शाम को क्लब में मीटिंग
है, वार्षिक उत्सव आने वाला है, सो देर तक चल सकती है मीटिंग. भोजन बना कर जाएगी,
उसने सोचा. जून ने बताया, कल वे लोग डिब्रूगढ़ जायेंगे, भगवान जगन्नाथ का एक नया
मन्दिर बन रहा है, दर्शनीय है, हूबहू उड़ीसा के पुरी मंदिर जैसा. उसमें प्राण
प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है. धीरे-धीरे यह मंदिर भी विशेष दर्शनीय व पूजनीय स्थल के
रूप में प्रतिष्ठित हो जायेगा. नैनी ने आज बताया वह गर्भवती है, पर जितना काम
करेगी उतना ही उसके लिए अच्छा है, जैसे पहले कर रही थी वैसे ही करेगी. उसकी हिम्मत
देखकर अच्छा लगा. उसे लगा, वे लोग व्यर्थ ही डर जाते हैं, उसे खुद भी तो शुरू-शुरू
में बहुत तकलीफ हुई थी, अपनी-अपनी समझ की बात है. उनके सारे दुःख वे स्वयं ही
बनाते हैं.
आज सुबह मृणाल ज्योति
गयी. ‘वर्ल्ड रिटार्डेशन डे’ था, झंडा फहराया गया. बच्चों के खेल हुए. वहाँ एक
टीचर ने एमवे का कैटेलौग दिया, वह कुछ समय से यह काम कर रही है. एक अन्य टीचर ने
बताया, उसकी चचेरी बहन अचानक ही गुजर गयी. अस्थमा था उसे, अपने जॉब में व्यस्त
रहती थी, पति भी व्यस्त थे, ठीक से इलाज नहीं कराया. आजकल शहरों में जो लोग बारह-बारह
घंटे काम करते हैं, अपने लिए समय निकालना कठिन होता है उनके लिए. इसी महीने यात्रा
पर जाना है. दिल्ली होते हुए वह घर जाएगी और जून अपने दफ्तर के कार्य से राजस्थान.
पिताजी का स्वास्थ्य अब पहले का सा नहीं रहा, वह यात्रा करना नहीं चाहते, उनसे
मिलना अच्छा रहेगा. एक वर्ष पूर्व उनसे मिली थी. एक वर्ष में वृद्धावस्था में काफी
परिवर्तन आ जाता है. तीनों भाभियों से बात की, सभी से मुलाकात होगी. उससे पूर्व गोहाटी
जाकर पासपोर्ट का नवीकरण भी करवाना है. जून उसके लिए एक सुंदर जूता लाये थे, जो
छोटा है, उसने हिंदी पढ़ने आने वाली छात्रा को भेजा है, उसे अवश्य पसंद आएगा.
आज मौसम अपेक्षाकृत ठंडा
है. सूर्य देवता के दर्शन नहीं हुए, बदली बनी हुई है. कल ही वे इस वर्ष ठंड न पड़ने
की बात कह रहे थे. दोपहर को ब्लॉग लिखा. कहानी अब नये दौर में आ चुकी है. सचमुच
जीवन तो ज्ञान के बाद ही शुरू होता है, उससे पूर्व तो वे अंधकार में भटकते रहते
हैं, बाद में उनके पास मशाल होती है. हिंदी के लेखों की प्रूफ रीडिंग करके उसने
भिजवा दिए, पर सामने बैठकर गलतियाँ दुरस्त कराने के लिए बाद में एक दिन प्रेस जाना
पड़ सकता है. ‘बाल्मीकि रामायण’ में भी नई पोस्ट लिखी., अभी बहुत कार्य शेष है पर
एक एक दिन तो पूरा होगा ही. नन्हे की
कम्पनी तरक्की कर रही है, दिल्ली में उसके विज्ञापन लगे हैं. प्रैक्टो अब
जाना-पहचाना नाम बनता जा रहा है. उसकी मित्र की माँ का फोन आया, उसे चिंतित न होने
के लिए कहकर उन्होंने अपनी कविताएँ पढ़ने को भी कहा. पढ़ी हैं उसने, कई बहुत अच्छी
हैं. उसे बाहर से बच्चों की पिटाई और उनके रोने की आवाजें आ रही हैं, बच्चों पर
कितने अत्याचार होते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है, और बच्चे अभिनेता भी होते हैं,
इतनी जोर से रोते हैं जैसे जान ही निकल जाएगी..कोमल तन और कोमल मन वाले बच्चे...!
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Sunday, July 16, 2017
फुटबाल का विश्वकप
कल से उसके बाँए कान में सुनाई देना कम हो गया है और एक आवाज
भी आती है. शायद इन्फेक्शन है या पानी चला गया है, अथवा तो वैक्स है और या तो
ज्यादा सुनने से कान की श्रवण शक्ति कम हो गयी है. उम्र के साथ-साथ भी शरीर में कई
परिवर्तन होते हैं. आज इतवार है और जून ने लंच में विशेष पुलाव तो बनाया ही था,
शाम को ब्लू बेरी, रोस्टेड आलमंड, डेट्स तथा बगीचे से तोड़ा ताजा भुना हुआ भुट्टा. कल
सिनेमा हॉल में HSKD देखी, फिल्म उसे ज्यादा पसंद नहीं आयी. अमेरिकन कॉर्न खाए और
चालीस रूपये कप वाली चाय पी, यानि कल दिन भर मस्ती की. शाम को सत्संग में गये.
