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Wednesday, January 6, 2021

विदाई समारोह

 

पिछले तीन दिन व्यस्तता में बीते. डायरी लिखने का न समय था न ख्याल ही आया. इस समय रात्रि के नौ बजने वाले हैं जून अमेरिका में रहने वाले अपने कालेज के समय के एक पुराने मित्र से बात कर रहे हैं. जिस कम्पनी में वह रिसर्च का काम करते थे, वहां अनुसंधान विभाग बन्द हो गया है. अब उन्हें दूसरी जगह जाना है. विदाई समारोह में भाग लेने आज जून दफ्तर गए थे. समारोह अच्छा रहा, उन्हें कई उपहार भी मिले हैं, अभी खोलकर नहीं देखे हैं. सभी ने उनके लिए अच्छे शब्द कहे सिवाय एक के, जिन्हें शिकायत है कि जून उन्हें समय पर दफ्तर आने के लिए टोका क्यों करते थे. दुनिया में शत्रुता-मित्रता उसी तरह आती-जाती है जैसे दिन-रात और सर्दी-गर्मी. उन्हें साक्षी भाव से उसका वहन करना है. कल से गणेश पूजा का उत्सव आरम्भ हो गया है. वे तिनसुकिया गए और सभी के लिए पूजा के उपहार लाये. 


आज सुबह वे उस घर की तरफ गए, जहाँ वर्षों पहले पहली बार रहे थे, मात्र छह महीनों के लिए फिर उस घर की तरफ जहाँ नन्हे का जन्म हुआ था, बाहर से ही उसकी तस्वीर उतारी.इस घर में छह वर्ष रहे. शाम को एक अन्य घर की तस्वीर लेनी है जहाँ तेईस वर्ष रहे, और जिसमें अभी रह रहे हैं वह चौथा घर है. आज कपड़ों की आलमारी खाली की. ढेर सारे ऐसे वस्त्र निकले हैं जिन्हें अब पहनना नहीं है, कुछ गर्म कपड़े जो अब बंगलूरू में नहीं चाहिए. सभी को ठीक से तह करके अलग-अलग जगह बाँट देने हैं. बहुत सारी किताबें भी हैं जिन्हें वितरित करना है. कल शिक्षक दिवस है, मृणाल ज्योति में अंतिम बार इसमें भाग लेने का अवसर मिलेगा. 


शिक्षक दिवस पर सुंदर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. एक दूसरे स्कूल में भी उसे बुलाया था जहां योग सिखाने  जाती थी, उन्होंने दो उपहार दिए  हैं, एक विद्यार्थियों की तरफ से और एक स्कूल की तरफ से. उन्हें भी खोला नहीं है. बैठक में फूलों के ढेर और कई अनखुले उपहारों का ढेर लग गया है. लगता है जैसे अब किसी भी वस्तु की आवश्यकता नहीं रह गयी है. उम्र के इस पड़ाव पर आकर जैसे एक तृप्ति की भावना प्रबल हो जाती है. मन की अपार शांति और सुख के सामने वस्तुएं  खिलौने जैसी ही जान पड़ती हैं. शाम को योग कक्षा में भी साधिकाओं ने शिक्षक दिवस मनाया. फूलों के गुलदस्ते और पीतल का एक सुंदर दीपदान उपहार में दिया. अगले हफ्ते से योग कक्षा स्कूल के हॉल में होगी. 


आज सुबह साढ़े आठ बजे वे मोरान के लिए रवाना हुए. कुछ देर पूर्व ही लौटे हैं. मोरान  अंध विद्यालय में श्री विक्टर बनर्जी और उनकी पत्नी श्रीमती माया बनर्जी से मुलाकात हुई. प्रिंसिपल वार्गीश और प्रशासनिक अधिकारी जोशी जी से भी मुलाकात हुई. हर क्लास में जाकर बच्चों को चॉकलेट दीं, प्रिंसिपल स्वयं ले गए. माहौल बहुत स्वच्छ और अच्छा था. मोरान गेस्ट हाउस में दोपहर का भोजन करने के बाद डिब्रूगढ़ में एक फर्नीचर की दुकान पर गए, बैम्बू का एक झूला  पसन्द आया जो असम की एक कलात्मक स्मृति के रूप में वे बैंगलोर ले जाने वाले हैं. 


