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Tuesday, May 12, 2026

रस मलाई केक

रस मलाई केक


आज रक्षा बंधन का त्योहार है; जो तिथि के अनुसार कल सुबह तक मनाया जाएगा।भौतिक रूप से वे भी कल ही मनाने वाले हैं।मानसिक और शाब्दिक रूप से तो मना ही लिया, सभी भाई-बहनों से बात हुई। आज शाम भी गुरुजी को सुना। वह कह रहे थे, लेने में जो ख़ुशी है, वह तो बच्चों को भी होती है पर देने की ख़ुशी प्रौढ़ होती है। लोग स्वयं ही प्रसन्नता हैं, यदि वे किसी कारण से खुश होते हैं तो वह ख़ुशी स्थायी नहीं है। किसी ने भयमुक्त होने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा, यदि अभय प्राप्त करना है तो  किसी बड़े कार्य के प्रति समर्पित हों या ह्रदय में प्रेम और भक्ति जग जाये। मन में स्पष्टता हो, बुद्धि में शुद्धता हो, कर्म में सच्चाई हो तो जीवन शांत धारा की तरह प्रवाहमान रहता है। जो अकाल को याद करता है, हर काल उसके लिए सुकाल होता है। ध्यान में वे उसी अकाल पुरुष में स्थित होते हैं। भक्तिभाव से भरी एक बंगाली महिला का बाउल नृत्य भी देखा। वह गा रही थी व बजा भी रही थी।ओस्टियोपैथी के बारे में भी बताया गया, जो एक चिकित्सा विहीन इलाज है। 


आज भी आश्रम से सत्संग प्रसारित हो रहा है, कोई मीका सिंह आये हैं। कुमार शानू का पुत्र भी आया है। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये। आर्ट ऑफ़ लिविंग सेवा के कई प्रकल्प चलाता है, अब विद्या मंदिर के पुरस्कार दिये जा रहे हैं। कुछ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।शाम को वे दूर तक टहलने गये। नूना ने छोटे भाई के जन्मदिन पर कविता लिखी। एओएल की तरफ़ से ‘रुद्रम जप का महत्व’’ पर एक आलेख का अनुवाद कार्य किया। पापाजी ने ओशो की एक पुस्तक की बात बतायी। उन्होंने कहा, सबके भीतर एक ही आत्मा है।मन यदि प्रसन्न हो तो सारी प्रकृति अच्छी लगती है। 


आज जून का जन्मदिन उन्होंने अच्छी तरह मनाया, नन्हा व सोनू ‘रस मलाई केक’ लेकर आये थे। सोनू के मौसेरे भाई-बहन भी।दोपहर के लंच में आलू टुक, सिंधी कढ़ी व पनीर बनाया। शाम को सबने मिलकर एक नया बोर्ड गेम ‘आईपीओ’खेला।मौसेरी बहन ने साइकिल चलायी, नन्हे ने स्केट बोर्ड पर अभ्यास किया। छोटी बहन ने यूएई से फ़ोन पर  बताया, बहनोई ने बाइक रैली में भाग लिया, भारत-पाकिस्तान की संयुक्त रैली।इधर देश का माहौल उत्सव मय है, आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है ! 


आज सोसाइटी के मैदान में स्वतंत्रता दिवस का अमृत महोत्सव बहुत उत्साह से मनाया गया। उसके बाद वे पंचायत के दफ़्तर जाकर बच्चों का स्लाइड दे आये। गाँव की सड़क पर तिरंगा रैली भी चल रही थी। माली ने असम से लाया एक पौधा लगाया। मोदी जी का भाषण भी लाजवाब था, उन्होंने नागरिक के कर्त्तव्यों की तरफ़ ध्यान दिलाया। देश आगे बढ़ रहा है। नूना ने झंडे के साथ एक तस्वीर खिंचवाई।  


पिछले दो-तीन दिनों से हो रही वर्षा के कारण मौसम अधिक गर्म नहीं है। आज राजधानी में रहने वाली एक सखी से बात की, उसके पुत्र को डेंगू हो गया है, हर साल इस मौसम में डेंगू का प्रकोप होता है। असमिया सखी कुछ महीनों के लिए गोहाटी जा रही है।वे जीवन के अंतिम वर्ष बिताने के लिए अपने पुश्तैनी स्थान पर एक घर बनवाने जा रहे हैं।पता नहीं उन्होंने अपनी वृद्धावस्था की कैसी कल्पना की है। पुत्र विदेश में है, बिटिया विवाह के बाद उनका कितना ध्यान रख पाएगी, यह सोचकर वे अपने भाई-बहनों के पास जा रहे हैं। जून का मन फिर थोड़ा सा नासाज़ है, उनके स्वभाव में ही आ गया है यह। उन्हें भय है कि उन दिनों अकेले कैसे रहेंगे, जब नूना आश्रम में कोर्स करने के लिए जाएगी। शाम को नन्हे से भी बात हुई, वह उन्हें शनिवार को अपने घर आने के लिए कह रहा है।

