Thursday, December 28, 2023

टाटा टी सेंटर

अभी-अभी उसने कुछ नये पौधों को पानी पिलाया है। मॉर्निंग ग्लोरी की पौध बहुत अच्छी तरह बढ़ रही है। इसे रोज़ पानी देना होता है। डहेलिया व पिटुनिया के जो पौधे धूप की तरफ़ हैं, वहाँ भी पानी दिया। नन्हे ने कुछ और गमले भेजे हैं, जून शिकायत कर रहे थे कि इतने सारे पौधों को पानी देते-देते वह पहले ही थक जाते हैं। आज पंचायत के दफ़्तर गये थे, वहाँ हिन्दी या अंग्रेज़ी समझने वाला कोई नहीं था, स्थानीय भाषा न जानने पर भी वह परेशान हो रहे थे।  कहने लगे, अपने प्रदेश में रहना कितना अच्छा होता। बाद में वे दोनों धूप में टहलने गये, जिसका रेशमी स्पर्श भीतर तक सहला रहा था, शाम तक वह सामान्य हो गये थे। इंसान का दिल बहुत नाज़ुक होता है, दुनिया की सबसे नाज़ुक वस्तु ! आज सुबह वे सोसाइटी के एक घर से सूखे मेवे ख़रीद कर लाये।उन्हें आश्चर्य हुआ, महिला की तराज़ू ठीक से काम नहीं कर रही थी, बस अंदाज़ से ही उन्होंने सामान तोल दिया था । 


रात्रि के नौ बजे हैं। बायीं तरफ़ के पड़ोस के घर से आवाज़ें आ रही हैं। उनके यहाँ रात का ख़ाना बनना इस समय शुरू होता है। एक दिन देर रात को उसकी नींद खुली, शायद ग्यारह बजे होंगे, सड़क पर कुछ लोग टहलते हुए ज़ोर-ज़ोर से बातें करते जा रहे थे। वह मन ही मन मुस्कुरायी, शायद निशाचर इन्हें ही कहते हैं।आज सुबह वे टहलने गये थे तो रास्ते में जीवन के लक्ष्यों के बारे में बात चल पड़ी । जून ने कहा, वह बिना किसी अधिक परेशानी के सहज जीवन जीना चाहते हैं और आरामदेह मृत्यु भी। यानी जीवन की अंतिम श्वास तक स्वस्थ रहना चाहते हैं। उनके शब्द  थे, जैसे कि चाय पीते-पीते लुढ़क गये !  उसे हँसी आयी, अर्थात आख़िर तक भी चाय नहीं छूटने वाली  ! उसने कहा, वह भी ऐसा ही चाहती है, पर इसके लिए कुछ करना तो पड़ेगा। नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम, सात्विक भोजन, अच्छी पुस्तकें पढ़ना, सेवा को भी स्थान देना होगा। वापस आते-आते सकारात्मकता से मन भर गया था। पौधों की निराई की, स्वाध्याय किया, दिन भर उत्साह बना रहा। आर्ट ऑफ़ लिविंग का अनुवाद कार्य किया, संयोजक ने कहा, एक दिन सभी अनुवादकों की भेंट गुरुजी से करवाने का प्रबंध वह कर रहा है।  


आज क्रिसमस का त्योहार है। उसने नापा के सेल्स ऑफिस में क्रिसमस की सजावट के चित्र उतारे। उनकी लेन में एक घर के सामने टॉय शॉप का पुतला लगा है, जहां बच्चे खिलौने ख़रीद सकते हैं। शहर में उनकी एक से अधिक दुकानें हैं।व्हाट्स एप और फ़ेसबुक पर अनेक संदेशों का आदान-प्रदान किया। नन्हे ने बताया, वे लोग टाटा टी सेंटर में चाय पीने गये, सोनू ने केक बनाये थे, जो वह अनाथ बच्चों के एक आश्रम में उनके लिए ले गई। यू ट्यूब पर ईसामसीह के जीवन पर आधारित एक फ़िल्म देखी, कितने दुख उन्हें दिये गये, उन्होंने सब स्वीकार किया। अद्भुत है उनकी जीवनगाथा, सुंदर हैं उनकी कहानियाँ, जो अपनी बात समझाने के लिए वे लोगों को सुनाते थे !  


