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Wednesday, April 25, 2018

हरी मटर की पौध



रविवार होने के बावजूद आज सुबह भी वे भोर होने से पहले ही उठ गये, अँधेरे में ही टहलने गये, पूरे रास्ते में इक्का-दुक्का लोग नजर आए. सुबह की योग कक्षा में सूर्य नमस्कार और सूर्य ध्यान करने व कराने के बाद मन कितना प्रफ्फुलित हो गया था. नाश्ते की तैयारी उसने पहले से कर दी थी. जून ने तंदूर लगा दिया, गर्मागर्म आलू का परांठा और दही का नाश्ता किया. उसके बाद आरम्भ हुआ सभी से फोन पर बातचीत का सिलसिला. हर इतवार को वे सबसे पहले पिताजी से बात करते हैं, उनसे बात करना सदा ही अच्छा लगता है. फिर बहनों से और उसके बाद किसी और से. बड़ी भांजी डाईटीशियन का कोर्स करना चाहती है, उसके पति उसे सहयोग कर रहे हैं, जानकर अच्छा लगा. आज क्लब का वार्षिक उत्सव है, दोनों ने बालों में रंग लगाया. लंच के दौरान पिछले कई वर्षों की तरह एक स्टाल पर उसको भी खड़ा होना था. वे दो बजे क्लब गये, सजी-धजी महिलाएं समूहों में बैठी थीं, अभी भोजन में एक घंटे की देरी थी. लोग मस्त थे, सलाद, फ्राई, स्वादिष्ट भोजन, आइसक्रीम सभी कुछ लाजवाब था, पर पीने का चलन इस दिन कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है. शाम को ‘महाभारत’ का अगला एपिसोड देखा. रात को मकई की रोटी बनाई बगीचे से तोड़े हरे प्याज और मेथी मिलाकर. इस वर्ष मटर को छोड़कर सभी सब्जियों की काफी अच्छी फसल हुई है. मटर की फलियों को पंछी खा जाते हैं.

नये वर्ष के दस दिन गुजर गये, समय कितनी तेजी से गुजरता है, उनके लक्ष्य पूरे नहीं हो पाते. जीवन कितना कुछ छिपाए है, जो अपरिचित ही रहे जाता है. मौसम आज भी काफी ठंडा है, शाम को जून के एक सहकर्मी भोजन  के लिए आ रहे हैं. ‘सिया के राम’ में आज राम मिथिला की तरफ प्रस्थान करेंगे. हजार बार सुनी यह कथा हर बार नई लगती है. आज दुर्योधन का भी अंत होने वाला है ‘महाभारत’ में, मोह का प्रतीक है यह पात्र, इसका नाश होना ही चाहिए. व्हाट्सएप पर एक छोटी सी लडकी को हनुमान चालीसा गाते हुए सुना आज, तकनीक ने कला को कितना बड़ा फलक दे दिया है, देखते-ही देखते यह वीडियो पूरे भारत में प्रसारित हो जाने वाला है. जून आज देहली गये हैं. कल रात सूक्ष्म देह का अनुभव कितना स्पष्ट हो रहा था. वे सूक्ष्म देह के द्वारा भी स्पर्श का अनुभव करते हैं और देखते हैं, अनोखी है भीतर की दुनिया !