 

आज पहली बार वे अपनी लेन के एक परिचित आर्ट ऑफ़ लिविंग शिक्षक के यहाँ रुद्र पूजा के आयोजन में शामिल होने गये।बहुत अच्छा अनुभव रहा। आश्रम में बिताये चार दिन एक याद बनकर रह गये हैं। 


आज शाम से ही वर्षा हो रही है। मध्य प्रदेश व राजस्थान में बाढ़ आ गई है। ईश्वर उनकी रक्षा करे जो पानी में फँस गये हैं।अति वृष्टि या सूखा दोनों ही स्थितियाँ भयावह हैं। आज जून का मन ठीक है। वे व्यर्थ ही इतने सुंदर जीवन को दुखों का घर बना लेते हैं।सुबह टहलने गये तो मौसम सुहावना था। आश्रम में बिताये दिनों की स्मृति बीच-बीच में आती रहती है। डीएसएन कोर्स का इतना बड़ा लाभ उसे मिला है कि भीतर सब ख़ाली हो गया है। जैसे अब कोई संस्कार नहीं बचा। मन नीले गगन की तरह मुक्ति का अनुभव कर रहा है। आज सुबह मुक्ति का गीत भी लिखा। दोपहर को वे बाज़ार गये। नूना कुछ बच्चों से मिली, संकेत, अभिषेक और सात्विक, जिनकी माँओं ने बताया बाक़ी स्कूल गये हैं। उन्हें कुछ समान दिया। देने में कितना सुख मिलता है, गुरुजी सारी दुनिया में घूमकर ख़ुशियाँ बाँटते हैं। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है हर चेहरे पर मुस्कान लाना ! वह यदि एक भी व्यक्ति के मुखड़े पर मुस्कान लाने में सफल रही तो उसका सौभाग्य होगा!   


आज शाम को कुछ देर के लिए वर्षा रुकी तो वे टहलने गये, आकाश पर बादलों से बनी एक सुंदर आकृति देखी। एक जंगली कौआ भी देखा। एक परिचित दंपत्ति अपने नाती को प्रैम में घुमाने ले जा रहे थे। दो मिनट रुककर उनसे बात की।बड़ी बहन से दस मिनट अंग्रेज़ी में बात की, छोटी बहन ने दोहा व कतर के बेसिक कोर्स प्रतिभागियों की बात बतायी, जिन्होंने उसका नाम देखकर स्वयं आगे आकर कोर्स में नाम लिखवाया। अफ़्रीका में दी गुरुजी की वार्ता सुनी, आज भी वह उतने ही उत्साह से लोगों को आर्ट ऑफ़ लिविंग सिखाते हैं, उनका जोश देखने लायक़ था। टीचर्स में इतना जोश उन्होंने ही तो भरा है। डीएसएन का एक नया ग्रुप बन गया है, जिसमें आसपास रहने वाले लोग हैं।जून आजकल खुश हैं, उन्होंने एक पुरानी फ़िल्म देखी साथ-साथ, नूना ने सुबह ज़ूम पर साधना की, शाम को गणेश पर गुरुजी की व्याख्यान माला सुनी। गणेश पूजा आने वाली है। 


आज वे महीनों तक सड़क पर मिलकर एकदूसरे का हालचाल लेने वाले एक परिचित परिवार के घर गये। उन्होंने स्वागत किया, अपना बगीचा दिखाया। उन्हें अवसाद है, यह बात घर की महिला ऐसे कह रही थीं, जैसे कोई कहे घुटने में दर्द है। पिछले बीस साल से दवा ले रही हैं पर कभी योग नहीं किया। लोग कितना अज्ञान में जिये चले जाते हैं।उनके पिता पचानवे वर्ष के हैं पर अभी भी स्वस्थ हैं। नैनी के लाए पैशन फ्रूट्स का जूस बनाया।   


Sunday, January 5, 2014

राखी का त्योहार


मुझसे काफ़िर को तेरे इश्क ने यूँ शरमाया
तुझको देख के दिल धड़का तो खुदा याद आया

टीवी पर संगीत का सुरीला कार्यक्रम ‘सारेगामा’ आ रहा है. आज दोपहर भी वह गयी थी, राग यमन सिखाया, बहुत कठिन था, सुर पकड़ में नहीं आ रहे हैं. अभ्यास करने से शायद वह किसी हद तक गा पायेगी. संगीत के जादू ने अपने बस में किया है तो वही आवाज में असर भी लायेगा. कभी ये शब्द कितने अनजाने थे पर अब अपने से लगते हैं. आज सुबह उसकी स्टूडेंट नहीं आई तो कुछ पंक्तियाँ लिखीं उस वक्त,