आज का दिन विशेष रहा। शनिवार को वैसे भी साप्ताहिक सफ़ाई का दिन होता है, और साप्ताहिक विशेष स्नान का भी। ग्यारह बज गये थे जब सारे काम ख़त्म होने के बाद वह तैयार होकर सीढ़ियों से नीचे उतरी। अचानक देखा, सोनू के माता-पिता बैठे थे, नन्हा और वह किचन में चाय बना रहे थे। उसे आश्चर्य मिश्रित ख़ुशी हुई, कोरोना के बाद पहली बार किसी मेहमान के आने की ख़ुशी। सब ने मिलकर लंच में पुलाव, सब्ज़ी और रायता बनाया, डिनर में पास्ता, सूप व सलाद। 


आज इतवार का दिन भी सबके साथ बिताया। पंचायत के चुनाव की वजह से नैनी सुबह जल्दी आ गयी, उसे वोट देने जाना था। प्रातः भ्रमण के लिए जब वह निकली तब कोहरा छाया था। वातावरण बहुत मोहक लग रहा था। वापस आकर जून के साथ मिलकर दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया। दस बजे तक  नन्हा सभी को लेकर आया, साथ में माली भी था। दोपहर तक नये गमले तैयार करके पौधे लगाये। वह गया तो सभी ने मिलकर भोजन बनाया। कुछ बोर्ड गेम्स भी खेले, शाम को टहलने गये, और दिन कैसे बीत गया, इसका भान ही नहीं हुआ।


Thursday, December 14, 2023

लैवेंडर के बीज

आज ‘विजय दिवस’ मनाया जा रहा है। सन ७१ में आज ही के दिन बांग्ला देश का जन्म हुआ था। पाकिस्तानी सेना ने आत्म समर्पण कर दिया था। प्रधानमंत्री ने विजय चौक पर मशाल जलायी। उन्होंने ‘१९७१’ फ़िल्म देखी, भारत के कुछ सिपाही जो पाकिस्तान में रह जाते हैं, उनके दुखद प्रवास की कहानी। किसान आंदोलन अभी भी जारी है। आज कन्नड़ भाषा के कुछ और शब्द सीखे, बट्टा- वस्त्र, आदिगे- रसोई, चिक्का-छोटा।नये माली से कन्नड़ में बात की, एक वाक्य ही सही, इतवार से काम पर आएगा। नन्हे ने कुछ और गमले मँगवाये हैं, उनके टैरेस गार्डन के लिए।एक मून लाइट लैंप भी भेजा है, उसे चार्ज किया। रंग बदलती है उसकी सतह, बहुत सुंदर लगता है। 


आज पूरे नौ महीने बाद एक घंटे के लिए वे आश्रम गये, जो कोरोना के कारण इतने महीनों से बंद था। लोग बहुत कम थे। गुरुजी का सत्संग अभी एक महीने बाद ही आरम्भ होगा। ब्रिटेन में कोरोना का नया वेरियेंट मिला है, जो तेज़ी से फैलता है। वहाँ फिर से लॉक डाउन लग गया है। भतीजी को उसके जन्मदिन पर छोटी सी कविता भेजी, उसने छोटा सा थैंक्यू लिख कर जवाब दिया। कविता की कद्र कम को ही होती है शायद, कविता कोई क्यों लिखता है, शायद जब कोई खुश होता है तो ख़ुशी बाँटना चाहता है। नाश्ते में आज मूँगदाल के चीले बनाये। उसने सोचा है, शनिवार के दिन कोई न कोई चित्र बनाएगी। इतवार बच्चों के नाम रहता है। सोम से शुक्र हर दिन एक ब्लॉग को समर्पित रहेगा। इस तरह सभी पर बात धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ेगी। सुबह वे दोनों ननदों को याद कर रही थी, कि एक-एक करके उनके फ़ोन आ गये, टेलीपैथी इसी को कहते हैं शायद। सुबह नैनी आयी तो बहुत उदास थी। शायद घर में झगड़ा हुआ था। पीकर आये पति ने उसे चोट पहुँचायी थी। न जाने कितनी महिलाएँ इस तरह अत्याचार सहती हैं, जबकि वह कमाती है, छह घरों में काम करती है। बहुत खुश रहती है और मन लगाकर काम करती है।  


अभी नन्हे से बात हुई, कल इतवार है, वह दोपहर को पास्ता बनाने को कह रहा है। सोनू कुछ हफ़्तों के लिए माँ के घर गई है। आज सुबह सोलर पैनल की सफ़ाई की। नैनी आज पूर्ववत थी, उसे देखकर अच्छा लगा। बातों-बातों में जून ने कहा, वे बोर हो गये हैं। उसने सोचा, जो जगत से बोर हो जाएगा, वह यदि भीतर नहीं मुड़ा तो उसके जीवन में रस नहीं रहेगा। कोरोना ने न जाने कितने लोगों को बोर और उदास कर दिया है। 


नन्हा आया तो उनके भावी नये पड़ोसी बैठे थे। उन्होंने अपने घर के बारे में कई रोचक बातें बतायीं। उनका घर दुमंज़िला होगा, जिसमें स्वीमिंग पूल होगा और छत पर एक से अधिक बगीचे। होम थियेटर तथा एक बड़ा सा मंदिर। उनके सपनों का घर जब तक बन कर तैयार नहीं जाता, उन्हें शोर तथा अन्य असुविधाएं झेलनी पड़ेंगी, इसके लिए वह शुरू से ही क्षमा माँगने आये थे। 


