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Wednesday, July 23, 2014

भुट्टे के फायदे



उन्हें यहाँ आये अर्थात घर वापस आये तीन दिन हो गये हैं, कल दो पत्र लिखे, अभी स्मृतियाँ सजीव हैं. यहाँ भी वर्षा ने उनका स्वागत किया. जून, वह और नन्हा तीनों बहुत खुश हैं, यात्रा और कुछ दिन घर से दूर रहने के कारण घर की हर वस्तु उन्हें अच्छी लग रही है. माँ का ख्याल हमेशा बना रहता है, उनकी तबियत सुधर रही होगी या नहीं, इतनी दूर बैठे वे जान नहीं सकते, जानकर भी कुछ नहीं कर सकते, ईश्वर से मात्र प्रार्थना जरूर कर सकते हैं. प्रार्थना के आगे मात्र लगाकर उसके सत्य को कम करने का उसका इरादा नहीं है बल्कि अपनी क्षुद्रता पर पर्दा डाल रही है कि उसकी प्रार्थना में कोई असर होगा भी या नहीं. इतने दिनों भगवान से दूर जो रही, अपनी व्यस्तता में उसे भुला बैठी. सभी सखियों से फोन पर या मिलकर बात हुई, अच्छा लगा, वह बातूनी सखी दूसरी बार माँ बनी है बेटे की, कुछ दिन बाद देखने जाएगी. एक मित्र परिवार मिठाई खाने नहीं आ सका जो वे उनके लिए लाये थे, सम्भवतः आज आयें, कल शाम उन्होंने बगीचे में भी काम किया, भुट्टे बहुत हो रहे हैं, जिन्हें वे शाम को नाश्ते में खाते हैं. उसने भुने हुए भुट्टों के फायदे के बारे में कहीं पढ़ा था.

कर्म ही पूजा है, यह विचार इस समय उसके मन में प्रधान है. भक्ति की अपेक्षा कर्म का मार्ग उसे अधिक रुचता है, कर्म के द्वारा ही कोई अपने तथा अपने आस-पास के वातावरण, परिस्थितयों तथा स्तर में सुधार ला सकता है, कर्मयुक्त जीवन उहापोहों से भी दूर रहता है क्योंकि उसके पास विचार करने को अन्य कुछ नहीं रहता. कर्म, सद्कर्म हो यह लेकिन पहली शर्त है, ऐसा कर्म जो नैतिकता, धार्मिकता तथा आध्यात्मिकता के दायरे के अंदर ही हो, जो स्वार्थ युक्त न हो, ऐसा कर्म अपने आप ही भक्ति बन जायेगा. कल शाम को वह माँ के स्वास्थ्य के बारे में सोचती रही, मन कहीं और लग ही नहीं रहा था, आज सुबह फोन किया पर मिला नहीं, ईश्वर से प्रार्थना की तो चैन मिला. ईश्वर पर विश्वास किये बिना मानव का काम चल ही नहीं सकता. उसी का बनाया हुआ यह माया जाल है सो सब कुछ उसी पर छोड़कर चिंतामुक्त रहने में ही भलाई है.

आज उसे संगीत क्लास में जाना है, अभ्यास तो पिछले एक महीने में दो-चार बार ही हुआ फिर भी टीचर के साथ अभ्यास करने से उत्साह बढ़ेगा ही. आज उसे उस नये शिशु से मिलने भी जाना था पर वर्षा की झड़ी जो जून के दफ्तर जाने से पहले लगी थी रुकने का नाम ही नहीं ले रही है. अभी उसे भोजन बनाना है और नन्हे को पढ़ाई में मदद करनी है, वह आजकल रोज रात को देर से सोता है सो सुबह देर से उठता है, पर जब से घर से वे आये हैं साधारणतया खुश रहता है, उसके मित्र भी पढ़ाई में व्यस्त हैं सो फोन से ज्यादा डिस्टर्ब भी नहीं करते. आज बहुत दिनों बाद ‘जागरण’ सुना, बाबाजी आज भक्तिभाव में विभोर होकर नृत्य करने लगे थे, उसे लगता है हजारों लोग जो घंटों वहाँ बैठते हैं यदि कार्य करें तो देश का कितना कल्याण हो. लोगों का खुद कल्याण हो, हो सकता है वे श्रमदान के लिए शिविर भी लगते हों.  कल माँ-पिता से फोन पर बात हुई, माँ ने दवाएं न लेने या कम करने का फैसला किया है, दवाइयाँ खाना तो किसी को भी पसंद नहीं पर जब दवा जीने की शर्त ही बन जाये तो कोई कैसे छोड़ सकता है.