गुरू पूर्णिमा उत्सव के कारण गुरू पूजा
थी. आज ट्विटर पर गुरूजी का संदेश देखा, यू ट्यूब पर उनका कल का संदेश भी कुछ देर
के लिए सुना था. अभी वे कुछ देर बैडमिंटन खेलेंगे फिर शेष भाग सुनेंगे. फुटबाल के
विश्व कप के खेल समाप्त हो चुके हैं. जर्मनी जीत गया है, ब्राजील चौथे स्थान पर
है. जून भी डायरी लिख रहे हैं. लिखने से बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है. जीवन को एक
दिशा मिलती है. वे वही हो जाते हैं जैसा सोचते हैं. चेतना जब परम के साथ जुड़ी होती
है तब कोई दुःख कोई परेशानी उन्हें छू भी नहीं सकती.
आज भी वर्षा के कारण प्रातः भ्रमण स्थगित करना
पड़ा, शाम को यदि मौसम खुल गया तो जा सकते हैं. उनके बगीचे में अन्नानास लगा है पर
जून ने बाजार से लाये अनानास की तस्वीर व्हाट्स ऐप के एक ग्रुप में डाल दी, सब लोग
खुश हैं और अगले वर्ष यहाँ आने का प्रोग्राम बना रहे हैं. अभी कुछ देर पहले ही
आँख-कान-गला विशेषज्ञ से मिलकर आ रही है. उनके केबिन के बाहर काफी लोग बैठे थे.
जून ने फोन कर दिया था सो सबसे पहले उसे ही बुलाया. कान साफ किया और अब खुला-खुला
लग रह है, कान में डालने की दवा भी दी है. उसका गला भी थोड़ा सा खराब है पर डाक्टर
ने देखकर कुछ कहा नहीं है. दवा के काउंटर पर भी काफी भीड़ थी. जनसंख्या इतनी बढ़ रही
है सो हर जगह भीड़ तो बढ़ेगी ही, धैर्य सिखाती है भीड़ भी. वहाँ बातूनी सखी मिली, उसे
भी इन्फेक्शन था, एक कोर्स कर चुकी है पर ठीक नहीं हुआ. नैनी ने तुलसी लाकर दी,
फिर गर्म पानी भी थर्मस में भर दिया है, वह बहुत ख्याल रखती है हर बात का. सलाद
सजाने में उसका जवाब नहीं. आज भी वर्षा हो रही है, जून अभी आने वाले हैं. उन्हें
भी उसका ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगता होगा जैसे उसे लिखकर लगता है. आज सुबह उन्हें कुछ अच्छी
बातें परमात्मा ने कहलवायीं इस मुख से, वे अवश्य ही उन्हें याद रख पाएंगे. उसका
जीवन भी सद्मार्ग से विचलित न हो, ऐसी प्रार्थना उसने अपने लिए की.
आज सुबह फिर एक अनोखे स्वप्न ने जगाया. एक नई ब्याहता
को उसके पति का नवजात शिशु थमाया जाता है, जिसकी माँ मर चुकी है. वह उसे स्तनपान
कराती है और लो..उसके स्तनों में दुग्ध उतर आता है. वात्सल्य की गहरी भावना उसके
मन में जगती है और यह चमत्कार घटता है. ऐसे ही परमात्मा की गोद में जब वे अबोध
शिशु की तरह वे जाते हैं तो उसका असीम आनंद उन्हें सहज ही मिलने लगता है. वह वहाँ
था ही, उसे प्रकट भर होना था. तभी संतजन परमात्मा को माँ के रूप में भजते हैं. माँ
कहने का भाव तभी सिद्ध होगा जब वे अबोध शिशु बन जाएँ, जो वास्तविक भी है. क्या
जानते हैं वे इस संसार के बारे में, उनकी जानकारी अल्प है और अज्ञान अनंत है. उससे
पूर्व भी कुछ स्वप्न देखे. एक में लोभ की प्रवृत्ति स्पष्ट दिख रही थी. स्वप्नों
की दुनिया भी कितनी विचित्र है. कल रात बिजली चली गयी थी. वे पहले पूजा रूम में
गये, जहाँ पांच खिड़कियाँ हैं, फिर बिजली आने पर अपने कमरे में, पुनः वहाँ जाना पड़ा
और फिर लौटे, नींद लेकिन आ ही गयी. परमात्मा की कृपा ही है गहरी निद्रा, लेकिन अभी
भी उसे स्वप्न बहुत आते हैं. जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति में भी तूरीया यानि चौथी अवस्था
बनी रहे, ऐसी ही कामना साधक की होती है, पर वह अवस्था कामना से नहीं मिलती.
सुबह किस स्वप्न ने जगाया याद नहीं, वर्षा नहीं
थी सो टहलने गये, आकाश गुलाबी था और हवा में हल्की सी ठंडक. दोपहर को वह बाजार
गयी, राखी बनाने का सामान खरीदा. अगले महीने की दस तारीख को राखी है, उसे बच्चों
के लिए ढेर सारी राखियाँ बनानी हैं. उन्हें भेजने की तैयारी भी करनी चाहिए. सुबह कविता
लिखी ब्लॉग पर और दोपहर को व्हाट्सएप पर पढ़ी. छोटी बहन ने सुंदर भजन गाया. शाम को
पुरानी पड़ोसिन का फोन आया, उसके पुत्र की मंगनी की खबर देने के लिए, दिसम्बर में
विवाह है. नन्हे ने बताया अगले तीन महीनों में उसकी कम्पनी में काम करने वालों की
संख्या दुगनी हो जाएगी.