सुबह सवा चार बजे नींद खुली। समय की धारा बहती जा रही है। वह नींद और सपनों में वक्त गुज़ार देते हैं अथवा तो इधर-उधर के कामों में। सुबह टहलते समय भ्रमण-ध्यान किया। शीतल पवन चेहरे को सहला रही थी, आकाश में तारे चमक रहे थे और वातावरण पूर्णतया शांत था। ऐसे में मन स्वतःही एकाग्र हो जाता है। आज उसने लैवेंडर के बीज बोए हैं। शायद एक हफ़्ते में पौध निकल आयें। नन्हे के भेजे हुए गमले आ गये हैं, इतवार को वह मिट्टी लेते हुए आएगा। जून ने कोकोपीट व खाद भी मँगवा दी है।नाश्ते के बाद वे वोटर कार्ड बनवाने पंचायत के दफ्तर गये, पर संबंधित महिला कर्मचारी नहीं मिली। शाम को पिताजी से बात हुई, वे तीन हफ़्तों बाद दिल्ली से घर लौट आये हैं। रास्ते का विवरण बताया, कैसे ढाबे पर रुके, पेट्रोल भरवाया, सब्ज़ियाँ ख़रीदीं। उन्हें मिले उपहारों के बारे में बताया। घर आकर वह बहुत खुश हैं। किसान आंदोलन ख़त्म होने का  नाम ही नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी अगले चुनावों की तैयारी में अभी से लग गई है।       


Friday, December 1, 2023

क्वार्ड बाइक का रोमांच

रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, सब तरफ़ सन्नाटा है, केवल पंखे की हल्की सी आवाज़ आ रही है। दिन भर शोर सुनने की आदत हो गई है, उनके घर के दायें-बायें दोनों तरफ़ के घरों में काम चल रहा है। धूल व शोर से बचने के लिए वे दिन भर खिड़कियाँ बंद करके रहते हैं, पर इस समय खुली हैं।अचानक फ़ोन की घंटी बजी, एक विज़िटर को अप्रूव किया, अमेजन डिलीवरी है शायद, नन्हे ने कुछ भेजा होगा। घर बैठे ही ख़रीदारी करने की जो सुविधा मिली है आजकल, सभी उसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। पहले ही उसके लिए रंग और कैनवास की तीन कॉपी मंगाकर रख दी हैं नन्हे ने । वे अभी कुछ देर पहले टहल कर आये हैं। हवा ठंडी थी, दिसम्बर का मध्य आ चुका है, पर यहाँ अभी तक चाहे एक नंबर पर ही सही, पंखा चलता है। उससे पहले डिनर में सूप और मुकरु लिए। दोपहर को लेखन का कुछ कार्य किया, छोटे भांजे के लिए एक कविता भी लिखी। पिटुनिया के दो पौधे मुरझा गये थे, उन्हें बदला, पीछे वाले बगीचे में भी काम करवाया, उन्हें दवा-पानी दिया। पौधे भी बच्चों की तरह होते हैं, ध्यान न दें तो पनप नहीं पाते। सुबह धनिया और पालक के बीज बोए, शायद एक हफ़्ते में अंकुर निकल आयेंगे।आज एक पुरानी परिचिता को फ़ोन लगाया, देर तक बातें हुईं, और अचानक शाम को एक अन्य परिचिता का फ़ोन अपने आप आ गया। वे जो देते हैं, वह लौटकर उनके पास ही आता है, यह सही है, उसे ऐसा लगा। 


आख़िर आज कामवाली आयी, घर की सफ़ाई भली प्रकार से हुई।दोपहर को मुख्य घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उसने जाते हुए वर्ष का लेखा-जोखा लिखा। योग वसिष्ठ का अध्ययन पुन: आरम्भ किया है। यह दुनिया एक स्वप्न ज़्यादा  कुछ नहीं है, ऐसा ही तो होना भी चाहिए। यह एक खेल है, एक लीला है, आनंद का प्रस्फुरण है, तरंगों का उठना-गिरना है, रस है जो अबाध बह रहा है। इसमें ज़्यादा फँसने की ज़रूरत नहीं है। अघोरा, घोरा और घोरतारा शक्तियों का खेल, शब्दों का एक मायाजाल, जिनसे वे व्यर्थ ही प्रभावित होते रहते हैं। शब्द जहां से निकलते हैं, वहाँ पहुँच जाओ तो चैन ही चैन है।  