Tuesday, February 26, 2013

भुट्टे के पेड़



कल खतों के जवाब का दिन था. शाम को उसकी तीन सखियाँ एक साथ आ गयीं, परसों जो केक बनाया था, उन्हें पसंद आया, आज एक एनिवर्सरी पार्टी में जाना है, कल रात नूना सोच रही थी कि इस अवसर पर एक कविता लिखेगी लेकिन अब सम्भव नहीं लगता, समय नहीं है या कहें कि वैसा मूड नहीं है, शायद लिख भी पाए, कोशिश तो करेगी ही. जून की स्वास्थ्य समस्या अभी ठीक नहीं हुई है, वह आजकल थोड़ा उदासीन से रहते हैं, या फिर उम्र के साथ यह स्वाभाविक है. कल लाइब्रेरी से लौटते समय हल्की बूंदाबांदी होने लगी, वे लोग एक परिचित के यहाँ रुक गए. गृहणी का भाषण शुरू हो गया, वह पता नहीं कैसे इतना बोल लेती हैं.

कल कविता जैसा कुछ लिख नहीं सकी, पार्टी अच्छी रही, लौटने में काफी देर हो गयी. उनका उपहार शायद उन्हें पसंद आया हो शायद नहीं, पर फूल तो अवश्य भाए होंगे, फूल जो वह  हमेशा ले जाती है ऐसे अवसरों पर, उन्हें प्रतीक्षा भी रहती है.. कल रात उसे भी अपनी शादी की स्मृतियाँ ताजा हो गयी थीं. जून भी उसके भावों में सम्मिलित हो गए, वह दिल की बात समझ जाते हैं. नन्हे का लिखने का आजकल बिलकुल मन नहीं करता है, पर पढ़ने में वह ठीक है. आज वह बहुत देर से सोकर उठा है, उसकी मर्जी पर छोड़ दिया जाये तो शायद वह  दस बजे तक भी न उठे.

कल उसने चंद पंक्तियाँ लिखकर भिजवा दीं, अभी तक उनका फोन नहीं आया है, शायद वह झिझक रही हों. आज भी मौसम गर्म है. सुबह देखा गुलाब की पत्तियों में छेद है, जीनिया के पौधों में भी शुरू हो रहे हैं, शाम को दवा का छिडकाव करेंगे. अगले महीने गुलदाउदी की कटिंग्स भी लगनी हैं, उसके पत्तों पर भी दवा का छिड़काव जरूरी है. कोलकाता रेलवे स्टेशन से जो पुस्तक खरीदी थी “किचन गार्डन” उसे भूल ही गयी, आज पढ़ेगी.

नन्हे का परीक्षा परिणाम अच्छा रहा चार सौ में से तीन सौ तिरानवे अंक मिले हैं और दूसरी पोजीशन है क्लास में, वह बहुत खुश था कल. शाम को क्लब में ‘दोस्त’ फिल्म देखी, जो जानवरों पर थी, उसे बहुत पसंद आई, पिछले कुछ दिनों से नूना के दायें हाथ में कुछ अनोखी सी अनुभूति होती है, डाक्टर को बताना भी मुश्किल है, जून को भी नहीं बताया है अभी तक, कभी-कभी लगता है कहीं यह उसका वहम न हो, पर टहलते समय कभी-कभी हाथ देर तक जब लटका रहता है, ऊपर उठाना एक बड़ा काम सा लगता है.