रात्रि के सवा आठ बजे हैं. प्रधानमंत्री का अपनी सरकार के सौ दिन पूरे होने पर जोशीला भाषण दिखाया जा रहा  है, जो उन्होंने रोहतक में दोपहर को दिया था. इसरो के प्रमुख सिवान को सांत्वना देता हुआ उनका वीडियो काफी देखा जा रहा है. वह हर स्थिति में अपनी भूमिका सहजता से निभाते हैं. आज सुबह वह एक नई दिशा में गए सूर्योदय की कई तस्वीरें उतारीं। प्रातः भ्रमण अब ज्यादा आनंददायक हो गया है, क्योंकि समय का कोई बंधन नहीं रह गया है. माली से कुछ पौधे प्लास्टिक के गमलों में लगवाये जिन्हें वे अपने साथ ले जायेंगे. दस दिनों तक यात्रा के दौरान उनमें से कितने बचेंगे कहना कठिन है. मात्र सवा महीना रह गया है उन्हें जाने में. अगले सप्ताह शिलांग जाना है. मेघालय में  डौकी नामका एक स्थान है, जहाँ एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव है तथा एक जीवित वृक्ष का पुल है, वहां भी जायेंगे. यह उनकी मेघालय की अंतिम यात्रा होगी.  कल शाम मंझले भाई ने बिटिया के विवाह का समाचार दिया जो दो महीने बाद होने वाला है. उन्होंने पिताजी से बात की, यदि उनका स्वास्थ्य ठीक रहा तो वे भी विवाह में आएंगे.


और अब उस पुरानी डायरी का पन्ना - 


तितली के दिन, फूलों के दिन 

गुड़ियों के दिन, झूलों के दिन 

उम्र पा गए, प्रौढ़ हो गए 

आटे सनी हथेली में 

बच्चों के कोलाहल में 

जाने कैसे खोये, छूटे 

चिठ्ठी के दिन, भूलों के दिन 


नंगे पाँव सघन अमराई 

बूंदाबांदी वाले दिन 

रिबन लगाने, उड़ने-फिरने 

झिलमिल सपनों वाले दिन !


अब बारिश में छत पर 

भीगाभागी जैसे कथा हुई 

पाहुन बन बैठे पोखर में 

पाँव भिगोने वाले दिन 

इमली की कच्ची फलियों से 

भरी हुई फ्राकों के दिन 

सीपी, मनकों, कौड़ी 

टूटी चूड़ी की थाकों के दिन !


अम्मा संझा बाती करती 

भौजी बैठक धोती थी 

बाबा की खटिया पर 

मुनुआ राजा की धाकों के दिन 

वो दिन मनुहारों के, झूलों पर 

झूले और चले गए 

वो सोने से मण्डित दुनिया 

ये नक्शों, खाकों के दिन !


Thursday, April 9, 2020

चिड़िया की कूजन


दोपहर के ढाई बजे हैं, कुछ ही देर में दोपहर की योग कक्षा के लिए महिलाएं आएँगी. कुछ देर पहले दो ब्लॉग्स पर लिखा. कमरे में एसी चल रहा है पर उसकी आवाज को भी चीरते हुए बाहर से चिड़िया की मधुर चहकार आ रही है, भले ही तेज धूप हो पर इसके बावजूद पंछी दोपहर भर  कूजते हैं, विश्राम वे रात को ही करते हैं सूर्यास्त के बाद. कल शिक्षक दिवस सोल्लास मनाया, सुबह मृणाल ज्योति में, दोपहर को बाहर बरामदे में बच्चों के साथ और शाम को गायत्री समूह की योग साधिकाओं के साथ ! गुरूजी के प्रेम का जादू उन पर भी चलने लगा है, कल वे बहुत सुंदर दीपदान लायीं पूजा कक्ष के लिए, साथ ही ढेर सारी खाने की वस्तुएं, उनका उत्साह देखते ही बनता था. एक ने कबीर के दोहे गाए, दूसरी ने अपनी रची दो पंक्तियाँ और एक अन्य ने सुंदर बंगाली भजन गाया।  मन होता है उनके लिए एक कविता लिखे. दोपहर को भी बच्चों ने सुंदर सजावट की. समोसे, केक व कोल्डड्रिंक्स का इंतजाम किया, उन्होंने आपस में पैसे जमाकर के ये सामान खरीदा. उनका भी उत्साह बहुत था. स्कुल में सभी टीचर्स को उपहार अवश्य ही पसन्द आये होंगे. कल जाने पर फीडबैक मिलेगा. जीवन एक उत्सव है , यह गुरूजी का वाक्य सत्य सिद्ध हो रहा है. दोपहर बाद उसने लिखा 