आज का इतवार काफ़ी अलग रहा। सुबह टहलने गये तो वॉकिंग मैडिटेशन किया, पता ही नहीं चला, पचास मिनट कैसे बीत गये। वापस आकर कुछ पंक्तियाँ लिखीं, कल टाइप करेगी। बच्चे दस बजे के बाद आये। दोपहर के बाद नन्हा क्वार्ड बाइक चलाने ले गया। काफ़ी रोमांचक अनुभव था। जून ने थोड़ी दूर तक ही चलायी। वह और नन्हा एक गाँव में गये, ऊँची-नीची कच्ची सड़क पर लगभग आधा घंटा चलायी।ढेर सारी तस्वीरें खींची। एक कार्यक्रम में टीवी पर सुना, कल राजकपूर का जन्मदिन है और शैलेंद्र की पुण्यतिथि। दोनों ने कई फ़िल्मों में साथ काम किया था। शाम को छोटी बहन से बात हुई, उसकी दोनों बेटियाँ क्रिसमस की छुट्टियों में घर आयी हैं। छोटी स्टैटिसटिक्स में एमएसी कर रही है, बड़ी जॉब कर रही है, संगीत भी सीख रही है और वह एक सप्ताह के लिए भारत भी आना चाहती है।देश से दूर रहकर देश की ज़्यादा याद आती है। यहाँ भी क्रिसमस की चमक नज़र आने लगी है। सामने वाली लाइन में दो घरों में लाइट और स्टार लग गये हैं। शाम को रोज़ की तरह सूडोकू हल किया, अब अभ्यास होने के कारण अधिक समय नहीं लगता, पहले दस से बीस मिनट उसमें लग जाते थे। एक सखी का फ़ोन आया, उसके बेटे की कोर्ट मैरिज हो गई है, सामाजिक विवाह अगले वर्ष होगा। वक्त बदलता है तो प्रथाएँ भी बदल जाती हैं। किसानों के आंदोलन का आज बीसवाँ दिन है, सरकार का कहना है वह बात करने के लिए तैयार है, यदि वे सुझाव लेकर आयें।    


Saturday, October 14, 2023

मॉर्निंग ग्लोरी के फूल


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। हवा ठंडी थी और सुकून देने वाली, पत्तों की सरसराहट सुनायी दे रही थी। आज छोटे भाई-भाभी के विवाह की सालगिरह है, उनके लिए एक कविता लिखी, उन्हें पसंद आयी, फ़ेसबुक पर पोस्ट करने को कहा है, ताकि और लोग भी पढ़ सकें। रचना की पूर्णता तो पाठकों के पढ़ने पर ही होती है।नन्हा घर  लौटने वाला होगा, वह असम से पिटुनिया और डहलिये के पौधे ला रहा है। सोनू अभी दो महीने वहीं रहेगी, ऐसा उसने कहा है, पर उसे लगता है, वह जल्दी ही लौट आएगी। बंगलूरू के मौसम में रहने के बाद कोई और कहीं क्यों रहना चाहेगा। उससे फ़ोन पर बात की तो बहुत मासूम और छोटी लग रही थी, माँ के पास जाकर शायद सभी बच्चे बन जाते हैं। 


आज सुबह नन्हा माली को लेकर आया। साथ में दस बड़े गमले, चार बोरी मिट्टी, खाद वह पौध भी लाया। उन्होंने कल ही कोकोपीट भिगो दिया था। दोपहर तक सारा काम हो गया। अब कुछ ही महीनों में उनका बगीचा फूलों से भर जाएगा। बड़े भाई से बात हुई, पापा जी कुछ दिनों के लिए उनके घर आये हैं। वे बहुत खुश हैं, पोती भी उनका बहुत ध्यान रख रही है। रात्रि भोजन के बाद जब निकले तो वर्षा होने लगी थी। छाते लेकर गये, हवा थी पर ठंड जरा भी नहीं थी। यही बात बैंगलोर के मौसम को अच्छा बनाती है, दिसम्बर में भी स्वेटर की ज़रूरत नहीं है। यहाँ टेक्निकल सुविधाएँ भी बहुत हैं। उनकी ईवी की सर्विसिंग होनी है, टाटा मोटर्स वाला आदमी कल ख़ुद ही आकर ले जाएगा, फिर परसों छोड़ जाएगा। 


कल दोपहर बारह बजे बड़ी ननद व ननदोई आ गये थे । कितनी बातें की उन्हींने, पुराने दिनों की और वर्तमान की भी। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। शाम को उन्हें नापा में घुमाया, हरियाली और साफ़-सफ़ाई देखकर बहुत खुश थे, जगह-जगह तस्वीरें खिंचवाईं। वर्षों बाद कभी देखेंगे तो उन्हें यह दिन याद आ जाएगा। सुबह भी उन्हें भ्रमण के लिए ले गये।नाश्ते के बाद कार में दूर तक झील और जंगल दिखाने ले गये। दोपहर के भोजन के बाद वे अपनी बहन के यहाँ चले गये। समाचारों में सुना, सरकार और किसानों में आज जो समझौता वार्ता होनी थी, नहीं होगी। अभी तक किसान आंदोलन पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है।शायद अब सरकार को कठोरता अपनानी होगी। अनिश्चित काल तक तो यह आंदोलन नहीं चल सकता।


