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Wednesday, August 2, 2023

देव दिवाली की चमक

आज एक दिन और गुजर गया। जीवन कैसे पल-पल बीत रहा है। उन्हें यहाँ आये हुए एक वर्ष हो गया है। एक भविष्यवाणी के अनुसार उसके हाथ में साढ़े पंद्रह वर्षों का समय है। कितना कुछ करना है, करना था पर इधर दिन निकलता है उधर रात हो जाती है। सुबह-सुबह टहलते समय कितने सारे सुंदर विचार मन में उग रहे थे, पर अब एक भी याद नहीं है। उसी समय आकर लिख लेना ही उचित होगा। कल एक निकट संबंधी ने जून से ज़मीन ख़रीदने के लिए आर्थिक सहायता माँगी थी, पर दिन भर विचार करने के बाद शाम को उन्होंने अपनी असमर्थता जता दी। ज़मीन-मकान में पैसे लगाना अक़्लमंदी नहीं है। पहले ही दो जगह उन्होंने पैसे लगाये हुए हैं, जिसका जरा भी लाभ नहीं मिल रहा, यह वह जन स्वयं ही बता चुके थे। 


इस समय रात्रि के नौ बजे हैं। आज पहली बार उसने ज्वार के आटे का चीला बनाया, दीदी से बात हुई तो उन्होंने कहा, वह सिंघाड़े तथा कोटू के आटे का चीला भी बनाती हैं। पापा जी ने कहा, उन्होंने ‘कारवाँ’ पर दूसरी बार सारे गीत सुन लिए हैं। उनसे बात की तो अध्यात्म पर चर्चा हुई। उसने कुछ प्रश्न पूछे, जिसके उत्तर रिकॉर्ड कर लिए हैं, उन्होंने कुछ शेर भी सुनाये। उनके जन्मदिन पर यह बातचीत लिखकर एक तोहफ़े के रूप में उन्हें प्रस्तुत करेगी।सड़क पार सामने वाले घर में गृह प्रवेश की पूजा हो रही है। हरी -नीली-लाल बत्तियों से घर को और गेंदे के फूलों से द्वार को सजाया है।यह पूजा यहाँ रात भर चलती है शायद। आज तुलसी विवाह भी है। देव उठावनी एकादशी है। कितनी अद्भुत है भारत की संस्कृति; जहां  भगवान का विवाह एक पौधे से करते हैं, इसी के माध्यम से तुलसी की महत्ता बतायी गई है, उसके गुणों से परिचय कराया है। आज ‘महादेव’ में देवी ने अपने मन की पीड़ा बतायी तो शंकर भगवान एक बालक के रूप में आकर रोने लगे, वह अपनी पीड़ा किससे कहें ! अद्भुत गाथा है शिव-पार्वती की।


आज सुबह से ही यहाँ घने बादल छाये हैं, हवा भी तेज है। सुबह वे टहलकर आये तो बूँदे गिरने लगीं।चेन्नई में आये ‘निवार’ तूफ़ान का असर यहाँ पर भी हुआ है। बंगाल की खाड़ी से उठे इस तूफ़ान के कारण पुदुचेरी व आंध्र प्रदेश में भी भीषण वर्षा हो रही है। पापाजी से जो वार्तालाप उन्होंने किया था, उसे आज टाइप किया, एक साक्षात्कार के फ़ॉर्मेट में। लिखते समय रिकॉर्ड की हुई अपनी ही आवाज़ सुनी, जो स्वयं को ही पसंद नहीं आयी। अन्यों के कानों को कितना कष्ट देती होगी। उसे अपनी वाणी पर बहुत ध्यान देना चाहिए। इसी प्रकार अपनी लिखावट पर भी। दोनों ही मन की स्थिति को दर्शाते हैं। जून को जो वह लंबे लंबे भाषण देती है, वह उनके कानों को कितने अप्रिय लगते होंगे। उन्हें अपने बारे में कितनी ख़ुशफ़हमियाँ अथवा तो ग़लतफ़हमियाँ होती हैं, यही एक शब्द है जिसका विलोम भी वही अर्थ देता है। हर ख़ुशफ़हमी एक ग़लतफ़हमी ही तो होती है।  नन्हा व सोनू असम गये हैं, हवाई अड्डे पर कोविड के लिए उनकी जाँच हुई,  फ़्लाइट में भी काफ़ी सावधानी बरती गई। दोपहर को आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक छोटा अनुवाद कार्य किया। गुरु जी पत्रकारों को संबोधित करने वाले हैं। वे बतायेंगे कि कोविड से बचने के लिए आयुर्वैदिक दवाओं तथा अन्य उपायों के द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम होने से कैसे रोका जा सकता है। पिछले कुछ दिनों की तरह आज भी उसने कुछ कन्नड़ शब्द सीखे, प्रतिदिन कुछ शब्द सीखते-सीखते उन्हें भाषा समझ में आने लगेगी।  


कल देव दिवाली है। गुरुनानक देव का जन्मदिन भी।  उसे कुछ वर्ष पूर्व बनारस के घाटों पर देखी देव दिवाली स्मरण हो आयी। जब नौका में बैठकर उन्होंने सभी घाटों पर जलाये गये लाखों दीपकों का दर्शन किया था। शाम से ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी चल रहे थे और भव्य गंगा आरती भी देखी थी। सुबह उठते ही एक सुखद समाचार मिला, छोटा भाई नाना बन गया है। पापा जी भी भाई-भाभी के साथ पोती के घर गये हैं।जून का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, शारीरिक से अधिक मानसिक, वे अपने काम के दिनों की व्यस्तता में कितना खुश रहते थे। सेवा निवृत्ति के बाद संभवतः यह उदासी स्वाभाविक है उस व्यक्ति के लिए जो दिन-रात अपने कार्य के प्रति समर्पित रहा हो, जिसने और कुछ करने के बारे में सोचा ही न हो। उसने उन्हें कुछ सुझाव दिये पर जब तक कोई बात ख़ुद के दिल से न निकली हो उस पर अमल करना आसान नहीं है।    