दिलों में प्रेम और उत्साह भरे
चमकते हुए ख़ुशी से आपके चेहरे
चुपके-चुपके से उत्सव का आयोजन
मानो लौट आया हो फिर से बचपन

दीप स्तम्भ सजा थाल में
 भरा मिष्ठान और फूलों-फलों से
चहकते पंछियों से सुमधुर गान
याद आएंगे जब तक हैं प्राण

गुरु का ज्ञान जब फलता है
तभी जीवन में ऐसा फूल खिलता है
मिलन घटता है पावन आत्माओं का
जीवन एक सुवास बन झरता है

वैसे तो कभी न आएगा अब
पतझड़ दिल के मौसम में
यदि कभी भूले से आ भी जाये
तो इस शाम का वसन्त भर देगा उसे
जीवन पथ को प्रकाशित कर देगा
फूलों, दीपों और मिठास से

बनी रहे इसी तरह मुखड़े पर मुस्कान हर पल
भरी रहे जीवन सरिता छल छल
कोई आस न रहे अधूरी, हर साध हो पूरी
क्योंकि खुद को जानकर मिल जाती है
श्रद्धा और सबूरी !

सुबह के पौने आठ बजे हैं, ड्राइवर अभी आने वाला होगा, फिर कार निकालेगी, वैसे अकेले भी जा सकती है पर घर में सफाई का काम चल रहा है. पोहे का नाश्ता किया और केला, जून ने कहा केला खाने से वजन बढ़ता है. वह बंगलूरू में अपना मेडिकल चेकअप कराके आये हैं, उनका वजन ज्यादा है. उन्होंने टहलने का वक्त भी बढ़ा दिया है और लंबा रास्ता लिया है पहले से. वापस आकर भी देह में स्फूर्ति नहीं लग रही थी, तमस का अनुभव हुआ पर प्राणायाम से फर्क पड़ा. कल रात को नींद ठीक से नहीं आयी, जून को एओल के कोर्स में जाने के लिए दुबारा कहा तो वह नाराज हो गए और उनकी नकारात्मक ऊर्जा शायद उसे विचलित कर रही हो, सूक्ष्म स्तर पर ऐसा हो सकता है. कुछ वर्ष पूर्व किसी आवाज ने भीतर से बार -बार कहा था, दूसरे कमरे में सोने जाओ पर वह भीरु आजतक हिम्मत नहीं जुटा पायी, जून क्या सोचेंगे, उन्हें बुरा लगेगा. इसलिए विवाह को बन्धन कहा गया है, एक-दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखना होगा. आँखों में नींद का सा अनुभव हो रहा है अब बाहर जाना चाहिए. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति की एक परिचारिका को देखने अस्पताल जा रही थी, एक अध्यापिका से पता चला वह दो दिन पूर्व ही रिलीज हो गयी है. सो पब्लिक लाइब्रेरी चली गयी, एक किताब ली, लाइब्रेरियन ने बताया, माह के अंत में बच्चों की कहानी प्रतियोगिता है, जिसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे. उसे हिंदी में निर्णायक के रूप में सहायता करनी है. कल मृणाल ज्योति में मीटिंग है, विधान परिषद के एक सदस्य ने पांच लाख की सहायता का वचन दिया है जिससे स्कूल में एक स्टेज बनेगा, जहां भविष्य में कई कार्यक्रम हो सकते हैं. 

Saturday, April 4, 2020

डॉ राधाकृष्णन का जन्मदिन


परसों दोपहर अचानक एओल के एक स्वामी जी का फोन आया. नेट पर सेवा देने को कह रहे थे. उसे बहुत ख़ुशी हुई. वर्षों पूर्व जब वह असम आये थे उनसे मिले थे. उन्होंने एक फार्म भेजा जिसका कंटेंट एक दूसरे फार्म में भरना था, उसने भर दिया. उन्होंने कहा, अगले दिन यानि कल सुबह वह पुनः अन्य फार्म भी भेजेंगे. पर अभी तक कोई संदेश नहीं आया है, खैर.. परसों और कल सुबह तक मन कितना  प्रसन्न था, गुरूजी के काम में कुछ मदद करने का मौका मिल रहा है , यह विचार मन को उच्च भावों में ले जा रहा था. कल दोपहर एक अन्य बात हुई, लगभग चालीस-पचास मिनट के लिए मन बिलकुल खो गया, गहन सुषुप्ति या समाधि... शाम तक उसका असर रहा. बेवजह ही मन एक गहन प्रसन्नता का अनुभव कर पा रहा था. कल शाम को भजन का कार्यक्रम भी अच्छा रहा. जून ने लड्डू बनाये, उसने उनकी सहायता की, रात्रि भौजन बनाया, सब करते हुए भी कुछ करने का अहसास नहीं हो रहा था, पर रात को नींद वैसी नहीं थी. एक दुःस्वप्न भी देखा. अपने पूर्व संस्कार को पुनः जागृत होते हुए देखा, लगता था मन अब उससे पूर्ण मुक्त हो गया है. प्रेम जब एकाधिकार चाहता है तब विकृत हो जाता है, और इसके मूल में है अहंकार यानि देह को अपना स्वरूप मानना। आत्मा कुछ भी नहीं है तो वह किसी पर क्या अधिकार करेगी, फिर उसके सिवा कुछ अन्य है भी तो नहीं, जब तक मूल ग्रन्थि नहीं कटेगी कोई न कोई विकार जगता ही रहेगा. स्वप्न में भी उस पीड़ा महसूस किया. आज की रात्रि ध्यान में गुजरेगी ऐसा प्रयत्न रहेगा, आगे आने वाली चार रात्रियाँ भी. 