मॉर्निंग ग्लोरी के जो बीज उसने बोए थे उनमें अंकुर निकल आये हैं। असमिया सखी से बात हुई, उसकी बिटिया वापस आ गई हैं, अब आगे की पढ़ाई यहीं से करेगी। दीदी ने कहा, नार्वे में उनकी पोती का स्कूल खुला था, पर बंद करना पड़ा। पहले एक बच्चे को फिर टीचर को कोरोना हो गया। अमेरिका में भी कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा है। भारत में केस घट गये हैं। आज छोटे भांजे का जन्मदिन है, कॉलेज का एक छात्र जो पिछले दस महीनों से घर पर रहकर पढ़ाई करने पर विवश है।कैसे होंगे उसके मन के भाव, वह अपनी आज़ादी को मिस तो करता होगा। देवों के देव में दिखाया गया कि जब लक्ष्मी जी को अहंकार हो जाता है, तब उसका दुष्परिणाम उन्हें भी भुगतना पड़ता हैं। आज नैनी काम पर नहीं आयी, दूसरी पहले से ही एक सप्ताह के लिए गाँव गई है। जून कुछ कामों के न हो पाने के कारण परेशान हो गये। जब उसने कहा, उसे तो भीतर वाले की फ़िक्र है, तो उन्होंने भी चिंता छोड़ दी तथा दिन भर हल्के मूड में ही बने रहे। संग का असर होने लगा है। 


Friday, September 8, 2023

झील के तट पर


रोज़ की तरह वे प्रात: भ्रमण के लिए गये और विशेष बात यह हुई कि वापस आकर कुछ देर साइकिल भी चलायी। नाश्ते के बाद सोसाइटी के पीछे वाली सड़क पर जून दूर तक कार चलाकर ले गये तो एक जगह गुलदाउदी के फूलों का खेत देखा। खिली हुई धूप में फूलों का रंग बहुत शोख़ लग रहा था, ढेर सारी तस्वीरें खींचीं। आज गुरुजी की ज़ूम मीटिंग थी, आयुष तंत्र की दवाओं पर शोध तथा उनके प्रचार के लिए। उसे ट्रांस्क्रिप्शन का काम करना था, फिर हिन्दी में अनुवाद भी। पापाजी को वह वार्तालाप अच्छा लगा, जो उसने उनके साथ की बातचीत पर लिखा था। कल बड़े भाई का जन्मदिन है, उसने उनके लिए भी एक कविता लिखी है। छोटे भाई की नातिन नयी मेहमान अभी अस्पताल से घर नहीं आयी है। पापाजी अभी कुछ दिन वहीं रहेंगे। छोटी भाभी ने अपनी माँ के साथ बिटिया और उसकी बिटिया की तस्वीर भेजी है, चार पीढ़ियों की एक साथ फ़ोटो बहुत सुंदर लग रही है। 


वर्ष के अंतिम माह का प्रथम दिन ! आज सुबह के सभी काम हो जाने के बाद वे निकट स्थित एक झील पर गये, कुछ जल पक्षी तैर रहे थे  और किनारे पर बैंगनी रंग के जंगली फूल शोभित हो रहे थे। तट पर लगे वृक्षों का सुंदर प्रतिबिंब झील के पानी में पड़ रहा था। दोपहर को छोटी बहन से बात हुई, उसे आज सुबह एक स्वप्न आया, गुरुजी ने अपने मस्तक का तिलक उसके मस्तक से स्पर्श कराया है, उसके माथे में सनसनी हो रही थी । वाक़ई यह बहुत सुंदर अनुभव है, इसे अनमोल मानना चाहिए। गुरु से किसी का संबंध अपनी आत्मा से संबंध जैसा होता है। 


रात्रि का समय है। कुछ देर पूर्व सोनू से बात हुई, कल वे लोग ब्रह्मपुत्र में क्रूज़ पर जा रहे हैं, ‘उमानंद’ द्वीप भी जाएँगे। उसे याद आया, पिछले वर्ष वे भी गये थे। अगले दिन वे डैफ़ोडिल नर्सरी भी जाने वाले हैं, जहां से उनके लटकाने वाले गमलों के लिये पिटुनिया के पौधे लेंगे। आज नापा स्थित एक किसान से जून ताजी पालक ख़रीद कर लाये। समाचारों में सुना, केरल और तमिलनाडु में एक और तूफ़ान आने की चेतावनी दे दी गई है। 


केरल में आये चक्रवात बुरेवी का असर बैंगलुरु में भी पड़ा है। आज सुबह से ही बादल बने हुए हैं। कुछ देर वर्षा भी हुई, इस मौसम में पहली बार स्वेटर निकाला। शाम को गुरुजी का लाइव सत्संग था, असम में सोचा करती थी, आश्रम जाकर सत्संग में भाग लेगी, पर एक वर्ष होने को है, अभी तक आश्रम सबके लिए खुला नहीं है। उनके बताये ध्यान वे रोज़ ही करते हैं। आज विश्व विकलांग दिवस है, मृणाल ज्योति में अच्छी तरह मनाया गया, उसने तस्वीरें देखीं, एक अध्यापक ने फ़ेसबुक पर वीडियो भी पोस्ट किया था। उस वे कई दिवस याद आ रहे थे, जब वह महिला क्लब की अन्य महिलाओं के साथ बच्चों के लिए उपहार लेकर जाती थी। कल रात्रि अजीब सा स्वप्न देखा। मन को यह बोध हुआ कि नाम-रूप दोनों भ्रम हैं। दोनों क्षणिक हैं, उनके प्रति आसक्ति दुख को उत्पन्न करने वाली है। इस जगत में कुछ भी स्थायी और स्वतंत्र नहीं है, सभी कुछ आपस में एक-दूसरे पर आश्रित है। 


