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Sunday, June 28, 2020

श्री श्री और बाबा


आज बापू की पुण्यतिथि है, टीवी पर सर्वधर्म प्रार्थना का प्रसारण किया जा रहा है. बापू का जीवन भी पुण्यशाली था और मृत्यु भी, शहीद दिवस के रूप में उनकी पुण्यतिथि मनायी जाती है. स्कूलों के बच्चे मधुर स्वरों में गीत व भजन गा रहे हैं, गीत अत्यंत भक्तिभाव जगाने वाले हैं. आज सुबह गांधीजी की आवाज में उनके भाषण सुने. दूरदर्शन के अभिलेखागार में उनके वीडियो सुरक्षित रखे गए हैं. उनके हृदय में हर व्यक्ति के लिए प्रेम था, चाहे वह किसी जाति, किसी धर्म का हो. इस समय बहाई प्रार्थना कही जा रही है. परमात्मा से की गयी कोई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती. अब कुरान का पाठ किया जा रहा है. कल रात तारिक अहमद को सुना, जो पाकिस्तानी हैं पर उसके सबसे बड़े आलोचक भी हैं. हिंदुस्तान की तारीफ करते हैं. कल शाम को अचानक तेज वर्षा व आंधी आयी. एक योग साधिका ने कहा, गुरूजी का कोई सन्देश दे वह उन्हें घर जाने से पूर्व, वह साधिका हिंदी में कविता लिखती है और गाती भी अच्छा है. आज धोबी अपने बगीचे से नारियल और ढेर सारा हरा  धनिया लाया था, उसने भी दो पत्ता गोभी तोड़ कर दीं.

आज नए वर्ष के प्रथम माह का अंतिम दिन है. अब जून को सात माह का समय और यहाँ अपने विभाग प्रमुख के रूप में व्यतीत करना है. आज शाम को एक योग साधिका को विदाई दी, वह सूजी का हलवा बना कर लायी थी, शेष सभी लोग भी कुछ न कुछ बनाकर लाये थे. नूना ने उसके लिए लिखी कविता पढ़ी. दोपहर की कक्षा में दस लोग थे, दो नई लड़कियों ने आना शुरू किया है जो बहुत मन से योग अभ्यास करती हैं. सुबह आसन किये, कुछ ही दिनों में शरीर हल्का लगने लगा है. पिछले दिनों यात्रा आदि के कारण नियमित व्यायाम न करने से वजन भी बढ़ गया है. 

दोपहर के साढ़े चार बजे हैं, आज टीवी पर कुछ नए चैनल देखे. यूट्यूब पर एक वीडियो देखा जिसमें स्वस्थ रहने के लिए कुछ काम की बातें थीं. सुबह उठकर गर्म पानी पीना है, कुछ देर टहलना है. शंख प्रक्षालन के आसन नियमित करने हैं. भोजन के डेढ़ घण्टे बाद पानी पीना है . नमक कम, सफेद चीनी व मैदा नहीं खाना है. भोजन चबाकर खाना है. रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है. नाभि व छाती के मध्य की दूरी को बढ़ाकर रखना है. भोजन करते समय नीचे बैठना है अथवा सीधे बैठना है. भोजन स्वयं से ऊपर रखना है. दिन में सोना भी ठीक नहीं है.  रामदेव बाबा पर एक कार्यक्रम भी देखा. आज सुबह श्री श्री व रामदेव बाबा को संगम तट पर एक साथ योग करते हुए देखना एक अभूतपूर्व अनुभव था. दोपहर को लॉन की धूप में विश्राम किया, पैरों पर धूप पड़ रही थी और सिर छाया में था. इसी तरह जीवन में भले संघर्ष हो पर मन में विश्राम हो वह जीवन सार्थक है. बड़ी भांजी के लिए आज सुबह कविता लिखी, अपनेआप ही भीतर उतर आयी हो जैसे, सोचा नहीं था कि लिखनी है. 