सितम्बर का प्रथम दिन ! यानि आषाढ़ का प्रथम दिन ! सुबह से मूसलाधार वर्षा हो रही है. सफाई कर्मचारी ने फोन किया, बारिश रुकने पर ही आएगा. व्हाट्सअप भी नहीं चल  रहा है और फोन भी आधा चार्ज है, बिजली छह बजे से ही नदारद है, बिजली न होने से घर में अभी भी रात्रि जैसा ही प्रतीत हो रहा था सो वह बाहर बरामदे में आ गयी है. सामने लॉन में पेड़-पौधे, हरी घास सभी भीग कर प्रसन्न हो रहे हैं. कल रात्रि कुछ देर समाचार देखे, जून बाहर गए हैं, उनके रहने पर तो टीवी नौ बजे बन्द हो जाता है. कश्मीर में आतंकवादी पुलिसवालों के परिवार जनों को अगवा करने पर उतर आये हैं. माओवादी प्रधानमंत्री को हटाने की योजनाएं बना रहे हैं. देश में रहकर देश के विरुद्ध कार्य करने वाले जयचंदों की कमी नहीं है. सरकार सभी वर्गों के लिए कितना कार्य कर रही है यह उन्हें नजर नहीं आता. प्रधानमंत्री के लिए कितना कठिन होता होगा हर दिन, उनके लिए तो सभी देशवासियों को शुभकामनायें भेजनी चाहिये. सुबह पौने पांच बजे नींद खुली, उस समय वर्षा रुकी थी, सो टहलने गयी, बाहर ही बैठकर प्राणायाम किया, घर आते ही बिजली चली गयी थी. नाश्ते में मूसली खायी, जून के न रहने पर रोज सुबह यही नाश्ता होता है या कॉर्न फ्लेक्स. अब वर्षा कुछ कम हुई है, नैनी झाड़-पोंछ कर रही है, साप्ताहिक सफाई के लिए स्वीपर भी आ गया है. कुछ देर पहले प्रेसीडेंट का फोन आया, वह कल शाम मेडिकल चेकअप कराकर लौट आयी हैं. दो बार बायोप्सी हुई, काफी तकलीफदेह रहा उनका अनुभव. अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हैं. रिपोर्ट दो दिन बाद आएगी. उम्मीद है सब ठीक होगा. नौ बजे उनके घर जाना है, उसके पूर्व बुखार से पीड़ित योग साधिका के यहां जाया जा सकता है. 

