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Thursday, January 26, 2017

सिक्किम का भूकम्प


कल पंखा भी था, टीवी भी था फिर भी गर्मी का जिक्र किया आज न बिजली है, न पंखा है, न टीवी पर बापू की कथा आ रही है, पर भीतर संतोष है. जून आधे घंटे में आ जायेंगे. आज सुबह काफी वर्षा हुई. सिक्किम में भूकम्प के कारण काफी नुकसान हुआ है, जापान में पुनः बाढ़ व तूफान आया है. पाकिस्तान में भी बाढ़ है. मानव ने अपनी मूर्खताओं से ऐसी स्थिति उत्पन्न कर ली है. प्रकृति का तो यह रोज का काम है. रोज ही कहीं न कहीं भूकम्प आते ही रहते हैं. पृथ्वी के होने का यही तरीका है. सागर है तो तूफान आयेंगे ही !

‘वह कौन है’ यह प्रश्न भीतर गूँज रहा था कि किसी ने पूछा, प्रश्न पूछने वाला कौन है..और गहन शांति हो गयी. कोई जवाब नहीं आया. लेकिन मौन में भी मन मुखर था. कुछ दृश्य, कुछ शब्द सुनायी दे रहे थे. आज से उसने यही ध्यान करने का निश्चय किया है. मन का शुद्धिकरण तो साधना से होता है पर विस्तार भी बहुत हो जाता है. जब सारा ब्रह्मांड ही खुद के भीतर भासने लगे तो अहंकार भी उतना ही विशाल होगा. अभी भी यही कामना भीतर बनी रहती है, देह स्वस्थ रहे, मन शांत हो, बुद्धि तीक्ष्ण हो, जगत में यश हो, सारी सुख-सुविधाएँ हों तो इन कामनाओं में और एक संसारी व्यक्ति की कामनाओं में जरा सा भी भेद नहीं है. हाँ, इतना जरूर हुआ है अब भीतर द्वेष नहीं रहा है, कोई विशेष पदार्थ ही मिले ऐसा आग्रह नहीं रहा, पर जब तक भीतर कोई भी कामना है, तब तक परमात्मा से दूरी बनी ही हुई है. भक्त को यह विश्वास होता है कि परमात्मा हर तरह से उसकी मदद करते हैं, जो भी उसकी उन्नति के लिए श्रेष्ठ है वही वह होने देते हैं !

आज सुबह जून को उसने शून्य के बारे में बताया, void के बारे में, कुछ नहीं है....केवल ब्रह्म सत्य है. जगत मिथ्या है, आज ध्यान में यह सूत्र समझ में आया. आज भी समाचारों में सिक्किम में आए भूकम्प की भयानक खबरें सुनीं, अब भी कई लोग लापता हैं, कुछ मलबे के नीचे दबे हैं. प्रकृति कितनी कठोर हो सकती है, यह वे सोचते हैं, लेकिन प्रकृति इतनी विशाल है, अनंत है, उसमें थोड़ा सा विक्षेप एक ग्रह पर आए तो उसके लिए कुछ भी नहीं है. जैसे कोई लखपति हो और उसके गाँव के अनेकों घरों में से एक ढह जाये तो उसे क्या अंतर पड़ेगा. मानव भी प्रकृति का ही अंश है, मानव इस सारे ब्रह्मांड को अपने भीतर अनुभव कर सकता है, लेकिन प्रकृति के सम्मुख वह भी विवश है.

आज जून मुम्बई जा रहे हैं. दस बजने को हैं, थोड़ी देर में वह भोजन बनाने जाएगी. शाम को एक सखी की बिटिया से मिलने जाना है, उससे पहले घर में सत्संग है. कल सुबह केन्द्रीय विद्यालय जाना है एक प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका निभाने. दोपहर को एक मीटिंग में दुलियाजान क्लब जाना है. शाम को भी मीटिंग है, पर उसमें वह नहीं जाएगी. आजकल माँ को किचन में जलती गैस से भय लगने लगा है, वह कब उठकर गैस बंद कर आती हैं पता ही नहीं चलता. वह कड़ाही में सब्जी रखकर आयी, और कुछ देर बाद जाकर देखा तो गैस बंद है. उसे पल भर के लिए क्रोध आया, पर फिर समझाया मन को, वह हर हाल में बड़ी हैं, उनके प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार करना चाहिये. पिताजी उन्हें प्रेम से धमका सकते हैं, उनकी बात और है. नैनी की बेटी को खसरा हुआ था, पर अब उसका चेहरा लाल दानों से भर गया है, अस्पताल जाकर इलाज कराने के नाम से ये लोग घबराते हैं. नन्हा गोवा से लौट आया है, उसने वहाँ water sports तथा paragliding की. जीवन कितना अमूल्य है, एक-एक श्वास यहाँ अनमोल है, यह विचार उसके मन में कौंध गया जैसे ही नन्हे ने वह बताया.