Monday, April 3, 2017
विश्वकर्मा पूजा
दोपहर
के तीन बजे हैं, कितना सन्नाटा है चारों ओर. सुबह तेज वर्षा होती रही घंटों तक पर
अब मौसम खुल गया है. नैनी शायद कहीं गयी है, घर पर ताला लगा है, वरना बर्तनों की
आवाजें या उसके बच्चों की आवाजें गूंज रही होतीं. जून को कल रात राग-द्वेष के बारे
में बताया, पता नहीं कितना समझ में आया. जब तक कोई बात अपने ही भीतर से न उपजे समझ
में नहीं आती, उसके साथ तो ऐसा ही होता है, शास्त्रों में लिखी बातें कितने दिनों
बाद जब वैसी की वैसी भीतर से आती हैं तो लगता है, अच्छा ! तो यह अर्थ था. बहुत
दिनों से कोई कविता नहीं लिखी है. मन होता है कुछ लिखे दिल की गहराई से ..कल पिताजी
व छोटे भाई से बात हुई, उसका ब्लॉग पढ़ा उन्होंने. तीन सखियों से भी फोन पर हाल-चाल
लिया. एक का जन्मदिन आने वाला है, जिसकी माँ आजकल यहाँ आयी हुई हैं. उसके साथ हुए
वार्तालाप के आधार पर कुछ लिखेगी.
आज जून के दफ्तर जाना
है, विश्वकर्मा पूजा के उपलक्ष में वहीं दोपहर को भोज भी है. यहीं आकर उन्हें इस
पूजा के बार में संज्ञान हुआ. परसों गणेश पूजा है, दो तीन जगह पंडाल लगेंगे, वे
लोग बीहू ताली में अवश्य पूजा देखने जाते हैं, जो दक्षिण भारतीय आयोजित करते हैं.
उसकी उड़िया सखी के यहाँ भी बड़ा आयोजन होता है. जून के दफ्तर में कुछ समस्याएं चल
रही हैं. एक तो ड्राइवर की समस्या है, जो अब तक आया ही नहीं, वैसे आज के दिन यहाँ
ड्राइवरों को पीने का एक बहाना भी मिल जाता है. पूजा का अर्थ यहाँ मस्तीभरा आलम और
प्रीतिभोज है. आज भी पानी बरस रहा है.
आज हफ्तों बाद डायरी लिख
रही है. यात्रा अच्छी रही, ब्लॉग पर लिखने के लिए यात्रा विवरण भी वह प्रतिदिन डायरी
में नोट करती रही. वापस आकर कुछ दिन घर को व्यवस्थित करने में लग गये. कुछ दिन यूँ
ही निकल गये, अब जब भीतर कोई है नहीं तो कोरे कागज ही रहेंगे न आज की गाथा कहने के
लिए..जब कोई सचमुच खो जाता है तो ‘वह’ सचमुच आ जाता है. यहाँ शायद की कोई गुंजाईश
नहीं..जब वह एक बार आ जाता है तो बस आ ही जाता है...
कई दिनों के बाद वह आज
झूले पर बैठी है. हवा मंद है पर शीतल है. एक झींगुर मधुर गा रहा है. गुड़हल, गुलाब
और मुसंडा खिले हैं. जून दिल्ली में हैं, कल लौटेंगे. आज दीदी-जीजाजी की शादी की
वर्षगांठ है, वे पिताजी व भाई-भाभी से मिलने घर आये हैं, रात भी रुकेंगे. उसने
सोचा एक न एक दिन वे यहाँ भी आयेंगे उनके अगले बड़े घर में. आज स्टोर की सफाई की,
दीवाली का समय आने वाला है, सफाई का समय. घर से पुराना सामान निकलने का समय जो वे
इस्तेमाल नहीं करते. आज सुबह अच्छा अनुभव हुआ, अब शब्दों में नहीं समाता, अब कविता
में भी नहीं आता..अब तो जैसे वह रग-रग में समा गया है, उसे अलग से देखे ऐसा सम्भव
नहीं है. गोवा का लेख पिछले दो दिन नहीं लिख पाई, आज लिखेगी.
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Wednesday, February 22, 2017
ओले और वर्षा
नया वर्ष
आरम्भ हुए दस दिन हो गये और आज पहली बार लिखने का समय मिला है. आजकल दिन अस्पताल
और घर दोनों जगह की खोजखबर लेते ही बीत जाता है. सुबह सवा चार पर नींद खुली, मन
में विचारों का ताँता लगा था, अब तो विचार चित्रों के रूप में दीखते हैं और सजग
होते ही न जाने कहाँ खो जाते हैं. साक्षी भाव का अनुभव साधना है, अन्यथा मन में
उठने वाली छोटी सी लहर भी तरंगित कर देती है. किसी विचार को रोकने जाओ तो वह टिक
जाता है क्योंकि उसे ऊर्जा दे दी, सम्मान दे दिया. विचार रास्ते पर गुजर जाने वाले
वाहनों जैसे ही हैं, जो आते हैं और चले जाते हैं. नदी की धारा में बहने वाले
सामानों जैसे भी, आकाश पर उड़ने वाले बादलों जैसे भी, जो अभी हैं और अभी नहीं. यहाँ
कुछ भी स्थायी नहीं है सो कुछ भी सत्य नहीं है, जो इनका साक्षी है बस एकमात्र वही
सत्य है. उसमें टिकना आ जाये तो मन स्वतः शांत हो जाता है.