पिछले सप्ताह वे लोग दो दिनों के लिए तेजपुर गए थे. दो दिनों की भीषण गर्मी के बाद आज मौसम अच्छा हुआ है. कल रात को वर्षा हुई, आंधी भी आयी होगी क्योंकि सुबह भुट्टे के सभी पेड़ गिरे हुए थे. पीछे आंगन में व बाहर सभी ओर पत्ते बिखरे हुए हैं. शनिवार को अस्पताल गयी थी, कल पहला इंजेक्शन लगा, कल से हाथ में वैसा अनुभव नहीं हुआ है, एक बार फिर चिकित्सा शास्त्र के प्रति मन श्रद्धा से भर गया है. कल “कल्याण” पढ़ा कुछ देर, मन हल्का होगया, सरे संशयों से दूर..ॐ पूर्ण मदः पूर्ण मिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते, पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवावशिष्यते. आज इस समय भी काफी तेज वर्षा हो रही है झमाझम..उसने सोचा, अच्छे-भले मूड को बिगाड़ना हो तो सोनू को कोई काम दे देना चाहिए, कई बार कहने पर भी नहीं होता है जब काम, तो खीझ उठती है और कल्याण में पढ़े वे सारे वाक्य आँखों के सामने आ जाते हैं कि क्रोध आने पर इंसान विवेक शून्य हो जाता है.

Thursday, May 17, 2012

बारिश में भुने भुट्टे


कल घर से पत्र आया है, वे लोग २२ मई को यहाँ पहुँच रहे हैं. जून उस दिन उन्हें लेने तिनसुकिया जायेगा. पिछले वर्ष भी इन्हीं दिनों वे यहाँ थे पर इस वर्ष उनके आने का कारण कुछ विशेष है. कल उसने रवीन्द्र नाथ टैगोर का उपन्यास ‘नौका दुर्घटना’ पढ़ना आरम्भ किया, इस उपन्यास पर अवश्य कोई फिल्म बनी होगी, कितने उतार-चढ़ाव हैं कहानी में. सुबह समाचारों में सुना कि बांग्लादेश में मतदान के दौरान हिंसा की कई घटनाएँ हुई. उसने सोचा कैसे होते होंगे वे लोग जो हिंसक हो जाते हैं.. पथराव, गोली, विस्फोट से उन्हें अपने मारे जाने का भी भय नहीं होता.
उस दिन रवीन्द्रनाथ टैगोर की सवा सौंवी जयंती थी, सारे कार्यालय बंद थे, सो जून दिन भर घर पर था. वे सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय देखने गए, उसके बाद भी बहुत दूर तक चलते गए. शाम को बाजार गए, जून ने उसके जन्मदिन के लिये कुर्ते का कपड़ा खरीद कर दिया, अगले दिन में दोनों ने मिलकर सिला. एक अच्छी बात हुई कि टीवी ठीक हो गया कुछ मजदूर बुलाए और उनकी सहायता से एंटीना फिर से लगाया. उन्होंने बहुत दिनों बाद फिल्म देखी. कल जून सब्जी लेने गया तो भुट्टे भी लाया उसे नूना की पसंद का बहुत ख्याल है. बारिश में आग पर भुने भुट्टे कितनी स्मृतियाँ जगा देते हैं बचपन की, जब एक दूसरे के मुँह पर लगी कालिख देख कर वे हँसते थे, और उनकी सुगंध भी दूर तक फ़ैल जाती थी. मौसम आज भी गर्म है या कहें कि इस हफ्ते भी गर्म है पिछले हफ्ते की तरह. पता नहीं कब बरसेंगे बादल और भीगेंगे खेत, खलिहान, घर की छतें, सड़कों के किनारे के पेड़.