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Wednesday, April 15, 2026

नये नये ले-आउट


नये नये ले-आउट



सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये थे। लंच उन्होंने ही बनाया, राजमा, मेथी आलू और बेक्ड वेज। दोपहर बाद जिग्सा पजल में कुछ टुकड़े जोड़े। शाम को सभी घूमने निकले, पहले दो नर्सरी देखीं, फिर दो झीलें। सूर्यास्त के समय वे झील किनारे थे, फ़ोटोग्राफ़ी की। दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


एक दिन और बीत गया, उपलब्धि के नाम पर, दोपहर को साहित्य रचना की, कुछ शब्द उतरने दिये कलम द्वारा। एक सखी से बात की, फूलों और  प्रकृति के चित्र उतारे। बगीचों की सैर की, आकाश को निहारा, चाँद-तारों से बातें कीं, हवा की ठंडक को महसूस किया। भोजन बनाया, खिलाया, खाया। चलते-फिरते राजनीति पर कुछ चर्चा सुनी। हिंदू-मुस्लिम, दलित, यादव, ब्राह्मण के जोड़-तोड़ चल रहे हैं। नापा में एक और व्यवसायिक इमारत बननी शुरू हुई है। पापाजी से बात की,उन्होंने उसकी कविताओं की तारीफ़ की, रोज़ की तरह। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कविता भेजनी है उन्हें। 


आज शाम को एक महिला डॉक्टर आयीं, वह महिला दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहती हैं। जून ने इस पर प्रसन्नता ज़ाहिर की। आज सुबह भी वह कमेटी के काम से बाहर गये थे। दोपहर को एक स्थानीय महिला ने ऑनलाइन कन्नड़ भाषा का पहला पाठ पढ़ाया।मार्च में छोटा भाई दुबई जाने वाला है और दीदी-जीजा चंडीगढ़। 


आज गणतंत्र दिवस है। नन्हा व सोनू कल रात को ही आ गये थे। रात्रि भोजन के बाद छत पर हवन वाली कड़ाही में अग्नि देव का आवाहन किया। इस बार लोहरी पर वे लोग आ नहीं पाये थे। आज बड़ा भांजा भी आ गया। असम का एक पुराना मित्र परिवार और नापा में नया बना एक मित्र परिवार भी। गाँव की पंचायत की अध्यक्षा भी आयी थीं, जिन्हें झंडा आरोहण के लिए बुलाया गया था। दोपहर को नेता जी पर एक अच्छी सी फ़िल्म देखी, गुमनामी।वह उनकी आत्मकथा भी मँगवा रही है, पिछले दिनों उनके बारे में इतना कुछ सुना और पढ़ा, कि और जानने की उत्सुकता हो रही है। 


नूना का स्वास्थ्य सौ प्रतिशत ठीक नहीं है। सिर में हल्का दर्द है और गले में हल्की ख़राश भी।आजकल हर दूसरे व्यक्ति को कोई न कोई समस्या हो रही है, कोरोना के वेरिएंट का वायरस हवा में है। सुबह टहलकर आये तो नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी, उसका फ़ोन ख़राब हो गया है। नन्हे को कहा, तो उसने नया फ़ोन ऑर्डर कर दिया है, कल आ जाएगा।उसने घर के लिए भी कुछ सामान भेजा है। उसे कुछ भी कमी दिखती है तो शीघ्र ही पूरा करने का प्रयास करता है। 


आज गाँधीजी की पुण्यतिथि है।कल शाम ‘बीटिंग रीट्रिट’ का शानदार  कार्यक्रम देखा, ड्रोन का प्रदर्शन बहुत अच्छा लगा। जून ने आज गाजर का हलवा बनाया है।नन्हा और सोनू केक लाये थे, आज उनके विवाह के रजिस्ट्रेशन को पाँच वर्ष हो गये।नूना ने नाश्ते में गोभी के पराँठे बनाये और लंच में लोभिया। शाम को वे सब ड्राइव पर गये, आसपास बन रहे कई ले-आउट देखे। बिल्डर खेतों को काटकर प्लॉट्स बना रहे हैं और संभवत: किसान भी इससे बहुत मुनाफ़ा कमा रहे हैं। बच्चों के जाने के बाद वे दोनों सोसाइटी के एक निवासी के यहाँ उनका तबला वादन सुनने गये। उनकी बेटी भी बहुत अच्छा गाती है। नन्हे ने छत के लिए एक बड़ी सी चाइम भेजी है और जून के बाथरूम के लिए नई फिटिंग्स। सोनू के भाई की मंगनी पर जून ने सूखे मेवों का एक डिब्बा भेजा है।     


फ़रवरी का आरम्भ ! पाँच तारीख़ को वसंत पंचमी है, पर उत्तर भारत में ठंड कम नहीं हुई है।आज बड़ी भांजी का जन्मदिन है, नूना ने कविता भेजी है। पापा जी ने बताया, छोटा भाई ड्यूटी पर सिक्किम पहुँच गया है।कल वे लोग नापा में रहने वाले इसरो के एक वैज्ञानिक पति-पत्नी से मिले, जो दुनिया के अनेक देशों की यात्रायें कर चुके हैं।दक्षिणी ध्रुव तक हो आये हैं। आने वाले कल उन्हें एक वृद्ध गांधीवादी व्यक्ति से मिलने जाना है। 