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, आज कुछ लिखने की इच्छा जगी है क्योंकि कल शिक्षक दिवस है. मृणाल ज्योति जाना है, जहाँ कुछ बोलने के लिए भी कहा जायेगा.,  शिक्षक दिवस डॉ राधाकृष्णन,  जो शिक्षाविद तथा दार्शनिक थे, की याद में 1962 से मनाया जाता है. उनका जन्म पांच सितम्बर अठारह सौ अठ्ठासी को हुआ था. वह दो बार भारत के  उप राष्ट्रपति रहे, फिर राष्ट्रपति बने. वह पूरी दुनिया को विद्यालय मानते थे, कहते थे कहीं से भी सीखने को मिले तो उसे अपने जीवन में उतार लेना चाहिए. एक बार उनके कुछ विद्यार्थी उनका जन्मदिन मनाने के लिए अनुमति लेने गए तो उन्होंने कहा इसे केवल मेरे लिए नहीं सभी शिक्षकों के सम्मान में मनाओ. गूगल से मिली इतनी जानकारी तो बहुत है, शेष दिल में जो विचार उस समय आएंगे, बोल दिए जायेंगे. उसने मन ही मन सोचा, शिक्षक विद्यार्थी का मित्र भी होता है और मार्गदर्शक भी. वह उसे केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देता, अपने जीवन से भी बहुत कुछ सिखाता है. वह कभी कठोर भी हो सकता है पर उसका उद्देश्य केवल छात्रों की उन्नति करना और उन्हें बेहतर इंसान बनाना ही होता है. शिक्षक समाज का निर्माण करता है. दस बज गए हैं, अब सोने की तैयारी करनी चाहिए.आज नैनी की छोटी बेटी का जन्मदिन था, उसे एक गमछा दिया व एक बिस्किट का पैकेट. शाम को योग कक्षा में एक साधिका जन्माष्टमी का प्रसाद लायी, धनिये की पंजीरी जिसमें गोंद भी थी, उसने पहली बार खायी. दोपहर को सबने मिलकर गिफ्ट्स पैक किये. आज राधा-कृष्ण के असीम प्रेम व विरह वाला कृष्ण का अंक देखा, कितना गहरा था उनका प्रेम ! प्रेम ही इस जगत का आधार है, यदि प्रेम न हो तो इस जगत में क्या आकर्षण रह जायेगा, प्रेम ही तो ईश्वर है ! कल जून आ रहे हैं, कल इस समय तक तो वे सो चुके होंगे. 

Tuesday, May 28, 2019

वृद्धा की राम राम



महिला क्लब द्वारा संचालित बच्चों के स्कूल की पत्रिका छप रही है, स्वर्ण जयंती समारोह पर. अभी-अभी उसने एक अंग्रेजी व एक हिंदी लेख की प्रूफ रीडिंग की, सोचा, क्यों न वह भी इसमें अपनी एक कविता दे जो काफी पहले बच्चों पर लिखी थी. ब्लॉग पर कुछ दिन पहले लिखी एक कविता प्रकाशित की. काव्यालय पर उसकी प्रतिक्रिया पसंद आई, ध्यान का ही जादू है, यानि परमात्मा का. उसके मन में कल की बात घूम रही है, देश आगे बढ़े इसके लिए उन्हें भी अपने तौर पर कुछ करना होगा. वह स्वच्छता रखने के लिए क्या कर सकते हैं, इस पर मिलकर चिन्तन करना होगा. स्वच्छता ही सेवा है, इस अभियान को उन्हें सफल बनाना है. बच्चों को भी इस काम में बहुत आनंद आता है.

अब एक ही श्वास में पूल की चौड़ाई पार हो जाती है, जब सहज होकर तैरती है तो पता ही नहीं चलता और दूसरा किनारा आ जाता है. कई बार इधर से उधर चक्कर लगाये. आज गहराई वाले स्थान पर भी गयी. सीढ़ी से पूरा नीचे तक, जहाँ फर्श है पूल का. पानी ने पल भर में ऊपर ला दिया. पानी उनका मित्र है, वह देव है, वह डुबाता नहीं है, यदि वे सहज रहें. तभी बच्चे शीघ्र सीख लेते हैं, आज श्वास का अभ्यास किया, एक हाथ पर देह को पानी में संतुलित रखना है, पर अभी तक मुँह ऊपर उठाकर श्वास लेना नहीं आया है. जैसे यहाँ तक पहुंची है, एक दिन वहाँ भी पहुँच जाएगी. तैरना एक सुखद अनुभव है. नाक से पानी गिर रहा है रह-रह कर, कल भी ऐसा हुआ फिर अपने आप ही ठीक हो गया.

आज सुना, धी, धृति और स्मृति बुद्धि के ये तीन रूप हैं. 'धी' समझने की शक्ति है, 'धृति' संयम करने की और  स्मृति याद रखने की शक्ति है. जो हिंसा नहीं करता, उसकी धृति शक्ति बढ़ती है. धृति ही मन का नियमन करती है, मन नियंत्रित रहता है. जहाँ सुख दिखाई देता है, मन उधर जाता है. यदि धृति भंश हुई है तो अहितकर विषयों से स्वयं को रोकने में समर्थ नहीं हो पाता मन. जिस वस्तु से हटना है, धृति यदि प्रबल हो तो हटने में देर नहीं लगती. अहितकर चीजों को भी करता रहता है. हितकारी प्रवृत्ति को धृति नहीं रोकती.