रात्रि के नौ बजे हैं। आज का दिन काफ़ी जीवंत रहा। सुबह के भ्रमण व साइकिल चलाने के बाद वे जंगल की तरफ़ कार द्वारा लंबी ड्राइव पर गये। पहली बार गुलदाउदी के फूलों का विशाल बगीचा देखा। धूप में फूलों का रंग बहुत शोख़ लग रहा था। आकाश में कार्तिक पूर्णिका का चंद्रमा अपनी पूरी दमक के साथ सुशोभित है। टीवी पर देव दीपावली का आँखों देखा हाल देखा। मोदी जी का भाषण भी सुना। घाटों पर ग्यारह लाख से अधिक दीपक जलाये गये हैं। वाराणसी में काफ़ी बदलाव आ रहा है। गंगा का पानी स्वच्छ हो गया है।सारनाथ में भी लेजर शो दिखाया जाए


Thursday, May 31, 2012

नामकरण संस्कार


इस समय टीवी पर ‘गंगा प्रदूषण मुक्ति’ अभियान दिखाया जा रहा है, जो वाराणसी में राजीव गाँधी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया जा रहा है. प्रधानमंत्री इस परियोजना के प्रतीक का अनावरण कर रहे हैं. उसे याद आ रहे हैं वे दिन जब पूरे परिवार के साथ वह गंगा भ्रमण के लिये जाती थी, जो भी मेहमान उनके यहाँ आते थे, उन्हें भी गंगा दर्शन के लिये ले जाना होता था. पानी तब इतना दूषित नहीं था.
आज इतवार है, अभी तक का समय खट्टा-मीठा बीता है और यह इस बात का प्रतीक है कि अभी जीवन में स्पदंन है. बिना कोई परेशानी आये, सीधे-सीधे जीवन का पथ तय होता जाये तो आनंद ही क्या. कल शाम वे नवजात शिशु से मिलने गए थे जो कल ही घर आया है, अभी तक उसका नाम नहीं रखा गया है, नामकरण संस्कार होने पर ही नाम रखेंगे उसकी माँ ने बताया, नूना को थोड़ा आश्चर्य हुआ, उसने तो अभी से नाम सोच रखा है. कल वह फिर जायेगी उसके लिये उपहार लेकर, आज तो बाजार बंद है. वे घर लौटे तो दो परिवार उनसे मिलने आये हुए थे. रात को स्वप्न में वह अमेरिका पहुँच गयी थी, और छोटी बुआ को भी देखा. सुबह नींद देर से खुली, पर जून ने बिना कोई जल्दबाजी किये आराम से ही ऑफिस जाने की तैयारी कर ली. उसकी यही बात नूना को बहुत भाती है, वह कभी भी घबराता नहीं है, न दूसरे को ही इसका अनुभव करने देता है.

कल टीवी पर व्ही. शांताराम की प्रसिद्ध फिल्म देखी, ‘झनक झनक पायल बाजे’ उसे तो बहुत अच्छी लगी, पर जून को ऐसी फ़िल्में अच्छी नहीं लगतीं शायद, वह बीच-बीच में उठ कर चला जाता था. रात दस बजे फ़्रांस में हुए ‘इंडिया फेस्टिवल’ की समाप्ति पर एक विशेष कार्यक्रम था, कितना मन था उसका देखने का पर यह जून है न जो, उसे नींद आती है दस बजे ही, बेड में आने के बाद चाहे ग्यारह, बारह बजे तक जगता रहे.
   

Friday, May 18, 2012

प्याज की रोटी


कल चचेरे व फुफेरे दोनों भाइयों के पत्र आये, फूफा जी की अस्वस्थता के बारे में लिखा था, उसे याद आया बचपन में बच्चे बुआ के कहने पर उनकी सिगरेट छिपा देते थे, पर वे किसी न किसी तरह ढूँढ ही लेते थे. उसने जून की नीली पैंट ठीक कर दी है, पहले भी एक बार की थी, उसने सोचा कि उसे एक और पैंट जरूर ही सिलवानी चाहिए, आज वह  तिनसुकिया गया है, वाराणसी से सभी जन आ रहे हैं उन्हें लाने. नूना ने कितना कहा कि हेलमेट पहन कर जाओ, रास्ता लम्बा है, मोटरसाइकिल पर तय करना है पर माना ही नहीं, बच्चों की सी जिद करता है कभी कभी. रात बेहद गर्मी थी पर इस वक्त बादल हैं, वह जरूर भीग गया होगा.
घर कितना भरा-भरा सा है, कल वे आ गए थे. ट्रेन सिर्फ ढाई घंटा लेट थी. जून बिल्कुल भीग गया था पर स्टेशन पर पहुंचने के बाद वर्षा रुक गयी थी. दिन भर वह व्यस्त रही न अपनी सुध थी न उसकी. बातों में घूमने में टीवी देखने में समय सबके साथ कैसे बीत जाता है पता ही नहीं चलता. जून को बहुत काम करना पड़ता है पर वह चेहरे पर जरा भी शिकन लाए बिना बिना थके सब करता  है. प्याज की रोटी के लिये माँ प्याज काटते-काटते बातें भी करती जा रही थीं. उनकी तबियत पूरी तरह ठीक नहीं है.