आज नूना पहली बार इस कमरे में अकेले सो रही है। जून सुबह उठे तो तबियत पूरी तरह ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी कुछ देर टहलने गये। वापस आकर ध्यान भी किया, पर स्नान के बाद ज्वर महसूस हुआ, जो दिन में दवा लेने पर उतर गया। वह नीचे वाले कमरे में हैं। उसे लगता है मामूली सर्दी-जुकाम का असर है, पर जून कोरोना की संभावना बता रहे हैं। अगले सात दिन अब उन्हें अकेले ही रहना है और उन दोनों को ही घर से निकलना नहीं है। नैनी भी नहीं आएगी और न ही कोई और आ सकता है। बीत ही जाएँगे ये सात दिन, उसे एक फ़िल्म का नाम याद आया, वह सात दिन ! दिन आज गर्म है, शायद रात कुछ ठंडी होगी।नन्हे का फ़ोन दो बार आ चुका है , उसने फल-सब्ज़ियों का ऑर्डर कर दिया था।नेता जी की आत्मकथा आ गई है, बहुत रोचक ढंग से लिखी गई है। उन्हें बचपन से ही अध्यात्म में बहुत रुचि थी।पापाजी आजकल अंग्रेज़ी कविताओं की पुस्तक पढ़ रहे हैं।   


जून का बुख़ार उतर गया है, उन्होंने सुबह एक बार ही दवा ली।बड़ी ननद को भी कोविड हो गया है, जून ने दोनों बहनों से बात की। कुछ देर पहले सोनू की मॉम का फ़ोन आया, बेटे की मँगनी के लिए उनके यहाँ मेहमान आने शुरू हो गये हैं। कल नन्हा व सोनू भी पहुँच जाएँगे। आज असोसिएशन के पुराने प्रेसिडेंट की पत्नी का फ़ोन आया, जून के स्वास्थ्य के बारे में पूछ रही थी। यहाँ सभी लोग बहुत ध्यान रखते हैं। पड़ोसी भी किसी भी तरह की मदद के लिए फ़ोन करके कह चुके हैं। शाम को नन्हा व सोनू भी आ गये, उनसे रहा नहीं गया। नूना को लग रहा है, डायरी लेखन की कला जैसे भूल ही गई है, न ही लेख अच्छा आ रहा है, न ही विचार ठीक से व्यवस्थित हो रहे हैं। आज ध्यान भी नहीं किया, सारा दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


Wednesday, March 23, 2022

प्लूमेरिया के फूल



आज रामायण का अंतिम अंक प्रसारित होगा, कल से उत्तर रामायण शुरू होगी। आज सुबह मोबाइल पर एक सखी के भेजे सुबह के संदेश की घंटी सुनकर नींद खुली, जो परमात्मा की याद दिला गयी। दोपहर बाद नन्हे से बात हुई, उनकी कम्पनी ने अगले छह महीनों के लिए कर्मचारियों का वेतन कम करने का निश्चय किया है। सीनियर्स का वेतन पचास प्रतिशत, उसके नीचे क्रम से तीस, बीस प्रतिशत तक कम करते जाएँगे। जिनका वेतन पहले ही  कम है उनका  नहीं कटेगा। कोरोना का असर अगले छह महीनों तक तो रहने ही वाला है, इसके भी आगे जाएगा, शायद आने वाले कई वर्षों तक। वैसे भारत में लॉक डाउन का अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। मोदी जी के प्रयास की प्रशंसा हो रही है। उनके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। कोरोना के मामले पर अमेरिका और चीन का आमना-सामना हो रहा है। अमेरिका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं जैविक हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया है चीन ने उसके ख़िलाफ़। एक न एक दिन चीन को इसका जवाब तो देना ही पड़ेगा। 


रात्रि  के नौ बजने वाले हैं। भ्रमण के लिए निकले तो रात की रानी के फूलों की गंध लिए ठंडी हवा बह रही थी। आजकल ढेर सारे फूल खिल रहे हैं  वसंत का मौसम है न, गुड़हल के पाँच रंग के फूल, लिली के दो ग्लोब के आकार के फूल और पारिजात तो रोज़ सुबह पूजा के लिए  मिल जाते हैं। शाम को आकाश में नारंगी सूर्यास्त देखा, प्लूमेरिया के फूलों से वृक्ष भरे हुए थे। सुबह पीछे वाले गेट से बाहर निकल कर खेतों की तरफ़ गये, तोरई के खेत देखे। वहाँ एक नई कालोनी भी बन रही है, धीरे-धीरे खेतों की ज़मीनें मकान बनाने के लिए बिकती जा रही हैं। वापस लौटते समय प्याज़ का एक खेत देखा। अचानक एक चील पक्षी ने सिर पर तेज़ी से प्रहार किया, पर न तो चोंच से न ही पंजे से, केवल पंखों से दबाव डाला और उड़ गया, फिर जाकर सामने  पेड़ पर बैठ गया। इतना सब होने में मात्र कुछ पल ही लगे होंगे। दूर से उसकी तस्वीर भी ली। संभवतः खेत के निकट ही उसका घोंसला रहा होगा, वह अपने बच्चों के लिए भयभीत हुआ होगा। सुबह उत्तर रामायण में कौशल्या और राम का अद्भुत संवाद सुना। 