कई दिनों
से हो रही वर्षा के कारण ठंड बहुत बढ़ गयी है. पूरे देश में ही वर्षा, बर्फ, ओले व
कोहरे का प्रकोप जारी है. सर्दियों का मौसम अपनी पूरी सेना लेकर आया है. सद्गुरू
को सुना, सहज भाव से प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे. सहज रहना तभी सम्भव है जब किसी को
कर्म के फल के प्रति आसक्ति न हो. सहजता. सरलता यदि स्वभाव बन जाये तो परमात्मा
दूर नहीं है. वह हर क्षण उनके साथ है, वे ही अपनी नासमझी में उसे भुलाकर ढूँढने का
नाटक करते हैं. जैसे कोई चश्मा नाक पर लगाकर खोजने का प्रयास करे. उसके सिवाय
उन्हें कुछ चाहिए भी नहीं, फिर भी इधर-उधर हाथ-पांव मारते हैं, वही उनका सुहृद है,
हितैषी है, यह मानते हुए भी दुनिया का मुँह तकते हैं. उसने उन्हें दाता बनाया है,
वे दाता हैं, फिर क्यों मंगते बनें. उसने ‘एक जीवन एक कहानी’ पुनः लिखना शुरू किया है. अन्य पुरुष में लिखना
ही ठीक रहेगा.
जून आज
बड़ी ननद की बड़ी बेटी की शादी में सम्मिलित होने चले गये, भांजी की शादी में उसका
जाना तो सम्भव नहीं है. नन्हा वहाँ पहले से ही पहुंच गया है. कल विवाह है. दोपहर
बाद वह अस्पताल गयी, सिक्योरिटी गार्ड्स को बीहू के लिए तिल के लड्डू दिए. पिताजी
ने कहा, उसकी एक सखी ने फोन करके कहा है, वह सुबह उन्हें अस्पताल से घर ले जाने
आएगी, उन्हें अच्छा लगा है. माँ आज भी बेचैन लग रही थीं. उन्हें तकलीफ हो रही है,
पर शब्दों में कह नहीं पाती हैं.
दो दिनों
का अन्तराल. जून आज आ रहे हैं. सुबह गहरा ध्यान लगा. अब जबकि ध्यान सधने लगा है,
लगता है उसे ध्यान करना आता भी है या नहीं. उसे कुछ भी नहीं पता, ऐसा भाव भी होता
है. परमात्मा ही जाने क्या हो रहा है, वह तो अब है ही नहीं, यदि वास्तव में ऐसा है
तो यह लिख कौन रहा है, लिखने वाला हाथ है, कलम है, देह है, मन है, बुद्धि है, पर
ये सब तो वह नहीं है. जो वह है वह निराकार है, शुद्ध चैतन्य है. आज एक लेखिका व
ब्लॉगर महिला का संदेश फेसबुक पर आया है. वह उसकी कविताएँ अपने अगले कविता संग्रह
में छापना चाहती हैं ! उसने दीदी की बड़ी बिटिया के लिए कार्ड बनाया उसके विवाह की
सालगिरह है आज, एक कविता भी लिखी. शाम को एक विवाह में भी जाना है, हो सका तो उसके
लिए भी एक कविता लिखनी है. जून माँ के इलाज के सिलसिले में आज डिब्रूगढ़ गये हैं.
एक
परिचिता का फोन आया, उनके बेटे की मंगनी हो गयी, उन्हें कल ही फेसबुक से पता चल
गया था. रात को लौटे जून और अभी माँ के लिए दोपहर का भोजन ले गये हैं, अब दो दिन
उसे अकेले रहना है परमात्मा के साथ, ‘वह’ ही रहे नूना न रहे अब ऐसा ही भाव होता
है. दीदी ने उसका चौथा ब्लॉग भी पढ़ना शुरू किया है. धीरे-धीरे और भी पाठक मिलेंगे.
आज धूप कितनी तेज है, बैठा नहीं जा रहा है. कल सिहरन हो रही थी, ऐसा ही जीवन है
कभी धूप कभी छांव. एक और भी जीवन है, महाजीवन..जो सदा एकरस है. मधुमय और
ज्योतिर्मय..कल एक पुरानी परिचिता से वर्षों बाद मिली, उन्हें अब तक उसकी कविता की
स्मृति थी. कविता दिल से निकलती है और दिल परमात्मा से..परमात्मा प्रेम से..प्रेम
अमर है सो कविता भी अमर है !