आज नेवी डे है। मौसम आज भी ठंडा रहा दिन भर, हल्की वर्षा भी हुई।अगले हफ़्ते एक दिन के लिए  बड़ी ननद  और ननदोई आ  रहे हैं। उसी दिन शाम को नौ बजे आश्रम के स्वामी प्रणवानंद जी का ऑन लाइन कार्यक्रम है। शाम को एक पुराने परिचित की बिटिया का फ़ोन आया, एम डी की उसकी परीक्षा अब मार्च या अप्रैल में होग, कोविड के कारण ही यह देरी है। जबकि उसका छोटा भाई एक वर्ष की पढ़ाई कर चुका है। आज बौद्ध धर्म पर एक दो व्याख्यान सुने। शून्यता की परिभाषा समझ में आयी। वेदान्त का ब्रह्म ही बौद्धों का शून्य है। सुबह के भ्रमण में मन को शून्य पर टिकाने का अभ्यास सहज ही होता है। हल्का अंधकार होता है हर तरफ़ सन्नाटा, कुछ भी नहीं होता जो ध्यान खींचे। योग साधना के समय आजकल शंख प्रक्षालन के आसनों के कारण देह हल्की रहती है।


Wednesday, August 2, 2023

देव दिवाली की चमक

आज एक दिन और गुजर गया। जीवन कैसे पल-पल बीत रहा है। उन्हें यहाँ आये हुए एक वर्ष हो गया है। एक भविष्यवाणी के अनुसार उसके हाथ में साढ़े पंद्रह वर्षों का समय है। कितना कुछ करना है, करना था पर इधर दिन निकलता है उधर रात हो जाती है। सुबह-सुबह टहलते समय कितने सारे सुंदर विचार मन में उग रहे थे, पर अब एक भी याद नहीं है। उसी समय आकर लिख लेना ही उचित होगा। कल एक निकट संबंधी ने जून से ज़मीन ख़रीदने के लिए आर्थिक सहायता माँगी थी, पर दिन भर विचार करने के बाद शाम को उन्होंने अपनी असमर्थता जता दी। ज़मीन-मकान में पैसे लगाना अक़्लमंदी नहीं है। पहले ही दो जगह उन्होंने पैसे लगाये हुए हैं, जिसका जरा भी लाभ नहीं मिल रहा, यह वह जन स्वयं ही बता चुके थे। 


इस समय रात्रि के नौ बजे हैं। आज पहली बार उसने ज्वार के आटे का चीला बनाया, दीदी से बात हुई तो उन्होंने कहा, वह सिंघाड़े तथा कोटू के आटे का चीला भी बनाती हैं। पापा जी ने कहा, उन्होंने ‘कारवाँ’ पर दूसरी बार सारे गीत सुन लिए हैं। उनसे बात की तो अध्यात्म पर चर्चा हुई। उसने कुछ प्रश्न पूछे, जिसके उत्तर रिकॉर्ड कर लिए हैं, उन्होंने कुछ शेर भी सुनाये। उनके जन्मदिन पर यह बातचीत लिखकर एक तोहफ़े के रूप में उन्हें प्रस्तुत करेगी।सड़क पार सामने वाले घर में गृह प्रवेश की पूजा हो रही है। हरी -नीली-लाल बत्तियों से घर को और गेंदे के फूलों से द्वार को सजाया है।यह पूजा यहाँ रात भर चलती है शायद। आज तुलसी विवाह भी है। देव उठावनी एकादशी है। कितनी अद्भुत है भारत की संस्कृति; जहां  भगवान का विवाह एक पौधे से करते हैं, इसी के माध्यम से तुलसी की महत्ता बतायी गई है, उसके गुणों से परिचय कराया है। आज ‘महादेव’ में देवी ने अपने मन की पीड़ा बतायी तो शंकर भगवान एक बालक के रूप में आकर रोने लगे, वह अपनी पीड़ा किससे कहें ! अद्भुत गाथा है शिव-पार्वती की।