आज शाम को नापा से सटे हुए खेत से तोरई, चीकू और नारियल ख़रीद कर लाए। माली ने उसी समय तोड़ कर दिए। आम के बगीचे से कच्चे आम भी कल मिले थे, उनका अचार बनाया है। आज पृथ्वी दिवस है, धरती माता ने अनगिनत उपहार मानव को दिए हैं। छोटी ननद से बात हुई, उसने बताया, बैंक खुलते हैं पर ग्राहक नहीं आते, लोग घरों से निकल कर संक्रमण का शिकार होना नहीं चाहते। जून ने पहली बार घर पर ही केश काटे। 

आज बहुत दिनों के बाद वर्षा हो रही है,  शाम से ही  बादल छाने लगे थे। उत्तर रामायण में  राम सीता का त्याग करके बहुत दुखी हैं, जनक उनसे मिलने आए हैं। लक्ष्मण भी भाई के दुःख से दुखी हैं। महाभारत में युद्ध का आरम्भ होने ही वाला है। आज दोपहर को गुरूजी द्वारा कराया ध्यान किया, जब से तालाबंदी हुई है, वह दोपहर व शाम दोनों वक्त ध्यान कराते हैं। आज से नैनी काम पर आने लगी है, घर काफ़ी साफ़ हो गया है और उनका काम कुछ आसान हुआ है। काफ़ी समय मिला तो कई मित्रों व सम्बन्धियों से देर तक फ़ोन पर बात की।  पिताजी ने उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ा।  


Thursday, July 2, 2020

शहीदों का वसंत

आज वसन्त पंचमी है. पूजा कक्ष में माँ सरस्वती की तस्वीर भव्य तरीके सजायी है. दोपहर को कुछ महिलाओं और बच्चों के साथ पूजा की. अभी कुछ देर पहले टीवी पर कुम्भ के दृश्य अनोखे हैं. करोड़ों लोग कुम्भ में आते हैं. सब एक ही लक्ष्य को लेकर, एक ही भाव के साथ. 

रात्रि के नौ बजे हैं. सरस्वती पूजा के किसी पंडाल से आवाजें आ रही हैं. कल भी देर तक आती रहीं. दिन में तेज आवाज में संगीत बजाते हुए और शोर मचाते हुए लड़कों का एक हुजूम देवी की मूर्ति को विसर्जित करने के लिए ले जा रहा था. शाम को नदी से लौटते समय एक सुंदर मूर्ति को सड़क के किनारे पड़े हुए देखा. पूजा के नाम पर लोग कितना कुछ करते हैं पर वास्तविक पूजा से दूर ही रहते हैं. जून से बात हुई आज उन्होंने प्रधानमंत्री का भाषण सुना बड़े से स्क्रीन पर. लन्च पर एक मित्र परिवार आया जो वर्षों पहले दूसरी जगह चले गए थे. शाम को उन्हें नदी पर ले गयी. चाय बागान भी ले गयी पर तब तक अँधेरा हो गया था. 

हरमन हेस की किताब ‘सिद्धार्थ’ पढ़ रही थी आज, वर्षों पहले पढ़ी थी, पर जरा भी याद नहीं थी. बदली के गरजने की आवाज है या जेट की, रात के सन्नाटे में गूँज रही है. आज बड़े भाई से बात हुई, उनके विवाह की  चालीसवीं वर्षगाँठ होती यदि भाभी होतीं, सुंदर तस्वीरों से एक वीडियो उन्होंने बनाया, वह खुश लग रहे थे. उन्होंने नन्हे के साथ उनकी एक पुरानी तस्वीर भेजी है, शायद उनके घर पर खींची गयी होगी. फेसबुक पर पोस्ट की. आज नैनी ने अपनी सास के बारे में मजेदार बातें बतायीं, वह कभी-कभी सुबह बहुत जल्दी उठ जाती है और अपने आप से बातें करती है. कभी बच्चों की तरह उछलती हैं और खुश रहती हैं. उसके ससुर (जिसको गले का कैंसर है,) का गला अब पहले से ठीक है, तम्बाकू छोड़ नहीं सकता सो वह बीड़ी की जगह सिगरेट पीने लगा है. कितना स्वाधीन है मानव और कितना पराधीन, यह कभी-कभी ज्ञात हो पाता है किसी को जब उसके साथ कुछ ऐसा घटा हो. सामान्य जन के  लिए यह समझना भी कठिन है कि वह इतना परतन्त्र है. 