Tuesday, February 21, 2017
मन का विश्राम
कल शाम जून
आ गये और जीवनधारा पूर्ववत् बह निकली है. आज दीदी की एक पोस्ट पढ़ी, अच्छी है. अभी
कुछ देर में बच्चे पढ़ने आ जायेंगे, कल से एक नई छात्रा भी आएगी, उसने सोचा, देखें,
कितना सीखती है. कल रात नन्हे से बात हुई. नये वर्ष की पूर्व संध्या पर वह अपनी
कम्पनी के सभी लोगों को लेकर कूर्ग जा रहा है. उसी ने सारा कार्यक्रम ठीक किया है,
होटल, बस आदि सभी कुछ, जोश से भरा था वह, काश उसके मन में दान का भाव भी जागे ! आज
फोन ठीक हो गया, कई ब्लॉग्स पर टिप्पणी लिखीं. शाम को एक सखी से मिलने जाना है,
उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, स्वास्थ्य मन के भावों पर बहुत निर्भर करता है. रोग भी उनकी
नासमझी का ही परिणाम हैं, हर दुःख उनका ही बुलाया हुआ होता है .मन खाली रहे तो ज्यादा
अच्छा है बजाय इसके कि व्यर्थ का चिन्तन चलता रहे. खाली रहेगा तो उस परमशक्ति से
जुड़ा रहेगा..शक्ति से भरा रहेगा, लगातार भरता रहेगा...
आज
जन्तर-मन्तर पर अन्ना हजारे का अनशन चल रहा है, एक दिन का सांकेतिक अनशन, संसद में
लोकपाल बिल पर बहस चल रही है. मौसम अपेक्षाकृत ठंडा है, कल चंद्रग्रहण था. आज पूर्ण
चन्द्र अपने पूरे सौन्दर्य के साथ खिला है. माँ को अस्पताल में रहते एक महीना हो
गया है, डाक्टर कह रहे हैं, आपरेशन करना पड़ेगा, कल जून डिब्रूगढ़ जायेंगे. टीवी पर
ओशोधारा आ रहा है. गुरू की स्मृति में जीना साधक के लिए बहुत आवश्यक है, सद्गुरू
की कृपा से ही उसे भी निराकार का आभास हुआ है. कर्मों का बंधन गुरू से नाता जुड़े
बिना नहीं खुलता. नाम से प्रीत होने पर संसार की चाह नहीं रहती, नाम ही उन्हें
अपने अंतर आकाश में ले जाता है.
कल माँ
को डिब्रूगढ़ ले गये हैं. दोपहर एक बजे वह अस्पताल से लौटी, पिताजी और जून वहीं
हैं. सुबह माली आया था, जब उसने कहा, आज वह पूर्व कहे अनुसार गमलों पर रंग नहीं
करेगा तो एक क्षण के लिए भीतर क्रोध उठा, पर जरा भी नहीं भाया और तत्क्षण विलीन हो
गया, यानि कि अभी भी अहंकार बना ही हुआ है. ध्यान साधना नियमित करनी होगी, अभी
मंजिल बहुत दूर है लेकिन उसका पता तो चल गया है. जून ने कल दस बजे गाड़ी का प्रबंध
किया है, वह भोजन बनाकर ले जाएगी, साथ ही कुछ जरूरत का सामान भी ले जाना है.
तीन दिन वहाँ
रहकर जून माँ को वापस ला रहे हैं, पता नहीं उन्हें अभी यहाँ के अस्पताल में फिर कितने
दिन रहना होगा. यह वर्ष खत्म होने को है, नये वर्ष के कार्ड्स भेजने हैं. कल
क्रिसमस के लिए कविता लिखी, आज टाइप की
है, उसमें कुछ चित्र भी लगाने हैं, फिर वे सभी को भेजेंगे. आज छोटे भाई की बड़ी
बिटिया का जन्मदिन है, और यहाँ भी एक मित्र का. जून आने वाले हैं, वह माँ-पिताजी
के लिए दोपहर का भोजन ले जायेंगे. अभी-अभी उसने फोन उठाया कि भतीजी का नंबर भाभी
से मांगे, पर जैसे ही फोन उठाया पहला नंबर उसी का था, यह चमत्कार ही तो है और कुछ
देर पहले आग पर कढ़ी रखी थी, उबलकर गिरने ही वाली थी कि उसने बिना किसी कारण पीछे मुड़कर
देखा. कोई है जो उसके साथ-साथ है. वह परमात्मा सदा उनके साथ है. भीतर कोई न रहे
तभी वह आता है. वे कंकड़-पत्थर लिए रहते हैं और हीरे को अनदेखा करते रहते हैं, एक
खेल चलता रहता है जीवनभर, कई बार तो सत्य आ आकर दूर चला जाता है, छिटक जाता है..
पिछले दस
दिनों से डायरी नहीं खोली. यह वर्ष जाने को है. तीन दिन के बाद नया वर्ष आने वाला
है, भीतर एक नया उत्साह और जोश जग रहा है. कुछ विशेष करना है इस नये साल में. परम
जो कराए..उसके हाथ में स्वयं को सौंप दिया है, सौंपने वाला भी तो वही है..और कोई
नाम सोच रही है अपने ब्लॉग के लिए..मन को जब विश्राम मिलता है तो भीतर ऊर्जा प्रकटती
है उसे विसर्जन करना है, बाँटना है, लुटाना है, ऐसे ही भाव से युक्त या नवसृजन की
बात करता हुआ नाम, वर्ष दर वर्ष विकास होता रहे मन का, बुद्धि व संस्कारों का का
भी, चेतना का भी तभी मानव होने का अर्थ है अन्यथा वहीँ के वहीं रह गये तो जीवन
कौड़ियों के मोल बेचने जैसा ही होगा. समाज के लिए और कुछ नहीं कर पायी तो शब्दों के
माध्यम से प्रेरित करने का काम तो सहज ही हो सकता है. परमात्मा उससे यही कराना
चाहते हैं.