लालकिले की प्राचीर से तिरंगा
जब फर फर लहराता है

कोटि कोटि हृदयों की आशाओं के साथ
कोटि कोटि दिलों में हिलोरें जगाता है

अस्तित्व का प्रतीक गौरव अस्मिता का  
पहचान हमारी सारे जग से कराता है

अख़बार पढ़े तो आजकल हर पेज पर हिंसक वारदातें ही पढने को मिलती हैं. इन्सान कहाँ जा रहा है, इस अंधी दौड़ का कोई तो अंत होगा. रक्षा बंधन के कारण आज नन्हे का स्कूल बंद था, ‘जागरण’ में भारत के पुराने रीति-रिवाजों के बारे में डॉ पंडया के भाषण के कारण उसने नन्हे और जून दोनों को राखी बाँधने को कहा, जून लेकिन दफ्तर जाने से पूर्व उतार गये, देखा-देखी नन्हे ने भी वही किया. ‘जागरण’ में भारत के गौरवपूर्ण अतीत और सुनहरे भविष्य की बात सुनकर विश्वास करने को जी नहीं चाहता. जहाँ हिंसा इतनी गहरे पैठ चुकी हो और भ्रष्टाचार जीवन का अंग बन चुका हो, होकर भी वहाँ सद्गुण अर्थहीन हो जाते हैं. असम में फिर वही तनाव और अराजकता का वातावरण है, जो कुछ वर्ष पहले था जब राष्ट्रपति शासन की घोषणा करनी पड़ी थी. अभी कुछ देर पूर्व भगवद गीता में पढ़ा कि जो कुछ भी हो रहा है वह इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड के विशाल क्रियाकलाप का एक अंश मात्र है और इसको न हम रोक सकते हैं न कम कर सकते हैं. आज सुबह उसने oat porridge बनाई, जून को बहुत पसंद है पर उसे उतनी नहीं.

कल से उनके कोरस की रिहर्सल भी शरू हो गयी है, ‘साज’ फिल्म का गीत है, जो १५ अगस्त को ही फिल्म में गाया गया था. शाम को छह बजे क्लब गयी, वापस आते-आते आठ बज गये, ये कुछ दिन कैसे बीत जायेंगे, सम्भवतः एक मोहक याद बनकर साथ रह जायेंगे. रात होने पर गीत का मन ही मन अभ्यास करते हुए नींद कब आँखों में भर आती है पता ही नहीं चलता. नन्हा और जून को थोड़ा और करीब आने का मौका मिल रहा होगा. जून उनकी शाम की चाय के लिए नाश्ते का इंतजाम करते हैं और उस दिन की चाय के लिए भी सारा सामान लायेंगे, उन्हें यह काम बोझ नहीं बल्कि अच्छा लग रहा है उसकी तरह. आज भी मौसम कल की तरह मेहरबान है, पिछले कई दिनों से कोई पत्र आदि नहीं आया है, रेलवेज बंद है, आये दिन आंतकवादियों के बम विस्फोटों के कारण ट्रेनें रोक दी गयी हैं. आज हिंदी में व्याकरण पढ़ाया, उसे लगा सिखाते हुए वह खुद भी काफी कुछ सीख रही है.




Tuesday, April 9, 2013

बैसाखी और बीहू



आज बैसाखी है, बचपन में इस दिन दादीजी सूखे मेवों, मखानों, व पतासों के हार पहनातीं थीं सभी बच्चों को. सुबह टीवी पर बैसाखी का अच्छा सा रंगारंग कार्यक्रम देखा. जून को परसों शाम से हल्का ज्वर हो गया है, कल सुबह उतर गया था पर दोपहर को फिर हो गया. आज अभी तक वह दफ्तर से आए नहीं हैं, कल से बीहू का अवकाश है, आज सम्भव है स्ट्रेट शिफ्ट हो, यानि बिना लंच ब्रेक के. घर जाने में मात्र दस दिन रह गए हैं, अभी काफी काम है सिलाई का और घर भी पिछले दिनों नन्हे की परीक्षा के कारण पूरी तरह से साफ नहीं हो पा रहा था. कल उन्हें दोपहर का खाना बाहर खाना है, ‘बीहू भोज’, उसे बस घर से राजमा बनाकर ले जाने हैं. मिलजुल कर रहना, त्योहार मनाना कितना अच्छा लगता है, उसकी पुरानी पड़ोसिन का फोन भी आया था, शाम को वे लोग आएंगे. नन्हा पड़ोस के दोस्त के यहाँ गया है, आजकल छुट्टियाँ हैं वह बेहद खुश रहता है. आज मौसम भी मेहरबान है, लगता है आस-पास ही कहीं वर्षा हुई है, हवा में ठंडक है. उसे जून की याद आ रही है, ऐसा क्यों है, पर ऐसा है कि उनकी तबियत ढीली होने पर उनका ध्यान बना रहता है, उनकी देखभाल करने का मन होता है. उनका उतरा हुआ और उदास चेहरा उसे सबसे ज्यादा उदास करने वाली चीजों में से है.