शनि और इतवार पलक झपकते बीत गये. इतवार को बच्चों ने 'शिक्षक दिवस' मनाया. बरामदे में झालर, गुब्बारे आदि लगाकर सजाया. शनिवार को वे डिब्रूगढ़ गये. कुछ देर ब्रह्मपुत्र के किनारे बैठे. जून ने एक तस्वीर उतारी जो एक सुंदर स्मृति बन गयी है. आज ब्लॉग पर कुछ विशेष पोस्ट नहीं कर पायी. हिंदी फॉण्ट को लेकर कुछ समस्या आ रही थी. उस दिन प्रिंटिंग को लेकर जो समस्या थी, उसका हल करने के लिए कम्प्यूटर इंजीनियर आया था, कल फिर आएगा. कल उन्हें मृणाल ज्योति जाना है. शिक्षक दिवस के लिए उपहार लेकर. एक नई कविता भी लिखेगी.

सुबह समय से उठे, हल्का अँधेरा था, आकाश में छाये बादलों की वजह से शायद. सुबह कई बार बल्कि रोज ही एक वृद्ध महिला ( लाठी लेकर चलती हुई )मिलती है. हर मौसम में उसकी भ्रमण के प्रति निष्ठा देखकर एक दिन उसे 'नमस्ते' कह दिया था, अब वह दूर से उन्हें देखकर ही हाथ जोड़कर 'राम राम' कहना नहीं भूलती. सुबह मृणाल ज्योति में 'शिक्षक दिवस' मनाया. दोपहर को सफाई का काम आगे बढ़ा. तीन बजने वाले हैं एक घंटे के लिए पुनः क्लब के काम से बाहर जाना है. आज अभी तक तो चाय पीने के संस्कार को हावी होने नहीं दिया है. 'व्यसन' की परिभाषा एक बार सुनी थी. जिसको पूरा करने से नुकसान होता हो और न करने से चाह बनी रहती हो, अर्थात जो आरम्भ से लेकर अंत तक दुख देने वाला है, केवल मध्य में सुखी होने का भ्रम पैदा करता है.

Thursday, September 20, 2018

सिस्टर शिवानी का कार्यक्रम



शाम के चार बजकर दस मिनट हुए हैं. आज भी क्लब में मीटिंग है. कल बड़े भाई आ रहे हैं, वह उन्हें लेने जाएगी. सुबह वह मृणाल ज्योति गयी थी, शिक्षक दिवस का कार्यक्रम था, क्लब की तरफ से व अपनी तरफ से भी उसने सभी अध्यापिकाओं को उपहार दिए. उनके द्वारा पेश किया कार्यक्रम भी अच्छा रहा. सुबह नींद जल्दी खुल गयी, कुछ देर ध्यान किया बाद में फिर नींद आ गयी, किसी ने आवाज दी उस नाम से जिसमें उसे जून बुलाते हैं. कैसा रहस्यमय यह संसार, कौन है जो बिना मुख के बोलता है, कौन है जो बिना हाथों के छूता है, उस दिन कंधों पर जो स्पर्श किसी ने किया था, वह अभी तक सिहरन पैदा कर देता है. पिछले कुछ दिनों से एक गंध हर समय साथ रहती है. कैसी है यह गंध, क्या है इसका स्रोत..कुछ पता नहीं. आज कई दिन बाद फोन ठीक हुआ, शायद दो-तीन दिन बाद ब्लॉग पर लिखा. कविता कई दिनों से नहीं लिखी, समय भी तो चाहिए और एक भिन्न भाव दशा, अब मन स्थिर हो गया है.

कल भाई की फ्लाईट समय पर थी. दोपहर बाद वे हवाई अड्डे से घर वापस आ गये थे. सुबह भ्रमण के लिए गये. भाई को यहाँ अच्छा लग रहा है. दिन भर कुछ न कुछ क्रिया-कलाप होता है. शाम को क्लब जाना था, वापस आकर भोजन करते और सोते काफी देर हो गयी. आज भी सुबह स्कूल गयी, शाम को क्लब में एक परिचित परिवार का विदाई समारोह था. अच्छा रहा, लौटने में देर हो गयी. भाई तब तक जगे ही थे. अखबार में सुडोकू हल कर रहे थे.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा. समय जैसे तीव्र गति से भाग रहा है. आज वे ड्राइवर के साथ दूर तक घूमने गये, भाई को पाइप ब्रिज दिखाया. उन्होंने ही बाजार से सब्जी भी खरीदी. शाम को योगनिद्रा का अभ्यास किया. लगभग रोज ही एक बार सिस्टर शिवानी को सुनने का क्रम भी बन गया है. वह अस्पताल गयी, एक सखी की सासुमाँ वहाँ भर्ती हैं. उसे देखकर वह प्रसन्न हुई. प्रेम से किया गया छोटा सा कृत्य भी किसी को राहत दे जाता है.