Thursday, November 10, 2016
ए राजा का महल
कल टीवी पर
ए.राजा का महल देखा जो चेन्नई में स्थित है. कितनी शरम की बात है की देश का पैसा
राजनीतिज्ञ अपने ऐशोआराम के लिए इस तरह लुटाते हैं. आज सुबह दीदी से स्काइप पर बात
हुई, उन्हें बीहू का वीडियो मिल गया है. कल से एक नया विद्यार्थी पढ़ने आएगा,
वर्षों पहले उससे मिली थी, जब वह छोटा सा था और उसकी संगीत अध्यापिका ने उसे गोद
लिया था. कई वर्ष बाहर रहने के बाद वे लोग
दुबारा यहाँ आ गये हैं. वर्षा पर लिखी उसकी कविता पर कई टिप्पणियाँ आयी हैं. नन्हे
के एक तिब्बती मित्र ने जो एक बार चार सप्ताह के लिए यह रहने आया था, उसके ब्लॉग
को पढ़ना शुरू किया है. उसके लिए कविता लिखी थी उसने जब वह आया था. उसने बौद्ध धर्म
पर दो पुस्तकें भी भेजी थीं. कविता मन के वृक्ष पर खिला फूल है, जिसकी खुशबू सब ओर
फ़ैल जाती है यदि कोई लेना चाहे तो. स्वान्तः सुखाय लिखी गयी कविता भी यदि औरों को
सुख दे जाये तो इसमें कुछ भी गलत नहीं, हाँ, अहंकार से बचना चाहिए क्योंकि जो लिखा
गया है वह भी किसी ऐसे स्रोत से आ रहा है जो सबका है, कवि माध्यम होता है. सहज,
निर्दोष आनन्द का सृजन ही कवि का उद्देश्य है, हरेक का नहीं हो सकता क्योंकि जिसने
अभी भीतर के आनन्द को स्वयं ही नहीं पाया है तो वह उसे बांटेगा कैसे ? पिताजी का
मेल आया है, आखिर वे भी कम्प्यूटर का थोड़ा-बहुत इस्तेमाल करना सीख ही गये हैं. कल
गुड फ्राइडे है, उसे इसके बारे में भी जानकारी लेनी है, फिर कुछ लिखना भी है, उसने सोचा दोपहर को पढ़ेगी. लंच
में आज ‘कर्ड-राइस’ बनाये.
पिताजी
को कल साईकिल चलते समय चोट लग गयी. जून उन्हें लेकर अस्पताल गये हैं. माली की
साईकिल लेकर चलाने निकले थे, शुरू में ही गिर पड़े फिर भी बैठकर एक चक्कर लगा कर
आये और कहने लगे अपनी खुद की साईकिल खरीदेंगे. मानव वृद्ध हो जाता है पर इसे स्वीकारना
नहीं चाहता. अंतिम श्वास तक भी उसके भीतर की जिजीविषा विश्राम नहीं लेने देती. ‘जब
तक श्वास तब तक आस’..माँ इसके बिलकुल विपरीत हैं, वह कुछ ज्यादा ही विश्राम कर रही
हैं. उन बुजुर्ग आंटी को भी फिर से चोट लग गयी है. कल रात जब उनके बेटा-बहू सब पार्टी
में थे. वह टीवी देखते-देखते कुर्सी पर ही सो गयीं, वे जब लौटे तो उन्हें उठाकर
भोजन खिलाया और हाथ धोने जब बरामदे में गयीं तो गिर गयीं. नींद की दवा का असर रहा
होगा. वृद्धावस्था में कितना दुःख झेलना पड़ता है, ऋषि-मुनि ऐसे ही तो नहीं कह गये
हैं. कल नन्हे ने फोन पर बताया, उसके कालेज की एक मित्र की माँ का हाथ मिक्सर में कट
गया. जीवन कितना विचित्र है, यहाँ किसी भी पल कुछ भी घट सकता है.
आज सुबह
वे टहलने गये तो बातों का सिलसिला व्यर्थ ही चल पड़ा. सुबह-सुबह मन खाली होना चाहिए
पर...खैर..मन का असली रूप भी सामने आ गया. अभी भी अहंता और ममता सताते हैं. आत्मा
में रहने पर वे तत्क्षण विदा तो हो जाते हैं पर नुकसान तो हो ही चुका होता है. एक असमिया
परिचिता का फोन आया वे हिंदी में कविता पाठ करना चाहती हैं, उसमें कुछ मदद चाहिए,
उसने भी अभ्यास किया, याद तो हो गयी है फिर भी अपने साथ रखना जरूरी है, क्लब में काव्य
पाठ प्रतियोगिता है.
Friday, October 7, 2016
क्लब में नृत्य
आज सुबह जून का फोन आया दो
बार, दोनों बार अन्य फोन आ गये सो बात पूरी नहीं हो सकी, वैसे भी बात पूरी हो ही
कहाँ पाती है, जीवन की संध्या आ जाती है. मृत्यु शैया पर पड़ा व्यक्ति भी यही सोचता
है कि कितनी बातें अनकही रह गयीं. उसे तो आज ही, इसी क्षण ही सबसे हिसाब-किताब
खत्म कर लेना है, कोई लेन-देन शेष नहीं रखना, परमात्मा, आत्मा, सद्गुरू, चारों
दिशाओं और सभी देवी-देवताओं, पूर्व के स्द्गुरूओं, भावी बुद्धों सभी को साक्षी
बनाकर इस क्षण वह घोषणा करती है कि आज के बाद से उसकी किसी से कोई अपेक्षा नहीं है
और वह अपने हृदय की समस्त मंगल कामनाएं उन्हें देकर स्वयं को भी मुक्त करती है.