आज सुबह से ही यहाँ घने बादल छाये हैं, हवा भी तेज है। सुबह वे टहलकर आये तो बूँदे गिरने लगीं।चेन्नई में आये ‘निवार’ तूफ़ान का असर यहाँ पर भी हुआ है। बंगाल की खाड़ी से उठे इस तूफ़ान के कारण पुदुचेरी व आंध्र प्रदेश में भी भीषण वर्षा हो रही है। पापाजी से जो वार्तालाप उन्होंने किया था, उसे आज टाइप किया, एक साक्षात्कार के फ़ॉर्मेट में। लिखते समय रिकॉर्ड की हुई अपनी ही आवाज़ सुनी, जो स्वयं को ही पसंद नहीं आयी। अन्यों के कानों को कितना कष्ट देती होगी। उसे अपनी वाणी पर बहुत ध्यान देना चाहिए। इसी प्रकार अपनी लिखावट पर भी। दोनों ही मन की स्थिति को दर्शाते हैं। जून को जो वह लंबे लंबे भाषण देती है, वह उनके कानों को कितने अप्रिय लगते होंगे। उन्हें अपने बारे में कितनी ख़ुशफ़हमियाँ अथवा तो ग़लतफ़हमियाँ होती हैं, यही एक शब्द है जिसका विलोम भी वही अर्थ देता है। हर ख़ुशफ़हमी एक ग़लतफ़हमी ही तो होती है।  नन्हा व सोनू असम गये हैं, हवाई अड्डे पर कोविड के लिए उनकी जाँच हुई,  फ़्लाइट में भी काफ़ी सावधानी बरती गई। दोपहर को आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक छोटा अनुवाद कार्य किया। गुरु जी पत्रकारों को संबोधित करने वाले हैं। वे बतायेंगे कि कोविड से बचने के लिए आयुर्वैदिक दवाओं तथा अन्य उपायों के द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम होने से कैसे रोका जा सकता है। पिछले कुछ दिनों की तरह आज भी उसने कुछ कन्नड़ शब्द सीखे, प्रतिदिन कुछ शब्द सीखते-सीखते उन्हें भाषा समझ में आने लगेगी।  


कल देव दिवाली है। गुरुनानक देव का जन्मदिन भी।  उसे कुछ वर्ष पूर्व बनारस के घाटों पर देखी देव दिवाली स्मरण हो आयी। जब नौका में बैठकर उन्होंने सभी घाटों पर जलाये गये लाखों दीपकों का दर्शन किया था। शाम से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहे थे और भव्य गंगा आरती भी देखी थी। सुबह उठते ही एक सुखद समाचार मिला, छोटा भाई नाना बन गया है। पापा जी भी भाई-भाभी के साथ पोती के घर गये हैं।जून का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, शारीरिक से अधिक मानसिक, वे अपने काम के दिनों की व्यस्तता में कितना खुश रहते थे। सेवा निवृत्ति के बाद संभवतः यह उदासी स्वाभाविक है उस व्यक्ति के लिए जो दिन-रात अपने कार्य के प्रति समर्पित रहा हो, जिसने और कुछ करने के बारे में सोचा ही न हो। उसने उन्हें कुछ सुझाव दिये पर जब तक कोई बात ख़ुद के दिल से न निकली हो उस पर अमल करना आसान नहीं है।    


रात्रि के नौ बजे हैं। आज का दिन काफ़ी जीवंत रहा। सुबह के भ्रमण व साइकिल चलाने के बाद वे जंगल की तरफ़ कार द्वारा लंबी ड्राइव पर गये। पहली बार गुलदाउदी के फूलों का विशाल बगीचा देखा। धूप में फूलों का रंग बहुत शोख़ लग रहा था। आकाश में कार्तिक पूर्णिका का चंद्रमा अपनी पूरी दमक के साथ सुशोभित है। टीवी पर देव दीपावली का आँखों देखा हाल देखा। मोदी जी का भाषण भी सुना। घाटों पर ग्यारह लाख से अधिक दीपक जलाये गये हैं। वाराणसी में काफ़ी बदलाव आ रहा है। गंगा का पानी स्वच्छ हो गया है।सारनाथ में भी लेजर शो दिखाया जाए


Wednesday, July 19, 2023

ध्वनि की ऊर्जा

आज शाम से ही वर्षा हो रही है। कुछ देर पहले नन्हे से बात हुई, उसने बताया दिवाली का उत्सव वे अभी तक मना रहे हैं। आज सुबह एक मित्र परिवार ने उन्हें नाश्ते पर बुलाया था, दोपहर को उन्होंने पड़ोसियों को लंच पर आमंत्रित किया, शाम को पुन: उन दोनों को एक सहकर्मी के यहाँ दिवाली की चाय पर जाना था। रात को नौ बजे से उनका नृत्य अभ्यास है, जो एक मित्र के विवाह के अवसर पर उन्हें करना है। आज दीदी ने वर्ष भर पूर्व  उनके साथ की गई हिमाचल की यात्रा का विवरण भेजा, पढ़कर वे सारे दृश्य आँखों के सम्मुख आ गये। उसने सोचा, वह भी डायरी में लिखे यात्रा विवरण को टाइप करके उन्हें भेजेगी । बड़ी ननद के विवाह की वर्षगाँठ पर उसने एक कविता लिखी ।कल एक सखी के माँ-पापा के लिए श्रद्धांजलि स्वरूप एक छोटा सा आलेख लिखा था, उसने अपने परिवार जनों की प्रतिक्रियाएँ भेजी हैं, अब तक बीस आ चुकी हैं। उनका परिवार बहुत बड़ा है। उसे महसूस हुआ, शब्दों में कितनी ताक़त होती है। 