आज उसने दीवाली के लिए सफाई का श्रीगणेश किया है. आज महालय है, आश्विन कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन. कल से नवरात्रि का आरम्भ हो रहा है. सिक्किम में लोग आपदा से जूझ रहे हैं, वहीँ गुजरात में लोग नृत्य में झूम रहे हैं. अजब है यह गोरखधन्धा, स्वप्न में जी रहे हैं जैसे सभी लोग. ऊपर से तुर्रा यह कि यह स्वप्न केवल रात को ही नहीं चलता, दिन को भी चलता है. यह स्वप्न चौबीसों घंटे चलता है. वे एक बड़ी साजिश के शिकार तो नहीं बनाये गये हैं ...?


Tuesday, January 24, 2017

मुम्बई की बाढ़


उसने विमल मित्र को पढ़ा और उसके बाद एक कविता लिखी, शब्द अपने थे पर प्रभाव तो यकीनन पढ़े हुए का था. यह भी तो चोरी हुई, विचारों की चोरी भी उतना ही बड़ा पाप है जितना वस्तुओं की चोरी का, यह बात अब समझ में आने लगी है. भीतर ज्ञान का अनंत स्रोत है, जहाँ से शब्दों की नदियाँ बह सकती हैं, फिर क्यों संस्कार वश दूसरों की ईंटों से अपना भवन तैयार करना. आज भी गर्मी बहुत है. उसने सिन्धी कढ़ी बनाई है. आज वे अपनी वसीयत लिखने वाले हैं.

परसों जो गतिरोध उत्पन्न हुआ था, वह कल टूट गया. अन्ना हजारे का अनशन कल समाप्त हो गया, अब वह अस्पताल में हैं. देश की हवा बदल रही है. अमेरिका में तूफान आया है. दिल्ली में लोग जश्न मना रहे हैं. लन्दन में भी सड़कों पर कार्निवाल है. समाचारों में सुना कई राज्यों में बाढ़ आयी है. मुम्बई में वर्षा का पानी सडकों व रेल पटरियों पर भर गया है. असम के धेमाजी में भी बाढ़ ने भीषण रूप ले लिया है. इटली में ज्वालामुखी फट गया है. एक बेटे ने अपनी बानवे वर्षीय माँ को घर से निकाल दिया, उसे वह मकान किराये पर चढ़ाना था. जीवन कितने विरोधाभासों से युक्त है. द्वंद्व ही जीवन का दूसरा नाम है, जो इसके पार हो गया, वही यहाँ मुक्त है और वही सुखी है. शेष तो एक भ्रम में जी रहे हैं. कल इतवार की योग कक्षा में बच्चों को पूरे दो घंटे व्यस्त रख सकी. वे ख़ुशी-ख़ुशी सब बात मानते हैं, अभी मासूम हैं. उस दिन उसने स्वप्न देखा, कार में एक परिचिता के साथ जा रही है पर जाना कहाँ हैं पता नहीं, स्वप्न का क्या अर्थ था कौन जानता है, लेकिन उसने यही लगाया कि कोई भेद नहीं रहा अब अर्थ युक्त और अर्थ हीन में, भीतर-बाहर में. सारे आवरण गिर गये हैं. जून ने भी आज अपना स्वप्न बताया. वह एक द्वीप पर पहुँच गये हैं. एक आदिवासी व्यक्ति उन्हें समुद्रतट पर ले जाता है. सुंदर तट है पर अचानक लहरें चढ़ आती हैं और वह किसी तरह रेलिंग को पकड़ कर बच जाते हैं.