आज कश्मीर में जो हुआ वह भीषण है, भयानक है और निंदा करने के लायक है. कल तक प्रधानमंत्री कह रहे थे कि कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं पर आज दोपहर साढ़े तीन बजे विस्फोटक से भरी एक कार को जवानों से भरी गाड़ी से टकरा दिया, भयानक विस्फोट हुआ और उनतालीस जवान मारे गये. सारा देश स्तब्ध है और सभी के मन में क्रोध और दुःख है. शाम को क्लब में मीटिंग थी शायद वहाँ किसी को इस खबर की जानकारी नहीं थे, वे सामान्य ही रहे. प्रधानमंत्री ने पालम हवाई अड्डे पर श्रद्धांजलि अर्पित की उन शहीदों को, जो पुलवामा में मारे गए हैं. 

आज कम्पनी की हीरक जयंती का समापन समारोह है. जून अभी-अभी घर लौटे हैं. सुबह से वर्षा हो रही है, तापमान गिर गया है. पुलवामा हमले की साजिश रचने वाला कामरान आज मारा गया, चार सैनिकों को और शहादत देनी पड़ी. देश भर में आतंकवाद के खिलाफ क्रोध बढ़ता ही जा रहा है. देश में सभी दल एकमत होकर कार्यवाही करने को कह रहे हैं. चुनावी भाषा की जगह देश के प्रति अपना कर्त्तव्य निभाने की भाषा नेता बोल रहे हैं.  

Friday, August 25, 2017

नामफाके की पिकनिक


आज सुबह पौने सात बजे ही वे पिकनिक के लिए निकल पड़े थे, ‘नामफाके’ नामक स्थान पर जो यहाँ से बीस किमी दूर है, लगभग पचास लोग इक्कठे हुए. बहुत आनंद मनाया, पानी में उतरे, खेल खेले, अच्छा नाश्ता व भोजन किया, फिर कुछ लोगों द्वारा किया गया बीहू नृत्य देखा. कुल मिलाकर पिकनिक अच्छी रही. शाम को साढ़े तीन बजे घर लौटे, यानि कुल साढ़े छह घंटे वहाँ बिताये और शेष यात्रा में, तैयारी में जो समय गया वह अलग है. जून ने कल दोपहर को खीर बना दी थी, और शाम को तैयारी करके उसने सुबह सबके लिए उपमा बनायी, सभी को पसंद आयी. पिकनिक के मुक्त वातावरण में तन व मन दोनों ही हल्के हो जाते हैं.  

इस वर्ष की कम्पनी की डायरी का रंग अच्छा है. आज ही मिली है हरी-भरी यह डायरी. कल की पिकनिक की तारीफ आज भी हुई, फोटो भी अच्छे आये हैं. बड़ी भांजी के विवाह की वर्षगांठ है, दस वर्ष हो गये उसके विवाह को. नन्हा आज वापस बंगलुरू जा रहा है, इस समय शायद फ्लाईट में होगा. जून कल दिल्ली जा रहे हैं. सुबह सद्गुरू को सुना, अब उनकी बात उसे सीधे वहाँ तक ले जाती है, जहाँ वे उन्हें ले जाना चाहते हैं. जीवन एक यात्रा ही तो है सभी कहीं न कहीं जा रहे हैं,

रात्रि के सवा नौ बजे हैं. दूर कहीं से गाने की आवाजें आ रही हैं, उसकी आँखों में नींद का नाम भी नहीं है. आज सुबह गुरू पूजा और रूद्र पूजा में सम्मिलित होने का अवसर मिला. मौसम अब ज्यादा ठंडा नहीं रह गया है, परसों वसंत पंचमी है अर्थात वसंत भी आरम्भ हो चुका है. आज दोपहर वह बुजुर्ग आंटी से मिलने गयी, उसे देखकर वह सदा की तरह प्रसन्न हुईं, उसे भी उनसे मिलकर अच्छा लगता है. इस उम्र में भी उन्हें अपने वस्त्रों का बहुत ध्यान रहता है, साफ-सुथरे मैचिंग वस्त्र पहनती हैं, बंगाली उपन्यास पढ़ती हैं. शाम को बगीचे में टहलते हुए ओशो की किताब पढ़ी, सारे सदगुरुओं का स्वाद एक सा होता है. अभी कुछ देर पहले उसने कितने ही पन्ने कविताओं से भर डाले हैं..कृपा हुई है ऐसी कि इसकी कोई मिसाल नहीं दी जा सकती. जो कलम दो शब्द नहीं लिख रही थी पिछले कई दिनों से, आज मुखर हो गयी है. बसंत का मौसम जैसे भीतर उतर आया है. परमात्मा की कृपा अनंत है, वह नजर नहीं आता पर अपनी मौजूदगी जाहिर कर देता है. वह यहीं है आसपास ही ! 