Monday, May 11, 2020

बाबा रामदेव के वचन


आज छठा नवरात्र है, आज के दिन देवी कात्यायनी की पूजा होती है. कल वे अष्टमी का व्रत रखेंगे और परसों कन्या पूजन करेंगे. आज जून एक विंड चीटर लाये लाचेन की यात्रा के लिए, जहाँ उन्हें गरदुंम झील देखने जाना है. कल रात्रि बहुत दिनों बाद गहरी नींद आयी, रात्रि विश्राम के लिए है और दिवस काम करने के लिए. सुबह बाबा रामदेव के तेजस्वी वचन सुने, उनके मुख से ज्ञान के मोती ऐसे झरते हैं जैसे वृक्षों से फूल झरते हैं हरसिंगार के, सहज ही. उनके जैसा कर्मयोगी युगों-युगों में कोई बिरला ही होता है. ज्ञान, कर्म और भक्ति की महिमा उन्होंने कुछ शब्दों में ही बता दी. बुद्धि ज्ञान से प्रकाशित रहे, हृदय श्रद्धा से पूरित रहे और हाथ कर्म में रत रहें, तभी जीवन एक सहज प्रवाहित धारा की तरह निरन्तर गतिमय रहेगा. इसके लिए उन्हें हर पल सजग रहना होगा, जीवन भी यही है और साधना भी यही है. आज भी मौसम बादलों से भरा है. नन्हे की फ्लाइट छूट गयी उसे महाराष्ट्र जाना था, सोनू पहले से ही वहाँ थी, अपनी भांजी को देखने. नन्हे ने दूसरी टिकट ली और चला गया, धन से अधिक महत्व उसने रिश्तों को दिया, अच्छा लगा उन्हें. कल पिताजी ने उसे फोन किया, वह नए घर के बारे में भी पूछ रहे थे. उन्हें वे गृहप्रवेश के अवसर पर अवश्य ले जायेंगे. ईश्वर उनकी सहायता करेंगे. एक बार इस घर में भी वे आ पाते तो कितना अच्छा होता, उन्हें तकलीफ होगी यह सोचकर कभी इस बारे में ज्यादा सोचा ही नहीं. आज दोपहर को क्लब में होने वाली प्रतियोगिता के संबंध में मीटिंग है. 

सुबह के नौ बजने वाले हैं, आज देवी के कालरात्रि रूप के पूजन के लिए नवरात्रि का सातवाँ दिन है. सुबह साबूदाने की खीर बनाई थी. शाम को वे पूजा के स्थानीय पंडाल देखने जायेंगे. जून ने छोटी ननद के भतीजे के विवाह आ सगन भेज दिया है, पहले भी एक भीतर किसी ने याद दिलाया था, वह जून से कहना भूल गयी, आज भी क्रिया के बाद यह विचार अचानक आया, उसी समय फोन करके कहा. उनके भीतर कोई शुभचिंतक रहता है जो सदा सही राय देता रहता है. कल रात्रि केवल तीन बार नींद में खलल पड़ा, फिटबिट नींद का सारा हाल बता देता है. एक दिन अवश्य ऐसा होगा, जब रात को जिस करवट सोयी, सुबह उसी करवट में उठेगी. नींद में वे परमात्मा के साथ एक हो जाते हैं. ध्यान में उसकी उपस्थिति को अनुभव करते हैं. आज बड़ी भांजी का जन्मदिन है, उसे व दीदी को बधाई दी. कुछ दिन पहले नैनी के ससुर ने उसे कुछ पैसे रखने के लिए दिए थे, अभी तक वापस लेने नहीं आया है.  कल देवदत्त पटनायक को टीवी पर सुना. वह आत्मज्ञान की बात कह रहे थे. जहाँ अहंकार है वहाँ रणभूमि है, जहाँ आत्मज्ञान है वहाँ रंगभूमि है ! 

आज महागौरी की पूजा की अष्टमी तिथि है. दस बजे बच्चों को बुलाया है. जून के दफ्तर में आज सीधी यानि एक ही शिफ्ट है, शायद लंच के बाद उन्हें न जाना पड़े, गए भी तो जल्दी आ जायेंगे. उसने चने बना लिए हैं, पानी सुखाने के लिए गैस पर रखे थे, कुछ ज्यादा ही सूख गए. आजकल वह शुद्ध वर्तमान में रहने लगी है, सो थोड़ी देर पहले का काम भी याद नहीं रहता. बेहद खतरनाक स्थिति है यह. खैर ! इतने भी नहीं सूखे कि खाये ही न जा सकें, अच्छे ही लगेंगे. शाम को सिक्किम के लिए निकलना है, शायद डिब्रूगढ़ की पूजा के पंडाल भी देख पाएं. पैकिंग हो गयी है, हाथ के बैग में कुछ सामान रखना है. किताबें व डायरी तथा पूजा का सामान. आज सुबह उठी तो कोई स्वप्न चल रहा था, उसके बाल पीछे कसकर बंधे हैं तथा शीशे में अपना चेहरा देख रही है. वे अपने विचारों से ही बनते हैं. बचपन से लेकर कहे गए प्रशंसा के शब्द और अपमान के शब्द वही इन विचारों का स्रोत बनते हैं. 