आज एक नये तरह का ध्यान किया. देह ऊर्जा का एक केंद्र है. ऊर्जा का चक्र यदि पूर्णता को प्राप्त न हो तो जीवन में एक अधूरापन रहता है. प्रार्थना में भक्त भगवान से जुड़ जाता है और चक्र पूर्ण होता है, तभी पूर्णता का अहसास होता है. हर व्यक्ति अपने आप में अधूरा है जब तक वह किसी के प्रति समर्पित नहीं हुआ. यही पूर्णता की चाह अनगिनत कामनाओं को जन्म देती है. व्यर्थ ही इधर-उधर भटक के अंत में एक न एक दिन व्यक्ति ईश्वर के द्वार पर दस्तक देता है. इस मिलन में कभी आत्मा परमात्मा हो जाता है और कभी परमात्मा आत्मा. उसने भी आज प्रार्थना में तीनों गुणों से मुक्त होने की प्रार्थना की. तीनों एषनाओं से मुक्त होने की प्रार्थना. माँ होने का सुख, शिशु को बड़ा होता हुआ देखने का सुख तो वर्षों पहले मिल गया, अब कितना सुख चाहिए. व्यस्क होने के बाद व्यक्ति स्वयं अपने भले-बुरे का जिम्मेदार होता है. उसका मन जहाँ जहाँ अटका है, उसे वहाँ-वहाँ से खोलकर लाना है. इस जगत में या तो किसी के प्रति कोई जवाबदेही न रहे अथवा तो सबके प्रति रहे. एक साधक का इसके सिवा क्या कर्त्तव्य है कि भीतर एकरसता  बनी रहे, आत्मभाव में मन टिका रहे. जीवन जगत के लिए उपयोगी बने, किसी के काम आए. अहम का विसर्जन हो. वह परमात्मा ही उनका आदर्श है जो सब कुछ करता हुआ कुछ भी न करने का भ्रम बनाये रखता है..चुपचाप प्रकृति इतना कुछ करती है पर कभी उसका श्रेय नहीं लेती..फूल खिलने से पहले कितनी परिस्थितियों से दोचार नहीं होता है, बादल बरसने से पहले क्या-क्या नहीं झेलता.. और वे हैं कि हर कम करने के बाद औरों के अनुमोदन की प्रतीक्षा करते हैं. वे भी छोटे-मोटे परमात्मा तो हैं ही, मस्ती, ख़ुशी तो उनके घर की शै है, इन्हें कहीं मांगने थोड़े ही जाना है. ज्ञान का दीपक सद्गुरू के रूप में जल ही रहा है.  

Monday, September 7, 2015

गुजरात की बाढ़


सहनशीलता, धैर्य, मनोबल, संकल्प बल तथा दृढ़ इच्छा शक्ति जिसके पास हो वही अध्यात्म के पथ पर चल सकता है. मौत का भी डर जब मन में न रहे, कोई भी कष्ट आए, सम रहकर उसे सहना, यह जब तक जीवन में न हो तब तक कोई जीवन से दूर ही रह जाता है. आजकल उसके मन की दशा कुछ ऐसी ही है. सत्य का सामना करने की हिम्मत वह अपने भीतर नहीं जुटा पायी. यात्रा पर जाने से पहले एक सखी ने उसे एक खत पोस्ट करने को दिया था, वह भूल गयी और यात्रा के अंत में उसे पोस्ट किया, पर जब उसने पूछा तो यह नहीं बताया कि पोस्ट करने में देरी हो गयी थी. उसे बुरा लगेगा यही सोचकर नहीं बताया पर अब लगता है कि वह उसके बारे में अपनी राय को बदल देगी इस डर से. पर यह सच है कि झूठ के पाँव नहीं होते. एक बोझ जो उसने व्यर्थ ही चढ़ाया है. नीरू माँ के अनुसार उसे प्रतिक्रमण करना होगा और इस बोझ को सिर से उतार फेंकना होगा. अपने आस-पास की दुनिया की वास्तविकता को भी उसने नहीं देखा. गुजरात में बाढ़ आई है, बड़ी ननद से उसने बात भी नहीं की. वह आत्मकेंद्रित होती जा रही थी, जिस क्षण यह भास हुआ उसी क्षण से स्थिति बदल गयी है. कल वे एक मित्र के यहाँ गये, गुजरात में बाढ़ आई है, वहाँ किसी ने एक बार कहा तो उसे इसकी गम्भीरता का अंदाजा ही नहीं था. आज सुबह छोटी ननद, दीदी व बड़े भाई से बात हुई. दो सखियों से बात हुई, एक ने कृष्ण के १०८ नामों के बारे में पूछा तथा दूसरी ने गुरूजी द्वारा कही यह बात बताई कि १५ अगस्त तक का समय भारी है, उन सभी को ध्यान द्वारा इसे टालने का इसकी भयानकता को कम करने का कार्य करना चाहिए. वह ईश्वर को केवल अपने भीतर ही पाना चाहती थी पर वह तो कण-कण में बिखरा है, वह तो हर एक जड़-चेतन में है, वही तो माँ के प्यार में है और वही प्रिय के प्रेम में, वही वात्सल्य में है. ईश्वर कहाँ नहीं है, बाढ़ के पानी में फंसे लोगों में भी वही है और बाढ़ के पानी में भी वही है. उसका कण-कण इस सृष्टि के कल्याण की कामना करता है.