शाम के साढ़े पांच बजे हैं. बाहर से जंगली काली मुर्गी की आवाज लगातार आ रही है, जो अपने पूरे परिवार के साथ बांस की हेज में रहती है. जब बगीचे में कोई नहीं होता तब घूमती फिरती है और शोर मचाती है, बाहर जाकर देखें तो छुप जाती है. अभी कुछ देर पूर्व वे बगीचे में थे. भाई ने एक तस्वीर ली, आंवले के वृक्ष पर बैठी गिलहरी की. आकाश पूर्व में गुलाबी हो रहा था. कल शाम वे भ्रमण पथ पर जाकर आकाश की तस्वीर उतारेंगे. आज जून इटली के शहर ट्यूरिन में हैं, उन्हें वापस आने में चार-पांच दिन और हैं. कल फेसबुक पर एक वरिष्ठ लेखक ने प्रश्न किया, वह फेसबुक पर क्यों है, सहज ही उत्तर लिख दिया, पर उन्होंने उसे टैग करके पोस्ट कर दिया, कितने ही लोगों ने पढ़ा, उसकी एक तस्वीर भी पोस्ट कर दी, कब किस मार्ग से लोगों से जुड़ना होगा, कौन जानता है. विचार किस प्रकार उनका भाग्य बनाते हैं, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण आज देखा. उन्हें मनसा, वाचा, कर्मणा कितना सजग रहना होगा.

Saturday, June 10, 2017

योग की कक्षा


अभी-अभी एक स्कूल की ओर से ड्राइवर आकर नियुक्ति पत्र देकर गया है. एक योग शिक्षिका के तौर पर उसे हर बुधवार को बच्चों को योग सिखाने जाना है. कल रात्रि स्वप्न में उसने स्वयं को एक गुरू का एक भजन गाते हुए सुना, कितनी स्पष्ट आवाज थी. आरम्भ में गले से दबी हुई आवाज निकल रही थी पर दो बार गाने के बाद बहुत स्पष्ट हो गयी. एक अन्य स्वप्न में वह रास्ता भूल गयी है, और छोटे भाई से कहती है, वह घर तक छोड़ आये. एक आनंद से भर देने वाली उपस्थिति अब मन से हटती नहीं है, शायद उसी ने उसे स्कूल में भेजने का जुगाड़ किया है. परमात्मा का प्रेम, ज्ञान और बल ही उन्हें कृत्य में सफल करता है.  

कल शाम जून ने योग के लाभ पर एक छोटा सा पॉवर पॉइंट प्रेजेटेशन बनाकर दिया, उससे अवश्य छात्र-छात्राओं को समझाने में मदद मिलेगी. मन में योग की कितनी ही परिभाषायें उमड़ती-घुमड़ती रहती हैं. योग का अर्थ है जोड़ना, मन के साथ श्वास को, श्वास के साथ देह को और भावनाओं के साथ मन को, फिर उन सबको देखने वाला द्रष्टा अपने आप के साथ जुड़े. योग एक जीवन पद्धति है जिसमें परमात्मा व प्रकृति के प्रति एक श्रद्धा भाव मन में जगाना है, एक आश्चर्य का भाव भीतर जग जाये, ऐसी दृष्टि से इस जगत को देखना है. आज नेट नहीं चल रहा, सो कोई पोस्ट नहीं पढ़ पायी. उनका नया मॉडेम एक दो दिनों में आ ही जायेगा.