सुबह वे टहलने निकले तो भोर का तारा गाढ़े नीले आकाश पर दमक रहा था। हवा शीतल थी। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आ रही थी। मुख्य सड़क के मध्य में एक लंबी क़तार में इनके पौधे लगे हैं। योगासन के अभ्यास के दौरान छत से दिखा सूर्योदय का दृश्य अनुपम था। उसी दौरान पुन: गायत्री परिवार के लाल बिहारी जी का मनोमय कोष की साधना पर दिया व्याख्यान सुना। उनकी वाणी में कितनी प्रखरता है, बहुत गहरी साधनाएँ उन्होंने की हैं। बाद में एक परिचित, जो इसी सोसाइटी के  निवासी हैं, मिलने आये थे, तमिलनाडु के हैं। हर सुबह दौड़ लगाते हुए मिलते हैं। वे सात बार विपासना का कोर्स कर चुके हैं। उनसे बात करते हुए उसे अपने विपासना अनुभव याद आ रहे थे, उसके लिए एक बार ही यह अनुभव करना पर्याप्त है।  


बाहर से कुछ आवाज़ें आ रही हैं। उनकी बैठक की दीवारों में पानी के रिसाव के निशान दिख रहे थे, इस समस्या से छुटकारे के लिए बाहर दीवारों के पास खुदाई का काम चल रहा है, एक बार फिर से जलनिरोधी प्लासतर करना होगा। आज दिन में दो बार ‘सावधानी हटी और दुर्घटना घटी’ । एक प्याला टूटा और खाने की मेज़ पर पानी से भरा गिलास उलट गया। दोनों बार दाहिने हाथ से, अर्थात हाथ पर मन का नियंत्रण नहीं था और मन पर ख़ुद का। नन्हा और सोनू विवाह में पहुँच गये हैं, उसके मित्र ने लिंक भेजा है, चाहे तो वे भी यहाँ से सम्मिलित हो सकते हैं।’देवों के देव’ में कार्तिकेय और गणेश के मध्य प्रतिस्पर्धा होने वाली है। गणेश ही विजयी होंगे, कार्तिकेय के मन में एक गहरा घाव है जो इंद्र ने उसे दिया है अथवा उसके जन्म की घटनाओं के कारण उसे मिला है। वह कई बार कैलाश छोड़कर जा चुके हैं, कोई न कोई उन्हें मनाकर वापस लाता है। 


सुबह वे जल्दी उठे। उठने से पूर्व उसे लगा जैसे किसी ने कहा हो, ध्वनि एक ऊर्जा है। प्रात: भ्रमण के दौरान इसी बात पर मनन करते हुए मंत्र जाप किया। हर शब्द  की तरंगों का शरीर पर असर होता है।ओम के उच्चारण का अति प्रभाव होता है, इसीलिए इस पर इतने शोध हो रहे हैं। हज़ारों वर्षों से ऋषि यह कहते आये हैं। शरीर तरंगों से बना है, तो ध्वनि की तरंगें उसे प्रभावित करें इसमें आश्चर्य भी क्या है ? भीतर निरंतर एक गुंजन चल रही है, उसे सुनें या ना सुनें, वह हो ही रही है। वह ध्वनि कहाँ से आ रही है, क्या वह प्राण ऊर्जा की गति के कारण है, जैसे बिजली की तारों से एक ध्वनि आती है। इस देह में न जाने कितने रहस्य छिपे हैं। गुरुजी के भगवद्गीता पर दिये प्रवचन का एक अंश सुना। वे गूढ़ विषयों को भी सरल भाषा में समझा देते हैं। शाम को एक निर्देशित ध्यान किया था, मन कितना हल्का हो गया था उसके बाद। जून को भी अच्छा लगा। अब वह पुन: कर रहे हैं। उन्हें अपने आप ध्यान के लिए बैठे देखकर अच्छा लगा। उन्हें ध्यान के महत्व का ज्ञान हो रहा है।  


आज साप्ताहिक सफ़ाई का दिन था। सुबह सर्दियों की ठंड के साथ शुरू हुई। तापमान चौदह डिग्री था, वे जैकेट आदि से मुस्तैद होकर निकले। दोपहर को धूप निकल आयी थी। फूलों के चित्र उतारे, जो धूप में और भी शोख़ लग रहे थे। शाम को सूर्यास्त के चित्र  फ़ेसबुक पर प्रकाशित किए। आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुवाद कार्य के बाद  दोपहर को ब्लॉग पर लेखन  व पठन कार्य, लिखा कम, पढ़ा अधिक। हिमाचल की यात्रा का वृतांत पिताजी व दीदी दोनों को अच्छा लगा। नन्हे के मित्र ने विवाह के बाद एक उपहार भेजा है, बहुत बड़ा सा पैकेट है। उन्होंने अनुमान लगाया, उसमें क्या हो सकता है।