अभी-अभी बिजली थी, अभी-अभी चली गयी. ऐसे ही एक दिन अभी-अभी जीवन होगा, अभी-अभी नहीं होगा. एक पल में मृत्यु उन्हें अपना ग्रास बना लेगी अथवा तो एक पल में वे शरीर के बंधन से मुक्त हो जायेंगे. पीछे की खिड़की से हवा का एक शीतल झोंका पीठ को सहला गया, पंखा चलते रहने पर इसका आभास भी नहीं हो पाता, ऐसे ही जीवन के न रहने पर आत्मा तो अपने आप में रहेगी ही, परमात्मा के प्रकाश से परिपूर्ण ! कल एक पुस्तक पढ़ी, ध्यान के विभिन्न गुर बताये हैं उसमें, विपश्यना ध्यान के, जिसमें केवल बाहर जाती हुई साँस को देखना है. एक नये नजरिये से लिखी गई पुस्तक है. आज मौसम गर्म है, उसकी आँखें मुंद रही हैं, तमस का प्रभाव है.

भाव की संवेदना बहुत दूर तक जाती है, जहाँ मन नहीं पहुंचता, बुद्धि नहीं पहुंचती वहाँ भाव के सूक्ष्म कण पहुंच जाते हैं. ध्यान का दर्शन केवल मन को स्थिर करना ही नहीं बल्कि भाव शुद्धि है. अभी कुछ देर पूर्व उससे जन्माष्टमी का दिन जब एक बार पुनः पूछा सासु माँ ने तो उसका जवाब शांत भाव दिया गया नहीं था. छोटी ननद का फोन आया. पिता जी की तबियत ठीक नहीं है, उसने कहा, वह अपना ध्यान भी नहीं रखते. वह कह रही थी कि दोनों को साथ-साथ रहना चाहिये. देखें  भविष्य में क्या लिखा है. इतना तो सही है कि वृद्धावस्था में भी पति-पत्नी को एक-दूसरे का साथ तो चाहिये ही.  