जून आज वापस आ गये हैं, ढेर सारा सामान लाये हैं, अमरूद, रसभरी और बेर भी.. और शायद भारी सामान उठाने के कारण ही उनकी कमर का दर्द भी. कल रविवार है, विश्राम उन्हें स्वस्थ कर देगा. आज उनकी लायी विशेष सब्जी बनानी है, शलजम तथा भिस. बगीचे से भी ढेर सारी सब्जियां तोड़ीं. टीवी पर शशि पांडे की बातचीत सुनी, उनकी कोई किताब उसने पढ़ी तो नहीं है, मौका मिलने पर पढ़ेगी.

आज बच्चों को उसने ‘सरस्वती पूजा’ और ‘गणतन्त्र दिवस’ पर प्रश्नोत्तरी करवाई. आज छोटी बहन के विवाह की वर्षगांठ है और छोटी भांजी की बिटिया का जन्मदिन..और बराक ओबामा भारत आये हैं. सुबह से टीवी पर उन्हीं से जुड़े कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं. मोदीजी और ओबामा की मित्रता काफी गहरी होती जा रही है. भारत विकास की बुलंदियों को छुएगा. सजग नागरिक होने के नाते उन्हें भी इसके लिए कुछ करना होगा. फ़िलहाल तो कल सुबह ‘गणतन्त्र दिवस’ की परेड देखने जाना है. वापस आकर टीवी पर भी परेड देखनी है. ओबामा के आने से इस बार परेड कुछ विशेष लग रही है. शाम को एक मित्र परिवार को बुलाया है, वह दक्षिण भारतीय व्यंजन बनाएगी.



Thursday, March 3, 2016

वसंत के फूल


हर रोज वह दो पेज ‘भागवत महापुराण’ तथा एक-दो पेज ‘महाभारत’ के पढ़कर सासु माँ को सुनाती है. कभी-कभी पढ़ते वक्त यदि मन किसी अन्य बात के बारे में सोचने लगता है जैसे कि नाश्ते में क्या बनाना है, तो मुख बोलता है, आँख्ने देखती हैं, कानों में शब्द भी पड़ते हैं, पर भीतर एक भी शब्द का ज्ञान नहीं पहुँचता, फिर सजग होकर पूरा वाक्य पुनः पढ़ती है. आत्मा यह खेल भी देखती है, बुद्धि उस वक्त भी है पर क्योंकि मन से जुड़ी नहीं है तो इन्द्रियों के कार्यों का उसे भान  नहीं होता. मन एक वक्त में एक ही बात का चिन्तन कर सकता है और वे उसे टुकड़ों में बांटना चाहते हैं. आत्मा ही पाँचों देहों को सत्ता स्फूर्ति देती है, वह सत्य है, उपासना के योग्य है, ‘मैं’ का मूल है, यहाँ मन की गति नहीं, वाणी, बुद्धि की ताकत नहीं, क्योंकि बुद्धि का आधार वही है. इसी महीने गुरुपूर्णिमा है, वे सभी मिलकर इस उत्सव को मनाएंगे. ईश्वर प्राप्ति ही मानव का ध्येय है, सद्गुरू उसी मार्ग पर ले जाते हैं. एक ब्रह्मज्ञानी करोड़ों को ऊंचा उठाने का सामर्थ्य रखते हैं, ऐसे ब्रह्मवेत्ता व्यास जी की स्मृति में व्यास पूर्णिमा मनायी जाती है. इसे देव पूर्णिमा भी कहते हैं. 

आज फिर उसने सुंदर वचन सुने, ईश्वर उनके भीतर है, जब वे तय करें उससे मिल सकते हैं. जीवन से भागना नहीं है, सारे अनुभवों से गुजर जाना मुक्ति का उपाय है. विचार की सीढियाँ चढ़कर ही कोई निर्विचार तक पहुंच सकता है. संसार एक चुनौती है, एक आयोजन है परमात्मा तक पहुंचने का. जीवन की पाठशाला मेनन उतर कर उत्तर स्वयं ही खोजने होंगे. जीवन उन्हें तीन सोपान देता है देह, मन तथा आत्मा, इनसे चढकर ही चौथे को पाया जा सकता है. जीवन के सभी रूप शुभ हैं, उन्हें सहज स्वीकारना होगा. जीवन में क्षुद्रताओं को उच्चताओं से लड़ाने जायेंगे तो उच्चता ही हारेगी.