आज लोहरी है, सुबह देर से उठी, गले में हल्की खराश थी. नेति आदि करके स्नान किया तो सोचा, प्रातःभ्रमण तो छूट गया, प्राणायाम ही कर ले, पर सुबह-सुबह ही क्लब की सेक्रेटरी का फोन आ गया, कार्यों की एक लम्बी सूची थी सो नाश्ता करके कम्प्यूटर पर काम करने आ गयी, पर स्क्रीन थी कि खुलने को राजी नहीं थी. कल ही जून के जाने से पहले ही लैन से कनेक्ट करके गये थे आईटी विभाग के कर्मचारी. जून को शायद पासवर्ड का ज्ञान हो, पर वह फ्लाईट में थे. कुछ देर की प्रतीक्षा भी सही नहीं गयी. अधीर मन ने कहा, नन्हे को फोन करो, वह क्या करता, इसी बहाने उससे बात हो गयी. तब तक जून का संदेश देखा फोन पर, समस्या पल में हल हो गयी, पर इतनी देर में जो भीतर उत्तेजना को जन्म दिया उसका असर तो होना ही था. सदा शांत रहने वाला मन यदि थोड़ा सा भी ऊपर-नीचे हो तो असर होता ही है. साधक को तो अति सजग रहने की जरूरत है. सवा ग्यारह कब बज गये पता ही नहीं चला. सेक्रेटरी के साथ कार्ड्स बांटने गयी, सवाा एक बजे लौटी, भोजन करके पुनः तीन बजे गयी. उपहार गिनने का कार्य किया, बाजार गये और लौटे तो साढ़े पांच हो चुके थे. उसके बाद योग कक्षा, संध्या भ्रमण, ‘सिया के राम’, रात्रि भोजन और फिर नींद से पूर्व ध्यान. कोई स्वप्न देखा हो याद नहीं.   

Friday, July 13, 2012

कच्चे बेल


कई दिनों से ससुराल के घर से चिट्ठी नहीं आयी है, जून ने तार भेजा है, उम्मीद है सोमवार तक जवाब आ जायेगा. छोटू जैसे-जैसे बड़ा हो रहा है समझ आती जा रही है उसे, ज्यादा ध्यान और समय माँगने लगा है. कल सारी दोपहर और शाम पांच बजे तक वह उसके साथ ही खेलती रही पर वह मान ही नहीं रहा था. इस समय सो रहा है, उसके लिये हरे मटर और फूलगोभी के चंद टुकड़े उबालने हैं. जून तिनसुकिया गया है, घर फोन करने का प्रयत्न किया, पर यह संभव नहीं हो सका, एक टेलीग्राम और भेजा है उसने, वह उदास है इस बात से. इसी हफ्ते पत्र आ जाये तो कितना अच्छा हो. आज सुबह से वर्षा हो रही है, कितना अन्धेरा है उस कमरे में, जहाँ नन्हा सोया है. माँ का पत्र आया है वे लोग यहाँ आएँगे ऐसा लिखा है, शायद मई, जून में या नन्हें के पहले जन्मदिन पर. चाची का पत्र भी आया है बहुत दिनों बाद. आज पहली बार टीवी पर दूरदर्शन में सुबह का नया कार्यक्रम देखा, ‘राजा रामन्ना’ का इंटरव्यू अच्छा था और कन्नड़ गीत भी.

एक नया दिन, सुबह के सात बजे हैं, अभी-अभी जून ऑफिस गया है, रात भर वह कितने सपने देखती रही. वह बैगन के पकौड़े तल रही है पर वे हैं कि खत्म होने को ही नहीं आते. एक बहुत बड़ा सा जुलूस निकल रहा है सड़क पर..कल वह बाजार से दो बेल के फल लायी थी. सोच रही है उसका शर्बत बनाएगी, लेकिन माँ कैसे बनाती थीं उसे याद ही नहीं आ रहा.

वही कल का सा समय है और कल का सा मौसम, कल दोपहर बाद ही बादल एकत्र हो गए और रात भर बहुत बरसे. रात दो बजे बादलों के शोर से नन्हा उठ गया और उसके बाद सोने का नाम ही नहीं, जून ने दूध बनाया वह उसे चुप कराती रही कितनी देर उसे सुलाने का प्रयत्न किया एक बार सोया फिर उठ गया, अब कैसे सो रहा है मस्ती से. पत्र आज भी नहीं आया न ही तार का जवाब, आज हो सकता है जून डाकघर जाकर पता करें. वे बेल तो कच्चे निकले.