Thursday, September 20, 2012

बढता हुआ शोर...



प्रातः के साढ़े छह बजे हैं. घर में इतनी आवाजें हैं कि मन को एकाग्र कर पाना मुश्किल लगता है. नीचे बाबूजी के कमरे में उच्च स्वर में बजता ट्रांजिस्टर, साथ वाले घर में झाड़ू और बाल्टी की उठापटक की आवाजें, उस घर की महिला शायद घर धो रही हैं. ऊपर से ननद और पड़ोसी के बच्चे की जोर-जोर से बातें करने की आवाज. गनीमत है नन्हा अभी सोया है, नहीं तो यह जो इतना एकांत मिला है, वह भी नहीं मिलता. अब उसके उठने पर या टीवी समाचारों के बाद ही वह ऊपर जायेगी दोनों में से जो भी पहले हुआ. जून को कल शाम को एक और पत्र लिखा, जब कुछ और नहीं सूझता तो पत्र ही लिखती है और दस-पन्द्रह मिनट में पत्र का एक-एक कोना भर जाता है पता नहीं कैसे. उसको लिख दिया है भूल से कि एक ही पत्र मिला जबकि पिछले हफ्ते दो पत्र मिले थे. उसने सोचा है कि माँ-पिता के लिए एक शब्द-चित्र लिख कर भेजेगी इकतीस मई के लिए जब पिताजी रिटायर हो रहे हैं. शोर बढता ही जा रहा है, वहाँ असम के घर में कितनी शांति रहती थी सुबह-सुबह...जल्दी से ये दिन बीत जाएँ और वह जून के पास वापस.. अखबार वाले ने दो दिन बाद आज फिर पेपर दिया है.

सुबह के पाँच बज कर दस मिनट. उसने सोचा है एक घंटा पढ़ाई कर छह दस से कार्य आरम्भ करेगी. देखे कहाँ तक सफल होती है अर्थात शोर शुरू हो गया तो...अभी तक तो सब कुछ शांत है. कहीं से लाउडस्पीकर की आवाज भी नहीं आ रही है. अब उसे लगता है कि नीचे ही बैठना चाहिए. नन्हे को छत पर से उठाकर ला रही थी तो वह रोने लगा कि छत पर ही सोना है, पर उसे अकेले छोड़ा नहीं जा सकता था. मना कर लायी, ये छोटे-छोटे बच्चे भी भी...बस, अब कैसे चुपचाप सोया है.

मई का प्रथम दिन..मई का महीना यानि उसके जन्मदिन का महीना..इस वर्ष वह एक कम तीस की हो जायेगी. उसे खुद नहीं लगता कि उम्र इतनी हो गयी है न तन से न मन से. तभी उसे ख्याल आया देखें, जून उसके जन्मदिन पर क्या देंगे. ३१ को पिताजी रिटायर हो रहे हैं, यानि उनकी उम्र ५८ की हो गयी है. उससे दुगनी. दीदी तेतीस की हो गयी. आजकल में सभी के पत्रों के जवाब देने हैं. सुबह के सवा छह बजे हैं बनिस्बत आज शोर कम है वह ऊपर के कमरे कम किचन में बैठी है, नन्हा पास ही सोया है. कल देखी हुई फिल्म आयी थी पर बोर नहीं लगी, कहीं पढ़ा था कि देखे हुए टीवी कार्यक्रम या फिल्म मस्तिष्क को ऊर्जा से भर देते हैं. आज उसका मन शांत है, मई आरम्भ हुआ है शायद उसी का असर है, शांत पानी पर तिरती नाव का सा शांत. वह शब्द चित्र जिसके लिखने की बात उसने तय की थी आज से ही आरम्भ करेगी. इसी डायरी के खाली पन्नों पर. जून तो ऑफिस जाने की तयारी में लगे होंगे शायद स्नान कर रहे हों, या तैयार होकर उसे पत्र ही लिख रहे हों उसने मन ही मन उसे शुभ प्रभात कहा.


 

1 comment:

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