यह जीवन तो वसंत है, सारा जगत उल्लास से भरा है और वे अब भी सो रहे हैं. एक बार यदि कोई जग जाये तो ऐसा वसंत जीवन में आ सकता है जो परम है. संसार की हर खोज व्यर्थ हो जाती है क्योंकि संसार वह दे ही नहीं सकता जो वे चाहते हैं, वे जिसे फूल बनकर चाहते हैं वह काँटा बनकर चुभने लगता है. उनका मन कहीं बैठना ही नहीं चाहता क्योंकि वह हर वक्त किसी न किसी की तलाश में रहता है. परमात्मा के बिना उसका ठौर नहीं, वह संसार में भी उसी को खोज रहा है, पर वह संसार के पार ही मिलता है. वे जिस प्रेम भरी नजर से इस जगत को देखते हैं उसी नजर को परमात्मा को देखने में लगाना है. उन के भीतर जो छोटा सा प्रेम का झरना है उसी को एक दिन सागर से मिलाना है. साधना में कुछ नया नहीं करना है, बस दिशा बदलनी है. हर कोई आनन्द पाना चाहता है, वह ठीक है, लेकिन जिस राह से चल कर पाना चाहता है वह राह गलत है. भक्त संसार के सौन्दर्य को भी परमात्मा का ही मानता है. उनका जीवन कब गुजर जायेगा पता ही नहीं चलेगा. वे अपने रूप की अकड़ में अपने असली स्वामी को रिझा ही नहीं रहे. उनके जीवन की एकमात्र सफलता इसी में है कि वे अपने भीतर के अमृत से जुड़ जाएँ. उनके चित्त का पंछी उसी अमृत का पान करना चाहता है, वे संसार में लगाने के लाख उपाय करें यह वहाँ नहीं लग सकता, यह तो शाश्वत को ही चाहेगा. जैसे-जैसे चित्त को लगता है वसंत बीता जा रहा है, उसकी अशांति बढती जाती है, उसकी बेचैनी का अर्थ है कि वह परमात्मा की ओर चलना चाहता है, वह अपने घर जाना चाहता है.

Monday, April 28, 2014

विश्वकर्मा पूजा का भोज


Today again she is alone at home at this hour, Nanha and Jun both went to their respective destinations at 6.30 am. Weather is hot and she is feeling it. It is hot and stuffy so is her mind and so are her clothes. Mind is not as fresh and spirit is not as calm, something is troubling her either it is heat or something concerned with mind. But just she read, mind is not everything, also read some useful ways to avoid worries and start living meaning fully. But all the kings horses and all the king’s men can not join her broken heart… Last night she saw a dream, mother is going and she gave her pink sari, and one more thing in the dream was about the women of the house, they all used to show their gratitude by wailing when their men brought them new clothes, men were so puzzeled they stopped bringing any new garments. It was a strange dream.

उम्र के इतने पतझड़ देखने के बाद (वसंत भी तो) भी आज तक वह यह नहीं समझ पायी कि उसे क्या करना चाहिए या उसे क्या पसंद है या वह क्या अच्छी तरह कर सकती है, एक उहापोह की स्थिति हर वक्त मन में बनी रहती है, लगता है जैसे जो कुछ वह कर रही है अर्थयुक्त नहीं है बल्कि कुछ और है जिसे करने पर उसे पूर्ण संतुष्टि का अहसास होगा. यह अहसास भी सताता है कि अपने समय का सदुपयोग नहीं कर रही है, कर पा रही है. पढ़ाना उसे पसंद है और नन्हे को पढ़ाने का समय भी तय किया है लेकिन वह उन लोगों को पढ़ाना चाहती है जिनके पास साधन नहीं हैं. पर कहते हैं न कि इच्छा यदि दृढ़ हो, इरादे मजबूत हों तो राह खुदबखुद निकल आती है, उसके इरादे पानी के बुलबुलों की तरह होते हैं. उस दिन अपने आप से वादा किया कि रोज कुछ न कुछ लिखेग पर कल तो सारी दोपहर ‘करीब’ देखने में लगा दी. अच्छी फिल्म है शुरू में कुछ खास जम नहीं रही थी पर बाद में सभी का अभिनय अच्छा था. सही है कि टीवी और फिल्में वास्तविकता से दूर सपनों की दुनिया में ले जाती हैं, कल्पना की दुनिया में.. जहाँ सिर्फ ख्याल ही ख्याल होते हैं, हकीकत में होने वाले काम नहीं होते. पर वे ख्याल कभी-कभी असली जिन्दगी में काम भी तो आते हैं, प्रेम करना सिखाते हैं, जीने का नया अंदाज भी !


आज सुबह वे उठे तो वर्षा हो रही थी, बिजली चमक रही थी और बादल गरज रहे थे, मौसम मोहल हो गया है. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, जन्मदिन का उपहार बच्चों को दिया और कुछ देर बैठे, सखी ने पूछा क्या लिख रही हो, वह इतना ही बता पायी डायरी नियमित लिखती है. कल जून के दफ्तर में पूजा का भोज-प्रसाद ग्रहण करके वे दो बजे घर लौटे. वहाँ कई महिलाओं से कई दिन बाद मुलाकात हुई, इस तरह के get-together में बातचीत बड़ी formal सी ही रहती है फिर भी अच्छा लगता है लोगों के हाव-भाव देखना उन्हें सुनना. नन्हा देर से आया, उसकी वैन का ड्राइवर ज्यादा पी लेने के कारण अपनी चाबी खो बैठा था. इस पूरे इलाके में विश्वकर्मा पूजा पर पीने का रिवाज है, ड्राइवर अपनी गाड़ी की पूजा करते हैं और खुद ‘पानी’ पी लेते हैं. नन्हे का गणित का टेस्ट कल बेहतर हुआ, आज फिर उसका टेस्ट है, इस स्कूल में जाने के बाद से गणित में उसकी रूचि बढ़ी है. अपने इर्द-गिर्द नजर डाले तो ऐसा लगता है कि चीजों को सतही तौर पर जानना और उनमें गहरे उतरना दोनों बिलकुल अलग-अलग बातें हैं, गहरे उतरने में खतरा है पर असली स्वाद वहीं है, जीवन की तल्खियाँ हों या उम्मीदें, दोनों को आखिरी घूँट तक महसूस करना ही सच्चा जीवन है, उसने सोचा, यदि मन की बात माननी ही है तो इस कदर माने कि खुद को भूल जाए.