Tuesday, December 27, 2016

रामलीला मैदान में रामदेव


आज बाबा रामदेव ने हजारों सत्याग्रहियों के साथ मिलकर दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन आरम्भ किया है. वह पिछले कई वर्षों से कालाधन वापस लाने की बात कह रहे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जून तक नहीं रेंगी. इस बार सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाने ही पड़ेंगे. कल रात को निष्काम कर्म की व्याख्या सुनते-सुनते सोयी थी. मन उल्लास से भरा था. एक अद्भुत स्वप्न देखा. किसी ने उसे ऊपर उठाया, देह नीचे पड़ी थी और स्वयं की आवाज सुनाई दी, वह ...( नाम) नहीं है, वह है..कई बार यह वाक्य गूँजा और उसे नीचे छोड़ दिया गया, बाद में भी मन में यही विचार आता रहा..स्थिरता की सी मन: स्थिति बनी है सुबह से..

कल सुबह टीवी पर जब सुना, बाबा रामदेव को गिरफ्तार कर लिया गया है, उन्हें वस्त्र बदल कर छुपना पड़ा, जब वह भाग रहे थे तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मैदान में सोये हजारों लोगों को वहाँ से निकाल दिया गया है तो मन विषाद से भर गया. कल दिन भर समाचार ही सुनते बीता. लोगों के मनों में दर्द है, उनके कार्यकर्ताओं को खदेड़ा गया, पीटा गया और कइयों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. शासन में रहने वाले लोग स्वयं को खुदा मानने लगते हैं. लोकतंत्र में ऐसी अमानवीय घटना का होना कितना दुखद है. सरकार को इसका परिणाम भुगतना ही पड़ेगा. देश में जो माहौल बन रहा है वह कुछ परिवर्तन लाकर ही रहेगा. लोकतान्त्रिक व्यवस्था में इसकी अति आवश्यकता है. इतिहास बन रहा है, पीड़ादायक क्षणों से गुजरना होगा, तभी तो नये राष्ट्र का जन्म होगा.

आज सुबह उन्होंने फूलों से भरे वृक्षों की कुछ तस्वीरें उतारीं. यह जगत कितना सुंदर है कोई ध्यान से देखे तो..जून को उसने कहा वह एक ब्लॉग की शुरुआत करें, जिसमें हर दिन कोई सूक्ति लिखी जाये. दीदी ने लिखा है, वह भगवद्गीता को ब्लॉग में लिखकर एक शुभ कार्य कर रही है, पर उसे लगता है वही करवा रहा है जिसकी यह गीता है. बाबा का अनशन जारी है, उन्होंने शेष सभी को तोड़ने के लिए कह दिया है. उनका जज्बा और जोश बरकरार है. अपनी तरफ से उन्होंने सबको क्षमादान भी दे दिया, सन्यासी का दिल कितना कोमल होता है. सरकार उन्हें राष्ट्रभक्त की जगह राष्ट्रद्रोही मान रही है. आज उनका उद्बोधन सुनते-सुनते उसका मन भी द्रवित हो गया.
आज सम्भवतः बाबा अपना अनशन तोड़ देंगे. श्री श्री और मुरारी बापू उनसे मिलने जाने वाले हैं.  उनके गुरूजी ने कहा, “शब्दों की शक्ति को पहचानना है, कुछ भी बोलने से पहले सोचना चाहिए कि श्रोता उसे किस रूप में ग्रहण करता है. आत्मा में मन लगे तो पुण्य और पदार्थ में लगे तो पाप होता है.” पाप और पुण्य की यह परिभाषा बहुत अच्छी है.