क्योंकि वह जो वास्तव में है वह निर्विकार तत्व है, वह न कुछ ग्रहण कर सकता है न
कुछ दे सकता है, प्रारब्ध वश जो भी आगे जीवन चलेगा, उससे उसका क्या संबंध है ? मन,
बुद्धि, संस्कार के द्वारा जीवन में जो घटेगा, वह सभी के हित में हो यही प्रार्थना
है, यह लिखना भी तो इन्हीं के द्वारा हो रहा है, सात्विक बुद्धि के द्वारा ही यह
सम्भव है. आज सभी परिजनों वे सखियों के फोन आये. दीदी का फोन नहीं आया, शायद अभी उनका
स्वास्थ्य ठीक नहीं हुआ होगा, उसने बात की तो ऐसा ही था. सुबह सद्गुरू को
देशी-विदेशी मेहमानों के सामने सहजता से सवालों के जवाब देते सुना. कह रहे थे भीतर
कितनी शक्तियाँ छिपी ह्युई हैं, साधना के बल पर कोई उन्हें जागृत कर सकता है, योग
के हजारों चमत्कार हैं. कम से कम अपने तन-मन को पूर्णतया स्वस्थ व प्रसन्न रख सके,
इतना तो हरेक का कर्त्तव्य है !
कुछ देर पहले एक सखी के घर
गयी, उसकी बहन आई हुई है, जो कई वर्ष पूर्व भी आई थी जब छात्रा थी. उसके पुत्र ने
लैपटॉप में डाली कुछ तस्वीरें दिखायीं, दोनों बहनों की बच्चियां सगी बहनें लग रही
थीं. जून कुछ ही देर में आने वाले हैं. कल क्लब में मैराथन का पुरस्कार लेने वह
नहीं जा सकी, आने वाले कल की दोपहर को विशेष भोज है, उसे टेबल ड्यूटी मिली है, इसी
बहाने कई लोगों से मुलाकात भी हो जाएगी. आज जून के लिए लिखी एक कविता ब्लॉग पर
डाली, ‘तुम्हारे लिए’. चर्चा मंच पर भी ली गयी है, उसे अपने ब्लॉग पर चर्चा मंच का
लिंक डालना सीखना चाहिए. दोपहर को साहित्य अमृत पढ़ा, गन्ना खाया, यानि कुछ तन के
लिए कुछ मन के लिए. आत्मा के लिए वैसे भी कुछ करना नहीं है, साक्षी भाव में रहना
है, जो हो रहा है, उसे देखते जाना है. सतो, रजो व तमो गुण के कारण ही मन, बुद्धि इन्द्रियां
आदि अपना कार्य करते हैं, ये प्रकृति हैं और आत्मा शिव तत्व है. वे चैतन्य हैं
लेकिन जड़ के साथ एक होकर स्वयं को सुखी-दुखी मानते हैं. साक्षी भाव में आते ही सब
बदल जाता है. पंच क्लेश मंद हो जाते हैं, पंच विकार भी कम होने लगते हैं, एक
सन्नाटा छाने लगता है भीतर !
कल क्लब में उसने इतने
वर्षों में पहली बार नृत्य किया, कई सारे अंग्रेजी गानों की धुनों पर, गीत तो समझ
में नहीं आ रहे थे पर संगीत अच्छा था, भीतर नृत्य उमग आया है, ड्यूटी भी दिल लगाकर
की, लोगों को भोजन परोसना एक अच्छा काम है, खाना बना भी अच्छा था, खाया भी और घर
आके कुछ हुआ भी नहीं. मौसम यहाँ बहुत सुहावना है, उत्तर भारत में सर्दी ने रिकार्ड
तोड़ दिए हैं. नन्हे के लिए जून ने ढेर सारी गजक व खजूर आदि भेजी है, चार-पांच
दिनों में उसे मिल जाएगी. माँ ने आज फिर टीवी बंद किया और उसने उनसे कारण पूछा.
आदत बदलना कितना मुश्किल है, जून को भी जोर से बोला, वह उसकी बात को यूँही उड़ा
देते हैं, पर उसे अपनी वाणी पर जरा भी संयम नहीं है, जब बात मुँह से निकल जाती है,
तब होश आता है, पर इतना होने पर भी क्योंकि भीतर कर्ताभाव नहीं है, परमात्मा की
कृपा का अनुभव निरंतर होता रहता है. कभी-कभी तो आश्चर्य होता है, पर परमात्मा असीम
है, उसकी करुणा भी असीम है, असीम है उसकी दयालुता, उनकी कमजोरियां कितनी भी हों
उसकी कृपा से तो कम ही होंगी ! जीत उसी की होगी, ध्यान की समझ भी आने लगी है, भीतर
जब समरसता हो, शांति का अनुभव हो तो मन ध्यानस्थ ही होता है, एकाग्रता उसका परिणाम
है. जून भी अपने लिए एक डायरी लाये हैं, एक नन्हे को भेजी है. डायरी में लिखने के
लिए कितना कुछ है, नये-नये शब्द, नये विचार तथा नये अनुभव ! बहर माली काम करता हुआ
पिताजी से बातें कर रहा है, वह पानी डाल रहे हैं, फूलों को जरूर उन दोनों का स्नेह
पसंद आता होगा !