Wednesday, November 27, 2013

सेंस एंड सेंसिबिलिटी- जेन ऑस्टेन का नावेल


एक पल में ही मन चंचल हिरणों का सा छलांग लगता कहाँ से कहाँ पहुंच जाता है और आचार्य गोयनका जी का कहना है ‘’मन पर नजर रखो, एक विचार भी यदि शुद्ध नहीं है तो बीज पड़ गया जिसका फल तो मिलेगा ही, हर क्षण केवल शुद्ध और सद् विचारों का को ही बोओ तो कर्म भी ऐसे ही होंगे. कर्म की जड़ विचार ही तो है सो फल भी कड़वा ही मिलेगा अगर बीज कड़वे विचार का बोया है’’. विपश्यना हजारों साल पहले भारत में फली-फूली फिर लुप्त हो गयी और उसकी वजह से आज धर्म के नाम पर अधर्म का बोलबाला है. उस दिन अख़बार में भी इसके बारे में उसने पढ़ा-

Vipasana means insight. It is a simple practical process of mental purification through introspection and self conducted psychoanalysis. By observing oneself one becomes aware of the conditioned reactions and the prejudices that cover one’s mental vision, hiding reality and producing suffering. As the layers of inner tensions begin to peel off through vipassana, one learns to dissolve the negativeness of anger, fear, hatred, greed, jealousy and selfishness and manifest instead truly human qualities of compassion, tolerance, sympathy and humility and at the same time gain insight into the true nature and purpose of human existence.

लो फिर आ गया मधुर वसंत !
वायु में फैली मृदु सुवास पुष्पों ने बिखेरा स्मित हास
हृदयों में बौराया उजास
नयनों में छाया है विलास
पत्तों का रम्य नृत्य निरख
अमराई की मद गंध परख
भ्रमरों ने दीं कलियाँ चटख

बसंत की आहट सुनकर  कल रात को उन्होंने चिप्स बनाने के लिए आलू काट कर रखे थे पर सुबह धूप नदारद थी, इस समय बैठक में पंखे के नीचे सूख रहे हैं आलू चिप्स.

Jane Austen's “Sense and Sensibility”  is a very interesting novel. She was reading it since last 4-5 days and was fully engrossed in it. Marianne and Elinor both sisters are so loving but Elinor is more mature sometimes. She found Marianne nearer to her heart. Yesterday she could not open the diary because in the morning as soon as she finished her work, opened the book and at  afternoon book was with her and in the evening also… when she got some time, they were with her, Mrs Dash wood,Mrs Jennings all of those interesting people… Today at 8 o'clock the book is finished, it has a happy ending and so she is. After so many years she read a book with so eagerness. Tomorrow or on Monday perhaps will return the book and will get another book of Jane Austen. Today there is budget  in parliament, June is happy to here some reduction in tax rate.


Monday, January 21, 2013

वसंत की विदाई



शनिवार और इतवार गुजर गए, अच्छे दिनों की तरह. शनि की शाम को वह थोड़ा सा  घबरा गयी थी, जून डिब्रूगढ़ गए थे, आने में काफी देर कर दी, कार खराब हो गयी थी, पर फिर सब ठीक हो गया. इतवार शाम वे पड़ोस में एक बच्चे के जन्मदिन पार्टी में गए. आज सुबह ही पंजाबी दीदी ने फोन किया, वह उस समय खिड़कियों के लिए नेट के पर्दे सिल रही थी. उनके पास पंजाबी गीतों का एक कैसेट है, वह चाहती हैं वे उसे टेप कर दें. उसने कहीं पढ़ा कि डायरी लिखना चरित्र विकास में अत्यंत सहायक है. अपनी गलतियों तथा अपने सद्विचारों को परखने का माध्यम है. वह गलतियाँ तो हर पल न जाने कितनी करती है पर डायरी में लिखती नहीं. कल शाम को जून को कितना कुछ कह गयी, यह सबसे बुरी आदत है ज्यादा बोलना, किसी बात को कम से कम शब्दों में कहने से उसका असर बढ़ता ही है कम नहीं होता. जून कितने धैर्यवान हैं जरा भी बुरा नहीं मानते मगर वह जानती है यदि वह उसे ऐसे ही कुछ कह दें तो उसे कितना खराब लगेगा....नन्हे को प्यार वह भी उससे कम तो नहीं करते. और दूसरी कमजोरी है उसकी, कोई कार्य करके पछताना, पहले उत्साह में या कहें जल्दबाजी में कुछ करना और फिर सोचते रहना कि ऐसा न करके वैसा किया होता. तीसरी गलती है अपेक्षाएं रखना, इस दुनिया में अगर सही अर्थों में सुखी रहना है तो किसी से भी कोई भी अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए, क्योकि ज्यादातर मामलों में लोग निराश करते हैं और जहां नहीं करते हैं वहाँ उनकी और ध्यान नहीं जाता अर्थात हम खुश कम होते हैं और उदासी ज्यादा ओढते हैं.