Sunday, October 16, 2016

बाबा रामदेव का आगमन



आज कई दिनों बाद लिख रही है. पिछले पांच दिन फिर डायरी नहीं खोली, आज पिताजी वापस चले गये. उनके बारे में कितनी बातें उन्हें ज्ञात हुईं. देश के विभाजन के समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह-सोलह साल की थी, हाई स्कूल में ही थे. पाकिस्तान से आकर वे लोग फाजिल्का में रहे. गुजारे के लिए पहले मूंगफली बेचीं, एक डाक्टर के पास कम्पाउडर का काम किया, फिर उन्हें तहसील में एक नौकरी मिली. उसके बाद ही डाकविभाग में काम मिला, साथ-साथ पढ़ाई भी करते रहे. कई बार प्रमोशन हुआ और उच्च पद से रिटायर हुए. उनका स्वभाव शांत है, सीखने की ललक अभी तक है. आत्मा की खोज है, आत्मनिर्भर हैं, मोह से परे हैं, संगीत का शौक है और भी न जाने कितने गुण हैं, उनके लिए वह एक कविता लिखेगी !  मौसम अच्छा है, धूप खिली है. कल बाबा रामदेव आये थे डीपीएस स्कूल के मैदान में उनका कार्यक्रम हुआ. वे गये थे. जोश से भरा उनका भाषण हजारों लोगों ने सुना. इस समय पिताजी बाहर बैठे हैं, माँ कमरे में हैं, दोनों चुपचाप हैं. वृद्धावस्था में कैसी शांति छा जाती है, सारी दौड़-धूप समाप्त हो जाती है, जीवन ठहर जाता है. उसका जीवन भी अपेक्षाकृत शांत हो गया है. ध्यान के बाद की शांति तो अनुपम है ही !

आत्मभाव में स्थित रहना, जितना सहज साधना करते समय होता है, उतना ही सहज मनोभाव में रहना, साधना न करने पर होता है. मन में उठती किसी वृत्ति के साथ जब वे एकाकार हो जाते हैं, साक्षी भाव में नहीं रह पाते. इसी को संसार कहते हैं. व्यर्थ ही ऊर्जा का व्यय होता है और आत्मा के पद से गिरकर वे नीचे फेंक दिए जाते हैं. असजग होकर जीने का, अहंकार में जीने का और द्वेष भाव में जीने का यही परिणाम होता है, आसक्ति का यही परिणाम है ! साधना आजीवन चलती रहने वाली प्रक्रिया है. कितने ही अनुभव हो जाएँ, निश्चिन्त नहीं हुआ जा सकता, मन के स्तर पर आना ही होता है. पुराने संस्कारों को यदि आलम्बन मिल जाये तो वे पुनः अपना सर उठा लेते हैं. भीतर अभिमान भी सूक्ष्म रूप से विद्यमान है ही. देहाभिमान भी है क्योंकि देह यदि सुंदर है तो मन भी प्रसन्न होता है और मन शांत हो तो देह पर उसकी झलक भी दिखाई पड़ जाती है. पिछले दिनों मन में जो उहापोह चल रही थी, उसका असर शरीर पर स्पष्ट दीख रहा है. सद्गुरू से इस बारे में कुछ पूछने जायें तो कहेंगे, जितना हो सके सहज रहो. वही तो नहीं होता, एकांत में जो सहजता स्वाभाविक रहती है, वही लोगों के सामने कुछ खो जाती है. जो भी है जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार लेने से सहजता को बचाया जा सकता है ! साक्षी भाव में रहकर अनुकूल व परिस्थितियों को देखते रहना ही उनके वश में है.

आज भी मौसम खुशगवार है, धूप खिली है. कल वे नन्हे के एक मित्र के भाई की शादी के रिसेप्शन में गये. नन्हे का फोन आया था, वह मोटरबाइक से कोजीकोट जाना चाहता है. उसे रोमांच पसंद है. शिवरात्रि आने वाली है. उसने पढ़ा, इस ब्रह्मांड का आकार एक उलटे अंड जैसा है, जिसका तला खुला है. लेकिन वह अनंत है. ब्रहमा व विष्णु भी जिसका पार नहीं पा सके. समपर्ण ही एक मात्र उपाय है जिससे कोई उनको जान सकता है, क्योंकि कुछ नहीं होते ही कोई सब कुछ हो जाता है ! खालीपन तो आकाश के खालीपन सा ही है और खालीपन मायापति है, सबकुछ शून्य से आया है और शून्य में ही समा जायेगा !