स्कूल में आज पहला दिन था, अच्छा लगा. बच्चों को योग करना अच्छा लगता है. कक्षा एक से दस तक के बच्चे थे. कमरा थोड़ा छोटा था पर ठीक ही रहा. दोपहर को महादेव की अगली कड़ी देखी, पार्वती और शिव के स्वेद से एक बालक उत्त्पन्न हुआ है जो भविष्य में उनसे युद्ध करेगा. अद्भुत हैं भारतीय पौराणिक कथाएं !
कल रात एक अनोखा स्वप्न देखा, नन्हा और उसके दो मौसेरे भाई एक जैसे हैं और कई हैं, वह पूछती है, वे लोग एक से अनेक कैसे हो गये, फिर देखा, दो मिल गये और एक हो गये, कैसा अद्भुत स्वप्न था. उसे नींद से जगाने के लिए था. आज जून दिल्ली गये हैं, सुबह उन्हें जल्दी जाना था, नौ बजे के बाद हवाईअड्डे का घेराव किया गया था. कल शाम छोटी बहन से बात हुई बहुत दिनों के बाद. उसने क्लब के वार्षिक कार्यक्रम के लिए उससे थीम के बारे पूछा तो उसने कहा, उन्हें नदी किनारे बसने वाले लोगों के जीवन पर उसे आधारित किया जा सकता है. असम की विशाल नदी ब्रह्मपुत्र, लोहित, सुवर्ण श्री या तीस्ता पर. कार्यक्रमों में वे मछुआ नृत्य दिखा सकते हैं और सजावट में नौका आदि, जल बचाने का संदेश भी दिया जा सकता है, इसी विषय पर आधारित कोई स्किट भी. शाम को मीटिंग है, वह यह सुझाव दे सकती है.


आज वे मृणाल ज्योति गये थे, शिक्षक दिवस मनाया गया. कल शाम मीटिंग में काफी देर हो गयी, वर्ष भी होने लगी थी. एक सदस्या, जो वहाँ भी काम करती थीं, ने बताया, उनके मिशनरी स्कूल में एक घटना हो गयी, शिक्षक दिवस नहीं मनाया गया. आजकल माहौल बिगड़ता जा रहा है, छात्र-छात्राएँ शिक्षकों का सम्मान नहीं करते, उन्हें कुछ कहने पर माता-पिता शिकायत करने आ जाते हैं. छात्र पढ़ें या न पढ़ें, उन्हें कुछ कहने का अधिकार अध्यापकों को नहीं रह गया है. जीवन कितना विषम हो गया है, कितना जटिल. बदलते हुए वक्त में विद्यार्थी शिक्षक का जो सहज स्नेह भरा संबंध था वह नजर नहीं आता, 

Thursday, June 21, 2012

अरबी की सब्जी


आज शिक्षक दिवस है. कभी वह भी पढ़ाती थी. पहले स्कूल में, फिर घर पर, और तब कॉलेज में. बचपन से ही वह शिक्षिका होना चाहती थी. वे बचपन में स्कूल-स्कूल खेला करते थे. सब भाई-बहन, जिसमें फुफेरे भाई–बहन भी शामिल होते थे और कुछ आस-पड़ोस के बच्चे. और आज वह इतनी बड़ी हो गयी है कि माँ बन गयी है, उसने सोते हुए शिशु की ओर देखा. तभी तो वह लिख पा रही है. सुबह भी वह सोया था जब जून ऑफिस गया. उसने स्नान किया, खाना बना कर रख दिया. तब जाकर वह उठा. उसके सारे काम करते, नहलाते-खिलाते दो घंटे कैसे बीत गए पता ही नहीं चला, और तब पुनः उसे नींद आने लगी, मालिश-स्नान व आहार पाकर वह अब सुख की नींद सोया है. अब वह स्नान के समय पहले की तरह रोता नहीं है उन्हें हँसते देखकर, कितना प्यारा हँसता है. कल दिन भर बहुत कम सोया, शाम से रात तक बहुत परेशान रहा, जून उसे रोता हुआ नहीं देख पता, घंटा-घंटा भर तक गोद में लेकर झुलाता है जब तक कि वह सो न जाये.

जून को दुबारा बाजार जाना पड़ा, सेब लाया था वह, पूरे चौदह रूपये किलो, पर खराब निकल गए, दुकानदार वापस लौटा तो लेगा. सुबह फिर वह देर से उठा, रात को नींद पूरी नहीं हो पाती, दिन भर भी वह आराम नहीं कर पाता. आज उसके एक सहकर्मी की माँ की मृत्यु हो गयी, वह आंध्रप्रदेश के रहने वाले हैं, उन्हें घर के लिये विदा करने वह उनके घर गया था.

आज नन्हा पूरे दो महीने का हो गया. अभी लिखने के लिए उसने कलम उठाया ही था कि वह जग गया पर जब तक चुपचाप लेटा है, तब तक वह दो चार लाइनें लिख ही पायेगी, उसने सोचा. बाहर मूसलाधार वर्षा हो रही है. अभी शाम है पर रात का आभास हो रहा है.
रात को उन दोनों ने मिलकर इस मौसम में पहली बार अरबी की सब्जी बनायी, नूना के हाथों में अरबी छीलने पर काटती है, इसलिए जून स्वयं ही काट कर देता है, बहुत ख्याल है उसे हर बात का.