Tuesday, August 9, 2016
कविता का ब्लॉग
बुध की शाम को नैनी अस्पताल गयी और रात डेढ़ बजे एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया,
शुक्र को वापस आ गयी. उसकी देखभाल उसका पति व बुआ दोनों कर रहे हैं. बुआ घर का काम
निपटा कर यहाँ भी आ गयी है. धीरे-धीरे काम करती है. पंछियों की आवाजें आजकल सुबह
से ही सुनायी देने लगती हैं. एक कौवा पीछे आंगन में ही कांव-कांव कर रहा है. वह
यदि ध्यान न दे तो पता ही न चले, सुनने लगे तो आवाजों का एक हुजूम है. आजकल वे
सुबह थोड़ा देर से उठने लगे हैं. जून का दर्द पहले से काफी ठीक है. नींद पूरी हो
रही है, कोई तनाव नहीं. समय की किसी पाबंदी का वह पालन नहीं करते आजकल. नन्हे की
तरह मुक्त भाव से जीने लगे हैं, अभी बाह्य मुक्ति का अनुभव हो रहा है एक दिन यही
भीतरी मुक्ति का भी दर्शन कराएगी. आज ध्यान में उसने अनंतानंत ब्रहांड का अनुभव
किया. कितनी शांति थी वहाँ, एक सन्नाटा था, प्रकाश था और सदगुरुओं की झलक थी..वे
व्यर्थ ही स्वयं को सीमाओं में कैद रखते हैं ! सभी के भीतर एक अनंत आकाश है जो
चेतन है, आनन्दमय है और सनातन है..उसका पता लगते ही भीतर अपूर्व शांति का अनुभव
होता है. गुरूजी ठीक कहते हैं ध्यान में जो ताकत है जो करते हैं वह जानते हैं...दांयी
तरफ की पड़ोसिन सखी का फोन आया है, वह भी ‘मृणाल ज्योति’ की डोनर मेम्बर बनना चाहती
है. उसकी माँ को कोई रोग है जिसमें रक्त की लाल कोशिकाएं कम हो जाती हैं. शरीर
कमजोर होता जाता है. बुढ़ापे में कोई न कोई रोग शरीर को घेर ही लेता है.
जून अब काफी स्वस्थ हैं. आज सुबह वे टहलने गये. रास्ते में नन्हे
के मित्र की माँ से भेंट हुई. उन्हें फोन किया सत्संग में आने के लिए, किसी दिन आएँगी.
आज क्लब की एक वरिष्ठ सदस्या का फोन आया, उनके लिए उसने कविता लिखी थी, उसी के लिए
धन्यवाद दे रही थीं. आज My Poetry Collection में कुछ और कविताएँ डालीं, नन्हे ने
उसका look बदल दिया है, कभी हिंदी कविता में उसका लिंक भेजेगी. मौसम आज अच्छा है, न
सर्दी न वर्षा न धूप न गर्मी..मधुर-मधुर सा. जून आज देर से आने वाले हैं, वह कुछ
देर पढ़ सकती है. कल शाम पिताजी से फोन पर बात की. आज छोटे भाई को गुरूजी के जन्मदिवस
के लिए लिखी कविता भेजी है. जीवन का रथ आगे बढ़ रहा है. एक सखी को फोन किया, नहीं
उठाया तो संदेश भेजा, कल वे लोग आ रहे हैं.
जून को पुनः दर्द हुआ. आज वे नेहरु मैदान की हरी-हरी घास पर
नंगे पैरों चले. एक सखी ने शादी का कार्ड भिजवाया है, उसकी ननद के बेटे की शादी है,
नूना ने उसके लिए चंद दोहे लिखे हैं कल टाइप करेगी. नेट पर उसके ब्लॉग के छह
फालोअर जाने कहाँ से आ गये हैं ! अच्छा है ! श्री श्री कहते हैं जब आपके पास
ज्यादा समय है तभी आपको व्यर्थ के ख्याल दिमाग में आते हैं, “व्यस्त रहो मस्त रहो” !
कल शाम को उसने जून को ध्यान कराया, कितना आश्चर्य है न,
कुछ समय ( कुछ महीने पहले) पूर्व वह ध्यान को इतना महत्वपूर्ण नहीं समझते थे, फिर
वह उन्हें इस तरह करा सकती है, यह तो उसकी कल्पना में भी नहीं था. सद्गुरू की कृपा
से असम्भव भी सम्भव हो जाता है. कल शाम को छोटे भाई ने उसकी कविता की तारीफ़ की.
तारीफ तो उसकी है जिसने वह कविता लिखने की प्रेरणा दी, जो स्वयं उस कविता का विषय
है. कुछ ही देर में तो लिखी गयी थी वह, आज ध्यान में सद्गुरु अनंत रूप में उस अणु
पर बरस गये. अनंत ऊर्जा का अनुभव किया उसने अपने सिर की चोटी पर. अभी साधना के इस
पथ पर चलते ही जाना है, विश्राम नहीं लेना है. जो रास्ते को ही मंजिल मानकर रुक
जाते हैं, वे योगभ्रष्ट हो जाते हैं. परमात्मा की अकारण कृपा दिन-रात उस पर बरसती
रहती है. वह कृपा का सागर है, उसकी स्मृति भी आ जाये तो मन भीग जाता है जैसे सागर
के पास खड़ा यात्री अप्रयास ही भीग जाता है !
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