मार्च का अंतिम दिन यानि वसंत को विदा और गर्मी का आगमन. आज भी कैसी उमस है इस कमरे में, अभी साढ़े नौ ही हुए हैं, बिना पंखा चलाए यहाँ बैठना मुश्किल है. अब सुबह अपने आप ही नींद खुल जाती है और सर्दियों की तरह उठने में देर भी नहीं लगती. नन्हे का आज पहला पेपर है, अंग्रेजी का, अच्छा होगा क्योंकि उसे सब याद है, कितना खुश था सुबह, बच्चे हर वक्त खुश, खिले-खिले पता नहीं कैसे रह लेते हैं...तभी तो वे बच्चे हैं ! उसकी एक परिचित का कई दिनों से फोन नहीं आया, उसे लगता है कि सम्बन्ध थोपे नहीं जा सकते, यदि सम्बन्ध जरूरत पर ही टिके हैं तो ठीक है जरूरत होने पर ही वह भी बात करेगी.

यह उसकी नितांत व्यक्तिगत पूंजी है
उसका ईश्वर सदा उसके पास है

आज बहुत दिनों बाद गीता पढ़ी, और अब अपने निकट आने का सुअवसर भी प्राप्त हुआ है. अप्रैल के महीने में दूसरी बार. इतने दिनों जैसे किसी स्वप्नलोक में जी रही थी. नन्हे के इम्तहान हुए, वे तिनसुकिया गए, मित्र परिवार को खाने पर बुलाया. छोटी बहन का पत्र आया. बड़ी बुआ के बेटे की शादी का कार्ड आया. छोटी भांजी कविता लिखती है, मालूम हुआ, और न जाने कितनी बातें.. कुछ लोगों से पहली बार मुलाकात हुई, चादर के तीन हिस्से पूरे हो गये. लेकिन बार-बार मन आहत होता है क्योकि अपेक्षाएं लगा बैठता है जो पूरी नहीं होती सकतीं..क्योकि वे दूसरों पर आश्रित होती हैं. अपना काम स्वयं करो संतुष्ट रहो, यही पाठ तो गीता में पढ़ती है फिर...आमतौर पर लोग निस्वार्थ नहीं होते..और पहले अपनी सुविधा फिर दूसरे का काम, यही रवैया अपनाते हैं...और जितनी जल्दी यह बात समझ में आ जाये..उतना ही अच्छा है.


Sunday, April 29, 2012

नन्ही बिट्टू


आज वसंत पंचमी है, ऋतुओं का राजा वसंत ! उसका आगमन हो और अंतर पुलक से न भरा हो, यह हो ही नहीं सकता. आज मौसम भी सुहावना है, दिन में धूप खिली थी और इस समय चाँद उगा है, तारे भी टिमटिमा रहे हैं. आज उसका खत आया है, लिखा है, वह जल्दी आयेगा और उसे भी नूना की तरह कभी-कभी रात को देर तक नींद नहीं आती. उसने सोचा, क्या पता वह कब आ जाये, और कहे, “चलो, घर चलो”.
और एक दिन वह सुबह सोकर उठी तो देखा कि जून आ गया है. उसी दिन शाम को वे सहारनपुर गए और उसके अगले दिन वाराणसी के लिये रवाना हो गए.  दो दिन वहाँ रहकर कल ही वे अपने घर आ गए हैं. वह बहुत खुश है.
मार्च का आरम्भ हो चुका है, आजकल उसे लिखने का समय कम मिलता है. कितनी व्यस्त रहती है वह अपने छोटे से परिवार में. नया मेहमान आने में चार महीने से भी कम समय रह गया है. जून उसका बहुत ख्याल रखता है बहुत सारी पौष्टिक वस्तुएं लाकर रख दी हैं. दूध भी दिन में तीन-चार बार पीने को कहता है. कल कह रहा था कि वह बहुत दुबली है, खुश रहे तो जल्दी तंदरुस्त हो जायेगी, यूँ वह खुश तो रहती है इतने दिनों के अलगाव के बाद वे साथ हैं. उसने गिना पूरे ४९ दिन वे दूर थे. कल शाम वे पड़ोस के दो परिवारों से मिलने गए. पुनः नन्ही बिट्टू से मिलकर उन्हें बहुत अच्छा लगा.