कल रात तेज वर्षा हुई, आँधी-तूफान भी. मेघ अपने पूरे बल के साथ गरजते रहे. एक-दूसरे से टकराते रहे, रह-रह कर बिजली चमकती रही. वह सब कुछ अनुभव कर रही थी पर इन सबसे परे भी थी. उसके मन में तब आत्मा का गीत गूँज रहा था. मन जैसे यहाँ का न होकर किसी और लोक का था. वह निद्रा थी या तंद्रा थी या शुद्ध ज्ञान का नशा था, पर बिजली जाने से जो कमरे में गर्मी हो गयी थी, उसका भी कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था. जून का आज जन्मदिन है, कल उसने उनके लिए एक कविता लिखी. आजकल वह बहुत खुश रहते हैं. उन्हें भी उस प्रेम का अनुभव हो रहा है, जिसकी बात वह उनसे करती थी. अभेद प्रेम का जहाँ दो न रहें एक हो जाएँ, वहाँ कोई अहंकार नहीं बचता और तभी शुद्ध साहचर्य का अनुभव होता है, पर प्रेम की यह धारा इतनी संकीर्ण तो नहीं होनी चाहिए, यह तो सभी की ओर अबाध गति से बहनी चाहिये. उसके मन की यह धारा यूँ तो सभी ओर बहती है पर एक तरफ जाकर थोड़ी अवरुद्ध हो जाती है. एक सखी के प्रति उसके मन में एक द्वंद्व बना ही रहता है. उसने प्रार्थना की, सद्गुरु ही उसे इस धर्म संकट से बचा सकते हैं. पर सद्गुरु तो यही कह रहे हैं, जो बाधा उसने स्वयं खड़ी की है उसे कोई दूसरा चाहकर भी नहीं दूर कर सकता, ईश्वर भी नहीं. वह उसकी आजादी में व्यवधान डालना नहीं चाहता. जिस दिन उसे स्वयं अहसास होगा कि इस द्वंद्व के चलते उसकी ऊर्जा का अपव्यय हो रहा है उस दिन स्वयं ही यह छूट जायेगा, उससे पहले नहीं और उसके बाद भी नहीं. आग में हाथ पड़ जाये तो स्वयं ही निकालने की सुध जगती है. 

Wednesday, August 6, 2014

लालकिले की शान


आज नन्हा स्कूल नहीं गया, कल शाम से उसे ज्वर है, जून अभी कुछ देर पूर्व ही दवा देकर गये हैं. उन्हें एलोपैथी से ज्यादा होमियोपैथी पर भरोसा है. नन्हे ने गर्म पानी से नहा भी लिया है. बचपन में जब उसे ज्वर होता था उसे कहीं जाने नहीं देता था पर अब वह बड़ा हो रहा है, समझ रहा है यह ज्वर तो चला ही जायेगा. कल स्कूल में होने वाली क्विज प्रतियोगिता में भाग ले पायेगा या नहीं इसकी उसे जरूर चिंता है. कल रात से ही वर्षा लगातार हो रही है, असम में कई स्थानों पर बाढ़ पहले से ही आई हुई है. कुछ दिन पहले ही हिमाचल प्रदेश में भी अचानक  बाढ़ आ गयी. कल काश्मीर के श्रीनगर में दो बम विस्फोट हुए, मरने वालों में हिंदुस्तान टाइम्स के फोटोग्राफर प्रदीप भाटिया भी थे. हिजबुल ने विस्फोट का जिम्मा लिया है. कश्मीर को भारत से अलग कर देने की पाकिस्तान की कोशिशें भद्दा रूप लेती जा रही हैं, हजारों की हत्या हो चुकी हा, कितने घायल पड़े हैं, कितने परिवार अनाथ हुए हैं और कितना धन सेना पर खर्च हो रहा है, आखिर इस सब का अंत क्या होगा और कब होगा. आज सुबह जागरण में सुना, साधक की पहली जरूरत है अभिमान मुक्त होना. अभिमानी व्यक्ति छिद्रान्वेषी होता है, वह स्वयं को जानकार व दूसरों को अपने से कम समझता है. ईश्वर की खोज में जाना है तो पहले अहम् का त्याग करना होगा, पूर्ण समर्पण करना होगा.

आज भी नन्हा घर पर है, सुबह के साढ़े आठ हुए हैं, अगस्त की एक भीगी सुबह, चिड़ियों की मिली-जुली आवाजें आ रही हैं, सुबह से वह ज्यादातर नन्हे के साथ व्यस्त रही, उसका ज्वर काफी कम हो गया है. कल दोपहर बढ़ गया था. जून और उसकी देखभाल, दवा और परहेज, गरारे आदि सभी का असर हो रहा है. उसने जून के सामने निश्चय किया है कि वे अपनी बातचीत में किसी पर भी कभी व्यक्तिगत आक्षेप नहीं करेंगे, उन्हें कोई हक नहीं है और ऐसा करके वे अपनी ही नजरों में गिर जाते है और उन्हें पता तक नहीं चलता, न ही कभी समूह में इसमें साथ देंगे. चन्दन तस्कर वीरप्पन ने राजकुमार की रिहाई के लिए नई मांगें रख दी हैं.