  परसों उन्हें जाना है, अभी तक पैकिंग शुरू नहीं की है, पिछले दिनों दो बार जून और उसके बीच गलतफहमी हो गयी, लेकिन उसके बाद बादल छंट गए और प्यार का सूरज पहले से ज्यादा चमकदार होकर निकल आया है. जून को परेशान करना ...उसकी यह कभी मंशा नहीं हो सकती पर हालात ही ऐसे बनते चले जाते हैं कि .. उस दिन जून को उसका लेडीज क्लब में टीटी खेलना पसंद नहीं आया, उसने नाम दे दिया था सो जाना जरूरी था, पर ऐसे उदास मन से खेलने से वह हार गयी, उसकी पार्टनर जरूर नूना से नाराज होगी, उसे अच्छा न लगा हो शायद उसके साथ खेलना. कल शाम को उसकी पुरानी पड़ोसिन आई थी, बल्कि वे उसे ले आये थे, उसकी बातें सुनकर लगता है अभी बचपना गया नहीं है, कहीं न कहीं इंसान बूढ़ा होने तक बच्चा बना रहता है.
 आज मौसम फिर ठंडा है, कल रात वर्षा हुई, चारों ओर हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है घर से बाहर निकलते ही. कल सुबह से ही उसकी गर्दन में दायीं तरफ हल्का खिंचाव व दर्द महसूस हो रहा है, अभी-अभी जून का फोन आया है, वह सवा दस बजे ले जायेंगे उसे अस्पताल. कल सफर करना है इसलिए कुछ विशेष चिंता हो रही है. ईश्वर उसके साथ है..हर छोटी-बड़ी विपत्ति में ईश्वर ही हमेशा मदद करता है सदा सर्वदा... सुबह उसकी असमिया सखी का फोन आया, फिर तेलगु सखी का और फिर पुरानी पड़ोसिन का, जिसने शाम को नाश्ते पर बुलाया है. उसने मना किया पर ज्यादा मना करते हुए भी अच्छा नहीं लगता, वक्त-वक्त की बात है...इसलिए तो विद्वानों ने कहा है – सुखेदुखे समेकृत्वा..परिस्थिति कैसी भी हो मन का संयम, दृढ़ता, धीरता व आस्था नहीं खोनी चाहिए.

Thursday, June 21, 2012

नीरज की कविता



आज राजीव गाँधी का जन्मदिन है और हरचंद लोंगोवाल की पुण्य तिथि, दोनों पर समाचारों में सुना. कल रात इतनी जोर से बिजली कड़की लगा कि कमरे की छत टूट कर गिरने ही वाली है. शायद कहीं बादल फटा हो. माँ का पत्र आया है, बच्चे के बारे में कितनी सारी बातें पूछी हैं, सुबह से कितनी बार सोया और उठा है, अब कम से कम दो घंटे तो उसे सोना ही चाहिए. पढ़ा था कि बच्चे नींद में बढ़ते हैं.
कई दिनों तक कुछ नहीं लिखा, कभी व्यस्तता कभी मूड. आज कृष्ण जन्माष्टमी है. बचपन में वे कितने उत्साह से प्रतीक्षा करते थे. उस दिन झांकी सजाते थे, या शाम को झांकियां देखने जाया करते थे. सुबह वह गीता पाठ करती थी. कृष्ण के भजन तो कुछ दिन पूर्व से ही बजने आरम्भ हो जाते थे. और उस दिन तो कृष्ण भजन ही सुनाई देते थे सभी रेडियो स्टेशनों पर गानों की जगह. किन्तु अब तो सभी त्यौहार बस नाम के लिये हैं, रेडियो पर समाचारों से सुनकर पता चल जाता है आज यह त्योहार है, इतना ही बहुत है. उस दिन ‘नीरज’ की कविता सुनी, “युद्ध नहीं होगा”, बेहद सुंदर थी. और शोभा सिंह का इंटरव्यू भी कम नहीं था. दोनों घरों से पत्र आया है, छोटी बहन का मेडिकल में चुनाव हो गया है, बड़ी नन्द का विवाह तय हो गया है. दिसम्बर में होगा,, तिथि अभी तय नहीं हुई है. आज वे नन्हे को पहली बार प्रैम में घुमाने ले गए, शायद थक गया होगा सो शाम के वक्त भी सो रहा है.