शाम के सात बजे हैं. अभी कुछ देर पूर्व ही वे सांध्य भ्रमण करके आये हैं, शाम को कुछ देर तेज वर्षा हुई, सडकों पर पानी भरा था पर हवा में शीतलता और ताजगी थी. तन-मन दोनों तरोताजा हो गये. नन्हे का बुखार अभी तक नहीं उतरा है पर वह दोपहर को कुछ देर सोने के अलावा बिस्तर पर रहना ही नहीं चाहता.

Today is jun’s birthday. He was looking so fresh and good today in the morning. Nanha is doing his home work, is feeling well. He has a made a card also for papa. It is half past ten and she has to go to kitchen, could not write earlier because she was writing a poem for jun in that birthday card which she made on computer. Today in the morning father called to wish jun. today she has made jun’s favorite dishes.

कल उन्होंने ‘स्वतन्त्रता दिवस’ मनाया. कल के आयोजन की तयारी वे पहले ही कर चुके थे. सभी कुछ यथासोच हो गया. मौसम ने भी साथ दिया. सुबह ही भैया-भाभी को फोन किया फिर दीदी का फोन आया, सभी के समाचार मिले. परसों शाम राष्ट्रपति जी का व कल सुबह प्रधानमन्त्री जी का भषण लालकिले से सुना. मन आश्वस्त हुआ, देश की बागडोर अनुभवी हाथों में है, वे असुरक्षित नहीं हैं. पन्द्रह अगस्त को जिस मन से वर्षों पूर्व मनाते रहे थे वही जज्बा आज भी कायम है. नन्हे व जून ने मिलकर झंडा व भारत का नक्शा कम्प्यूटर पर बनाया, प्रिंट लिया और वे उनके बैठक की शोभा बढ़ा रहे हैं. सुबह घर से फोन आया, जो सखी परिचय पत्र लेकर मिलने गयी थीं, उनके लिए माँ-पिता का संदेश व कुछ सामान ला रही हैं.  

 





Wednesday, June 25, 2014

उड़ीसा की बाढ़



पिछले दो दिन फिर स्कूल से आकर भी स्कूल का कार्य करती रही. आज ‘असम बंद’ के कारण सभी स्कूल भी बंद हैं सो हफ्तों बाद वह अपनी पुरानी दिनचर्या का पालन कर पा रही है. अभी-अभी कपड़े देने आये धोबी ने आकर बताया, बायीं तरफ के पड़ोसी के घर के सामने एक कार दुर्घटना हुई है, पता चला एक उड़िया साहब के बच्चों ने (जो खुद ही ड्राइविंग सीख रहे थे) एक पेड़ में टक्कर मार दी. बंद के कारण कोई कार लेकर दफ्तर नहीं गया था, पैदल या साइकिल पर ही जाना पड़ा. बच्चों को घर में रखी कार व खाली सडकें देखकर मन में इच्छा हुई होगी. सुबह छोटे भाई का फोन आया, सभी के बारे में ढेर सारे समाचार मिल गये. कल रात नन्हे ने कहा था सुबह उसे न उठाया जाये, वह स्वयं ही उठा पर साढ़े नौ बजे. कल एक सखी के यहाँ बेटे के जन्मदिन की पार्टी थी, अच्छी रही, उसने पनीर व मिक्स्ड वेज अच्छी बनायी थी. कार्ड पर उसने वह कविता लिख दी थी जो वर्षों पहले छोटी बहन ने नन्हे को उसके जन्मदिन पर लिख भेजी थी. सभी को अच्छी लगी. आज उसे वे सभी पत्रिकाएँ भी देखनी हैं जो पिछले दिनों व्यस्तता के कारण नहीं पढ़ सकी.  

जून के दफ्तर के एक अधिकारी की अचानक हुई मृत्यु से सारा वातावरण दुखमय हो गया है. मृत्यु एक पल में सबकुछ छीन कर ले जाती है. उसके फंदे से कोई नहीं बच पाया, जीवन की डोर मृत्यु के हाथ में है. सारा संसार देखता रह जाता है और प्राणी किसी अज्ञात सफर की ओर चल पड़ता है, कौन जानता है कब उसकी मृत्यु होगी. कौन सा क्षण ईश्वर ने बनाया है जब वह अंतिम श्वास लेगा, परिवार जनों को असहाय रोता-बिलखता छोड़कर बंजारा अपना साजो-सामान समेट  लेता है. जब सभी जानते हैं, एक दिन बिछड़ना है तो क्यों इतने बंधन बाँधते हैं. तभी तो सन्त-महात्मा मोह-माया त्यागने की बात कहते हैं. जो यह सत्य जानता है कि जिसकी मंजिल आ गयी, वह उतर गया, जिसे आगे जाना है वह स्टेशन पर उतर गये लोगों के लिए आंसू नहीं बहता, दुखी नहीं होता.

अभी कुछ देर पूर्व क्लब से आते समय देखा उस घर के सामने बहुत भीड़ थी, आज चौथा है, उसने मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना की. टीवी पर आजकल चुनाव परिणामों की चर्चा है, बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत जुटा चुकी है. कल से स्कूल में अर्ध वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गयी हैं.

परीक्षाएं समाप्त हुईं और पूजा का अवकाश आरम्भ हो गया. पिछले तीन दिन मौसम बादलों के कारण भीगा-भीगा सा था, आज धूप निकली है. पिछले दिनों वे पूजा पंडाल देखने गये, विशेष व्यंजन बनाये और कुछ मित्रों के घर भी गये. उसे परीक्षा की कापियां जांचनी हैं, काम करके उसे सदा ही एक ख़ुशी का अहसास होता है, जीवन को एक अर्थ मिला हो जैसे. उसे पत्र भी लिखने है, और वे सारे काम जो स्कूल खुलने पर नहीं हो पाएंगे. सम्भवतः बाढ़ के कारण कुछ दिनों के लिए  गौहाटी से डिब्रूगढ़ के लिए रेल चलनी बंद हो गयी थी, इस कारण माँ-पिता यहाँ नहीं आ पाए.

स्कूल में फिर से पढ़ाई शुरू हो गयी है और उसने जान लिया है कि पढ़ाना ही उसे पसंद है, टेस्ट, यूनिट टेस्ट और परीक्षाएं ये सब कतई पसंद नहीं, पर ये सब भी शिक्षण का ही अंग हैं. आज खेल का पीरियड भी था, क्लास दो के बच्चे खासतौर पर लडकियाँ पीटी बहुत एन्जॉय करती हैं, लडकों को भागने-दौड़ने वाले खेल ही पसंद हैं. सिलाई का कुछ काम कई दिनों से टल रहा था उसने आज करने की ठानी. नन्हे के घर आने में अभी आधा घंटा शेष है. आजकल वह सुबह उठने में बहुत देर करता है. आज जून डिब्रूगढ़ गये थे, दिसम्बर की उनकी दक्षिण-पश्चिम भारत की यात्रा के लिए टिकट बुक करवाने. आज सुबह उसने जागरण में एक प्रवचन सुना, जिसमें मन की तुलना झरने से की गयी थी जो निरंतर ताजगी लिए रहता है. उन्होंने यह भी कहा, “व्यक्ति को जीवन में प्रतिपल उत्साह बनाये रखना चाहिए ताकि उसमें नीरसता न आ जाये. योगी विचारों से ही पुष्ट होता है और पोषण करता है. मन में लगातार प्रेरणादायक विचारों का प्रवाह चलता रहे तो जीवन खिला रहता है”. उड़ीसा में भयंकर बाढ़ आयी है, वहाँ के लोग भूख-प्यास  से  भले ही पीड़ित हों, तूफान व बाढ़ ने भले ही उन्हें कितना दुःख दिया हो लेकिन जिजीविषा उन्हें पुनः समर्थ बनाएगी. वे फिर खड़े होंगे. दीवाली का त्योहार आने वाला है, जून नन्हे के लिए पटाखे ले आये हैं. उन्होंने सभी को कार्ड्स भी भेज दिए हैं. दीवाली पर एक भोज का आयोजन करने भी विचार है, ईश्वर उनके साथ है.